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लोक प्रशासन में उत्कृष्टता को मान्यता: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने की मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 की घोषणा

 छत्तीसगढ़ में सुशासन की दिशा में हो रहे परिवर्तन और प्रशासनिक संस्कृति के सुदृढ़ होते स्वरूप को रेखांकित करते हुए आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 की घोषणा की । यह पुरस्कार राज्य के विभिन्न जिलों और विभागों द्वारा लागू किए गए उन नवाचारों को सम्मानित करने हेतु दिए जाएंगे, जिन्होंने शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा स्थापित ये पुरस्कार इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि राज्य शासन सार्वजनिक प्रशासन के केंद्र में नवाचार, ठोस परिणाम और नागरिक हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि शासन की गुणवत्ता को केवल मंशा या व्यय के आधार पर नहीं, बल्कि उसके वास्तविक, मापनीय प्रभाव, विस्तार-योग्यता और जमीनी समस्याओं के समाधान की क्षमता के आधार पर आँका जाना चाहिए। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार इस नई प्रशासनिक सोच को संस्थागत रूप देने का प्रयास हैं, जहाँ तकनीक, संवेदनशीलता और संस्थागत सुधार मिलकर सार्वजनिक सेवा को सशक्त बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि निरंतर हो रहे नवाचारों से साकार होता है। परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर मनाए जा रहे सुशासन दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में जनहित को केंद्र में रखकर विकसित किए गए उत्कृष्ट प्रशासनिक नवाचारों को सम्मानित करने के लिए मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 के विजेताओं की घोषणा की गई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि शासन में नवाचार कोई विकल्प नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता और प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक प्रणालियों को नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप गति, पारदर्शिता और विश्वसनीयता के साथ निरंतर स्वयं को ढालना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन नवाचारों के सम्मान की आज घोषणा की गई  है, वे केवल व्यक्तिगत उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि भविष्य-उन्मुख शासन के लिए अनुकरणीय और दोहराने योग्य मॉडल हैं। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 के लिए एक सुदृढ़ और बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसका उद्देश्य समावेशिता और गुणवत्ता के बीच संतुलन स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि इस वर्ष कुल 312 नवाचार प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें 275 जिलों से और 37 राज्य स्तरीय विभागों से थे। यह व्यापक सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि शासन के प्रत्येक स्तर पर समस्या-समाधान की नवाचारी सोच विकसित हो रही है। यह प्रवृत्ति समाधान-केंद्रित प्रशासन की ओर हो रहे सांस्कृतिक बदलाव को भी दर्शाती है।

मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार हेतु दो-स्तरीय चयन प्रक्रिया के अंतर्गत पहले चरण में 55 नवाचारों को शॉर्टलिस्ट किया गया। इसके बाद 13 नवाचारों को फाइनलिस्ट के रूप में चुना गया और अंततः 10 विजेता नवाचारों का चयन किया गया, जिनमें जिला और विभागीय श्रेणियों से समान संख्या में प्रविष्टियाँ शामिल रहीं। मूल्यांकन के दौरान परिणामों को 50 अंक, विस्तार-योग्यता को 40 अंक और नवाचार को 10 अंक का भार दिया गया, जिससे यह सुनिश्चित किया गया कि सम्मान केवल विचारों पर नहीं, बल्कि वास्तविक और प्रभावशाली परिणामों पर आधारित हो।

जिला श्रेणी के विजेताओं में दंतेवाड़ा जिले की “ब्लॉकचेन आधारित भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण” पहल एक प्रमुख उदाहरण के रूप में सामने आई। इस नवाचार के माध्यम से मैनुअल और कागजी प्रक्रियाओं को समाप्त कर ब्लॉकचेन आधारित छेड़छाड़-रोधी प्रणाली लागू की गई, जिससे भूमि अभिलेख प्राप्त करने का समय हफ्तों से घटाकर कुछ ही मिनटों में संभव हो सका। इस पहल से दस्तावेज़ी धोखाधड़ी पूरी तरह समाप्त हुई और सेवा प्रदाय में अभूतपूर्व तेजी आई, जिसने आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में राजस्व प्रशासन के लिए एक नया मानक स्थापित किया।

जशपुर जिले की “निर्माण जशपुर” पहल ने यह दर्शाया कि एकीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग किस प्रकार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावी बना सकती है। 16 विभागों की 7,300 से अधिक परियोजनाओं और 444 ग्राम पंचायतों को कवर करने वाली इस प्रणाली ने रियल-टाइम निगरानी, जियो-टैग्ड सत्यापन और GIS आधारित योजना को संभव बनाया, जिससे कार्यों की गुणवत्ता में सुधार हुआ और विलंब में उल्लेखनीय कमी आई।

मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकी में लागू संवर्धित टेक-होम राशन (A-THR) नवाचार ने गंभीर कुपोषण जैसी चुनौती का प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से विकसित इस पोषण-घन आहार के माध्यम से गंभीर कुपोषित बच्चों में 77.5 प्रतिशत सुधार दर दर्ज की गई। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि साक्ष्य-आधारित पोषण हस्तक्षेप बड़े पैमाने पर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

गरियाबंद जिले की “हाथी ट्रैकिंग एवं अलर्ट ऐप” ने मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने में तकनीक की भूमिका को सशक्त रूप से सामने रखा। AI आधारित ट्रैकिंग और रियल-टाइम अलर्ट व्यवस्था के माध्यम से मानव हताहतों की संख्या लगभग शून्य तक लाई गई, साथ ही फसल क्षति और मुआवजा बोझ में भी उल्लेखनीय कमी आई। राज्य के बाहर भी अपनाई जा चुकी यह पहल संघर्ष-संवेदनशील शासन का एक प्रभावी मॉडल बन चुकी है।

नारायणपुर जिले का “इंटिफाई इंटेलिजेंस टूल” आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में डेटा एकीकरण की उपयोगिता को दर्शाता है। रियल-टाइम, जियो-स्पेशियल और पूर्वानुमान आधारित इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 100 से अधिक नियोजित अभियानों का संचालन संभव हुआ, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर हुआ और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में परिस्थितिजन्य जागरूकता को मजबूती मिली।

विभागीय श्रेणी में शिक्षा विभाग का “विद्या समीक्षा केंद्र (VSK)” डेटा-आधारित शिक्षा शासन का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा। यह AI सक्षम प्लेटफॉर्म 56,000 से अधिक विद्यालयों, 2.83 लाख शिक्षकों और 57.5 लाख विद्यार्थियों की निगरानी करता है, जिससे ड्रॉपआउट की प्रारंभिक पहचान, संसाधनों का बेहतर उपयोग और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेना संभव हो सका है।

