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लोगों की आय में वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है हरियाली प्रसार योजना : वन मंत्री अकबर

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा संचालित ‘‘हरियाली प्रसार’’ योजना के अंतर्गत तीन वर्षों वर्षा ऋतु 2019, 2020 तथा 2021 में 83 लाख 31 हजार पौधों का रोपण किया गया है। इससे 07 हजार 400 हेक्टेयर रकबा हरियाली से आच्छादित हुआ है। इसमें हितग्राहियों तथा कृषकों की ओर से पौधों की बढ़ती मांग को देखते हुए वृद्धि कर वर्ष 2022-23 में इस योजना के अंतर्गत वनेत्तर क्षेत्रों में कृषकों की भूमि पर रोपण के लिए बजट में 17 करोड़ 58 लाख रूपए की राशि का प्रावधान किया गया है।



वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि ‘‘हरियाली प्रसार’’ योजना पर्यावरण सुधार सहित पड़त भूमि के विकास तथा लोगों की आय में वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। हरियाली प्रसार योजना में कृषकों की स्वयं की भूमि पर कृषि वानिकी को प्रोत्साहित करने और हरियाली को बढ़ाए जाने के लिए विभाग द्वारा प्रति हितग्राही 50 से 5 हजार तक न केवल पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं, बल्कि उसके देखरेख के लिए अनुदान के रूप में आंशिक राशि भी उपलबध कराई जाती है। इससे कृषकों को लगभग 30 हजार रूपए प्रति एकड़ प्रति वर्ष का लाभ अर्जित हो सकेगा।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख संजय शुक्ला ने बताया कि हरियाली प्रसार योजना के अंतर्गत वर्ष 2021-22 में 30 लाख 95 हजार पौधों का रोपण किया गया है। इससे 13 हजार 651 हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। इनमें वन वृत्त रायपुर अंतर्गत 1500 हितग्राहियों द्वारा 25 हजार 730 पौधों तथा कांकेर अंतर्गत 3 हजार 089 हितग्राहियों द्वारा 6 लाख 30 हजार पौधों का रोपण किया गया है। इसी तरह वन वृत्त सरगुजा अंतर्गत 419 हितग्राहियों द्वारा 99 हजार 250, जगदलपुर अंतर्गत 2 हजार 391 हितग्राहियों द्वारा 3 लाख 80 हजार, दुर्ग अंतर्गत 3 हजार 632 हितग्राहियों द्वारा 3 लाख 59 हजार पौधों तथा बिलासपुर अंतर्गत 2 हजार 620 हितग्राहियों द्वारा 16 लाख पौधों का रोपण किया गया है। इनका रोपण 2 हजार 800 हेक्टेयर रकबा में हुआ है।

हरियाली प्रसार योजना के तहत वर्ष 2019-20 में एक हजार 600 हेक्टेयर रकबा में 18 लाख 56 हजार तथा वर्ष 2020-21 में 3 हजार हेक्टेयर रकबा में 33 लाख 80 हजार पौधों का रोपण हुआ है। इनमें वर्ष 2019-20 में 10 हजार 497 तथा वर्ष 2020-21 में 20 हजार 16 हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। योजना के अंतर्गत सागौन, बांस, खम्हार, आंवला, शीशम, चंदन, मीलिया डुबिया, क्लोनल नीलगिरी, टिशू कल्चर बांस, टिशू कल्चर सागौन, आम, कटहल, मुनगा, सीताफल एवं अन्य प्रजातियों के पौधों का रोपण शामिल हैं।

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दीवार ढहने ने 3 मासूमों की मौत...

 कोरबा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पाली थाना क्षेत्र के ग्राम राहा में सोमवार शाम घर के बाहर खेल रहे तीन मासूम भाईयों पर अचानक घर दीवार ढह गया। जिससे तीनों मलबे में दब गए। जब तक तीनों को बाहर निकाले उसकी मौत हो चुकी थी। घटना के बाद गांव में मातम पसर गया है।

ग्राम राहा में बसंत यादव का परिवार निवास करता हैं। बताया जा रहा हैं कि बसंत यादव के तीन बेटे जिसमें 4 साल का रूबेश, 6 साल का रितेश और 8 साल का रूपेश शाम के वक्त अधूरे दीवार के पास खेल रहे थे। एकाएक दीवार भरभराकर ढह गई, इस घटना में तीनों बच्चें दीवार के मलबे के नीचे दब गये।

इधर घटना की जानकारी होते ही घरवालों के बीच चीख पुकार मच गई। मदद के लिए आसपास के लोगों को बुलाया गया। आनन फानन में मलबा हटाकर तीनों बच्चों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक तीनों बच्चों की मौत हो चुकी थी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गयी। इस घटना के बाद गांव में शोक व्याप्त है। वहीं पुलिस तीनों बच्चों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

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नए स्वरूप में खिला बारनवापारा अभ्यारण्य

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। छत्तीसगढ़ का सबसे उत्कृष्ट तथा आकर्षक अभ्यारण्य बारनवापारा का नया स्वरूप में कायाकल्प हुआ है। यह कायाकल्प वन्यप्राणी रहवास उन्नयन कार्य के अंतर्गत वन मंत्री मोहम्मद अकबर की अनुशंसा पर कैम्पा (छत्तीसगढ़ प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण) के वार्षिक कार्ययोजना 2021-22 में स्वीकृत राशि से किया गया है। इसके तहत 5 हजार 920 हेक्टेयर रकबा में सघन लेन्टाना उन्मूलन तथा यूपोटोरियम उन्मूलन का कार्य हुआ है। जिसमें से बारनवापारा अभ्यारण्य के 19 कक्षों में कुल 950 हेक्टेयर रकबा में लेन्टाना उन्मूलन का कार्य और 32 कक्षों में कुल 4 हजार 970 हेक्टेयर रकबा में यूपोटोरियम उन्मूलन का कार्य शामिल है।

राजधानी रायपुर से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर बलौदाबाजार वनमंडल अंतर्गत स्थित बारनवापारा अभ्यारण्य में हुए वन्यप्राणी रहवास उन्नयन कार्य से वहां मृदा में नमी होने के कारण घास प्रजाति शीघ्रता से बढ़ने लगी हैं। साथ ही इससे अभ्यारण्य में वन्यप्राणियों को अब घास चरने के लिए अच्छी सुविधा उपलब्ध हो गई है। जिससे वे लेन्टाना तथा यूपोटोरियम के उन्मूलन कार्य के बाद स्वच्छंद विचरण भी करने लगे हैं। इससे पर्यटकों को वन्यप्राणियों की सहजता से दृष्टता हुई है और वन्यप्राणी भी स्वस्थ व तन्दुरूस्त दिखाई देने लगे हैं। अभ्यारण्य में वन्यप्राणी रहवास उन्मूलन कार्य के उपरांत घास पुनुरोत्पादन में स्पष्ट अंतर देखा जा सकता है।

