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मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू से सराबोर हरेली तिहार

छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रदेश की अतुलनीय पाक परंपरा को जीवंत करते हुए यहां आगंतुकों के स्वागत के लिए विशेष रूप से ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला जैसे दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी।


बांस की सूप, पिटारी और दोना-पत्तल में परोसे गए इन व्यंजनों ने न केवल स्वाद, बल्कि प्रस्तुतीकरण में भी लोकजीवन की आत्मा को उजागर किया। अतिथियों ने गर्मागर्म पकवानों का स्वाद लेते हुए राज्य की पारंपरिक पाककला की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं भी इन व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा की  हरेली तिहार केवल खेती-किसानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी लोकसंस्कृति, हमारी परंपरा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इन पारंपरिक व्यंजनों में हमारी माताओं-बहनों की मेहनत, सादगी और स्वाद की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो हमारी असली पहचान है। यह आयोजन न केवल हरेली पर्व की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी मिट्टी, उसके स्वाद और उसकी परंपराओं में रची-बसी है।

इस अवसर पर परिसर का हर कोना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सौंधी खुशबू से सराबोर था। कहीं ढोल-मंजीरों की थाप पर लोक नृत्य होते दिखे तो कहीं व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचती रही। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्रामीण कलाकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों ने इस आयोजन को एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताया।
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महतारी वंदन योजना बनी आर्थिक संबल, महिलाएं गढ़ रहीं बेहतर कल

छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव की नई इबारत लिख रही है। यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि परिवार की जरूरतों में भी सहभागी बन रही हैं। 


मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम पंडरीतराई निवासी श्रीमती रबीना पिस्दा जो एक गृहिणी हैं। उन्हें योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है। उन्होंने बताया कि इस राशि को वह अपने बेटे की शिक्षा और जरूरी घरेलू कार्यों में उपयोग कर रही हैं। इस वर्ष जब उनके बेटे का पहली कक्षा में प्रवेश हुआ, तो उन्होंने महतारी वंदन योजना की राशि से बेटे के लिए बस्ता, स्लेट, पेंसिल, जूते सहित अन्य शिक्षण सामग्री खरीदी। श्रीमती रबीना बताती हैं कि उनके पति कृषि कार्य करते हैं और वह स्वयं भी खेती में हाथ बंटाती हैं। पहले किसी भी प्रकार की बचत कर पाना मुश्किल था, लेकिन इस योजना से अब हर माह थोड़ी-बहुत राशि बचाकर वह अपने बेटे के उज्जवल भविष्य की नींव मजबूत कर पा रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए श्रीमती रबीना ने कहा कि महतारी वंदन योजना उनके जैसी हजारों-लाखों महिलाओं के लिए संबल बनी है। इससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने और परिवार में योगदान देने का अवसर मिल रहा है।
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मुख्यमंत्री श्री साय ने पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे को अर्पित की श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के जोरा स्थित श्री सालासर बालाजी धाम के सभागार में आयोजित सुप्रसिद्ध कवि पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे की श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय डॉ. दुबे के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें  श्रद्धांजलि दी। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों को इस दुःख की घड़ी में धैर्य और शक्ति प्रदान करें।


मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हास्य-व्यंग्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे छत्तीसगढ़ महतारी के सच्चे सपूत थे। सभी को हँसाने वाला यह महान कवि आज हमें रुलाकर चला गया। उन्होंने अपनी विलक्षण काव्य प्रतिभा के माध्यम से न केवल देशभर में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। उनका आकस्मिक निधन पूरे राज्य और साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई असंभव है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने अनेक कवि सम्मेलनों में भाग लिया है, और शायद ही कोई प्रमुख आयोजन ऐसा रहा हो जहाँ डॉ. दुबे की उपस्थिति न रही हो। हर मंच पर उन्हें देश के प्रतिष्ठित कवियों द्वारा विशेष सम्मान प्राप्त होता था।

उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने भी श्रद्धांजलि सभा में स्व. डॉ. सुरेंद्र दुबे को नमन करते हुए कहा कि वे केवल एक कवि नहीं, बल्कि एक जिंदादिल और ऊर्जावान व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को सम्मान दिलाया। उन्होंने प्रदेश के कोने-कोने में घूम-घूमकर लोगों को न केवल हँसाया, बल्कि सामाजिक चेतना भी जगाई। इस अवसर पर डॉ. सुरेंद्र दुबे के परिजन एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
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मिस वर्ल्ड 2025 ओपल सुचता ने खोला सफलता का राज

  थाईलैंड की ओपल सुचाता चुआंगसरी ने मिस वर्ल्ड 2025 का ताज अपने नाम किया। उन्होंने अपनी जीत का मंत्र साझा करते हुए बताया कि 'धैर्य' और 'दृढ़ संकल्प' ही वो दो शब्द हैं, जिनके चलते वह सफलता हासिल कर पाई हैं। इस साल मिस वर्ल्ड 2025 का आयोजन हैदराबाद के तेलंगाना में किया गया। ग्रैंड फिनाले में चुआंगसरी ने वाइट कलर का गाउन पहना था, जिस पर ओपल जैसे फूल बने हुए थे। चेक गणराज्य की मौजूदा मिस वर्ल्ड क्रिस्टीना पिस्जकोवा ने अपना ताज नई मिस वर्ल्ड को सौंपा। यह थाईलैंड की पहली बड़ी ब्यूटी पेजेंट जीत है।

मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने के बाद चुआंगसरी ने मीडिया से बात की। अपनी सफलता का राज बताते हुए उन्होंने मीडिया से कहा, हमेशा खुद पर भरोसा रखो। अपनी असली सोच और मान्यताओं पर डटे रहो। मैं आज यहां इसलिए हूं क्योंकि मैंने अपने फोकस को बनाए रखा और खुद पर भरोसा रखा। साथ ही, अपने आप से प्यार करना कभी मत भूलो।

उन्होंने आगे कहा, यह हमेशा आसान नहीं होता, कभी-कभी बहुत थकावट होती है और हिम्मत टूट जाती है। लेकिन अगर आप हार नहीं मानेंगे, तो आप एक दिन मंजिल तक जरूर पहुंच ही जाएंगे। आपको बता दें कि मिस वर्ल्ड 2025 में दुनियाभर से करीब 108 प्रतियोगियों ने हिस्सा लिया था। भारत की ओर से मॉडल नंदिनी गुप्ता ने इसमें हिस्सा लिया। हालांकि, वे मिस वर्ल्ड 2025 के खिताब की दौड़ में टॉप-20 तक ही जगह बना पाई।

मिस वर्ल्ड के फिनाले की होस्ट मिस वर्ल्ड 2016 रह चुकीं स्टेफनी डेल वैले ने की। उन्होंने इवेंट में पारंपरिक भारतीय लहंगा पहना था। इवेंट में जैकलीन फर्नांडीज और ईशान खट्टर ने भी प्रस्तुति दी। 72वें मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में जज के तौर पर सोनू सूद शामिल थे, उन्हें ह्यूमैनिटेरियन अवार्ड भी दिया गया।

भारत में अब तक तीन बार मिस वर्ल्ड की प्रतियोगिता आयोजित की जा चुकी है। अब तक सबसे ज्यादा खिताब जीतने वालों में भारत सबसे आगे है। भारत ने 6 बार ये खिताब जीता है। आखिरी बार इसे जीतने वाली भारत मानुषी छिल्लर थीं।

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रायपुर मंडल में ग्रीष्मकालीन सांस्कृतिक प्रशिक्षण शिविर “आदित्यान्वेषण” का आयोजन

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, रायपुर मंडल द्वारा मिश्रित हायर सेकेंडरी स्कुल, बी एम वाई, चरोदा में दिनांक 26-05-2025 से 06-06-2025 तक ग्रीष्मकालीन सांस्कृतिक प्रशिक्षण शिविर “आदित्यान्वेषण” का आयोजन नयी प्रतिभाओ की खोज एवं कला को निखारने के उद्देश्य से संध्या 06 बजे से किया जा रहा है l यह आयोजन रेलवे इंस्टिट्यूट बी एम वाई तथा मिश्रित हायर सेकेंडरी स्कुल, बी एम वाई की सहभागिता से कार्मिक विभाग द्वारा वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी श्री राहुल गर्ग के कुशल मार्गदर्शन में किया जा रहा है l शिविर के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में श्री प्रसन्ना आर लोध, कार्यकारी अध्यक्ष, रेलवे इंस्टिट्यूट बी एम वाई एवं एआरएम/भिलाई और विशेष अतिथि के रूप में श्री डी विजय कुमार, मंडल समन्वयक, द पू रे मजदुर कांग्रेस, भिलाई उपस्थित रहे। शिविर का उद्घाटन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया l अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि ने कहा की इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर से छुपी प्रतिभाये बाहर आती है और व्यक्तित्व को अलग पहचान देती है l विश्व के किसी भी संस्थान, स्कूल, कोलेज इत्यादि में कलाकार अपनी अलग पहचान बना लेते  है l विशिष्ट अतिथि श्री डी विजय कुमार ने शिविर के महत्व को बताते हुए कहा कि आजकल अवसरों की कमी नही है और आज के पेरेंट्स भी बहुत जागरूक है और पेरेंट्स के सही मार्गदर्शन से ही बच्चे मनचाही फिल्ड में नाम और पैसा दोनों अर्जित कर सकते है जिसकी शुरुआत ऐसे शिविरों से होती है l 

ग्रीष्मकालीन सांस्कृतिक प्रशिक्षण शिविर में कला साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ के वरिष्ट एवं विशेषज्ञ कलाकारों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है l जिसमे विभिन्न विधाओं के विशेषज्ञ प्रशिक्षक श्री मणिमय मुखर्जी, श्री बरुण चक्रवर्ती, श्री गौतम शील, श्री बबलू विश्वास, श्रीमती बाली, श्रीमती गौतमी चक्रवर्ती, श्री साई चक्रवर्ती, श्री पार्थ चक्रवर्ती, श्री सारथी चक्रवर्ती निरंतर विभिन्न विधाओ में बहुत ही सरल सहज एवं प्रभावपूर्ण तरीके से प्रशिक्षण प्रदान कर रहे है ।
उल्लेखनीय है कि यह प्रशिक्षण शिविर पूर्णतः निःशुल्क है और इसमें रेलवे कर्मचारी एवं गैर रेलवे कर्मचारी के अंतर्गत महिला पुरुष युवा और बच्चे कुल 75 लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है, जिनका उत्साह देखते ही बनता है l 6 जून तक चलने वाले इस प्रशिक्षण शिविर में नृत्य, नाटक, गायन के साथ ही ड्राइंग/पेंटिग के अतिरिक्त अन्य कई विधाओ को बारीकियों के साथ विषय विशेषज्ञों द्वारा सिखाया जा रहा है l 
कार्यक्रम का संयोजन रेलवे कर्मचारी श्री फरीदी निसार अहमद, श्री बी डी प्रसाद, श्री बलबंत शर्मा, श्री बाबुराव, श्री केसरी बाग, श्री अतनु मुखर्जी, श्री रोबर्ट जोसेफ, प्रीति राजवैद्य, प्राचार्या मिश्रित हायर सेकेंडरी स्कुल, बी एम वाई, श्रीमती डी लक्ष्मी द्वारा किया जा रहा है l
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तेंदूपत्ता संग्रहण वनांचल में बना रोजगार और आय का जरिया