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की “वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम” ने व्यवसाय सुगमता सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। 16 विभागों की 136 सेवाओं को एकीकृत करते हुए इस प्रणाली ने अनुमोदन, प्रोत्साहन, शिकायत निवारण और निरीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाया, जिससे विलंब कम हुआ और पारदर्शिता के साथ निवेशकों का विश्वास बढ़ा।

वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग की समग्र ई-गवर्नेंस सुधार पहल ने राजस्व संग्रह और अनुपालन व्यवस्था को सुदृढ़ किया। एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण, ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली और रियल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से विभाग ने ₹5,425 करोड़ का राजस्व अर्जित किया और पारदर्शिता तथा नियामक निगरानी के नए मानक स्थापित किए।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की “FDS 2.0 – ई-कुबेर डिजिटल भुगतान प्रणाली” ने मैनुअल चेक आधारित प्रक्रियाओं को समाप्त कर पूर्णतः कैशलेस, RBI एकीकृत भुगतान व्यवस्था लागू की। इसके माध्यम से ₹1,776 करोड़ से अधिक के 18 लाख लेन-देन पूर्ण हुए, जिससे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित वन क्षेत्रों में भी समय पर मजदूरी भुगतान, आजीविका सुरक्षा और पारदर्शी फंड प्रवाह सुनिश्चित हुआ।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा अंतर्गत लागू QR कोड आधारित सूचना स्वप्रकटिकरण व्यवस्था ने नागरिक-केंद्रित शासन को नई मजबूती दी। QR कोड के माध्यम से ग्रामीणों को वास्तविक समय की योजना जानकारी उपलब्ध कराकर इस पहल ने मध्यस्थों पर निर्भरता कम की और 11,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता को सुदृढ़ किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ये पुरस्कार छत्तीसगढ़ में जनकल्याण केंद्रित नवाचारों और सुशासन को प्रोत्साहन देने की एक नई शुरुआत हैं। यह इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ का भविष्य विस्तार-योग्य, नागरिक-केंद्रित और तकनीक-सक्षम शासन में निहित है। पुरस्कार प्राप्त करने वाले अधिकारी एवं टीमें एक प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान में नेतृत्व विकास कार्यक्रम में भाग लेंगी, जिससे आज के नवाचार आने वाले समय में शासन के मानक बन सकें।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि लोक प्रशासन में नवाचार का अर्थ केवल नई तकनीक अपनाना नहीं, बल्कि नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख सेवाएँ प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर की जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए शासन को निरंतर विकसित होना होगा और मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार की पहल यह सिद्ध करती हैं कि किस प्रकार विस्तार-योग्य, डेटा-आधारित और नागरिक-केंद्रित समाधान सार्वजनिक संस्थानों में विश्वास को मजबूत करते हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि छत्तीसगढ़ शासन सार्वजनिक सेवा के मूल मूल्य के रूप में नवाचार को निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा, ताकि शासन व्यवस्था को भीतर से रूपांतरित करते हुए प्रत्येक नागरिक तक मापनीय और सकारात्मक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके।
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श्री गुरू ख़ुशवंत साहेब, मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, तकनीकी शिक्षा एवं रोज़गार तथा कौशल विकास विभाग की प्रेस वार्ता

  प्रदेश में तकनीकी शिक्षा एवं व्यावसायिक शिक्षा के समुचित विकास और समन्वय स्थापित करने के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग सदैव प्रयासरत है। वर्तमान में तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत 29 इंजीनियरिंग महाविद्यालय तथा 53 पॉलिटेक्निक संस्थाए एवं 101 फार्मेसी संस्थाए संचालित है। जिनमे इंजीनियरिंग संस्थानों में स्नातक स्तर के 30 पाठ्यक्रम, स्नातकोत्तर स्तर पर 36 तथा पॉलिटेक्निक संस्थाओं में डिप्लोमा स्तर के 21 त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम संचालित है। जिसमे लगभग 60 हजार छात्र-छात्राए अध्ययनरत है । विगत वर्षों की तुलना में इस वर्ष इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक संस्थाओं में प्रवेश में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।


         सत्र 2025-26 से आई. आई.टी. के तर्ज पर शासकीय पॉलिटेक्निक संस्थाओ एवं शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय को उन्नयन करते हुए इंमर्जिंग ब्रांच (रोबोटिक्स, इन्टरनेट ऑफ थिंग्स इत्यादी) के साथ 04 छत्तीसगढ़ इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना की गई है एवं जल्द ही रायपुर बिलासपुर तथा दुर्ग में छत्तीसगढ़ इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना की जावेगी।

        छत्तीसगढ़ के युवाओं के बीच नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में छत्तीसगढ़ राज्य में i-Hub बनाने हेतु छत्तीसगढ़ शासन, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग एवं i-Hub गुजरात के साथ MoU का निष्पादन किया गया एवं शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय रायपुर में i-Hub की स्थापना की गई। जिसमें प्रदेश के छात्र/छात्राओं को Startup एवं Innovation संबंधी मार्गदर्शन प्रदाय किया जा रहा है।

        तकनीकी शिक्षा संस्थाओंके छात्र/छात्राओं को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु Apanatech. pvt.Ltd. के साथ विभाग द्वारा MoU हस्ताक्षर किया गया है तथा छात्र/छात्राओं को रोजगार मूलक प्रशिक्षण प्रदाय किये जाने हेतु CSRBOX.pvt.ltd के साथ विभाग द्वारा MoU इस्ताक्षर किया गया है तथा छात्र/छात्राओं को आत्मनिर्भर किये जाने हेतु उनके द्वारा किये जाने वाले Startup एवं Innovation के प्रोजेक्ट को उद्योग में उपयोग किये जाने हेतु CII एवं YI समूह से विभाग द्वारा द्वारा MoUहस्ताक्षर किया गया है।

       तकनीकी शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन में सत्र 2025-26 से छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू किया गया है। 

       छत्तीसगढ़ राज्य के तकनीकी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में शिक्षा ग्रहण करने वाले निर्धन परिवार के विद्यार्थियों जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय 2 लाख तक है उन्हें 4 लाख तक की शिक्षा ऋण में बैंकों द्वारा ली जाने वाली व्याज दर को दृष्टीगत रखते हुए विद्यार्थियों को व्याज अनुदान प्रदान करने हेतु मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना लागु की गई है। आज दिनांक तक 11643 विद्यार्थियों को 22.53 करोड़ की ब्याज में अनुदान प्रदान की जा चुकी है।

