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'बहुत ज्यादा चिंता है, लेकिन...' विश्व बैंक ने श्रीलंका को कर्ज देने से किया इनकार, सारी उम्मीदें खत्म!

 कोलंबो (छत्तीसगढ़ दर्पण)। विश्व बैंक ने श्रीलंका की स्थिति को चिंताजनक मानते हुए भी लोन देने से साफ इनकार कर दिया है। गुरुवार को विश्व बैंक ने अपर्याप्त मैक्रोइकॉनॉमिक पॉलिसी फ्रेमवर्क का हवाला देते हुए कहा कि, मौजूदा आर्थिक संकट के बीच श्रीलंका को कोई नई वित्तीय मदद देने की उसकी कोई योजना नहीं है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान ने कहा कि, वह श्रीलंका के लोगों पर गंभीर संकट के प्रभाव के बारे में 'गहराई से चिंतित' है।

विश्व बैंक ने अपने बयान में क्या कहा? 
विश्व बैंक ने श्रीलंका को लेकर जो बयान जारी किया है, उसमें कहा गया है कि, 2 करोड़ 20 लाख की आबादी वाले द्वीप राष्ट्र को संरचनात्मक सुधारों को अपनाने की आवश्यकता है, जो आर्थिक स्थिरीकरण पर ध्यान केंद्रित करते हैं और इसकी स्थिति के मूल कारणों से निपटते हैं, जिसकी वजह से श्रीलंका के पास विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो गया है और जिसने श्रीलंका में भोजन की गंभीर कमी को उत्पन्न कर दिया है। विश्व बैंक ने माना है कि, श्रीलंका में पेट्रोल और ईंधन की सख्त कमी होने के साथ साथ दवाओं की भी भारी किल्लत हो गई है है। विश्व बैंक ने कहा कि, "विश्व बैंक समूह गंभीर आर्थिक स्थिति और श्रीलंका के लोगों पर इसके प्रभाव के बारे में गहराई से चिंतित है ...लेकिन, जब तक पर्याप्त व्यापक आर्थिक नीति ढांचा नहीं बनता है, विश्व बैंक श्रीलंका को नए वित्तपोषण की पेशकश करने की योजना नहीं बनाएगा''।
 
'जो लोन दिया है, उसी में काम चलाओ'
 
'जो लोन दिया है, उसी में काम चलाओ' 
विश्व बैंक ने कहा है कि, श्रीलंका को जो मौजूदा कर्ज मिला हुआ है, उसी में जरूरी संसाधनों, दवा, रसोई गैस, उर्वरक, बच्चों के लिए दूध पाउडर और कमजोर परिवारों के लिए आर्थिक मदद जैसी व्यवस्था करनी चाहिए और कमियों को दूर करना चाहिए। विश्व बैंक ने ये बी कहा है कि, वह श्रीलंका की सरकार के साथ निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करने के लिए नियंत्रण और प्रत्ययी निरीक्षण स्थापित करने के लिए मिलकर काम कर रहा था। आपको बता दें कि, श्रीलंका में पिछले कई महीनों से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के नेतृत्व वाली सरकार वित्तीय संकट का सामना करने में विफल रही है।

देश में राजनीतिक उठापटक 
देश के नए राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, जो राष्ट्रपति बनने से पहले देश के प्रधान मंत्री थे, उन्होंने 13 जुलाई से देश में आपातकाल लागू किया हुआ है और विरोध प्रदर्शन को उन्होंने सैन्य शक्ति से कुचलने की कोशिश की है। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्ष श्रीलंका से फरार होने के बाद मालदीव के रास्ते सिंगापुर फरार हो चुके हैं। इससे पहले जून में, गोटाबाया राजपक्षे ने कहा था कि, विश्व बैंक 17 मौजूदा परियोजनाओं का पुनर्गठन करेगा और वित्तपोषण ऋण पर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ बातचीत के बाद और सहायता का पालन करेगा।

श्रीलंका ने चीन से फिर मांगी मदद 
वहीं, जो श्रीलंका चीन की वजह से आर्थिक संकट में फंसा हुआ है, उसने एक बार फिर से चीन से ही आर्थिक मदद मांगी है। श्रीलंका के बीजिंग दूतावास में न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में पालिता कोहोना ने कहा कि कोलंबो चाहता है कि, चीन अपनी कंपनियों को अधिक श्रीलंकाई काली चाय, नीलम, मसाले और वस्त्र खरीदने के लिए कहे। इसके साथ ही पालिता कोहोना ने कम्यूनिस्ट सरकार से चीनी आयात नियमों को अधिक पारदर्शी बनाने की भी अपील की है। श्रीलंकाई राजदूत ने कहा कि बीजिंग कोलंबो और हंबनटोटा में चीन समर्थित विशाल बंदरगाह परियोजनाओं में और निवेश करके भी मदद कर सकता है। कोहोना ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण प्रमुख चीनी निवेश योजनाएं अमल में नहीं आई थीं। इसके अलावा, श्रीलंका अधिक चीनी पर्यटकों की चाहत रखता है। 2018 में श्रीलंका आने वाले पर्यटकों की संख्या 265,000 थी, जो कि 2019 में आत्मघाती हमलों और कोरोना महामारी के बाद लगभग नगण्य हो गई है।

चीन के चाटुकार माने जाते हैं विक्रमसिंघे 
कोहोना ने कहा कि श्रीलंका के नए राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की व्यापार, निवेश और पर्यटन सहित अन्य मुद्दों पर सहयोग पर चर्चा करने के लिए चीन की यात्रा करने की योजना है। राजपक्षे परिवार चीन का करीबी हुआ करता था लेकिन श्रीलंका के वर्तमान राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे भी चीन के लिए अजनबी नहीं हैं। रॉयटर्स के पत्रकार, दूतावास के जिस कमरे में उनका इंटरव्यू कर रहे हैं वहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी हाथ मिलाते हुए एक तस्वीर है। यह तस्वीर 2016 में प्रधानमंत्री के रूप में बीजिंग का दौरा किया तब की है।
 

 

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दुनिया के सबसे महंगे घर में रुके प्रिंस सलमान, जिसका मर्डर करवाया! उसके भाई ने बनवाया था घर

