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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के दाहोद में 24,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और लोकार्पण किया

 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के दाहोद में 24,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पित किया। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 26 मई का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन उन्होंने 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने गुजरात के लोगों के अटूट समर्थन और आशीर्वाद को स्वीकार किया, जिन्होंने उन्हें देश का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस विश्वास और प्रोत्साहन ने दिन-रात देश की सेवा के लिए उनके समर्पण को बढ़ावा दिया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऐसे अभूतपूर्व और अकल्पनीय निर्णय लिए हैं, जो दशकों पुरानी बाधाओं से मुक्त हैं और हर क्षेत्र में आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा, “आज देश निराशा और अंधकार के युग से निकलकर आत्मविश्वास और आशावाद के नए युग में प्रवेश कर चुका है।”


श्री मोदी ने कहा, "140 करोड़ भारतीय एक विकसित भारत के निर्माण में एकजुट हैं।" उन्होंने भारत के भीतर आवश्यक वस्तुओं के विनिर्माण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता समय की मांग है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और घरेलू उत्पादन और निर्यात दोनों में लगातार वृद्धि हो रही है। भारत अब स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, खिलौने, रक्षा उपकरण और दवाओं सहित कई तरह के उत्पादों का निर्यात कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत न केवल रेल और मेट्रो तकनीक का विनिर्माण कर रहा है, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर निर्यात भी कर रहा है। इस प्रगति का एक प्रमुख उदाहरण दाहोद, जहां हजारों करोड़ रुपये की प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन और शुभारंभ किया गया, को बताते हुए श्री मोदी ने दाहोद इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव फैक्ट्री को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने तीन वर्ष पूर्व इसकी आधारशिला रखने को याद किया और गर्वपूर्वक कहा कि अब पहला इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव सफलतापूर्वक विनिर्मित किया गया है। उन्होंने लोकोमोटिव को झंडी दिखाकर रवाना किया, जो गुजरात और पूरे देश के लिए गौरव का क्षण था। इसके अतिरिक्त, उन्होंने घोषणा की कि गुजरात ने अपने रेलवे नेटवर्क का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हासिल कर लिया है। उन्होंने इसे एक उल्लेखनीय
उपलब्धि बताया और इसके लिए गुजरात के लोगों को बधाई दी।

दाहोद के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और इस क्षेत्र से जुड़ी कई यादों का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे दशकों से दाहोद आते रहे हैं और अपने शुरुआती वर्षों में वे अक्सर साइकिल से इस क्षेत्र का भ्रमण करते थे। उन्होंने रेखांकित किया कि इन अनुभवों से उन्हें दाहोद की चुनौतियों और संभावनाओं दोनों को समझने का अवसर प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद भी वे कई बार इस क्षेत्र का दौरा करते रहे और इसके मुद्दों को हल करने के लिए निर्णायक कदम उठाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दाहोद में हर विकास पहल से उन्हें अपार संतुष्टि मिलती है और आज का दिन उनके लिए एक और सार्थक दिन है।

पिछले 10-11 वर्षों में भारत के रेलवे क्षेत्र के त्वरित विकास को रेखांकित करते हुए, श्री मोदी ने मेट्रो सेवाओं के विस्तार और सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों की शुरुआत पर जोर दिया, जिससे पूरे देश में कनेक्टिविटी रूपांतरित हो रही है। उन्होंने कहा कि वंदे भारत ट्रेनें अब लगभग 70 रूटों पर चल रही हैं, जो भारत के परिवहन नेटवर्क को और सुदृढ़ बनाती हैं। उन्होंने अहमदाबाद और वेरावल के बीच एक नई वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत की घोषणा की। श्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत में आधुनिक ट्रेनों का उदय देश की प्रौद्योगिकी में प्रगति की वजह से है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोच और इंजन अब घरेलू स्तर पर विनिर्मित होते हैं, जिससे आयात पर निर्भरता कम होती है। श्री मोदी ने कहा, "भारत रेलवे उपकरणों के एक प्रमुख निर्यातक के रूप में उभरा है।" उन्होंने कहा कि भारत ऑस्ट्रेलिया को मेट्रो कोच और इंग्लैंड, सऊदी अरब और फ्रांस को ट्रेन कोच निर्यात करता है। उन्होंने कहा कि मैक्सिको, स्पेन, जर्मनी और इटली भी भारत से रेलवे से संबंधित कंपोनेंट आयात करते हैं। श्री मोदी ने यह भी कहा कि भारतीय यात्री कोच मोजाम्बिक और श्रीलंका में उपयोग में लाए जा रहे हैं और 'मेड इन इंडिया' इंजनों को कई देशों में निर्यात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह 'मेक इन इंडिया' पहल के निरंतर विस्तार को दर्शाता है तथा राष्ट्रीय गौरव को मजबूत करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "एक मजबूत रेलवे नेटवर्क सुविधाएं बढ़ाता है और उद्योगों तथा कृषि को बढ़ावा देता है।" उन्होंने रेखांकित किया कि भारत के कई क्षेत्रों में पिछले दशक में पहली बार रेलवे कनेक्टिविटी मिली है। उन्होंने कहा कि गुजरात के कई क्षेत्रों में पहले केवल छोटी, धीमी गति वाली ट्रेनें थीं, लेकिन अब कई नैरो-गेज मार्गों का विस्तार किया गया है। दाहोद और वलसाड के बीच नई एक्सप्रेस ट्रेन सहित कई रेलवे मार्गों के उद्घाटन, जिससे जनजातीय क्षेत्र को बहुत लाभ होगा, की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कारखाने युवाओं के लिए व्यापक स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करते हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि दाहोद की रेल फैक्ट्री 9,000 हॉर्स पावर के इंजनों का विनिर्माण करेगी, जिससे भारत की रेलगाड़ियों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि दाहोद में बनने वाले हर इंजन पर शहर का नाम अंकित होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में सैकड़ों इंजन बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार पैदा होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह कारखाना रेलवे के पुर्जे बनाने वाले छोटे उद्योगों को भी समर्थन देगा, जिससे आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक विकास होगा। उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसर फैक्ट्री से परे भी उपलब्ध हैं, जिससे किसानों, पशुपालकों, दुकानदारों और मजदूरों को लाभ मिलता है तथा व्यापक आर्थिक प्रगति सुनिश्चित होती है।

श्री मोदी ने रेखांकित किया कि गुजरात ने शिक्षा, आईटी, सेमीकंडक्टर और पर्यटन सहित कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसने खुद को विभिन्न उद्योगों में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि गुजरात में हजारों करोड़ रुपये के निवेश से एक प्रमुख सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जो वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि ये पहल गुजरात में लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही हैं, जो राज्य की आर्थिक वृद्धि और विकास में योगदान दे रही हैं।

इस बात को रेखांकित करते हुए कि दाहोद, वडोदरा, गोधरा, कलोल और हलोल ने सामूहिक रूप से गुजरात में एक उच्च तकनीक इंजीनियरिंग और विनिर्माण गलियारा स्थापित किया है, प्रधानमंत्री ने कहा कि वडोदरा विमान विनिर्माण में तेजी से आगे बढ़ रहा है और कुछ ही महीने पहले एयरबस असेंबली लाइन का उद्घाटन किया गया है। उन्होंने कहा कि वडोदरा में भारत का पहला गति शक्ति विश्वविद्यालय भी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सावली में पहले से ही एक प्रमुख रेल-कार विनिर्माण कारखाना है, जबकि दाहोद में अब भारत के सबसे शक्तिशाली इंजनों- 9,000-हॉर्सपावर इंजन का उत्पादन करने वाली एक सुविधा केंद्र है, जो राष्ट्र के लिए गौरव का क्षण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि गोधरा, कलोल और हलोल में विनिर्माण इकाइयों, छोटे उद्योगों और एमएसएमई की महत्वपूर्ण उपस्थिति है, जो गुजरात के औद्योगिक विकास में योगदान दे रहे हैं। एक ऐसे भविष्य की कल्पना करते हुए जहां गुजरात का यह क्षेत्र साइकिल और मोटरसाइकिल से लेकर रेलवे इंजन और विमान तक सब कुछ बनाने के लिए जाना जाएगा, प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह का उच्च तकनीक इंजीनियरिंग और विनिर्माण गलियारा वैश्विक स्तर पर दुर्लभ है, जो एक औद्योगिक महाशक्ति के रूप में गुजरात की स्थिति को मजबूत करता है।