          शासकीय पॉलिटेक्निक संस्थाओं में कार्यरत प्रथम श्रेणी के 204 शिक्षकों को कैरियर संवर्धन योजना के तहत लेवल 9A से 10 में प्रोन्नत किया गया ।

        शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालयों एवं पॉलिटेक्निक संस्थाओं में कार्यरत 116 तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को पदोन्नति एवं 205 समयमान वेतनमान प्रदान की गई है। इसी प्रकार 05 चतुर्थ श्रेणीके कर्मचारियों को पदोन्नति एवं 115 समयमान-वेतनमान प्रदान की गई है।

केन्द्र शासन की योजनाओं 
में प्रशिक्षण 

योजनाओं की जानकारी

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0
वित्तीय वर्ष 24-25 में 3326 युवाओं का प्रशिक्षण (1504 महिला तथा 1822 पुरुष)

पी. एम. विश्वकर्मा
लाईवलीहुड 12,952 कॉलेज में हितग्राही प्रशिक्षित

पीएम-जनमन
चिन्हांकित PVTG युवाओ में से 726 युवा प्रशिक्षित

नल जल पित्रा कार्यक्रम
484 युवा प्रशिक्षित एवं 1002 प्रशिक्षण 

राज्य शासन की योजनाओं में प्रशिक्षण

    मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना में दिसम्बर 2023 से दिसम्बर 2025 तक कुल 21053 युवाओं का प्रशिक्षण किसने 14109 - प्रशिक्षित एवं 6944 - प्रशिक्षणरत, प्रशिक्षित 14109 युवाओ में से 10089 युवा नियोजित।

     नियद नेल्लानार योजना के तहत 587 हितग्राही प्रशिक्षित।

627 आत्मसमर्पित युवा प्रशिक्षित एवं 453 प्रशिक्षणरत्

बस्तर संभाग में युवाओ के कौशल प्रशिक्षण हेतु विशेष प्रयास

    बस्तर संभाग के प्रत्येक विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर (SDC) स्थापित करने के लिए वित्तीय वर्ष 20:25-26 में राशि रू. 400 लाख प्रावधानित ।

       LWE क्षेत्र के लाइवलीहुड कॉलेज में आवासीय प्रशिक्षण की सुविधा हेतु नवीन मद में राशि रू. 1000 लाख प्रावधानित

     जिला नारायणपुर में 50 सीटर बालक छात्रावास निर्माण हेतु राशि रु 100 लाख स्वीकृत।

      आत्मसमर्पित नक्सली एवं नक्सल पीड़ित परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड बनाये जाने प्रक्रिया में विलंब को दृष्टिगत  रखते हुए, कौशल प्रशिक्षण पूर्व पंजीयन में आधार अनिवार्यता को शिथिल करते हुए मूल्यांकन के पूर्व होना आवश्यक किया गया जिससे प्रशिक्षण प्रारंभ करने में व्यवधान ना हो एवं आधार बनाये जाने के लिए सस्य उपलब्ध हो सके।

       LWE जिलों में स्थित कुल 08 पुर्नवास केन्द्र में 06 केंद्र (जिला बीजापुर, वडा नागपुर, सुकमा का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता (VIP) के रूप में पंजीयन पूर्ण एवं शेष केन्द्रों को बोटीपी के रूप में पंजीकृत कार्यवाही प्रक्रियाधीन।

कौशल प्रशिक्षण हेतु अधोसंरचना एवं मानव संसाधन की व्यवस्था

        नवीन जिलों के जिला कौशल विकास प्राधिकरण एवं जिला परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज सोसायटी हेतु कुल 50 स स्वीकृत।

      06 नवीन जिलों एवं दुर्ग, भकारा भटेली धमतरी सहित कुल 18 लाइवलीहुड कॉलेज भवन निर्माण हेतुराक 20 लाखा स्वीकृत।

        घोषणा पत्र अनुरूप वित्तीय वर्ष 2025-26 में लाईवलीहुड कॉलेज में कला स्टूडियो स्थापित किये जाने हेतु राशि रू 200 लाख प्रावधानित ।

आधुनिक क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण हेतु संस्थाओ के साथ अनुबंध

03 जिलों (बलरामपुर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा में ट्रैक्टर मैकेनिक कोर्स में कौशल प्रशिक्षण हेतु माहा एक मडिया से अनुबंध

         रायपुर में इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कौशल प्रशिक्षण हेतुसारोटेक्नोलॉजी एलिमें अनुबंध

       युवाओं में 'एम्प्लॉयबिलिटी स्किल' बढ़ाये जाने नांदी फाउंडेशन से अनुबंध।

अन्य उपलब्धियाँ

       मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना अंतर्गत पूर्व में प्रचलित यंत्र (अंगूठा आधारित आधार उपस्थिति प्रणाली के स्थान पर फेस (चेहरा) आधारित आधार उपस्थिति प्रणाली आरंभ।

आईटीआई सुदृढ़ीकरण में छत्तीसगढ़ की उपलब्धि

      कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा माननीय मंत्री जी के निर्देशों के पालन में विगत दो वर्षों में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के उन्नयन, आधुनिकीकरण एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की गई हैं।

प्रमुख उपलब्धियाँ

100 से अधिक नवीन ट्रेडों का चिन्हांकन, जिनमें 16 दीर्घ अवधि एवं 91 लघु अवधि ट्रेड शामिल

वर्ष 2024-25 में SIDBI पोषित 13 आईटीआई में 10 नवीन ट्रेड प्रारंभ (ड्रोन टेक्नीशियन, 5जी नेटवर्क टेक्नीशियन, 3 डी प्रिंटिंग, फूड प्रोसेसिंग आदि) |

पिपरिया (कबीरधाम), कोर्रा (धमतरी), ओरछा (नारायणपुर) एवं कुस्तुरा (जशपुर) में 04 नवीन आईटीआई की स्थापना |

आईटीआई की संख्या 197 से बढ़कर 201 |

09 आईटीआई में 15 अप्रासंगिक ट्रेड बंद करने का निर्णय (अगस्त 2025 से प्रभावी) |

03 आईटीआई में 04 ट्रेड एनसीवीटी से संबद्ध |

प्रशिक्षण नीति के माध्यम से अधिकारीयों एवं कर्मचारियों का देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में सम्बध्द प्रशिक्षण |