 पेरिस (छत्तीसगढ़ दर्पण)। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान फ्रांस की आधिकारिक यात्रा पर हैं। खबर के मुताबिक इस दौरान उन्होंने दुनिया के सबसे महंगे घर में 'नाइट स्टे' किया। इसके बाद से दुनिया भर में लौवेसिएन्स में मौजूद शेटॉ लुई XIV हवेली के चर्चे हो रहे हैं। बता दें कि, शैटॉ लुई XIV हवेली का संबंध सऊदी प्रिंस के कट्टर आलोचक रहे पत्रकार जमाल खशोगी के परिवार से है। जमाल खशोगी की इस्तांबुल में सऊदी दूतावास के अंदर हत्या कर दी गई थी। तब अमेरिका समेत कई देशों ने दावा किया था कि खशोगी की हत्या का आदेश सीधे मोहम्मद बिन सलमान ने दिया था।


दुनिया के सबसे महंगे शैटॉ लुई XIV हवेली 
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान फ्रांस की आधिकारिक यात्रा को दौरान दुनिया के सबसे महंगे शैटॉ लुई XIV हवेली में विश्राम किया। विलासिता से भरपूर इस हवेली के चर्चे फिर से दुनिया भर में हो रही है। शैटॉ लुई XIV हवेली के मालिक के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। 7,000 वर्ग मीटर में फैली इस हवेली को 2015 में एक अज्ञात खरीदार ने 275 मिलियन यूरो में खरीदा था। इसी कारण फॉर्च्यून पत्रिका ने इसे दुनिया का सबसे महंगा घर करार दिया था।
 
क्या सऊदी क्राउन प्रिंस इस हवेली के मालिक हैं? 
2017 में द न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया था कि इस हवेली के मालिक सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि उन्होंने फर्जी कंपनियों के जरिए इस घर को खरीदा था। मगर, इस रिपोर्ट में किए गए दावे की न तो सऊदी अरब ने और ना ही फ्रांस ने अभी तक कोई पुष्टि की है।

दुनिया की सबसे महंगी हवेली 
इस हवेली के पास में ही वर्साय पैलेस मौजूद है, जो फ्रांसीसी शाही परिवार का आधिकारिक निवास था, जिसे वर्तमान में म्यूजियम में बदल दिया गया है। इस हवले में विलासिता के सारे सामान मौजूद हैं। शैटॉ लुई XIV में एक नाइट क्लब, एक सोने की पत्ती वाला फव्वारा, एक सिनेमा घर भी बना हुआ है। इसके अलावा इस हवेली में पानी के नीचे एक कांच का कमरा भी है, जहां सफेद चमड़े से बना सोफा रखा हुआ है। अंदर जाने पर यह कमरा किसी एक्वेरियम की तरह नजर आता है।

शैटॉ लुई XIV हवेली का खशोगी कनेक्शन जानें 
शैटॉ लुई XIV हवेली का सीधा संबंध सऊदी प्रिंस के घोर आलोचक रहे पत्रकार जमाल खशोगी के परिवार से है। जानकारी के मुताबिक, जमाल खशोगी के चचेरे भाई इमाद खशोगी ने शैटॉ लुई XIV का निर्माण करवाया था। इमाद खशोगी फ्रांस में लग्जरी प्रापर्टी डेवलपमेंट बिजनेस चलाते हैं। बता दें कि, जमाल खशोगी की इस्तांबुल में सऊदी दूतावास के अंदर हत्या कर दी गई थी। उस समय अमेरिका समेत कई देशों ने दावा किया था कि खशोगी की हत्या का आदेश सीधे मोहम्मद बिन सलमान ने दिया था।

इसी हवेली में रुके थे प्रिंस सलमान 
बता दें कि, अब समाचार एजेंसी एएफपी ने फ्रांसीसी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि मोहम्मद बिन सलमान गुरुवार को फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिलने से पहले इसी महंगे हवेली में रुके थे। इस हवेली के बाहरी गेट पर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों,फ्रांसीसी पुलिस की गाड़ियों को देखा गया था।
 
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व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद पहली बार वाशिंगटन पहुंचे ट्रंप, झूठे चुनावी दावे दोहराए

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस को अलविदा कहने के बाद बाद पहली बार मंगलवार को वाशिंगटन लौटे और एक बार फिर अपने झूठे चुनावी दावों को दोहराया, जो अमेरिकी संसद भवन (कैपिटल हिल) में छह जनवरी को विद्रोह का कारण बने थे।

ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि उनके 2020 का चुनाव जीतने के सभी सबूत मौजूद थे। उन्होंने कहा  वह चुनाव हमारे देश के लिए एक कलंक है। पूर्व राष्ट्रपति ने 2024 के चुनाव में अपनी उम्मीदवारी पेश करने का एक बार फिर संकेत दिया। उन्होंने कहा,  हमें शायद एक बार फिर करके दिखाना होगा।

व्हाइट हाउस के पूर्व अधिकारियों और कैबिनेट सदस्यों के एक समूह द्वारा आयोजित एक बैठक में लोगों की तालियों के बीच ट्रंप ने यह बयान दिया। ऐसा माना जा रहा है कि बैठक का मकसद ट्रंप के दोबारा चुनाव लड़ने के लिए एक एजेंडा तैयार करना था।

जो बाइडन के 20 जनवरी 2021 को अमेरिका के राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने और खुद के व्हाइट हाउस को अलविदा कहने के बाद पहली बाद पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप वाशिंगटन पहुंचे। पूर्व उप राष्ट्रपति माइक पेंस के भाषण के कुछ घंटे बाद ट्रंप ने अपनी बात रखी। पेंस को 2024 चुनाव में ट्रंप का संभावित प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है।

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जॉनसन ने जेलेंस्की को चर्चिल पुरस्कार से सम्मानित किया

 लंदन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने मंगलवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को ‘सर विन्सटन चर्चिल लीडरशिप अवार्ड’ से सम्मानित किया तथा संकट के समय में दोनों नेताओं की तुलना की। जेलेंस्की ने जॉनसन के लंदन कार्यालय में एक समारोह के दौरान वीडियो लिंक के जरिए पुरस्कार स्वीकार किया। इस कार्यक्रम में चर्चिल के परिवार के सदस्य, यूक्रेन के राजदूत वैदिम प्रिस्तेको और वे यूक्रेनी भी शामिल हुए, जिन्होंने ब्रिटिश सैनिकों से प्रशिक्षण लिया है।