श्री नरेन्द्र मोदी ने जोर देकर कहा, “विकसित भारत के निर्माण के लिए जनजातीय क्षेत्रों का विकास आवश्यक है।” उन्होंने रेखांकित किया कि जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए पिछले 11 वर्षों में अभूतपूर्व प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात के जनजातीय क्षेत्रों में काम करने के उनके लंबे अनुभव ने राष्ट्रीय स्तर की पहल में योगदान दिया है। श्री मोदी ने उस समय को याद किया जब गुजरात में जनजातीय बच्चों को विज्ञान की पढ़ाई करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज, पूरे जनजातीय क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध है, अच्छे कॉलेज, आईटीआई, मेडिकल कॉलेज और इन समुदायों की सेवा करने वाले दो समर्पित जनजातीय विश्वविद्यालय हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में एकलव्य मॉडल स्कूलों का नेटवर्क काफी मजबूत हुआ है, जिससे जनजातीय छात्रों के लिए बेहतर शैक्षिक अवसर सुनिश्चित हुए हैं। श्री मोदी ने कहा कि दाहोद में ही कई एकलव्य मॉडल स्कूल हैं, जो जनजातीय शिक्षा को अधिक बढ़ावा दे रहे हैं।

देश भर में जनजातीय समुदायों के विकास के लिए किए जा रहे महत्वपूर्ण प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार जनजातीय गांवों के उत्थान के लिए एक बड़ी योजना शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि 'धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान' एक ऐतिहासिक पहल है, जिसके कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार लगभग 80 हजार करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत गुजरात सहित देश भर के 60 हजार से अधिक गांवों में विकास कार्य किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर डाला कि इन गांवों को जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए बिजली, पानी, सड़क, स्कूल और अस्पतालों से सुसज्जित किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनजातीय परिवारों के लिए पक्के घर बनाए जा रहे हैं, जिससे समुदाय के लिए जीवनयापन की बेहतर स्थिति सुनिश्चित हो रही है।

श्री मोदी ने सबसे सीमांत जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए अपनी प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि उनकी सरकार उन लोगों को प्राथमिकता देती है जिनकी लंबे समय से अनदेखी की गई है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पहली बार सरकार ने विशेष रूप से निर्बल जनजातीय समूहों को सहायता देने के लिए पीएम जनमन योजना शुरू की है, जो दशकों से आवश्यक सुविधाओं से वंचित रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि इस योजना के तहत जनजातीय गांवों में नए बुनियादी ढांचे और सुविधाओं का विकास किया जा रहा है और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न किए जा रहे हैं, जिससे इन समुदायों के लिए अधिक आर्थिक और सामाजिक समावेश सुनिश्चित हो रहा है।

जनजातीय समुदायों को सिकल सेल एनीमिया से मुक्त करने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन के शुभारंभ पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इस पहल के तहत लाखों जनजातीय नागरिक पहले ही जांच करवा चुके हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार पिछड़े क्षेत्रों के विकास में तेजी लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 100 से अधिक जिलों को पहले पिछड़े के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जिनमें से कई जनजातीय बहुल क्षेत्र थे। उन्होंने कहा कि दाहोद ऐसा ही एक जिला था, लेकिन आज यह एक आकांक्षी जिले के रूप में प्रगति कर रहा है, जो आधुनिक बुनियादी ढांचे और स्मार्ट सुविधाओं के साथ परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि दक्षिण दाहोद को पानी की भीषण किल्लत का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब सैकड़ों किलोमीटर लंबी पाइपलाइनें बिछाई गई हैं, जिससे नर्मदा का पानी हर घर तक पहुंचना सुनिश्चित हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में उमरगाम से अंबाजी तक 11 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई से जोड़ा गया है, जिससे जनजातीय समुदायों के लिए खेती करना सुगम हो गया है।

वडोदरा में हजारों महिलाएं, जो राष्ट्र और उसके सशस्त्र बलों का सम्मान करने के लिए एकत्र हुई थीं, उनकी भारी उपस्थिति की सराहना करते हुए श्री मोदी ने भारत की महिलाओं के प्रति उनके अटूट समर्थन के लिए सम्मान और हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि दाहोद त्याग और समर्पण की भूमि है। उन्होंने स्मरण किया कि महर्षि दधीचि ने सृष्टि की रक्षा के लिए दूधमती नदी के तट पर अपना जीवन त्याग दिया था। श्री मोदी ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र ने संकट के समय स्वतंत्रता सेनानी तात्या टोपे का साथ दिया और मानगढ़ धाम गोविंद गुरु और सैकड़ों जनजातीय योद्धाओं द्वारा किए गए बलिदान का प्रतीक है। इस बात पर जोर देते हुए कि भारत के सांस्कृतिक मूल्य अन्याय के कदम उठाने की मांग करते हैं, उन्होंने प्रश्न किया कि क्या जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद राष्ट्र चुप रह सकता था। श्री मोदी ने बताया, "ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत के मूल्यों और भावनाओं का प्रतिबिंब था।" उन्होंने टिप्पणी की कि आतंकवादियों को अपने कुकृत्यों का कोई अनुमान नहीं था और याद किया कि किस प्रकार बच्चों के सामने उनके पिता की क्रूर हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि ऐसी तस्वीरें आज भी पूरे देश में आक्रोश पैदा करती हैं, क्योंकि 140 करोड़ भारतीयों को आतंकवाद से चुनौती मिली। श्री मोदी ने घोषणा की कि उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया, भारत के सशस्त्र बलों को पूरी आजादी दी, उन्होंने दशकों में एक अभूतपूर्व ऑपरेशन को अंजाम दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सीमा पार नौ प्रमुख आतंकी ठिकानों की पहचान कर 22 मिनट में उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई करने का प्रयास किया, लेकिन भारतीय सेना ने उन्हें पूरी तरह से धूल चटा दी। श्री मोदी ने भारत के सशस्त्र बलों की वीरता के प्रति सम्मान जताया और दाहोद की पवित्र भूमि से उनके साहस और समर्पण को सलाम किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विभाजन के बाद पैदा हुए देश ने भारत के प्रति शत्रुता और नुकसान पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा, "दूसरी ओर, भारत गरीबी उन्मूलन, अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और विकास हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।" प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एक विकसित भारत का निर्माण तभी हो सकता है जब उसकी सशस्त्र सेना और अर्थव्यवस्था दोनों मजबूत हों। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास एक साथ हो सके।

दाहोद की अपार संभावनाओं को रेखांकित करते हुए, उन्होंने कहा कि यह आयोजन इसकी क्षमताओं की एक झलक मात्र है। श्री मोदी ने दाहोद के मेहनतकश लोगों पर पूरा भरोसा जताया और इस बात पर जोर दिया कि वे नव विकसित सुविधाओं का सर्वोत्तम उपयोग करेंगे और दाहोद को देश के सबसे विकसित जिलों में से एक बना देंगे। उन्होंने दाहोद के लोगों को एक बार फिर बधाई देते हुए उनके समर्पण और प्रगति के प्रति अपना विश्वास दोहराया।

इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल, केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

 पृष्ठभूमि

कनेक्टिविटी बढ़ाने और विश्व स्तरीय यात्रा अवसंरचना के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, प्रधानमंत्री ने दाहोद में भारतीय रेलवे के लोकोमोटिव विनिर्माण संयंत्र का उद्घाटन किया। यह संयंत्र घरेलू उद्देश्यों और निर्यात के लिए 9000 एचपी के इलेक्ट्रिक इंजनों का उत्पादन करेगा। उन्होंने संयंत्र से विनिर्मित पहले इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को भी झंडी दिखाई। ये लोकोमोटिव भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। ये लोकोमोटिव रिजेनेरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम से सुसज्जित होंगे और इन्हें ऊर्जा उपभोग को कम करने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है, जो पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान देता है।