 छत्तीसगढ़ के वनवासी अंचलों में इस वर्ष भी तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य   तेज़ी से जारी है। राज्य के 902 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से 10,631 फड़ों में यह कार्य हो रहा है। असमय हवा, तूफान, बारिश और ओलावृष्टि के कारण इस वर्ष तेन्दूपत्ता फसल को नुकसान जरूर पहुँचा है, लेकिन संग्राहक परिवारों की मेहनत और सरकार की प्रतिबद्धता ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है।


अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, 10 लाख से अधिक संग्राहक परिवारों ने 10.84 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता फड़ों में बेचा है, जिसका मूल्य लगभग 596 करोड़  रुपये है। यह राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे संग्राहकों के खातों में जमा की जाएगी। इसके लिए सॉफ़्टवेयर में डाटा प्रविष्टि की प्रक्रिया ज़िला यूनियनों द्वारा प्रारंभ कर दी गई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा हैकितेन्दूपत्ता छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों के लिए केवल वनोपज नहीं, बल्कि आजीविका का आधार है। हमारी सरकार की प्राथमिकता है कि संग्राहकों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य समय पर और पारदर्शी तरीके से मिले। तेन्दूपत्ता संग्रहण से जुड़े हर परिवार के जीवन में आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का अहसास हो, इसके लिए हम पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रहे हैं। हमने तेंदूपत्ता  संग्रहण पारिश्रमिक दर को 4000 मानक बोरा से बढ़कर 5500 रुपए कर किया है, जिससे संग्राहकों को पहले की तुलना में अब ज्यादा लाभ मिलने लगा है

तेन्दूपत्ता संग्रहण से छत्तीसगढ़ के लाखों वनवासी परिवारों को प्रतिवर्ष सम्मानजनक आय प्राप्त हो रही है। यह आय न केवल उनके परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करती है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में भी सुधार ला रही है। 

तेन्दूपत्ता खरीदी के साथ-साथ वर्तमान में पत्तों का उपचार, बोरा भराई और गोदामों में परिवहन का कार्य भी शुरू हो चुका है। सरकार को उम्मीद है कि निर्धारित संग्रहण लक्ष्य की प्राप्ति शीघ्र हो जाएगी।
यह पूरी प्रक्रिया छत्तीसगढ़ को वनोपज आधारित रोजगार सशक्त राज्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रही है।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कमार बस्ती में बांस शिल्प को सराहा: परिवार में शादी के लिए स्वयं खरीदे पर्रा, धुकना और सुपा

 प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल विकासखंड स्थित विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्र बलदाकछार पहुंचे। यहां उन्होंने बरगद के नीचे चौपाल लगाकर ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया और योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत जानी। चौपाल के उपरांत वे सीधे कमार बस्ती पहुंचे, जहां बांस शिल्प से जीविका चला रहे परिवारों से भी मुलाकात की।


मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्ती में कुलेश्वरी कमार के परिवार को बांस से परंपरागत घरेलू उपयोग की सामग्री—पर्रा, धुकना, सुपा—बनाते देखा। उन्होंने न केवल उनके कार्य में गहरी रुचि दिखाई, बल्कि प्रत्येक वस्तु की जानकारी एवं कीमत भी खुद पूछी। मुख्यमंत्री की यह संवेदनशीलता वहां मौजूद सभी ग्रामीणों को आत्मीयता का अनुभव करा गई।

मुख्यमंत्री श्री साय को बांस से बनी सामग्रियाँ इतनी पसंद आईं कि उन्होंने अपने परिवार में होने वाली शादी के लिए तुरंत दो पर्रा, दो धुकना और एक सुपा खरीद लिया। कुल 600 रुपए की राशि बनती थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने कुलेश्वरी को 700 रुपए देकर न केवल उनकी मेहनत का सम्मान किया, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊर्जा दी।

मुख्यमंत्री श्री साय का यह सहज और संवेदनशील व्यवहार जनप्रतिनिधि के रूप में उनके धरातल से जुड़ाव को दर्शाता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने चौपाल में भी यह संदेश दिया कि प्रदेश के हर कोने में बसे अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचना चाहिए और पारंपरिक ज्ञान एवं स्थानीय शिल्प को भी राज्य सरकार निरंतर प्रोत्साहन देती रहेगी।

परंपरागत शिल्प को प्रोत्साहन देने और स्थानीय कारीगरों की मेहनत को मान्यता देने का यह उदाहरण शासन और समाज के बीच सेतु निर्माण की दिशा में एक प्रेरक कदम है।
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जान लें नींबू पानी पीने का सही समय, वरना खराब हो जाएगी सेहत

 गर्मियों में हाइड्रेट रहने और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने के लिए सबसे पहले जो ड्रिंक पसंद की जाती है, वो है नींबू पानी। पानी में नींबू, चीनी और नमक का घोल भी गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचाने का काम करता है। नींबू पानी पीने से शरीर तरोताजा हो जाता है और दिमाग भी शांत रहता है। इसी तरह, यह गर्मी और उमस से होने वाली जलन से भी राहत दिलाता है। लेकिन अगर आप नींबू पानी को गलत समय पर पीते हैं, तो आपको ये सारे फायदे नहीं मिल पाएंगे।

नींबू पानी कब पीना चाहिए?

