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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले पक्के आशियाने ने जीवन में लाई खुशहाली

जिला मुख्यालय कबीरधाम से 62 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पोलमी के निवासी श्री बाबूलाल के जीवन में एक नया अध्याय तब शुरू हुआ जब उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत अपना पक्का घर मिला। बाबूलाल, जो पहले कच्चे मकान में अपने परिवार के साथ रहते थे, बारिश के मौसम में परेशानियों का सामना करते थे। उनका पुराना घर कमजोर था, दीवारों में दरारें थीं, और छत से पानी टपकता था। हर बार मानसून का आना उनके लिए चिंता का सबब होता था। बाबूलाल की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे खुद से पक्का मकान बना सकें। उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा परिवार के दैनिक खर्चों में चला जाता था। लेकिन जब प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी उन्हें मिली, तो उन्होंने इस योजना के तहत आवेदन किया। कुछ समय बाद उन्हें योजना के तहत स्वीकृति पत्र प्राप्त हुआ और उनके सपनों का घर बनने की प्रक्रिया शुरू हुई।
श्री बाबूलाल ने बताया कि उन्हे वर्ष 2023-24 में आवास बनाने की स्वीकृति दी गई, इसके बाद बाबूलाल को अपने खुद के पक्का मकान की उमीद पूरी होती दिखाई देने लगी। उन्होने बताया कि जैसे ही पहली किश्त की राशि 40 हजार का अंतरण उनके बैंक खातों ऑनलाईन डी.बी.टी. के माध्यम से किया गया वैसे ही पक्का आवास बनाने का सफर शुरू हुआ। आवास निर्माण की राशि 2 लाख रूपये के साथ-साथ बाबूलाल को महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 95 दिवस की मजदूरी भुगतान की राशि 23 हजार 850 एवं स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रूपये की राशि सहित शासन की अन्य योजनांओ का लाभ अभिषरण के माध्यम से मिला।

श्री बाबूलाल ने पक्का आवास मिलने पर साय सरकार को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि “मैं दिल से सरकार का आभारी हूँ, जिसने हमें यह अवसर दिया। यह घर मेरे लिए एक सपना था जो आज साकार हो गया है। पहले हमें कच्चे मकान में हर समय बारिश और तूफान का डर सताता था, लेकिन अब हम सुरक्षित और आरामदायक घर में रह सकते हैं। बाबूलाल बताते हैं, “ये घर मेरे जीवन का सबसे बड़ा सपना था। सरकार की इस योजना की वजह से आज मैं अपने परिवार के साथ चौन से रह सकता हूँ। अब बारिश या तूफान की चिंता नहीं रहती। मेरे बच्चे अब सुरक्षित और सुखद माहौल में रह सकते हैं।“ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले इस पक्के आशियाने ने हमारे जीवन में स्थिरता और खुशहाली ला दी है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्रीसाय का धन्यवाद करता हूँ।
 
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शासन की योजनाओं से सपने हुए साकार,संतोषी के परिवार में आई खुशियां अपार

 विष्णु के सुशासन में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में नित नए कदम उठाए जा रहे है। बिहान की योजनाएं हो या महतारी वंदन योजना या कृषक मित्र आदि से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा रहा है। धमतरी के ग्राम पोटियाडीह की श्रीमती संतोषी हिरवानी को अब अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी की मदद की आवश्यकता नही है। बिहान के तहत  श्रीमती हिरवानी लखपति दीदी बन गई है। कृषक मित्र बनकर किसानों को जैविक खाद बनाने और उसका उपयोग करने को प्रेरित करती है। इसके साथ ही जैविक दवाइयों की बिक्री से श्रीमती हिरवानी को 2 हज़ार रुपए तक आमदनी हो जाती है।
      इसके अलावा संतोषी चिकन सेंटर का संचालन कर रहीं हैं, जिससे उन्हें 6 से 7 हजार रूपये तक की आमदनी हो रही है। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत मजदूरी और मनरेगा के तहत बने मुर्गी शेड में मुर्गियों का पालन करतीं हैं। वे बताती हैं कि इन सभी कामों से उसे साल में एक लाख रूपये से अधिक की आमदनी हो जाती है। इन सभी से होने वाली आमदनी का उपयोग वे अपने दोनों बच्चों को अच्छी सी अच्छी शिक्षा में देने के लिए करेंगी। श्रीमती संतोषी ने अपने जीवन में आये इस सुधार के लिए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद दिया है।
      श्रीमती संतोषी हिरवानी ने बताया कि उसे शासन की महत्वाकांक्षी योजना महतारी वंदन योजना का भी लाभ  मिल रहा है।  महतारी वंदन जैसी योजना के बलबूते छत्तीसगढ़ की गरीब महिलाओं में आत्मनिर्भरता की नींव धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। छत्तीसगढ़ के महिलाओं की खुशियों के पीछे आर्थिक सशक्तिकरण का यह आधार भी है। केवल 7 महीनों में ही विष्णु सरकार की महतारी वंदन योजना ने महिलाओं में ही नही अपितु उनके घर-परिवार में  खुशियों की  मिठास घोल दी है। इस योजना से महिलाओं का सम्मान भी बढ़ाने  के साथ-साथ  उनके जीवनशैली में परिवर्तन किया है। आर्थिक रूप से सशक्तिकरण ने परिवार के बीच रिश्तों की गाँठ को और भी मजबूती से बाँधना शुरू कर दिया है।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का जताया आभार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर करने के लिए पक्के घर बनाने और उपलब्ध कराने के लिए वर्ष जून 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की थी। इन घरों में शौचालय, बिजली, पीने का पानी, स्वच्छ ईंधन (एलपीजी) आदि जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने का प्रावधान है। जब लोग सक्रिय रूप से अपने घरों के निर्माण में भाग लेते हैं और इन सुविधाओं को प्राप्त कर लेते हैं तो उनका अपने घरों से एक मजबूत रिश्ता बन जाता है और वे भावनात्मक रूप से उससे जुड़ाव महसूस करते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना ने देशभर के कई आवासहीन परिवारों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है। बेघर परिवारों को इस योजना के माध्यम से मिल रहे पक्के मकान ने न केवल लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाया है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और स्थायी आवास भी प्रदान कर रही है। 
 
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ में अधिकाधिक पात्र लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। श्री साय के मुख्यमंत्री बनने के बाद कैबिनेट ने सबसे पहला काम राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 18 लाख मकान स्वीकृत करने का किया था और प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लागू करने के लिए राज्य शासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। 
 