इसके बाद, प्रधानमंत्री ने दाहोद में 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं में रेल परियोजनाएं और गुजरात सरकार की विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने वेरावल और अहमदाबाद के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस और वलसाड तथा दाहोद स्टेशनों के बीच एक्सप्रेस ट्रेन को भी झंडी दिखाई।
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प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में बस्तर के नवाचारों की खुलकर सराहना

राजधानी दिल्ली स्थित अशोक होटल में आयोजित मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन मॉडल, नवाचारों और जनभागीदारी आधारित योजनाओं ने विशेष पहचान बनाई। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा प्रस्तुत बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजनों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों का ध्यान आकर्षित किया। बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव एवं श्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने प्रस्तुतीकरण की शुरुआत राज्य में सुशासन की संस्थागत पहल से की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन एवं अभिसरण विभाग’ का गठन कर योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। ‘अटल मॉनिटरिंग पोर्टल’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से योजनाओं की निगरानी की जा रही है, जिससे शिकायतों का समाधान निर्धारित समय में संभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर ईमानदारी व संवेदनशीलता से लागू करना है।

बैठक में केंद्र की फ्लैगशिप योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं को छत्तीसगढ़ में ग्रामसभा, जनसंवाद और तकनीक के माध्यम से आमजन तक पहुँचाया गया है।

बैठक का सबसे प्रेरक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री ने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम पर विशेष प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ‘खेलोगे इंडिया, जीतोगे इंडिया’ मंत्र को उद्धृत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने इसे धरातल पर साकार किया है। बस्तर ओलंपिक अब सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति बन चुका है — जिसने युवाओं के हाथों से बंदूकें छीनकर गेंद, भाला और तीर थमा दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया इस आयोजन में 7 जिलों के 32 विकासखंडों से 1.65 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया। तीन चरणों — विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर आयोजित यह प्रतियोगिता 11 पारंपरिक खेलों जैसे तीरंदाजी, खो-खो, कबड्डी, दौड़, रस्साकसी आदि पर केंद्रित थी। चार श्रेणियों — जूनियर, सीनियर, महिला और दिव्यांग — में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

मुख्यमंत्री साय ने दोरनापाल के पुनेन सन्ना का उदाहरण साझा किया, जो कभी नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्र से थे, पर आज व्हीलचेयर दौड़ में पदक जीतकर पूरे समाज के लिए प्रेरणास्तंभ बन गए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बस्तर ओलंपिक की प्रशंसा करते हुए कहा था कि यह आयोजन केवल खेल नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा का उत्सव है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम उत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने न केवल आदिवासी संस्कृति, लोककलाओं और परंपराओं को संरक्षित किया, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय मंच भी प्रदान किया। इस आयोजन में 7 जिलों के 32 विकासखंडों की 1,885 ग्राम पंचायतों के 1,743 सांस्कृतिक दलों और 47,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। लोकनृत्य, गीत-संगीत, हाट-बाजार, पकवान प्रतियोगिताएं जैसे विविध रंगों से सजा यह उत्सव बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक को जोड़ते हुए बस्तर की एकता, पहचान और विकास का प्रतीक बन गया। सरकार द्वारा 2.4 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस आयोजन ने उत्सव और खेल के माध्यम से सकारात्मक भविष्य की नई चेतना जगाई है।

बैठक में जिन राज्यों को अपनी योजनाओं के प्रस्तुतीकरण का अवसर मिला, उनमें छत्तीसगढ़ का ‘बस्तर मॉडल’ बेहद प्रभावशाली रहा।जनभागीदारी, संस्कृति और विकास के इस अनोखे मेल ने सभी को प्रभावित किया। बैठक में सुझाव दिया गया कि जनभागीदारी व सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित ऐसे मॉडल्स को अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इन पहलों को अनुकरणीय बताते हुए सुझाव दिया कि ऐसे नवाचार, जो समाज की जड़ों से जुड़ते हों और विकास की दिशा तय करते हों, उन्हें  विस्तार दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ के ‘बस्तर मॉडल’ को जिस तरह सराहा गया, उसने यह स्पष्ट किया कि जनसहभागिता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विकास के समन्वय से किस तरह दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी बदलाव की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
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दंतेवाड़ा में कभी माओवाद चरम पर था, वहां आज शिक्षा का परचम लहरा रहाः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपने मन की बात की 122वीं कड़ी में देश के सामने अपनी बातों को रखा। मन की बात की ये कड़ी छत्तीसगढ़ के लिए काफी खास रही। प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किए जा रहे कार्यों की तारीफ करते हुए कहा कि जिस दंतेवाड़ा में कभी माओवाद चरम पर था, वहां आज शिक्षा का परचम लहरा रहा है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ में हुए बस्तर ओलंपिक  और माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में साइंस लैब के बारे मे जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों में साइंस का पैशन है और वो खेलों में भी कमाल कर रहे हैं। 


प्रधानमंत्री ने बस्तर क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा है कि इस तरह के प्रयासों से पता चलता है कि इन इलाकों में रहने वाले लोग कितने साहसी होते हैं। इन लोगों ने तमाम चुनौतियों के बीच अपने जीवन को बेहतर बनाने की राह चुनी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे यह जानकार भी बहुत खुशी हुई कि 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में दंतेवाड़ा जिले के नतीजे बहुत शानदार रहे हैं। करीब पंचानबे ( नाइंटी पाइव) प्रतिशत रिजल्ट ये जिला 10वीं के नतीजों में टॉप पर रहा, वहीं 12वीं की परीक्षा में इस जिले ने छत्तीसगढ़ में छठा स्थान हासिल किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से बस्तर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे बदलाव हम सभी को गर्व से भर देते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा मन की बात की 122वीं कड़ी में बस्तर क्षेत्र और दंतेवाड़ा का जिक्र करने पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की सरकार प्रधानमंत्री के विकसित भारत के नक्शे कदम पर चल रही है और विकसित छत्तीसगढ़ इस अभियान में अपना महत्वपूर्ण योगदान निभाएगा।
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नीति आयोग की बैठक में दिखी आत्मीयता: जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का थामा हाथ और कहा – छत्तीसगढ़ की बात अभी बाकी है

नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक के दौरान एक आत्मीय क्षण सामने आया, जिसने सबका ध्यान खींचा। लंच ब्रेक के समय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का हाथ थामते हुए मुस्कराकर कहा कि  "छत्तीसगढ़ की बात अभी बाकी है।" इस एक वाक्य में प्रधानमंत्री का स्नेह, विश्वास और राज्य के प्रति विशेष रुचि झलक रही थी। उस क्षण, आसपास उपस्थित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री श्री एम.के. स्टालिन भी मुस्कराते हुए इस संवाद के साक्षी बने।


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में हो रहे सकारात्मक बदलाव, औद्योगिक निवेश, और ‘आत्मनिर्भर बस्तर’ की दिशा में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों की सराहना की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि कैसे बस्तर अब संघर्ष नहीं, संभावना का प्रतीक बन रहा है – जहाँ कभी बंदूकें चलती थीं, वहाँ अब मशीनें, लैपटॉप और स्टार्टअप की चर्चा हो रही है। नवा रायपुर में देश की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट और एआई डेटा सेंटर की स्थापना से लेकर लिथियम ब्लॉक की नीलामी तक – छत्तीसगढ़ अब संसाधनों से परिपूर्ण राज्य बनने की ओर अग्रसर है और देश के विकास में छत्तीसगढ़ की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है।

