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प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित 15.18 लाख पात्र परिवारों को जल्द मिलेगा आवास - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली के कृषि भवन में कृषि व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। इस दौरान छत्तीसगढ़ के कृषि और ग्रामीण विकास के विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाओं के कार्यान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। 


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित 15.18 लाख पात्र परिवारों के आवास का मुद्दा भी रखा, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने जल्द स्वीकृति देने का आश्वासन दिया है। केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा भी साथ थे।

बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय मंत्री को सूचित किया कि छत्तीसगढ़ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लंबित 15.18 लाख परिवारों को अभी तक आवास की स्वीकृति नहीं मिली है। इसमें 6.99 लाख परिवार योजना के स्थायी प्रतीक्षा सूची में हैं और 8.19 लाख परिवार आवास प्लस में शामिल हैं। पूर्व में योजना के लिए राज्य का हिस्सा नहीं मिलने के कारण यह समस्या बनी रही। मुख्यमंत्री ने जल्द आवास स्वीकृत करने का अनुरोध किया, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने इस पर तत्काल कार्रवाई किए जाने की बात कही है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण सामाजिक आर्थिक जातिगत जनगणना-2011 एवं आवास प्लस 2018 की सूची में अनेक पात्र परिवारों का नाम शामिल नहीं हो सका है। उन्होंने 10,500 नए पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना में शामिल करने का अनुरोध किया और साथ ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पंचायतों को आवास निर्माण की स्वीकृति देने की मांग की।

मुख्यमंत्री ने मनरेगा योजना के तहत आधार आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) में 31  मार्च,  2025 तक छूट देने का आग्रह किया, ताकि दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के श्रमिकों को योजना का लाभ मिल सके। उन्होने कहा दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इंटरनेट की कमी और अन्य समस्याएं हैं, जिससे 
आधार  आधारित  भुगतान  में  कठिनाई  आ रही  है।  इसके साथ ही इन क्षेत्रों में जब तक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध ना हो तब तक नगद भुगतान की अनुमति देने की मांग की। 

साथ ही, मुख्यमंत्री श्री साय ने आदिवासी क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी सुधार की आवश्यकता जताई, जहां कई बसाहटें बारहमासी सड़कों से जुड़ी नहीं हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में छूटे हुए आदिवासी क्षेत्रों को शामिल करने और पुरानी सड़कों के उन्नयन की मांग की।

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान के तहत 106 वृहद पुलों की स्वीकृति की प्रक्रिया की जानकारी दी और साथ ही छत्तीसगढ़ के लिए 426 छूटे हुए पुलों के निर्माण की मांग की। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत इन पुलों का निर्माण महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आदिवासी क्षेत्रों की सड़क कनेक्टिविटी सुधरेगी और नक्सल उन्मूलन अभियान को भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ में कोदो, कुटकी, और रागी जैसी मिलेट फसलों के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन फसलों की उत्पादन क्षमता बढ़ाना राज्य के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये पौष्टिक होती हैं और आदिवासी क्षेत्रों में प्रमुख खाद्य पदार्थ हैं। साथ ही, उन्नत तकनीक और बीजों की उपलब्धता से किसानों की आय बढ़ेगी। 

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ में कृषि व ग्रामीण विकास के विभिन्न प्रस्तावों पर जल्द से जल्द सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया है।

बैठक में छत्तीसगढ़ से मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी दयानंद, पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक श्री रजत बंसल एवं केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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छत्तीसगढ़ में अब तक 509.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

 राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बनाए गए राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष द्वारा संकलित जानकारी के मुताबिक एक जून 2024 से अब तक राज्य में 509.2 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है। राज्य के विभिन्न जिलों में 01 जून 2024 से आज 27 जुलाई सवेरे तक रिकार्ड की गई वर्षा के अनुसार बीजापुर जिले में सर्वाधिक 1237.1 मिमी और सरगुजा जिले में सबसे कम 196.6 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी है।

राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक जून से अब तक सूरजपुर जिले में 318.3 मिमी, बलरामपुर में 450.9 मिमी, जशपुर में 334.0 मिमी, कोरिया में 334.8 मिमी, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 359.5 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी। इसी प्रकार, रायपुर जिले में 461.5 मिमी, बलौदाबाजार में 601.8 मिमी, गरियाबंद में 563.7 मिमी, महासमुंद में 411.9 मिमी, धमतरी में 591.9 मिमी, बिलासपुर में 481.5 मिमी, मुंगेली में 526.7 मिमी, रायगढ़ में 392.6 मिमी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 233.0 मिमी, जांजगीर-चांपा में 435.2 मिमी, सक्ती में 329.5 कोरबा में 572.7 मिमी, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 468.3 मिमी, दुर्ग में 335.8 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी। कबीरधाम जिले में 414.1 मिमी, राजनांदगांव में 582.7 मिमी, मोहला-मानपुर-अंबागढ़चौकी में 595.5 मिमी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 398.9 मिमी, बालोद में 683.3 मिमी, बेमेतरा में 336.4 मिमी, बस्तर में 655.0 मिमी, कोण्डागांव में 550.4 मिमी, कांकेर में 695.1 मिमी, नारायणपुर में 677.1 मिमी, दंतेवाड़ा में 724.2 मिमी और सुकमा जिले में 852.7 मिमी औसत वर्षा एक जून से अब तक रिकार्ड की गई।

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केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर

 केंद्रीय राज्य मंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय सावित्री ठाकुर 27 एवं 28 जुलाई को दो दिवसीय छत्तीसगढ़ के प्रवास पर रहेंगी। प्राप्त दौरा कार्यक्रम के अनुसार केंद्रीय राज्य मंत्री ठाकुर 27 जुलाई को शाम 6.30 बजे रायपुर एयरपोर्ट पहुंचेगी। उसके बाद 6.45 बजे सर्किट हाउस रायपुर पहुंचेगी। रात्रि 7.30 बजे सड़क मार्ग से रायपुर से अंबिकापुर के लिए प्रस्थान करेंगी। रात्रि 11.55 बजे सर्किट हाउस अंबिकापुर पहुंचेंगी। 28 जुलाई को सुबह 9.30 बजे मंत्री ठाकुर द्वारा आंगनबाड़ी और सखी वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण किया जायेगा। इसके बाद सुबह 11 बजे से पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मन की बात“ कार्यक्रम में शामिल होंगी। दोपहर 12.15 बजे प्रेस कांफ्रेंस लेंगी। दोपहर 12.30 बजे से छत्तीसगढ़ शासन से महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री एवं अधिकारियों के साथ बैठक लेंगी। बैठक के बाद दोपहर 2 बजे सर्किट हाउस अंबिकापुर से रायपुर के लिए रवाना होंगी। रात्रि 7.30 बजे रायपुर पहुंचकर 9.30 बजे वायु मार्ग से दिल्ली के रवाना होंगी।  

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आंगनबाड़ी केन्द्रों में 27 से 29 जुलाई तक अवकाश घोषित

 कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी ने जिले में अत्यधिक वर्षा से उत्पन्न स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिले के समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों में 28 जुलाई 2024 को शासकीय अवकाश के साथ आगामी तीन दिवस 27 से 29 जुलाई 2024 तक अवकाश घोषित किया है। जिले के समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता/सहायिकाओं के लिए उक्त अवकाश लागू नही होगा। यह आदेश तत्काल प्रभावशील हो गया है।

 
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अमरकंटक से जल लेकर आ रहे कावड़ पद यात्रियों का रास्ते के गांवों में किया जा रहा है स्वागत

 अमरकंटक से जलेश्वर बाबा डोंगरिया, बाबा भोरमदेव और पंचमुखी बूढ़ा महादेव के लिए जल लेकर आ रहे कावड़ पद यात्रियों का रास्ते के गांवों श्रद्धालुओं द्वारा स्वागत किया जा रहा है।

 उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के आह्वान पर जनप्रतिनिधि, ज़िले के अधिकारी-कर्मचारी, गांवो में ग्रामीणजन स्टाल लगा कर कावड़ पद यात्रियों का सम्मान और स्वागत कर स्वल्पाहार भी करा रहे हैं। आज भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना के सामने मुख्य मार्ग पर काँवरियों का पूजा अर्चना, पुष्प वर्षा के साथ अभूतपूर्व स्वागत किया गया। प्रबंध संचालक श्री गौरीशरण शर्मा ने माँ नर्मदा की अर्चना की।

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के निर्देश एवं निगरानी में गठित जिला बोल बंम समन्वय समिति के सदस्य श्री सुधीर केशरवानी, श्री दौवा गुप्ता, श्री निशांत झा ने बताया कि कांवड़ियों एवं श्रद्धालुओं के लिए अमरकंटक से लेकर रास्ते में पड़ने वाले सभी पंचायतों में निःशुल्क ठहरने और गर्म पानी, चाय और बिस्किट की समुचित व्यवस्था की जा रही  है। आज बोल बम समिति ग्राम मानिकपुर के 70 कांवड़ियों को ग्राम राजानवागाँव के सामुदायिक भवन में निःशुल्क ठहरने और गर्म पानी, चाय और बिस्किट का व्यवस्था किया गया।

कांवड़ियों के लिए निःशुल्क ठहरने और गर्म पानी, चाय और बिस्किट की व्यवस्था

उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा के निगरानी में अमरकंटक से वनग्राम होते हुए आने वाले कांवड़ियों के लिए आवश्यक व्यवस्था एवं सहयोग के लिए दल का गठन भी किया गया है। अमरकंटक से लेकर कवर्धा तक लगभग 150 किलोमीटर की इस यात्रा के बीच लगभग 20 से अधिक अलग-अलग स्थानों में कावड़ियों के लिए विश्राम करने के लिए इंतजाम किया गया है। इन स्थानों में कांवड़ियों के लिए निःशुल्क ठहरने और गर्म पानी, चाय और बिस्किट और स्वास्थ सुविधा मुहैया की व्यवस्था किया जा रहा हैं।

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कलेक्टर ने सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रही वीडियो की जांच करने तत्काल संज्ञान में लिय

कबीरधाम जिले के स्थानीय सोशल मीडिया में शुक्रवार को जिले के बोड़ला विकासखण्ड के ग्राम पंडरिया में संचालित स्कूल के सन्दर्भ में "स्कूल के छत से टपकते पानी से बचने, छत्ता लेकर पढ़ रहे है बच्चे" इस तरह की वीडियो और खबर तेजी से वायरल हो रही थी।

