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57 वर्ष की हुयी बॉलीवुड की जानीमानी अभिनेत्री जूही चावला

 बॉलीवुड की जानीमानी अभिनेत्री जूही चावला आज 57 वर्ष की हो गयीं। जूही चावला का जन्म 13 नवंबर, 1967 को हुआ था। उनके पिता एस.चावला एक डॉक्टर थे। जूही चावला ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा लुधियाना से पूरी की। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई मुंबई के सिद्धेनम कॉलेज से पूरी की। वर्ष 1984 में वह मिस इंडिया चुनी गई। इसके बाद उन्हें मिस यूनीवर्स प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका मिला। इस प्रतियोगिता में उन्हें सर्वश्रेष्ठ वेश-भूषा के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।इस बीच उन्हें कई विज्ञापन फिल्मों में मॉडलिंग का काम करने का अवसर मिला।

जूही चावला ने अपने सिने करियर की शुरुआत वर्ष 1986 में प्रदर्शित फिल्म ‘सल्तनत’ से की। मुकुल आनंद के निर्देशन में बनी इस फिल्म में धर्मेन्द्र और सनी देवोल ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म में जूही चावला के नायक की भूमिका शशि कपूर के पुत्र करण कपूर ने निभाई थी। फिल्म टिकट खिड़की पर असफल साबित हुई और जूही चावला दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाने में असफल रही।फिल्म ‘सल्तनत’ की असफलता के बाद जूही चावला को हिंदी फिल्मों में काम मिलना बंद हो गया। इस बीच उन्होंने रोशन तनेजा के अभिनय प्रशिक्षण स्कूल में तीन महीने का प्रशिक्षण प्राप्त किया और दक्षिण फिल्मों की ओर अपना रुख किया।

 

वर्ष 1987 में प्रदर्शित कन्नड़ फिल्म ‘प्रेमालोक’ उनके करियर की पहली हिट फिल्म साबित हुई। लगभग चार वर्ष तक मायानगरी मुंबई में संघर्ष करने के बाद 1988 में नासिर हुसैन के बैनर तले बनी फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ की सफलता के बाद बतौर फिल्म अभिनेत्री इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गई।वर्ष 1990 उनके सिने करियर के लिए अहम वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष उनकी ‘स्वर्ग’ और ‘प्रतिबंध’ जैसी सुपरहिट फिल्में प्रदर्शित हुईं। राजनीति से प्रेरित फिल्म ‘प्रतिबंध’ में जूही चावला अपने दमदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार से नामांकित भी की गईं। वर्ष 1992 में उनके अभिनय के विविध रूप देखने को मिले। इस वर्ष उनकी ‘राधा का संगम’, ‘मेरे सजना साथ निभाना’, ‘बेवफा से वफा’ और ‘बोल राधा बोल’ जैसी फिल्में प्रदर्शित हुईं जो महिला प्रधान थीं।

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लौंग का पानी पीने के फायदे

 अगर आप सुबह लौंग का पानी पीते हैं तो इससे शरीर को कई फायदे मिलते हैं। लौंग में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो पानी में घुलकर शरीर तक पहुंचते हैं और कई लाभ पहुंचाते हैं। लौंग का पानी पीने से हमारे शरीर में पाए जाने वाले त्रिदोष को भी बैलेंस किया जा सकता है।

सुबह लौंग का पानी पीने से क्या फायदा होता है?

वात, पित्त और कफ रहेगा बैलेंस- आयुर्वेद में सारी बीमारियों की जड़ वात, पित्त और कफ को माना जाता है। वात पित्त और कफ का बैलेंस बिगड़ने पर कई तरह की बीमारियां पैदा होती हैं। खासतौर से इससे पेट, गले, नाक और त्वचा की समस्याएं हो सकती हैं। त्रिदोष को बैलेंस करने में लौंग का पानी असरदार साबित होता है। इससे पाचन में सुधार आएगा और पेट ठंडा रहेगा। लौंग का पानी पीने से पेट की जलन और एसिडिटी कम होगी।

पाचन में सुधार आएगा- जो लोग सुबह खाली पेट लौंग का पानी पीते हैं उनका पाचन तंत्र मजबूत बनता है। इस पानी से पेट की बीमारी जैसे गैस, एसिडिटी, ब्लोटिंग और अपच दूर होती है। पाचन प्रक्रिया में सुधार आता है। लौंग का पानी पीने से शरीर में एंजाइम बढ़ते हैं जिससे खाना पचाने में आसानी होती है।

 

प्यास और जलन कम करे- अगर आपको बहुत प्यास लगती है और पेट में जलन की शिकायत होती है तो आप लौंग का पानी पी सकते हैं। भले ही लौंग तासीर में गर्म होती है लेकिन लौंग का पानी ठंडक देने वाला हो जाता है। इससे प्यास कम लगती है और पेट में होने वाली जलन भी दूर होती है। लौंग का पानी पीने से शरीर हाइड्रेड रहता है।

वजन घटाने में मदद- सुबह खाली पेट लौंग का पानी पीने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है। इससे वजन घटाने में मदद मिलती है। भूख कम लगती है और ओवरईटिंग पर भी कंट्रोल किया जा सकता है। लौंग में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो फैट को तेजी से बर्न करने में मदद करते हैं। इसलिए मोटापा घटाने का प्रयास करने वाले लोग लौंग का पानी पी सकते हैं।

 

इम्यूनिटी बढ़ाए- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में लौंग का पानी असरदार साबित होता है। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। खासतौर से बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम और खांसी कफ जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। लौंग में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं जो किसी भी इंफेक्शन से बचाने में मदद करते हैं। इससे मौसमी बीमारियों दूर रहती है।

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मोटापे की कट्टर दुशमन है दलिया

 दलिया का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। विटामिन और प्रोटीन से भरपूर दलिया खाने से न केवल वजन कम होता है बल्कि आप कई बीमारियों से दूर रहेंगे। बता दें, मोटे अनाज के दानेदार चूरे को दलिया कहते हैं। इसमें मौजूद पोषक तत्व लो कैलोरी, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, थायमिन, फोलेट, पोटेशियम, कार्बोहाइड्रेट, जिंक, मिनरल्स, विटामिन और आयरन हेल्दी और स्वस्थ बनाते हैं। अगर आप अपनी डाइट में सिर्फ एक कटोरी दलिया का सेवन करते हैं तो इससे आपकी सेहत को क्या क्या फायदे हो सकते हैं चलिए हम आपको बताते हैं-

दलिया खाने से ये बीमारियां रहेंगे कोसों दूर:

सेहतमंद दिल: दलिया में मौजूद फाइबर, प्रोटीन, और एंटीऑक्सीडेंट दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हैं। दलिया कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है जिससे हार्ट डिजीज का रिस्क काफी कम हो जाता है।