नींबू में विटामिन सी होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसी तरह, नींबू में एंटीऑक्सीडेंट और इलेक्ट्रोलाइट्स भी पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जावान और स्वस्थ रखते हैं। इसीलिए गर्मियों में कमजोरी महसूस होने पर सबसे पहले नींबू पानी पीने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं गर्मियों में नींबू पानी कब पीना चाहिए।

नींबू पानी पीने का सही समय क्या है:

वजन कम करने के लिए खाली पेट: वजन घटाने और बॉडी डिटॉक्स के लिए सुबह खाली पेट नींबू पानी का सेवन करना चाहिए। इससे शरीर अंदर से साफ होता है और शरीर का मेटाबॉलिज्म भी बढ़ता है। जिससे वजन तेजी से घटता है।

लंच के बाद नींबू पानी: जिन लोगों को पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या है, उन्हें लंच के बाद नींबू पानी पीना चाहिए। आप लंच के 30 मिनट बाद एक गिलास नींबू पानी पी सकते हैं।

वर्कआउट के बाद नींबू पानी: वर्कआउट करने के बाद आप शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स के लेवल को संतुलित करने के लिए नींबू पानी पी सकते हैं। इससे आपको तुरंत एनर्जी मिलती है और थकान कम होती है।

नींबू पानी कब नहीं पीना चाहिए?

अगर आप रात में नींबू पानी पीते हैं, तो यह आपके पाचन को खराब कर सकता है। इससे एसिडिटी, एलर्जिक रिएक्शन और बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। नींबू में सिट्रिक एसिड होता है, ऐसे में सुबह खाली पेट नींबू पानी पीने से एसिडिटी बढ़ने की संभावना होती है, खासकर अगर आपको पहले से ही एसिडिटी की समस्या है तो इस स्थिति में नींबू पानी न पिएं।

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फिल्म राम-लीला ने मेरी ज़िंदगी बदल दी: अकांक्षा शर्मा

 अभिनेत्री अकांक्षा शर्मा का कहना है कि फिल्म रामलीला देखने के बाद उनकी जिंदगी बदल गयी।  केसरी वीर: लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ इस साल की सबसे बहुप्रतीक्षित पीरियड फिल्मों में से एक है। अपनी हिंदी सिनेमा की पहली फिल्म केसरी वीर: लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ में, आकांक्षा ने एक जबरदस्त पहली झलक से दर्शकों को चौंका दिया है, जहां वह 'राजल' के किरदार में एक निडर और वीरांगना योद्धा के रूप में नजर आ रही हैं।

अकांक्षा ने बताया , मैं एक बहुत ही साधारण पृष्ठभूमि से आती हूं। मेरा फिल्मों से कोई नाता नहीं रहा है। मैं बारहवीं कक्षा में थी। बोर्ड की तैयारी कर रही थी, तभी मैंने राम-लीला देखी और वहीं से सब कुछ बदल गया। तभी मुझे एहसास हुआ कि मैं अभिनेत्री बनना चाहती हूं। मैंने कभी ये सपना देखा नहीं था, लेकिन उस फिल्म को देखकर मेरे अंदर कुछ जल उठा। और अब, मैं यहां हूं, अपनी डेब्यू फिल्म के साथ। मैं खुद को बहुत ही खुशकिस्मत और आभारी मानती हूं कि मुझे राजल जैसा किरदार निभाने का मौका मिला ,जिसकी लड़ाइयां सिर्फ मैदान में नहीं, बल्कि उसके भीतर भी थीं।

 

अकांक्षा अगली बार तेरा यार हूं मैं में नज़र आएंगी, जिसमें उनके साथ अमन इंद्र कुमार हैं। इस फिल्म का निर्देशन मिलाप ज़वेरी कर रहे हैं। इसके अलावा वह मिलाप ज़वेरी की ही एक और अनटाइटल्ड एक्शन-कॉमेडी फिल्म में भी दिखेंगी।

 

 

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रात में दही खाने के नुकसान

 क्या आपको भी यही लगता है कि दही खाने से सेहत पर सिर्फ पॉजिटिव असर पड़ता है? अगर हां, तो आपको अपनी इस गलतफहमी को जल्द से जल्द दूर कर लेना चाहिए। अगर आप गलत समय पर या फिर जरूरत से ज्यादा दही का सेवन करते हैं, तो आपकी सेहत पर पॉजिटिव की जगह नेगेटिव असर भी पड़ सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स अक्सर रात में दही को कंज्यूम करने से मना करते हैं। आइए इसके पीछे के कारणों के बारे में जानते हैं।

