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इन चीजों से दूर ही रहें गठिया के मरीज

 गठिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है। इसमें शरीर के टिशूज और हड्डियां समय के साथ तेजी से खराब होने लगते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं यह ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियों के जोड़ में तेजी से दर्द होने लगता है और उसके आसपास के एरिया में सूजन आ जाती है। अगर आप भी गठिया के गंभीर बीमारी से जूझ रहे है तो इन फूड आइटम को भूल से भी न खाएं। सर्दियों में यह समस्या और भी ज्यादा बढ़ सकती है।

संतरा

सर्दियों में संतरा खूब खाया जाता है लेकिन अगर आपको गठिया की बीमारी है तो आपको इस फल से परहेज करना चाहिए। क्योंकि संतरा में विटामिन सी होता है जो हड्डियों को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। सिर्फ इतना ही नहीं हड्डियों में जमा कैल्शियम की परत को भी हटाने लगता है जिसके कारण हड्डियां कमजोर हो जाती है और गठिया का दर्द बढऩे लगता है।

 बैंगन

गठिया के मरीज को बैंगन खाने से बचना चाहिए क्योंकि यह नाइटशेड वेजिटेबल है जिससे हड्डियों को काफी ज्यादा नुकसान होता है। नाइटशेड सब्जियों में सोलानिन नाम का कंपाउंड होता है जो हड्डियों को सूजन को बढ़ाता है और स्थिति को और भी गंभीर कर सकता है। गठिया के मरीजों को बैंगन खाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे हड्डियों को काफी ज्यादा नुकसान होता है और इससे हड्डियां कमजोर भी होने लगती हैं।

कॉफी

सर्दियों में ज्यादातर लोग कॉफी खूब पीते हैं। कॉफी में कैफीन की मात्रा कॉफी अधिक होती है जो गठिया की बीमारी को बढ़ा सकता है। सिर्फ इतना ही नहीं यह हड्डियों को कॉफी ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। जिसके कारण जोड़ों में भयंकर दर्द होता है। सर्दियों में इन चीजों से परहेज करना चाहिए। कैल्शियम से भरपूर  एंटी इंफ्लेमेटरी फूड्स कम से कम खाना चाहिए जो शरीर में सूजन को कम करें और गर्म रखे।

 

 

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एक दिन में 3-4 से ज्यादा काजू ना खाएं

 काजू खाने के ढेरों फायदे हैं, पर आपको दिन में 3-4 या बहुत से बहुत 5 काजू से ज्यादा नहीं खाने चाहिए। अगर आप इससे ज्यादा काजू खाते हैं तो इससे पेट खराब हो सकता है। ज्यादा काजू खाने से फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।

काजू खाने के फायदे

जो लोग रोजाना काजू खाते हैं उनकी हड्डियां मजबूत बनती है। काजू में कैल्शियम और मैग्नीशियम होता है जो बोन्स के लिए अच्छा होता है। बच्चों को रोजाना 2-3 काजू खिला सकते हैं।

2-3 काजू डायबिटीज के मरीज भी खा सकते हैं। काजू खाने से ग्लूकोज लेवल कंट्रोल रहता है। ऐसे में डायबिटीज के रोगी अपने खाने में काजू को जरूर शामिल कर लें।

अगर आप सीमित मात्रा में काजू खाते हैं तो इससे पेट और पाचन अच्छा बनता है। काजू में फाइबर होता है जो डाइजेशन को बेहतर बनाता है। इससे गैस और कब्ज की समस्या दूर होती है।

काजू में गुड फैट और कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है जो मेटाबॉलिज्म बढ़ाते में मदद करता है। 3-4 काजू खाने से मोटापा भी कम किया जा सकता है। इससे भूख को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है।

स्किन के लिए भी काजू बहुत फायदेमंद हैं। रोजाना काजू खाने से त्वचा की झुर्रियां कम होती हैं। काजू में विटामिन ई और एंटी-क्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं जो त्वचा और बालों को मजबूत बनाने का काम करता है।

 

 

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किचन क्लीनिंग के टिप्स

 हमारे घर का सबसे अहम हिस्सा किचन होता है। जिसकी साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए। किचन में रोजाना खाना बनाया जाता है, जिसके कारण किचन गंदा और चिपचिपा हो जाता है। वहीं तेल-मसालों के जिद्दी दाग किचन की खूबसूरती को खराब करने का काम करता है। इसलिए किचन की रोजाना और बेसिक साफ-सफाई का खास ख्याल रखना चाहिए। क्योंकि अगर आप किचन को रोजाना साफ नहीं करते हैं, तो यहां पर मौजूद गंदगी खाने में आ सकती है और आप बीमार पड़ सकते हैं।

किचन की साफ-सफाई के लिए बेकिंग सोडा एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। बेकिंग सोडा के इस्तेमाल से किचन की चिकनाहट को साफ किया जा सकता है। इसके लिए बेकिंग सोडा को करीब 10 मिनट के लिए किचन में डाल दें। फिर इसको अच्छे से साफ कर लें।

इसके साथ ही विनेगर से काफी चीजों साफ की जाती हैं। साथ ही आप इससे किचन की गंदगी और चिकनाहट को भी दूर कर सकती हैं।

बता दें कि किचन की सफाई के लिए नींबू भी काफी मददगार हो सकता है। इसके लिए आपको किचन के गंदे वाले हिस्से में नींबू को 5 मिनट लगाकर छोड़ दें। फिर 5 मिनट बाद इसको साफ कर लें।