बारनवापारा अभ्यारण्य का कुल क्षेत्रफल 244.86 वर्ग किमी है जिसमें मुख्यतः मिश्रित वन, साल वन व पूर्व के सागौन वृक्षारोपण है। बारनवापारा में मुख्य रूप से कर्रा, भिर्रा, सेन्हा, मिश्रित वनों में पाये जाते हैं। सागौन वृक्षारोपण क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से उगे सागौन है तथा साल वन क्षेत्र कम रकबे में है। उक्त छत्रक प्रजाति के अतिरिक्त शाकिय प्रजाति जैसे यूपोटोरियम, लेन्टाना, चरोठा आदि प्रमुख खरपतवार हैं, जिनके कारण बारनवापारा अभ्यारण्य क्षेत्र में पाये जाने वाले शाकाहारी वन्यप्राणियों को घास आदि नहीं मिलती, वन्यप्राणियों को आवागमन में भी दिक्कत होती है तथा मॉसभक्षी प्राणियों से भी बचाव कठिन हो जाता है। 

इसे दृष्टिगत रखते हुए अभ्यारण्य में वन्यप्राणी रहवास उन्नयन कार्य के तहत सघन लेन्टाना एवं यूपोटोरियम के उन्मूलन का कार्य किया गया है, जिससे बारनवापारा अभ्यारण्य में अब वन्यप्राणियों को वर्षभर हरी खाद्य घास उनके भोजन व चारा के रूप में उपलब्ध हो सके। गौरतलब है कि बारनवापारा अभ्यारण्य में तेन्दुए, गौर, भालू, साम्भर, चीतल, नीलगाय, कोटरी, चौसिंघा, जंगली सुअर, जंगली कुत्ता, धारीदार लकड़बग्घा, लोमड़ी, भेड़िया एवं मूषक मृग जैसे वन्यप्राणी बहुतायत में मिलता है एवं आसानी से दिखते भी है।

 

 

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महंगाई की मार से रावण परेशान

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। जनजागरूकता देशभर में विजयदशमी के दिन रावण, कुभकर्ण और मेघनाथ के पुतले जलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस बार भी राजधानी में 5 अक्टूबर को विजयदशमी का महोत्सव मनाया जाएगा। इसमें रायपुर के बी टी आई मैदान, रावणभाठा भाठागांव मैदान, डब्लू आर एस कालोनी, बीरगांव, अमलीडीह, राजेन्द्र नगर सहित 100 से अधिक स्थानोें में पुतला दहन की तैयारी की गई।

वहीं रायपुर के बांसटाल व आसपास के इलाके बढईपारा, स्टेशन रोड में पुतले बनाने के काम में कारीगर जुटे हुए है, लेकिन वे पुतला बनाने के काम में आनेवाली  सामाग्री की उंची कीमतों से परेशान है। इसीलिए इन पुतलों के दाम में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी है और 32 फीट के रावण के पुतले को बिक्री के लिए कीमत 28 हजार रुपए रखी है। वही मेघनाथ और कुभकर्ण के पुतलों की कीमत 22 हजार रूप्ए तय की है। जबकि सबसे कम उंचाई वाले 5 फीट के पुतले की कीमत 5 हजार और 10 फीट के रावण की कीमत 7 हजार तय की है।

बता दे कि रायपुर का बांसटाल बरसों से रावण के पुतलों के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहां 100 वर्ष पहले बंसोड़ जाति के लोंगों ने बांस से पुतले बनाने का काम शुरू किया था। इसमें बांसटाल में रहने वाले ओमप्रकाश मरकाम के दादा रामप्रकाश मरकाम ने परंपरा शुरू की। इसीलिए उनका नाम रावण वाला बाबा पड़ गया। अब उनके वंश के लोग पंरपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। पिछले 10साल से रावण का पुतला बनाने वाले ओमप्रकाश मरकाम बताते है कि इस बार 5 नग पुतले रावण के तैयार किए है जिसमें 20 फीट के रावण के पुतले की कीमत 10 हजार और 25 फीट के पुतले की कीमत 12हजार है। उनका कहना था कि ग्राहक की मांग पर कीमत कम ज्यादा करते हेै। इसमें कीमत में 500 और 1000 का अंतर आ पाता है। उन्होने बताया कि 10 साल पहले यही पुतले 1000 से 3000 रूप्ए में बिक्री करते थे इस बार अधिक कीमत पर कारीगर का कहना था कि इसमें लगने वाली सामाग्री बांस, कागज कलर कपड़ा पैरा रंगीन पेपर इत्यादि सभी की कीमत में काफी बढ़ोतरी हुई है। उनका कहना था कि पुतले के लिए प्रमुख बंास पहले 70 रूप्ए नग और अब 270 रूपए नग मिल रहा है। वही लगने वाला पेंट पहले 100 से 120 रूप्ए डिब्बा और अब 360 रूप्ए डिब्बा में मिल रहा है इसीतरह से सभी वस्तुए मंहगी हुई है । इस कारण दाम बढ़ाने पड़ रहे है।

कारीगर विक्रम नेताम ने जनजागरूकता को बताया कि उन्होने 32 फीट के रावण का पुतला तैयार किया है जिसकी कीमत 28हजार रूप्ए,और मेघनाथ व कुभकर्ण 22 हजार रूप्ए तय की है उनका कहना था कि एक पुतले को तैयार करने में 10 से 15 दिन और 5 से 6 कारीगर लगते है। जिन्हे मेहनत के अनुसार पेंमेट करते है क्योंकि बांस का ढंाचा तैयार करना महत्वपूर्ण नहीं है उसमें कपड़े सिलने और पेंट से सजावट के लिए कारीगर लगते है आमतोैर पर कपड़ा सिलने का काम महिलाएं व लड़कियां करती है। वे बताते है कि यह सीजन का काम है, मुख्य काम बांस से बने उत्पाद टोकरी व अन्य तैयार करना है जिस पर परिवार की आजीविका निर्भर करती है। उनके अनुसार एक सीजन 1 लाख रूप्ए तक व्यापार हो जाता है कीमत पर इस कारीगर ने भी माना कि तारपीन तेल, थिनर,पेंट बांस कपड़ा पेपर, रंगीन पेपर के महंगे होने के कारण कीमत अधिक है इससे पहले कोरोना के 2 साल काफी कम पुतले बनाए थे, क्योंकि ग्राहकी नहीं थी इस बार उम्मीद है ।इसीलिए 6 से 7 नग पुतले तैयार किए है, जिसमें 3 तो आर्डर पर बनाए है शाम तक सभी पुतले की बिक्री हो जाएगी।