प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाय) के अंतर्गत जगदलपुर वार्ड 30 की निवासी श्रीमती शोभा नाग का पक्का मकान बनाने का सपना साकार हो गया है। श्रीमती शोभा नाग ने इस योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का आभार प्रकट किया और कहा कि अब उनका परिवार सुरक्षित और सुविधाजनक पक्के मकान में रह सकेगा। श्रीमती नाग ने बताया कि आजीविका के लिए टिफिन बाँटने का काम करती है जिसमें तकरीबन चार हजार महीना आय प्राप्त होती है। आय कम होने से पक्का मकान बनाने में असमर्थ थे। कच्चा मकान में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, बच्चों के भविष्य को लेकर बहुत चिंता होती थी। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के अन्तर्गत मुझे योजना का लाभ पाने का अवसर मिला और अब मेरा खुद का आशियाना बन गया है।
 
सरगुजा जिले के अम्बिकापुर नगर निगम क्षेत्र की रहने वाली श्रीमती कौशल्या राम की जिंदगी कभी आसान नहीं थी। उनके पति स्व. श्री बिरजू राम की मृत्यु बीस साल पहले हो गई थी, जब उनके पांच छोटे-छोटे बच्चे थे। उस समय, कौशल्या के पास अपना और अपने बच्चों की परवरिश के लिए कोई आय नहीं थी। उन्होंने मजदूरी कर अपने परिवार की परवरिश की। उनकी आय इतनी नहीं थी कि वे अपने बच्चों को अच्छी जिंदगी दे सकें। उनका मकान कच्चा था, जो बारिश के मौसम में छत से पानी टपकता रहता था। कौशल्या ने कभी सोचा नहीं था कि उनका भी अपना पक्का मकान बनेगा। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनकी जिंदगी को खुशियों से भर दिया। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत, कौशल्या को अपना पक्का मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता मिली जिससे उन्होंने अपना पक्का मकान बनाया। उन्होंने पक्के मकान का सपना साकार करने के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री साय को बहुत-बहुत धन्यवाद दिया है
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राष्ट्रपति भवन में बस्तर के नक्सल पीड़ितों ने रखी अपनी पीड़ा, साय की संवेदनशील पहल का हुआ उल्लेख

राष्ट्रपति भवन में बस्तर के नक्सल पीड़ितों के लिए उम्मीदों भरा था। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र से आए 70 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल के तहत, अपनी पीड़ा को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने पहुंचा। उनके चेहरे पर वर्षों से झेले गए अत्याचार की छाप थी, लेकिन उनकी आंखों में अब उम्मीद की किरण भी नजर आ रही थी।
 
राष्ट्रपति से मुलाकात का उद्देश्य साफ था — नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों की समस्याओं को देश की सर्वोच्च शक्ति के सामने रखना और बस्तर को माओवाद के आतंक से मुक्त कराने की अपील करना। मुलाकात के दौरान पीड़ितों ने बताया कि कैसे माओवादी हमलों ने उनके जीवन को तबाह कर दिया है। 
 
बस्तरवासियों की व्यथा
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को अवगत कराया कि पिछले चार दशकों से बस्तरवासी माओवादी आतंक का दंश झेल रहे हैं। माओवादी हमलों में हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और सैकड़ों लोग अपंग हो चुके हैं। बारूदी सुरंगों और बम विस्फोटों ने उनके जीवन को तहस-नहस कर दिया है। विस्फोटों से न केवल शरीर को नुकसान पहुंचा है, बल्कि मानसिक रूप से भी वे पूरी तरह टूट चुके हैं। 
 
प्रतिनिधियों ने बताया कि माओवादियों ने उनके घर, जमीन और संस्कृति को भी बर्बाद कर दिया है। बस्तर में 8,000 से अधिक लोग पिछले ढाई दशकों में माओवादी हिंसा के शिकार हुए हैं। आज भी कई लोग नक्सलियों के डर के साये में जीने को मजबूर हैं। जहां देश के अन्य हिस्सों में लोग स्वतंत्रता का आनंद ले रहे हैं, वहीं बस्तर के लोग अपनी जमीन और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। 
 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल
प्रतिनिधिमंडल ने जब राष्ट्रपति के समक्ष अपनी बात रखी, तो उन्होंने खास तौर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व को सराहा। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को बताया कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल और नेतृत्व के कारण बस्तर में शांति बहाली और विकास के कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उनके नेतृत्व में बस्तर में न केवल नक्सल उन्मूलन के लिए प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं, बल्कि लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। उनके द्वारा शुरू की गई योजनाओं ने बस्तरवासियों में एक नई आशा जगाई है।
 
शांति और पुनर्निर्माण की अपील
बस्तर शांति समिति के प्रतिनिधिमंडल के नेताओं मंगऊ राम कावड़े और जयराम दास ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि बस्तर में शांति बहाल करने के लिए ठोस और निर्णायक कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि बस्तर कभी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांतिपूर्ण जीवन के लिए जाना जाता था, लेकिन माओवादी आतंक ने इस स्वर्ग को बर्बाद कर दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि बस्तर को माओवादी आतंक से मुक्त करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं, ताकि वहां फिर से शांति और सामान्य जीवन लौट सके।
 
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नक्सल पीड़ितों की व्यथा गंभीरता से सुनी और आश्वासन दिया कि सरकार बस्तर में शांति और विकास के लिए हरसंभव कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि बस्तरवासियों के बेहतर भविष्य के प्रति सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और जल्द ही उन्हें राहत मिलेगी।
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विशेष पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास के लिए शासन संकल्पित

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए संचालित पीएम जनमन योजना (प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाभियान) के चलते छत्तीसगढ़ राज्य के अति पिछड़े जनजातीय समुदाय तकदीर और इनकी बसाहटों की तस्वीर तेजी से बदलने लगी है। विशेष पिछड़ी जनजातियों के रहवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास होने लगा है। 
 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पीएम जनमन योजना के सफल क्रियान्वयन से राज्य के सभी विशेष पिछड़ी जनजातीय इलाकों में बुनियादी विकास एवं निर्माण के कार्य तेजी से कराये जा रहे है। राज्य में पीएम जनमन योजना को शुरू हुए अभी एक साल का भी अरसा पूरा नहीं हुआ है, फिर भी छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता के चलते इसके सार्थक परिणाम दिखाई देने लगे है।
 
बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत लिलौटी निवासी और पहाड़ी कोरवा परिवार की 42 वर्षीय रातियो अपने कच्चे मकान में पति व बच्चों के साथ रहती थी। उनके आय का जरिया खेती और मजदूरी है। उनके पास इतनी बचत भी नही हो पाती थी कि वह अपने परिवार के लिए पक्का आशियाना बना सके। उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि वो कभी अपने परिवार के साथ पक्के मकान में रह पाएंगे। उनके लिये पक्का मकान एक सपने जैसा था, लेकिन हम विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के लिए पक्का आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री जी ने पीएम जनमन योजना शुरूआत की। जिसके तहत उन्हें  वर्ष 2023-24 में पक्का आवास बनाने के लिए शासन से स्वीकृति मिली। शासन से अनुदान में मिली राशि से उन्होंने अपना पक्का मकान बना लिया। रतियों आज अपने परिवार के साथ पक्के आवास में खुशहाली के साथ रह रही हैं। उन्होंने बताया कि अपने घर के निर्माण में उन्होंने स्वयं अपने पति के साथ मजदूरी किया। मनरेगा के तहत उन्हें मजदूरी भी प्राप्त हुई। 
 
महासमुंद जिले के ग्राम मरौद निवासी बरसाती कमार मजदूरी का काम करते है। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने से कच्चे मकान में रहने को मजबूर थे। परंतु, उनकी किस्मत तब बदली जब उन्हें प्रधानमंत्री जन-मन आवास योजना के तहत पक्का घर मिल गया। उन्होंने बताया कच्चे घर में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। खास तौर पर बारिश में उनके घर में पानी भर जाता था, जिससे घर में रखा सामान खराब हो जाता था। उन्हें हर साल मकान की मरम्मत में बहुत पैसे खर्च करने पड़ते थे। उनके लिए मजदूरी करके अपने और अपने परिवार के लिए पक्का मकान बनवाना सपना ही था। जब ग्राम पंचायत द्वारा उन्हें बताया गया कि उनका नाम प्रधानमंत्री जन-मन योजना की आवास चयन सूची में आ गया है, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस योजना के तहत उन्हें तीन किस्तों में धनराशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी गई और काम के आधार पर उन्हें कुशल मजदूरी का भुगतान भी किया गया। इससे उन्होंने अपने पक्के घर का निर्माण पूरा किया और अब वे उसी घर में रहने लगे हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना ने उनके सपनों को साकार किया है और अब वह निश्चिंत होकर अपने घर में जीवन बिता रहे हैं। 
 
प्रधानमंत्री जन-मन आवास योजना के तहत मिले पक्के घर के लिए श्रीमती रातियो कोरवा और बरसाती कमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते है।
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पीएचई में इंजीनियर्स सहित 181 पदों पर भर्ती का मार्ग प्रशस्त

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर वित्त विभाग ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में इंजीनियर्स सहित अन्य पदों पर भर्ती को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से 181 रिक्त पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। नई भर्ती से विभाग के कामकाज की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था भी बेहतर होगी।
 
पीएचई विभाग में उप अभियंता, अनुरेखक, सहायक ग्रेड-3 सहित विभिन्न रिक्त पदों को भरने के प्रस्ताव को वित्त विभाग से स्वीकृति मिल गई है। इसमें उप अभियंता (सिविल) के 118, उप अभियंता (विद्युत/यांत्रिकी) के 10, अनुरेखक के 37, सहायक ग्रेड-3 के 02, केमिस्ट के 12 और वाहन चालक के 02 पद शामिल हैं।
 
नई भर्तियां न केवल विभाग की कार्यक्षमता को बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि इससे नागरिक सेवाओं में भी सुधार होगा एवं योजनाओं को निर्धारित समय में पूरा किया जा सकेगा। पेयजल की गुणवत्ता और आपूर्ति व्यवस्था भी बेहतर होगी। नल जल जैसी फ्लैगशिप योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सकेगा और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लोगों को निरंतर एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में सुगमता होगी।
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए - 


मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण, मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण तथा बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के पुनर्गठन आदेश में संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

राज्य मंत्रिमण्डल ने राज्य में गठित पांचों विकास प्राधिकरणों के पुनर्गठन आदेश में आंशिक रूप से संशोधन की मंजूरी दी है। इस संशोधन से पांचों प्राधिकरणों में जनप्रतिनिधित्व का दायरा काफी विस्तृत किया गया है। पांचों प्राधिकरणों में अब राज्य मंत्रिमण्डल के सभी मंत्रीगणों को सदस्य के रूप में शामिल करने के साथ ही संबंधित क्षेत्र के राज्यसभा, लोकसभा के सांसद एवं प्राधिकरण क्षेत्रों के जिला पंचायत अध्यक्षों को अब इसका सदस्य बनाया गया है। पांचों प्राधिकरणों में प्रमुख सचिव/सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। शेष सभी सदस्य यथावत रहेंगे। 

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण के पुनर्गठन आदेश में प्रस्तावित संशोधन को मंत्रिमण्डल ने मंजूरी दी, जिसके तहत मुख्यमंत्री प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं क्षेत्र के विधायक उपाध्यक्ष होंगे। इस प्राधिकरण में सदस्य के रूप में शामिल पूर्व में मात्र तीन विभागों के मंत्री के स्थान पर अब राज्य मंत्रिमण्डल के समस्त माननीय मंत्रीगणों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। प्राधिकरण क्षेत्र के राज्यसभा, लोकसभा के सांसद, प्राधिकरण क्षेत्र के जिला पंचायत अध्यक्ष प्राधिकरण के सदस्य होंगे। प्रमुख सचिव/सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग को प्राधिकरण के सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। प्राधिकरण के पुनर्गठन आदेश के अनुसार पूर्व में सदस्य के रूप में शामिल 35 विधायकगणों को और अन्य सदस्यों को यथावत रखा गया है। 

सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण 

सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के पुनर्गठन आदेश में संशोधन किया गया है। माननीय मुख्यमंत्री इस प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं क्षेत्र के विधायक (अ.ज.जा. आरक्षित) उपाध्यक्ष होंगे। पूर्व में सदस्य के रूप में शामिल आदिम जाति कल्याण विभाग मंत्री एवं वित्त मंत्री के स्थान पर अब राज्य मंत्रिमण्डल के समस्त मंत्रीगण  प्राधिकरण के सदस्य होंगे। प्राधिकरण क्षेत्र के राज्यसभा, लोकसभा के सांसद, प्राधिकरण क्षेत्र के जनजाति बाहुल्य जिलों के जिला पंचायत अध्यक्ष भी अब प्राधिकरण के सदस्य होंगे। आदिवासी विकास से जुड़े अधिकतम दो समाजसेवी व विशेषज्ञ (राज्य शासन द्वारा मनोनीत), मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव/सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग प्राधिकरण के सदस्य तथा मुख्यमंत्री जी के प्रमुख सचिव/सचिव प्राधिकरण के सदस्य सचिव होंगे। प्राधिकरण के पुनर्गठन आदेश के अनुसार इसमें सदस्य के रूप में शामिल 14 विधायकगणों को यथावत शामिल किया गया है। 

अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण 

माननीय मुख्यमंत्री इस प्राधिकरण के अध्यक्ष तथा विधायक (अ.जा. आरक्षित) प्राधिकरण के उपाध्यक्ष होंगे। राज्य मंत्रिमण्डल के दो मंत्रियों के स्थान पर अब राज्य मंत्रिमण्डल के सभी मंत्रीगणों, संबंधित क्षेत्र के राज्यसभा, लोकसभा के सांसद, प्राधिकरण के जिला पंचायत अध्यक्ष (अ.जा.), अनुसूचित जाति विकास से जुड़े अधिकतम दो समाजसेवी व विशेषज्ञ (राज्य शासन द्वारा मनोनीत), मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव/सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग प्राधिकरण के सदस्य तथा मुख्यमंत्री जी के प्रमुख सचिव/सचिव इस प्राधिकरण के सदस्य सचिव होंगे। अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के पुनर्गठन आदेश के अनुरूप सदस्य के रूप में शामिल किए गए 10 विधायकों को यथावत रखा गया है। 

मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण 

माननीय मुख्यमंत्री इस प्राधिकरण के अध्यक्ष तथा क्षेत्र के विधायक (अ.ज.जा. आरक्षित) उपाध्यक्ष होंगे। प्राधिकरण के पुनर्गठन आदेश में किए गए संशोधन के अनुसार अब दो मंत्रीगणों के स्थान पर राज्य मंत्रिमण्डल के समस्त मंत्रीगणों तथा प्राधिकरण क्षेत्र के राज्यसभा, लोकसभा के सांसद एवं जिला पंचायत अध्यक्ष को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इस प्राधिकरण में आदिवासी विकास से जुड़े अधिकतम दो समाजसेवी व विशेषज्ञ (राज्य शासन द्वारा मनोनीत), मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव/सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग को सदस्य के रूप मंे तथा मुख्यमंत्री जी के प्रमुख सचिव/सचिव इसके सदस्य सचिव होंगे। इस प्राधिकरण में पूर्व में सदस्य के रूप में शामिल 12 विधायकों को यथावत रखा गया है।
बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण 

माननीय मुख्यमंत्री जी इस प्राधिकरण के अध्यक्ष और प्राधिकरण क्षेत्र के निर्वाचित विधायक (अ.ज.जा. आरक्षित) इसके उपाध्यक्ष होंगे। पूर्व में सदस्य के रूप में शामिल मात्र दो मंत्रियों के स्थान पर अब राज्य मंत्रिमण्डल के समस्त मंत्रीगणों, प्राधिकरण क्षेत्र के राज्यसभा, लोकसभा के सांसद तथा प्राधिकरण क्षेत्र के जनजातीय बाहुल्य जिलों के जिला पंचायत अध्यक्ष को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। आदिवासी विकास से जुड़े अधिकतम दो समाजसेवी व विशेषज्ञ (राज्य शासन द्वारा मनोनीत), मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव/सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग इस प्राधिकरण के सदस्य तथा मुख्यमंत्री जी के प्रमुख सचिव/सचिव इसके सदस्य सचिव होंगे। प्राधिकरण में सदस्य के रूप में पूर्व में शामिल 12 विधायकगणों को यथावत सदस्य रखा गया है। 

मुख्यमंत्री जी के स्वेच्छानुदान मद से 262 व्यक्ति एवं संस्थाओं को 4 करोड़ 56 लाख 72 हजार रूपये स्वीकृत राशि का अनुमोदन किया गया। 

राज्य के शहरों के सुव्यवस्थित विकास और राज्य की विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मंत्रिपरिषद द्वारा एक बड़ा निर्णय लिया गया। जिसके तहत भूखण्डों का पुनर्गठन और प्रदेश में स्वीकृत विकास योजना के क्रियान्वयन हेतु शहरी विकास नीति (टी.डी.एस.) का अनुमोदन किया गया। इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने हेतु आवास एवं पर्यावरण विभाग को अधिकृत किया गया है।

प्रदेश में विकास योजनाओं में प्रस्तावित जनोपयोगी भूमि के समुचित रूप से विकास करने, अतिक्रमण तथा अवैध निर्माणों को हतोत्साहित करने एवं शहरी आबादी को आधुनिक नागरिक सुविधाओं के अभाव और असुविधाओं के निराकरण के लिए इस शहरी विकास नीति का निर्धारण किया गया है। नगर विकास योजना आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक अथवा अन्य प्रयोजन हेतु क्रियान्वित की जा सकेगी।

 
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मुख्यमंत्री भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित युवा उत्सव 3.0 में हुए शामिल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा राजधानी रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित युवा उत्सव 3.0 को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का नारा दिया है और वे हमेशा कहते हैं कि युवाओं को जॉब गिवर बनना चाहिए ना की जॉब सीकर।  निश्चित रूप से विकसित भारत बनाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी युवाओं पर है और इस लक्ष्य को पाने में छत्तीसगढ़ की युवाशक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है । 

           मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह खुशी की बात है कि आपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत की संकल्पना को अपने आयोजन की थीम बनाया है। युवा उत्सव के दौरान अलग-अलग विषयों को लेकर पैनल डिस्कशन होंगे, जिसमें युवाओं के लिए उद्यम में अवसर पर बात होगी। सीआईआई और यंग इंडियन्स की इस पहल से वर्तमान और भावी पीढ़ी को सफल उद्यमी बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत नए जमाने की प्रौद्योगिकी और रोजगार जरूरतों के मुताबिक स्किल डेवलपमेंट करने और शिक्षा देने की बात पर जोर दे रहा है। इसी कड़ी में हम प्रदेश के आदिवासीबहुल क्षेत्र के युवाओं को अब रोबोटिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे तकनीकी विषय पढ़ा रहे हैं। प्रदेश के स्कूलों में स्किल डेवलपमेंट का कोर्स शामिल करने से पढ़ाई के साथ ही बच्चे हुनरमंद भी हो रहे हैं।
          साय ने कहा कि हमारे साथ उद्योग जगत के लोग बैठे हैं। आप सभी जानते है कि प्रदेश में प्रशिक्षित कुशल इंजीनियरों की बहुत अधिक मांग है। इस मांग को पूरी करने हम छत्तीसगढ़ में नए प्रौद्योगिकी संस्थान आरंभ करने जा रहे हैं। इस बजट में हमने आईआईटी की तर्ज पर पांच सीआईटी आरंभ करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके पैदा कर रही है। जल्द ही स्वास्थ्य विभाग में 650 पदों पर मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी। एक हफ्ते पहले हमने पुलिस में विभिन्न पदों में भर्तियों के लिए स्वीकृति दी है। नालंदा की तर्ज पर हम सभी नगरीय निकायों में हाईटेक लाइब्रेरी बनवा रहे हैं। नवा रायपुर को हम आईटी हब के रूप में विकसित कर रहे हैं।
       मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने सिंगल विण्डो सिस्टम 2.0 लागू किया है और नई उद्योग नीति भी ला रहे है। छत्तीसगढ़ उद्यम क्रांति योजना के माध्यम से हम युवा उद्यमियों को बढ़ावा देंगे। इसके लिए प्रदेश के युवाओं को 50 प्रतिशत सब्सिडी के साथ ब्याजमुक्त ऋण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश मूलतः कृषि आधारित होने से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग क्षेत्र में विकास की बड़ी संभावनाएं है। छत्तीसगढ़ फूड प्रोसेसिंग का वैश्विक केंद्र बनेगा। हवाई कार्गाे सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि इन उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जा सके। 
         मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सरगुजा और बस्तर को विकास की मुख्यधारा में शामिल कर अर्थव्यवस्था को विस्तार दे रहे हैं। इन दोनों ही संभागों में आप लोगों के लिए बड़ी संभावनाएं हैं। दोनों ही जगहों में जैविक उत्पाद और लघु वनोपज को लेकर भी बड़ा काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए हम प्रदेश में कार्य कर रहे हैं। हमने अपना बजट वर्ष 2047 के विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्यों को देखते हुए तैयार किया है।साय ने कहा कि मुझे उम्मीद है हमारे छत्तीसगढ़ प्रदेश सहित देशभर का युवा राष्ट्र की मज़बूती में अपना योगदान देने में पीछे नहीं रहेगा। 
       इस अवसर पर संजय जैन,अनुजा भंडारी, गौरव अग्रवाल, श्वेता सहित सीआईआई छत्तीसगढ़ के पदाधिकारी उपस्थित थे।
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पारंपरिक खेती छोड़ डच रोज़ की खेती से हो रही मालामाल

 आज के समय में पारंपरिक खेती की तुलना में बागवानी या फूलों की खेती किसानों के लिए अधिक मुनाफा देने वाली खेती साबित हो रही है। मुख्य रूप से गुलाब की खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ रहा है। गुलाब की मांग पूरे वर्ष बनी रहती है। साथ ही त्योहारों, शादी समारोह व विभिन्न आयोजनों के समय इसकी मांग काफी बढ़ जाती है। धान की पैदावार के लिए पहचान रखने वाले छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा विकासखण्ड की कुमगरी की रहने वाली रजनी कंवर ने गुलाब की खेती करके एक मिसाल कायम की है और दूसरे किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनी है। रजनी ने विभागीय सहायता से डच रोज़ की खेती शुरू की और आज 30 हजार से अधिक की प्रतिमाह कमाई कर रही हैं। पिछले 5 माह में ही उसे 3 लाख से अधिक रूपए का शुद्ध मुनाफा हुआ है।

कुछ नया करने के इरादे ने रजनी का डच रोज़ की खेती की तरफ बढ़ाया रुचि -

रजनी बताती हैं कि वर्तमान समय में किसान को बेमौसम बारिश, तूफान, अतिवृष्टि, सूखा जैसी कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है साथ ही विभिन्न प्रकार के कीटों व बीमारियों से अपनी फसलों की रक्षा करनी पड़ती है। इतनी परेशनियों के बाद भी किसान को अपेक्षाकृत अधिक लाभ नहीं होता। उनके द्वारा पूर्व में भी अपनी जमीन पर धान की फसल उगाया जाता था, जिससे उन्हें अधिक आमदनी नही होती थी। रजनी व उनके पति श्री जय सिंह ने परम्परागत कृषि से अलग आधुनिक खेती कर अपने आय में वृद्धि करने की सोची। इसी दौरान लाभार्थी को नेशनल हार्टिकल्चर बोर्ड द्वारा डच रोज़ की खेती की जानकारी मिली। डच रोज़ कल्टीवेशन से लंबे समय तके होने वाले लाभ की सोच से उन्होंने इसका खेती करने का निश्चय किया और अपने जमीन पर पाली हॉउस तैयार कर गुलाब की खेती प्रारंभ की। उद्यानिकी विभाग द्वारा उनके हौसले को बढ़ाते हुए समय पर दस्तावेजों की पूर्ति कराई गई एवं नाबार्ड द्वारा 40 लाख का वित्तीय सहयोग प्रदान किया गया। जिसमें उन्हें 50 प्रतिशत अनुदान भी दिया जा रहा है। साथ ही पॉली हाऊस में ड्रिप, बोर, स्टोरेज रूम जैसी सुविधाएं भी प्रदान की गई है। समय समय पर विभाग द्वारा रजनी को आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाता है। रजनी द्वारा फरवरी 2024 में अपने 2600 वर्गमीटर लगभग 65 डिसमिल जमीन पर पॉली हाऊस का निर्माण कराकर डच रोज़ की खेती प्रारंभ की गई। जहां उन्होंने इसकी 22000 पौधे का प्लांटेशन किया। पॉली हाऊस के अंदर डच रोज़ की खेती करने से पौधों को सीधे सूर्य की रौशनी, बारिश, आंधी से सुरक्षा मिलती है। सूक्ष्म सिंचाई और टपक विधि से कम पानी में गुलाब की खेती में सफलता प्राप्त हो रही है। रजनी द्वारा किए गए गुलाब की खेती को देखने के लिए दूर-दूर से लोग भी आते हैं।

उनके फॉर्म में प्रतिदिन 40 से 50 किलो गुलाब कल्टीवेशन किए जाते है। मजदूरों द्वारा इन गुलाब को तोड़कर डिमांड अनुसार पैकेजिंग व सप्लाई किया जाता है। रजनी ने बताया कि इन पौधों की ठीक ढंग से देखभाल करने से इनसे 2-3 साल तक उत्पादन लिया जा सकता है। जिससे लंबे समय तक पौधों से लाभ मिलेगा।