वजन होगा कम: अगर वजन तेजी से बढ़ रहा है तो डाइट में दलिया ज़रूर शामिल करें। दलिया फाइबर से भरपूर होता है और वजन को कम करने में मदद करता है। इसके सेवन से लंबे समय तक भूख नहीं लगती है।

 

डायबिटीज कंट्रोल: दलिया में लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स पाया जाता है जो डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है। इसका सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है।

पाचन होता है बेहतर:  दलिया पाचन को सुधारने में मदद कर सकता है क्योंकि ये कब्ज को कम करने में मदद करता है और आपके पेट में सारे पोषण को अच्छी तरह से सोख लेता है।

 

कोलेस्ट्रॉल होगा कम: दलिया में मौजूद फाइबर बैड कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में बेहद असरदार है। दलिया कोलेस्ट्रॉल को कम करके दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को भी कम करता है।

दलिया खाने का सही समय:

दलिया सुबह और शाम के नाश्ते में खाना चाहिए। सुबह के समय दलिया खाने से दिनभर ऊर्जावान महसूस करेंगे साथ ही शाम के समय नाश्ते में दलिया खाने से आपको रात के समय ज़्यादा भूख नहीं लगेगी।

 

 

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यूरिक एसिड कंट्रोल करने वाली सब्जी है टिंडा

 सर्दियों में हाई यूरिक एसिड के मरीज की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ जाती हैं। ठंड के कारण हड्डियों में दर्द और अकड़न होने लगती है ऊपर से अगर यूरिस एसिड बढ़ जाए तो फिर दर्द के कारण चलना फिरना भी मुश्किल हो जाता है। हालांकि डाइट से यूरिक एसिड को कम किया जा सकता है। सर्जियों में ऐसी कई सब्जियां मिलती है जो हाई यूरिक एसिड को कम करने में मदद करती हैं। ऐसी ही सब्जी है टिंडा, जो स्वाद में काफी लौकी जैसा ही लगता है। यूरिक एसिड में डिंटा खाने से जोड़ों में जमा प्यूरीन आसानी से निकल जाता है। जानिए यूरिक एसिड में टिंडा खाने के फायदे और इसे कितने दिन खाने से आराम मिलेगा?

यूरिक एसिड को खाने से काबू करना है तो इसके लिए डाइट में लोग प्रोटीन और हाई फाइबर फूड शामिल करने जरूरी हैं। खाने में लौकी, तोरई और टिंडा की सब्जी जरूर शामिल करें। रोजाना इन सब्जियों के खाने से 1-2 महीने में ही शरीर में जमा यूरिक एसिड निकल जाएगा।

टिंडा खाने के फायदे

टिंडा खाने में भले ही लोगों को ज्यादा स्वादिष्ट न लगे, लेकिन टिंडा में कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं। टिंडा खाने से शरीर को विटामिन सी, कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन, फास्फोरस, डाइट्री फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मिलते हैं। फाइबर रिच टिंडा खाने से पाचन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। टिंडा खाने से कब्ज की समस्या भी दूर भाग जाती है।

हार्ट और ब्लड प्रेशन में फायदेमंद है टिंडा

पोटेशियम, मैग्नीशियम और मैग्नीज ज्यादा होने के कारण टिंडा हार्ट के लिए भी अच्छी सब्जी माना जाता है। टिंडा पानी से भरपूर सब्जी है जो वजन घटाने और शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करती है। इसके अलावा विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन बी6 और विटामिन के ओवर ऑल हेल्थ में सुधार लाने मे मदद करते हैं। टिंडा खाने से किडनी फंक्शन में सुधार आता है और किडनी में जमा टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं।

यूरिक एसिड कंट्रोल करने वाली सब्जी है टिंडा

हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो लगातार 1-2 महीने टिंडा खाने से आप यूरिक एसिड को कंट्रोल कर सकते हैं। टिंडा के अलावा लौकी भी हाई यूरिए एसिड को तेजी से कम करती है। टिंडा और लौकी खाने से पेट से जुड़ी समस्याएं भी दूर होती हैं और जोड़ों के दर्द में भी आपको आराम मिलेगा।    

 

 

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रश्मिका मंदाना ने अल्लू अर्जुन को दिया खास तोहफा

 दक्षिण भारतीय फिल्मों की जानीमानी अभिनेत्री रश्मिका मंदाना ने फिल्म पुष्पा के अपने को-स्टार अल्लू अर्जुन को खास तोहफा दिया है।अल्लू अर्जुन ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर एक प्यारा सा पल साझा किया है, जिसमें उनकी फिल्म पुष्पा को-स्टार रश्मिका मंदाना का दिल छू लेने वाला जेस्टर देखने मिल रहा है। पुष्पा: द राइज़ में श्रीवल्ली के किरदार से मशहूर हुई रश्मिका ने अपने इस इमोशन से भरे अंदाज से फैंस का दिल जीत लिया है।

अल्लू अर्जुन ने एक खूबसूरत नोट और प्यारे गिफ्ट की झलक शेयर की है, जो उन्हें रश्मिका से मिला है। अपने पोस्ट में उन्होंने रश्मिका को धन्यवाद देते हुए उनके इस जेस्टर की सराहना की है। उन्होंने इस तरह से यह भी बताया है कि उनके बीच ऑफ-स्क्रीन भी एक गहरी दोस्ती है।

नोट में लिखा गया है, मेरी माँ ने कहा था कि किसी को चांदी का तोहफा देने से उसे सौभाग्य प्राप्त होता है।मुझे उम्मीद है कि यह छोटी सी चांदी और मिठाई आपके लिए और ज्यादा सौभाग्य, सकारात्मकता और प्यार लेकर आएगी। आपको और आपके खूबसूरत परिवार को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ!लव, रश्मिका मंदाना।इसके जवाब में, अल्लू ने लिखा, थैंक यू डियर। अब बहुत सारे लक की जरूरत है।

 

 

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बागबाहरा जंगल से रेस्क्यू कर सफेद पूंछ वाले बीमार गिद्ध की बचाई गई जान

राजधानी रायपुर के समीप स्थित नंदनवन जंगल सफारी के वन अधिकारियों एवं चिकित्सकों की टीम विलुप्त प्रजाति के सफेद पूंछ वाले बीमार गिद्ध का रेस्क्यू कर उसकी जान बचाने में सफल रही है। यह बीमार गिद्ध लगभग 500 किलोमीटर की उड़ान भरता हुआ बीते दिनों छत्तीसगढ़ राज्य के महासमुंद वनक्षेत्र के बागबाहरा पहुंचा था। इस बीमार गिद्ध के रेस्क्यू के बाद नंदनवन जंगल सफारी के वन्य चिकित्सकों एवं वन अधिकारियों ने बड़ी सावधानी के साथ इस गिद्ध का इलाज किया। इसके स्वास्थ्य पर सतत निगरानी रखी, जिसके चलते कुछ ही दिनों में यह गिद्ध स्वस्थ एवं सामान्य स्थिति में आ गया। जंगल सफारी की टीम ने इस गिद्ध को फिर से उड़ान भरने के लिए छोड़ दिया है। 