राजनीतिक काम आया पुतला

कारीगर अमन बताते है कि शहर में सालभर धरना प्रदर्षन चलते रहते है इसलिए राजनेताओं के पुतले बनते रहते है जो 300 में बनाकर देते है और सभी राजनेताओं के बनाकर देते है। इससे उनका रोजगार बने रहता है। इसके अलावा ताजिया मंदिर के गुमंद 5फीट तक के 1000 रूप्ए में बनाकर देते हेै विजयदशमी में इस बार 25फीट रावण 12हजार, 9फीट का 9हजार,और 10फीट का रावण 10 हजार रूप्ए में तैयार किया है।

उम्मीद इस वर्ष 100 से अधिक पुतले जलेंगे

पिछले साल कोरोना की वजह से पुतले कम संख्या में जलाए गए थे इस बार कोरोना गाइड लाइन में छुट मिलने के कारण ज्यादा संख्या में पुतले जलाएं जाएंगे ऐसे में अच्छी ब्रिकी की उम्मीद है और 100 पुतले जलाएं जा सकते है। कारीगर वरूण मरकाम बताते है कि मुख्य व्यवसाय चिकनकाड़ी का है लेकिन सीजन में पुतले बनाते हेै।

राशन कार्ड में नहीं मिल बांस

महिला कारीगर खेमीन मरकाम बताती है कि वन विभाग से साल में राशनकार्ड में 1500 बांस दिए जाते थे और हर माह 100 बांस। जो बंद कर दिया गया है 700 से 800 रूप्ए में मिल जाता था लेकिन ठेकेदारी के कारण बांस देना बंद कर दिया अब बांस ठेकेदार से खरीदी करने पड़ते है। जो 350 रूप्ए नग की दर से देते है 6 से 7 हजार रूप्ए में पड़ते है उनका कहना है कि सरकार कार्ड नहीं दे सकती रदद कर दे पेंशन दे उन्होनें बताया कि  हर साल कार्ड के नवीनीकरण के लिए 100 रूप्ए लिए जाते है जबकि सरकार ने 20 दर तय किया है।

 

 

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समर्थन मूल्य पर कोदो, कुटकी, रागी खरीदी का व्यापक प्रचार-प्रसार करें

 धमतरी (छत्तीसगढ़ दर्पण)। राज्य शासन की मंशा के अनुरूप ज़िले के 27 लघु वनोपज सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य में किसानों से कोदो कुटकी और रागी की खरीदी पिछले साल के खरीफ से शुरू की गई है। कलेक्टर  पी.एस.एल्मा ने इसके मद्देनजर ज्यादा से ज्यादा किसानों को लाभान्वित करने के लिए मैदानी स्तर पर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश वन और कृषि विभाग के अमले को दिए हैं। सुबह 11 बजे से आहूत समय सीमा की बैठक में कलेक्टर ने जोर दिया कि राज्य शासन की मंशा के अनुरूप कोदो, कुटकी, रागी लगाने वाले ज़िले के सभी किसान इस योजना का लाभ उठाएं, इसके लिए जरूरी है कि उनको कोदो, कुटकी, रागी खरीदी की तिथि और समितियों की जानकारी रहे।

आज की बैठक में कलेक्टर ने गोधन न्याय योजना योजना के तहत नियमित रूप से गोबर खरीदी हर गौठानों में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही हर ब्लॉक में चिन्हांकित दो-दो गौठानों में स्थापित किए जाने वाले ग्रामीण औद्योगिक पार्क की प्रगति की समीक्षा करते हुए उसमें गति लाने के निर्देश दिए। कृष्ण कुंज योजना के तहत कुरूद शहर में विकसित किए जाने वाले कृष्ण कुंज की समीक्षा कलेक्टर ने की। उन्होंने इसके लिए मुख्य नगरपालिका अधिकारी कुरूद को सख्त निर्देश दिए कि चिन्हांकित स्थल से मलबा कल तक हर हाल में हटा लिया जाए, जिससे वन विभाग वहां आवश्यक तैयारी कर जल्द से जल्द पौध रोपण कर सके।

 
 
 

जिले के हाट-बाजार में लगाए जाने वाले मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने सुनिश्चित करने कहा कि आगे बनाए जाने वाले रूट चार्ट में इस बात का ध्यान रखा जाए, कि क्लिनिक लगाने के वक्त ऐसे हाट-बाजार ना छूटे, जहां आस-पास स्वास्थ्य केंद्र ना हो। चाहे तो यहां चिरायु टीम को भी भेजकर स्वास्थ्य जांच की जा सकती है। अतः उक्त तिथि में उस गांव के आस-पास के स्कूल, आंगनबाड़ी में चिरायु टीम जाए और साथ ही वहां के हाट-बाजार में भी स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लिनिक योजना के तहत अप्रैल 2022 से सितम्बर तक 17 हजार 295 मरीजों को लाभान्वित किया गया और 345 मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थाओं में रिफर किय गया है। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती प्रियंका महोबिया, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक सहित ज़िला स्तरीय अधिकारी और स्वान के वीसी से ब्लॉक स्तरीय अधिकारी जुड़े रहे।

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राज्यपाल ने विजयादशमी की दी शुभकामनाएं

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने विजयादशमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने प्रदेश के सुख और समृद्धि की कामना करते हुए कहा है कि यह पर्व बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। भगवान श्रीराम के जीवन का प्रत्येक क्षण हमें एक आदर्श जीवन जीने की सीख देता है। यह उत्सव हमें याद दिलाता है कि जो लोग सत्य, सदाचार और अच्छाई के रास्ते पर चलते हैं तो उनकी सदैव जीत होती है।

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प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में रायगढ़ का नाम भी हुआ शामिल

  रायगढ़ (छत्तीसगढ़ दर्पण)।प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में रायगढ़  नाम भी शामिल हो गया है। रेल्वे आने वाले समय मे छत्तीसगढ़ को दो वन्देभारत ट्रेन देगा। इसके लिए बिलासपुर और छत्तीसगढ़ से लगे गोंदिया में कोचिंग डिपो का काम शुरू हो गया है। सब से पहली ट्रेन बिलासपुर से संपर्क क्रांति रूट से दिल्ली जाएगी और दूसरी गोंदिया से चलकर रायपुर-बिलासपुर रायगढ़ होते हुये झारसुगुड़ा (ओडिशा) जायेगी। इसमें यात्रा करने का ये फायदा होगा कि जहाँ बिलासपुर से दिल्ली के लिये 18 घंटे लगते थे अब वंदेभारत से यह सफर 14 घंटे में पूरा होगा इसी तरह गोंदिया से चलने वाली वंदेभारत में रायपुर से सिर्फ 4 घंटे में झारसुगुड़ा पहुंच जायेगें, अभी इसमें साढ़े 6 घंटे लग रहे हैं। अब लगभग साफ हो गया है कि छत्तीसगढ़ को दो वंदेभारत ट्रेनें मिलने की स्थिति बन गई है। क्योंकि गोंदिया और बिलासपुर में केवल वंदेभारत ट्रेन के लिए 50-50 करोड़ रु. से कोचिंग डिपो बनाने का काम शुरू हो चुका है।