गुलाब के उत्पादन के शुरुआत से ही बाजार में इसकी मांग आने से रजनी का उत्साह बढ़ा हुआ है। अपनी खुशी जाहिर करते हुए वे कहती है कि अपने पति जयसिंह के सहयोग व विभागीय मदद से उन्होंने डच रोज की खेती करने का बड़ा फैसला लिया है। जिसका अब उन्हें लाभ मिल रहा है। प्रतिमाह उसे मजदूरी भुगतान, दवाई, खाद सभी खर्चों के बाद भी औसतन 30-40 हजार तक का लाभ हो रहा है। वर्तमान में उनके द्वारा कोरबा, बिलासपुर, अम्बिकापुर में फूलो का विक्रय किया जा रहा है। साथ ही उनके द्वारा इवेंट ऑर्गेनाइजर, डेकोरेशन शॉप्स वालों से भी संपर्क किया जा रहा है। जिससे आगे चलकर बड़े पैमानों पर गुलाब का विक्रय किया जा सके। आने वाले त्यौहारों व शादी सीजन में बाजारों में फूलो की मांग बढ़ेगी जिससे उनके आय में और अधिक वृद्धि होगी।

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अवैध शराब बिक्री और रेत उत्खनन पर करें कड़ी कार्रवाई: दयालदास बघेल

  खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने महासमुंद जिला के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर शासन के योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। खाद्य मंत्री श्री बघेल ने बैठक में अधिकारियों को कड़े शब्दों में कहा कि अधिकारी-कर्मचारी शासन के मंशानुरूप कार्य करें। उन्होंने कहा कि जिले में अवैध शराब बिक्री, नशाखोरी और अवैध रेत उत्खनन पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने राशनकार्ड बनाने में गड़बड़ी करने वाले के विरूद्ध भी कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मंत्री श्री बघेल ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार के योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों को फिल्ड में जाकर वस्तुस्थिति की जानकारी लेने के निर्देश दिए।

मंत्री श्री बघेल ने कहा कि शासन की हर योजना का लाभ अंतिम पंक्ति के पात्र हितग्राहियों को मिले। आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब व्यक्ति शासन की किसी भी योजना से वंचित न हो, इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने महासमुंद प्रवास के दौरान अलग-अलग योजनाओं के तहत हितग्राहियो को सामग्री और उपकरण प्रदान किया।

समीक्षा बैठक में खाद्य मंत्री बघेल ने कहा कि ग्रामीणों की राजस्व प्रकरण एवं जमीन संबंधित समस्याओं का मौके पर निराकरण होना चाहिए। उन्होंने विवादित, अविवादित सीमांकन आदि प्रकरणों के निराकरण में तेजी लाने के निर्देश दिए। मंत्री श्री बघेल ने जिले की कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हुए पुलिस अधीक्षक से जिले में अवैध शराब और नशीली दवाइयों की अवैध बिक्री पर तुरंत कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आबकारी विभाग के साथ मिलकर पुलिस की टीम छापामार कार्रवाई करें और अवैध शराब बिक्री पर रोक लगाएं। खाद्य विभाग की समीक्षा में मंत्री श्री बघेल ने कहा कि पात्र व्यक्तियों का राशन कार्ड बनना सुनिश्चित हो। इसमें किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि बने हुए राशन कार्ड, जो अभी तक वितरित नहीं हुए हैं उन्हें एक सप्ताह के भीतर वितरण सुनिश्चित किया जाए। मंत्री श्री बघेल ने कहा कि इसी तरह राशन वितरण में गड़बड़ी भी स्वीकार नहीं की जाएगा। राशन का पूरा कोटा पीडीएस दुकानों में समय पर पहुंच जाए और वितरित भी हो जाए। इस संबंध में यदि राशन कार्ड लेनदेन में किसी तरह की शिकायत मिलती है तो संबंधित कर्मचारी के उपर निलंबन की कार्रवाई करें।

खाद्य मंत्री बघेल ने समीक्षा करते हुए धान खरीदी के लिए सभी आवश्यक इंतजाम करने के लिए तैयारी शुरू करने कहा है। उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए बारदाने की व्यवस्था, धान खरीदी में इंटरनेट कनेक्शन, कंप्यूटर और नापतौल उपकरणों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। जिन राशनकार्डों का नवीनीकरण नहीं हुआ है, उन राशनकार्डों का विधिवत सत्यापन की कार्यवाही जल्द पूरी करने निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने जिले में किए जा रहे विकास कार्यों की पावर पॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से जानकारी दी।

खाद्य मंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत किए गए कार्यों को पूर्ण करे और यह सुनिश्चित करें कि हर घर पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में अभी तक कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ है ऐसे कार्यां की जांच कराएं। मंत्री श्री बघेल ने आंगनबाड़ी केन्द्रों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्रों में भर्ती के लिए पारदर्शिता बरते और नियमानुसार नियुक्ति करें। मंत्री श्री बघेल ने यह भी कहा कि समस्त छात्रावास और स्कूलों में जाकर समय-समय पर बच्चों का स्वास्थ्य कैम्प आयोजित करें। चिरायु के टीम से स्वास्थ्य चेकअप कराएं और रिपोर्ट के पश्चात उपचार करें। बैठक में श्री बघेल ने कहा कि स्कूल मरम्मत के नाम पर गुणवत्ता में समझौता न हो। उन्होंने शेष निर्माण कार्यां को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं। वहीं स्वीकृत छात्रावासों को भी पूर्ण करने कहा गया।

मंत्री ने मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, स्वच्छ भारत मिशन, एनआरएलएम, आयुष्मान कार्ड विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही एकल शिक्षक वाले विद्यालय, जल जीवन अंतर्गत प्रगतिरत कार्यों सहित सड़कों की वस्तु स्थिति चर्चा कर कार्य में कसावट लाने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।

बैठक में सांसद रुपकुमारी चौधरी, महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव, सरायपाली विधायक चातुरी नंद, जिला पंचायत अध्यक्ष उषा पटेल, जिला पंचायत सदस्य वृन्दावती पाड़े, जनपद अध्यक्ष बसना रूखमणी पटेल, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह, पुलिस अधीक्षक आशुतोष सिंह, स्थानीय जनप्रतिनिधि और आला अधिकारी मौजूद थे।      

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संभाग आयुक्त ने एसडीएम एवं तहसील कार्यालय का किया निरीक्षण