जॉनसन ने यह याद किया कि जेलेंस्की ने कैसे 24 फरवरी को पुष्टि की थी कि रूस ने आक्रमण कर दिया है। उन्होंने कहा, सबसे बड़े संकट की घड़ी में आपने अपने तरीके से नेतृत्व की परीक्षा का सामना किया जैसे कि चर्चिल ने 1940 में किया था। जेलेंस्की ने जॉनसन और ब्रिटेन का उनके सहयोग के लिए आभार जताया।

उत्तर पूर्वी देश यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद जॉनसन पहले पश्चिमी नेता थे जो कीव गए थे। इस माह के शुरू में जॉनसन द्वारा कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पद से इस्तीफा देने के बाद जेलेंस्की ने कहा था कि वह इस घटनाक्रम से दुखी हैं।

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ऋषि सुनक पर तिलमिलाया चीन का ग्लोबल टाइम्स, कहा- ब्रिटेन में क्या खेल चल रहा, सब पता है

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन में बोरिस जॉनसन के पद से इस्तीफा देने के बाद नए प्रधानमंत्री पद का चुनाव अपने अंतिम दौर में है। कंजर्वेटिव पार्टी के नेतृत्व के लिए बचे दो प्रत्याशी एक दूसरे के विरूद्ध जोर आजमाइश कर रहे हैं। ऋषि सुनक और लिज ट्रस दोनों ने ही इस बार के चुनाव में चीन के खिलाफ आक्रमक रूख अपनाया है। इसे लेकर चीन के सरकारी अखबार ने हैरानी जताई है। चीन के मुखपत्र कहे जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने दोनों ही दावेदारों पर इसे लेकर कड़ी टिप्पणी की है।

ऋषि के बयान से हैरान ग्लोबल टाइम्स
ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है कि लिज ट्रस पहले भी चीन को लेकर हमलावर रही हैं, ऐसे में उनका चीन विरोधी बयान हैरानी भरा नहीं है लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि आम तौर पर संतुलित नजर आने वाले सुनक ने अचानक चीन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अब वह चीन को ब्रिटेन और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बता रहे हैं। ये बेहद हैरान करने वाली बात है। यह चीन के लिए ही नहीं बल्कि उनका समर्थन करने वाले लोगों के लिए बेहद आश्चर्य का विषय है।
असफलता छुपाने के लिए दिखाते हैं चीन का डर
असफलता छुपाने के लिए दिखाते हैं चीन का डर
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में चीन के लिए नीति, नेताओं के परिवर्तन के साथ नाटकीय रूप से नहीं बदलती है। "चीन के खतरे" को बढ़ावा देने का कार्य उन अक्षम राजनेताओं के लिए सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है जो अपने को छुपाने के लिए हैं। यह बात और है कि चुनावों में फेल हो चुके ये नेता अपनी फेल्योर छिपाने के लिए चीन से खतरे के मुद्दे को भुनाना शुरू करेंगे, जबकि उन्हें पता है कि उनके देश के आंतरिक मामलों से चीन का कोई भी लेना-देना नहीं है।
चीन से बैर रखने से ब्रिटेन को होगा नुकसान
चीन से बैर रखने से ब्रिटेन को होगा नुकसान
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि ये नेता स्पष्ट रूप से समझते हैं कि चीन के साथ संबंध अच्छे रखने से उन्हें कुछ हद तक आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। अगर ये चीन के साथ संबंध खराब करते हैं तो अंततः उनके देश की अर्थव्यवस्था को ही नुकसान होगा। लेकिन, चीन विरोधी माहौल तैयार करने से वहां के मतदाताओं को यकीन हो जाता है कि ब्रिटेन की आंतरिक समस्याओं के लिए चीन जिम्मेदार है। यह समझदारी, साहस का काम नहीं बल्कि बिल्कुल बेहूदा और आसान विकल्प है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि इस समय ब्रिटेन के राजनेताओं की टिप्पणियां चुनाव जीतने के लिए है, इसलिए चीन को इसे बहुत गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है, बस हमें देखना है कि वे चुनाव जीतकर क्या करते हैं।
आलोचनाओं के बाद बदले सुनक
आलोचनाओं के बाद बदले सुनक
ऋषि सनक और लिज़ ट्रस के टेलीविजन बहस की भी अखबार ने चर्चा की है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि पूर्व वित्त मंत्री सनक ने कहा कि चीन "इस सदी में ब्रिटेन और दुनिया की सुरक्षा और समृद्धि के लिए सबसे बड़ा खतरा" का प्रतिनिधित्व करता है। ग्लोबाल टाइम्स ने ऋषि सुनक पर विरोधियों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर भी लिखा है। अखबार लिखता है कि सुनक को उनके विरोधी, चीन पर नरम रूख रखने के लिए घेर रहे हैं। ट्रस के सहयोगियों के मुताबिक जब सनक जुलाई 2021 में वित्त मंत्री थे, उन्होंने कहा कि ब्रिटेन को चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना चाहिए। ऐसे में सुनक ने भी चीन के प्रति अपना सुर पूरी तरह से बदल लिया है।
 
चीन के विरोध में अँधे हुए नेता
चीन के विरोध में अँधे हुए नेता
ग्लोबल टाइम्स आगे लिखता है कि सनक चीन विरोध में इतने डूब गए हैं कि उन्होंने कहा है कि वह ब्रिटेन में कन्फ्यूशियस संस्थान की सभी 30 शाखाओं पर प्रतिबंध लगा देंगे। सुनक का तर्क है कि चीनी सरकार द्वारा शैक्षिक और सांस्कृतिक संगठन का उपयोग ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में सॉफ्ट पावर को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। उन्होंने यूके के तकनीकी स्टार्ट-अप को चीनी निवेश से बचाने के लिए नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के सख्त उपयोग और चीनी साइबर खतरों से निपटने के लिए एक नए "नाटो-शैली" अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन का भी वादा किया है।
गंभीर आर्थिक समस्या का सामना कर रहा ब्रिटेन
गंभीर आर्थिक समस्या का सामना कर रहा ब्रिटेन
ग्लोबल टाइम्स में चीनी विश्लेषकों ने कहा कि ब्रिटेन वर्तमान में गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहा है, और अगर यह चीन के साथ अपने संबंधों को और खराब करता है और द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को प्रभावित करता है, तो निश्चित रूप से ब्रिटेन को और अधिक नुकसान होगा। इसलिए चुनाव के दौरान राजनेता जो कुछ भी वोट प्राप्त करना चाहते हैं, कह सकते हैं, लेकिन उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि चुने जाने के बाद उनकी प्राथमिकताएं क्या हैं और अगर वे वास्तव में अपने वादों को पूरा करते हैं तो क्या होगा।