नंदनवन जंगल सफारी के अधिकारियों द्वारा बीमार गिद्ध के बचाव कार्य की मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने सराहना की है। उन्होंने गिद्ध के रेस्क्यू ऑपरेशन और इलाज में लगी अधिकारियों की टीम को बधाई और शुभकामनाएं दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विलुप्त होती गिद्ध की इस प्रजाति का छत्तीसगढ़ के अधिकारियों द्वारा बचाव के लिए किए गए प्रयासों की जितनी सराहना की जाए कम है।

गौरतलब है कि सफेद पूंछ वाला गिद्ध (वाईट रुम्पड वल्चर) एक संकट ग्रस्त प्रजाति है। वर्तमान में इस प्रजाति की संख्या देश में 13 हजार से भी कम रह गई है। यह गिद्ध बड़े पेड़ों पर घोंसला बनाते हैं और साल भर में केवल एक ही अंडा देते हैं, जिससे इनकी संख्या बढ़ने की गति धीमी होती है। ये गिद्ध केवल उन्हीं क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहां जैव विविधता समृद्ध होती है और प्रदूषण या औद्योगीकीकरण का प्रभाव कम होता है। गिद्ध के इस प्रजाति के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 

इसी कड़ी में भारत में वाईट रुम्पड वल्चर की निगरानी और संरक्षण के लिए बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) और ताडोबा अंधेरी टाइगर रिजर्व ने एक विशेष पहल करते हुए 10 सफेद पूंछ वाले एक गिद्धों को एक साथ  जियो-ट्रैकिंग उपकरण के साथ जंगल में छोड़ा गया था, जिसमें से एक गिद्ध महाराष्ट्र राज्य में उड़ान भरते हुए छत्तीसगढ़ के इन्द्रावती टाईगर रिजर्व होते हुए कांकेर जिले से महासमुंद वन क्षेत्र  बागबाहरा में पहुंच गया था। नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) और ताडोबा अंधेरी टाइगर रिजर्व का गिद्धों को छोड़ने का उद्देश्य उनके प्रवास मार्गों का अध्ययन करने के साथ- साथ उनको प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रख उनका संरक्षण और संवर्धन करना था। उन 10 गिद्धों में से एक गिद्ध  20 दिनों में लगभग 500 किलोमीटर की उड़ान भरने के बाद महासमुंद वन क्षेत्र में आ गया था। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) की निगरानी टीम ने जियो-ट्रैकिंग उपकरण की मदद से जाना कि यह गिद्ध बागबाहरा जंगल मे एक ही स्थान पर लंबे समय तक रुका हुआ है। इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने नंदनवन जंगल सफारी रायपुर के अधिकारियों से सम्पर्क किया और पूरी स्थिति की जानकारी दी।

 नंदनवन जंगल सफारी के वन्यजीव डॉक्टरों और वन अधिकारियों की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बागबाहरा क्षेत्र से गिद्ध का सुरक्षित रेस्क्यू किया और 26 अगस्त को उसे नंदनवन जंगल सफारी ले आए। यहां चिकित्सकों की देखरेख में गिद्ध को उचित उपचार और पोषण दिया गया, जिससे वह स्वस्थ होने लगा। कुछ दिनों में ही गिद्ध पूरी तरह से स्वस्थ हो गया और उसकी सक्रियता लौट आई।

नंदनवन जंगल सफारी के संचालक श्री धम्मशील गणवीर ने बताया कि नंदनवन जंगल सफारी से वन्य जीव चिकित्सकों के सलाह के आधार पर 26 सितंबर 2024 को गिद्ध को फिर से उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया, जिसके बाद यह गिद्ध यहाँ से 1100 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हुए गुजरात के सूरत इलाके में पहुंच गया है। इस गिद्ध की  लोकेशन की ट्रेकिंग बीएनएचएस द्वारा की जा रही है।
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महतारी वंदन योजना से दीपावली की खुशियां हुई दोगुनी

हमारे देश के सबसे प्रमुख त्यौहार दीपावली को हर्षोल्लास के साथ सभी मनाते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में इस बार दीपावली का त्यौहार महिलाओं के लिए दोगुनी खुशियाॅ लेकर आया है। यह खुशियाॅ उन्हें महतारी वंदन योजना की 9वीं किस्त की राशि से मिली है, जिसे दीपावली से पूर्व ही मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दीपावली की खुशियों के रूप में छत्तीसगढ़ की महिलाओं के खाते में अंतरित कर दिया था। 


महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की लगभग 70 लाख माताओं एवं बहनों के बैंक खातों में प्रतिमाह एक-एक  हजार रूपये का अंतरण किया जाता है, जिसमें बालोद जिले की 02 लाख 52 हजार से अधिक महिलाएं भी प्रतिमाह लाभान्वित हो रही हैं। दीपावली त्यौहार के अवसर पर बालोद जिले की महिलाओं ने अपने बैंक खातों में एक-एक हजार रूपए राशि अंतरित होने पर खुशी जाहिर करते हुए अपने विष्णु भैय्या के प्रति आभार व्यक्त किया है। बालोद जिले के ग्राम सिवनी की श्रीमती देवकी बाई ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हे प्रतिमाह महतारी वंदन योजना के तहत एक हजार रूपए उनके खाते में मिल रहा है, जिसे वह अपने बैंक में जमा कर रही है। अभी दिपावली के अवसर पर इससे वह अपने घर में सभी के लिए कपड़े और जरूरी सामान खरीदी है, जिससे उन्होंने दिपावली का त्यौहार काफी खुशी से मनाया है।  उसने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय उनके बड़े भाई की तरह उनका ख्याल रख रहे हैं, और इस माह दीपावली त्यौहार के पूर्व राशि अंतरित कर उन्होंने अपनी बहनों की खुशियों को दोगुना किया है, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री साय का आभार व्यक्त किया है। श्रीमती ईश्वरी सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने दीपावली त्यौहार के पूर्व हमें महतारी वंदन योजना की राशि उपलब्ध कराया है, इससे उन्होंने अपने लिए साड़ी ली है। इसी प्रकार श्रीमती सरिता और श्रीमती बसंती निषाद ने महतारी वंदन योजना के तहत नौंवी किश्त की राशि आने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी हमारे बडे़ भैय्या की तरह हमारा ख्याल रख रहे है। हमें प्रतिमाह एक हजार की राशि सीधे हमारे बैंक खाते में प्रदान कर रहे है। हमारे लिए अब हर माह की शुरूआत किसी त्यौहार से कम नही होती और मोबाइल में महतारी वंदन योजना की राशि आने का मैसेज देखते ही खुशियों से हमारा आत्मविश्वास जाग जाता है। इस माह दीपावली से पूर्व ही राशि आने से हमारी दीपावली की खुशियाॅ दोगुनी हुई है, हमने इस माह की राशि का उपयोग दीपावली की खरीदी में किया है। 

