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डेयर डेविल्स के करतब से रोमांचित हुए दर्शक, डबल क्रासिंग ने खूब किया आकर्षित

पुख्तासूत्रों से भारतीय सेना को खबर मिली कि दुश्मन हमारे देश में एक और आतंकवादी हमले की तैयारी कर रहे है। भारतीय सेना ने दुश्मन के मंसूबों को नाकामयाब करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक करने का फैसला लिया। इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए भारतीय सेना की 6/11 गोरखा राइफल्स और 1 असम रेजिमेंट के चुनिंदा कमांडोज स्पेशल हेडक्वाटर्स और संचार केंद्र पर हमले की तैयारी कर रहे थे, तभी दुश्मन के टारगेट की पुख्ता जानकारी हासिल करने के लिए क्लोज टारगेट रेकनिसन्स ऑपरेशन शुरू किया और ड्रोन ने दुश्मन के टारगेट की खोजबीन शुरू की। रात के अंधेरे में किए जाने वाले डिमांस्ट्रेशन की कार्रवाई सुबह की। घातक पलटन के कमांडोज दुश्मन के नजदीक से नजदीक जाकर बिना सरप्राइज खोये दुश्मन के संतरी को मार गिराया। ऐसे रेड की कार्रवाई साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित सैन्य समारोह में दिखाई दी। इस कार्रवाई को देखकर दर्शक काफी रोमांचित हुए। 
 
इस कार्रवाई के दौरान जवानों ने दुश्मन के संचार केंद्र को विस्फोटक लगाकर नेस्तनाबूत कर दिया। इसके बाद दुश्मनों का हेडक्वाटर्स से संपर्क टूट गया और फिर जवानों ने दुश्मनों के हेडक्वार्टर पर हमला बोल दिया। अत्यधिक फायर कर कमांडोज ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए सेंट्रीज को मार गिराया। फिर डेमोलिशन टीम ने हेडक्वाटर्स पर बम लगाकर उसे उड़ा दिया। असाल्ट से घबराकर भागते हुए दुश्मन को चौकस कमांडोज ने मार गिराया। इस तरह दुश्मनों के हेडक्वार्टर को घातक टोली ने नेस्तनाबूत कर दिया। 
 
डेयर डेविल्स के करतब से रोमांचित हुए दर्शक
 
भारतीय सेना के डेयर डेविल्स ने अपने करतब और अदम्य साहस का परिचय देते हुए रोमांचित कर दिया। डेयर डेविल्स के डबल क्रॉसिंग, पेरलल क्रॉसिंग के करतब को देखकर दर्शकों ने खूब तालियां बजाई। सैल्यूट करते हुए हर जवानों ने चलती हुई मोटरसाइकिल में विपरीत दिशा में सैल्यूट किया। इसके अलावा चलती हुई मोटरसाइकिल पर टैंक के ऊपर विपरीत दिशा में खड़े होकर मोटरसाइकिल चलाते हुए और मोटरसाइकिल की सीट को खाली छोड़कर सम्मान प्रकट किया। इसके साथ ही जंबाज सैनिकों ने मोटरसाइकिल में कमल की आकृति बनाकर प्रस्तुति दी। 
 
बस्तर के युवाओं ने घुड़सवारी में दिखाया साहसिक करतब
 
सैन्य समारोह में बस्तर के युवाओं ने अपने जौहर का प्रदर्शन किया। घुड़सवारी के माध्यम से अपनी प्रतिभा दर्शकों को दिखाई। घोड़े में बैठकर युवाओं ने कबूतर को आजाद किया और बाइक के ऊपर से उछलकर पार किया और सामने बैठे एक व्यक्ति के सामने से तेजी के साथ घोड़े ने पार कर लिया, जिसके साहसिक परिचय को देखकर दर्शक काफी रोमांचित हुए।
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भारतीय सेना की ताकत, जवानों का शौर्य हमें रोमांच के साथ गौरवान्वित करता हैं: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित भव्य सैन्य समारोह एवं प्रदर्शनी  का मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री साय का जैकेट पहनाकर सेना ने अपने अंदाज में स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने भारतीय सेना के करतब को देखकर रोमांचित हुए और उनकी कौशल और क्षमता को सराहा। मुख्यमंत्री श्री साय ने दो दिवसीय सैन्य प्रदर्शनी को आम नागरिकों के उत्साह को देखते हुए एक दिन बढ़ाने की घोषणा की। अब प्रदर्शनी का आयोजन 5 एवं 6 अक्टूबर के अलावा 7 अक्टूबर तक किया जाएगा।प्रदर्शनी दिन में सुबह 8 बजे से 10 बजे तक एवं शाम को 6 बजे से रात 8 बजे तक आयोजित की जायेगी। 
 
सैन्य प्रदर्शनी समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इस प्रदर्शनी में अपनी सेना की ताकत, उनकी क्षमता और हमारे वीर जवानों के शौर्य को देखकर रोमांचित और गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों में देशभक्ति का जज्बा जगाने के लिए सेना का एक अकेला जवान ही काफी होता है। सेना की वर्दी में किसी चुस्त-दुरूस्त जवान को देखकर ही हमारे भीतर जोश आ जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर जब हम कर्तव्य-पथ पर अपने सैनिकों को परेड करते हुए देखते हैं, तब हर भारतीय के मन में विचार अवश्य आता है कि काश हम भी भारतीय सेना का हिस्सा होते। उन्होंने कहा कि हमारी यह सेना संख्या दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में गिनी जाती है। हमारी यह सेना अपने अनुशासन और दक्षता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। 
 
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा आजादी के बाद देश पर जब-जब खतरा मंडराया, हमारी सेना ने दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। आज किसी भी देश की हिम्मत नहीं होती कि वह भारत की ओर आंख उठाकर देखें। इसी तरह हमारे इन जवानों ने देश की आंतरिक सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जब कोई प्राकृतिक आपदा होती है, तब भी हमें सबसे पहले हमारी सेना की याद आती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रदर्शनी में भीष्म टी-90 टैंक, बीएमपी, एल-70 और अन्य आधुनिक सैन्य उपकरणों का अवलोकन कर सकेंगे, जिनका उपयोग हमारे सशस्त्र बलों ने दुश्मनों के खिलाफ विजय प्राप्त करने में किया है। इसके साथ-साथ आप पैरा जंपिंग, खुखरी डांस, डेयर डेविल मोटरसाइकलिंग और घुड़सवारी जैसे हैरतअंगेज और अद्भुत प्रदर्शन का आनंद भी ले पाएंगे। 
 
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस प्रदर्शनी को देखने के लिए युवा साथी बड़ी संख्या में आए हैं। बहुत अच्छी बात है कि लोग अपने बच्चों को लेकर भी यहां आए हैं, इससे निश्चित रूप से ये बच्चे भी प्रेरित होंगे और सेना में शामिल होकर देश सेवा का अवसर मिले तो इसे अपने हाथों से जाने न दें। अग्निवीर योजना भी आपको यह महत्वपूर्ण अवसर देती है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कल बस्तर के अबुझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने माओवादी आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में 31 माओवादियों को ढेर कर दिया। इस बड़ी सफलता के लिए सुरक्षा बलों के जवानों को बधाई देता हूं। पिछले 9 महीनों के दौरान हमारे जवानों ने माओवादी आतंकवाद के खिलाफ लगातार बड़ी सफलताएं हासिल की हैं। अब तक 191 माओवादी को ढेर किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में आ रहे बदलाव का यह संकेत है कि बस्तर के युवा बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों में शामिल होकर माओवादियों को खदेड़ रहे हैं। सैन्य समारोह की प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री श्री साय को ब्रिगेडियर श्री अमन आनंद ने भारतीय सेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले हथियारों और टैंक की विस्तृत जानकारी दी। श्री साय ने प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण में से एक टैंक टी-90 भीष्म का भी अवलोकन किया और इसकी क्षमता और विशेषता की जानकारी ली। 
 