 कलेक्टर जनमेजय महोबे ने इस खबर और वीडियो की सत्यता जांचने के लिए तत्काल संज्ञान में लिया और जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, बोड़ला एसडीएम को निर्देशित किया। बोड़ला एसडीएम और जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा उसकी जांच कराई गई। जांच में सत्यता सामने आई है। जांच रिपोर्ट में बतलाया गया कि पिछले तीन दिनों से वनांचल में तेज बारिश हो रही है, और एक कक्षा में छत का पानी रिसता है जिसके कारण पंडरिया स्कूल में छुट्टी दी गई है, सिर्फ मध्यान्ह भोजन संचालित हो रही है। गांव के बच्चे निर्धारित समय पर मध्यान्ह भोजन करने आते है। स्कूल के शिक्षक ने प्रधानपाठक को जानकारी दी कि तेज बारिश की वजह से स्कूल के एक कक्षा में छत से पानी का रिसाव ज्यादा हो रहा है। मौसम सामान्य होते तक यहां कक्षा संचालन उचित नही है, इसके जगह में स्कूल परिसर में बने अतिरिक्त कक्ष में कक्षा संचालित किया जा सकता है। प्रधान पाठक ने ग्राम के पंच-सरपंच और  ग्राम के अन्य सदस्यों को बुलाकर अतिरिक्त कक्षा का निरीक्षण कराया। उस समय भी बारिश हो रही थी, चुकी उस समय मध्यान्ह भोजन कर कुछ बच्चे स्कूल पर ही रुक थे।  निरीक्षण के समय ही किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बच्चों को छत्ता पकड़ा कर इसकी वीडियो बनाई गई, और उन्हें वाइरल किया गया।

 खण्ड शिक्षा अधिकारी ने अपने रिपोर्ट में बतलाया है कि पिछले तीन- चार दिनों में वनांचल में तेज बारिश होने छत का पानी का रिसाव ज्यादा होने के कारण मौसम सामान्य होने तक छुट्टी दी गई है ऐसी स्थिति में छत्ता लेकर पढ़ाई करते हुए स्कूली बच्चों की वीडियो प्रायोजित प्रदर्शित हो रही है। आज तक बच्चो कों कक्षा में छत्ता पकड़ाकर पढ़ाई नही कराई गई है।
 बोड़ला एसडीएम श्रीमती गीता रायस्त ने खण्ड शिक्षा अधिकारी, संकुल समन्वयक और प्रधान पाठक और ग्राम प्रमुखों के उपस्थित में कराई गई जांच रिपोर्ट को कलेक्टर को प्रेषित की है। जांच में यह भी बताया गया है कि स्कूल के शौचालय में पेड़ गिरने की घटना जून माह एक माह पुरानी घटना है।

कलेक्टर ने पंडरिया स्कूल परिसर में निर्मित अतिरक्त कक्ष में कक्षा लगाने के निर्देश दिए है। साथ ही स्कूल छत मरम्मत कराने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया है।

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छत्तीसगढ़ में स्किल्ड-बेस्ड एजुकेशन, प्राकृतिक औषधालय और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मिलेगा बढ़ावा: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की नौवीं बैठक में राज्य की विकास योजना प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राज्य की प्राथमिकताओं और विकास के लिए किये जा रहे प्रयासों की जानकारी दी, जिसमें शिक्षा, मानव संसाधन विकास , स्वास्थ्य, और तकनीकी उन्नति पर जोर दिया गया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के विकास के लिए प्रस्तावित योजनाओं को साझा किया, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में राज्य की भूमिका को स्पष्ट करती हैं।

       मुख्यमंत्री ने कहा कि , छत्तीसगढ़ 2047 तक विकसित भारत में प्रमुख भूमिका निभाएगा। वर्तमान में राज्य का GSDP 5.05 लाख करोड़ रुपये है, जिसे अगले पांच वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में सुधार और लक्ष्यों पर काम शुरू किया गया है।

बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य के विकास में युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का मुख्य फोकस स्किल्ड मानव संसाधन तैयार करने पर है। छत्तीसगढ़ में शिक्षा को व्यावसायिक कौशल और ट्रेनिंग से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्रों को ऐसी क्षमताएँ देना है जो उन्हें रोजगार के लिए तैयार करें। राज्य में प्रत्येक छात्र के लिए 'वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी कार्ड' ( APAAR आईडी ) बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसमें छात्र के शैक्षणिक अनुभव से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी डिजिटल रूप में मौजूद होंगी।
उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता, सतत विकास, और राज्य की संस्कृति व परंपरा के संरक्षण की योजना साझा की। आर्थिक सशक्तिकरण के लिए छत्तीसगढ़ सुपर फूड्स की पैदावार और प्राकृतिक औषधालयों का निर्माण किया जाएगा। स्थानीय उत्पादों की प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग को बढ़ावा मिलेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आईटी सेक्टर के विस्तार के साथ-साथ सड़कों, इमारतों जैसी भौतिक संरचनाओं और इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क जैसी डिजिटल सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बेहतर विद्युत आपूर्ति के लिए केंद्र से सहयोग की अपील की। उन्होंने बताया कि छतों पर सौर ऊर्जा लगाने की प्रक्रिया को सरल कर दिया गया है और 100 गांवों को पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारित बनाने की योजना बनाई है। सरकारी भवनों में रूफ टॉप सोलर संयंत्र लगाने के लिए सर्वे पूरा कर लिया गया है, और नया रायपुर के अधिकांश सरकारी भवनों में ये संयंत्र स्थापित कर दिए गए हैं, जिनसे विद्युत आपूर्ति ग्रिड में की जाती है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ में मार्च 2026 तक 96 प्रतिशत घरों में पेयजल पहुंचा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य 2047 तक केवल विकसित ही नहीं, बल्कि जल-सुरक्षित भारत 2047 भी होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार से तकनीकी और आर्थिक सहयोग की उम्मीद जताई। इसके अलावा, रायपुर में नेशनल ग्राउंड वाटर ट्रेनिंग और रिसर्च इंस्टीट्यूट को और मजबूत करने के साथ-साथ वर्षा-जल संरक्षण अनुसंधान केंद्र की स्थापना की भी मांग की। उन्होंने कहा कि, इसकी स्थापना से छत्तीसगढ़ में बारिश के पानी को सही से संचित और इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे जल संकट कम होगा और किसानों को ज्यादा मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि ,आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की तैनाती की गई है। अब छत्तीसगढ़ के सबसे दुर्गम इलाकों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं। इन मोबाइल यूनिट्स के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को सुविधा मिल रही है।