बालोद जिले की इन महिलाओं ने महतारी वंदन योजना को सराहते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को बहुत-बहुत धन्यवाद देते हुए उनका आभार व्यक्त किया है।
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नींद से न करें कोई समझौता वरना हो सकती है ये खतरनाक बीमारी

 अच्छी नींद को हमारे पूरे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर नींद में किसी तरह की कोई गड़बड़ी हुई तो इससे लिवर बुरी तरह से प्रभावित होता है। लंबे समय तक अच्छी नींद नहीं लेने से लिवर सिरोसिस का खतरा बढ़ सकता है। चीन में हुआजोंग यूनिवर्सिटी आफ साइंस एंड टेक्नोलाजी में हुए एक रिसर्च में पता चला है कि यह नान अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग और नींद के बीच संबंध है।

इस रिसर्च में नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर रोगियों में हेल्दी और अच्छी नींद के पैटर्न और सिरोसिस के कम खतरे के बीच संबंध दिखाया गया है। रिसर्च के दौरान करीब 112, 196 नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर रोगियों में पाया गया कि खराब नींद के पैटर्न से सिरोसिस के बढ़ने के खतरे जुड़े हुए हैं। हेपेटोलाजी इंटरनेशनल के मुताबिक, लोगों में अच्छी नींद के फायदे देखे गए, चाहे उनका आनुवंशिक जोखिम कम हो या ज्यादा हो।

नींद से लिवर का है कनेक्शन

वहीं लिवरडाक के नाम से मशहूर एबी फिलिप्स का कहना है कि कई रिसर्च में इस बात के सुबूत पाए गए हैं कि नींद को वास्तव में कम आंका जाता है। आप अपनी आनुवंशिक प्रोफाइल को तो नहीं बदल सकते लेकिन, हर रात अच्छी नींद तो ही सकते हैं। रोजाना रात में 7-8 घंटे की अच्छी नींद हमारे पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है। इससे लिवर को भी अनगिनत फायदे मिलते हैं।

नींद में गड़बड़ी से हो सकता है लिवर सिरोसिस

नींद में लंबे समय तक गड़बड़ी होने पर व्यक्तियों में सिरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। सिरोसिस तब होता है जब लिवर लंबे समय तक बीमार रहता है। धीरे-धीरे लिवर के ऊपर घाव के निशान वाले ऊतक बन जाते हैं। ये घाव वाले निशान लिवर के काम को प्रभावित करते हैं। लंबे समय तक ये स्थिति बनी रहने से लिवर के फेल होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

क्या है लिवर सिरोसिस?

लिवर सिरोसिस एक तरह की क्रानिक बीमारी है। जो लंबे समय तक लिवर के खराब होने से पनपती है। लिवर सिरोसिस होने पर लिवर के हेल्दी ऊतक खत्म होने लगते हैं और लिवर ठीक से काम करना बंद कर देता है। लिवर सिरोसिस होने पर शरीर में कई लक्षण नजर आते हैं।  

लिवर सिरोसिसस के लक्षण

उल्टी होना

कम भूख लगना

बहुत थकावट

पीलिया होना

वजन घटना

खुजली होना

पेट में तरल पदार्थ बनना

 पेशाब का रंग गहरा होना

बाल झड़ना

नाक से खून आना

मांसपेशियों में ऐंठन

बार-बार बुखार आना

याददाश्त की समस्या

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बढ़ गया है यूरिक एसिड, तो इन दालों को खाने से कर लें परहेज

 शरीर में यूरिक एसिड के स्तर के बढ़ जाने से सेहत से जुड़ी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हाई यूरिक एसिड को समय रहते कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। यूरिक एसिड के स्तर पर काबू पाने के लिए आपको अपने खान-पान पर ध्यान देना चाहिए। अगर आपको भी हाई यूरिक एसिड की समस्या है, तो आपको कुछ दालों का सेवन करने से बचना चाहिए। दरअसल, इन दालों को डाइट में शामिल करने की वजह से यूरिक एसिड का स्तर और ज्यादा बढ़ सकता है।

अवॉइड करें मसूर-उड़द की दाल

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मसूर की दाल में प्रोटीन की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है। यूरिक एसिड की समस्या से जूझ रहे लोगों को मसूर की दाल से परहेज करने की सलाह दी जाती है। वहीं, उड़द की दाल में पाई जाने वाली प्यूरीन की मात्रा भी हाई यूरिक एसिड का शिकार लोगों की सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।

अरहर-चने की दाल खाने से बचें

प्रोटीन रिच अरहर की दाल भी हाई यूरिक एसिड की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। इसलिए इस समस्या का शिकार लोगों को डॉक्टर की सलाह लेकर ही अरहर की दाल का सेवन करना चाहिए। चने की दाल भी आपकी हाई यूरिक एसिड की समस्या को बढ़ाने का काम कर सकती है।

डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें

लोबिया की दाल में पाए जाने वाले कुछ तत्व यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकते हैं। हाई यूरिक एसिड की समस्या की चपेट में आए लोगों को डॉक्टर की सलाह लेकर ही इन दालों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। वहीं, समय रहते हाई यूरिक एसिड की समस्या का ट्रीटमेंट शुरू करना भी बेहद जरूरी है, वरना आप जोड़ों के दर्द का शिकार भी बन सकते हैं।

 

 

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गठिया में फायदेमंद है पत्थरचट्टा

 आयुर्वेद में पथरचट्टा को एक कमाल की जड़ी बूटी माना जाता है। किडनी स्टोन से लेकर डायबिटीज तक में पत्थरचट्टा असरदार काम करता है। पत्थरचट्टा में एल्कलॉइड्स, फ्लेवोनोइड्स, ग्लाइकोसाइड्स, कार्डिएनोलाइड्स और स्टेरॉयड जैसे बायोएक्टिव गुण पाए जाते हैं। इसके पत्तों में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीऑक्सीडेंट्स गुण होते हैं जो शुगर के मरीज के लिए दवा का काम करते हैं। आयुर्वेद में कई दवाओं में पत्थरचट्टा का इस्तेमाल किया जाता है। ये पौधा शरीर को कई बीमारियों से बचाता है। आइये जानते हैं डायबिटीज में कैसे करें पत्थरचट्टा का इस्तेमाल और ये किन बीमारियों में काम आता है?