क्षेत्रीय कार्यालयों के दायित्व निर्धारण, त्रैमासिक निरीक्षण एवं प्रशिक्षणार्थी फीडबैक प्रणाली लागू।

5जी नेटवर्क टेक्नीशियन ट्रेड प्रारंभ l

विगत दो वर्ष की विभागीय उपलब्धियाँ

रोजगार इच्छुकों का पंजीयन
वर्ष  2024  में जीवित पंजीयन
1412448 (31 दिसंबर 2024 की स्थिति में)

वर्ष  2025 में जीवित पंजीयन
1547857 (30 नवंबर 2025 की स्थिति में)

निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों में रोजगार हेतु प्लेसमेंट कैंप का आयोजन
वर्ष 2024-25 में आयोजित 311 प्लेसमेंट कैंप की संख्या और चयनित आवेदकों की 5314 इसी प्रकार वर्ष 2025-26 
वर्ष 2024-25 में आयोजित 245 प्लेसमेंट कैंप की संख्या और चयनित आवेदकों की 4149 संख्या(30 नवंबर 2025 की स्थिति में)

सैन्य भर्ती

भारतीय सैन्य बलों में छत्तीसगढ़ के युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्रों द्वारा जनपद / नगरीय क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार।

भारतीय सेना सामान्य प्रवेश परीक्षा पूर्व कोचिंग तथा शारीरिक दक्षता प्रशिक्षण।

विवरण 2024-25 अग्निवीर 'थल सेना' 23515 में से (731 चयनित)

2025-26 में ऑनलाईन पंजीयन 23,111  हुआ जिसमें से (572 आवेदक प्रशिक्षणरत्)

कॅरियर मार्गदर्शन

स्कूल/कॉलेजों में कॅरियर मार्गदर्शन

विवरण वर्ष 2024-25 कुल शैक्षणिक संस्था 222 छात्र-छात्राओं की संख्या 24095 इसी प्रकार वर्ष 2025-26 में  कुल शैक्षणिक संस्था 124 (30 नवंबर 2025 की स्थिति में)10955 नवंबर 2025 की स्थिति में)
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छत्तीसगढ़ में मंत्रीगणों एवं पुलिस अधिकारियों को गॉर्ड ऑफ ऑनर दिए जाने की परंपरा समाप्त

 छत्तीसगढ़ राज्य के मंत्रीगणों और पुलिस के आला अधिकारियों को सामान्य दौरे, निरीक्षण, भ्रमण के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने की औपनिवेशिक परंपरा को समाप्त कर दिया गया है। गृह विभाग द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर के नियमों में संशोधन किए जाने का आदेश जारी कर दिया गया है, जो  तत्काल प्रभाव से लागू होगा।


उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा की विशेष पहल पर गृह विभाग ने गार्ड ऑफ ऑनर की औपनिवेशिक काल से चली आ रही परंपरा की समीक्षा करने के उपरांत इसमें संशोधन का आदेश जारी किया है। इसका उद्देश्य पुलिस बल की कार्यक्षमता का उपयोग कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने और औपनिवेशिक सोच से जुड़ी परंपराओं को समाप्त करना है। 

     गौरतलब है कि गृहमंत्री श्री विजय शर्मा ने स्वयं विभाग के अधिकारियों को गार्ड ऑफ ऑनर की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा कर इसमें वर्तमान स्थिति में आवश्यकतानुसार बदलाव करने के निर्देश दिए थे। जिसके परिपालन में गृह विभाग ने पुलिस बल को अनावश्यक औपचारिकताओं से मुक्त कर उनकी कार्यक्षमता का उपयोग उनके मूल दायित्वों के पालन के लिए यह संशोधन किया है। 

सामान्य दौरों में सलामी गारद समाप्त

जारी आदेश के तहत राज्य के भीतर सामान्य दौरों, आगमन-प्रस्थान एवं निरीक्षण के दौरान अब गृहमंत्री, समस्त मंत्रीगण, पुलिस महानिदेशक सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सलामी गारद (गार्ड ऑफ ऑनर) नहीं दिया जाएगा। जिला भ्रमण, दौरे या निरीक्षण के समय पूर्व में प्रचलित सलामी व्यवस्था को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है। इससे पुलिस बल का समय और ऊर्जा का प्रभावी उपयोग सुरक्षा, कानून-व्यवस्था तथा जनसेवा के कार्यों में हो सकेगा। 

राष्ट्रीय एवं राजकीय आयोजनों में यथावत व्यवस्था

       यह प्रतिबंध राष्ट्रीय और राजकीय समारोहों पर लागू नहीं होगा। गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), शहीद पुलिस स्मृति दिवस (21 अक्टूबर), राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर), राजकीय समारोहों तथा पुलिस दीक्षांत परेड जैसे अवसरों पर औपचारिक सलामी गारद की व्यवस्था पूर्ववत रहेगी। 

संवैधानिक पदों के लिए प्रोटोकॉल जारी

        आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रोटोकॉल के अनुसार संवैधानिक पदों पर आसीन महानुभावों एवं विशिष्ट अतिथियों के लिए सलामी गारद की व्यवस्था पहले की तरह यथावत रहेगी। यह निर्णय शासन की प्रशासनिक सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता और आधुनिक, जनोन्मुखी व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे पुलिस बल की कार्यक्षमता में सकारात्मक सुधार होगा।
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स्वास्थ्य मंत्री ने किया जिला चिकित्सालय जांजगीर-चांपा का औचक निरीक्षण, नई ओपीडी व एनआईसीयू का किया शुभारंभ

 स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज जिला चिकित्सालय जांजगीर-चांपा का औचक निरीक्षण किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, संचालक श्री संजीव झा एवं सहायक संचालक डॉ. सुरेंद्र पाम्भोई उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने अस्पताल की व्यवस्थाओं, स्वच्छता, दवाओं की उपलब्धता तथा मरीजों को मिल रही सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जिला चिकित्सालय में नवनिर्मित ओपीडी हॉल एवं नवजात शिशुओं के बेहतर उपचार हेतु 10 बेड के अत्याधुनिक एनआईसीयू वार्ड का विधिवत शुभारंभ  किया। उन्होंने कहा 10 बेड के एनआईसीय से अब क्षेत्र के नवजात शिशुओं को क्रिटिकल केयर हेतु बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
      स्वास्थ्य मंत्री मंत्री ने जीवनदीप समिति के माध्यम से स्वीकृत कार्यों की जानकारी लेते हुए कलेक्टर श्री जन्मेजय मोहबे के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मरीजों की आवश्यकता के अनुरूप जीवनदीप समिति से समयबद्ध स्वीकृतियाँ देना सराहनीय कदम है, जिससे अस्पताल की सेवाएँ निरंतर सुदृढ़ हुई हैं। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यू.के. मरकाम, सिविल सर्जन डॉ. एस. कुजूर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री उत्कर्ष तिवारी, जिला अस्पताल प्रबंधक श्री अंकित ताम्रकार, आरएमओ डॉ. संदीप साहू सहित जिला चिकित्सालय के समस्त अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे पी नड्डा का किया आत्मीय स्वागत