मुख्यमंत्री साय ने भूमि और संपत्ति के मुद्दों पर कहा कि छत्तीसगढ़ में सभी भूमि रिकॉर्ड डिजिटल किए जा रहे हैं। इस तकनीक से पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगेगा। उन्होंने बताया कि इस सुधार से भूमि विवादों को आसानी से सुलझाया जा सकेगा, जिससे राज्य में निवेश और विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छत्तीसगढ़ की प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं के प्रति समर्थन और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार की सहायता से छत्तीसगढ़ राज्य अपने विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करेगा और विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस मौके पर समस्त केन्द्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केन्द्र शासित प्रदेशों के लेफ्टिनेंट गवर्नर्स, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, गवर्निंग काउन्सिल के सदस्य व छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन उपस्थित रहे।
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छत्तीसगढ़ में खुलेंगे सैनिक स्कूल, बृजमोहन के सवाल पर रक्षा मंत्री ने दी जानकारी

 रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में रक्षा मंत्रालय से छत्तीसगढ़ राज्य और विशेष रूप से रायपुर संसदीय क्षेत्र में बालिका सैनिक विद्यालय खोलने की योजना पर सवाल किया है।


जिस पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने जानकारी दी है कि, रक्षा मंत्रालय ने देश में गैर सरकारी संगठन/न्यास/निजी/सरकारी स्कूलों के साथ साझेदारी रीति में नए सैनिक स्कूल खोल रहा है। जिसकी शुरुवात उत्तरप्रदेश से ही चुकी है। जहां मथुरा में संविद गुरुकुलम उच्च माध्यमिक स्कूल को पूर्णरुपेण-बालिका सैनिक स्कूल के रूप में मंजूरी दी गई है। आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में भी यह प्रयोग हो सकता है। साझेदारी रीति के तहत स्थापित किए जाने वाले नए सैनिक स्कूल की स्थापना का खर्च संबंधित इकाई/एजेंसी ‌द्वारा वहन किया जाएगा।

 

 

 

 

 

 

 

 



सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भविष्य की प्रौद्योगिकी और उन्नत सुरक्षा विशेषताओं वाले ई-पासपोर्ट शुरू करने के लिए विदेश मंत्रालय से उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी।

 

 

 

 
 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
 

 



जिसपर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि, केंद्र सरकार एम्बेडेड चिप के साथ ई-पासपोर्ट शुरू करने के लिए कदम उठाए हैं। वर्तमान में, भुवनेश्वर और नागपुर स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों में ई-पासपोर्ट की परियोजना का परीक्षण चल रहा है। इसके सफलतापूर्वक आरंभ होने और अपेक्षित प्रमाणीकरण के बाद, इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे भारत में शेष क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों में शुरू किया जाएगा। ई-पासपोर्ट एक संयुक्त कागज और इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट है, जिसमें एक एम्बेडेड रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) चिप और इनले के रूप में एम्बेडेड एंटीना है। पासपोर्ट की महत्वपूर्ण जानकारी इसके डेटा पेज पर प्रिंट की जाएगी और साथ ही चिप में संग्रहीत की जाएगी, जिससे इसमें जालसाजी करने की संभावनाएं कम हो जाएगी। दस्तावेज़ और चिप की विशेषताएं अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) दस्तावेज़ 9303 के अनुसार हैं।

 

 

 

 

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सड़क दुर्घटनाओं को रोकने मवेशियों को पहनाया जा रहा रेडियम कॉलर

  कलेक्टर दीपक अग्रवाल के निर्देशानुसार सड़क सुरक्षा के उपाय के तहत पशुपालन विकास विभाग द्वारा मवेशियों को रेडियम कॉलर पहनाया जा रहा है। गरियाबंद, राजिम, फिंगेश्वर एवं अन्य क्षेत्रों के सड़क किनारे पाये जाने वाले पशुओं में रेडियम कॉलर लगाया जा रहा है। साथ ही अन्य जगहों पर भी सड़क सुरक्षा की दृष्टि से यह कार्यवाही की जा रही है। विशेष अभियान के तहत अभी तक लगभग 180 मवेशियों को रेडियम कॉलर पहनाया जा चुका है। साथ ही आगे भी यह कार्यवाही जारी है। मवेशियों में रेडियम कॉलर लगाने से रात में आने-जाने वाले वाहन चालक को दूर से ही मवेशी होने का संकेत मिल जाता है। इससे वाहन चालकों को सतर्क होकर आवागमन करने में आसानी होती है। साथ ही दुर्घटना की भी संभावना नहीं रहती है। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर श्री अग्रवाल ने सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सड़कों पर होने वाले दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी उपाय अपनाने के निर्देश दिये थे। साथ ही मवेशियों के गले पर रेडियम बेल्ट अनिवार्यतः लगाने को कहा था। कलेक्टर के निर्देशानुसार सड़क सुरक्षा के उपायों पर क्रियान्वयन किया जा रहा है।

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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दुनिया में बड़ी ताकत के रूप में उभरा भारत: मुख्यमंत्री साय