 दुर्ग संभाग के आयुक्त सत्यनारायण राठौर ने  भिलाई-3 में तहसील कार्यालय एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने लोक सेवा केन्द्र, मॉडर्न रिकॉर्ड रूम के लिए आरक्षित कक्ष, तहसील न्यायालय एवं एसडीएम न्यायालय का अवलोकन किया। न्यायालय में प्रकरणों के निराकरण की प्रगति पर संभाग आयुक्त ने संतुष्टि प्रकट की। इस अवसर एसडीएम महेश सिंह राजपूत, तहसीलदार पवन ठाकुर एवं अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों द्वारा पुस्तकों को लापरवाहीपूर्वक रद्दी बनाने की घटना का तत्काल लिया संज्ञान

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कलेक्टर कान्फ्रेंस में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस को लेकर सख्त निर्देश अधिकारियों को दिए थे। मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार को लेकर कड़ाई जमीनी स्तर पर भी उतनी ही सख्त नजर आ रही है। इसकी बानगी एक बार फिर सरकार की त्वरित कार्रवाई से दिखती है। बीते दिनों छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा छापी गई शैक्षणिक सत्र 2024-25 की नई किताबों को कबाड़ में बेचे जाने का मामला सामने आया था।
 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सिलयारी स्थित रियल बोर्ड पेपर मिल में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा छापी गई वर्ष 2024-25 सत्र की नई किताबें के कबाड़ में बेचे जाने की घटना के प्रकाश में आने पर तत्काल गंभीरतापूर्वक संज्ञान लेते हुए अपर मुख्य सचिव रेणु पिल्ले को इस घटना की जांच के निर्देश दिए थे। जांच के उपरांत छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के महाप्रबंधक राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर प्रेम प्रकाश शर्मा की प्रथम दृष्टया लापरवाही परिलक्षित होने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत् तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
 
कलेक्टर एसपी कांफ्रेंस में कड़े तेवर दिखाने के बाद मुख्यमंत्री ने  निलंबन की इस कार्यवाही से यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक लापरवाही उन्हें बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं होगी।
 
छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम का मामला सामने आने पर इस घटना की जाँच का दायित्व मुख्य सचिव के पश्चात सबसे वरिष्ठ अधिकारी को देना यह स्पष्ट करता है कि इस राज्य में अब प्रशासनिक ढिलाई के दिन बीत चुके हैं । यदि किसी ने लापरवाही या भ्रष्टाचार किया, तो उस पर कार्यवाही अवश्य होगी। 
 
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों सीएम के रौद्र रूप कई प्रशासनिक निर्णयों में दृष्टिगोचर हुए हैं। सीएम शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों में बिलकुल भी लापरवाही नहीं चाहते। मुख्यमंत्री श्री साय ने शासकीय दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता बरतने वाले लापरवाह अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कारवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि  यह सुशासन की सरकार है और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के द्वारा अपने शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बर्दाश्त नही की जाएगी तथा लापरवाह अधिकारियों पर तत्काल कड़ी कारवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग में 650 पदों पर होगी जल्द भर्ती

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अस्पतालों में उन्नत चिकित्सकीय उपकरण के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती भी की जा रही है। 


मुख्यमंत्री के निर्देश के परिपालन में वित्त विभाग ने स्वास्थ्य विभाग में रिक्त विभिन्न 650 पदों पर भर्ती की अनुमति दे दी गई है। वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने बताया कि वित्त विभाग द्वारा स्वास्थ्य विभाग को स्टॉफ नर्स, टेक्नीशियन, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक, ड्रेसर, वार्ड व्वाय, वार्ड आया आदि के कुल 650 पदों पर भर्ती के लिए अनुमति प्रदान की गई है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर उक्त पदों की भर्ती की जाएगी। 
 
वित्त विभाग द्वारा स्टॉफ नर्स के 225, सायकेट्रिक नर्स के 5, ओ.टी. टेक्नीशियन के 15, डेंटल टेक्नीशियन के 5, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक पुरूष एवं महिला के 100-100, सहायक ग्रेड-3 एवं फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के 25-25, ड्रेसर ग्रेड-1 के 50,  तथा वार्ड व्वॉय एवं वार्ड आया के 50-50 इस प्रकार कुल 650 पदों पर भर्ती के अनुमति स्वास्थ्य विभाग को दी गई है।
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91 वर्षीय बुजुर्ग ने पेश की अद्भुत मिसाल

रायपुर के अश्विनी नगर में रहने वाले 91 वर्षीय गौरीशंकर अग्रवाल लंबे समय से वकालत के  पेशे में संलग्न हैं। बौद्धिक क्षमता के धनी श्री अग्रवाल छत्तीसगढ़ में ग्राम सभा के उपर किताब भी लिख चुके हैं। आज के समय में जब हर इंसान संपत्ति बनाने और बचाने की कोशिश में लगा हुआ है, अग्रवाल ने इन सबसे उपर उठकर अपनी संपत्ति को  राष्ट्रहित में दान करने की पेशकश की है।
 
 अग्रवाल ने आज स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मुलाकात की और अपनी मंशा के अनुरूप बलौदाबाजार जिले में स्थित अपनी 38 डिस्मिल की संपत्ति को जनहित में स्वास्थ्य कार्यों के इस्तेमाल के लिए अस्पताल बनाने के उद्देश्य से दान करने की इच्छा जताई। स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने अग्रवाल के इस फैसले की तारीफ करते हुए पुष्प गुच्छ देकर उनका सम्मान किया। स्वास्थ्य मंत्री ने अग्रवाल की मंशा के अनुरूप आगे की कार्यवाही के लिए बलौदाबाजार कलेक्टर को निर्देश दिया है ताकि विधि सम्मत आगे की कार्यवाही की जा सके।
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बच्चे के इलाज के लिए चिंतित पिता की जनदर्शन में दूर हुई चिंता

जनदर्शन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को रायपुर के गुढ़ियारी के रमण मंदिर वार्ड से आए रोशन साहू ने बेटे के इलाज के संबंध में आवेदन दिया। उन्होंने बताया कि उनका बेटा 8 साल का लक्ष्य एस्ट्रॉफी ऑफ़ ब्लैडर बीमारी से पीड़ित है। 
     मुख्यमंत्री ने रोशन साहू की पूरी बात को गंभीरता से सुना और उन्हें ईलाज के लिए 25 हज़ार रुपए का चेक प्रदान किया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को लक्ष्य के स्वास्थ्य के संबंध में ध्यान रखे और इलाज की उचित व्यवस्था करें तथा इस संबंध में आ रही दिक्कतों को दूर करने के निर्देश दिए। 
 