किचन की चिकनाई को आसानी से साफ करने के लिए आप गरम पानी का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। य़ह किचन की साफ-सफाई का सबसे अच्छा तरीका है। इससे किचन में लगी चिकनाई आसानी से साफ हो जाएगी। किचन में चिकनाई वाली जगह पर गरम पानी डालें और यह धीरे-धीरे साफ हो जाएगा।

कई बार किचन में तेल की गंदगी और मसालों के दाग व खारे पानी के दाग लग जाते हैं। ऐसे में इन जिद्दी दागों को साफ करने के लिए आप हाइड्रोजन पेरोक्साइड का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे किचन में तेल-मसालों के जिद्दी दाग आसानी से साफ हो जाएंगे और आपको ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी।

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अगर मुंह में हो गए हैं छाले

 शहद के प्रयोग से आपके मुंह के छालो का इलाज किया जा सकता है। शहद में एंटी-बैक्टीरियल प्रॉपर्टी होती है, जो मुंह के छालों को ठीक करने में बहुत असरदार है।

शहद को अपनी उंगली पर लगाकर छालों की जगह पर लगाएं ऐसा करने से छाले ठीक हो जायेगे। शहद मुंह के छालों को नमी प्रदान करता है और उसे सूखने से बचाता है। अगर आप शहद के साथ एक चुटकी हल्दी डालकर लगाएंगे तो वह बहुत जल्दी ठीक हो जाएंगे। आप यह उपाय दिन में तीन-चार बार कर सकते है।

- मुंह के छालों को दूर करने के लिए नारियल का इस्तेमाल भी फायदेमंद होता है। नारियल तेल के अंदर एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटी-फंगल और एंटी-वायरल प्रॉपर्टी होती है। आप नारियल का तेल, पानी और दूध इन तीनों चीजों का इस्तेमाल मुंह के छालों को दूर करने के लिए कर सकते हैं। यह दर्द को कम करने में भी मदद करता है। बच्चों के मुंह के छालों को ठीक करने के लिए उन्हें नारियल पानी का सेवन करना चाहिए। बच्चों को नारियल के पानी से गरारे भी करवा सकते हैं।

- एलोवेरा जूस के अंदर सूदिंग प्रॉपर्टी होती है, लगातार इस्तेमाल करने पर यह छालों से होने वाले दर्द को कम करता है। एलोवेरा जूस के सेवन से पेट से संबंधित कई बीमारियां ठीक हो जाती है। ऐलोवेरा का जूस पेट से संबंधित 200 से ज़्यादा बीमारियों को दूर करता है। ऐलोवेरा के जूस से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। छालों से राहत पाने के लिए थोड़ा सा एलोवेरा जूस अपने छालों पर लगाइए।

- तुलसी एक औषधीय पौधा है जिसमें विटामिनऔर खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। सभी रोगों को दूर करने और शारीरिक शक्ति बढ़ाने वाले गुणों से  भरपूर इस औषधीय पौधे को प्रत्यक्ष देवी कहा गया है।

 

 

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कौवे मनुष्यों के समान गिनती करते हैं

 वैसे तो पहले भी कुछ अध्ययनों में देखा जा चुका है कि कौवों में संख्या ताड़ने की क्षमता होती है। जैसे यदि उनके सामने कई डिब्बे रखकर मात्र 6 डिब्बों में खाने की चीज़ें रखी जाएं तो वे मात्र 6 डिब्बों को पलटाने के बाद रुक जाते हैं। या यदि कौवे किसी बगीचे में हैं और कुछ मनुष्य वहां घुसें तो वे छिप जाते हैं। और तब तक छिपे रहते हैं जब तक कि सारे मनुष्य निकल न जाएं। ऐसा देखा गया था कि वे यह ‘गिनती' 16 तक कर पाते हैं। इसी प्रकार से एक प्रयोग में यह भी देखा गया था कि यदि किसी स्क्रीन पर कुछ बिंदु अंकित हों तो वे ताड़ सकते हैं कि दो समूहों में बिंदुओं की संख्या बराबर है या नहीं।

और अब जर्मनी के टुबिंजेन विश्वविद्यालय के जंतु वैज्ञानिक एंड्रियास नीडर और उनके साथियों ने इसमें एक नया आयाम जोड़ा है। साइन्स पत्रिका में प्रकाशित अपने शोधपत्र में इस टीम ने बताया है कि कौवों की यह क्षमता मनुष्यों में संख्या कौशल के विकास को समझने में सहायक हो सकती है।

जर्मनी के शोधकर्ताओं ने तीन कैरियन कौवों (Corvus corone) के साथ काम किया। इन कौवों को आदेशानुसार कांव करने का प्रशिक्षण दिया जा चुका था। इसके बाद अगले कुछ महीनों तक इन्हें यह सिखाया गया कि स्क्रीन पर 1, 2, 3 या 4 के दृश्य संकेत दिखने पर उन्हें उतनी ही संख्या में कांव करना है। उन्हें ऐसे श्रव्य संकेतों से भी परिचित कराया गया जो एक-एक अंक से जुड़े थे।

प्रयोग के दौरान ये कौवे स्क्रीन के सामने खड़े होते थे और उन्हें दृश्य या श्रव्य संकेत दिया जाता था। उनसे अपेक्षा की जाती थी कि वे उस संकेत से मेल खाती संख्या में कांव करेंगे और यह काम पूरा करने के बाद वे ‘एंटर कुंजी' पर चोंच मारेंगे। यदि वे सही करते तो उन्हें पुरस्कार स्वरूप लजीज़ व्यंजन दिया जाता।

कौवे अधिकांश बारी सही रहे। कम से कम उनके प्रदर्शन को मात्र संयोग का परिणाम तो नहीं कहा जा सकता।