वन्देभारत की स्पीड करीब 130 किमी है, रेलवे की सीआरएस टीम ने दुर्ग से झारसुगड़ा के बीच ट्रेन को 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाकर परीक्षण कर लिया है। सूत्रों के अनुसार यह ट्रायल भले ही वंदेभारत ट्रेन के लिए नहीं था, लेकिन यह साफ हो गया कि इस ट्रैक में हाई स्पीड ट्रेन आसानी से चल सकती हैं। संभावना है कि यह ट्रेन मई जून के आसपास शुरु हो जायेगी। कोचिंग डिपो अगले साल मई-जून तक बन कर तैयार हो जायेगा। उसके तुरंत बाद ट्रेन शुरू की जाएगी। वंदेभारत के लिये  कोचिंग डिपो पूरी तरह अलग रहेगा। इसमें इसके अलावा कोई दूसरी ट्रेन नहीं रखी जाएगी। बिलासपुर और गोंदिया कोचिंग डिपो में ट्रेन की सफाई और जरूरी मरम्मत के बाद ट्रेन स्टेशन पहुंचेगी। रेलवे अफसरों ने बताया कि वंदेभारत की खासियत है कि आने वाले कुछ समय में इसकी स्पीड बढ़ाकर 160 से 180 किमी प्रतिघंटा की जा सकती है। वंदेभारत ट्रेन के कोच भी अपग्रेड किए गए हैं। इसका सीटिंग अरेंजमेंट थोड़ा अलग है, इसलिए पूरे कोच में तकनीकी सुधार हुए हैं।

 


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गोधन न्याय योजना से खुला समृद्धि का द्वार

 उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। गोधन न्याय योजना जिले के सभी पशुपालक किसानों, भूमिहीन मजदूर, महिला स्व-सहायता समूहों के लिए वरदान साबित हो रही है। पशुपालक, किसान गोबर बेचकर आर्थिक आमदनी प्राप्त कर रहें है, वही महिला स्व-सहायता समूहों को गोबर से वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण कर, उसके विक्रय से लाभ प्राप्त हो रहा है। महिला समहों को गौठानों की अन्य आर्थिक गतिविधियों से भी उन्हें आमदनी हो रहा है।

            कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में गोबर बेचने के लिए  16 हजार 10 किसानों ने पंजीयन करवाया है, जिसमें से 10 हजार 538 किसानों ने4 करोड़ 16 लाख रूपये गोबर बेचकर आय अर्जित की है। जिला प्रशासन द्वारा गौठानों में गोबर बेचने के लिए लगातार हितग्राहियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे गोबर बेचने वाले हितग्राहियों की संख्या एवं गोबर की मात्रा में वृद्धि हो रही है। पिछले 13 पखवाड़ें में क्रमशः गोबर खरीदी की राशि 1 मार्च से 15 मार्च तक 4 लाख 40 हजार 623 रूपये, 16 मार्च से 29 मार्च तक 3 लाख 90 हजार रूपये, 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक 4 लाख 41 हजार 332 रूपये, 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक 4 लाख 49 हजार 505 रूपये, 1 मई से 15 मई तक 5 लाख 41 हजार 372 रूपये, 16 मई से 31 मई तक 5 लाख 88 हजार 10 रूपये, 1 जून से 15 जून तक 4 लाख 29 हजार 653 रूपये, 16 जून से 30 जून तक 3 लाख 73 हजार 32 रूपये, 1 जुलाई से 15 जुलाई तक 6 लाख 36 हजार 655 रूपये, 16 जुलाई से 31 जुलाई तक 6 लाख 34ह जार 444 रूपये, 1 अगस्त से 15 अगस्त तक 6 लाख 58 हजार 912रूपये, 16 अगस्त से 31 अगस्त तक 6 लाख 92 हजार 755 रूपये, 01 सितम्बर से 15 सितम्बर तक 17 लाख 37 हजार 579 रूपये तथा इस पखवाड़ें में जिला प्रशासन द्वारा विशेष अभियान चलाकर गौ-पालकों का पंजीयन एवं गोबर बेचने हेतु हितग्राहियों को प्रोत्साहित करने से गोबर क्रय की राशि बढ़कर 22 लाख 74 हजार 437 रूपये हो गया है अर्थात किसानों द्वारा 22 लाख 74 हजार रूपये के गोबर का विक्रय गौठानों में किया गया है।

                 जिले में ग्रामीण क्षेत्र के 377 गौठानों तथा शहरी क्षेत्र के 12 गौठानों और आवर्ती क्षेत्र के 27 गौठानों में प्रतिदिन गोबर की खरीदी गौठान समितियों द्वारा गौठानों में की जा रही है। कलेक्टर डॉ. प्रियंका शुक्ला एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमीत अग्रवाल द्वारा गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन में प्रगति की प्रतिदिन समीक्षा एवं योजना के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन के लिए मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

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मुख्यमंत्री ने दी दशहरा की शुभकामनाएं

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को दशहरा पर्व की बधाई और शुभकामनाएं दी है। मुख्यमंत्री बघेल ने अपने बधाई संदेश में कहा है कि दशहरा पर्व हमें सत्य के मार्ग पर चलने का साहस देता है, हमें विश्वास दिलाता है कि सत्य के मार्ग में कितनी भी परेशानियां और कठिनाईयां क्यों न हो, विजय सदा सत्य की होती है। विजयादशमी का यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अन्याय पर न्याय की जीत का प्रतीक है।

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मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती की जयंती पर उन्हें नमन किया

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रानी दुर्गावती की जयंती पर उन्हें नमन किया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि गोंडवाना साम्राज्य की रानी दुर्गावती साहस और वीरता की प्रतीक हैं। वह भारतीय नारी की दृढ़ इच्छाशक्ति  और शौर्य को रेखांकित करती हैं। उन्होंने पति की मृत्यु के बाद धैर्य और कुशलता के साथ अपने साम्राज्य को सम्हाला और सम्पन्न बनाया। मातृभूमि की रक्षा के लिए उन्होंने अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिये। उनके शौर्य और बलिदान ने उन्हें अमर और चिरस्मरणीय बना दिया है।

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आरक्षण मामले में रमन सरकार ने जानबूझ कर लापरवाही बरती : मोहन मरकाम