मुख्यमंत्री ने सेना में उपयोग होने वाले अत्याधुनिक हथियारों, ड्रोन, रायफल सहित भूतपूर्व सैनिकों के लिए चलाई जा रही योजनाओं, अग्निपथ योजना, छत्तीसगढ़ हर्बल्स के स्टाल का अवलोकन किया। गौरतलब है कि सैन्य प्रदर्शनी के दौरान भारतीय सेना द्वारा युद्ध में उपयोग किए गए तथा वर्तमान में उपयोग किये जा रहे विभिन्न हथियारों, टैंक, रायफल आदि का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में ऐसे टैंक और हथियार भी शामिल हैं, जो वर्तमान में उपयोग में नहीं है और सेना ने इसे एक धरोहर के रूप में संजो कर रखा है। साथ ही मुख्यमंत्री ने सभी स्टालों का अवलोकन किया और सेना के अधिकारियों से जानकारी ली। 
 
 इस समारोह में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू, श्री खुशवंत सिंह साहेब, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, डीजीपी श्री अशोक जुनेजा, लेफ्टिनेंट जनरल श्री पदम सिंह शेखावत, ब्रिगेडियर श्री अमन आनंद (विशिष्ट सेवा मेडल), अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, कर्नल श्री सुदीप बोस, रायपुर संभागायुक्त श्री महादेव कावरे, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, एसएसपी डॉ. संतोष सिंह समेत बड़ी संख्या में सेना के जवान और नागरिक उपस्थित थे।
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देश-विदेश के नीति निर्माता, पर्यावरणविद, विशेषज्ञ और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि कर रहे संवाद

धमतरी में रविशंकर जलाशय (गंगरेल बांध) के किनारे आयोजित जल जगार में देश-विदेश के नीति निर्माता, पर्यावरणविद, विशेषज्ञ और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि जल संचय और जल संरक्षण पर संवाद कर रहे हैं। वे यहां आयोजित अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन में जल संचय और जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए अपने-अपने क्षेत्रों के सफल कार्यों की कहानी साझा कर रहे हैं। वे इनके प्रभावी उपायों पर गहनता से विचार-विमर्श करने के साथ ही धरातल पर उतारने की कार्ययोजना भी तय कर रहे हैं।
 
जल जगार में आयोजित विभिन्न गतिविधियों के बीच आज अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन के पहले दिन केन्द्रीय कृषि तथा किसान कल्याण मंत्रालय की अपर सचिव डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्रालय की अपर सचिव श्रीमती अर्चना वर्मा, पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध पर्यावरणविद सर्वश्री पोपटलाल पवार, श्यामसुंदर पालीवाल और उमाशंकर पाण्डेय तथा अर्थशास्त्री एवं शहरी विकास विशेषज्ञ प्रो. अमिताभ कुंडु ने सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कलेक्टर सुश्री नम्रता गांधी ने जल जगार के उद्देश्यों और धमतरी जिले में जल संचय व जल संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
 
अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि तथा किसान कल्याण की अपर सचिव डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी ने कहा कि धमतरी में जल संरक्षण की पहल पुरानी है। यहां की 'ओजस्वी' एफपीओ (कृषक उत्पाद संगठन) ने कम पानी में होने वाले धान की खेती प्रारंभ की थी। उन्होंने बताया कि धान की ऐसी बहुत सी प्रजाति है जो कम पानी में होती है और जल्दी पकती है। उन्होंने इस तरह की और भी प्रजातियों को विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने नए बीजों और अन्य फसलों की खेती पर भी ध्यान देने को कहा। 
 
केन्द्रीय जलशक्ति मंत्रालय की अपर सचिव श्रीमती अर्चना वर्मा ने अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन में कहा कि हमारे पूर्वजों के पास जल संचय और जल संरक्षण के बहुत से तरीके थे। वे पानी की एक-एक बूंद का सम्मान करते थे। हमारी जलशक्ति अभियान का भी मूल उद्देश्य पानी की धरोहरों के प्रति सम्मान को वापस लाना है। जल संचय और जल संरक्षण के काम में जन भागीदारी बहुत जरूरी है। उन्होंने जल जगार के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह जल संरक्षण से लोगों को जोड़ने की बहुत अच्छी पहल है। इससे संस्कृति, समुदाय और युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है।
 
पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध पर्यावरणविदों और जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले सर्वश्री पोपटलाल पवार, श्यामसुंदर पालीवाल और उमाशंकर पाण्डेय ने सम्मेलन में जल संचय और जल संरक्षण की सफल कहानियां साझा की। श्री पवार ने कहा कि जलस्रोतों में कम से कम 20 प्रतिशत पानी रिचार्ज के लिए छोड़ना चाहिए। इसका 80 प्रतिशत ही उपयोग किया जाना चाहिए। हमारे हिमालय को बचाने के लिए पश्चिमी घाट का संरक्षण जरूरी है।
 
सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद श्री श्यामसुंदर पालीवाल ने बताया कि उन्होंने अपने क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए बेटी, पानी और पेड़ों को जोड़कर काम किया। इसे रोजगार से भी जोड़ा। पर्यावरणविद श्री उमाशंकर पाण्डेय ने कहा कि पानी सरकार का विषय नहीं है। यह समाज का विषय है। पानी के बारे में स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाया जाना चाहिए। हम पानी बना नहीं सकते, लेकिन पानी को बचा सकते हैं। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं शहरी विकास विशेषज्ञ प्रो. अमिताभ कुंडु ने सम्मेलन में कहा कि जल की चिंता को लेकर जिला स्तर पर इस तरह का वृहद आयोजन पहली बार देख रहा हूं। यहां नीति निर्धारक, पर्यावरणविद, जल संरक्षक, विशेषज्ञ और नागरिक पानी के बारे में चर्चा कर रहे हैं। उसे बचाने की रणनीति बना रहे हैं। यह बहुत ही उपयोगी पहल है।
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प्रदेश के किसानों की ओर से मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का जताया आभार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज महाराष्ट्र के वाशिम जिले से देश के लगभग 9 करोड़ 40 लाख से अधिक किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 18वीं किस्त के रूप में 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे उनके खाते में अंतरित की। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 18वीं किस्त के ऑनलाइन अंतरण कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 18वीं किस्त के रूप में प्रदेश के 24 लाख 98 हजार से अधिक किसानों के खातों में 566 करोड़ 77 लाख रुपए से अधिक की राशि अंतरित होने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। श्री साय ने इस मौके पर प्रदेश के किसानों को बधाई और शुभकामनाएं दी। 
           मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 17 वीं किश्त की तुलना में इस बार 66 हजार 485 अधिक किसानों ने योजना का लाभ उठाया है। इससे पहले भी 16 वीं किश्त की तुलना में 17वीं किश्त का लाभ उठाने वाले किसानों की संख्या 01 लाख 11 हजार 518 अधिक थी। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना की किश्त-दर-किश्त लाभान्वित होने वाले किसानों की संख्या में बढ़ोतरी होना इस बात का प्रमाण है कि भारत के कृषि क्षेत्र में कितनी तेजी से प्रगति हो रही है। यह मोदी सरकार पर किसानों के मजबूत भरोसे का भी प्रमाण है। श्री साय ने कहा कि 18 वीं किश्त के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के जो किसान भाई-बहन आज लाभान्वित हो रहे हैं, उनमें 02 लाख 49 हजार 867 वन-पट्टा धारक हैं और 30 हजार 408 किसान पीवीटीजी योजना के अंतर्गत लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में किसानों की उन्नति जय जवान-जय किसान के नारे को सार्थक कर रही है। 
           इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  टंकराम वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक सर्व मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, ईश्वर साहू, गुरु खुशवंत साहेब और डॉ. रामप्रताप मौजूद रहे।
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नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता मिलने पर मुख्यमंत्री ने दी पुलिस जवानों को बधाई