प्रयोग करते-करते शोधकर्ताओं को यह भी समझ आया कि वे कौवे की पहली कांव को सुनकर यह अंदाज़ लगा सकते हैं कि वह कुल कितनी बार कांव करेगा। इसका मतलब यह हुआ कि कौवा पहले से ही कांव की संख्या की योजना बना लेता है अर्थात यह प्रक्रिया सचमुच संज्ञानात्मक नियंत्रण में है। अलबत्ता, ऐसा नहीं था कि कौवे हर बार सटीक होते थे। कभी-कभार वे कम या ज़्यादा बार कांव भी कर देते थे। लेकिन यह भी पूर्वानुमान किया जा सकता था।

लिहाज़ा, यह तो नहीं कहा जा सकता कि ये तीन कौवे वास्तव में गिन रहे थे जिसके लिए संख्याओं की सांकेतिक समझ ज़रूरी है लेकिन हो सकता है कि उनका प्रदर्शन इस समझ के विकास का अग्रदूत हो। आगे और शोध ही इस सवाल पर रोशनी डाल सकेगा। 

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चेहरे पर निखार पाने ट्राई करें ये घरेलू उपाय

 आज हम आपको चावले के दो ऐसे घरेलू उपाय बताएंगे, जिसे आपकी स्किन पर प्राकृतिक रूप से निखार आएगा।

चावल का फैसपैक

एक बोल में दो टी-स्पून चावल का आटा लें और इसमें चार चम्मच गुलाब जल मिलाएं। अब इसमें एक टी-स्पून पिघला हुआ घी मिलाएं। इसे अच्छे से मिक्स करें और पैक को डाउन स्ट्रोक के साथ चेहरे पर लगाएं। 15 मिनट पर इसे हल्के गरम पानी से धो लें। इस पैक से स्किन की ड्राईनेस की समस्या दूर हो जाएगी और स्किन का निखार बढ़ जाएगा।

टेनिंग दूर करेगा टमाटर

एक टमाटर को कद्दूकस कर लें और उसके जूस को छान लें। इस रस में एक चम्मच चावल का आटा मिलाएं। यह मिक्स थोड़ा गाढ़ा बनेगा। इसे चेहरे पर 15-20 मिनट लगा रहने दें और फिर चेहरा साफ कर लें। इससे चेहरा साफ दिखने लगेगा। फेस धोने के बाद चाहे, तो चावल का पानी बतौर टोनर लगा सकते हैं, जो रंगत को और निखारेगा।

 

 

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वजन घटाने के लिए ये है बेस्ट ड्रिंक

 बढ़ते वजन से छुटकारा पाने के लिए आप अब सोने से पहले ये 3 हेल्दी वेट लॉस ड्रिंक्स ट्राई करके देखें। खास बात यह है कि वजन घटाने के लिए आपको एक्सरसाइज या घंटों जिम में पसीना भी नहीं बहाना पड़ेगा। आइए जानते हैं कौन से हैं वो 3 ड्रिंग्स जिनका सोने से पहले सेवन करने से आप बढ़ते वजन से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं।

कैमोमाइल टी-

कैमोमाइल टी वजन घटाने के लिए बेस्ट ड्रिंक मानी जाती है। अगर आप भी अपने बढ़ते वजन को कंट्रोल करना चाहते हैं तो रात को सोने से पहले कैमोमाइल टी का सेवन करना न भूलें। ऐसा करने से न सिर्फ आपका वजन नियंत्रित रहेगा बल्कि आपको नींद भी अच्छी आएगी। हेल्थ पर हुए कई अध्ययनों में यह सुझाव दिया गया है कि कैमोमाइल टी शुगर लेवल को नियंत्रित करके वजन घटाने में मदद करती है।

दालचीनी की चाय-

यदि आप कम समय में ही अपना वजन घटाना चाहते हैं, तो यह दालचीनी चाय का सेवन शुरू कर दें। वेट कंट्रोल करने के लिए दालचीनी की चाय बेस्ट नेचुरल ड्रिंक मानी जाती है। इस चाय में मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के गुण मौजूद होने के साथ कई एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबायोटिक गुण भी मौजूद होते हैं जो इसे अच्छा डिटॉक्स ड्रिंक बनाते हैं। दालचीनी की चाय का सेवन करने से फैट को जलाने में मदद मिलती है।  

मेथी की चाय-

अगर बढ़ते वजन के साथ आपको नींद न आने की समस्या भी परेशान करती है तो मेथी की चाय का सेवन जरूर करें। इसके अलावा अगर किसी दिन आपको लगे कि आपने जरूरत से ज्यादा भोजन खा लिया है, तो पाचन में सुधार के साथ खाना पचाने में यह चाय आपकी मदद कर सकती है।

मेथी की चाय बनाने के लिए सबसे पहले एक चम्मच मेथी एक गिलास पानी में रातभर भिगोकर रख दें। सुबह इसे छानकर पानी अलग कर दें और इस पानी को गुनगुना कर रात में सोने से पहले पीएं। नियमित रूप से इसके सेवन से आप बहुत जल्दी वजन कंट्रोल कर लेंगे।

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कई बीमारियों के लिए रामबाण इलाज है कच्ची हल्दी

 भारतीय किचन में कई तरह के मसाले पाए जाते हैं। इन मसालों का इस्तेमाल ना सिर्फ खाने को स्वादिष्ट और सुगंधित बनाने के लिए बल्कि बल्कि दवा के तौर पर भी किया जाता है। यह मसाले औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। इन्हीं मसालों में एक मसाला हल्दी है। यह खाने को स्वादिष्ट बनाने के साथ ही स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कच्ची हल्दी भी तमाम औषधीय गुणों से भरपूर होती है।