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कोण्डागांव में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुये कहा कि पूर्ववर्ती रमन सरकार के लापरवाही के कारण हाईकोर्ट में आरक्षण रद्द हुआ। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के 58 प्रतिशत आरक्षण को बिलासपुर उच्च न्यायालय द्वारा रद्द किये जाने का फैसला आया।

भाजपा की लापरवाही के कारण आरक्षण के खिलाफ फैसला आया। रमन सरकार ने अपने दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन नहीं किया था। कांग्रेस सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर किया है। हम आदिवासी समाज की लड़ाई लड़ेंगे।

उनकी सरकार की लापरवाही, अकर्मण्यता और गैर जिम्मेदाराना रवैये का नतीजा यह फैसला है। रमन सरकार ने 2011 में आरक्षण को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। 2012 में हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी थी।

सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों जिसमें इंदिरा साहनी का फैसला प्रमुख के अनुसार कोई भी राज्य सरकार यदि 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण करती है तो अत्यंत विशेष परिस्थितियों,  विचार एवं तथ्यों के साथ कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा। इसका भी ख्याल नहीं किया गया।

छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को बढ़ाने के तमाम तर्कसंगत कारण और विशेष परिस्थितियां है लेकिन भारतीय जनता पार्टी और रमन सरकार की नीयत में खोट थी। उन्होंने अदालत में राज्य की 95 प्रतिशत आबादी के हक में तर्क नहीं दिया और जनता को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

जब आरक्षण को बढ़ाने का निर्णय हुआ उसी समय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य सरकार को अदालत के सामने आरक्षण को 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की विशेष परिस्थितियों और कारण को बताना था।
 
तत्कालीन रमन सरकार अपने इस दायित्व का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर पायी। 2012 में बिलासपुर उच्च न्यायालय में 58 प्रतिशत आरक्षण के खिलाफ याचिका दायर हुई तब भी रमन सरकार ने सही ढंग से उन विशेष कारणों को प्रस्तुत नहीं किया जिसके कारण राज्य में आरक्षण को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत किया गया।
 
रमन सरकार ने आरक्षण में संशोधन के पहले सुप्रीम कोर्ट के पूर्ववर्ती फैसले को ध्यान में नहीं रखा। बाद में दोबारा संशोधित जवाब पेश करते हुए कुछ डेटा प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया, लेकिन वो भी प्रर्याप्त नहीं थे।

आरक्षण को बढ़ाने के लिये तत्कालीन सरकार ने तत्कालीन गृहमंत्री ननकी राम कंवर की अध्यक्षता में 2010 में मंत्रिमंडलीय समिति का भी गठन किया था। रमन सरकार ने उसकी अनुशंसा को भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जिसका परिणाम है कि अदालत ने 58 प्रतिशत आरक्षण के फैसले को रद्द कर दिया।

कांग्रेस की सरकार बनने के बाद अंतिम बहस में तर्क प्रस्तुत किया गया मंत्रिमंडलीय समिति के बारे में जानकारी दी गयी लेकिन पुराने हलफनामे उल्लेख नहीं होने के कारण अदालत ने स्वीकार नहीं किया।

इस प्रकरण में जब राज्य सरकार की अंतिम बहस हुई तो खुद महाधिवक्ता मौजूद रहे थे। उन्होंने मंत्रीमंडलीय समिति की हजारों पन्नों की रिपोर्ट को कोर्ट में प्रस्तुत किया था। लेकिन कोर्ट ने ये कहते हुए उसे खारिज कर दिया कि राज्य शासन ने कभी भी उक्त दस्तावेजों को शपथ पत्र का हिस्सा ही नहीं बनाया। लिहाजा, कोर्ट ने उसे सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया।

यदि किसी वर्ग के आरक्षण में कटौती किये बिना ईमानदारी से दूसरे वर्ग के आरक्षण को बढ़ाया जाता तो यह स्थिति निर्मित नहीं होती, जब सभी वर्ग संतुष्ट होता तो कोई कोर्ट में चुनौती नहीं होती। यदि आरक्षण बढ़ाया था तो उसके विशेष कारणों को बताने की जवाबदेही भी सरकार को थी। रमन सरकार ने नहीं बताया।

आरक्षण रद्द किये जाने का विपरीत प्रभाव अब तक हुये एडमिशन में न पड़े और भर्तियां हुई है इस पर न पड़े। इसके लिये अदालत से विशेष निवेदन किया गया। अदालत ने इसको माना भी इस फैसले का अभी तक की भर्तियों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

हमारा मानना है कि राज्य के सभी वंचित वर्ग को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण दिया जाये, एससी के आरक्षण में कटौती न, एसटी को पूरा आरक्षण मिले, ओबीसी को पूरा मिले रमन सरकार ने यही सावधानी नहीं बरता था।
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बीमार मामा को रिक्शा में अस्पताल ले जा रहा था मासूम भांजा, नजारा देख लोग हो गए भावुक...

 रायगढ़ (छत्तीसगढ़ दर्पण)। बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर से एक ऐसा नजारा सामने आया है कि उसे जिस किसी ने भी देखा वह भावुक हो गया। दरअसल शनिवार को एक किशोर अपने बीमार मामा को गंभीर हालत में माल ढोने वाले रिक्शा में लिटाकर अस्पताल ले जा रहा था। मामा का शरीर शॉल से ढका था और पैर रिक्शे से बाहर की ओर लटके हुए थे। यह नजारा वाकई में भावुक करने वाला था। पुलिस चौकी के सामने से गुजरते समय पुलिसकर्मियों की नजर पड़ी तो उन्होंने मासूम भांजे की मदद करते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कराया। यहां जांच पश्चात डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने पीएम के बाद बताया कि शरीर में खून की कमी के अलावा अन्न का एक दाना भी पेट में नहीं था। बीमार मामा को रिक्शा में ढोने वाली इस घटना पर लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं।

वाड्रफनगर के वार्ड क्रमांक 2 निवासी अशोक पासवान पिता दुखी पासवान 40 वर्ष की शादी नहीं हुई थी। वह मजदूरी कर जीवन-यापन कर रहा था। तीन-चार दिनों से उसकी तबीयत खराब थी, ऐसे में मां व बहन द्वारा उसका इलाज कराया जा रहा था। शनिवार की शाम उसका शरीर अचानक से ठंडा पडऩे लगा, यह देख घरवाले घबरा गए और उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी करने लगे। कोई साधन व वाहन नहीं मिलने पर उसका नाबालिग भांजा उसे माल ढोने वाले रिक्शे में लेकर उसे अस्पताल ले लिए निकल पड़ा। बीमार मामा को उसने रिक्शे पर लिटाकर ऊपर से शॉल से ढक दिया था।

रास्ते में आने-जाने वाले लोग यह देखते हुए निकलते गए लेकिन किसी ने मासूम की मदद नहीं की। यह नजारा लोगों को भावुक करने वाला था।