यह क्षण किसी औपचारिक संवाद का नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा छत्तीसगढ़ के विकास के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री श्री साय के प्रयासों की सहज स्वीकृति और सराहना का था। नीति आयोग की बैठक में जहां देशभर के राज्यों ने अपने विकास मॉडल प्रस्तुत किए, वहीं छत्तीसगढ़ की प्रस्तुति ने प्रधानमंत्री की विशेष रुचि और सराहना प्राप्त की। यह स्पष्ट संकेत है कि छत्तीसगढ़ अब केवल एक उभरता हुआ राज्य नहीं, बल्कि देश के समग्र विकास में एक निर्णायक भूमिका निभाने वाला राज्य बन चुका है।
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बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता मुकुल देव का निधन

 फिल्म इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता मुकुल देव का शुक्रवार रात 54 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके अचानक निधन की खबर से हिंदी सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

'सन ऑफ सरदार', 'आर... राजकुमार' और 'जय हो' जैसी सुपरहिट फिल्मों से पहचान बनाने वाले मुकुल देव ने अपने करियर में विलेन से लेकर पुलिस अफसर तक के किरदार निभाकर दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई थी। उनकी बहुमुखी प्रतिभा और स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें हर पीढ़ी के दर्शकों का पसंदीदा बनाया।

परिवार की ओर से अब तक नहीं आया आधिकारिक बयान

उनकी मौत की वजहों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। करीबी मित्र और अभिनेत्री दीपशिखा नागपाल ने उनके निधन की जानकारी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए दी। उन्होंने मुकुल देव की थ्रोबैक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “RIP।” शनिवार को खबर फैलते ही कई दोस्त और सहकर्मी उनके घर पहुंचे।

फिल्मों के साथ टीवी में भी दमदार पहचान
मुकुल देव ने 1996 में टीवी धारावाहिक 'मुमकिन' से अभिनय की शुरुआत की थी और ‘फियर फैक्टर इंडिया’ के पहले सीज़न को होस्ट कर लोकप्रियता हासिल की। उन्होंने ‘दस्तक’ फिल्म से बॉलीवुड डेब्यू किया था, जिसमें सुष्मिता सेन के साथ नजर आए थे।

पायलट से अभिनेता बनने तक का सफर
दिल्ली में जन्मे मुकुल देव ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी से ट्रेनिंग ली थी और पायलट बनने की पढ़ाई की थी, लेकिन बाद में अभिनय को करियर बना लिया। कक्षा 8 में दूरदर्शन के एक डांस शो में माइकल जैक्सन की नकल कर पहली बार उन्होंने स्टेज पर परफॉर्म किया था।

राहुल देव के छोटे भाई थे मुकुल
वे अभिनेता राहुल देव के छोटे भाई थे। उनके पिता हरी देव दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट कमिश्नर थे और पश्तो व फारसी भाषा के जानकार थे। मुकुल का जीवन हमेशा कला, अनुशासन और विविधता से भरा रहा।

मुकुल देव की अंतिम फिल्म ‘एंथ द एंड’ थी, और वे लंबे समय से फिल्मों से दूरी बनाए हुए थे। उनके असमय निधन से इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है और फैंस सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

बॉलीवुड एक और संजीदा कलाकार को खो चुका है।

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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अम्बिकापुर सहित देशभर के 103 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों किया लोकार्पण

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आज देशभर के 103 स्टेशनों का वर्चुअल उद्घाटन किया। इनमें छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर सहित 5 रेल्वे स्टेशन शामिल हैं। इन रेल्वे स्टेशनों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया गया है। यह भारतीय रेलवे के विकास की नई संस्कृति है, जिसमें चुनिंदा रेल्वे स्टेशनों को पुनर्विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय इस वर्चुअल कार्यक्रम में अम्बिकापुर रेल्वे स्टेशन से जुड़े। 


गौरतलब है कि भारतीय रेल और देश के प्रधानमंत्री श्री मोदी की दूरदृष्टि का परिणाम रहा है कि इन विकास कार्यों से स्थानीय यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र में पर्यटन एवं आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। भारतीय रेलवे द्वारा 1337 स्टेशनों के कायाकल्प की शुरुआत की है, इनमें 103 स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य पूर्ण हो चुका है। उनमें छत्तीसगढ़ राज्य के पांच स्टेशन बिलासपुर मंडल का अम्बिकापुर, रायपुर मंडल का उरकुरा, भिलाई, भानुप्रतापपुर तथा नागपुर मंडल का डोंगरगढ़ रेलवे स्टेशन शामिल हैं।  

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि सम्माननीय लरंग साय जी के प्रयासों के कारण ही अम्बिकापुर में रेलवे स्टेशन की स्थापना हुई है। देश के प्रधानमंत्री श्री मोदी 140 करोड़ देशवासियों को अपना परिवार मानते हुए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले 2047 तक छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाना है। अमृत काल के तहत रेलवे स्टेशन का लगातार विकास किया जा रहा है। आज प्रदेश के जिन पांच स्थानों का लोकार्पण हुआ है, वह विकसित हो रहे भारत की झलक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जशपुर जिले को भी रेल कनेक्टिविटी से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 

कार्यक्रम में कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, वित्तमंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद श्री चिंतामणि महाराज, विधायक श्री राजेश अग्रवाल, श्रीमती शकुंतला पोर्ते, श्रीमती उद्देश्वरी पैकरा, श्री राम कुमार टोप्पो, श्री प्रबोध मिंज, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर श्री मंजूषा भगत मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में सरगुजा अंचल के नागरिक शामिल हुए।



अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन 

छत्तीसगढ़ की आदिवासी सांस्कृतिक विरासत का केंद्र रहा अम्बिकापुर का रेलवे स्टेशन देश की जीवनरेखा भारतीय रेल का एक अभिन्न अंग है। इस रेलवे स्टेशन को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। यात्रियों को पूरी तरह से सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से इस नए स्टेशन भवन में कई नए प्रावधान भी किए गए हैं। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन में 6 करोड़ 29 लाख रुपए की लागत से उन्नयन तथा आधुनिकीकरण के कार्य किए गये हैं, जिसमें सर्कुलेटिंग क्षेत्र को बेहतर बनाते हुए रोड का चौड़ीकरण, यात्रियों के स्वागत के लिए सुसज्जित प्रवेशद्वार, 3900 वर्गमीटर सड़क, 3677 वर्गमीटर पर  दोपहिया, तिपहिया एवं चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग व्यवस्था भी की गई है।

 अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन में उन्नत व आधुनिक सुविधाओं से युक्त द्वितीय श्रेणी, उच्च श्रेणी प्रतीक्षालय एवं वीआईपी कक्ष, 6 नए आधुनिक छायादार प्लेटफार्म शेड, महिलाओं, पुरुषों और दिव्यांगजनों हेतु आधुनिक शौचालय, वॉटर फाउंटेन, ट्रेन/कोच डिस्प्ले बोर्ड, सीसीटीवी कैमरे, रैम्प एवं टैक्टाइल टाइल्स, 300 मीटर स्टेनलेस स्टील रेलिंग, 58 स्ट्रीट लाइट्स, बेहतर प्रकाश व्यवस्था हेतु हाई मास्ट लाइट, नवीनतम पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम का लाभ यहाँ के यात्रियों को मिलेगा।

रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर एक बड़ा तिरंगा झंडा लगाया गया है साथ ही स्टेशन में यात्रियों के लिए सरगुजा की प्रसिद्ध सीताबेंगरा गुफा की तर्ज पर सेल्फी पॉइंट भी बनाया गया है। अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन पर भव्य प्रवेश द्वार, आकर्षक फसाड, हाई मास्ट लाइटिंग, आधुनिक प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर, मॉर्डन टॉयलेट और दिव्यांगजन के लिए सुगम रैंप जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। प्लेटफॉर्म पर शेल्टर, कोच इंडिकेशन सिस्टम और सूचना के लिए डिजिटल डिस्प्ले लगाए गए हैं। सभी सुविधाओं को दिव्यांगजन अनुकूल बनाया गया है। वहीं, हर स्टेशन पर स्थानीय लोक कला, संस्कृति और परंपराओं की झलक भी देखने को मिलेगी।
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2026 तक नक्सलमुक्त भारत हमारा संकल्प है: सफल नक्सल ऑपरेशन पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने की सुरक्षा बलों के साहस की सराहना