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने नारायणपुर-दंतेवाड़ा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षाबल के जवानों की नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में बड़ी संख्या में नक्सलियों के मारे जाने पर पुलिसबल के जवानों को मिली सफलता के लिए बधाई दी है। 
 
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जवानों को मिली यह बड़ी कामयाबी सराहनीय है। उनके हौसले और अदम्य साहस को मैं नमन करता हूं। नक्सलवाद के खात्मे के लिए शुरू हुई हमारी लड़ाई अब अपने अंजाम तक पहुंचकर ही दम लेगी, इसके लिए हमारी डबल इंजन की सरकार दृढ़ संकल्पित है। प्रदेश से नक्सलवाद का खात्मा ही हमारा लक्ष्य है। नक्सलवाद के खात्मे तक हमारी यह लड़ाई जारी रहेगी।
 
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि आज नारायणपुर-दंतेवाड़ा की सीमा में स्थित अबूझमाड़ क्षेत्र में हमारे सुरक्षा बलों के जवानों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई है, सर्चिंग में अभी तक 28 नक्सलियों के मारे जाने की जानकारी प्राप्त हुई है।  सर्चिंग में एके-47 सहित कई हथियार मिले हैं । मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मैं समझता हूं कि छत्तीसगढ़ में यह अब तक का सबसे बड़ा नक्सल ऑपरेशन हुआ है। इसके लिए मैं अपने जवानों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं और उनके साहस को मैं नमन करता हूं ।
 
उन्होंने कहा कि हम पहले से ही माओवादियों को कहते आए हैं कि वे हिंसा का रास्ता छोड़ दें और विकास की मुख्य धारा से जुड़ें। अब हम लोग डबल इंजन सरकार के कारण मजबूती से नक्सलियों से लड़ रहे हैं। माओवाद अपनी अंतिम सांस गिन रहा है। 
 
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज मैं बीजापुर के दौर पर था, जहां नक्सल हिंसा  पीड़ित लोगों से मुलाकात की। आज इस घटना के बाद शायद उनका विश्वास और अधिक बढ़ गया होगा। निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ में माओवाद समाप्ति की ओर अग्रसर है।
 
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह विगत 9 महीने में नक्सलवाद की समीक्षा हेतु दो बार छत्तीसगढ़ आ चुके हैं और उनका संकल्प है कि मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद समाप्त हो जाए। उनकी सोच के अनुरूप हमारे जवान छत्तीसगढ़ में भी माओवादियों से मुकाबला कर रहे हैं।
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मुख्यमंत्री के हाथों ,नक्सल हिंसा से 70 प्रभावितों को मिला विभिन्न विभागों में नियुक्ति आदेश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बीजापुर के जिला अस्पताल को सौ बिस्तर से बढ़ाकर दो सौ बिस्तर करने की घोषणा के साथ ही अंचल के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने नक्सल पुनर्वास नीति के अंतर्गत नक्सल पीड़ित परिवार के 70 आश्रितों को शासकीय नियुक्ति आदेश पत्र भी सौंपा और 19 हजार से अधिक तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 14 करोड़ 9 लाख रूपए की बोनस राशि भी वितरित की। 
 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बीजापुर जिला मुख्यालय के मिनी स्टेडियम में आयोजित नक्सल पुनर्वास नीति के अंतर्गत नक्सल पीड़ित परिवार के आश्रितों को शासकीय नियुक्ति आदेश और तेंदूपत्ता बोनस वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने 263 करोड़ 66 लाख से अधिक की लागत से 209 के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 228 करोड़ 53 लाख के 145 विकास कार्यों का भूमि पूजन और 35 करोड़ 13 लाख के 64 विकास कार्य का लोकार्पण शामिल है।
 
मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम में बीजापुर में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना, भोपालपटनम में 132 केव्ही की विद्युत सब स्टेशन की स्थापना, 33 नए स्कूल खोलने, केंद्रीय पुस्तकालय और विशेषज्ञ चिकित्सकों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जोड़ने की घोषणा की। साथ ही प्रयास आवासीय विद्यालय और प्रतियोगिता परीक्षा के लिए कोचिंग की व्यवस्था करने के लिए कलेक्टर को निर्देशित किया।
 
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में कहा कि बस्तर क्षेत्र में विकास कार्य को गति दी जा रही है। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से माओवाद-आतंक से प्रभावित क्षेत्रों में केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, खनिज, वन संपदा से परिपूर्ण है साथ ही यहाँ के निवासी भी ऊर्जावान है। प्रदेश के विकास में यहां के लोग महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। कार्यक्रम को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वनमंत्री और बीजापुर प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप, लोकसभा क्षेत्र बस्तर के सांसद श्री महेश कश्यप ने भी संबोधित किया। 
 
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंर्तगत गृह प्रवेश (चाबी वितरण) और आवास स्वीकृति पत्र, तेंदूपत्ता बोनस, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना अंतर्गत राशि, किसान क्रेडिट कार्ड, सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त नियद नेल्लानार हितग्राहियों को प्रमाण पत्र, स्व सहायता समूह चक्रीय निधि, आय, जाति-निवास प्रमाण पत्र और युवाओं को खेल सामग्री का वितरण किया।
 
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए विभागीय स्टालों का निरीक्षण कर वन अधिकार प्रमाण पत्र, विश्वकर्मा योजना का प्रमाण पत्र, ई रिक्शा का वितरण सहित अन्य योजनाओं के लाभार्थियों का सामग्री वितरण किया। कार्यक्रम में बस्तर के कमिश्नर श्री डोमन सिंह, आईजी श्री सुंदरराज पी., कलेक्टर श्री संबित मिश्रा, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव, सीईओ जिला पंचायत श्री हेमंत रमेश नंदनवार सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी, गणमान्य जनप्रतिनिधि, नागरिकगण उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों के जवानों के साथ किया संवाद

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने बीजापुर प्रवास के दौरान विश्रामगृह में आत्मसमर्पित नक्सली एवं नक्सली हिंसा से पीड़ित युवाओं से संवाद किया। ये युवा छत्तीसगढ़ शासन के पुनर्वास नीति के तहत पुलिस विभाग में भर्ती होकर माओवादियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने नक्सल संगठन को छोड़कर पुनर्वास नीति से लाभान्वित होने वाले युवाओं से मिलकर खुशी जाहिर की और कहा कि बस्तर अब शांति की ओर अग्रसर है। 
 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विगत दिवस नक्सलियों की हिंसा के शिकार 55 से ज्यादा नक्सल पीड़ितों ने दिल्ली जाकर महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु एवं केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह से मिले और नक्सलवाद के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सली हिंसा के शिकार लोगों की बातों को सुनकर बहुत ही दुख लगा कि निर्दाेष लोग हिंसा के शिकार हो रहे हैं।
 
मुख्यमंत्री साय से संवाद के दौरान नक्सली पीड़ित नव आरक्षक सुमित्रा ने बताया कि उनके पिता की नक्सलियों द्वारा हत्या कर दी गई थी। छत्तीसगढ़ शासन के पुनर्वास नीति के तहत वे आरक्षक के पद पर नियुक्त हुए है। शासन के पुनर्वास नीति नक्सल पीड़ित परिवार के लिए वरदान साबित हो रही है। 
 