गला खराब हो सकता है

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दही की तासीर ठंडी होती है। आयुर्वेद के मुताबिक रात में दही का सेवन करने से आपका गला खराब हो सकता है। सर्दी-खांसी की समस्या से बचने के लिए आपको रात में दही खाने से बचना चाहिए। रात में दही कंज्यूम करने की वजह से आपको बलगम की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

गट हेल्थ पर पड़ सकता है भारी

रात में दही खाने की वजह से आपकी गट हेल्थ बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। दरअसल, रात में दही को डाइजेस्ट करना मुश्किल होता है। अगर आप रात में फैट और प्रोटीन रिच दही खाते हैं, तो आपको पेट से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा रात में दही खाने से आपकी बॉडी का मेटाबॉलिज्म भी स्लो हो सकता है।

गौर करने वाली बात

अगर आप सेहत से जुड़ी इन समस्याओं की चपेट में आने से बचना चाहते हैं, तो आपको रात में दही को अपने डाइट प्लान का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए। हेल्थ बेनिफिट्स के लिए दही को सुबह के समय या फिर दोपहर में कंज्यूम करना चाहिए। अगर दही को सही मात्रा में और सही तरीके से कंज्यूम किया जाए, तो आप अपनी ओवरऑल हेल्थ को काफी हद तक सुधार सकते हैं।

(डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।)


 

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गर्मी में पेट की जलन दूर कर देगा ये मसाला

 गर्मियों में पेट से जुड़ी समस्याएं काफी परेशान करती हैं। जरा सा तेल मसालेदार खाना खाने से ही जलन, गैस और एसिडिटी होने लगती है। ऐसा लगता है कि खाने में सिर्फ ठंडी चीजों को ही शामिल करें। खाने के बाद जिनको ज्यादा ब्लोटिंग होती है उन्हें डाइट में कुछ घरेलू चीजों को शामिल करना चाहिए, जिससे गैस एसिडिटी कम हो। रसोई में रखी ऐसी कई चीजें हैं जिन्हें खाने से पेट की जलन और गैस एसिडिटी को कम किया जा सकता है। इसके लिए सौंफ बेहतरीन मसाला है। सौंफ खाने से पेट ठंडा रहता है। गर्मियों में खाने के बाद 1 चम्मच सौंफ खाने से डाइजेशन से जुड़ी समस्याएं नहीं होती हैं। जानिए कब और कैसे करें सौंफ का इस्तेमाल?

पेट की जलन दूर कर देगा ये मसाला

गर्मियों में सौंफ का सेवन जरूर करना चाहिए। सौंफ की तासीर ठंडी होती है। गर्मियों में कई ड्रिंक्स और दूसरी डिश में सौंफ का उपयोग किया जाता है। आप सुबह खाली पेट सौंफ का पानी पी सकते हैं। इससे पेट को ठंडक मिलेगी और जलन कम होगी। गैस एसिडिटी को भी सौंफ खाकर दूर किया जा सकता है।

कैसे करें सौंफ का सेवन

सौंफ को खाने के बाद ऐसे ही चबाकर खा सकते हैं। सौंफ और मिश्री मिलाकर भी खा सकते हैं। सौंफ को पीसकर पाउडर बना लें। पानी के साथ 1 चम्मच सौंफ का पाउडर खा लें। आप चाहें तो सौंफ का पानी भी पी सकते हैं। एसिडिटी बहुत ज्यादा बनने वालों को सुबह खाली पेट कुछ दिनों सौफ का पानी पीना चाहिए।    

सौंफ के फायदे

सौंफ का सेवन करने से पाचन मजबूत होता है। सौंफ में फाइबर भरपूर होता है जिससे डाइजेशन में मदद मिलती है।

सौंफ लिवर के लिए भी अच्छी मानी जाती है। सौंफ का सेवन करने से लिवर डिटॉक्स होता है। इससे शरीर में जमा गंदगी साफ हो जाती है।

सौंफ खाने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है। इससे वजन घटाने में भी मदद मिलती है। शरीर पर जमा फैट कम होने लगता है।

पुरानी कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए सौंफ का इस्तेमाल फायदेमंद साबित होता है। कब्ज से परेशान लोगों को सौंफ जरूर खानी चाहिए।

ब्लड प्रेशर को ठीक रखने में भी सौंफ मदद करती है। इससे बीपी कंट्रोल होगा और दिमाग भी शांत होगा।

सौंफ का सेवन फीड कराने वाली महिलाओं के लिए फायदेमंद माना जाता है। इससे स्ट्रेस लेवल भी कम होता है।

 

 

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माधुरी दीक्षित के साथ फिर काम करेंगी तृप्ति डिमरी

  बॉलीवुड अभिनेत्री तृप्ति डिमरी एक बार फिर माधुरी दीक्षित के साथ फिर काम करती नजर आ सकती है। माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी ने अनीस बज्मी की फिल्म 'भूल भुलैया 3' में स्क्रीन स्पेस शेयर किया है। भूल भुलैया 3 के बाद तृप्ति और माधुरी एक कॉमेडी ड्रामा में फिर से साथ काम करने के लिए तैयार हैं।

माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी,विक्रम मल्होत्रा के प्रोडक्शन बैनर अबुंदंतिया एंटरटेनमेंट के लिए एक कॉमेडी ड्रामा में स्क्रीन स्पेस शेयर करेंगी, जिसका नाम फिलहाल 'मां बहन' बताया जा रहा है। यह एक नेटफ्लिक्स ओरिजिनल है और अगले महीने मुंबई में फ्लोर पर जाएगी।