कच्ची हल्दी शरीर में सूजन को काफी हद तक कम करने में सहायक होती है। इसके अलावा कच्ची हल्दी गठिया और हृदय रोग के खतरे को भी कम करता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कच्ची हल्दी के कई फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।

एंटीऑक्सीडेंट का समृद्ध स्रोत

कच्ची हल्दी में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो पुरानी बीमारियों के खतरे को कम करने में सहायक होती है। कच्ची हल्दी का सेवन करने से पहले इसके अच्छे से पीस लें। फिर गर्म पानी में मिलाएं और आप चाहें तो इसमें शहद भी डाल सकती हैं। इस ड्रिंक के नियमित सेवन से आपके शरीर से टॉक्सिक पदार्थ बाहर निकलते हैं। बता दें कि कच्ची हल्दी का यह ड्रिंक डिटॉक्स ड्रिंक के तौर पर काम करता है।

पाचन में सुधार

कच्ची हल्दी के सेवन से पाचन तंत्र भी स्वस्थ रहता है। इसके अलावा यह अपच और सूजन के लक्षणों को भी कम करने में सहायक होती है। इसके सेवन से आंत के स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है और मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है। साथ ही इसके सेवन से वेट कम होने में भी सहायता मिलती है।

इम्यून सिस्टम

बता दें कि कच्ची हल्दी में एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके इस्तेमाल से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। इसलिए रोजाना रात में सोने से पहले एक गिलास दूध में पिसी हल्दी को मिलाकर पीने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। साथ ही इसके सेवन से कई संक्रमण और अन्य तरह की बीमारियां नहीं होती हैं।

दर्द में राहत

कच्ची हल्दी में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाया जाता है, जो दर्द में राहत दिलाने में सहायक होता है। अगर आप भी गठिया और मांसपेशियों में दर्द जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं। तो आपके लिए कच्ची हल्दी रामबाण इलाज साबित हो सकती है। इसके लिए आप हल्दी वाले दूध का नियमित तौर पर सेवन करें।

स्किन के लिए फायदेमंद

कच्ची हल्दी पोषक तत्वों से भरपूर होती है। साथ ही यह हमारी स्किन के लिए भी फायदेमंद होती है। हल्दी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण स्किन की सूजन, मुंहासों आदि को कम करने में सहायक होती है। इसलिए सप्ताह में एक बार हल्दी का लेप अपने चेहरे पर लगाएं। इससे आपकी स्किन ग्लोइंग बनेगी।

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दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हैं धनिए की पत्तियां

 हरी सब्जियां सेहत के लिए जबरदस्त फायदेमंद होती हैं. रोजाना इनका सेवन करने से शरीर सेहतमंद रहता है. हालांकि, कुछ सब्जियां ऐसी हैं, जिनके फायदे के बारें में ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं. पुराने समय से ही इनका इस्तेमाल होता आ रहा है. हमारे पूर्वज भी इन सब्जियों का सेवन बड़े ही चाव से करते थे. आयुर्वेद में भी इन सब्जियों के गुण बताए गए हैं. ऐसी ही चार सब्जियों के बारें में आपको आज बताने जा रहे हैं, जिनके सेवन से सेहत हमेशा बेहतर बनी रहती है.

धनिया की पत्तियों के फायदे

सेहत के लिए धनिया की पत्तियां काफी फायदेमंद मानी जाती हैं. इनके सेवन से हाई कोलेस्ट्रॉल कम होता है। ऐसे में खाने में धनिया की पत्तियां डालकर खाना चाहिए. इन पत्तियों की तासीर ठंडी होती है। ये दिल की सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है।

कद्दू के फायदे

आयुर्वेद में कद्दू को जबरदस्त फायदेमंद माना गया है. इस सब्जी को शरीर को शांत और ठंडा रखने वाला माना जाता है। इसे खाने से स्किन से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलती है। बुजुर्गों को जोड़ों को दर्द से आराम मिल सकता है. आयुर्वेद में इसे वजन कम करने वाला भी बताया गया है।

खीरा के फायदे

आयुर्वेद में बताया गया है कि कच्चा खीरा खाने के कई फायदे हैं. इससे पाचन अग्नि में कमी आती है। हालांकि, आयुर्वेद खीरा को खाने के साथ, पहले या बाद में खाने से मना करता है। खाने से पहले अच्छी तरह पकाकर भोजन के साथ इसका सेवन कर सकते हैं।

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त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद है चंदन का तेल

 अगर आप तनाव या डिप्रेशन की समस्या से परेशान हैं तो आपको चंदन के तेल का इस्तेमाल करना चाहिए। चंदन के तेल के अंदर एक रासायनिक कम्पाउंड होता है चंदन के तेल की कुछ बूंदें सूंघने से तनाव की समस्या कम हो सकती है।

अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं तो आपको चंदन के तेल का इस्तेमाल करना चाहिए।  चंदन के तेल की खुशबू से हार्मोंस एक्टिव होते हैं और ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है।  ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होने से हार्ट रेट भी ठीक रहता है।  इसलिए ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने के लिए चंदन का तेल इस्तेमाल कर सकते हैं।

चंदन के तेल से शरीर में सूजन की समस्या कम होती है।  इस तेल में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जिससे सूजन कम करने में मदद मिलती है।  इसके अलावा चंदन का तेल त्वचा की लालिमा को भी कम करता है।