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को लगातार तीसरी बार देश का प्रधानमंत्री बनने पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर बधाई एवं शुभकामनाएं दी गई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि  नरेन्द्र मोदी का तीसरी बार प्रधानमंत्री बनना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को पूरा करने का काम कर रहे हैं। जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हमारे प्रधानमंत्री ने शांतिपूर्वक तरीके से हटा दिया। उन्होंने भारत को आर्थिक रूप से दुनिया की पांचवी सबसे बड़ा ताकत के रूप में खड़ा किया है और 2047 तक इस देश को विकसित भारत के रूप में खड़ा करने का उन्होंने संकल्प लिया है। 


विधानसभा में यह प्रस्ताव संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि  नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक स्तर पर अत्यधिक उंचाईयां प्राप्त की हैं, उनके नेतृत्व में हमारा देश विकसित देशों की श्रेणी में अपना स्थान बना पाएगा। उन्हीं के नेतृत्व में हमारा छत्तीसगढ़ राज्य भी उत्तरोत्तर प्रगति की ओर अग्रसर होगा। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में  मोदी जी के साथ प्रथम कार्यकाल में राज्य मंत्री के रूप में मुझे काम करने का अवसर मिला ।  मैं साक्षी हूं जिस दिन  मोदी ने पार्लियामेंट में प्रवेश किया उस  दिन झुक कर इस देश की सबसे बड़ी पंचायत (संसद) को प्रणाम करके संसद में प्रवेश किया था और पहले ही दिन के अपने भाषण में उन्होंने कहा था कि गरीबों का हित चिंतक बने रहेंगे और उन्हें गरीबी रेखा से उपर उठाने सतत प्रयास करेंगे। सरकार गरीबों के लिए समर्पित रहेगी, मेरी यह सरकार गरीबों के लिए काम करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 2014 को जब नरेंद्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से स्वच्छ भारत मिशन की घोषणा की, तो कुछ लोग उपहास करते थे। यह सफाई और शौचालय निर्माण का काम क्या कोई प्रधानमंत्री सोच सकता है। आज हम सब लोगों को इस बात का पता चल रहा है कि यह योजना कितनी महत्वपूर्ण है। उनके स्वच्छ भारत मिशन की घोषणा के बाद आज हम लोग साफसफाई का महत्व समझे। हमारे प्रधानमंत्री ने करोड़ों परिवारों के घरों में शौचालय का निर्माण कराया है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज मुझे बताते हुए गौरव होता है जब 2014 में नरेन्द्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने तब आजादी के 65 वर्षों के बाद भी इस देश के 14 हजार से ज्यादा जिन गांवों में बिजली नहीं पहुंची थी, उन घरों में बिजली पहुंचायी गई। 45 करोड़ से ज्यादा गरीबों का जनधन का खाता खोलने का काम पहली बार श्री मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद किया। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री ने स्वीकारा था कि हम दिल्ली से 100 रूपए भेजते हैं तो गांव तक 15 रूपए पहुंचता है, किन्तु आज प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं के माध्यम से हितग्राहियों के खाते में डीबीटी से सीधे राशि पहुंचाई जा रही है। उन्हें सफल प्रधानमंत्री के रूप में गांव, गरीब, किसान का आशीर्वाद मिल रहा है, जिससे देश और राज्य निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रथम कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपरीत परिस्थितियों में देश की सत्ता का नेतृत्व किया, लेकिन अपने कुशल नेतृत्व के कारण परिस्थितियों को अपने अनुकूल भी बना लिया। उन्होंने भारत को विश्व में एक अलग पहचान दिलाई। मोदी के नेतृत्व में भारत प्रत्येक क्षेत्रों में विकास करते हुए आगे बढ़ रहा है, जिसका लाभ देश की जनता को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सूझबूझ से 140 करोड़ आबादी वाले भारत में कोरोना को कंट्रोल किया और कोरोना से बचाव के लिए 200 करोड़ से भी ज्यादा वैक्सीन उपलब्ध कराई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने संकल्प के साथ मोदी जी की गारंटी को पूरा कर दिखाया है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रथम कार्यकाल में शपथ लेते हुए कहा था कि मेरी सरकार गरीबों के लिए समर्पित सरकार रहेगी, मेरी यह सरकार गरीबों के लिए काम करेगी। उनका पहला कार्यकाल गरीबों के लिए काम करते हुए बीता, जो आज एक मिसाल है। उन्होंने निचले तबके के लोगों को सम्मान के साथ जीवन बिताने के योग्य बनाया, जिससे आज निचले तबके के लोग सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। 

प्रस्ताव पर उपमुख्यमंत्री अरूण साव और विजय शर्मा, वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी सहित अन्य विधायकों ने भी अपने विचार रखे।
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पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने छत्तीसगढ़ के भाजपा सांसदों को लिखा पत्र

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य के भाजपा सांसदों को पत्र लिखकर, केंद्रीय बजट में छत्तीसगढ़ की उपेक्षा को सदन मे उठाने किया आग्रह किया है। उन्होंने पत्र में आगे लिखा है की आदरणीय आप सब छत्तीसगढ़ के विभिन्न संसदीय क्षेत्रों से निर्वाचित हुए है। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के गठन में छत्तीसगढ़ की जनता ने भी महति भूमिका निभाई है। राज्य के 11 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से 10 क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी के सांसदों को राज्य की जनता ने जिताया है। चुनाव में आप सबने प्रदेश की जनता से वादा किया था डबल इंजन की सरकार बनेगी तो प्रदेश का तीव्र गति से विकास होगा।