वहीं चेरकंटी निवासी मंगल मोड़ियम पूर्व में 19 वर्षों तक नक्सल संगठन में शामिल था। माओवादियों के खोखली विचारधारा को छोड़कर आत्मसमर्पण किया, जिन्हें पुनर्वास नीति के तहत पुलिस विभाग में नियुक्ति मिली। मंगल मोड़ियम ने बताया कि बस्तर, बीजापुर में शांति स्थापित होना जरूरी है। भोले-भाले आदिवासियों का नक्सलियों द्वारा जल, जंगल, जमीन के नाम पर गुमराह किया जाता है।
 
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद  महेश कश्यप, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, बस्तर कमिश्नर  डोमन सिंह बस्तर आईजी सुंदरराज पी, कलेक्टर  संबित मिश्रा, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, सीईओ जिला पंचायत श्री हेमंत रमेश नंदनवार उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा में 167 करोड़ 21 लाख रुपए के विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज दंतेवाड़ा जिले के प्रवास के दौरान जिले में 167 करोड़ 21 लाख रुपए के विकास कार्यों की लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इसमें लोकार्पण के तहत जिला दन्तेवाड़ा के विकासखण्ड कुआकोण्डा में शासकीय उपाधि महाविद्यालय में अध्ययनरत् छात्रों हेतु 100 सीटर कन्या छात्रावास भवन निर्माण कार्य 272.450 लाख रू., दन्तेवाड़ा में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण 99.000 लाख रू., 100 सीटर छात्रावास भवन का निर्माण कार्य दन्तेवाड़ा 160.000 लाख रू., बुढ़ा तालाब बारसूर में सौंदर्यीकरण कार्य विकासखण्ड-गीदम 453.000 लाख रू., शंकनी-डंकनी नदी तट पर घाट निर्माण 3659.700 लाख रू., 500 सीटर आवासीय विद्यालय कारली के भवन निर्माण कार्य विद्युतीकरण सहित वि.ख.-गीदम 487.150 लाख रू., एनीकट निर्माण कार्य कटेकल्याण पुजारी पारा डुमाम नदी पर 350.000 लाख रू., दुगेली एनीकट निर्माण कार्य 372.940 लाख रू., प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छिन्दनार का निर्माण कार्य 75.000 लाख रू., उप स्वास्थ्य केन्द्र हिड़पाल का निर्माण कार्य 28.510 लाख रू. के विभिन्न कार्यों का लोकार्पण शामिल है। 
 
इसी प्रकार भूमिपूजन के अन्तर्गत आस्था विद्या मंदिर किरन्दुल हेतु भवन निर्माण, कर्मचारी हेतु आवास, छात्रावास भवन सड़क नाली बाउंड्री निर्माण आदि 4219.000, जिला दन्तेवाड़ा के रानीबाग में भवन निवास के भूतल एवं प्रथम तल का निर्माण कार्य 326.570, मड़कामीरास में 50 सीटर आदिवासी प्री. मे. कन्या छात्रावास निर्माण कार्य 191.510, जंगमपाल में 50 सीटर कन्या आश्रम का निर्माण कार्य 162.760, बड़ेगुडरा में 100 सीटर आदिवासी पो. मै.कन्या छात्रावास का निर्माण कार्य 288.590, मारजूम में 50 सीटर कन्या आश्रम का निर्माण कार्य 162.760, समेली में 100 सीटर आदिवासी पो. मै. कन्या छात्रावास का निर्माण कार्य  191.510, पालनार में 100 सीटर आदिवासी पो. मै. कन्या छात्रावास का निर्माण कार्य 288.590, ग्राम जावंगा में स्वीमिंग पुल निर्माण कार्य 221.040, जोगिंग ट्रैक एवं बाउंड्रीबॉल निर्माण कार्य 47.130, सामुदायिक भवन गीदम जावंगा में पार्क एवं ट्यूबवेल निर्माण कार्य 49.510, आदिवासी बालक आश्रम बोदली में कार्य 162.760, आदिवासी बालक आश्रम समेली में कार्य 162.760, आदिवासी बालक आश्रम नहाड़ी में कार्य 162.760, आदिवासी बालक आश्रम बुरगुग 162.760, आदिवासी बालक आश्रम पोटाली 162.760, आदिवासी बालक आश्रम कौरगांव 162.760 आदिवासी बालक आश्रम मुस्तलनार 162.760, आदिवासी बालक आश्रम गुमलनार 162.760 आदिवासी पो. मै. बालक छात्रावास गीदम 191.510, आदिवासी नवीन पो. मै. बालक छात्रावास गीदम 191.510, आदिवासी पो. मै. बालक छात्रावास कुआकोण्डा 191.510, आदिवासी पो.मे. बालक छात्रावास कासोली 191.510, आदिवासी पो. मै. कन्या छात्रावास कासोली 191.510, आदिवासी पो. मै. बालक छात्रावास दन्तेवाड़ा 191.510, आदिवासी पो. मै. कन्या छात्रावास दन्तेवाड़ा 191.510, कैडियापारा एनीकट (ग्राम पंचायत भूसारास) निर्माण कार्य 260.460, फरसपाल जलाशय योजना का जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य 255.770, चेक डेम निर्माण कार्य ग्राम झिरका पण्डेवार 49.990, झोडि़याबाड़म नदी पर एनीकट निर्माण कार्य 390.310, कामालूर से बासनपुर मार्ग पर पुलिया निर्माण 18.450, आर. सी. सी. स्लेब पुलिया निर्माण 03 स्पान 06 मी. स्पान बालूद से कुआपारा 49.560, पुलिया निर्माण कामालुर से बासनपुर आर. डी. 4. 05 मी. 41.300, आर. सी. सी. स्लेब पुलिया निर्माण 06 मी. स्पान बालूद से मंझारपारा 25.180, पुलिया निर्माण बालूद से टोटापारा मार्ग 30.160, डंकनी नदी पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण कार्य कि. मी. पोन्दुम से दाबपाल मार्ग पर 445.700, जिला दन्तेवाड़ा के ग्रामीण महिला एवं युवाओं के लिये आर्थिक अवसरों को उप्रेरित करने के लिये युवा हब संचालन कार्य 59.800, ग्राम पंचायत नहाड़ी के आश्रित ग्राम मुलेर में विद्युतीकरण कार्य 345.000 के कार्य शामिल हैं। 
 
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमनसिंह और वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद बस्तर महेश कश्यप, विधायक दंतेवाड़ा चैतराम अटामी, राज्य महिला आयोग के सदस्य ओजस्वी मण्डावी, डीआईजी श्री कमलोचन कश्यप, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, एसपी गौरव राय तथा जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों मौजूद रहे।
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अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर हुआ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं कार्यक्रम

 कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशन में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं योजना अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर 11 अक्टूबर 2024 तक कार्यक्रम आयोजन किया जा रहा है। 

जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं को अधिक अवसर प्रदान के महत्व पर प्रकाश डालना और बालिकाओं द्वारा शिक्षा, पोषण, कानूनी अधिकार, चिकित्सा देखभाल, भेदभाव, हिंसा और बाल विवाह से सुरक्षा में आनेवाले असमानताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु प्रतिदिन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसी तारतम्य में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं कार्यक्रम का आयोजन भीमा तालाब के पास सामुदायिक भवन जांजगीर में किया गया। जिसमें जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग अनिता अग्रवाल द्वारा कन्या भ्रूण हत्या, लिंग असमानता तथा कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दिया गया। साथ ही किशोरी बालिकाओं से कन्या भ्रूण हत्या से संबंधी प्रश्नोत्तरी भी किया गया।