पुलिस ने पहुंचाया अस्पताल
जब मासूम अपने मामा को रिक्शे में ढोकर वाड्रफनगर चौकी के सामने पहुंचा तो चौकी प्रभारी ने उसे रोककर पूछताछ की। जब मासूम ने पूरी बात बताई तो पुलिस ने शरीर को छुकर देखा तो शरीर गर्म था।

फिर पुलिसकर्मियों ने उसकी मदद की और उसे अस्पताल पहुंचाया। यहां डॉक्टरों ने जांच पश्चात उसे मृत घोषित कर दिया। शाम होने की वजह से उसका पीएम नहीं हो सका।

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बिलासपुर को एक और नई विमान सेवा की मिली सौगात:मुख्यमंत्री

*बिलासपुर-इंदौर-बिलासपुर विमान सेवा का भूपेश बघेल, सिंधिया ने किया शुभारंभ*


 बिलासपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर आज मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एयर कनेक्टिविटी से जुड़ गई। न्यायधानी बिलासपुर को बिलासपुर-इंदौर-बिलासपुर नई विमान सेवा के रूप में एक बड़ी सौगात मिली। मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल और केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बिलासपुर-इंदौर-बिलासपुर विमान सेवा का वर्चुअल शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय से और केन्द्रीय मंत्री श्री सिंधिया नई दिल्ली से हरी झण्डी दिखाकर फ्लाईट को बिलासा देवी केंवट हवाई अड्डा चकरभांटा बिलासपुर से इंदौर के लिए रवाना किया।

          मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने बिलासपुर-इंदौर विमान सेवा के शुभारंभ पर बिलासपुर और इंदौर नगरवासियों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार विमान सेवाओं के विस्तार के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही है। उन्होंनेे कहा कि बिलासपुर से अन्य बड़े शहरों जैसे मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलोर के लिये भी विमान सेवा प्रारम्भ की जाये। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द एयरपोर्ट रायपुर से अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवा प्रारम्भ करने और यहां अंतर्राष्ट्रीय कार्गाे हब की स्थापना के लिये भी केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से आग्रह करते हुए कहा कि रायपुर एयरपोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय मानक अनुसार तैयार किया जा चुका है। रायपुर एयरपोर्ट अब अंतर्राष्ट्रीय फ्लाईट के संचालन के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य शासन द्वारा रायपुर एयरपोर्ट हेतु भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को 461 एकड़ भूमि निशुल्क उपलब्ध कराई गई है। जिस पर रनवे विस्तार, नवीन टर्मिनल भवन निर्माण, एटीसी टॉवर निर्माण कर इसे अंतर्राष्ट्रीय मानक अनुसार तैयार किया जा चुका है। एयरपोर्ट विकास हेतु भूमि की लंबित मांग, एयरपोर्ट परिसर के सुरक्षा सबंधी समस्याओं का राज्य शासन द्वारा समाधान कर लिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने केंद्रीय मंत्री श्री सिंधिया से रिजनल कनेक्टिविटी योजनांतर्गत अंबिकापुर से बिलासपुर, रायपुर को जोड़ते हुए निकटवर्ती प्रमुख शहरों वाराणसी, रांची, पटना, भुवनेश्वर जैसे शहरों के लिये विमान सेवा प्रारम्भ करने का आग्रह भी किया। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने बिलासपुर एयरपोर्ट के विस्तार के लिए राज्य शासन द्वारा किए गए प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा बिलासपुर एयरपोर्ट का 3-C VFR श्रेणी में उन्नयन किया गया है। एलायंस एयर कम्पनी द्वारा बिलासपुर से दिल्ली-जबलपुर-बिलासपुर-प्रयागराज वायुमार्ग पर 1 मार्च 2021 को प्रथम नियमित घरेलू विमान सेवा प्रारम्भ की गयी तथा 5 जून  से बिलासपुर से भोपाल के लिये भी नियमित विमान सेवा शुरू की गई।  

श्री बघेल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास एवं इसे क्रियाशील बनाने हेतु अब तक 25 करोड़ 10 लाख रूपए व्यय किए गए हैं। एयरपोर्ट से बढ़ती हुई विमान सेवाओं व यात्रियों की संख्या को देखते हुए वर्तमान टर्मिनल भवन की क्षमता के विस्तार के लिए 1 करोड़ 90 लाख के कार्य की स्वीकृति दी जा रही है। बिलासपुर एयरपोर्ट को 3-CIFR मानक अनुसार तैयार करने एवं यहां नाईट लैण्डिंग की सुविधा के विकास के लिये 22 करोड़ रूपए की लागत के कार्यों की स्वीकृति जारी की जा रही है। एयरपोर्ट से विमानों के सुगम संचालन हेतु पीबीएन नेविगेशन प्रणाली की स्थापना के लिये भारतीय विमानपत्तन को राज्य शासन द्वारा राशि का भुगतान कर दिया गया है। राज्य सरकार द्वारा अम्बिकापुर एयरपोर्ट को 3-C VFR अनुसार विकसित करने के लिये रनवे विकास व विस्तार, सिटी साईड के विकास कार्यों हेतु 48 करोड़ के कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गयी है। एयरपोर्ट विकास संबंधी कार्य तीव्र गति से जारी है, 31 दिसम्बर 2022 तक एयरपोर्ट को विकसित कर इसके लायसेंसिंग हेतु आवेदन करने का लक्ष्य है।      

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री  ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ में विमानन सेवाओं के विस्तार के लिए केंद्र की ओर से हर संभव मदद देने के लिए तत्पर है। उन्होंने इस नई विमान सेवा के प्रारंभ होने पर बिलासपुर और इंदौर नगर वासियों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बिलासपुर एयरपोर्ट में नाइट लैंडिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग उचित है। एयरपोर्ट के रनवे के विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस संबंध में कहा कि राज्य सरकार द्वारा चकरभाटा एयरपोर्ट से लगी हुई 1000 एकड़ भूमि सेना को दी गई थी, लेकिन इसका उपयोग नहीं किए जाने के कारण अब इस भूमि को वापस लेने का प्रयास राज्य सरकार कर रही है। भूमि वापस होने पर चकरभाटा एयरपोर्ट विस्तार के लिए भूमि उपलब्ध करा दी जाएगी। श्री सिंधिया ने कहा कि बिलासपुर और इंदौर दोनों ही शहरों का आर्थिक और धार्मिक रूप से काफी महत्व है। इन दोनों शहरों के एयर कनेक्टिविटी से जुड़ने पर दोनों शहरों के लोगों को एक अच्छी सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित हर राज्य में एयर कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए केंद्र सरकार तत्पर है।