 रोशन साहू ने बताया कि जब इस बात की जानकारी मिली कि अहमदाबाद सिविल अस्पताल में ऑस्ट्रेलिया फाउंडेशन द्वारा इस बीमारी का मुफ्त इलाज होता है तो वे वहां भी गए लेकिन वहां बताया गया कि अहमदाबाद इसके लिए नियमित रूप से जाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, अहमदाबाद जाने में काफी खर्च होता है। ऐसे में मदद के लिए मुख्यमंत्री जनदर्शन में आए हैं। 
लक्ष्य के पिता रोशन साहू ने मुख्यमंत्री का जनदर्शन में आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मैं बच्चे का लंबे समय तक इलाज करते हुए परेशान हो गया था और हिम्मत हार चुका था अब मुख्यमंत्री के मिलने के बाद नई उम्मीद मिली है।
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आईटीआई की पढ़ाई कर रहे राजूराम वाचम को मुख्यमंत्री के हाथों मिली मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के हाथों बीजापुर के रहने वाले राजूराम वाचम को जनदर्शन में मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल मिली। वे कंप्यूटर ट्रेड में आईटीआई कर रहे हैं।  पोलियो के कारण चलने उन्हें दिक्कत होती है। मुख्यमंत्री से मिल कर उनकी यह तकलीफ अब काफी हद तक आसान हो गई है। इससे राजू राम काफी खुश है। अब उनके लिए हीरापुर आईटीआई का 11 किलोमीटर का सफर आसान हो जाएगा। दरअसल राजूराम बीजापुर के रहने वाले हैं। जन्म के तीन वर्ष बाद ही उन्हें पोलियो हो गया था। बीजापुर से बारहवीं तक की पढ़ाई करने के बाद आईटीआई करने रायपुर आए हैं। रायपुर में राजूराम सुंदरनगर में रहते हैं, जहां से हीरापुर आईटीआई की दूरी 11 किलोमीटर है। राजूराम ने पिछले जनदर्शन में मोटराइज्ड ट्रायसायकल के लिए मुख्यमंत्री को आवेदन दिया था। मुख्यमंत्री ने राजूराम को मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्रदान करने की तत्काल स्वीकृति दे दी थी। जिसके तहत आज राजूराम को   मोटराइज्ड ट्रायसायकिल प्रदान की गई।
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आबकारी सचिव ने ली आबकारी विभाग की समीक्षा बैठक

 राज्य शासन के आबकारी विभाग की सचिव आर संगीता ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष में कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी की उपस्थिति में आबकारी विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों से मदिरा दुकानों में संलग्न सेल्स मेन की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि वे जिले की सभी दुकानों का निरीक्षण करें और ध्यान रखे कि किसी भी दुकान में निर्धारित कीमत से ज्यादा कीमत पर मदिरा विक्रय ना किया जाए। साथ ही मदिरा दुकानदार को वर्दी में रहने के निर्देश दिए। आबकारी अधिकारी को हर महीने दुकानों का ऑडिट करने को कहा। सेटअप के संदर्भ में उन्होंने आश्वासन दिया कि विभागीय पदोन्नति एवं रिक्त पदों को भरने की कार्यवाही शीघ्र ही किया जाएगा। बैठक में प्रबंध संचालक  श्याम धावरे, एसपी  जितेन्द्र शुक्ला, सहायक कलेक्टर एम.भार्गव, आबकारी अधिकारी राजेश जायसवाल सहित आबकारी विभाग के अधिकारी मौजूद थे।

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वन भूमि को बेजा कब्जा से मुक्त कराने कार्रवाई जारी

 वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर राज्य में वन भूमि से बेजा कब्जा खाली कराने तथा वन्य अपराध की रोकथाम के लिए वन विभाग की उड़नदस्ता टीमों के साथ-साथ विभागीय अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार कार्रवाई कर रहे है। 

जगदलपुर के अंतर्गत वन परिक्षेत्र भानपुरी में वन भूमि में बेजा कब्जा कर खेती करने के मामले में 23 लोगों के विरूद्ध वन अपराध का मामला दर्ज करने के साथ ही 26 एकड़ 29 डिसमिल वन भूमि में विभिन्न प्रकार की खड़ी फसलों सहित चैनलिंक, फेंसिंग खुटा, बारवेेड वायर आदि जब्त किया गया है। उड़नदस्ता टीम द्वारा यह कार्रवाई भानपुरी परिक्षेत्र में वन भूमि पर बेजा खेती किए जाने की शिकायत मिलने पर जगदलपुर वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक श्री आर.सी. दुग्गा एवं वनमण्डलाधिकारी बस्तर श्री उत्तम गुप्ता के मार्गदर्शन में उड़नदस्ता टीमों ने दबिश दी और वन भूमि पर बेजा खेती करने का मामला सामने आने पर 23 लोगों के विरूद्ध वन अपराध का मामला कायम कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जगदलपुर के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की कार्रवाई की है। 

राज्य स्तरीय उड़न दस्ता टीम ने भानपुरी वन परिक्षेत्र के चपका कक्ष में तीन व्यक्तियों द्वारा 1.81 एकड़ भूमि पर बेजा कब्जा कर मिर्ची एवं धान की खेती किए जाने का मामला पकड़ में आने पर फसल की जब्ती के साथ ही विकास देवांगन पिता अनिल देवांगन, राजू पिता सोमारू, तुलसी पिता मीठू के विरूद्ध मामला दर्ज किया गया है। उड़नदस्ता टीम ने यहां से 8 बंडल चैनलिंक एवं 73 नग बांस का फेंसिंग खुंटा भी जब्त किया है। 

वृत्त स्तरीय उड़न दस्ता टीम जगदलपुर ने ग्राम मुरकुची में 20 अतिक्रमणकारी के विरूद्ध कार्यवाही करते हुये 24.47 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण कर मक्का और उड़द की खड़ी करने वाले 20 लोगों के विरूद्ध वन अपराध का मामला दर्ज करने के साथ ही उनके पास से 10 बंडल फेंसिंग तार एवं 300 नग फेंसिंग खूंटा जब्त किया। वन भूमि पर बेजा कब्जा कर खेती करने के मामले में जिनके विरूद्ध प्रकरण दर्ज किया गया हैं, उनमें ग्राम मुरूकुची निवासी डमरू, फूलसिंग एवं पांच अन्य, सुरेश एवं तीन अन्य, केलूराम एवं पांच अन्य तथा रूपनाथ एवं तीन अन्य व्यक्ति शामिल है।

 

 

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