 

इस फिल्म का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी कर रहे हैं, जिन्हें तुम्हारी सुलु और जलसा जैसी फिल्मों के निर्देशन के लिए जाना जाता है। यह फिल्म एक कॉमेडी-ड्रामा है, जो तीन किरदार पर आधारित है।इस फिल्म की सबसे खास बात है इसकी कहानी, जो एक मां और बेटी के रिश्ते को लेकर है।

माधुरी जहां मां के किरदार में होंगी, वहीं तृप्ति उनकी बेटी का रोल निभाएंगी।दोनों के बीच की नोक-झोंक, प्यार, तकरार और समझदारी इस फिल्म की जान होगी। चर्चा है कि इस फिल्म में रवि किशन और कॉमेडियन धारणा दुर्गा की भी अहम भूमिका होगी।

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कॉपीराइट उल्लंघन में एआर रहमान को कोर्ट का झटका

  मशहूर संगीतकार एआर रहमान को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने रहमान और फिल्म निर्माण कंपनी मैड्रास टॉकीज को आदेश दिया है कि वे 2 करोड़ रुपये अदालत में जमा करें। मामला तमिल फिल्म "पोन्नियिन सेलवन 2" के गीत "वीरा राजा वीरा" से जुड़ा है, जिसे कोर्ट ने डागर परिवार की रचना "शिव स्तुति" की "हूबहू नकल" बताया है।

मामले की पृष्ठभूमि:
उस्ताद फ़ैयाज़ वसीफुद्दीन डागर ने आरोप लगाया था कि फिल्म के गाने में उनके पिता और चाचा द्वारा रचित "शिव स्तुति" का इस्तेमाल बिना अनुमति और बिना श्रेय के किया गया है। इसी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह की बेंच ने कहा कि गाना सिर्फ प्रेरित नहीं, बल्कि "शिव स्तुति" का सीधा और स्पष्ट कॉपी है, जिसमें केवल मामूली बदलाव किए गए हैं। कोर्ट ने रहमान और मैड्रास टॉकीज को आदेश दिया है कि गाने के क्रेडिट में उचित संशोधन करें और स्वर्गीय उस्ताद नासिर ज़हीरुद्दीन डागर तथा स्वर्गीय उस्ताद नासिर फ़ैयाज़ुद्दीन डागर को श्रेय दें।

कोर्ट के आदेश:
    2 करोड़ रुपये अदालत में जमा करें।
    वादी फ़ैयाज़ वसीफुद्दीन डागर को 2 लाख रुपये की लागत चुकाएं।
    ओटीटी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर नया क्रेडिट स्लाइड जोड़ें, जिसमें "शिव स्तुति" के मूल रचनाकारों का उल्लेख हो।

कोर्ट ने यह भी दोहराया कि हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की मौलिक रचनाएं कॉपीराइट एक्ट के तहत पूरी तरह संरक्षित हैं और उनके रचनाकारों को उनके अधिकार मिलते रहेंगे।

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छत्तीसगढ़ में लिफ्ट और एस्केलेटर की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला

 छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में लिफ्ट और एस्केलेटर की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। अब सभी लिफ्ट और एस्केलेटर का पंजीकरण, नवीनीकरण और निरीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह नियम के तहत लिफ्ट और एस्केलेटर का संचालन उच्च सुरक्षा मानकों के अनुसार जरूरी है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा और व्यवसायों को कानूनी परेशानियों से भी राहत मिलेगी।


 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर सरकार ने लिफ्ट और एस्केलेटर से जुड़ी सभी सेवाओं को पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट में शामिल कर दिया है। अब इन सेवाओं को अधिकतम 30 दिन के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। अगर तय समय में काम नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे। इससे उद्योगों और व्यावसायिक संस्थानों को समय पर सेवा मिलेगी ।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि आम जनता की सुरक्षा और सुविधाओं हमारी सरकार की प्राथमिकता है। लिफ्ट और एस्केलेटर की सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है। इसलिए हमने इस सेवा को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल किया है, ताकि हर लोगों को समय पर सेवा मिले और उनका भरोसा बना रहे।

मुख्य विद्युत निरीक्षणालय ने सभी बिल्डरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और लिफ्ट संचालकों से अपील की है कि वे नए नियमों का कड़ाई पालन करें और सुरक्षित रूप से लिफ्ट और एक्सलेटर की सुविधाएं उपलब्ध कराएं। इससे बीमा का खर्च भी घटेगा और कारोबार का जोखिम कम होगा।
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प्रत्येक नागरिक बने प्रकृति का प्रहरी - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए धरती के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए जन-सहभागिता का आह्वान किया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 
छत्तीसगढ़ प्राकृतिक विविधता से भरपूर प्रदेश है। यहाँ की संस्कृति, आजीविका और जीवनशैली सीधे तौर पर प्रकृति से जुड़ी है। इसी भावना के साथ राज्य सरकार वृक्षारोपण, जल-संरक्षण, नदी-नालों का पुनर्जीवन, सामुदायिक वन प्रबंधन और पर्यावरणीय रूप से संतुलित औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दे रही है।