पथरचट्टा डायबिटीज के मरीज के लिए फायदेमंद है। इसका उपयोग डायबिटीज मेलेटस के मामले में किया जा सकता है। पथरचट्टा में फिनाइल एल्काइल ईथर नामक एक बायोएक्टिव कंपाउंड पाया जाता है जो शरीर में इंसुलिन के प्रोडक्शन को बढ़ाता है। इसके सेवन से शुगर का लेवल को कम करने में मदद मिलती है। आप इसके पत्ते, तना, फूल और जड़ को पानी में उबालकर पी सकते हैं। पत्थरचट्टा की पत्तियों को पीसकर जूस बनाकर भी पी सकते हैं।

स्वामी रामदेव की मानें तो, पथरचट्टा में को शरीर में सूजन कम करने के लिए उपयोग किया जा सकता है। पत्थरचट्टा में सूजन-रोधी और एनाल्जेसिक गुण पाए जाते हैं जो गठिया के मरीज को सूजन से राहत दिलाते हैं। पथरचट्टा के तने का अर्क दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है। खासतौर से हड्डियों से जुड़ी समस्याओं में ये असरदार साबित होता है। गठिया और जोड़ों के दर्द में पथरचट्टा राहत पहुंचाता है।

पथरी में फायदेमंद है पथरचट्टा

किडनी में स्टोन होने पर भी पत्थरचट्टा का आयुर्वेद में इस्तेमाल किया जाता है। गुर्दे की पथरी में पथरचट्टा का सैपोनिन कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल को तोड़ने में मदद करता है। इससे पथरी को पानी से साथ फ्लश आउट किया जा सकता है। किडनी को स्वस्थ रखने में मददगार है।

पत्थरचट्टा का सेवन कैसे करें?

पत्थरचट्टा के पत्तों को उबाल लें, पानी को छानकर चाय की तरह पी लें। आप स्वाद के लिए इसमें नमक भी मिलाकर सकते हैं। पत्थरचट्टा के पत्तों को पीस लें और फिर इसका रस निकाल लें। इस अर्क को पी लें।इस तरह पत्थरचट्टा के पत्तों, फूलो, जड़ और तना का इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

 

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रिया सिंघा ने जीता मिस यूनिवर्स इंडिया 2024 का ताज

 मिस यूनिवर्स इंडिया 2024 को लेकर एक शानदार समारोह के दौरान रिया सिंघा को इसका विजेता बनाया गया है। साथ ही उन्हें मिस यूनिवर्स इंडिया 2024 का क्राउन पहनाया गया। उनको ये ताज स्टेज पर उर्वशी रौतेला ने पहनाया। इस प्रतिष्ठित खिताब के लिए 51 प्रतियोगियों ने अपनी दावेदारी पेश की थी। इन सबमें रिया ने बाजी अपने नाम कर लिया है।

22 सितंबर 2024 को अपनी खूबसूरती का परचम लहराने वाली रिया सिंघा ने 19 साल की उम्र में मिस यूनिवर्स इंडिया का खिताब जीतकर सिर्फ गुजरात का ही नहीं बल्कि पूरे भारत का मान बढ़ा दिया है। जयपुर में हुए इस मिस यूनिवर्स इंडिया में रिया को उर्वशी रौतेला ने क्राउन पहनाया था।

ये कोई आज की बात नहीं है, बल्कि सालों से ही रिया अपनी खूबसूरती का जादू चला रही हैं, जिसका माध्यम बनी हैं उनकी सुंदर सी आंखें। एक तो इस गुजराती छोरी की आंखे इतनी प्यारी हैं उन पर किया तरह-तरह का आई मेकअप तो ऐसा होता है कि बस हर कोई अपनी दिल बार जाए। यकीन नहीं होता तो आप खुद देख लीजिए कैसे 2022 से ये बाला अपनी हिरनी सी आंखों से सबको मदहोश कर रही हैं। 

 

 

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नीले लहंगे में छाईं तृप्ति डिमरी, खुद को बताया माधुरी की फैन

फिल्म 'विक्की विद्या का वो वाला' का दूसरा गाना 'मेरे महबूब' रिलीज हो चुका है। सोमवार को इस गाने जारी करने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। नीले रंग के लहंगे में तृप्ति बेहद खूबसूरत लग रही थीं। उन्होंने अपने लुक को छोटी बालियों, कंगन और अंगूठियों के साथ पूरा किया। कम मेकअल और खुले बालों में तृप्ति की खूबसूरती देखते ही बन रही थी।

तृप्ति ने कार्यक्रम में अपने पहले आइटम डांस को लेकर उत्साह व्यक्त किया। तृप्ति ने कहा कि वह माधुरी दीक्षित की बहुत बड़ी फैन रही हैं। उन्होंने कहा कि वह बचपन से ही उनके सभी गानों पर डांस करने की कोशिश करती थी। वहीं, राज शान्डिल्य ने तृप्ति की तारीफ करते हुए कहा कि वह बहुत खुश हैं कि इतने अच्छे तरीके से यह गाना तैयार हो गया। 

 

 

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लाल परी बनकर रैंप पर उतरीं ऐश्वर्या राय

 विश्व सुंदरी ऐश्वर्या राय बच्चन जहां भी जातीं हैं, अपनी प्रेजेंस से पूरे महफिल की जान बन जाती हैं। हाल ही में वह इंटरनेशनल इवेंट पेरिस फैशन वीक 2024 का हिस्सा बनी थीं जहां अपनी वह खूबसूरती का करिश्मा बिखेरती नजर आईं। तो वहीं एक्ट्रेस आलिया भट्ट नें भी इस इवेंट में डेब्यू किया। दोनों अभिनेत्रियां ब्यूटी ब्रैंड लोरिअल पेरिस की ब्रांड एंबेसडर हैं।

ऐसे में ऐश्वर्या और आलिया ने इस फैशन शो में रैंप पर हुस्न परी बनकर जादू बिखेरा। ऐश्वर्या राय कई बार इस फैशन वीक में नजर आ चुकी हैं।

इस बार भी उन्होंने खूबसूरत ड्रेस पहनकर रैंप पर उतरकर सबको दीवाना बना दिया। फैशन वीक में ऐश ने लाल रंग का ओवर साइज्ड गाउन कैरी किया था जिसके साथ खुले बालों को स्टाइल किया। जैसे ही रैंप पर ऐश ने वॉक किया, उन्हें देखते ही वहां मौजूद ऑडिंय उन्हें चीयर-अप करने लगी।

सोमवार शाम को आयोजित हुए इस पेरिस फैशन वीक में आलिया भट्ट ने भी पहली बार कदम रखा। आलिया ने लोरिअल की ब्रांड एंबेसडर बनने के बाद यह रैम्प पर डेब्यू किया था।

इस दौरान एक्ट्रेस ने सिल्वर मैटालिक ड्रेस पहनी थीं जो काफी यूनीक थी। इसके बॉटम पर ब्लैक फर्र  का वर्क किया गया था। सिल्वर ईयर रिंग्स के साथ एक्ट्रेस ने लुक पूरा किया। स्मोकी आईज़ और ग्लोइंग मेकअप लुक से एक्ट्रेस ने रैम्प पर जलवा बिखेरा।

आलिया भट्ट ने अपने लुक के साथ ओपन हेयर रखे थे। रैंप पर वॉक करते हुए उन्होंने फ्लाइंग किस करते हुए फैंस का दिल जीता। तो वहीं ऐश्वर्या ने भी फ्लाइंग किस और हाथ जोड़ते हुए फैंस को ग्रीट किया।