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज स्वामी विवेकानंद विमानतल पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे पी नड्डा का आत्मीय स्वागत किया।

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विकसित भारत–जी राम जी ग्रामीण श्रमिकों के सम्मान और अधिकारों की मजबूत गारंटी: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित भारत–जी राम जी ग्रामीण गरीबों, श्रमिकों और मेहनतकश मजदूर वर्ग के जीवन में भरोसा, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने की सशक्त व्यवस्था है। यह अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक समय पर काम, पूरा पारिश्रमिक और पारदर्शी व्यवस्था पहुँचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। 


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत–जी राम जी के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि रोजगार प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न्यूनतम हो और श्रमिकों को उनके अधिकारों से वंचित न किया जा सके। मजदूरी का भुगतान सीधे बैंक खातों में सुनिश्चित कर आर्थिक सुरक्षा को मजबूती दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत–जी राम जी बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, रियल-टाइम निगरानी, एआई-आधारित विश्लेषण और नागरिक सहभागिता जैसे आधुनिक प्रावधान गरीब और श्रमिक वर्ग के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा के लिए एक मजबूत और पारदर्शी ढांचा प्रदान करते हैं। इससे न केवल कार्य की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह कानून प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को आत्मसात करता है। विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप यह कानून ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और सम्मानजनक आजीविका की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास है।

उन्होंने कहा कि श्रमिकों का सम्मान, समय पर रोजगार और पारदर्शी व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की नींव है, और विकसित भारत–जी राम जी कानून उसी नींव को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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मुख्यमंत्री श्री साय ने ठाकुर प्यारेलाल सिंह की जयंती पर किया नमन

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं श्रमिक-किसान आंदोलनों के अग्रदूत ठाकुर प्यारेलाल सिंह की 21 दिसम्बर को जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि ठाकुर प्यारेलाल सिंह जी छत्तीसगढ़ की धरती के ऐसे महान सपूत थे, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के साथ-साथ श्रमिकों, किसानों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। वे छत्तीसगढ़ में श्रमिक एवं सहकारी आंदोलन के प्रणेता माने जाते हैं। छात्र जीवन से ही वे स्वाधीनता आंदोलनों से सक्रिय रूप से जुड़े रहे और ब्रिटिश शासन के अन्याय व दमन के विरुद्ध निर्भीक होकर संघर्षरत रहे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ठाकुर प्यारेलाल सिंह का संपूर्ण जीवन साहस, संघर्ष और सेवा के आदर्शों से ओत-प्रोत है। छत्तीसगढ़ के सामाजिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक विकास में उनके अमूल्य योगदान को सदैव सम्मान और कृतज्ञता के साथ स्मरण किया जाएगा। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से ठाकुर प्यारेलाल सिंह जी के विचारों और आदर्शों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय सहभागी बनने का आह्वान किया।
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मुख्यमंत्री श्री साय ने पंडित सुंदरलाल शर्मा की जयंती पर किया श्रद्धापूर्वक नमन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, प्रख्यात साहित्यकार एवं महान समाज सुधारक पंडित सुंदरलाल शर्मा की 21 दिसम्बर को जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पंडित सुंदरलाल शर्मा जी छत्तीसगढ़ की माटी से जुड़े ऐसे युगद्रष्टा महापुरुष थे, जिन्होंने किसानों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। 
सामाजिक सुधार के क्षेत्र में भी उनका योगदान अतुलनीय रहा। उन्होंने अंधविश्वास, छुआछूत, सामाजिक रूढ़ियों और कुरीतियों के विरुद्ध निरंतर संघर्ष करते हुए समाज को समानता, सद्भाव और मानवता के पथ पर आगे बढ़ाया। उनके साहित्य, विचार और कर्म ने जनमानस में जागरण और आत्मसम्मान की चेतना का संचार किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पंडित सुंदरलाल शर्मा का संपूर्ण जीवन सत्य, साहस और सेवा के मूल्यों का जीवंत उदाहरण है। देश की स्वतंत्रता तथा छत्तीसगढ़ के सामाजिक-सांस्कृतिक उत्थान में उनका योगदान सदैव स्मरणीय और प्रेरणादायी रहेगा। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से पंडित सुंदरलाल शर्मा जी के आदर्शों को आत्मसात करने और एक न्यायपूर्ण, समरस एवं जागरूक समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
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वित्त मंत्री श्री ओ.पी.चौधरी की पहल से रायगढ़ को मिली बड़ी सौगात

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में रायगढ़ जिले के विद्युत उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिया गया है। प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी के सतत प्रयासों से जिले में पावर कम्पनी के नए शहर संभाग तथा धरमजयगढ़ में नए संभाग की स्थापना के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस निर्णय से शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ और उपभोक्ता-हितैषी बनाया जाएगा।

      छ.ग.रा.विद्युत मंडल रायगढ़ के अधीक्षण अभियंता श्री गुंजन शर्मा ने जानकारी देेते हुए बताया कि रायगढ़ शहर में विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या और अधोसंरचना को देखते हुए लंबे समय से एक अलग शहर संभाग की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। वर्तमान में रायगढ़ शहर में लगभग 54 हजार निम्नदाब उपभोक्ता, 56 उच्चदाब विद्युत उपभोक्ता, 33/11 के.व्ही. के 17 उपकेंद्र, 1521 ट्रांसफार्मर एवं 232 किलोमीटर 11 केवी लाइन विद्यमान हैं। इतनी विशाल व्यवस्था का संचालन अब तक केवल दो जोन कार्यालयों के माध्यम से किया जा रहा था, जिससे उपभोक्ताओं की शिकायतों के निराकरण में विलंब होता था।