चुनाव जीतने का बहाना है चीन विरोधी प्रचार
चीन के रेनमिन विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय मामलों के संस्थान के निदेशक वांग यीवेई ने सोमवार को ग्लोबल टाइम्स को बताया कि पश्चिमी देशों में चुनावों के दौरान की गई टिप्पणियां इतनी महत्वपूर्ण नहीं हैं। ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि ब्रिटेन अब गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहा है। बुधवार को गार्जियन के अनुसार, ब्रिटेन की मुद्रास्फीति दर 40 साल के उच्च स्तर 9.4 प्रतिशत पर पहुंच गई और अक्टूबर में 12 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। रेलवे में 40,000 से अधिक कर्मचारियों और एक दर्जन से अधिक ट्रेन कंपनियों द्वारा नियोजित हड़ताल अगले सप्ताह आगे बढ़ेगी और 1995 के बाद से अपनी तरह की यह पहली राष्ट्रीय हड़ताल होगी।

चीन से संबंध खराब करना नासमझी है
ग्लोबल टाइम्स में विश्लेषकों ने लिखा है कि इस तरह के संकटों का सामना करते हुए, ब्रिटेन के नए नेता को चीन-ब्रिटेन संबंधों को नुकसान पहुंचाने के लिए नासमझी नहीं करनी चाहिए। हालांकि, जहरीले राजनीतिक माहौल के कारण, ब्रिटेन के राजनेता चीन के साथ संबंधों को नुकसान पहुंचाने का अविवेकपूर्ण और आसान निर्णय लेना पसंद करते हैं, ताकि चरम रूढ़िवादी और लोकलुभावन ताकतों को खुश किया जा सके, बजाय इसके कि वे व्यावहारिक हों और चीन-ब्रिटेन संबंधों को विकसित करने के लिए सही विकल्प चुनें।
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यूक्रेन के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी ने ऐसा क्या कर दिया कि दुनिया भर में उनकी निंदा हो रही है?

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छठे महीने में पहुंच चुका है। अब तक इस जंग में हजारों लोग मारे जा चुके हैं। लाखों लोगों को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है। अब तक पूरी दुनिया में यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की के अपने देश के लोगों के संग खड़े होने को लेकर, अपने सैनिकों का हौसला बढ़ाने को लेकर तारीफ होती रही है। लेकिन इस बीच यूक्रेनी राष्ट्रपति के एक फोटोशूट को लेकर उनकी आलोचना होने लगी है।

पत्नी के साथ नजर आ रहे जेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की के फोटोशूट को लेकर दुनियाभर में उनका मजाक बन रहा है। दरअसल रूस और यूक्रेन के बीच जेलेंस्की ने चर्चित पत्रिका वोग के लिए कुछ तस्वीरें खिंचवाई हैं। वोग की तस्वीरों में जेलेंस्की अपनी पत्नी ओलेना जेलेंस्का के साथ नजर आ रहे हैं। ये तस्वीरें वोग मैगजीन के ऑनलाइन एडीशन के लिए खिंचवाई गयी हैं।

फैशन पत्रिका के रूप में मशहूर है वोग
वोग पत्रिका को दुनियाभर में फैशन मैग्जीन के लिए जाना जाता है। इन फोटो में यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की अपनी पत्नी के साथ अलग-अलग पोज में दिख रहे हैं। इन तस्वीरों को ओलेना जेलेंस्की ने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर भी शेयर किया है। ओलेना ने तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा है कि वोग मैगजीन के कवर पर आना कई लोगों का सपना होता है। यह बेहद गौरव की बात है।

इंस्टाग्राम पर किया शेयर
ओलेना ने आगे लिखा है कि वे यूक्रेन की हर महिला को यहां देखना चाहेंगी जो इस समय रिफ्यूजी कैंपों में युद्ध की पीड़ा झेल रही हैं। उनके पास इस मैगजीन के कवर पर आने का अधिकार है। वे इसकी काबिलियत रखती हैं। तस्वीर के पब्लिक होने के बाद लोग इसकी आलोचना में जुट गए हैं।

आलोचना में जुटे लोग
एक यूजर ने लिखा है, "जब आपका देश युद्ध के बीच में है, लोग पीड़ित हैं, सैनिक मर रहे हैं लेकिन स्नैपचैट पीढ़ी को भी लुभाना महत्वपूर्ण है। वोग मैगजीन के फोटोशूट के लिए पोज देते हुए प्रेसिडेंट ज़ेलेंस्की और उनकी पत्नी। इतने तेजस्वी और बहादुर।"
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जंग के बीच रूस का बड़ा फैसला, 2024 के बाद अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन छोड़ने का किया ऐलान

 मॉस्को (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रूस ने 2024 के बाद अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को छोड़ने का फैसला किया है। मास्को की अंतरिक्ष एजेंसी के नवनियुक्त प्रमुख ने मंगलवार को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यह जानकारी दी। क्रेमलिन द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि रॉस्कॉस्मोस के प्रमुख यूरी बोरिसोव ने पुतिन से कहा, बेशक, हम अपने भागीदारों के लिए अपने सभी दायित्वों को पूरा करेंगे, लेकिन 2024 के बाद इस स्टेशन को छोड़ने का निर्णय ले लिया गया है।