बता दें, ऐश्वर्या राय लंबे समय से लोरियल की ब्रैंड ऐम्बैसडर रहीं हैं। वहीं ये आलिया का डेब्यू था। 

 

 

वर्क फ्रंट

आलिया भट्ट के वर्क फ्रेंट की बात करें तो वह आगामी फिल्म जिगरा में नजर आएंगी जो 11 अक्टूबर 2024 को रिलीज होगी। इसके अलावा वह यश राज फिल्म्स की अल्फा में भी नजर आएंगी। वहीं एश्वर्या को आखिरी बार फिल्म पोन्नियन सेलवन पार्ट 1-2 में देखा गया था।

 

 

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सर्दियों में अंजीर खाने के फायदे

 अंजीर का स्वाद अनोखा और मीठा दोनों होता है. इसमें पाए जाने वाले मलाईदार गुद्दे चबाने में काफी अच्छा होता है। जिसे आप ताजा या सूखा कैसे भी खा सकते हैं। अंजीर में बहुत ज्यादा पौष्टिक गुण होते हैं। साथ ही साथ इसमें विटामिन ए, सी, ई, के, बी 6, आयरन, पोटेशियम, मैग्नीशियम और मैंगनीज जैसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर और चीनी होता है जो आपके वजन को कंट्रोल में रखता है।

वजन घटाने में सहायक होता है

अंजीर की फाइबर से भरपूर प्रकृति तृप्ति में योगदान करती है, जिससे व्यक्तियों को लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है।यह विशेषता अंजीर को उन लोगों के लिए एक उत्कृष्ट स्नैक विकल्प बनाती है जो अपना वजन नियंत्रित करना चाहते हैं। इन्हें संतुलित आहार में शामिल करने से आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हुए वजन प्रबंधन लक्ष्यों का समर्थन किया जा सकता है।

दिल से जुड़ी बीमारी का जोखिम दूर करता है

अंजीर में मौजूद पोटेशियम सामग्री रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करके हृदय स्वास्थ्य में योगदान करती है। इसके अलावा, अंजीर में मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भूमिका निभाते हैं, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम हो जाता है। हृदय-स्वस्थ आहार में इन्हें शामिल करना हृदय संबंधी स्वास्थ्य के लिए एक सरल लेकिन प्रभावी उपाय हो सकता है।

आंख की रोशनी को बढ़ाता है

अंजीर में बीटा-कैरोटीन जैसे यौगिक होते हैं, जो शरीर में विटामिन ए में परिवर्तित हो जाते हैं। विटामिन ए आंखों के इष्टतम स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक है और उम्र से संबंधित धब्बेदार अध: पतन को रोकने में मदद कर सकता है। अपने आहार में अंजीर को शामिल करने से स्वस्थ दृष्टि का समर्थन और संरक्षण करने में योगदान मिल सकता है।

अंजीर में पोषक तत्व होते हैं

अंजीर में कैल्शियम, फास्फोरस और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक खनिज होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। अंजीर का नियमित सेवन हड्डियों के घनत्व में योगदान कर सकता है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी स्थितियों को रोकने में मदद कर सकता है, खासकर जब इसे अन्य हड्डियों के अनुकूल पोषक तत्वों के साथ मिलाया जाता है।

 
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ऐश्वर्या राय को मिला श्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार, माँ की तस्वीर क्लिक करती नजर आई आराध्या

 दुबई में SIIMA 2024 का आयोजन किया गया है। 'पोन्नियिन सेलवन: II' में अपनी शानदार भूमिका के लिए ऐश्वर्या राय ने SIIMA 2024 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का क्रिटिक्स अवॉर्ड अपने नाम किया। अभिनेत्री ने मणिरत्नम की फिल्म में नंदिनी के रूप में अपने अपने अभिनय से लाखों दिलों को जीता था और अब उसी के लिए उन्हें ये सम्मान मिला है।

इस इवेंट में ऐश्वर्या राय के साथ उनकी बेटी आराध्या बच्चन भी नजर आईं। उनका अंदाज भी कमाल का दिखा। अवार्ड मिलने के बाद ही ऐश्वर्या राय ने एक विनिंग स्पीच भी दी जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। ये स्पीच लोगों के दिलों को छू रही है।

सामने आई कई झलकियों में आराध्या अपनी मां की तस्वीरें क्लिक करती नजर आईं। वो अपनी मम्मी के विनिंग मोमोंट को और स्पेशल बनाती दिखीं। आराध्या, ऐश्वर्या को अवॉर्ड मिलने पर काफी एक्साइटेड थी। उन्होंने मम्मी के अवॉर्ड लेने से लेकर स्पीच देने के मोमेंट को फोन में रिकॉर्ड किया। इसके अलावा दोनों माँ-बेटी अभिनेता चियान विक्रम से भी मिलती नजर आईं।

ऐश्वर्या और विक्रम को पोन्नियिन सेलवन I और II में एक साथ देखा गया था। अबू धाबी के यास आइलैंड में हो रहे इवेंट में माँ और बेटी की जोड़ी शिमरी आउटफिट में नजर आई। ऐश्वर्या ने ब्लैक और गोल्ड गाउन कैरी किया था, वहीं आराध्या सिल्वर और ब्लैक शिमरी आउटफिट में दिखीं। ऐश्वर्या ने कार्यक्रम स्थल के बाहर इकट्ठा हुए अपने प्रशंसकों के साथ सेल्फी भी ली।

ऐश्वर्या को मंच पर फिल्म निर्माता कबीर खान ने पुरस्कार दिया। इसके बाद एक्ट्रेस ने कहा, मुझे पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए SIIMA का बहुत-बहुत धन्यवाद। यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है क्योंकि यह फिल्म मेरे दिल के बहुत करीब थी, पोन्नियिन सेलवन जिसे मेरे गुरु मणिरत्नम ने निर्देशित किया था। पोन्नियिन सेलवन में नंदिनी के रूप में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए मेरे काम को सम्मानित करना वास्तव में पूरी टीम के काम का जश्न मनाना है।

'पोन्नियिन सेलवन 2' में ऐश्वर्या को डबल रोल में देखा गया था। नंदिनी और मंदाकिनी देवी के रूप में एक्ट्रेस नजर आई थीं। ऐश्वर्या राय की इस फिल्म तमिल उपन्यास से लिया गया है। इसमें कार्थी, जयम रवि, तृषा, जयराम, प्रभु, आर सरथकुमार, शोभिता धूलिपाला, ऐश्वर्या लक्ष्मी, विक्रम प्रभु, प्रकाश राज, रहमान और आर पार्थिबन भी शामिल थे।

 

 

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सुबह-सुबह खाली पेट पीएं नारियल का पानी