उन्होंने बताया कि सरकार की योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को एक केन्द्रीय तत्व बनाया गया है, ताकि प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाते हुए आर्थिक प्रगति को सुनिश्चित किया जा सके। स्थानीय समुदायों को भी इन प्रयासों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उनका जीवन स्तर सुधरे और प्राकृतिक धरोहरें भी सुरक्षित रहें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि हर व्यक्ति एक वृक्ष लगाए, उसकी देखभाल करे और अपने आसपास के पर्यावरण को स्वच्छ रखने का संकल्प ले। जल और ऊर्जा जैसे संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें तथा हरसंभव अक्षय ऊर्जा का प्रयोग कर पृथ्वी को प्रदूषण-मुक्त बनाने में योगदान दें।
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खूबसूरत प्राकृतिक परिवेश में निर्मित वाटिका में औषधीय पौधे, एडवेंचर जोन, तितली जोन में 53 लाख रूपए की लागत से बनाई गई है पर्यावरण वाटिका

 अगर आप प्रकृति के बीच स्वच्छ वातावरण में अपने परिवार के साथ समय बिताने आना चाहें तो बगिया में बनी पर्यावरण वाटिका आपका इंतजार कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले में स्थित अपने गृहग्राम बगिया में पर्यावरण वाटिका का लोकार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वाटिका परिसर में नारियल, सुपाड़ी और सीता अशोक का पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।


   सुरम्य प्राकृतिक परिवेश में 53 लाख रुपए की लागत से 28 हेक्टेयर में निर्मित पर्यावरण वाटिका में एडवेंचर जोन, औषधीय गुणों से भरपूर पौधे, चिल्ड्रन पार्क, वाटर फॉल, मेडिटेशन हट, तितलियों के जीवन चक्र को प्रदर्शित करता तितली जोन और कई निर्माण कराए गए हैं, जो लोगों को प्रकृति के और भी करीब ले जाकर आनंदमय अनुभव कराती है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद ग्रामीणों से कहा कि इसके बन जाने से यहां पर रोजगार के अवसर निर्मित होंगे।

वाटिका में लगाये गए हैं औषधीय गुणों से भरपूर पौधे

        पर्यावरण वाटिका में जंगल ट्रेल का निर्माण किया गया है। जहां योग जोन, आरोग्य वन पथ, जंगल जिम, तितली जोन, मोगली एडवेंचर जोन, ऑक्सीजन बूथ, पैगोडा, गजराज जोन, तालाब, नेचुरल झूले, किड्स प्ले जोन बनाया गया है। यहां पर औषधीय गुणों से भरपूर हर्रा, गिलोय, बेली बांस, सर्पगंधा, अश्वगंधा, बारबाडोस लिली, पुदीना, लेमन ग्रास, पत्थरचट्टा, आंवला आदि अनेक प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं।

   वाटिका में निर्मित तितली जोन में तितली के पर्यावरण में योगदान को प्रदर्शित करते हुए तितली के सम्पूर्ण जीवन चक्र को दर्शाया गया है। यहां पर जशपुर में पाई जाने वाली सभी तितलियों की प्रजातियों को भी प्रदर्शित किया गया है। इस प्रदर्शन का उद्देश्य तितलियों के बारे में लोगों को जानकारी देने के साथ उनके संरक्षण के महत्व के बारे में भी बताना है।

मोगली एडवेंचर जोन में बच्चों के लिए हैं विभिन्न साहसिक खेल 

वाटिका में बने किड्स प्ले जोन में बच्चों के लिए आकर्षक झूले लगाए गए हैं। जिसमें प्राकृतिक झूले भी बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त बच्चों के मनोरंजन के लिए मोगली एडवेंचर जोन बनाया गया है। जहां कमांडो नेट, टायर वॉक, बैलेंस ब्रिज, टायर क्लाइम्बिंग, रोप वॉक, इंक्लाइंड लॉग, कार्गाे नेट, सिंगल लाइन ब्रिज, बर्मा ब्रिज आदि बनाये गए हैं।

       वाटिका में सरई छांव प्राकृतिक पैगोडा का निर्माण किया गया है। जहां परिवार के साथ प्रकृति का आनंद लिया जा सकता है। यहां पर आदिम कलाकारों द्वारा आदिम संस्कृति को प्रदर्शित करती कास्ट मूर्तियां भी लगाई गई हैं। इस वाटिका में पर्यावरण के प्रति जागृति दिखाते हुए बांस के बने आकर्षक डस्टबिन भी लगाए गए हैं। 
     
मुख्यमंत्री बच्चों से पूरी आत्मीयता से मिले, दिए फल और ड्राई फ्रूट्स 

मुख्यमंत्री जब भी बच्चों से मिलते है पूरे वात्सल्य भाव से मिलते हैं। आज जब मुख्यमंत्री पर्यावरण वाटिका का अवलोकन कर रहे थे, तब उन्होंने वहां खेल रहे बच्चों को अपने पास बुलाया और उनसे प्रेम भाव से बात की। मुख्यमंत्री ने उन्हें फल और ड्राय फ्रूट्स भेंट किए। प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले दीपांशु यादव, नीतू देवार, भीम विश्वकर्मा, रितेश राम सहित अन्य बच्चे मुख्यमंत्री से मिलने के बाद काफी खुश नजर आए।