      इस मूलभूत समस्या को गंभीरता से लेते हुए वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने बताया स्वयं पहल कर जिले के नागरिकों के लिये विद्युत समस्याओं के निराकरण हेतु रायगढ़ में नये शहर संभाग तथा सुदूर वन क्षेत्र धरमजयगढ़ में नये संभाग की सौगात दी है। आदेश के अनुसार अब रायगढ़ शहर के लिये शहर संभाग की स्थापना के साथ-साथ दो जोन के स्थान पर चार जोन प्रारंभ करने के आदेश जारी किये गये हैं। जिससे रायगढ़ का शहरी क्षेत्र अब चार जोन में विभाजित हो जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप छोटे-छोटे क्षेत्र होने से उपभोक्ताओं की समस्याओं के निराकरण में अब कम समय लगेगा। संसाधनों का विस्तार होने से विद्युत समस्याओं का त्वरित निराकरण भी संभव होगा। शहर संभाग गठित किये जाने से जोन कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर सटीक निगरानी रखी जा सकेगी जिससे इनके कार्यों में कसावट आयेगी।

      इसी क्रम में सुदूर वनांचल एवं तेजी से औद्योगिक विकास की ओर अग्रसर धरमजयगढ़ में भी नया संभाग स्थापित करने के आदेश जारी किए गए हैं। अभी तक धरमजयगढ़, घरघोड़ा, लैलूंगा, तमनार, कापू, हाटी सहित आसपास के क्षेत्रों का संचालन रायगढ़ स्थित संभागीय कार्यालय से किया जाता था, जिससे उपभोक्ताओं को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी रायगढ़ आना पड़ता था। धरमजयगढ़ में संभागीय कार्यालय की स्थापना से अब स्थानीय उपभोक्ताओं को अपने विद्युत संबंधी कार्यों के लिए रायगढ़ नहीं आना पड़ेगा। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी तथा क्षेत्रीय उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी निराकरण संभव हो सकेगा। यह निर्णय धरमजयगढ़ अंचल के नागरिकों के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन 11 सूत्रीय मांगों को लेकर 29 दिसंबर 2025 से करेंगे "काम बंद- कलम बंद" आंदोलन

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के तत्वाधान में 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आगामी आंदोलन दिनांक 29,30,31 दिसंबर 2025 को "काम बंद- कलम बंद" आंदोलन को सफल बनाने हेतु  छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन जिला शाखा नवा रायपुर की बैठक आयोजित की गई। जिसमें प्रांतीय संयोजक आदरणीय श्री कमल वर्मा जी ने आंदोलन को सफल बनाने हेतु तैयारी के संबंध में जानकारी लेते हुए सभी कर्मचारियों अधिकारियों को रणनीति एवं कार्ययोजना के संबंध में जानकारी दिए एवं आगामी आंदोलन को एकजुटता के साथ सफल बनाने हेतु अपील किए है।


बैठक में उपस्थित सभी कर्मचारियों अधिकारियों ने उक्त आंदोलन को सफल बनाने हेतु अपनी सहमति प्रदान की है एवं आगामी 29, 30, 31 को नवा रायपुर स्थित समस्त शासकीय कार्यालयों में हड़ताल को सफल बनाने का भरोसा दिलाया है।

 छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन नवा रायपुर के उक्त बैठक में उपस्थित सभी कर्मचारियों अधिकारियों को श्री जय कुमार साहू अध्यक्ष संचालनालय विभागाध्यक्ष कर्मचारी संघ एवं संरक्षक नवा रायपुर कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने आभार व्यक्त करते हुए ह्रदय से धन्यवाद ज्ञापित किये।

उक्त बैठक में श्री कमल वर्मा प्रांतीय संयोजक छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन,श्री जय कुमार साहू संरक्षक नवा रायपुर फेडरेशन एवं अध्यक्ष संचालनालय विभागाध्यक्ष कर्मचारी संघ,श्री संतोष कुमार वर्मा संयोजक नवा रायपुर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन,श्री नंदलाल चौधरी उपाध्यक्ष राजपत्रित संघ,श्री पी.एल सहारा, श्री बजरंग प्रजापति,सुश्री कांति सूर्यवंशी उप संयोजक नवा रायपुर फेडरेशन,श्री जागेश्वर भट्ट अध्यक्ष वन मुख्यालय अरण्य भवन,श्रीमती मीनू दास,आर.डी मेहरा राजपत्रित संघ,श्रीमती सोनाली तिड़के संयोजक महिला प्रकोष्ठ नवा रायपुर, संजीत शर्मा महासचिव, श्री राजेश ठक्कर,श्री कुमार वर्मा उपाध्यक्ष, जवाहर यादव जिला अध्यक्ष लिपिक संघ,श्री जितेन्द्र बिस्वाल,श्री आकाश त्रिपाठी प्रवक्ता, महेन्द्र साहू अध्यक्ष वाहन चालक संघ, कुमार यादव,आनंद रविन्द्र,मनीष हुमनेकर,कल्याण सिंह, प्रवीण सिंह,विरेंद्र जांगड़े,दीपक सोनकर,निशा यादव,संजय साहू, देवेंद्र साहू, श्री सुरेश ढीढी अध्यक्ष चतुर्थ श्रेणी प्रकोष्ठ,अनिल वर्मा मीडिया प्रभारी,चंद्रशेखर साहू,अमित शर्मा,नितिन अठनकर, हेमन्त उइके,गौरी छुरा,डिकेंद्र खुटे,राजकुमार सोधिया,श्याम कन्नौजे ,गुड़िया खूंटे, नम्रता नादुलकर, चंद्रकांत जयसवाल
अभिजीत तिवारी,मुकेश ध्रुव एवं बड़ी संख्या में कर्मचारी अधिकारी उक्त बैठक में सम्मिलित हुए।
 
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सुव्यवस्थित धान खरीदी से बढ़ा किसानों का भरोसा

 पूरे छत्तीसगढ़ सहित धमतरी जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया को पूरी तरह सुव्यवस्थित, पारदर्शी और किसान-हितैषी ढंग से संचालित किया जा रहा है। किसानों की सुविधा और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जिले के सभी धान उपार्जन केंद्रों में नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है, जो लगातार निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। इसका सकारात्मक परिणाम यह है कि किसान बिना किसी परेशानी के अपना धान बेच पा रहे हैं और शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ प्राप्त कर रहे हैं।


धान खरीदी प्रक्रिया में तुंहर टोकन ऐप ने किसानों के लिए व्यवस्था को और अधिक सरल व सुगम बना दिया है। समय पर टोकन उपलब्ध होना, केंद्रों में व्यवस्थित तौल, बैठने की सुविधा, पेयजल एवं छाया जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं ने किसानों का शासन-प्रशासन पर भरोसा और मजबूत किया है। धमतरी जिले के किसान इन व्यवस्थाओं से संतुष्ट होकर खुशी व्यक्त कर रहे हैं।