*बिलासपुर-इंदौर-बिलासपुर विमान सेवा सप्ताह में चार दिन -*

बिलासपुर-इंदौर-बिलासपुर विमान सेवा सप्ताह में चार दिन सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और रविवार को पूर्वान्ह 11.35 बजे से बिलासपुर से रवाना होकर दोपहर 1.25 बजे इंदौर पहुंचेगी और इंदौर से दोपहर 1.55 बजे रवाना होकर अपरान्ह 3.45 बजे बिलासपुर वापस लौटेगी। आज बिलासपुर से इंदौर रवाना हुई। पहली फ्लाईट 50 यात्रियों को लेकर रवाना हुई। इस मार्ग पर एलायंस एयर द्वारा 72 सीटर विमान का संचालन किया जा रहा है।  

बिलासपुर एयरपोर्ट पर संसदीय सचिव डॉ. रश्मि सिंह, सांसद बिलासपुर  अरूण साव, विधायक  धरमलाल कौशिक,  शैलेष पाण्डेय, रजनीश सिंह, महापौर  रामशरण यादव, जिला पंचायत बिलासपुर के अध्यक्ष  अरूण सिंह चौहान, पर्यटन मंडल अध्यक्ष  अटल श्रीवास्तव, जिला सहकारी बैंक बिलासपुर के अध्यक्ष  प्रमोद नायक, सचिव योग आयोग  रविन्द्र सिंह, कृषि उपज मंडी बोर्ड के अध्यक्ष राजेन्द्र शुक्ला, अध्यक्ष विजय केशरवानी और विजय पांडे सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

 

 

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गृहमंत्री साहू की टिप्पणी से सरोज पांडेय नाराज, सोनिया गांधी को पत्र लिखकर की सख्त कार्रवाई की मांग...

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भाजपा सांसद सरोज पांडेय ने छत्तीसगढ़ की जर्जर सड़कों के मुद्दे को उठाए जाने के बाद से कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा की गई निजी टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है। खासकर के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू द्वारा की गई निजी टिप्पणियों पर सख्त आपत्ति जताते हुए उन्होंने एआईसीसी कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने मांग की है।


बता दें कि सांसद सरोज पांडेय ने बीते दिनों अकलतरा विधानसभा से कोरबा जाते समय सड़कों की हालत पर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में पोस्ट किया था। इसमें सांसद सरोज पांडेय ने प्रदेश सरकार को घेरते हुए एक न्यूज एंकर की तरह सड़क की हालत को बयां किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि सड़क में गड्ढे हैं, या गड्ढों में सड़क समझ में नहीं आ रहा है।

इस मुद्दे ने तेजी से राजनीतिक तूल पकड़ा लिया। सत्ता के ऊंचे गलियारे तक बात पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सड़कों की दशा के लिए पूर्ववर्ती भाजपा सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को जिम्मेदार ठहराया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरोज पांडेय सीधे पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह पर हमला नहीं कर सकती हैं, इसलिए वे रोड के बहाने सरकार पर निशाना साध रही है।

 

 

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कलेक्टर ने कुंदला, कोहकमेटा और सोनपुर स्वास्थ्य केंद्र का किया निरीक्षण

 नारायणपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कलेक्टर रघुवंशी ने आज धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र कुंदला, कोहकमेटा और सोनपुर के स्वास्थ्य केन्द्रों का सघन निरीक्षण किया और उन्होंने आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानी। कलेक्टर रघुवंशी सर्वप्रथम कुंदला स्वास्थ्य केंद्र पहुँचे, वहां उन्होंने आमजनों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने यहां गंभीर और आकस्मिक चिकित्सा के लिए दिये जा रहे उपचार सेवाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान स्वास्थ्य केन्द्र में ईलाज के लिए भर्ती मरीज से भी बातचीत की, उनका हालचाल जाना और उन्हें दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी ली। कलेक्टर ने कोहकमेटा व सोनपुर के स्वास्थ्य केंद्रों का भी निरीक्षण किया।

 
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9 किलोमीटर चलकर माता काली के दरबार परेवा-पहाड़ पहुँचा भक्तों का जत्था

 खरसिया (छत्तीसगढ़ दर्पण)। नवरात्री की सप्तमी तिथि के पावन अवसर पर ग्राम बड़ेडूमरपाली के नवयुवक दुर्गा पूजा समिति के प्रयास से गांव के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पदयात्रा करते हुए माता काली के दरबार में माथा टेकने पहुंचे।

ग्राम बड़ेडूमरपाली के नवयुवक दुर्गा पूजा समिति के द्वारा गांव के भख्खेश्वरी माता (खोलगोसाईन) के दरबार से पैदल यात्रा कर परेवापहाड़ (मौहापाली) में स्थित माता काली के दरबार में पूजा अर्चना की। दुर्गा पूजा समिति के आह्वान पर गांव के सैकड़ों श्रद्धालु माता के दरबार तक पदयात्रा करने के लिए नंगे पैर निकल पड़े। भगवान भोलेनाथ, विष्णुजी, हनुमानजी की मनमोहक झांकी, डीजे साउंड पर माता रानी का मधुर गीत, हाथों में जयमातादी की ध्वजा, सर पर चुनरी व जयमातादी का पट्टा बांधकर और जयमातादी का जयकारा लगाते हुए बच्चे, जवान व बुजूर्ग महिला पुरूष पदयात्रा पर चल रहे थे। वहीं ग्राम बड़ेडूमरपाली के नवयुवक दुर्गा पूजा समिति की ओर से पदयात्रा के लिए प्रचार प्रसार किया गया था। ऐसे में पदयात्रा में भाग लेने के लिए कांग्रेस की महिला नेत्री नयना गबेल भी अपनी टीम के साथ ग्राम कुनकुनी में सम्मलित होकर काली माता मंदिर तक पदयात्रा के दौरान उपस्थित रही।

 

 

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सफलता की कहानी : मक्के की खेती से आर्थिक रूप से सशक्त हुआ सालिक राम ध्रुव का परिवार

वन अधिकार पट्टे से मिले ढाई एकड़ जमीन में 18 क्विंटल से अधिक हुआ मक्के का उत्पादन

 गरियाबंद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वकां योजनाएं किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। प्रदेश के छोटे किसान भी खेती-बाड़ी से बेहतर आय की प्राप्त कर रहे हैं। शासन की पहल और अपने मेहनत से किसान सफलता की नई-नई कहानी लिख रहे हैं। प्रदेश के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए शासन-प्रशासन की ओर से लगातार प्रयास किया जा रहा है। किसानों को नई फसल लेने के लिए कृषि विभाग की ओर से पहल कर उन्हें नगदी फसल और आधुनिक खेती से जोड़ा जा रहा है।

