सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चे को भी पिता की प्रापर्टी में हक़दार माना
नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अगर कोई पुरुष और महिला लंबे समय से साथ रहते हैं तो कानून के मुताबिक इसे विवाह जैसा ही माना जाएगा और उनके बेटे को पैतृक संपत्तियों में हिस्सेदारी से वंचित नहीं किया जा सकता। ये आदेश सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि विवाह के सबूत के अभाव में एक पुरुष और महिला का नाजायज बेटा पैतृक संपत्तियों में अधिकार का हकदार नहीं है।