अगर आपको नींद नहीं आने की समस्या है तो आपको चंदन के तेल से मसाज करवानी चाहिए।  इससे अनिद्रा की समस्या दूर हो जाती है। चंदन का तेल केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में पैदा होने वाले तनाव को कम करता है. कमजोर याददाश्त को भी ठीक करता है।

चंदन त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद है इसका तेल भी कई फायदे करता है। चंदन के तेल से मसाज करने पर कोशिकाओं को ऑक्सीजन मिलता है। और मुहांसों की समस्या भी दूर होती है।  चेहरे पर दाग धब्बों को भी चंदन दूर करता है।

 

 

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खीर को बनाएं हेल्दी

 हर भारतीय घरों में बनाया जाने वाला डेजर्ट खीर है। किसी भी शुभ अवसर हो या फिर कोई फेस्टिवल, तो लोग अक्सर मुंह मीठा करने के लिए खीर जरुर बनाते हैं। आमतौर पर व्रत-उपवास के दौरान भी खीर बनाई जाती है। अपने टेस्ट के अनुसार,  चावल, साबूदाना से लेकर मखाना तक कई तरह की खीर बनाते हैं। जिन लोगों को अपनी फिटनेस को लेकर अधिक ख्याल रहता है, वे लोग खीर खाना पसंद नहीं करते हैं। दरअसल, इसमें बहुत अधिक मात्रा में  चीनी और फुल फैट  मिल्क का इस्तेमाल किया जाता है। चलिए आपको इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ टिप्स के साथ आपकी फेवरिट खीर को अधिक हेल्दी बना सकते हैं।

लो फैट मिल्क का यूज करें

खीर बनाते समय में आप लो फैट मिल्क का इस्तेमाल करें। अगर आप चाहे तो अपनी खीर को डेयरी फ्री बना सकते हैं। इसकी जगह आप बादाम  दूध, सोया  दूध और नारियल के दूध का प्रयोग कर सकते हैं। वहीं, आप वीगन डाइट पर हैं या लैक्टोज इनटॉलरेंट हैं तो ऐसे में नॉन-डेयरी मिल्क ऑप्शन को चुनना अच्छा विचार है।

नेचुरल स्वीटनर का इस्तेमाल करें

कई लोग खीर इसलिए भी नहीं खाते, क्योंकि इसमें  चीनी की मात्रा अधिक होती है। जिस वजह से कैलोरी काउंट बढ़ जाता है। इसके लिए आप अपनी खीर को  चीनी की जगह नेचुरल स्वीटनर की मदद से मीठा बनाएं। खीर में चीनी की जगह आप शहद, खजूर, मेपल सिरप या गुड़ का इस्तेमाल कर सकते हैं।

मसालों का करें इस्तेमाल

जब खीर बनाते हैं तो कम मसालों का प्रयोग किया जाता है। अगर आप खीर बनाते समय इसमें इलायची, दालचीनी या जायफल का इस्तेमाल करेंगे तो यह और भी हेल्दी बन जाएगा। दरअसल, इन मसालों के एंटी-ऑक्सीडेंट गुण ब्लड शुगर लेवल को मेंटन करता है।

ब्राउन राइस राइस या क्विनोआ का इस्तेमाल करें

आमतौर पर जब लोग खीर बनाते हैं तो सफेद  चावल का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन खीर में फाइबर और अन्य पोषक तत्वों को बढ़ाने के लिए सफेद  चावल की जगह  ब्राउन राइस या क्विनोआ का प्रयोग कर सकते हैं। बता दें कि इससे ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और ये आपको लगातार ऊर्जा प्रदान करता है।

 

 

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लो ब्लड प्रेशर को न करें नजरअंदाज

 मन और शरीर में चलने वाली उथल-पुथल का असर स्वास्थ्य पर पडऩा बहुत स्वाभाविक है। लो ब्लड प्रेशर के पीछे भी इसी तरह के कारण हो सकते हैं। ऐसे में लाइफस्टाइल और खानपान में सुधार तथा अन्य तरह से सतर्कता रखकर बहुत हद तक इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

ब्लड प्रेशर का लो होना या हाइपोटेंशन की तकलीफ का मतलब है रक्त के दबाव का 90/60 से भी कम होना। यूं सामान्य तौर पर थोड़ा-बहुत या बिना लक्षणों के ब्लड प्रेशर का लो हो जाना कोई समस्या पैदा नहीं करता लेकिन यदि इसके लक्षण स्पष्ट नजर आने लगें और बार-बार यह तकलीफ उभरने लगे, तो यह किसी अंदरूनी समस्या की ओर इशारा हो सकता है।

जैसे- मस्तिष्क, हृदय तथा अन्य प्रमुख अंगों तक रक्त के प्रवाह का अपर्याप्त होना। खासकर उम्र के बढऩे पर इस तरह की समस्याओं के उपजने का खतरा और बढ़ सकता है। कई बार बहुत देर तक बैठे या लेटे रहकर उठने पर या लंबे समय तक खड़े रहने पर भी ब्लड प्रेशर लो हो सकता है।

इसे पोस्चरल हाइपोटेंशन कहा जाता है। कई सारी अन्य ऐसी स्थितियां हैं, जो लो ब्लड प्रेशर का कारण बन सकती हैं। इनमें गर्भावस्था, हार्मोनल समस्याएं जैसे थाइरॉइड या डायबिटीज आदि, कुछ विशेष औषधियां, अल्कोहल का अधिक सेवन, हृदय संबंधी अनियमितताएं, रक्त वाहिकाओं का चौड़ा होना या फैलना और लिवर डिसीज आदि शामिल हैं।

 

 

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इलायची का पानी पीने के फायदे

 इलायची का प्रयोग लगभग हर घर में होता है। इलायची की खेती दक्षिण भारत, श्रीलंका, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य अमेरिका में की जाती है, खुशबू और स्वाद के कारण इसे 'मसालों की रानी' कहा जाता है। घर में चाय बने या फिर खीर सभी में इलायची का प्रयोग होता है। दुनिया के सबसे महंगे मसालों में केसर और वनिला के बाद तीसरे नंबर पर इलायची का नाम आता है। आयुर्वेद में भी इलायची को कई समस्याओं में लाभकारी बताया गया है। आइए जानते हैं इलायची का पानी पीने के फायदे।

हरी इलायची बीपी के लिए अच्छी है?  