लाल आतंक के विरुद्ध निर्णायक विजय: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबलों के साहस और समर्पण को किया नमन


नक्सल उन्मूलन अभियान को निर्णायक मोड़ पर ले जाते हुए छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर  नक्सल विरोधी ऑपरेशन सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस ऐतिहासिक सफलता पर सुरक्षा बलों को बधाई दी है और इस निर्णायक उपलब्धि को नक्सलमुक्त भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए हम दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सुरक्षा बलों  विशेषकर सीआरपीएफ, एसटीएफ और डीआरजी के जवानों की सराहना करते हुए कहा कि लाल आतंक के विरुद्ध चल रही इस निर्णायक लड़ाई में हमारे वीर जवानों ने विषम परिस्थितियों में पूरी बहादुरी से नक्सलियों का सामना किया है। उनके अदम्य साहस, धैर्य और पराक्रम को मैं नमन करता हूं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि अब वह दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ पूरी तरह नक्सलमुक्त होगा, और बस्तर के गांव-गांव में शांति, समृद्धि और विकास की नई रोशनी फैलेगी।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने ट्वीट करके बताया है कि छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के दुर्गम क्षेत्र पर हाल ही में हुए अब तक के सबसे बड़े नक्सल विरोधी ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने 31 कुख्यात नक्सलियों को मार गिराकर नक्सल उन्मूलन अभियान में ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है। उन्होंने इलाके किया है कि  यह क्षेत्र रणनीतिक योजना, नक्सल प्रशिक्षण और हथियार निर्माण का गढ़ रहा है। आज उसी पहाड़ पर शान से तिरंगा लहरा रहा है – यह भारत की आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता की विजय का प्रतीक है।

 केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हम नक्सलवाद को जड़ से मिटाने के लिए संकल्पित हैं। मैं देशवासियों को पुनः विश्वास दिलाता हूँ कि 31 मार्च 2026 तक भारत का नक्सलमुक्त होना तय है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन महज 21 दिनों में पूरा हुआ, और इसमें सुरक्षा बलों का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ, जो हमारी रणनीति, समन्वय और शौर्य का प्रमाण है। उन्होंने सीआरपीएफ, एसटीएफ और डीआरजी के जवानों को खराब मौसम और कठिन भूगोल के बावजूद दिखाए गए अदम्य साहस और अनुशासन के लिए बधाई दी।

श्री शाह ने यह भी कहा कि यह सफलता केवल एक सैन्य विजय नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक और वैचारिक विजय भी है, जिसने नक्सल नेटवर्क की रीढ़ को हिला दिया है। देश और विशेषकर छत्तीसगढ़ की जनता को यह विश्वास दिलाता है कि नक्सलवाद अब अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर कभी लाल आतंक की सत्ता थी, वहाँ आज राष्ट्रध्वज की छाया में शांति, विकास और संविधान का शासन स्थापित हो चुका है।यह अभियान आने वाले समय में सुरक्षा बलों के लिए मॉडल ऑपरेशन के रूप में उदाहरण प्रस्तुत करेगा। 

केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्य और केंद्र के बीच समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि यह साझा प्रयासों का ही परिणाम है कि इतने बड़े अभियान में ज़ीरो कैज़ुअल्टी के साथ इतनी बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने के लक्ष्य के प्रति पूरी निष्ठा और सामर्थ्य के साथ कार्य कर रही हैं। श्री अमित शाह ने कहा कि यह लक्ष्य अब केवल रणनीति नहीं, राष्ट्रीय संकल्प है।
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जमीनी प्रयासों और विधिक सुधारों से ही संभव है असली सशक्तिकरण : नवेश कुमार

कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता पर एक सेमिनार में बोलते हुए अधिवक्ता नवेश कुमार ने कहा कि जमीनी प्रयासों और विधिक सुधारों से ही संभव है असली महिला सशक्तिकरण महिला सशक्तिकरण । 


सेमिनार में प्रशासनिक और कानूनी क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित लोगों के साथ मंच साझा करते हुए, उन्होंने बताया कि अमरेंद्र फाउंडेशन ने कानूनी जागरूकता अभियानों और सैनिटरी पैड वितरण कार्यक्रमों के ज़रिए समाज में बदलाव लाने का काम किया है।

उन्होंने कहा, "सच्चा सशक्तिकरण तभी संभव है जब हम घरों, समुदायों और समाज से बदलाव की शुरुआत करें और साथ ही सरकार भी नीतियों और कानूनों के ज़रिए इसे समर्थन दे।"

उन्होंने पोश एक्ट, ट्रिपल तलाक की समाप्ति और बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार जैसे सुधारों का ज़िक्र करते हुए कहा कि ये सिर्फ कानून नहीं, बल्कि महिलाओं को सम्मान और बराबरी दिलाने की दिशा में बड़े कदम हैं।

इस सेमिनार में विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए कि कानून और समाज मिलकर महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते है ।
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पहलगाम आतंकी हमले को लेकर देश में गुस्से की लहर, जुमे की नमाज के बाद मुसलमानों ने किया प्रदर्शन

  जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा  26 पर्यटकों की हत्या से पूरे देश में गुस्से की लहर है। आज जुमे के दिन श्रीनगर से लेकर दिल्ली, मुंबई से लेकर कोलकाता और अहमदाबाद से लेकर हैदराबाद तक की मस्जिदों में नमाज के बाद मुसलमानों ने पहलगाम हमले के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के नेस्तनाबूद करने की मांग की। श्रीनगर की जामा मस्जिद में आज जुमे की नमाज़ के बाद हुई तकरीर में पहलगाम के आतंकवादी हमले का शिकार हुए लोगों को श्रद्धांजलि देते वक्त हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज़ उमर फारुख फूट फूट कर रोने लगे। उन्होंने कहा कि इस्लाम के नाम पर किया गया गुनाह है। इस तरह की दारिंदगी करने वाले राक्षसों को खोज खोज कर मारा जाना चाहिए।

उधर यूपी के कन्नौज में जुमे की नमाज़ के बाद जामा मस्जिद के बाहर सैकड़ों मुसलमानों ने प्रदर्शन किया और  पाकिस्तान मुर्दाबाद और हिन्दुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। इन लोगों ने मस्जिद के बाहर पाकिस्तान का पुतला फूंका। इसके बाद कन्नौज की जामा मस्जिद के इमाम सैयद फुरकान ने कहा कि जिन लोगों ने धर्म पूछकर हिन्दुओं को मारा वो मुसलमान नहीं हो सकते ऐसे दरिंदों को शरिया के मुताबिक सजा दी जानी चाहिए ताकि कोई भी मज़हब का नाम लेकर इस तरह की हैवानियत करने की सोच भी न सके।

 

यूपी के एटा में भी मुस्लिम समाज के लोगों ने आज हाथों पर काली पट्टी बांधकर नमाज़ पढ़ी। नमाज़ के बाद इन लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। मस्जिद के बाहर जमा हुए नमाजियों ने कहा कि वैसे तो हिन्दुस्तान का मुसलमान अमन चाहता है लेकिन पाकिस्तान ने जो किया है उसके बाद अमन की बात बेमानी है।

 

 

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दो अलग-अलग किश्तों में 5 हजार करोड़ का कर्ज लेगी राज्य सरकार...