गरियाबंद विकासखंड अंतर्गत वनांचल में बसे ग्राम जैतपुरी के सालिक राम ध्रुव ने कृषि विभाग के प्रयास और परामर्श से शासन की ओर से मिले वन पट्टा का बेहतर उपयोग करते हुए उसमें मक्के की खेती कर रहे है। हालांकि इससे पूर्व वे धान बोते थे। इस बार उन्होंने ढ़ाई एकड़ के खेत में कृषि विभाग की ओर से मिले नि:शुल्क मक्के का बीज (केएमएच-3426) लगाया था। इस खेती से उसने लगभग 18 क्विंटल मक्के का उत्पादन हुआ है। जिसमें से उन्होंने 8 क्विंटल से ज्यादा खुले बाज़ार में बेचकर अच्छा मुनाफ़ा पाया है। सालिक राम बताते है कि मक्के की क्वालिटी को देखकर आसपास व दूसरे जिले के व्यवसायी भी आकर मक्का खरीदते थे। इससे उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ।

धान के बदले इस नई खेती से मिले आमदनी से उनका परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है। सालिक राम बताते है, कि वे कृषि विभाग के सलाह से धान के बदले मक्के की खेती कर रहे है। इससे अच्छे आय की प्राप्ति हो हो रही है। कुल उत्पादन में से बचे लगभग 10 क्विंटल मक्के को अब वे राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत विक्रय करेंगे। इससे उन्हें इस योजना का लाभांश भी मिलेगा। सालिक राम इस कार्य में अपने बेटे आत्माराम को भी खेती किसानी के गुर सिखा रहे है। अब दोनों साथ मिलकर किसानी कर रहे है। उनके पुत्र आत्माराम ने बताया कि मक्के की उपज अच्छी आई है, जिससे वे अधिक प्रोत्साहित हुए है। आने वाले साल में और अधिक उत्साह व मेहनत से खेती करेंगे। आत्माराम ने कहा कि वे आसपास के किसानों को भी अन्य फसल लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। ताकि उन्हें भी आर्थिक रूप से आमदनी हो सके। सालिक राम ने मक्के की खेती के साथ ही मछली पालन और मशरूम उत्पादन भी कर रहें हैं। जिससे उनको अतिरिक्त आय की प्राप्ति हो रही है। सालिक राम और उसके बेटे आत्माराम ने मक्के की खेती से आर्थिक रूप से संबल बनाने के लिए राज्य सरकार, जिला प्रशासन और कृषि विभाग को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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जिले की समूह की महिलाओं का नवाचार, बना रही आकर्षक और सुंदर आर्टिफिशियल ज्वेलरी

कोरबा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कोरबा जिले की महिलाएं आर्टिफिशियल ज्वेलरी निर्माण के लिए बड़े शहरों और वृहद उद्योगों पर निर्भरता की बात को गलत साबित कर रही है। जिले में बिहान की समूह की महिलाएं  नवाचार का बेहतरीन नमूना पेश करते हुए गांव में ही आर्टिफिशियल ज्वेलरी का निर्माण कर रही है। समूह की महिलाएं ज्वेलरी निर्माण से जुड़कर स्वरोजगार और स्वावलंबन की मिसाल पेश कर रही हैं। 

विकासखंड कोरबा के ग्राम रजगामार की 15 दीदियां आजीविका संवर्धन के लिए आर्टिफिशियल ज्वैलरी निर्माण में लगी हुई हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत सीता महिला ग्राम संगठन कि महिलाएं चूड़ी, कंगन, झुमका आदि के सुंदर और आकर्षक नमूने बनाकर ना सिर्फ नवाचार कर रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत होने का रास्ता अपना रही है। समूह की ओर से किए जा रहे आर्टिफिशियल ज्वेलरी निर्माण से समूह की महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। साथ ही अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत साबित हो रहा है। नूतन कुमार कंवर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने बताया की समूह की महिलाएं बड़ी मेहनत और लगन से आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाने के काम में लगी हुई है। महिलाओं की ओर से बनाए गए ज्वेलरी बहुत ही सुंदर और आकर्षक है। उन्होंने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए स्वसहायता समूह की महिलाओं के आर्टीफिशियल ज्वेलरी को बाजार उपलब्ध कराने के लिए सीमार्ट में रखने के निर्देश एनआरएलएम को दिये है। इसके साथ ही आर्टीफिशियल ज्वेलरी के व्यवसाय विकास के लिए बैंक से सहयोग कराने के निर्देश दिये है। 

सीता महिला ग्राम पंचायत रजगामार की अध्यक्ष कविता वास व रजिया बेगम ने बताया कि उनके ग्राम संगठन की 15 महिलाएं आकर्षक रंग बिरंगी चूडियां, कंगन, माथाटीका, राधा सेेट जो कि (फोम व फ्लावर) से बनाया है, जो कि हल्दी कार्यक्रम में महिलाओं के द्वारा पहना जाता हैं। कान की बाली, झुमका, मोती वाले ब्रेसलेट, अंगूठी चोकरहार (मोतीहार) गले के पेडेंट मोतीवाला, मंगलसूत्र, करधन, बाजूबंध आदि ज्वेलरी उन्होने सामूहिक रूप से तैयार की हैं। यह ज्वेलरी उनके द्वारा मात्र 75 घंटे में तैयार की गई है, जिसकी बाजार मूल्य 20 हजार रूपये से ज्यादा मिलने की आशा है। ग्राम संगठन की महिलाओं ने अपने रोजाना के कार्यों से फुरसत होकर दोपहर में 2 बजे से 5 बजे तक सामुदायिक भवन में ज्वेलरी तैयार की हैं। महिलाओं की ओर से तैयार इस आर्टीफिसियल ज्वेलरी को फैंसी स्टोर रजगामार में बिक्री के लिए रखा गया हैं। उन्होने बताया कि में यह ज्वेलरी बाजार दर से सस्ते मूल्य पर आर्कषक रूप में उपलब्ध है।

उल्लेखनीय है की बिहान की दीदियों को आर्टिफिसियल ज्वेलरी बनाने का 13 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण आरसेटी कोरबा के द्वारा दिया गया है। इस संबंध में अरविंद विश्वास डारेक्टर आरसेटी कोरबा ने बताया कि भारत में 850 करोड़ रूपये का आर्टीफिशियल ज्वेलरी बाजार है। जिसमें से 150 करोड़ रुपए घरेलू उत्पाद का हैं। इस कार्य में घरेलू उत्पाद बढ़ाकर इसमें महिलाओं के लिए काफी संभावनाएं है। त्यौहारी सीजन को देखते हुए यह कार्य समूह की महिलाओं को आजीविका संवर्धन के लिए लाभकारी होगा। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान बैकिंग, मार्केट रिसर्च, कस्टमर बिहेवियर का प्रशिक्षण भी महिलाओं को उनके व्यवसाय विकास के लिए दिया गया है।

 
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