 औषधीय गुणों से भरपूर नारियल का पानी आपकी ओवरऑल हेल्थ को काफी हद तक इम्प्रूव कर सकता है। अगर आप अपनी मॉर्निंग डाइट में कोकोनट वॉटर को शामिल करते हैं, तो आप खुद को सेहत से जुड़ी कई समस्याओं का शिकार बनने से बचा सकते हैं। नारियल पानी पीकर आप दिन भर एनर्जेटिक महसूस कर पाएंगे। अगर आपको भी यही लगता है कि नारियल का पानी पीकर सिर्फ बॉडी को हाइड्रेशन मिलता है तो आपको अपनी इस गलतफहमी को दूर कर लेना चाहिए।

वेट लॉस में मददगार

लो कैलोरी कोकोनट वॉटर आपकी वेट लॉस जर्नी को आसान बनाने में मददगार साबित हो सकता है। नारियल का पानी पीकर आपका पेट भरा हुआ महसूस करेगा जिससे आप ओवरईटिंग करने से बच जाएंगे। इसके अलावा इम्यून सिस्मट को मजबूत बनाने के लिए भी नारियल का पानी पिया जा सकता है। नारियल का पानी पीकर आपको सिर के दर्द से भी राहत मिल सकती है।

गट हेल्थ के लिए फायदेमंद

नारियल का पानी पीकर आप अपनी गट हेल्थ को काफी  हद तक इम्प्रूव कर सकते हैं। एसिडिटी जैसी पेट से जुड़ी समस्या से छुटकारा पाने के लिए नारियल का पानी पीने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा नारियल का पानी पीने से आप अपने ब्लड प्रेशर को कंट्रोल कर सकते हैं। किडनी की सेहत को मजबूत बनाए रखने के लिए भी नारियल का पानी फायदेमंद साबित हो सकता है।

नारियल के पानी में पाए जाने वाले तत्व

नारियल के पानी में एंटीवायरल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं। बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए आपको सुबह-सुबह खाली पेट नारियल पानी पीकर अपने दिन की शुरुआत करनी चाहिए। सुबह नारियल का पानी पीकर आप अपने आलस से छुटकारा पा सकते हैं यानी कोकोनट वॉटर पीने के बाद आप दिन भर एनर्जेटिक महसूस कर पाएंगे।

 

 

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कर्मा पर्वः जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक मान्यताएँ का पर्व

 कर्मा पर्व भारतीय जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक मान्यताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका सीधा संबंध कृषि, पर्यावरण और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने से है। मध्य भारत के आदिवासी समाज विशेष रूप से छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल के जनजातीय समुदायों द्वारा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाए जाने वाला यह पर्व फसल के कटाई के समय कृषि के प्रति सम्मान और समृद्धि की प्रार्थना का अवसर होता है। इस लेख में, हम कर्मा पर्व की उत्पत्ति, इसका सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व, जनजातीय परंपराओं, तथा इस पर्व को मनाने की विभिन्न विधियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

 

कर्मा पर्व की उत्पत्ति और धार्मिक मान्यताएँ
कर्मा पर्व की उत्पत्ति मुख्यत कृषि और प्रकृति के प्रति आदिवासी समाजों की गहरी श्रद्धा और आस्था से जुड़ी है। ’’कमा’र्’ शब्द का तात्पर्य कर्म (परिश्रम) और कर्म (भाग्य) से है। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि मनुष्य अपने कर्मों द्वारा सफलता प्राप्त करें और साथ ही भाग्य भी उसका साथ दे। कर्मा को एक लोक देवता के रूप में पूजा जाता है, जो कृषि, फसल की वृद्धि और प्राकृतिक समृद्धि का प्रतीक होते हैं। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन जनजातीय समाज विशेष रूप से करम देवता की पूजा करता है, जिनसे वे फसलों की समृद्धि और गांव की खुशहाली की कामना करते हैं। कर्मा देवता की पूजा के दौरान गांव के बैगा (पुजारी) द्वारा कर्म राजा की कथा सुनाई जाती है, जो कर्मा पर्व के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को और भी बढ़ाती है। पूजा के उपरांत करमा नृत्य का आयोजन किया जाता है, जिसमें महिलाएँ और पुरुष सामूहिक रूप से नृत्य करते हैं ।
कर्मा पर्व की शुरुआत करम वृक्ष की एक डाली को गांव के प्रमुख व्यक्ति के आँगन में गाड़कर की जाती है। इस डाली को करम देवता का प्रतीक माना जाता है और उसकी विधिवत पूजा की जाती है। महिलाएं इस पर्व की तैयारी तीजा पर्व के दिन से ही शुरू कर देती हैं। वे टोकरी में जौ, गेहूँ, मक्का, धान और अन्य फसलों के बीज बोती हैं, जिसे ’’जाईं’’ कहा जाता है। यह जाईं करमा पर्व के दिन तक विकसित हो जाता है और इसी के साथ करम देवता की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान, इस जाईं को फूलों से सजाया जाता है और उसमें एक खीरा रखकर करम देवता को अर्पित किया जाता है।  पूजा के बाद रातभर करम देवता के चारों ओर करमा नृत्य किया जाता है।  महिलाएं  गोल घेरे में श्रृंखला बनाकर नृत्य करती हैं, जबकि पुरुष गायक, वादक और नर्तक उनके बीच होते हैं।करमा नृत्य के दौरान मांदर, झाँझ, मोहरी (शहनाई) जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का उपयोग किया जाता है। सूर्योदय से पहले करम देवता का विसर्जन किया जाता है, जो इस पर्व का समापन संकेत करता है।
मध्य भारत के गोंड, संथाल, मुंडा, हो जैसी जनजातियाँ कर्मा पर्व को विशेष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं। इन समुदायों में कर्मा पूजा के दौरान पारंपरिक नृत्य और गीतों का आयोजन किया जाता है। लोग रंग-बिरंगे वस्त्र पहनते हैं और सामूहिक रूप से नृत्य करते हैं। गोंड जनजाति में, करम देवता की छवि को पवित्र स्थल पर स्थापित किया जाता है और उसकी पूजा की जाती है। झारखंड के साथ छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के आदिवासी समुदाय एवं अन्य समुदाय के लोग इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। छत्तीसगढ़ की बात करे तो सबसे ज्यादा सरगुजा और कोरबा संभाग बड़े हो धूमधाम से मनाते है, यहां करम देवता की पूजा फसलों की सुरक्षा और गांव की समृद्धि के लिए की जाती है । इस करमा पर्व को उड़ीसा और पश्चिम बंगाल के जनजातीय समुदाय भी इस पर्व को अपने अनूठे तरीके से मनाते हैं। इन क्षेत्रों में कर्मा पर्व के दौरान पशु बलि की परंपरा है, जो समाज की धार्मिक मान्यताओं का प्रतीक है। यहां भी पारंपरिक नृत्य, गीत और विशेष भोज का आयोजन किया जाता है, जो सामूहिक एकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है।