नवरात्रि पर्व 2024 के दौरान 11 अक्टूबर 2024 तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। जिसमें महिला एवं बाल विकास विभाग की समस्त योजनाओं का प्रचार प्रसार करते हुए नवरात्री में मां दुर्गा के नौ रूपों के अनुसार जिले के सभी परियोजनाओं में तिथिवार कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि  5 अक्टूबर को पामगढ़ के बी.एड कालेज में योग, मेडिटेशन के प्रति जागरूकता एवं अभ्यास कार्यक्रम, 06 अक्टूबर को बलौदा के आंगनबाड़ी केन्द्र में वृहद स्तर पर गोदभराई का कार्यक्रम, 07 अक्टूबर को जिला बाल संरक्षण इकाई, सखी वन स्टाप सेंटर, नवाबिहान, समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों एवं जाज्वल्य देव कन्या महाविद्यालय जांजगीर में विकास के आयाम तथा पोषण एवं संरक्षण के प्रति जागरूकता संबंधी कार्यक्रम, 08 अक्टूबर को अकलतरा में पोषण एवं स्वास्थ्य के संबंध में शिविर, 09 अक्टूबर को नवागढ़ के महाविद्यालय में कार्यक्रम, 10 अक्टूबर को समस्त परियोजना एवं समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों में स्वच्छता एवं कन्या भोज का आयोजन एवं जांजगीर के ऑडिटोरियम में चौतन्य देवी एवं कराटे का आयोजन किया जाएगा।

 
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न्याय यात्रा से हम जनता के मुद्दे उठाने में सफल रहे : दीपक बैज

 छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की "न्याय यात्रा" का समापन 2 अक्टूबर को रायपुर में हुआ। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने राजीव भवन में एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने इस यात्रा को जनता के जख्मों पर मरहम बताते हुए कहा कि न्याय यात्रा ने सरकार की नाकामियों को उजागर किया और जनता के बीच कांग्रेस की मजबूती को स्थापित किया।


जनता की आवाज बनी न्याय यात्रा
दीपक बैज ने कहा कि इस यात्रा की शुरुआत 27 सितंबर को गुरू घासीदास की तपोभूमि से हुई थी और 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन राजधानी में इसका विराम हुआ। यात्रा ने कुल 125 किलोमीटर की दूरी तय की, जिसमें विभिन्न इलाकों के लोग शामिल हुए। यात्रा के दौरान 10 से अधिक पत्रकार वार्ताएँ और 150 से अधिक वन-टू-वन चर्चाएं हुईं, जिनके माध्यम से कांग्रेस नेताओं ने जनता की समस्याओं को उठाया।

सरकार की नाकामियों पर तीखे हमले
भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था बिगड़ चुकी है और अपराधी बेलगाम हो गए हैं। महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। बघेल ने कहा, "10 महीने की भाजपा सरकार ने जनता का भरोसा तोड़ा है।"

जनता से सीधा संवाद
टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि न्याय यात्रा ने जनता की तकलीफों को सीधे सामने रखा है। उन्होंने कवर्धा में कचरू की मौत के मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि सरकार की विफलताओं के कारण जनता न्याय के लिए भटक रही है। उन्होंने कहा, "यात्रा ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार जनता के हित में असफल रही है।"

यात्रा का समर्थन
यात्रा के दौरान पीड़ित परिवारों और विभिन्न समाजों ने कांग्रेस के इस अभियान का समर्थन किया। बलौदाबाजार की घटना से नाराज सतनामी समाज और अन्य समुदायों ने न्याय यात्रा में सक्रिय रूप से भाग लिया।

एकजुट कांग्रेस
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि न्याय यात्रा ने कांग्रेस के सभी नेताओं को एकजुट किया है। "इस यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि कांग्रेसजन एक परिवार की तरह मिलकर काम कर रहे हैं," महंत ने कहा।

यात्रा की सफलता
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह यात्रा केवल शुरुआत है। "न्याय यात्रा का अभी अंत नहीं हुआ है, बल्कि यह यात्रा अंजाम तक पहुंचेगी," दीपक बैज ने कहा।

इस अवसर पर पत्रकार नितिन चौबे के निधन पर मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

 

 

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युवा संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बीजापुर स्थित सेन्ट्रल लाइब्रेरी में युवा संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए, यहां उन्होंने युवाओं से सीधा संवाद किया। युवाओं से बातचीत के बीच मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रतिभाशाली युवाओ को आगे बढ़ने का पूरा अवसर दिया जाएगा, प्रदेश के युवाओं को अच्छे भविष्य के निर्माण की सम्भावनाएं मिल रही है। इस मौके पर युवाओं की मांग सुनकर मुख्यमंत्री ने बीजापुर कलेक्टर को आवश्यक निर्देश भी दिए| अब बीजापुर के युवाओं को जल्द ही शून्य प्रतिशत ब्याज में एजुकेशन लोन की सुविधा देने की पहल की जाएगी।  
 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर संवाद कार्यक्रम में युवाओं से मिलना एक शुभ अवसर है| मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार शिक्षा के लिए सजग है, प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना के साथ ही जिलों में लाइब्रेरी की सुविधा दी गई है। उन्होंने कहा कि रायपुर के नालंदा परिसर में प्रतियोगी परीक्षा के लिए विद्यार्थियों की सुविधाओं में वृद्धि की गई है| दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी के लिए संचालित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या बढ़ाई गई, पीजी में रहने वाले विद्यार्थियों की सुविधा का ध्यान रखते हुए उनका खर्च शासन द्वारा वहन किया जाएगा|
 
मुख्यमंत्री साय ने युवाओं के साथ उनके भविष्य, शिक्षा, और रोज़गार के मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार युवाओं के विकास और उन्हें बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। श्री साय ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया और सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी, जो उनके सशक्तिकरण में सहायक हो सकती हैं।
 
कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने भी मुख्यमंत्री से अपने सवाल पूछे और अपने अनुभव साझा किए। लाइब्रेरी में आयोजित इस युवा संवाद कार्यक्रम ने जिले के युवाओं को एक सकारात्मक मंच दिया, जहां वे अपनी समस्याओं को सीधे मुख्यमंत्री के सामने रख सकें और उनके समाधान के बारे में जान सकें। 
 
मुख्यमंत्री से बातचीत में युवा राकेश ताती ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र का होने के कारण, मेरी प्रारंभिक शिक्षा दूसरे गाँव में हुई, आज मेरे गाँव में पुलिस कैंप के साथ-साथ स्कूल भी खुल गए हैं। राकेश ने बताया कि मैं सहायक प्रोफेसर की तैयारी कर रहा है, लाइब्रेरी से तैयारी करने में बहुत सहायता मिलेगी|
 
रूखसार खान ने बताया कि जिले में अंग्रेजी माध्यम स्कूल खुलने से पढ़ाई का स्तर अच्छा हुआ है, रूखसार ने मुख्यमंत्री से बीएड-डीएड कॉलेज की खोलने की पहल मांग की| सामया हसरत ने साइंस विषय के लिए कॉलेज में प्रोफेसर की सुविधा के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया| 
 
ग्राम मेड के निवासी जगपति कुर्सा ने बताया कि गाँव सड़क, बिजली और अन्य विकास कार्य को गति मिल गई है। जगपति ने नीट-जेईई की तैयारी के लिए सेंट्रल लाइब्रेरी में कोचिंग की माँग रखी। पुजारी कांकेर निवासी लक्ष्मण ने बताया कि मेरे गाँव में पहले स्कूल नहीं था इसलिए मैंने अपनी पढ़ाई दूसरे गांव में जाकर की लेकिन मुझे ख़ुशी है कि अब मेरे गांव में स्कूल खुल गया है, अब गांव के बच्चे गांव में ही पढ़ रहे हैं| मुख्यमंत्री ने युवाओं की बात सुनकर उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया|
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06 महीनों में लोक निर्माण विभाग के 113.19 करोड़ रुपयों की 43 सड़क निर्माण कार्यों की मिली स्वीकृति