इस अवसर पर विधायक और सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, पीसीसीएफ श्री अरुण पांडेय, कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी श्री अंकित गर्ग, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, वनमंडलाधिकारी श्री जितेन्द्र उपाध्याय, आईएफएस श्री निखिल अग्रवाल, सर्वश्री रामप्रताप सिंह, भरत सिंह, सुनील गुप्ता सहित अधिकारीगण और जनप्रतिनिधिगण मौजूद थे।
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पसंदीदा फिल्म डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है हमारा छत्तीसगढ़– मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज रामनवमी के शुभ अवसर पर अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ी पारिवारिक फिल्म सुहाग का ट्रेलर लॉन्च किया। उन्होंने फिल्म के अभिनेता, विधायक और पद्मश्री से सम्मानित श्री अनुज शर्मा सहित पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लंबे समय बाद छत्तीसगढ़ी सिनेमा में एक पारिवारिक फिल्म दर्शकों के बीच आ रही है, जो परिवार, संस्कृति, परंपरा और रिश्तों की भावनात्मक गहराइयों को अभिव्यक्त करती है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म हमारी पारंपरिक जीवनशैली और मूल्यों को सजीव रूप से प्रस्तुत करती है, जो दर्शकों को न केवल भावनात्मक रूप से जोड़ती है, बल्कि उन्हें अपने सामाजिक परिवेश से भी जोड़ती है।

श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब पसंदीदा फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। यहाँ लगातार फिल्में और वेब सीरीज़ बन रही हैं। प्रदेश सरकार फिल्म निर्माण को प्रोत्साहन देने हेतु कृतसंकल्पित है, जिससे इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवाओं को नए अवसर मिल सकें।

विधायक व अभिनेता श्री अनुज शर्मा ने मुख्यमंत्री श्री साय को फिल्म की थीम और संदेश के बारे में विस्तार से जानकारी दी और बताया कि फिल्म 18 अप्रैल से प्रदेशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री को फिल्म देखने के लिए  आमंत्रित भी किया। फिल्म के निर्माता श्री चंद्रशेखर तिवारी, श्रीमती वत्सला सौरभ शर्मा, सह-निर्माता श्री लोकनाथ दीवान, लेखक व निर्देशक श्री राहुल थवाईत तथा श्री सिद्धांत भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि फिल्म सुहाग – “वचन में बंधे मया के कहानी” – एक संवेदनशील पारिवारिक कथा है, जिसमें छत्तीसगढ़ी सिनेमा के सुपरस्टार श्री अनुज शर्मा और अभिनेत्री सुश्री अनिकृति चौहान पहली बार साथ नज़र आएँगे। श्री अनुज शर्मा का अभिनय इस फिल्म में भी अपनी सहजता, गहराई और भावनात्मक प्रभाव के लिए सराहा जा रहा है।

इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, राज्य समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, उपाध्यक्ष श्रीमती चंद्रकांति वर्मा तथा छत्तीसगढ़ राज्य तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र कुमार साहू भी उपस्थित थे।
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हाई यूरिक एसिड में मखाने का सेवन है लाभकारी

 मखाना एक ऐसा सुपरफूड है जो पाचन क्रिया को तेज करने वाला माना जाता है। ये फाइबर से भरपूर है जो कि पानी को सोखकर आंतों के कामकाज की गति को तेज कर देता है। ये प्रेशर बढ़ाता है और आंतों के मेटाबोलिक रेट को बढ़ाता है। लेकिन, हाई यूरिक एसिड में ये फूड बेहद कारगर तरीके से काम करता है। ये शरीर में जमा प्यूरिन के कणों को बाहर निकालने में मदद करता है और फिर यूरिक एसिड में कमी लाता है। इसके अलावा भी ये फूड हाई यूरिक एसिड की समस्या में फायदेमंद है। तो, जानते हैं इस बारे में विस्तार से।

हाई यूरिक में मखाना खाने के फायदे

प्यूरिन को पचाता है: दरअसल, मखाना को ऐसे समझें कि इसका फाइबर अपने साथ बहुत सारी चीजों को सोख सकता है। जैसे कि ये शरीर से प्यूरिन को खींच लेता है और इसे मल के साथ शरीर से बाहर करने में मदद करता है। इसके अलावा ये प्रोटीन से निकलने वाले वेस्ट को पचाने में मदद करता है जिससे ये यूरिक एसिड के रूप में शरीर में जमा न हो। तो, इस वजह से हाई यूरिक में मखाना जरूर खाएं।

हड्डियों के लिए बेहद फायदेमंद: हाई यूरिक में मखाना खाना कई प्रकार से फायदेमंद है। ये हड्डियों के लिए अच्छा है। मखाना कैल्शियम, मैग्नीशियम और प्रोटीन का एक उत्कृष्ट स्रोत है, जो स्वस्थ हड्डियों के लिए जरूरी है।  इससे प्यूरिन के कारण हड्डियों में होने वाली सूजन की समस्या को कम करने में मदद मिलती है। तो, आपको करना ये चाहिए कि शरीर में यूरिक एसिड को बढ़ने से रोकें और इसके लिए मखाना खाएं।

कैसे करें मखाना का सेवन?

मखाना का सेवन आप कभी भी कर सकते हैं। आप इसे स्नैक्स और लंच डिनर में भी खा सकते हैं।  रोज़ाना सुबह या रात में सोने से पहले मखाना को दूध में भिगोकर खाएं। इसके अलावा आप मखाने की खिचड़ी भी खा सकते हैं जो कि इस समस्या में फायदेमंद है। सतह ही आप मखाने का चाट भी खा सकते हैं, तो, इस तरह आप हाई यूरिक एसिड में मखाना खाएं।

 

 

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