रूस का बड़ा फैसला 
इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन (ISS) से बाहर निकलने का फैसला यूक्रेन में क्रेमलिन की सैन्य कार्रवाई को लेकर रूस और पश्चिम देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच आई है। बोरिसोव ने कहा, "2024 के बाद स्टेशन छोड़ने का निर्णय किया गया है।" मॉस्को और वाशिंगटन के बीच तनाव के बावजूद नासा और रोस्कोस्मोस ने इस महीने की शुरुआत में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रूसी रॉकेट की सवारी जारी रखने को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन (ISS) से बाहर निकलने का फैसला 
रोस्कोस्मोस के प्रमुख दिमित्री रोगोजिन ने रूस की सरकारी समाचार एजेंसी टॉस के साथ एक इंटरव्‍यू में कहा कि इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन (ISS) से बाहर निकलने का फैसला पहले ही लिया जा चुका है।उन्होंने इंटरव्‍यू में कथित तौर पर कहा कि हम इसके बारे में सार्वजनिक रूप से बात करने के लिए बाध्य नहीं हैं। मैं केवल यह कह सकता हूं कि हम अपने पार्टनर्स को ISS पर हमारा काम खत्म होने के बारे में एक साल पहले ही चेतावनी दे देंगे।

रूस अब अपना ऑर्बिटल सर्विस स्‍टेशन तैनात करना चाहता है 
उन्होंने इशारा दिया कि ISS के प्रोग्राम को छोड़ने का फैसला इसलिए भी है, क्‍योंकि रूस अब अपना ऑर्बिटल सर्विस स्‍टेशन तैनात करना चाहता है. रूस साल 1998 में इस मिशन से जुड़ा था। आपको बता दें कि रूस ने साल 2015 में भी घोषणा की थी कि वह साल 2024 तक ISS का हिस्सा रहेगा। तब रूस ने कहा था कि वह साल 2024 के बाद रूसी मॉड्यूल को ISS से अलग कर लेगा और पृथ्वी की निचली कक्षा में अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाएगा।

जंग जारी है 
बता दें कि, रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला किया था। जंग को छह महीने होने वाले हैं। यूक्रेन जंग की आग में पूरी तरह से झुलस गया है। वहीं, अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं।
 

 

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अल्बानिया के नए राष्ट्रपति ने शपथ ग्रहण की, राजनीतिक एकता का आग्रह किया

 तिराना (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अल्बानिया के नए राष्ट्रपति ने शपथ ली और विभिन्न राजनीतिक दलों से देश के बेहतर भविष्य के लिए सहयोग करने और कानून के शासन को मजबूत करने का आग्रह किया। 140 सीटों वाली संसद में 78 वोट हासिल कर जीते राष्ट्रपति बजराम बेगज (55) ने संसद में एक समारोह के दौरान औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। पूर्व आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ जनरल बेगज ने कहा, मैं उन लोगों के प्रति कभी तटस्थ नहीं रहूंगा जो अपने व्यक्तिगत हितों को देश के ऊपर रखते हैं।

राष्ट्रपति कार्यालय में बाद में एक समारोह में संवैधानिक न्यायालय के प्रमुख ने देश का संविधान बेगज को सौंपा। विपक्ष की ओर से कोई साझा उम्मीदवार नहीं होने के बाद बेगज को सत्तारूढ़ वामपंथी सोशलिस्ट पार्टी द्वारा नामित किया गया था। अधिकांश विपक्षी सांसदों ने मतदान का बहिष्कार किया और कुछ ने शपथ ग्रहण समारोह से भी परहेज किया। बेगज देश में सैन्य रैंक से तीसरे राष्ट्रपति हैं। पांच साल के कार्यकाल वाले राष्ट्रपति पद की भूमिका काफी हद तक औपचारिक होती है और राष्ट्रपति से तटस्थ रहने की उम्मीद की जाती है। राष्ट्रपति सेना का कमांडर जनरल होता है, जो न्यायपालिका और सशस्त्र बलों पर भी कुछ अधिकार रखता है।

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भारतीयों से समान व्यवहार वाली नई अप्रवासी नीति बनाएंगे सुनक

 लंदन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। ब्रिटेन में प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी में सबसे आगे चल रहे भारतीय मूल के ऋषि सुनक ने रविवार को अप्रवासन के संवेदनशील मसले की चर्चा की। कहा, प्रधानमंत्री बनने पर वह सामान्य समझ वाले कदम उठाएंगे जो हर किसी के लिए स्पष्ट होंगे। कंजरवेटिव पार्टी के सदस्यों का समर्थन हासिल करने के लिए जारी अभियान में सुनक अगर बाजी मारते हैं तो वह बोरिस जानसन का स्थान लेंगे। उनका मुकाबला विदेश मंत्री लिज ट्रस से है।

दिग्गज आइटी कंपनी इन्फोसिस के संस्थापक एन नारायण मूर्ति के दामाद सुनक जीतते हैं तो वह ब्रिटेन में भारतीय मूल के पहले प्रधानमंत्री होंगे। ब्रिटेन के वित्त मंत्री रह चुके 42 वर्षीय सुनक ने देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए दस बिंदुओं की योजना सार्वजनिक की है। द डेली टेलीग्राफ में लिखे लेख में सुनक ने मानवाधिकारों के मामलों में कार्य करने वाली यूरोपियन कोर्ट की शक्तियां सीमित करने का भी वादा किया है। कहा है कि यूरोपियन कोर्ट हमारी सीमाओं के सुचारु नियंत्रण से हमें नहीं रोक सकता।

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बहामास द्वीप में 60 लोगों को लेकर जा रही नाव पलटी, 17 हैतियन शरणार्थियों की मौत

 नासाउ (छत्तीसगढ़ दर्पण)। बहामास के तट पर एक संदिग्ध मानव तस्करी अभियान के दौरान दर्जनों हैतियन शरणार्थियों को ले जा रही एक नाव के पलट गई, जिससे 17 लोगों की मौत हो गई है। बहामास के प्रधानमंत्री फिलिप डेविस ने एक बयान में कहा, बचाव टीम ने नाव दुर्घटना, जो रविवार को सुबह 1 बजे के बाद न्यू प्रोविंडेंस से सात मील दूर हुई थी, की जानकारी मिलने के बाद 15 महिलाओं, एक पुरुष और एक बच्चे के शव को बरामद किया।

डेविस ने आगे कहा कि 25 लोगों के शव बरामद कर लिया गया है। निगरानी के लिए उन्हें स्वास्थ्य अधिकारियों को सौंपा गया है। लेकिन फिर भी, कुछ लोगों को लापता माना गया है। आपरेशन अभी भी चल रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि एक जुड़वां इंजन वाली स्पीड बोट लगभग 60 लोगों के साथ वेस्ट बे स्ट्रीट से लगभग 1 बजे डाकिंग सुविधा से निकली थी। ऐसा माना जाता है कि उनका अंतिम गंतव्य मियामी, फ्लोरिडा था। उन्होंने कहा, मैं इस त्रासदी में अपनी जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति अपनी सरकार और बहामास के लोगों की संवेदना व्यक्त करना चाहता हूं।

 

 

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पैसे बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने लगाई पाबंदी, फिर भी विदेशों से लग्जरी सामान क्यों खरीद रहा है पाकिस्तान?