जशपुर जिले के विकास को नई उड़ान दिलाने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर नई विकास परियोजनाओं का आगाज हो रहा है। जिसके द्वारा जिले के विकास को गति मिल रही है। पिछले 06 माह में लोक निर्माण विभाग की 113.19 करोड़ रुपयों की 43 सड़क निर्माण परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गयी है। 
 
        जशपुर जिले के सभी विकासखंडों में आधारभूत संरचना के विकास के लिए मुहिम चलाई जा रही है ताकि जिले के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं की पहुंच को बढ़ाया जा सके। इसके लिए आवश्यक है कि उन क्षेत्रों में आधारभूत संरचनाओं का विकास किया जाए। इसके लिए आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान कर उनके लिए तीव्र गति से तकनीकी विश्लेषण द्वारा डीपीआर निर्माण कर तकनीकी स्वीकृति एवं प्रशासकीय स्वीकृति के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। जिसका परिणाम है कि विगत 06 माह में 43 सड़क निर्माण कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के साथ निविदा प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गयी है। कलेक्टर द्वारा मुख्यमंत्री श्री साय की मंशानुरूप सभी सड़क निर्माण कार्यों की निविदा प्रक्रिया जल्द से जल्द पूर्ण कर आगामी 01 वर्ष में सभी को पूर्ण कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिया गया हैं।
 
       लोक निर्माण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार के पत्थलगांव के अंतर्गत 73.30 करोड़ रुपयों के 25 सड़क मार्गों का निर्माण किया जाना है। जिसमें 10.94 करोड़ की लागत के एन.एच.43 से बिच्छीकानी ढुढरूपारा से जमरगी तक 8 किमी सड़क मार्ग, 7.98 करोड़ रूपए लागत के बगीया से सूजीबहार तक के 8.70 किमी सड़क मार्ग, 5.57 करोड़ रूपए लागत के लैलूंगा, कोतबा से लवाकेरा तक के 5.18 किमी सड़क मार्ग, 4.28 करोड़ लागत के 3.5 किमी के कांसांबेल मुसकुटी तक सड़क मार्ग, 4.03 करोड़ रूपए लागत के बाबूसाजबहार से गोलीडीह नदी तक सड़क मार्ग, 3 करोड़ रूपए लागत के 1.2 किमी के करजटोली से रजौटी तक सड़क मार्ग सहित 25 सड़क मार्गों का निर्माण कराया जाएगा।
 
        लोक निर्माण विभाग के जशपुर के कार्यपालन अभियंता श्री विरेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया कि जशपुर में 39.89 करोड़ रुपयों के 18 सड़क मार्गों का निर्माण किया जाना है। जिसके लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। जिसमें 3.39 करोड़ लागत के चांडीडांड हत्ता हल्काटोली तक के 2.36 किमी सड़क मार्ग, 4.75 करोड़ लागत के एस.एच 17 मुख्य मार्ग से ढोगाअम्बा जामचुआ तक 3.26 किमी सड़क मार्ग, 3.6 करोड़ रूपए लागत के बनकोम्बों से घटमुंडा तक के 3.4 किमी सड़क मार्ग, 2.57 करोड़ रूपए लागत के बालाछापर आरा सकरडेगा से छोटाबनई तक के 2.4 किमी सड़क मार्ग, 2.45 करोड़ रूपए लागत के एन.एच. 43 खड़सा से कोमड़ो तक के 1.94 किमी सड़क मार्ग, 2.38 करोड़ रूपए लागत के भुड़केला से लवानदी पुल तक के 2.10 किमी सड़क मार्ग, 2.33 करोड़ रूपए लागत के खरवाटोली से बांधाटोली तक के 2 किमी सड़क मार्ग, 2.25 करोड़ रूपए लागत के बालाछापर आरा सकरडेगा से कारीताला तक के 2 किमी सड़क मार्ग, 2.29 करोड़ रूपए लागत के बहराखैर से जुड़वाईन तक के 1.63 किमी सड़क मार्ग सहित 18 मार्गों का निर्माण कराया जाएगा।
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05 और 06 अक्टूबर को राजधानी में होगा भव्य सैन्य प्रदर्शनी समारोह भीष्म टी-90 टैंक सहित अन्य आर्टिलरी पहुंचे राजधानी

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर आयोजित होने वाले भव्य सैन्य समारोह के लिए आज राजधानी रायपुर पहुंचे भारतीय सेना के भीष्म टैंक और अन्य आर्टिलरी का शानदार स्वागत किया गया। इसके बाद एक रैली के रूप में टैंक एवं सैन्य उपकरणों का काफिला रायपुर शहर के तेलीबांधा, मरीन ड्राइव, कलेक्ट्रेट, जयस्तंभ और आश्रम चौक होते हुए साइंस कॉलेज मैदान तक मैदान पहुंचा। शहर के नागरिकों में इसे लेकर ख़ास उत्साह रहा। सैकड़ों लोग इस शानदार रैली को मोबाइल से कैप्चर करते दिखे। पूरे रैली में शामिल वाहनों में तिरंगा लहराता रहा। 

 
गौरतलब है कि राजधानी के साइंस कॉलेज मैदान में 05 से 06 अक्टूबर को होने वाले भव्य सैन्य प्रदर्शनी समारोह की तैयारी जोरों पर है। इसमें शामिल होने के लिए भारतीय सेना की सैन्य हथियार आज राजधानी पहुंचे, जिसमें भीष्म टी-90 टैंक, बीएमपी, एल-70, जेएडयू-23, स्ट्रेला और लोरोस शामिल हुए। इसका इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ज़ोरा के मुख्य गेट पर सुबह कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, एसएसपी श्री संतोष सिंह, नगर निगम आयुक्त श्री अबिनाश मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ श्री विश्वदीप सहित अन्य अधिकारियों ने स्वागत किया। भीष्म टैंक और दूसरे सैन्य उपकरणों को वाहनों सहित फूल-मालाओं से सजाया गया था। लोगों ने इस आकर्षण क्षण को अपनें मोबाईलों में फोटो और वीडियों के रूप में रिकार्ड किया। जहां से भी यह काफिला गुजरा, वहां ’भारत माता की जय’ के जयकारों से गूंज उठा। 
 
साइंस कॉलेज मैदान में सैनिको ने किया रिहर्सल-
साइंस कॉलेज मैदान में सैनिको ने डेयर डेविल स्टंट और खुखरी डांस और मिलेट्री बैंड का पूर्वाभ्यास किया।
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छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर स्थानीय अवकाश घोषित

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आगामी 01 नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त शासकीय कार्यालयों और संस्थाओं के लिए स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है। यह स्थानीय अवकाश बैंक, कोषालय, उपकोषालय एवं अन्य वित्तीय संस्थान के लिए लागू नहीं होगा। इस संबंध में आज यहां सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है।
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मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना से जया के जीवन में आया बदलाव

भारी मशीनरी की खनक-खनक की आवाज़ से अभ्यस्त होने में कुछ समय लग सकता है। शुरू में जया को फैक्ट्री के जीवन की सटीकता और गति डरावनी लगी। याद रखने के लिए नियम थे, अनुसरण करने के लिए कदम थे और सम्मान करने के लिए पदानुक्रम थे। 38 साल की उम्र में, कोविड-19 की पहली लहर के दौरान अपने पति की अचानक मृत्यु के बाद, जया को एक ऐसी भूमिका में धकेल दिया गया था, जिसके लिए किसी ने उसे तैयार नहीं किया था। जया की कहानी महिलाओं को सशक्त बनाने और समुदायों को बदलने में लेबर हेल्पलाइन और लेबर रिसोर्स सेंटर के दूरगामी प्रभाव का प्रमाण है। छत्तीसगढ़ श्रम विभाग को यूएनडीपी के संसाधन, विशेषज्ञता और सहायता ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
 