मोदी सरकार के पहले बजट से राज्य की जनता अपने आप को ठगा महसूस कर रही है। डबल इंजन की सरकार का राज्य को कोई फायदा नहीं मिला। केंद्रीय बजट में राज्य की अनदेखी की गयी है। सत्तारूढ़ दल के 10 सांसदों वाले राज्य की उपेक्षा पीड़ाजनक है। इसके विपरीत बिहार और आन्ध्रा जैसे राज्यों के लिये केंद्रीय बजट में विशेष प्रावधान है। छत्तीसगढ़ आदिवासी प्रदेश है, राज्य की बड़ी आबादी वन क्षेत्रों में रहती है। आर्थिक शैक्षणिक विकास के इंडेक्स में छत्तीसगढ़ देश के अनेकों राज्यों से पीछे है। छत्तीसगढ़ भी देश के अन्य राज्यों के समान विकास की दौड़ में शामिल हो इसलिए देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा छत्तीसगढ़ को विशेष सहायता की आवश्यकता है।


आप सबको राज्य की जनता ने बड़े आशा और विश्वास के साथ संसद में भेजा है। आपसे मैं आग्रह करता हूं कि राज्य की जनता के अपेक्षाओं के अनुरूप आप राज्य के हितों की आवाज संसद में उठाये। राज्य के सर्वागीण विकास के लिये छत्तीसगढ़ को विशेष राज्य और विशेष आर्थिक पैकेज की मांग बुलंद करें।

यहां हम आपको बता दें कि केंद्र में भाजपा सरकार के तीसरे कार्यकल में पहला बजट पेश किया गया था उस समय विपक्ष  ने बजट को चोरी का बजट और नकलची बजट कहा था और उनका यह भी कहना था कि सिर्फ आंध्र प्रदेश और बिहार को ही इस बजट से लाभ मिला है बाकी राज्यों को इस बजट में उनका नाम तक नहीं लिया गया है इसी तरह छत्तीसगढ़ के लोगो को भी इस बजट से निराशा हुई है।

 

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नदी-नाले एवं पुराने पुल-पुलिया को पार करते समय एहतियात बरतें

 मानसून के चलते जिले में चार पांच दिन से भारी बारिश हो रही है, जिससे नदी-नालों और पुराने पुल-पुलियों में जलस्तर बढ़ गया है। कलेक्टर श्री प्रभात मलिक ने जनता के नाम जारी संदेश में कहा कि वे किसी भी हालत में जान जोखिम में डालकर उफनते नदी-नाले पार न करें।

  कलेक्टर श्री मलिक ने कहा कि भारी बारिश के कारण जिले के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने पुल-पुलियों पर पानी का बहाव तेज है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे इस मौसम में अत्यंत सावधानी बरतें और सुरक्षित स्थानों पर रहें।
 कलेक्टर ने बताया कि प्रशासन ने सभी आवश्यक उपाय किए हैं और आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता जनता की सुरक्षा है। इसलिए, किसी भी स्थिति में जोखिम न लें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें।“ उन्होंने विशेष रूप से वाहन चालकों से कहा है कि वे भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और जलमग्न सड़कों पर ड्राइविंग न करें। साथ ही, पैदल यात्रियों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
  इसके अतिरिक्त, कलेक्टर ने जिले के सभी एसडीएम और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करें और आवश्यकतानुसार राहत कार्यों को सुनिश्चित करें। आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर दिया गया है और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं ताकि किसी भी जरूरतमंद को त्वरित सहायता मिल सके। आपदा नियंत्रण कक्ष का दूरभाष क्रमांक 07723-223305 तथा ई-मेल  msamund.cg@nic.in है।
  कलेक्टर श्री प्रभात मलिक ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और सुरक्षित रहें। उन्होंने कहा, “आपकी सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। इसलिए, सावधानी बरतें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता मांगें।“

 

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छत्तीसगढ़ में अब तक 479.7 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

 शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बनाए गए राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष द्वारा संकलित जानकारी के मुताबिक एक जून 2024 से अब तक राज्य में 479.7 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है। राज्य के विभिन्न जिलों में 01 जून 2024 से आज 26 जुलाई सवेरे तक रिकार्ड की गई वर्षा के अनुसार बीजापुर जिले में सर्वाधिक 1131.0 मिमी और सरगुजा जिले में सबसे कम 184.7 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी है।

    राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक जून से अब तक सूरजपुर जिले में 297.0 मिमी, बलरामपुर में 430.9 मिमी, जशपुर में 309.7 मिमी, कोरिया में 317.3 मिमी, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 328.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी।
    इसी प्रकार, रायपुर जिले में 425.3 मिमी, बलौदाबाजार में 530.0 मिमी, गरियाबंद में 536.0 मिमी, महासमुंद में 381.5 मिमी, धमतरी में 556.1 मिमी, बिलासपुर में 448.3 मिमी, मुंगेली में 493.4 मिमी, रायगढ़ में 369.3 मिमी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 225.8 मिमी, जांजगीर-चांपा में 400.8 मिमी, सक्ती में 322.4 कोरबा में 552.9 मिमी, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 454.2 मिमी, दुर्ग में 319.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी। कबीरधाम जिले में 395.3 मिमी, राजनांदगांव में 567.6 मिमी, मोहला-मानपुर-अंबागढ़चौकी में 589.2 मिमी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 378.4 मिमी, बालोद में 660.1 मिमी, बेमेतरा में 308.3 मिमी, बस्तर में 625.8 मिमी, कोण्डागांव में 525.4 मिमी, कांकेर में 656.4 मिमी, नारायणपुर में 640.5 मिमी, दंतेवाड़ा में 664.5 मिमी और सुकमा जिले में 804.7 मिमी औसत वर्षा एक जून से अब तक रिकार्ड की गई।

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राज्यपाल ने कारगिल विजय-शौर्य दिवस पर कारगिल युद्ध के शहीदो को किया नमन