  मध्यप्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपने पहले कर्ज के तौर पर ₹5000 करोड़ की उधारी लेने का फैसला किया है। यह कर्ज दो अलग-अलग किश्तों में लिया जाएगा, दोनों ही किश्त ₹2500 करोड़ की होगी।

राज्य सरकार यह ऋण 12 वर्ष और 14 वर्ष की अवधि (टेन्योर) के लिए बाजार से उठाएगी। 7 मई को यह राशि राज्य सरकार के खजाने में आ जाएगी।

वित्तीय वर्ष की पहली उधारी

वित्तीय वर्ष 2024-25 की समाप्ति पर (31 मार्च 2025 तक) राज्य सरकार पर कुल कर्ज ₹4.21 लाख करोड़ का हो चुका है। ऐसे में यह नई उधारी राज्य की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए की जा रही है। वित्त विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस ऋण का उपयोग अधोसंरचना परियोजनाओं, सामाजिक योजनाओं और अन्य वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाएगा।

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मुर्मु दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर लिस्बन पहुंची

 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर रविवार रात पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन पहुंचीं, जहां वह पुर्तगाली नेतृत्व के साथ वार्ता करेंगी।  किसी भी भारतीय राष्ट्रपति की पुर्तगाल यात्रा 27 वर्षों के अंतराल के बाद हो रही है, तथा ऐसे समय हो रही है जब भारत और पुर्तगाल अपने राजनयिक संबंधों की पुनः स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं।

भारत की ओर से पुर्तगाल की अंतिम राजकीय यात्रा 1998 में राष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने की थी। श्रीमती मुर्मु की पुर्तगाल यात्रा राष्ट्रपति मार्सेलो रेबेलो डी सूसा के निमंत्रण पर हो रही है। श्रीमती मुर्मु अपने समकक्ष राष्ट्रपति डी सूसा से मुलाकात करेंगी और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगी। वह प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो और नेशनल असेंबली (संसद) के अध्यक्ष जोस पेड्रो अगुइर-ब्रैंको से भी मुलाकात करेंगी।

 
 

भारत और पुर्तगाल के बीच ऐतिहासिक और मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंध हैं, जो वर्षों से विकसित होकर एक आधुनिक, बहुआयामी और गतिशील साझेदारी में बदल चुके हैं, जिसकी विशेषता सहयोग के कई क्षेत्रों में मजबूत विकास एवं विस्तार है। एक बयान में कहा गया कि यह यात्रा पुर्तगाल के साथ भारत के बढ़ते संबंधों को और ज्याद प्रोत्साहन तथा नई गति प्रदान करेगी। श्रीमती मुर्मु इसके बाद नौ से 20 अप्रैल तक स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर रहेंगी।

 
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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के साथ राज्य में तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन पर समीक्षा बैठक की

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के साथ राज्य में तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन पर समीक्षा बैठक की। बैठक में पुलिस, जेल, कोर्ट, अभियोजन और फॉरेन्सिक से संबंधित विभिन्न नए प्रावधानों के कार्यान्वयन और वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री, केन्द्रीय गृह सचिव, मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़, महानिदेशक, BPR&D, पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़ और निदेशक, NCRB सहित गृह मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में लाए गए तीन नए आपराधिक कानूनों के छत्तीसगढ़ में पूर्ण क्रियान्वयन के लिए टॉप  प्रायरिटी एजेंडा बनाकर इस दिशा में काम करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि तीन नए आपराधिक कानूनों का लक्ष्य भारतीय न्यायिक प्रक्रिया को बेहतर बनाना है और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य को इसकी और ज़्यादा ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ तीन नए आपराधिक कानूनों के संपूर्ण क्रियान्वयन को एक चुनौती के रूप में लेकर इन्हे जल्द लागू कर एक आदर्श राज्य बने।

श्री अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार को 60 और 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने के लिए पुलिस उप अधीक्षक (DSP)स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में साक्ष्य की रिकॉर्डिंग से लेकर पूरे ट्रायल तक की प्रक्रिया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संभव है जिससे मैनपावर की काफी बचत होगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हर पुलिस थाने और डीएसपी स्तर के अधिकारियों को गंभीरअपराध के मामलों में NATGRID के उपयोग की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक सप्ताह में एक बार, राज्य के गृह मंत्री हर 15 दिन और मुख्यमंत्री महीने में एक बार राज्य में नए आपराधिक कानूनों के अमल की प्रगति की समीक्षा करें।
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देश की विशिष्ट हस्तियों को "भारत विभूति सम्मान" से नवाजा गया

 शिक्षा, चिकित्सा, कला, समाजसेवा एवं अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए कई विशिष्ट हस्तियों को कल "भारत विभूति सम्मान" दिया गया। 


राजधानी दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक भव्य समारोह में "अमरेंद्र फॉउंडेशन" की ओर से यह सम्मान प्रदान किया गया।राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्या श्रीमती ममता कुमारी, पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीरेन्द्र वर्मा, सुप्रसिद्ध वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ.अनूप कुमार, भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमती विनीता हरिहरन, कुलाधिपति प्रो.बी.एन मिश्रा, एनसीपी के राष्ट्रीय महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव एवं संस्था के निदेशक अमरेंद्र पाठक ने यह सम्मान प्रदान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संयोजन फाउंडेशन के संस्थापक नवेश कुमार ने की ।कार्यक्रम में चुनिंदे कलाकारों द्वारा संगीत और नित्य भी प्रस्तुत किए गए। इस मौके पर "महिला सशक्तिकरण, एवं लैंगिक समानता" विषय आयोजित गोष्ठी में सार्क जर्नलिस्ट फोरम के कार्यकारी चेयरमैन डॉ.समरेंद पाठक,श्रीमती दीप्ति उन्नत, समाजसेवी हीरा लाल प्रधान, प्रो.अमरेंद्र झा एवं कवि विमल मिश्र सहित अनेक व्यक्तियों ने अपने विचार व्यक्त किए।

जिन हस्तियों को" भारत विभूति सम्मान" दिया गया उनमें एम्स के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ रहे डॉ. जे. एस तितलियाल,वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ.अनूप कुमार, शिक्षाविद श्री अमिताभ सुकुल,श्रीमती सुमन लता शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार सुश्री शोभना जैन, शिक्षाविद डॉ राजेश कुमार सिंह, डॉ.शैलेश चंद्र सहाय, डॉ मनीष देव एवं डॉ कल्पना अग्रवाल शामिल है । इसी प्रकार प्रो.( डॉ) लवी श्रीवास्तव, श्रीमती पूजा अग्रवाल, एवं श्रीमती प्रणामी देवी को "नारी शक्ति विभूति सम्मान" दिया गया ।
 
श्री धरणीकांत झा एवं श्री बृजमोहन श्रीवास्तव को "समाज विभूति सम्मान ",श्रीमती मधुलता मिश्रा, बबिता ए.सिंह एवं पंडित पुष्कर मिश्रा को "कला विभूति सम्मान "श्री शंखनील बसक, श्री गुलशन गर्ग, श्री मिथिलेश गुप्ता एवं श्री शिशिर वर्मा को "युवा विभूति सम्मान" प्रदान किया गया । ताइक्वांडो में मेडल जीतने के लिए आरव जोशी, हिम्सकसी सैनी, पूर्विका लोटन, यश लोटन, माही शर्मा, कायना यादव, जीयश चौधरी एवं आरव जाखड़ को भी सम्मानित किया गया ।
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बेंगलुरु की टेक कंपनियों को भाया छत्तीसगढ़, 3700 करोड़ से अधिक के हुए करार

 देश की सिलिकॉन वैली के रूप में प्रसिद्ध बेंगलुरु की कई बड़ी टेक कंपनियों ने छत्तीसगढ़ में निवेश को लेकर रूचि दिखाई है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बेंगलुरु में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट मीट में देश के शीर्ष उद्योगपतियों और बिजनेस लीडर्स से संवाद कर राज्य में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। इस दौरान इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी/आईटीईएस, खाद्य प्रसंस्करण और ग्रीन फ्यूल जैसे क्षेत्रों के कई बड़ी कम्पनियों ने 3700 करोड़ के निवेश प्रस्ताव सौंपें हैं।
इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार ने आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नैसकॉम, इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) और द इंडस एंटरप्रेन्योर्स (TiE) बैंगलोर के साथ महत्वपूर्ण एमओयू भी साइन किया है।


सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ निवेश और उद्योगों के लिए देश के सबसे उभरते हुए राज्यों में से एक है। देश के सबसे समृद्ध खनिज संसाधन, सेंट्रल इंडिया की शानदार लोकेशन और कनेक्टिविटी के लाभ के साथ ही छत्तीसगढ़ में भरपूर बिजली-पानी, मानव संसाधन जैसी बुनियादी सुविधाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा डिजिटल टेक्नोलॉजी से छत्तीसगढ़ सुशासन का मॉडल स्टेट बन रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने अब निवेश के लिए कागजी झंझट खत्म कर दिया गया है। बस एक क्लिक में एनओसी मिलेगी और फैसला भी डिजिटल तरीके से होगा। नई औद्योगिक नीति से निवेश प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाया गया है।

उन्होंने बताया नई उद्योग नीति में निवेश एवं रोजगार के अवसरों में वृद्धि के लिए 1 हजार करोड़ रुपए अथवा एक हजार लोगों को रोजगार देने वाले उद्योगों को बी-स्पोक नीति का अवसर प्रदान किया गया है। इस नीति में 30 से 50 प्रतिशत तक एवं 200 से 450 करोड़ रुपए तक स्थायी पूंजी निवेश की प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। 5 से 12 वर्ष तक नेट एसजीएसटी प्रतिपूर्ति, रोजगार एवं ईपीएफ प्रतिपूर्ति तथा प्रशिक्षण व्यय की प्रतिपूर्ति के लिए आकर्षक प्रावधान किये गये हैं।

उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति में हमने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, रोबोटिक्स, कंप्यूटिंग, ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए आकर्षक प्रावधान रखे गये हैं। इसके साथ ही इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रानिक्स, फार्मा, टैक्सटाइल, फूड एंड एग्रो प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में भी विशेष रियायत दी गई है। हम नवा रायपुर में फार्मास्यूटिकल पार्क भी स्थापित कर रहे हैं जो सेंट्रल इंडिया का सबसे बड़ा फार्मास्यूटिकल पार्क होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि रायपुर को हम मध्य भारत के सबसे बड़े आईटी हब के रूप में विकसित कर रहे हैं। यहाँ 1.6 बिलियन डालर का निवेश किया गया है जिससे यहां की अधोसंरचना देश के सबसे शानदार शहरों जैसी है। नवा रायपुर ग्रीनफील्ड शहर भी हैं जिससे आईटी इंडस्ट्री के विकास के लिए यहां भरपूर संभावनाएं हैं। 

इस मीट में उद्योग विभाग के मंत्री श्री लखन लाल देवांगन,  मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, सचिव श्री राहुल भगत, उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ की इन्वेस्टमेंट कमिश्नर सुश्री ऋतु सैन, सचिव एस भारतीदासन, उद्योग और वाणिज्य विभाग के सचिव सौरभ कुमार, संचालक श्री प्रभात मलिक और सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री विश्वेश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

बस्तर में निवेशकों के लिए अपार संभावनाएं

मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर और सरगुजा को हमने सर्वाधिक औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन क्षेत्र के रूप में रखा है। यहां कोर सेक्टर प्रोत्साहन,  आयरन और कोल रायल्टी में 50 से 100 प्रतिशत तक छूट है। सेस की प्रतिपूर्ति 150 प्रतिशत तक किये जाने का प्रावधान है। बस्तर में नगरनार स्टील प्लांट के पास ग्राम नियानार में हम 118 एकड़ में नये औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना करने जा रहे हैं इससे यहां बड़े पैमाने पर लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यमों को स्थापना के अवसर मिलेंगे।


देश की अग्रणी कंपनियां करेंगी छत्तीसगढ़ में निवेश

सम्मेलन में बीईएमएल, क्लेन पैक्स, कीन्स टेक्नोलॉजी, नैसकॉम, गोकुलदास एक्सपोर्ट्स, ब्रिटानिया, टाई बैंगलोर और कर्नाटक चैंबर ऑफ कॉमर्स जैसी प्रमुख कंपनियों व औद्योगिक समूहों ने भाग लिया। इन कंपनियों ने छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति, अनुकूल नीतिगत वातावरण और मजबूत आधारभूत ढांचे की सराहना की।

छत्तीसगढ़ को मिले निवेश प्रस्तावों की झलक

- GPSR आर्या प्राइवेट लिमिटेड (CBG ग्रीन फ्यूल सेक्टर) – ₹1350 करोड़ का निवेश कर यह कंपनी बायोगैस और हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देगी, जिससे राज्य में स्वच्छ ऊर्जा क्रांति आएगी।

- क्लेन पैक्स (टेक्सटाइल सेक्टर) – ₹500 करोड़ के निवेश से यह कंपनी कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ाएगी।

- ब्रिटानिया (फूड प्रोसेसिंग सेक्टर) – ₹200 करोड़ का निवेश कर यह कंपनी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को मजबूत करेगी, जिससे स्थानीय किसानों और छोटे उद्यमियों को लाभ होगा।

- कीन्स टेक्नोलॉजी (आईटी/आईटीईएस सेक्टर) – ₹1000 करोड़ के निवेश से छत्तीसगढ़ के आईटी सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे युवाओं को बड़े पैमाने पर रोज़गार मिलेगा।

- गोकुलदास एक्सपोर्ट्स और SRV निट टेक प्राइवेट लिमिटेड – दोनों कंपनियां ₹200 करोड़ का निवेश कर टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूती देंगी, जिससे राज्य के कपड़ा उद्योग को नई पहचान मिलेगी।

- BEML (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड) ने छत्तीसगढ़ में 200 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। यह निवेश राज्य में इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्र को मजबूती देगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

- पुनीत क्रिएशन, श्याम टेक्सटाइल एवं वूल रिसर्च एसोसिशन ने भी छत्तीसगढ़ में रूचि दिखाते हुए निवेश प्रस्ताव सौंपे हैं।
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कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है छत्तीसगढ़ सरकार: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ जल्द ही आईटी और टेक्नोलॉजी हब के रूप में उभरेगा। छत्तीसगढ़ सरकार और नैसकॉम के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) संपन्न हुआ है, जिससे छत्तीसगढ़ में कौशल विकास में निवेश बढ़ेगा।


मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इन्वेस्टर्स कनेक्ट मीट में नैसकॉम के उपाध्यक्ष श्निवासन व अन्य प्रतिनिधियों से मुलाकात की और राज्य की कौशल विकास के क्षेत्र में अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि रायपुर देश का ऐसा प्रमुख शहर है, जहां आईआईटी, एनआईटी, एम्स और ट्रिपल आईटी जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान हैं, जो उद्योगों की जरूरत के अनुसार कुशल युवा तैयार कर रहे हैं।  

नया रायपुर को आईटी हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां कई आईटी कंपनियों ने अपना कार्य प्रारंभ कर दिया है। सरकार बेंगलुरु और हैदराबाद की तर्ज पर नया रायपुर को एक प्रमुख टेक हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।  

सरकार की नई औद्योगिक नीति के तहत आईटी और स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। स्किलिंग प्रोग्राम के माध्यम से कॉलेज के विद्यार्थियों को उद्योगों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे रोजगार के लिए तैयार हो सकें।  

मुख्यमंत्री  साय ने जानकारी दी कि अभी तक 4 लाख 40 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जो राज्य की औद्योगिक नीति की सफलता को दर्शाता है। इस बैठक के दौरान दिल्ली, मुंबई और रायपुर में आयोजित इन्वेस्टर्स मीट में मिले सकारात्मक प्रतिक्रिया पर भी चर्चा हुई।
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एग्रो बायोडायवर्सिटी राउंडटेबल में कोदो,कुटकी,बाजरा संरक्षण पर की गई चर्चा

 नेटवर्क फॉर कंजर्विंग सेंट्रल इंडिया (NCCI) ने अपने चौथे एग्रोबायोडायवर्सिटी राउंडटेबल का आयोजन एम पी टी जंगल रिज़ॉर्ट, सरही गेट, कान्हा टाइगर रिज़र्व में किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न नागरिक समाज संगठनों (CSOs), किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), स्व-सहायता समूहों (SHGs), अनुसंधान संस्थानों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।