जया ने कहा, जब मेरे पति का निधन हुआ, तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं घुटन भरे अंधेरे में घिर गई हूं, जिससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल पा रहा है। पति की मृत्यु के बाद जीवन आर्थिक कठिनाइयों और सामाजिक कलंक से भरा हुआ था, जो अक्सर भारतीय समाज में विधवा होने के साथ होता है। जया दुख और अविश्वास के सागर में डूबी हुई थी। लेकिन जल्द ही उसे अपने पति के कर्ज की सच्चाई का सामना करना पड़ा। अनिश्चित वित्तीय भविष्य सामने था और जया जानती थी कि उसे चीजों को सही करने के लिए कार्यबल में प्रवेश करना होगा।
 
आशा की एक किरण रायपुर में स्थापित सीएम श्रमिक हेल्पलाइन (मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र) के रूप में सामने आई। वहां, जया को मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के बारे में पता चला, जो एक सरकारी योजना थी जो एक मृत मजदूर के परिवार को वित्तीय सहायता प्रदान करती थी। दयालु स्टाफ सदस्यों ने जया को सरकारी योजना की जटिलताओं को समझने में मदद की और उसे 1,00,000 रुपये की सहायता राशि दिलाने में सहायता की।
 
यह रकम उनकी जीवनरेखा बन गई और कर्ज चुकाने में मदद की। उन्होंने कहा, मेरे पति की अचानक मृत्यु हो गई थी, इसलिए यह योजना बहुत मददगार रही। कर्ज चुकाने के बीच में ही इस योजना ने उन्हें बचाया। जिस दिन जया कर्ज मुक्त हुईं, उनकी सोच बदल गई। उन्हें न केवल राहत मिली, बल्कि आगे बढ़ने का दृढ़ संकल्प भी मिला। जया ने तय किया कि अब समय आ गया है कि वह अपने घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर काम पर लग जाएं।
 
खस्ता मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में फैक्ट्री की नौकरी के पहले दिन उसके हाथ-पैर कांप रहे थे। मशीनरी और निर्माण प्रक्रिया डराने वाली थी, लेकिन जया ने पहले भी कई चुनौतियों का सामना किया था। धीरे-धीरे, मुस्कुराते हुए, सौम्य सहकर्मियों की मदद से, जया ने अपनी नई भूमिका को अपनाया।
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जल जीवन मिशन के संचालक डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे ने किया कार्यों का निरीक्षण

 जल जीवन मिशन के संचालक डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे ने कांकेर और कोंडागांव जिले में मिशन के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने कांकेर जिले के चारामा विकासखंड के ग्राम रतेडीह, कुरुटोला, कानापोड़ एवं डेढ़कोहका में विभागीय अधिकारियों के साथ कार्यों का निरीक्षण किया और आवश्यक निर्देश दिए। डॉ. भुरे ने कोंडागांव जिले के केशकाल विकासखंड के गुलबापारा में भी मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का अवलोकन किया।
 
जल जीवन मिशन के संचालक डॉ. भुरे ने इन गांवों में मिशन के तहत बनाए गए उच्च स्तरीय जलागार, सोलर आधारित योजना, नल कनेक्शन, पाइपलाइन एवं अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की। उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा कर नल के माध्यम से जल आपूर्ति की जानकारी ली। डॉ. भुरे ने विभागीय अधिकारियों को जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिए। मिशन के कार्यों के निरीक्षण के दौरान उनके साथ  लोक स्वास्थय यांत्रिकी विभाग के कोंडागांव मंडल के अधीक्षण अभियंता श्री जी.एल. लखेरा, कांकेर के कार्यपालन अभियंता श्री बी.एन. भोयर, कोंडागांव के कार्यपालन अभियंता श्री विरेन्द्र पाण्डेय, सहायक अभियंता श्री राजेश हिरकने, उप अभियंता श्री आर.पी. जोशी और कु० निभा कोर्राम सहित सरपंच एवं स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद थे।
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया प्रथम छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन का शुभारंभ, पारंपरिक हर्बल उत्पादों और लोक कला का किया अवलोकन*

 छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित साइंस कॉलेज ग्राउंड परिसर में आज *प्रथम छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया। कार्यक्रम में प्रदेश की पारंपरिक वन संपदा, औषधीय उत्पादों और सांस्कृतिक धरोहर को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल और प्रदर्शनी लगाई गई थी। मुख्यमंत्री ने इन स्टॉलों का भ्रमण कर उत्पादों की जानकारी ली और कलाकारों व कारीगरों के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप भी उपस्थित थे।

 
*पारंपरिक औषधियों की जानकारी प्राप्त की*  
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ वैद्य संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री दशरथ नेताम द्वारा प्रदर्शित पारंपरिक औषधियों का अवलोकन किया। श्री नेताम ने बताया कि ये औषधियाँ जंगलों से विशेष रूप से चुनकर लाई गई जड़ी-बूटियों से तैयार की जाती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत प्रभावी हैं। उन्होंने इन औषधियों की निर्माण प्रक्रिया और उनके उपयोग के लाभों पर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री ने इन पारंपरिक विधियों के संरक्षण और प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।
 
*महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की सराहना*  
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी मर्यादित संघ के स्टॉल पर जाकर विभिन्न वन-आधारित उत्पादों जैसे जशपुर के हैंडमेड ग्रीन टी, हर्बल च्यवनप्राश, और बस्तर क्षेत्र के आदिवासी समुदाय द्वारा तैयार किए गए शुद्ध हर्बल उत्पादों का अवलोकन किया। उन्होंने ‘हर्बल छत्तीसगढ़’ ब्रांड के तहत तैयार शहद, रागी-कोदो कुकीज, आँवला कैंडी, और जामुन रस जैसे उत्पादों को देखकर हर्ष व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा, “इन हर्बल उत्पादों को बढ़ावा देने से न केवल स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगा।”
 
*लोक कलाकारों के अनोखे प्रदर्शन की प्रशंसा*  
मुख्यमंत्री ने देवरी (आरंग) के मोहरी वादक श्री विशाल राम यादव और कोलिहापुरी, दुर्ग के चिकारा वादक श्री मनहरण दास बंजारे के लोक वाद्य प्रदर्शन का आनंद लिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पारंपरिक लोक कलाएँ हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं, जिन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने दोनों कलाकारों को उनके संगीत के प्रति समर्पण के लिए बधाई दी।
 
*रजवार कला के भित्ति चित्रों की सराहना*  
भित्ति चित्र कलाकार डॉ. शशिप्रिया उपाध्याय ने मुख्यमंत्री को उनकी टीम द्वारा बनाए गए भित्ति चित्रों के बारे में बताया, जिनमें रजवार कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की आदिम संस्कृति, लोक जीवन, और पारंपरिक वेशभूषा को दर्शाया गया है। उन्होंने कहा कि रजवार कला का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को जीवित रखना और इसे नए आयाम देना है। मुख्यमंत्री ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि, "ऐसी लोककलाओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार से हमारी सांस्कृतिक धरोहर का भविष्य सुरक्षित रहेगा।"
 