इलायची में राइबोफ्लेविन, नियासिन,  मिनरल, मैंगनीज और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मदद करते हैं। हाई एंटीऑक्सीडेंट होने की वजह से इलायची का पानी पीने से ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे लोगों को आराम मिलता है। छोटी इलायची फाइब्रिनोलिसिस को बढ़ाती है और उच्च रक्तचाप वाले व्यक्तियों में ब्लड लिपिड और फाइब्रिनोजेन के स्तर में बदलाव किए बिना एंटीऑक्सीडेंट स्थिति में सुधार करती है।

क्या हरी इलायची पाचन के लिए अच्छी है?  

इलायची का पानी पीने से पाचन अच्छा रहता है और कब्ज तथा एसिडिटी की समस्या नहीं होती है। इलायची का पानी पीने से भूख बढ़ती है। इलायची का इस्तेमाल बेचैनी, मतली और उल्टी से राहत पाने के लिए भी किया जाता है। इसके अलावा इलायची का पानी पीने से वजन कम करने में भी मदद मिलती है। रोजाना इलायची का पानी पीने से शरीर में जमा फैट आसानी से पिघलाया जा सकता है। इतना ही नहीं इलाइची में खास प्रकार का एंजाइम पाया जाता है, जो कि कैंसर से लडऩे में बहुत कारगर है।

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हाई यूरिक एसिड के मरीज को कौन-कौन से फल खाने चाहिए?

 ज्यादा शराब पीने, कम फिजिकल एक्टिविटी, हाई प्रोटीन डाइट और खान-पाने में लापरवाही के कारण यूरिक एसिड बढ़ने लगता है। ऐसे में आपको कुछ फूड्स से परहेज करना चाहिए। जानते हैं गर्मी के दिनों में हाई यूरिक एसिड के मरीज को कौन-कौन से फल खाने चाहिए।

जामुन- गर्मी में काले जामुन का भी सीजन होता है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर जामुन हाई यूरिक एसिड में फायदेमंद साबित होते हैं। जामुन मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते है। इससे बॉडी की सूजन कम होती है और एसिड लेवल भी बैलेंस में रहता है। हाई यूरिक एसिड के मरीज जामुन खा सकते हैं।

चेरी- यूरिक एसिड के मरीज के लिए कौन सा फल सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है, तो इसका जवाब है चेरी। जी हां चेरी में एसिड को कंट्रोल करने वाले तत्व पाए जाते हैं। रेड चेरी में विटामिन बी-6, विटामिन ए, विटामिन के, विटामिन सी, विटामिन ए और विटामिन बी पाया जाता है। चेरी में कई मिनरल होते हैं जो हाई यूरिक एसिड को कम करते हैं।

केला- यूरिक एसिड के खतरे से बचना है तो रोजाना केला खाएं। केले में प्यूरीन कम होता है। केला खाने से हाई यूरिक एसिड को कम किया जा सकता है। गाउट की समस्या में भी केला फायदा करता है। केला खाने से शरीर को तुरंत एनर्जी भी मिलती है।

कीवी- खट्टे और रसीले फल यूरिक एसिड में खाने हैं तो कीवी खा सकते हैं। कीवी का सेवन यूरिक एसिड को कंट्रोल करता है। कीवी खाने से विटामिन सी, विटामिन ई, पोटेशियम, और फोलेट मिलता है। इससे शरीर में जमा टॉक्सिन बाहर निकाल जाते हैं। रोजाना कीवी खाने से यूरिक एसिड को कंट्रोल किया जा सकता है।

सेब- गर्मी हो या सर्दी सेब हमेशा फलों की दुकान पर मिलता है। हाई फाइबर में सेब फायदेमंद फल होता है। इससे पाचन में सुधार आता है। सेब खून में यूरिक एसिड को इकठ्ठा होने से बचाता है। सेब खाने से यूरिक एसिड का असर कम होता है और डेली वर्क के लिए एनर्जी मिलती है। डॉक्टर रोज एक सेब खाने की सलाह देते हैं।

 

 

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बारिश के मौसम में रखें अपना ख्याल

 मानसून की शुरुआत के साथ हुई बारिश से चिलचिलाती गर्मी से राहत जरूर मिली है। हल्की बूंदाबांदी, ठंडी हवाएं, और यह वह समय है जब हममें से अधिकांश लोग एक गर्म कप चाय और पकौड़ों का आनंद लेते हैं, जो मानसून को खास बनाते हैं। फिर भी, हम इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकते हैं कि भारी बारिश और जल जमाव मच्छरों, बैक्टीरिया आदि के लिए प्रजनन स्थल बन जाती है। इससे मलेरिया, फ्लू, डेंगू जैसी विभिन्न बीमारियां हो सकती हैं। इन बीमारियों से बचने और अपना ख्याल रखने के लिए नीचे दिए गए टिप्स को अपनाना आपके लिए बहुत जरूरी हो जाता है।