 इस्लामाबाद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। बढ़ते आयात बिल और घटते विदेशी मुद्रा भंडार के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले देश की मुद्रा में रिकॉर्ड गिरावट के बीच पाकिस्तान ने आपातकालीन आर्थिक योजना के तहत 38 गैर जरूरी लक्जरी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। हालांकि देश के वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार इन आयातों की अनुमति देना जारी रखे हुए है।


मई में लगा था प्रतिबंध 
एआरवाई न्यूज की रिपोर्ट हवाले से बताया गया कि मई में सरकार ने एक आपातकालीन आर्थिक योजना को लागू करते हुए दर्जनों गैर जरूरी लग्जरी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। वित्तमंत्री इस्माइल ने एक ट्वीट में कहा कि सरकार आयातकों को होने वाले नुकसान से बचने के लिए कम अधिशूल्क के साथ 1 जून तक बंदरगाहों तक पहुंचने वाली सभी वस्तुओं के आयात की अनुमति दे रही है।

आयात की दी अनुमति 
इस्माइल ने एक ट्वीट में लिखा 'सरकार द्वारा कुछ लग्जरी के सामानों पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगाने के बाद भी, इन वस्तुओं के कई शिपमेंट अनजाने में हमारे बंदरगाहों पर आ गए थे। ऐसे में आयातकों को नुकसान से बचाने के लिए, सरकार उन सभी वस्तुओं के आयात की अनुमति दे रही है जो 1 जून तक हमारे बंदरगाहों पर एक कम अधिशूल्क के साथ पहुंच गई हैं।'एक अन्य ट्वीट में इस्माइल ने लिखा, 'इसके अलावा, फैसल सुब्जवारी, समुद्री मामलों के संघीय मंत्री, समुद्री मंत्री और मैं कोशिश कर रहे हैं कि इन आयातकों को बहुत कम या अच्छा हो कि कोई विलंब शुल्क या कंटेनर बंदी शुल्क का भुगतान न करना पड़े। इसके लिए निश्चित रूप से हमें कंटेनर टर्मिनल के ऑपरेटरों और कंटेनर मालिकों सहयोग की आवश्यकता है।

मई में पीएम ने लगाया प्रतिबंध 
बता दें कि दो महीने पहले प्रतिबंध लगाते हुए सरकार ने कहा था -'बढ़ते आयात बिल और घटते विदेशी मुद्रा भंडार के कारण और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले देश की मुद्रा में रिकॉर्ड गिरावट के बीच पाकिस्तान ने 'आपातकालीन आर्थिक योजना' के तहत 38 गैर-जरूरी लग्जरी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की जा रही है।'

विदेशी मुद्रा की होगी बचत 
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि इस फैसले से देश की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि लग्जरी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध से देश की कीमती विदेशी मुद्राओं की बचत होगी। हम तपस्या करेंगे और आर्थिक रूप से मजबूत लोगों को इस प्रयास में नेतृत्व करना चाहिए ताकि हमारे बीच कम विशेषाधिकार प्राप्त लोगों को यह बोझ न उठाना पड़े।
 
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अमेरिका ने यूक्रेन में ओडेसा बंदरगाह पर रूसी हमले की निंदा की

 वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अमेरिका ने यूक्रेन में ओडेसा बंदरगाह पर रूस के हमले की निंदा की। रूसी मिसाइल हमला कथित तौर पर एक दिन बाद हुआ जब युद्ध के कारण वैश्विक खाद्य कमी के बीच यूक्रेन और रूस द्वारा अनाज निर्यात को अनब्लाक करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा, संयुक्त राज्य अमेरिका आज ओडेसा के यूक्रेनी बंदरगाह पर रूसी मिसाइल हमले की कड़ी निंदा करता है।

काला सागर के माध्यम से यूक्रेनी कृषि निर्यात को फिर से शुरू करने की अनुमति देने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप देने के 24 घंटे बाद, रूस ने ऐतिहासिक बंदरगाह पर हमला करके अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया, जहां से अनाज और कृषि निर्यात फिर से इस व्यवस्था के तहत ले जाया जाएगा। हालांकि, रूस ने अनाज सौदे के बाद यूक्रेनी बंदरगाह पर हमलों से इनकार किया। तुर्कीय के रक्षा मंत्री हुलुसी अकार ने कहा कि रूसी अधिकारियों ने अंकारा को बताया कि यूक्रेन के प्रमुख काला सागर बंदरगाह ओडेसा पर हुए हमलों से रूस का कोई लेना-देना नहीं है। अकार ने तुर्की की सरकारी अनादोलु एजेंसी को बताया, रूस के साथ हमारे संपर्क में, रूसियों ने हमें बताया कि इन हमलों से उनका कोई लेना-देना नहीं है और वे इस मुद्दे की बहुत बारीकी से और विस्तार से जांच कर रहे हैं।

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नासा ने 'मरते हुए तारे' को अपने टेलीस्कोप में किया कैद, चारों ओर अद्भुत नजारा

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। नासा का 'जेम्‍स वेब स्‍पेस टेलीस्‍कोप' स्पेस सेक्टर के लिए बड़ा गेम चेंजर साबित हो रहा, जो लगातार नई आकाशगंगा, ब्लैकहोल और तरह-तरह के सौरमंडल को एक्सप्लोर कर रहा। साथ ही वो उनके फोटो और वीडियो भी लगातार पृथ्वी के कंट्रोल सेंटर में भेज रहा है। हाल ही में नासा ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें एक मर रहा तारा नजर आ रहा। इसको जेम्स वेब टेलीस्कोप ने बहुत ही शानदार तरीके से फिल्माया है।