*दिव्यांग बच्चों की कला का सम्मान*  
मुख्यमंत्री ने शासकीय दिव्यांग महाविद्यालय, माना कैम्प के मूक-बधिर विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई चित्रकला प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इस दौरान छात्र धनदास बरमते ने स्वनिर्मित लोककला आधारित चित्र मुख्यमंत्री को भेंट किया। मुख्यमंत्री ने इस उपहार को स्वीकारते हुए धनदास की कला की प्रशंसा की और कहा, "आपकी यह कला हमारी संस्कृति को नई पहचान देने का कार्य करेगी।" उन्होंने धनदास के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
 
*45 वर्षों से पारंपरिक वाद्य यंत्रों का संरक्षण कर रहे श्री रिखि क्षत्रिय का अभिनंदन*  
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वाद्य यंत्रों के संरक्षण में योगदान देने वाले श्री रिखि क्षत्रिय ने मुख्यमंत्री को अपनी यात्रा के बारे में विस्तार से बताया। श्री क्षत्रिय ने कहा कि वे पिछले 45 वर्षों से छत्तीसगढ़ी वाद्य यंत्रों—जैसे रुंजू बाजा, घूमरा बाजा और चिरई बाजा—का संरक्षण और प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी में पारंपरिक वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। श्री क्षत्रिय ने मुख्यमंत्री को रुंजू बाजा भेंट किया और अपने अद्भुत कौशल का प्रदर्शन करते हुए घूमरा बाजा से शेर की आवाज और चिरई बाजा से चिड़िया की आवाज निकालकर उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया। मुख्यमंत्री ने उनके इस अनूठे योगदान की सराहना की और कहा कि ऐसे कलाकार हमारी लोक परंपराओं के सच्चे रक्षक हैं।
 
*छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को मिला मंच*  
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा, “छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन जैसे आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर, पारंपरिक उत्पादों और हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करते हैं। ये आयोजन हमारे पारंपरिक ज्ञान और संस्कृति को सहेजने के साथ-साथ, इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी सहायक हैं।”
 
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कला प्रेमियों और स्थानीय निवासियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रयासों की सराहना की। साथ ही, मुख्यमंत्री ने सभी कलाकारों, कारीगरों, और प्रतिभागियों को प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित और संवर्धित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
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धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू करने पर पीएम को दिया धन्यवाद

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि महात्मा गांधी का सपना था कि जनजातीय समुदाय विकास की मुख्य धारा में शामिल हो और तरक्की करें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, महात्मा गांधी के इन्हीं सपनों को पूरा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने उक्त बातें धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के शुभारंभ अवसर पर वर्चुअली जुड़कर कही। 
 
यहां यह उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आज महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर झारखण्ड के हजारीबाग से देश के जनजातीय इलाकों एवं जनजातियों के उत्थान के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय इस कार्यक्रम में बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के राजपुर से वर्चुअली शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर उक्त अभियान के देशव्यापी शुभारंभ पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदाय की ओर से धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इससे छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदाय भी लाभान्वित होंगे और उनके जीवन में नया बदलाव आएगा। 
 
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से 80 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान कर 65 हजार से ज्यादा गाँव और 5 करोड़ से अधिक जनजातीय लोगों के कल्याण के लिए कदम बढ़ाया है। इससे छत्तीसगढ़ के 32 जिलों के 138 विकासखण्ड़ों में स्थित 6691 गाँवों में रहने वाली 47 लाख की आबादी को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ और जशपुर जिले के लिए गौरव का दिन है कि जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक की आदिवासी महिला मानकुंवर बाई को प्रधानमंत्री ने बातचीत के लिए अपने कार्यक्रम में आमंत्रित किया है। 
 
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की घोषणा की और घर-घर शौचालय निर्माण कराया। उन्होंने इसे महिलाओं के सम्मान से जोड़ा। इन शौचालयों को कई राज्यों में इज्जत घर के रुप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल विहारी बाजपेयी ने जनजातीय समाज के विकास के लिए अलग राज्य का निर्माण किया और अलग से जनजाति मंत्रालय का गठन और अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन किया। 
 
मुख्यमंत्री साय ने हम सभी स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा के माध्यम से 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक अभियान से जुड़े रहे। उन्होंने लोगों से स्वच्छता को आदत में शामिल करने की अपील की और कहा कि हमें अपने आसपास वातावरण को भी स्वच्छ रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अति पिछड़े विशेष पिछड़ी जनजाति की चिंता की और प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से जनजातीय इलाकों में मूलभूत सुविधाएं जैसे सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं से लोगों को लाभान्वित किया जा रहा है। 
 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार ने शपथ लेते ही अगले दिन से राज्य के गरीबों के कल्याण के लिए काम प्रारंभ कर दिया। प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत 18 लाख आवास की स्वीकृति प्रदान की जिसकी राशि अब हितग्राहियों के खाते में आने लगी हैं और घर निर्माण प्रारंभ हो गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने 3100 रुपये में क्विंटल में प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी, दो साल का धान के बकाया बोनस की राशि, तेंदूपत्ता प्रति मानक बोरा को 4 हजार से बढ़ाकर 5500 रुपये कर दिया। प्रदेश की 70 लाख महिलाओं के खाते में महतारी वंदन योजना से राशि दी जा रही है। विगत 9 माह के भीतर मोदी की गारंटी की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए गए।
 
सांसद श्री चिंतामणि महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि यहां आदिवासी समाज के साथ ही विशेष पिछड़ी जनजाति समाज के लिए पीएम जनमन योजना के तहत मुख्यमंत्री उनके उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं। सरकार जनजाति उत्थान के लिए सकारात्मक कदम उठा रही है। कार्यक्रम को सामरी विधायक श्रीमती उद्देशवरी पैकरा ने भी सम्बोधित किया। इस दौरान जिले की प्रभारी एवं महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक श्री प्रबोध मिंज, श्री राजेश अग्रवाल, श्रीमती शकुंतला पोर्ते, युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर सहित अन्य जनप्रतिनिधि तथा आम नागरिकगण उपस्थित थे। 
 
192 करोड़ रूपए के विकास कार्याें का लोकार्पण-शिलान्यास  
 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बलरामपुर-रामानुजगंज के राजपुर में आयोजित कार्यक्रम में 192 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले विकास एवं निर्माण कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने हितग्राहियों को पीएम आवास की चाबी, श्रम पंजीयन कार्ड अंतर्गत हितग्राहियों को चेक, वन अधिकार पट्टा, आपदा पीड़ितों को सहायता राशि, टीबी मुक्त घोषित 3 ग्रामों को प्रमाण पत्र, ट्रैक्टर, पशुधन विकास विभाग अंतर्गत दो हितग्राहियों को चेक प्रदान किया गया।
 
राजपुर में लिंक कोर्ट सहित कई घोषणाएं
 
मुख्यमंत्री साय ने सांसद एवं विधायकगणों के आग्रह पर बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के लिए अनेक विकास कार्यों की घोषणा की। उन्होंने नरसिंहपुर से मरकाडाड़ के मध्य महान नदी में पुल निर्माण, हायर सेकंडरी स्कूल राजपुर के लिए नवीन भवन का निर्माण, राजपुर ब्लॉक में उफिया में चन्दर मुसखोर नाला में पुलिया निर्माण तथा राजपुर में अपर कलेक्टर लिंक कोर्ट प्रारंभ करने की घोषणा की।
 
बिलासपुर और सरगुजा संभाग में कर्मा महोत्सव
 
मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में पंडो जनजाति की बहुलता को देखते हुए पंडो जनजाति के लिए 50-50 सीटर बालक-बालिका छात्रावास निर्माण की घोषणा की और बिलासपुर और सरगुजा संभाग में प्रतिवर्ष कर्मा महोत्सव का आयोजन कराए जाने की घोषणा की।
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