सांस्कृतिक महत्व और सामाजिक एकता का संदेश देता कर्मा पर्व
कर्मा पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह जनजातीय समाजों के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग है। यह पर्व जनजातीय समाजों की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। सामूहिक भोज, पारंपरिक नृत्य और गीतों के माध्यम से जनजातीय समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं को और उनके एकता को आज भी जीवित रखते हैं। यह पर्व समाज में सामाजिक एकता और भाईचारे को भी बढ़ावा देता है, जहां लोग मिल-जुलकर पर्व का आनंद लेते हैं और एक-दूसरे के साथ अपनी खुशियाँ साझा करते हैं। कर्मा पर्व के दौरान जनजातीय समाज के लोग सामूहिक रूप से अपने देवताओं और पूर्वजों की पूजा करते हैं। यह पर्व सामूहिकता, सहयोग और पारस्परिक सम्मान का प्रतीक है। गांवों में इस दिन सामूहिक भोज का आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी लोग एक साथ भोजन करते हैं और आपस में प्रेम और सौहार्द की भावना का प्रसार करते हैं।

आधुनिक समय में भी कर्मा पर्व का आज भी महत्व है?
वैश्वीकरण और आधुनिकता के प्रभाव के बावजूद, करमा पर्व का महत्व आज भी जनजातीय समाजों में बरकरार है। हालांकि कुछ जनजातीय समुदायों में इस पर्व की पारंपरिक विधियाँ बदल गई हैं, फिर भी लोग अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। आधुनिक युग में भी, कर्मा पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह जनजातीय समाजों की सांस्कृतिक पहचान और उनके सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने का एक साधन भी बन गया है। कर्मा पर्व का महत्व केवल धार्मिक दृष्टिकोण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक पुनरावलोकन का अवसर भी प्रदान करता है। यह पर्व आदिवासी समाजों को अपनी जड़ों की ओर लौटने और अपनी परंपराओं को फिर से जीवित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। विभिन्न जनजातीय समुदायों में कर्मा पर्व को मनाने की विधियाँ उनकी सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि का प्रतीक हैं।
कर्मा पर्व भारतीय जनजातीय समाजों की सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक मान्यताओं का प्रतीक है। यह पर्व कृषि, फसलों और प्रकृति के प्रति आदिवासी समाजों की गहरी श्रद्धा और आस्था को दर्शाता है। यह न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह जनजातीय समाजों की सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक जीवन का भी एक अभिन्न हिस्सा है। सामूहिक नृत्य, गीत और पूजा-अर्चना के माध्यम से जनजातीय समाज अपनी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखते हैं और अपनी आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं।

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अबू धाबी से पहले मुम्बई में दिखे आईफा फेस्टिवल 2024 के खूबसूरत रंग

 इंटरनेशनल इंडियन फिल्म एकेडमी (आईफा) अवॉर्ड्स का हस्तियों के साथ ही फैंस एवं दर्शकों को पूरे साल बेसब्री से इंतज़ार रहता है, जो कि कुछ ही दिनों में खत्म होने को है। भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा और शानदार जश्न, आईफा अवॉर्ड्स 27 से 29 सितंबर तक अबू धाबी के यास आइलैंड के एतिहाद एरिना में आयोजित होने जा रहा है। यह तीसरी बार है, जब एंटरटेनमेंट का हब माने जाने वाले आइफा यह आयोजन यास आइलैंड में होने जा रहा है। बहुप्रतीक्षित आईफा अवॉर्ड्स का आयोजन अबू धाबी की संस्कृति व पर्यटन विभाग और अबू धाबी में एक से बढ़कर एक डेस्टिनेशन के अनुभव प्रदान कराने‌ के लिए लोकप्रिय ब्रांड मिरल के सहयोग से किया जा रहा है।
 
आईफा फेस्टिवल की शुरुआत मुम्बई में एक जोरदार प्रेस कॉन्फ्रेंस से हुई, जिसमें शाहरुख़ ख़ान और करण जौहर की जोड़ी ने सभी का ध्यान खींचा। इन दोनों स्टार्स के साथ-साथ सिद्धांत चतुर्वेदी और अभिषेक बनर्जी भी इस मौके पर मौजूद थे। राणा दग्गुबती और संगीतकार एहसान नूरानी ने भी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी छाप छोड़ी।
 
27 सितंबर से शुरू होने वाला यह फेस्टिवल दक्षिण भारतीय फिल्मों, जैसे कि तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़ सिनेमा की विविधता को भी बड़े पैमाने पर पेश करेगा। 28 सितंबर को आईफा अवॉर्ड्स का मुख्य समारोह होगा, जिसे शाहरुख खान, करण जौहर और विक्की कौशल होस्ट करेंगे। इसी दिन शाहिद कपूर, विक्की कौशल, जाह्नवी कपूर और कृति सैनन की एक से बढ़कर एक परफॉर्मेंसेस से रात भर रंग जमने वाला है। वहीं, 29 सितंबर को आईफा रॉक्स के साथ यह फेस्टिवल खत्म होगा, जो सिर्फ आमंत्रित मेहमानों के लिए होगा। इस महोत्सव में दुनियाभर के सितारे, मीडिया, और फैन्स शामिल होंगे, जो एक अद्भुत अनुभव का हिस्सा बनेंगे।


 
आईफा के फाउंडर आंद्रे टिमिन्स ने बताया, "आईफा का 25वाँ साल काफी खास होने वाला है। इस बार हम आईफा की भव्यता और वैभव को नए मुकाम पर ले जाएँगे। यास आइलैंड का शानदार आतिथ्य और सौंदर्य इसे एक अंतर्राष्ट्रीय मंच के रूप में स्थापित करता है।"


 
मिरल के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर तागरिद अलसईद ने बताया, "हम यास आइलैंड में इस बार के फेस्टिवल को लेकर बेहद उत्साहित हैं। यह आयोजन भारतीय सिनेमा और सांस्कृतिक उत्कर्ष का आदर्श उदाहरण पेश करेगा।"


 
आईफा फेस्टिवल 2024 की खासियत यह है कि यह हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा के बीच की सभी सीमाओं को मिटाते हुए एक अद्भुत सिनेमाई अनुभव पेश करेगा। 27 सितंबर को आईफा उत्सवम 2024, 28 सितंबर को आईफा अवॉर्ड्स और 29 सितंबर को आईफा रॉक्स की महफिल सजेगी। वहीं, शाहरुख खान, करण जौहर, विक्की कौशल, सिद्धांत चतुर्वेदी और अभिषेक बनर्जी आईफा 2024 के मुख्य होस्ट्स तथा शाहिद कपूर, विक्की कौशल, जाह्नवी कपूर, कृति सैनन, प्रभु देवा, और रॉकस्टार डीएसपी परफॉर्मर्स के रूप में शामिल होंगे। इस प्रकार, यह फेस्टिवल भारतीय सिनेमा की शानदार यात्रा का एक बड़ा हिस्सा बनने जा रहा है।

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