कितनी थी दूरी? 
नासा के मुताबिक टेलीस्कोप में एक चमकदार चीज कैद हुई है, जो वास्तव में एक मरता हुआ तारा है। जिसको फोकस किया गया है। इस वीडियो के जरिए ये दिखाने की कोशिश की गई कि कैसे टेलीस्कोप ने साउदर्न रिंग नेबुला में स्थित प्‍लेनेटरी नेबुला 'NGC 3132' की चमकदार फोटो को अपने कंप्यूटर में उतारा। इस मरते हुए तारे की दूरी पृथ्वी से 2000 प्रकाश वर्ष के करीब है।

आखिरी वक्त के बारे में बताने की कोशिश 
पहले नासा ने मरते हुए तारे की तस्वीर जारी की थी। जिसके जरिए ये बताने की कोशिश की गई कि जब कोई तारा आखिरी वक्त में रहता है, तो उसके आसपास का नजारा कैसे दिखता है। साथ ही आसपास क्या-क्या गतिविधियां होती हैं। वैज्ञानिकों ने इस मामले में कहा कि टेलीस्कोप ने इतनी दूर से फोटो ली है कि आप उसका अंदाजा भी नहीं लगा सकते। एक प्रकाशवर्ष में 5.8 खरब मील होते हैं, ऐसे में सोचिए कि ये तारा 2000 प्रकाश वर्ष दूर है। ये स्पेस सेक्टर में अपने आप एक नई शुरुआत है।
 
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मंकीपॉक्स वर्ल्ड हेल्थ इमरजेंसी क्यों घोषित? जानिए 5 तथ्य

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। घातक संक्रमण मंकीपॉक्स को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि पूरी दुनिया में मंकीपॉक्स तेजी से फैल रहा है। ऐसे में इस पर नियंत्रण के लिए जल्द सही दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है। आइए जानते हैं 5 वो तथ्य जिसके कारण डब्ल्यूएचओ को ये गंभीर कदम उठाने पड़े हैं।

तेजी से फैल रहा मंकीपॉक्स विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि मंकीपॉक्स पूरी दुनिया में तेजी से फैल रहा है। साथ ही ये भी तथ्य सामने आए कि भविष्य में ये कोरोना की तरह फैल सकता है। ऐसे में वर्ल्ड हेल्थ अर्गेनाइजेशन ने ये फैसला किया है।

सबके सहयोग की आवश्यकता 
इससे निपटने के लिए सभी को प्रयास करना होगा। मंकीपॉक्स से बचाव के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग का आह्वान किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मैंने तय किया है कि वैश्विक मंकीपॉक्स का प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का प्रतिनिधित्व करता है।" 

60 देशों में अब तक 16 हजार मामले 
डब्ल्यूएचओ के 60 सदस्य देशों में अब तक मंकीपॉक्स के 16,000 से अधिक मामले सामने आए हैं। जबकि पांच मौतें हुई हैं। विश्व स्तरीय स्वास्थ्य निकाय इसको लेकर गंभीर है। 

स्वास्थ्य आपातकाल सहयोग के लिए जरूरी 
स्वास्थ्य निकाय ने कहा कि वह आपातकाल की घोषणा कर रहा है क्योंकि यह आवश्यक है कि सभी देश मंकीपॉक्स से निपटने के लिए प्रभावी जानकारी और सेवाओं को डिजाइन और वितरित करने के लिए मिलकर काम करें।
 
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Brazil : रियो डी जनेरियो में पुलिस कार्रवाई में 18 लोगों की मौत

 रियो डी जनेरियो (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रियो डी जनेरियो की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती में गुरुवार को गिरोह के सदस्यों को निशाना बनाकर की गई पुलिस कार्रवाई में कम से कम 18 लोग मारे गए। हाल में शहर में पुलिस की यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक है, जिसकी काफी आलोचना हो रही है। पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा कि कार्रवाई में कारों को चुराने, बैंकों को लूटने और आसपास के इलाकों पर हमला करने वाले एक आपराधिक गिरोह को निशाना बनाया गया था।

लिस कार्रवाई की कड़ी निंदा 
रियो के अधिकारियों ने कहा कि कॉम्प्लेक्सो डो अलेमाओ में पुलिस के साथ टकराव में एक पुलिस अधिकारी और एक महिला के साथ ही 16 संदिग्ध अपराधी मारे गए। पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा कि कार्रवाई में कारों को चुराने, बैंकों को लूटने और आसपास के इलाकों पर हमला करने वाले एक आपराधिक गिरोह को निशाना बनाया गया था।
 
क्या कहा पुलिस ने 
रियो के पुलिस बल के प्रवक्ता ने कहा कि कुछ अपराधियों ने पुलिस अधिकारियों के रूप में खुद को छिपाने के लिए वर्दी पहनी थी। रियो पुलिस के एक जांचकर्ता रोनाल्डो ओलिवेरा ने कहा, 'मैं उम्मीद कर रहा था कि वे (संदिग्धों ने) कोई प्रतिक्रिया न दें क्योंकि तब हम उनमें से 15, 14 को गिरफ्तार कर सकते थे। लेकिन दुर्भाग्य से उन्होंने हमारे पुलिसकर्मियों पर गोली चलाने का फैसला किया।
 
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2008 से भी अधिक खतरनाक होगी ये आर्थिक मंदी, ये पांच कारण दे रहे संकेत, दुनियाभर में बढ़ी टेंशन

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पूरी दुनिया के गंभीर आर्थिक संकट में पहुंचने का खतरा बेहद बढ़ चुका है। मंदी की चिंता ने दुनियाभर में सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है। महंगाई बेतहाशा बढ़ती जा रही है। आयात महंगा होने की वजह से कई देशों में विदेशी मुद्रा खत्म हो चली है। श्रीलंका, पाकिस्तान, नेपाल सहित दुनिया के कई देश आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या दुनिया सच में मंदी का सामना करने जा रही है? कुछ संकेतों से दुनियाभर में टेंशन जरूर बढ़ गयी है।