इस राउंडटेबल का मुख्य उद्देश्य कान्हा परिदृश्य में कोदो-कुटकी जैसे सूखा-प्रतिरोधी बाजरा के संरक्षण, उनके ब्रांड विकास, खाद्य सुरक्षा उपायों में सुधार और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक कृषि विज्ञान में एकीकृत करने पर चर्चा करना था। यह आयोजन अगस्त 2023, जनवरी 2024 और अगस्त 2024 में हुए पूर्व सत्रों के निष्कर्षों पर आधारित था।

प्रमुख विषय एवं चर्चाएँ
मिलेट्स के पोषण और पारिस्थितिक महत्व को बढ़ावा देने के लिए विपणन रणनीतियों पर चर्चा हुई।

फंगल संदूषण और खाद्य सुरक्षा चुनौतियाँ – इस विषय पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के डॉ. मनोज चौधरी और एम एस एस आर एफ (MSSRF) के डॉ. जेगन शेखर ने अपने विचार साझा किए।

 
 



ब्रांड विकास रणनीति – MSSRF के डॉ. ओलिवर किंग ने परिदृश्य-आधारित ब्रांड निर्माण पर एक सत्र का नेतृत्व किया, जिसमें स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया गया।

 



महिला नेतृत्व की भूमिका – इस संदर्भ में मंडला जिले के बिछिया तहसील स्थित कोको राइट बेकरी का दौरा किया गया, जो मिलेट-आधारित उत्पाद बनाती है। इस पहल का नेतृत्व जमीला बेगम कर रही हैं।

फील्ड विज़िट और अनुभव साझा करना
प्रतिभागियों ने छत्तीसगढ़ के बोडला तहसील स्थित धवईपानी प्रसंस्करण मिल और बीज बैंक का दौरा किया। इस दौरे का नेतृत्व ग्रामोदय ग्राम विकास समिति, छत्तीसगढ़ के कार्यकारी निदेशक चंद्रकांत यादव ने किया। यहाँ महिलाओं द्वारा संचालित बीज संरक्षण और प्रसंस्करण गतिविधियों को देखा गया।

विपणन और ब्रांडिंग पर जोर
कीस्टोन फाउंडेशन की निदेशक डॉ. अनीता वर्गीस ने नीलगिरी बायोस्फीयर रिज़र्व के अंतर्गत लास्टफॉरेस्ट एंटरप्राइजेज और आधिमालाई ब्रांड्स की सफलता की कहानी साझा की।

प्रतिभागियों ने दोहरी ब्रांडिंग रणनीतियों पर चर्चा की, जो स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कोदो-कुटकी उत्पादों को बढ़ावा दे सकती हैं।

आगे की राह
परिदृश्य ब्रांड के विकास के लिए क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को समझने हेतु मानचित्रण अभ्यास।
स्थानीय समुदायों के अनुभवों से सीखने के लिए स्थापित उद्यमों का दौरा।

 


खाद्य सुरक्षा और पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक मान्यता प्रदान करने हेतु अनुसंधान एवं प्रयोगशाला परीक्षण।

 



अगला राउंडटेबल सितंबर 2025 में आयोजित किया जाएगा, जिसमें ब्रांड विकास पहलों की प्रगति और खाद्य सुरक्षा प्रबंधन में पारंपरिक व वैज्ञानिक दृष्टिकोणों के समन्वय पर चर्चा की जाएगी।

NCCI परिचय: नेटवर्क फॉर कंजर्विंग सेंट्रल इंडिया (NCCI) केंद्रीय भारतीय परिदृश्य में लोगों और प्रकृति के सह-अस्तित्व को बनाए रखने के लिए ज्ञान और कार्रवाई को जोड़ने का कार्य करता है।

 

 

 
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नाराज ड्राइवर ने मिनी बस में लगाई आग, चार कर्मचारियों की मौत

 महाराष्ट्र के पुणे में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक निजी कंपनी के ड्राइवर ने वेतन कटौती से नाराज होकर मिनी बस में आग लगा दी। इस हादसे में चार कर्मचारियों की जलकर मौत हो गई, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से झुलस गए।


यह हादसा 19 मार्च को पुणे के हिंजवाड़ी पुलिस थाना क्षेत्र में हुआ। सुबह 7:30 बजे एक ग्राफिक्स कंपनी की मिनी बस में अचानक आग लग गई। बस में कुल 14 कर्मचारी सवार थे, जिनमें से चार की मौके पर ही मौत हो गई और छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। अन्य कर्मचारी बस से कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।

 
 
 



मृतकों की पहचान शंकर शिंदे (63), राजन चव्हाण (42), गुरुदास लोकरे (45) और सुभाष भोसले (44) के रूप में हुई है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। सभी का आईसीयू में इलाज जारी है।

ड्राइवर की साजिश का खुलासा
प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा था, लेकिन बाद में जांच में नया खुलासा हुआ। पुलिस को मिनी बस के ड्राइवर जनार्दन हंबर्डीकर पर संदेह हुआ क्योंकि वह बार-बार बेहोश होने का नाटक कर रहा था और उसके शरीर पर मामूली चोटें थीं।

जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो ड्राइवर ने अपराध कबूल कर लिया। उसने बताया कि कंपनी के कर्मचारियों के दुर्व्यवहार, वेतन कटौती और बोनस न मिलने से वह नाराज था। इससे बदला लेने के लिए उसने मिनी बस में आग लगाने की साजिश रची।

आग कैसे लगाई गई?
आरोपी ड्राइवर ने पहले से ही बेंजीन (ज्वलनशील रसायन) खरीदा था और बस में पोंछा लगाने वाले कपड़े भी रखे थे। जैसे ही मिनी बस हिंजवाड़ी फेज वन इलाके में पहुंची, उसने कपड़े में आग लगाई, जिससे पूरी बस आग की चपेट में आ गई।

पुलिस कार्रवाई
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक कन्हैया थोराट ने बताया कि यह हादसा नहीं बल्कि जानबूझकर की गई साजिश थी। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 103 और 109 के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, फिलहाल वह फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

 

 

 
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केंद्र सरकार ने चंद्रयान-5 मिशन को मंजूरी दी

 केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने चांद पर रिसर्च करने के लिए भारत के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-5 को मंजूरी दे दी है। सरकार ने हाल ही में ये बड़ा फैसला किया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी.नारायणन ने इस बात की जानकारी दी है। इसके साथ ही इस बात की जानकारी भी सामने आई है कि भारत का चंद्रयान-4 मिशन कब तक लॉन्च किया जाएगा।

इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने रविवार को बताया- ‘‘बस तीन दिन पहले ही हमें चंद्रयान-5 मिशन के लिए मंजूरी मिली है। हम इसे जापान के सहयोग से करेंगे।’’ उन्होंने बताया कि भारत के चंद्रयान-5 मिशन के तहत, चंद्रमा की सतह का अध्ययन करने के लिए 250 किलोग्राम का रोवर भेजा जाएगा।

 

कब लॉन्च होगा चंद्रयान-4?

इसरो के अध्यक्ष वी.नारायणन ने रविवार को इस बात की जानकारी दे दी है कि चंद्रयान-4 मिशन कब लॉन्च होगा। इसरो अध्यक्ष ने बताया कि संभावना है कि चंद्रयान-4 को साल 2027 में प्रक्षेपित किया जाएगा। इसरो अध्यक्ष ने बताया है कि चंद्रयान-4 मिशन का मकसद चंद्रमा से इकट्ठा किए गए नमूनों को वापस लाना है।

 

आपको बता दें कि भारत के चंद्रयान मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की सतह का अध्ययन करना है। इससे पहले इसरो ने चंद्रयान-3 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। चंद्रयान-3 मिशन में 25 किलोग्राम का रोवर ‘प्रज्ञान’ ले जाया गया था। 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की थी।

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