राज्यपाल ने कहा कि कारगिल विजय-शौर्य दिवस हमें वीर जवानों के अदम्य साहस और बलिदान की याद दिलाता है जिन्होंने वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान अपने प्राणों की आहुति देकर राष्ट्र की रक्षा की। शहीदों का यह बलिदान हमें प्रेरित करता है कि हम हमेशा अपने देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए तत्पर रहें। उनकी वीरता और समर्पण हमें यह सिखाता है कि राष्ट्रहित से बड़ा कोई धर्म नहीं है।
 राज्यपाल हरिचंदन ने वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हम उनके परिवारों के प्रति भी अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करते हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया। देश के प्रत्येक नागरिक को इन परिवारों के बलिदान को सलाम करना चाहिए और उनके साहस की प्रशंसा करनी चाहिए। हम सब मिलकर इन वीर शहीदों की शहादत को नमन करें और अपने देश की प्रगति और समृद्धि के लिए एकजुट होकर कार्य करें।

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जशपुर का मयाली बगीचा देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के मयाली बगीचा को देश के प्रमुख पर्यटन स्थल में शामिल किए जाने तथा स्वदेश दर्शन योजना में जगदलपुर और बिलासपुर को शामिल किए जाने पर केन्द्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार द्वारा सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ मंदिर को  प्रसाद योजना में शामिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। 

जशपुर के मयाली बगीचा को केंद्र सरकार ने देश के उन 42 डेस्टिनेशंस में चुना है, जिन्हें चुनौती मानते हुए विकसित किया जाएगा। यह केंद्र के स्वदेश दर्शन 2.0 प्रोजेक्ट का हिस्सा होगा। इसी तरह स्वदेश दर्शन योजना में देशभर के 57 शहरों की पहचान की गई है, जिनमें छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और जगदलपुर को शामिल किया गया है। ये वह शहर हैं, जहां अंतरदेशीय पर्यटन केंद्र विकसित होंगे। इसके लिए 29 प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं, जिनके तहत बिलासपुर और जगदलपुर में भी काम होगा। इसके साथ ही सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ मंदिर समेत देशभर के 29 स्थानों को तीर्थयात्रा के कायाकल्प के लिए प्रसाद योजना में चुना गया है। 

 केन्द्रीय पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कल राज्य सभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि इन योजनाओं पर अमल शुरू हो गया है। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत विकास की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके लिए छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और जगदलपुर सहित देश में 57 स्थानों की पहचान की गई है। इस प्रोजेक्ट के तहत 29 परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई है। इसी योजना के तहत चुनौती आधारित गंतव्य विकास के लिए देशभर में 42 स्थानों का चयन किया गया है, जिसमें जशपुर का मयाली बगीचा भी है। उल्लेखनीय है कि मयाली बगीचा जशपुर जिले का बेहद खूबसूरत पर्यटन केंद्र माना जाता है। पर्यटन मंत्रालय ने तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक संवर्धन अभियान (प्रसाद) योजना के अंतर्गत विकास के लिए छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ मंदिर को भी चुन लिया है। इसे मिलाकर देशभर में कुल 29 स्थानों का चयन किया गया है, जहां इस योजना के तहत प्रोजेक्ट लाए जा रहे हैं।
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ग्रीन स्टील से शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ ही खुलेंगे आर्थिक संभावनाओं के भी द्वार-मुख्यमंत्री

क्लाइमेट चेंज की चुनौती से निपटने के लिए पूरी दुनिया ग्रीन स्टील की ओर रुख कर रही है। स्टील के उत्पादन में अग्रणी राज्यों में से एक होने के नाते ग्रीन स्टील छत्तीसगढ़ के लिए भी बड़ी संभावनाएं लेकर आया है। इससे न केवल कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में हमें मदद मिलेगी, अपितु इस क्षेत्र में नवीन पहल कर हम बड़ी आर्थिक उपलब्धियों की संभावनाओं का द्वार खोल सकते हैं। यह बात मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने नवा रायपुर अटल नगर स्थित मेफेयर लेक रिसार्ट में आयोजित ग्रीन स्टील समिट 2024 में शामिल होने के अवसर पर कही। इस समिट का आयोजन भारतीय इस्पात उद्योग को कार्बन रहित बनाने के उद्देश्य से किया गया है। समिट में देश भर के प्रमुख उद्योगपति, व्यापारी उपस्थित थे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में सीआईआई को आयोजन के लिए बधाई  देते हुए कहा  कि छत्तीसगढ़ प्रदेश भारत का सबसे प्रमुख स्टील निर्माता है। हमारे यहां सार्वजनिक क्षेत्र के भिलाई स्टील प्लांट और नगरनार स्टील प्लांट जैसी बड़ी इकाईयां तो संचालित है ही, इसके साथ-साथ निजी क्षेत्र के अनेक छोटे-बड़े इस्पात संयंत्र संचालित हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र एशिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट है और छत्तीसगढ़ में लोहे के विशाल भंडार हैं, जिनमें बैलाडीला, रावघाट और दल्लीराजहरा प्रमुख हैं। छत्तीसगढ़ का देश में कुल उत्पादित स्टील में लगभग 20 प्रतिशत तक का योगदान है और राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योगों की भागीदारी 53.50 प्रतिशत है।