गिरी कच्चे तेल की कीमतें 
जब से यूक्रेन में संघर्ष शुरू हुआ है, तेल के सप्लाई चेन में भारी व्यवधान जारी है, जिससे कच्चे तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। यूक्रेन संघर्ष से पहले, कच्चा तेल लगभग 90 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल था और फरवरी के अंत में एक सप्ताह से भी कम समय में बढ़कर 115 अमरीकी डॉलर हो गया था। वहीं, मार्च के अंत में कीमतों में मामूली गिरावट देखी गई, और यह अप्रैल की शुरुआत में USD 100 से नीचे चली गई। लेकिन बीते कई दिनों से यह 96 बैरल प्रति अमेरिकी डॉलर पर ट्रेंड कर रही है। कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट को संभावित मंदी की बढ़ती आशंकाओं के साथ-साथ विभिन्न केंद्रीय बैंकों द्वारा आक्रामक मौद्रिक नीति को सख्त करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने बढ़ाए ब्याज दर 
यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने 11 साल में पहली बार ब्याज दरों को बढ़ाने का फैसला किया है। 11 साल में पहली बार यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने नीतिगत दर में 0.50 फीसदी की दर से ब्याज दरों में इजाफा किया है। ब्याज दरों में ये तेजी उम्मीद से अधिक है। इसके साथ ही ईसीबी अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व और दुनिया के दूसरे प्रमुख देशों के केंद्रीय बैंकों की श्रेणी में आ गया है, जिन्होंने महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरों को और बढ़ा दिया है। केंद्रीय बैंक के इस फैसले के बाद से कर्ज और महंगा होने के दावे किए जा रहे हैं।

विश्व बैंक ने किया एलर्ट 
विश्व बैंक ने आर्थिक प्रगति को लेकर एक बयान दिया है। विश्व बैंक के बयान में कहा गया है कि साल 2022 के आखिर तक दुनिया की आर्थिक प्रगति कम होने की आशंका है। इसलिए ज्यादातर देशों को आर्थिक मंदी की तैयारी कर लेनी चाहिए। पूरी दुनिया ज्यादा महंगाई और कम विकास दर से जूझ रही है, जिसकी वजह से 1970 के दशक जैसी मंदी आ सकती है। दुनियाभर में इसका असर दिखने भी लगा है।

बड़ी टेक कंपनियों ने भर्ती प्रक्रिया धीमी की 
आर्थिक मंदी एक और ईशारा दुनिया की बड़ी कंपिनयों ने किया। इन बड़ी कंपनियों ने भर्ती प्रक्रिया धीमी कर दी है। गूगल की पैरेंट कंपनी एल्फाबेट ने कहा है कि वह इस साल के बचे हुए महीनों में भर्ती की प्रक्रिया को धीमा करेगी। वह ऐसा आने वाले महीनों में संभावित मंदी को देखते हुए कर रही है। इससे पहले 2008-09 में जब आर्थिक मंदी आई थी, तो भी गूगल ने अपनी भर्ती प्रक्रिया रोक दी थी।
 
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श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री बनेंगे दिनेश गुणावर्धने, राष्ट्रपति विक्रमसिंघे के रह चुके हैं क्लासमेट

कोलंबो (छत्तीसगढ़ दर्पण)। दिनेश गुणावर्धने श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री बनाए गए हैं। दिनेश दिनेश गुणावर्धने, श्रीलंका के नवनियुक्त राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के सहपाठी और पूर्व लोक प्रशासन मंत्री दिनेश गुणवर्धने को गठबंधन सरकार में प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाएगा। इससे पहले ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि दिनेश गुनावर्धने को रानिल, प्रधानमंत्री पद के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।

जल्द होगा मंत्रिमंडल का गठन 
इससे पहले गोटाबाया राजपक्षे के देश छोड़कर भागने के बाद रानिल विक्रमसिंघे को श्रीलंका का कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया था। इसके बाद वह संसद द्वारा राष्ट्रपति चुने गए। राष्ट्रपति विक्रमसिंघे श्रीलंका के सर्वोच्च पद की शपथ लेने के एक दिन बाद शुक्रवार को अपना नया मंत्रिमंडल नियुक्त करने के लिए तैयार हैं। श्रीलंका के नए राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के समक्ष अब सबसे बड़ी चुनौती देश को उसके आर्थिक संकट से बाहर निकालने की है। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति विक्रमसिंघे अगले कुछ दिनों में 20-25 सदस्यों का एक मंत्रिमंडल बनाएंगे।

73 वर्षीय विक्रमसिंघे, जिन्हें बुधवार को एक संसदीय वोट में राज्य के प्रमुख के रूप में चुना गया था, ने देश के पुलिस प्रमुख और शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ पद की शपथ ली। 225 सदस्यीय श्रीलंका की संसद ने 20 जुलाई को विक्रमसिंघे को नया राष्ट्रपति चुना था। उन्हें 134 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी और असंतुष्ट सत्तारूढ़ दल के नेता दुल्लास अल्हाप्परुमा को 82 वोट मिले। त्रिकोणीय मुकाबले में वामपंथी जनता विमुक्ति पेरामुना के नेता अनुरा कुमारा दिसानायके को महज 3 वोट मिल पाए थे।
 
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कोरोना के 4 डोज लेने के बाद भी पॉजिटिव हुए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, व्हाइट हाउस ने की पुष्टि

वाशिंगटन (छत्तीसगढ़ दर्पण)।अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन कोरोना पॉजिटव पाए गए हैं। व्हाइट हाउस ने बयान जारी करते हुए कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडेन कोरोना के हल्के लक्षणों का अनुभव कर रहे थे। इसके बाद उनका कोरोना परीक्षण किया गया था जो कि पॉजिटिव आया है। जानकारी के मुताबिक 79 वर्षीय जो बाइडेन ने बीमारी के लिए फाइजर इंक के पैक्सलोविड एंटीवायरल टैबलेट लेना शुरू कर दिया है। प्रेस सचिव काराइन जीन-पियरे ने कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडेन व्हाइट आज सुबह फोन पर व्हाइट हाउस के कर्मचारियों के संपर्क में रहे हैं। अब वो क्वारंटाइन में रहेंगे और अपनी नियोजित बैठकों में फोन और ज़ूम के माध्यम से भाग लेंगे। इससे पहले जो बाइडेन ने कोरोना वैक्सीन के लांच होने के बाद ही तय समय पर दोनों वैक्सीन लिए थे। इसके बाद उन्होंने दो बूस्टर डोज भी लिया था। बाइडेन से पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी कोरोना पॉजिटिव हुए थे

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