साफ पानी पिए

एक आम गलती जो हममें से ज्यादातर लोग करते हैं, वह यह है कि हम पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं, खासकर बरसात के मौसम में। मौसम चाहे कोई भी हो, पानी महत्वपूर्ण है और पूरे समय हाइड्रेटेड रहना सबसे महत्वपूर्ण है। मानसून के मौसम में, सुनिश्चित करें कि आप पर्याप्त मात्रा में साफ और शुद्ध पानी पियें। यदि आप बाहर जा रहे हैं, तो पानी की एक बोतल ले जाने की सलाह दी जाती है। यह आपको सुरक्षित रहने में मदद करेगा। हो सके तो पानी उबाल कर पिएं।

गीले कपड़ों को प्रेस करें

यह आपको कोई बहुत महत्वपूर्ण सलाह नहीं लग सकती है, लेकिन यह हमारे दैनिक जीवन में बहुत महत्व रखती है। जैसे-जैसे बारिश बढ़ती है नमी भी बढ़ने लगती है, और नमी फफूंदों को आमंत्रित करती है। इसलिए, यदि आप ऐसी जगह पर रहते हैं जहां बारिश हो रही है तो अपने कपड़ों को गीला न छोड़े, इस्त्री करें और उन्हें गर्म रखें।

नियमित व्यायाम करें

बारिश के मौसम में हममें से ज्यादातर लोग अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। इस समय आप अपनी सामान्य दौड़, तेज चलने या जॉगिंग के लिए बाहर नहीं जा पाते हैं। ऐसे में कुछ व्यायाम जो घर के अंदर भी किए जा सकते हैं जैसे योग आदि। व्यायाम करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रक्त परिसंचरण में सुधार करता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।

जंक फूड से बचें

बारिश के मौसम में आप जो खाते हैं उसमें अतिरिक्त सावधानी बरतें। आपको अपने खाने की आदतों के प्रति सचेत रहना चाहिए और स्ट्रीट फूड से काफी हद तक बचना चाहिए। सड़कों पर आमतौर पर खुले गड्ढे होते हैं जो कीचड़ या पानी से भरे होते हैं। जिनमें बहुत सारी बीमारियां जन्म लेती हैं, इसलिए, भोजन जितनी देर तक खुली हवा में रहेगा, बीमारियों का खतरा उतना अधिक रहेगा, इसलिए थोड़ी सी सावधानी रखना आवश्यक है।

आहार में प्रोबायोटिक्स और सब्जियां शामिल करें

पर्याप्त प्रोबायोटिक्स जैसे दही आदि लेना महत्वपूर्ण है। इनका नियमित रूप से सेवन करने से बैक्टीरिया से लड़ने के लिए आंत का स्वस्थ ठीक रहता है। इसके अलावा, अपने आहार में ताज़ी सब्जियाँ शामिल करें क्योंकि इसमें बहुत सारे आवश्यक पोषक तत्व होते हैं। सब्जियों या फलों का इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छे से धोना ना भूलें।

 

 

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अगस्त में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी 'मुंज्या'?

 इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर एक्शन नहीं बल्कि हॉरर फिल्मों का जलवा है। पहले स्त्री फिर शैतान और अब मुंज्या। मुंज्या बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है। फिल्म को रिलीज हुए दो हफ्ते हो गए हैं और इसने अभी भी सिनेमाघरों में अपनी पकड़ बनाई हुई है। फिल्म सुपरहिट साबित हुई है। मुंज्या बॉक्स ऑफिस पर छाई हुई है और अब फैंस को इसके ओटीटी पर रिलीज होने का इंतजार नहीं हो रहा है। मुंज्या के ओटीटी रिलीज को लेकर अपडेट सामने आया है।

मुंज्या एक हॉरर-कॉमेडी फिल्म है। रिपोर्ट्स की माने तो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कलेक्शन कर रही है इस वजह से मेकर्स ने रिलीज के दो महीने बाद इसे ओटीटी पर रिलीज करने का प्लान बनाया है यानी ये फिल्म अगस्त में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी। फिल्म डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज होगी। हालांकि अभी तक ना ही मेकर्स और ना ही ओटीटी प्लेटफॉर्म ने इस बात की पुष्टि की है। रिलीज की सही डेट की जानकारी डिज्नी प्लस हॉटस्टार ही देगा।

 

 

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माँ बनने में हो रही है परेशानी तो योगासन से मिलेगा लाभ - डॉ चंचल शर्मा

 माँ बनने का सुखद अनुभव हर स्त्री के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा होता है लेकिन आजकल की बदलती जीवनशैली के कारण बहुत सारी महिलाएं या तो इस सुख से वंचित रह जाती हैं या इस प्रक्रिया को पूर्ण करने में बहुत जटिल राहों से गुजरने की वजह से हिम्मत हार जाती हैं। चाहे आप भारतीय समाज की बात करें या पश्चात्य बच्चों के मामले में लोगों की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। प्रत्येक कपल इस प्रयास में लगा रहता है कि उन्हें बायोलॉजिकली अपनी ही संतान मिले, इसलिए आर्टिफीसियल तरीकों को अपनाने से पहले, या गोद लेने से पहले वो जहाँ तक हो सके यही प्रयास करते हैं की उनकी खुद की संतान हो जाए। कुछ लोगों को शीघ्र ही सफलता भी मिल जाती है परन्तु कुछ लोगों को अस्पताल के चक्कर लगाने और समाज के ताने भी सुनने पड़ते हैं जिससे उनका तनाव दिन -प्रतिदिन बढ़ता जाता है।


आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ चंचल शर्मा से बातचीत में उन्होंने इस विषय में बताया कि अक्सर लोगों को आयुर्वेदा की शक्ति और नियमित योगाभ्यास से सफलता मिल जाती है। उनके पास बहुत से ऐसे पेशेंट भी आते हैं जिन्होंने पहले IVF या IUI करवाया और वह फेल हो गया लेकिन आयुर्वेदिक उपचार से उन्हें नैचुरली कन्सीव करने में सफलता मिली है। इसी कड़ी में उन्होंने यह भी बताया कि योगासन से सीधा आपकी फर्टिलिटी पर असर नहीं होता है बल्कि यह उपचार की सभी प्रक्रिया के साथ पूरक का काम करता है। नियमित योग करने वाले लोगों के कन्सीव करने की सम्भावना उन लोगों की तुलना में अधिक होती है जो शारीरिक रूप से बहुत एक्टिव नहीं है।

नियमित योगासन से फर्टिलिटी पर पड़ने वाले प्रभाव

नियमित योग करने से आपके हॉर्मोन्स का संतुलन बना रहता है और आप उन बिमारियों से सुरक्षित रहते हैं जो हार्मोनल असंतुलन की वजह से उत्पन्न होता है।
योगाभ्यास से आपका मस्तिष्क शांत होता है और शरीर तथा मन के बीच संतुलन बना रहता है।
इनफर्टिलिटी की एक बड़ी वजह तनाव भी है लेकिन योग करने से आपका तनाव कम होता है।
शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने के लिए तथा पेल्विक मसल्स को मजबूती प्रदान करने के लिए भी आप योगाभ्यास कर सकते हैं।

यहाँ ऐसे प्रसिद्ध योगासनों के बारे में जानेंगे जिससे इनफर्टिलिटी से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी

बद्धकोणासन: इसे तितली पोज या butterfly pose भी कहते हैं। इस योगासन के नियमित अभ्यास से आपके जाँघों, पेल्विक मसल्स में खिंचाव आता है जिससे रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। यह योगाभ्यास खासतौर पर महिलाओं के लिए बहुत लाभदायक होता है।

पश्चिमोत्तानासन: इस योग से आपके पेट की चर्बी भी कम होती है इसलिए इसके नियमित अभ्यास से आप अपना वजन नियंत्रित रख सकते हैं जिससे आप मोटापे के कारण होने वाले इनफर्टिलिटी के जोखिम को कम कर सकते हैं। इस योगासन से आपकी फर्टिलिटी बेहतर होती है।

बालासन (child pose): इस योगासन को आप कन्सीव करने से पहले और प्रेगनेंसी के दौरान भी कर सकते हैं। इससे आपके कूल्हों, पीठ और जांघों की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और शरीर में ब्लड का फ्लो भी बढ़ता है।

सूर्यनमस्कार: जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अत्यधिक क्रैम्प्स होते हैं उनके लिए यह योगासन एक वरदान के जैसा है क्यूंकि इससे ऐंठन कम होती है। इसके नियमित अभ्यास से प्रसव पीड़ा से भी राहत मिलती है और मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने में भी मददगार साबित होता है।

 
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मूंग दाल के फेस पैक से बनाएं चेहरा चमकदार

 अगर आप भी गर्मी के मौसम में पिंपल्स और स्किन से जुड़ी परेशानियों से बचना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। मूंग की दाल का इस्तेमाल कर आप अपने चेहरे को खूबसूरत और चमकदार बना सकते हैं।

चेहरे के लिए मूंग की दाल

मूंग की दाल में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाएं जाते हैं, जो पिंपल्स से लड़ने में मदद करते हैं और चेहरे की रंगत को निखारते हैं। आप मूंग की दाल का कई तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं।

मूंग दाल फेस पैक

इससे आप फेस पैक बना सकते हैं फेस पैक बनाने के लिए आपको मूंग की दाल को रात भर भिगोकर रखना होगा, फिर इसे छानकर मिक्सर में पीसकर इसमें दही और हल्दी मिलाकर पेस्ट बना ले। इसे 20 मिनट के लिए चेहरे और गर्दन पर लगाएं, फिर साफ पानी से धो लें। इससे त्वचा हाइड्रेट रहेगी और पिंपल्स दूर होंगे।

मूंग की दाल से स्क्रब

मूंग की दाल से स्क्रब बनाने के लिए आपको मूंग की दाल को पीसकर उसका पाउडर बनाना होगा। इसमें बेसन और शहद मिलाकर पेस्ट बना ले। इस पेस्ट को हल्के हाथों से चेहरे पर लगाकर 10 मिनट तक मालिश करें, फिर गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें। यह डेट स्क्रीन को हटाने में मदद करता है और त्वचा को मुलायम बनाता है।

पैच टेस्ट जरूर करें

मूंग की दाल से फेस मास्क बनाने के लिए आपको मूंग की दाल को मैश कर उसमें एलोवेरा जेल और नींबू का रस मिलना होगा। इस पेस्ट को तैयार कर 15 मिनट के लिए चेहरे पर लगाकर सूखने दें, फिर ठंडे पानी से धो ले। अगर आप पहली बार मूंग की दाल का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो पैच टेस्ट जरूर करें।

क्योंकि कुछ लोगों को इससे एलर्जी हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो उसका इस्तेमाल करना बंद कर दें और डॉक्टर की सलाह जरूर लें। अगर आपको यह सूट कर गया है, तो आप एक सप्ताह में दो से तीन बार इन फेस पैक का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी मदद से आप चेहरे के दाग धब्बे और पिंपल्स दूर कर सकते हैं।

 

 

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