मुख्यमंत्री ने इस्पात उद्योग से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण के वैश्विक चिंताओं पर भी प्रकाश डाला और कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने वर्ष 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने का दृष्टिकोण सामने रखा है। उन्होंने केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की घोषणा की सराहना की और राज्य में सौर ऊर्जा और हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों का उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीआईआई का यह समिट भारतीय इस्पात उद्योग को कार्बन रहित बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण प्रयास है। आज हम इस समिट में ग्रीन स्टील जैसे रोचक विषय पर बात कर रहे हैं। इस शब्द में खूबसूरती तो है ही, साथ ही साथ जिम्मेदारी भी है।

मुख्यमंत्री ने समिट में उपस्थित सभी प्रतिनिधियों से ग्रीन स्टील उत्पादन की नई तकनीक को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का आह्वान किया और कहा कि हमारी एकजुटता से हम स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण का निर्माण करते हुए मिलजुलकर विकास करेंगे।

इस समिट में देश भर के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी उपस्थित थे, जिन्होंने ग्रीन स्टील उत्पादन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों और नई तकनीकों पर अपने विचार साझा किए।

इस अवसर पर सीआईआई के पदाधिकारी और उद्योगपति आशीष सराफ, सिद्धार्थ अग्रवाल,  सुवेन्द्र बेहरा, संजय जैन,  पी वी किरण अनंत उपस्थित थे।
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नक्सल पीड़ित परिवारों के परिजनों को प्रथम चरण में 58 लोगों को मिलेगी शासकीय नौकरी

 नक्सली हिंसा में मृतक के परिजनों को छत्तीसगढ़ शासन के पुनर्वास नीति के तहत शासकीय सेवा में अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य के सभी वर्गाें के विकास के लिए कल्याणकारी योजनाओं का त्वरित क्रियान्वयन कर लाभांवित किया जा रहा है। आज बीजापुर जिला स्तरीय पुनर्वास समिति की बैठक में नक्सल पीड़ित परिवारों के 58 लोगों को अनुकम्पा नियुक्ति देने का निर्णय लिया गया। 


पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव ने बताया कि अनुकम्पा नियुक्ति के लिए कुल 58 पात्र आवेदकों को प्रथम चरण में अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। पूर्व में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त प्रकरणों की समीक्षा करते हुए 19 जुलाई तक दावा आपत्ति आमंत्रित की गई थी, बाद में इस तिथि में वृद्धि करते हुए 24 जुलाई 2024 को निर्धारित की गई। उक्त तिथियों में प्राप्त दावा आपत्तियों का निराकरण करते हुए समिति के निर्णय के आधार पर विभिन्न विभागों में चतुर्थ वर्ग के पदों पर नियुक्ति हेतु अंतिम रूप से 58 आवेदक प्रथम चरण में पात्र पाए गए हैं, जिन्हें यह नियुक्ति दी जाएगी।
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समूह की दीदियां करेगी अब हल्दी का व्यवसायिक उत्पादन

 हल्दी् (टर्मरिक) एक भारतीय वनस्पति है यह अदरक की प्रजाति का 5 से 6 फिट बढने वाला पौधा है जिसमें जड़ की गाठो में हल्दी मिलती है हल्दी को आयुर्वेद में एक महत्व्पूर्ण औषधि मानी गयी है। इसके अलावा भारतीय रसोई में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी भारतीय समाज में इसको बहुत शुभ समझा जाता है विवाह में तो हल्दीे की रस्म का एक विशेष महत्व है। हल्दी का उपयोग धार्मिक कार्यो के अलावा मसाला, रंग सामग्री, औषधि तथा उबटन के रूप में  किया जाता रहा है।

 

दंतेवाडा़

औषधि एवं घरेलू उपयोग में उपयोगिता इस प्रकार है। इसके साथ ही हल्दी में कैंसर रोधी गुण भी पाये जाते है। इस क्रम में विकासखण्ड कुआकोंडा के 5 ग्रामों को हल्दी की पैदावार के अनुकुल वातावरण के मददे नजर चयन किया गया है। इस संबंध में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ’’बिहान’’ के तहत स्थानीय स्व सहायता की दीदियों को हल्दी उत्पादन, करने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। इस कड़ी में ग्राम रेंगानार, गढ़मिरी, कुआकोण्डा, हल्बारास, मैलावाड़ा, गोगपाल के इच्छुक 50 महिलाओं को उद्यानिकी विभाग से 20 क्विंटल हल्दी बीज प्रदाय की गई है और समुह की दीदियों ने 40-40 किलो अपने बाड़ी में हल्दी गाठों का रोपण किया है। इस प्रकार हल्दी उत्पादन इस वर्ष होने पर अगले वर्ष इस हल्दी को मां दन्तेश्वरी महिला फार्मर प्रोडयूसर कंपनी लिमिटेड कुआकोण्डा के द्वारा खरीदी भी की जायेगी। खरीदी कर इस हल्दी का समूह के द्वारा प्रसंस्करण कर जिले के सी-मार्ट दुकान तथा थोक किराना दुकानों में सप्लाई करने की योजना है। जिसमें उत्पादन करने वाली समूह के महिलाए को स्थानीय स्तर पर विक्री करने का स्थान तथा उचित दर प्राप्त होगा। यूं तो जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हल्दी की खेती पूर्व से ही की जाती रही है। परन्तु एक वृहत पृष्ठ भूमि में व्यवसायिक दृष्टिकोण से इसका रोपण लगभग नगण्य है। इसे दृष्टिगत रखते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ’’बिहान’’ द्वारा हल्दी की खेती को महिलाओं की आर्थिक समृद्धि एवं आजीविका से जोड़ते हुए पहल की जा रही है और उम्मीद किया जा सकता है कि निश्चित ही महिलाएं हल्दी का व्यवसायिक उत्पादन कर अपने आर्थिक समृद्धि को बढ़ाएगीं।
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