ऐसी ही एक प्रेरक सफलता की कहानी है ग्राम पोटियाडीह के किसान श्री नरेन्द्र कांकरिया की। श्री कांकरिया ने खरीफ मौसम में अपने 8 एकड़ 15 डिस्मिल रकबे में धान की खेती की। उन्हें तुंहर टोकन ऐप के माध्यम से पहले टोकन में 80 क्विंटल धान बेचने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि उपार्जन केंद्र पर पहुंचने से लेकर तौल और रसीद प्राप्त होने तक पूरी प्रक्रिया सहज, पारदर्शी और परेशानी-मुक्त रही।

किसान श्री कांकरिया ने बताया कि पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर धान विक्रय से प्राप्त राशि से उन्होंने ट्रैक्टर खरीदा था, जिससे खेती के कार्य में सुविधा हुई और उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई। ट्रैक्टर पर लिया गया ऋण अभी चल रहा है, जिसे वे इस वर्ष धान विक्रय से प्राप्त राशि से चुकाने की योजना बना रहे हैं। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का बकाया भुगतान करने की भी उनकी तैयारी है। उनका कहना है कि समय पर भुगतान मिलने से आर्थिक दबाव कम होता है और खेती में पुनः निवेश करने का आत्मविश्वास बढ़ता है।

श्री नरेन्द्र कांकरिया ने बेहतर व्यवस्थाओं के लिए शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि धान उपार्जन केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं और सुचारू व्यवस्था के कारण किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

धमतरी जिले में धान खरीदी की यह सुव्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्था न केवल किसानों की मेहनत को सम्मान दे रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है। यह शासकीय पहल किसानों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त उदाहरण बन रही है।
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संरचनात्मक सुधारों से छत्तीसगढ़ में निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जमीनी क्रियान्वयन तेज़ - मंत्री लखन लाल देवांगन

 छत्तीसगढ़ अब सिर्फ निवेश आकर्षित नहीं कर रहा उन्हें तेज़ी से ज़मीन पर भी उतार रहा है। नवंबर 2024 से अब तक राज्य ने 18 क्षेत्रों में 27.83 लाख करोड़ रूपए के 219 निवेश प्रस्ताव हासिल किए हैं। इनमें सेमीकंडक्टर और एआई से लेकर सीमेंट, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग तक शामिल हैं। ये परियोजनाएँ राज्य के अन्य जिलों में फैली हैं, जिनसे 1.5 लाख रोजगार सृजित होंगे और यह पूरे राज्य में संतुलित विकास की ओर एक बड़ा संकेत है। नए उद्योगों से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे l प्रेस वार्ता में  सी एस आई डी  सी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, सचिव उद्योग श्री रजत कुमार, संचालक  उद्योग श्री प्रभात मालिक,  सी एस आई डी सी के प्रबंध संचालक श्री विश्वेश कुमार मौजूद थे.


      अब निवेश केवल रायपुर तक सीमित नहीं हैं। प्रश्तवित निवेशों की विशेष बात ये है कि हर 5 में से। निवेश (21 प्रतिशत) आदिवासी बहुल बस्तर संभाग में हैं। 33 प्रतिशत रायपुर संभाग में और 46 प्रतिशत बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभागों में।

         क्षेत्रीय विविधता ने मजबूती दी है। लगभग 50 प्रतिशत निवेश प्राथमिक (थ्रस्ट) क्षेत्रों में हैं जैसे सेमीकंडक्टर और एआई डेटा सेंटर पार्क वहीं सीमेंट और बिजली जैसे पारंपरिक उद्योग भी मजबूत बने हुए हैं। कुल निवेश प्रस्तावों में 57 परियोजनाएँ 1,000 करोड़ रूपए से अधिक की है और 34 परियोजनाएँ 1,000 से ज्यादा रोजगार देने वाली हैं।

           असल कहानी है तेज़ क्रियान्वयन की। 6.063 करोड़ रूपए की 9 बड़ी परियोजनाएँ चालू हो चुकी हैं, जिनसे उत्पादन शुरू हो गया है और 5,500 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इसके अलावा 109 परियोजनाएँ यानी लगभग आधी उन्नत चरण में हैं। ये या तो निर्माणाधीन हैं या भूमि आवंटन के बाद आगे बढ़ चुकी हैं। ये 24 जिलों और 16 क्षेत्रों में फैली हैं और जल्द ही 87,132 रोजगार सृजित करेंगी। खास बात यह है कि इनमें से 58 प्रतिशत परियोजनाएँ आतिथ्य एवं स्वास्थ्य, फूड प्रोसेसिंग, आईटी, इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और फार्मा जैसे प्राथमिक क्षेत्रों से जुड़ी हैं।

            प्रमुख परियोजनाएँ इस रफ्तार को साफ दिखाती हैं। पोलिमेटेक की 10,000 करोड़ रूपए से अधिक की सेमीकंडक्टर फेक्ट्री जो छत्तीसगढ़ की पहली हे को सिर्फ 45 दिनों में भूमि आवंटित हुआ और काम तेज़ी से शुरू हुआ। रेकबैंक का 1,000 करोड़ रूपए का एआई डेटा सेंटर पार्क- देश का पहला-अब लगभग पूरा होने वाला है। ड्रल्स का 625 करोड़ रूपए का पेट फूड विस्तार प्रोजेक्ट ट्रायल प्रोडक्शन में है और इससे 3,000 रोजगार मिलेंगे। वी-राइज़ का तीसरा भारत कार्यालय एक आईटी यूनिट निर्माणाधीन है। अल्ट्राटेक सीमेंट का 1,600 करोड़ रूपए का निवेश चालू हो चुका है। आदित्य बिड़ला समूह का 67.5 मेगावाट का सोलर प्लांट मई में शुरू हो गया। वहीं बस्तर में रापपुर स्टोन क्लिनिक का 350-बेड अस्पताल लगभग तैयार है, जिससे आदिवासी परिवारों को उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलेंगी

           मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, ‘जो राज्य कभी मुख्य रूप से लोह और इस्पात के लिए जाना जाता था. वह अब सेमीकंडक्टर, एआई डेटा सेंटर पार्क, नवीकरणीय ऊर्जा, फूड प्रोसेसिंग और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं जैसे नए क्षेत्रों का केंद्र बन रहा है। कंपनियाँ सिर्फ निवेश का निर्णय नहीं ले रहीं, बल्कि जल्द से जल्द काम शुरू करना बाहती हैं। हमारी सरकार हर उद्यमी के लिए व्यापार को आसान बनाने और हर चरण में पूरा सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।‘

        मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा, ‘सुधारों ने विवेकाधिकार की जगह पारदर्शिता लाई है. जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इसका असर साफ दिखता है सरल प्रक्रियाएँ और बड़े पैमाने पर जमीन पर उतरती परियोजनाएँ। यह साबित करता है कि संवेदनशील शासन उद्योग को गति देता है।‘

        वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार ने कहा  हमारा फोकस यह सुनिश्चित करता है कि निवेश प्रस्ताव के बाद निवेशकों की गति न रुके। तेज़ भूमि आवंटन, डिजिटल स्वीकृतियों ओर बेहतर समन्वय से कंपनियों बिना देरी के इरादे से निर्माण तक पहुंच पा रही है।

       इस तेज़ उछाल के पीछे कई अग्रणी सुधार हैं-132 स्वीकृतियों के लिए वन-क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम जन विश्वास अधिनियम के तहत 279 छोटे अपराधों का अपराधमुक्तिकरण (दो जन विश्वास अधिनियम लागू करने वाला पहला राज्य), स्वचालित भूमि म्यूटेशन लागू करने वाला पहला राज्य; एफएआर और ग्राउंड कवरेज में वृद्धि और सेटबेक में कमी, डिजिटल भूमि विवरण (रजिस्ट्री. आरओआर, टैक्स बकाया, न्यायालय प्रकरण); लेआउट और भवन 
स्वीकृति के लिए एकीकृत सॉफ्टवेयर, 24ग7 संचालन और विस्तारित फायर एनओसी। इन सुधारों के चलते डीपीआईआईटी से चार श्रेणियों में ‘टॉप अचीवर‘ की मान्यता मिली।

       ये सभी पहल केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि गति, जवाबदेही और ज़मीनी परिणामों पर केंद्रित प्रशासनिक संस्कृति को दर्शाती हैं। निवेश की विविधता और क्रियान्वयन की रफ्तार एक बात साफ कर देती है-छत्तीसगढ़ अब सिर्फ निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर नहीं कर रहा, बल्कि वास्तविक परियोजनाएँ बना रहा है, वास्तविक रोजगार पैदा कर रहा है और वास्तविक बदलाव ला रहा है।
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हिंसा से मुक्त और सुरक्षित–समृद्ध बस्तर हमारा संकल्प : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर को हिंसा से मुक्त कर शांति, विकास और विश्वास के मार्ग पर आगे बढ़ाना राज्य सरकार का दृढ़ संकल्प है। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा  कि जिला सुकमा के गोंदीगुड़ा क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा की गई सटीक, साहसिक और सफल कार्रवाई ने माओवादी नेटवर्क को करारा झटका दिया है। यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बस्तर में हिंसा के दिन अब समाप्ति की ओर हैं और बस्तर तेज़ी से विकास तथा मुख्यधारा की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के दृढ़ नेतृत्व एवं स्पष्ट नीति, सुरक्षा बलों की सतत और प्रभावी कार्रवाई, राज्य सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति तथा स्थानीय जनता के अटूट सहयोग से बस्तर में निर्णायक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। माओवाद की संरचना लगातार कमजोर हो रही है और उनकी हिंसक साजिशें अब प्रभावहीन होती जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संदेश है—जो लोग हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए पुनर्वास, आजीविका, सुरक्षा और सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित किया जाएगा। राज्य सरकार ऐसे सभी लोगों के साथ मानवीय दृष्टिकोण से खड़ी है। वहीं, जो अब भी हथियार और भय के रास्ते को नहीं छोड़ेंगे, उनके प्रति सरकार की कोई सहानुभूति नहीं होगी। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि शांति, विकास और जनभागीदारी के संयुक्त प्रयासों से बस्तर एक सुरक्षित, समृद्ध और उज्ज्वल भविष्य की ओर तेजी से अग्रसर होगा।
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राज्य में नई गाइडलाइन दरें लागू : वैज्ञानिक युक्तिकरण से बाजार मूल्य के अनुरूप निर्धारण

 केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड, छत्तीसगढ़ द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य के विभिन्न जिलों की नवीन गाइडलाइन दरों को अनुमोदन प्रदान किया गया है। यह गाइडलाइन व्यापक सर्वेक्षण, क्षेत्रीय अध्ययन तथा वैज्ञानिक, निष्पक्ष और तर्कसंगत आधार पर तैयार की गई है। नई दरें 20 नवंबर 2025 से प्रदेशभर में प्रभावशील हैं। शासन का उद्देश्य भूमि के वास्तविक बाजार मूल्य को प्रतिबिंबित करना, वर्षों से चली आ रही विसंगतियों को समाप्त करना तथा भूमि क्रय-विक्रय और पंजीयन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं जनहितैषी बनाना है।


इसी कड़ी में रायगढ़ जिले की नई गाइडलाइन दरों को अनुमोदन प्रदान किया गया है। कार्यालय जिला पंजीयक रायगढ़ के अनुसार यह गाइडलाइन दरें विभाग द्वारा किए गए व्यापक सर्वेक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन एवं निष्पक्ष विश्लेषण के आधार पर तैयार की गई हैं। नई दरें पारदर्शी, सरल एवं व्यवहारिक हैं, जिनमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में दरों का नए सिरे से युक्तियुक्तकरण किया गया है। इससे जिले में भूमि क्रय-विक्रय, पंजीयन एवं राजस्व प्रक्रिया अधिक सुगम होगी तथा किसानों, आम नागरिकों और व्यापारियों की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप संतुलन स्थापित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग आठ वर्षों से गाइडलाइन दरों में कोई व्यापक परिवर्तन नहीं हुआ था। इस अवधि में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के चलते नई सड़कें, गलियां और आवासीय क्षेत्र विकसित हुए, वहीं पुराने गाइडलाइन ढांचे में लगातार नई कंडिकाएं जुड़ती चली गईं। परिणामस्वरूप एक ही वार्ड या एक ही सड़क पर अलग-अलग दरें प्रचलित हो गई थीं। इससे जहां शासकीय गाइडलाइन दर और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच बड़ा अंतर उत्पन्न हो गया था, वहीं भूमि स्वामियों को आर्थिक हानि के साथ-साथ बैंक ऋण एवं भू-अर्जन में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इन सभी विसंगतियों को दूर करने के उद्देश्य से वर्ष 2025-26 में वैज्ञानिक एवं पारदर्शी पद्धति से नई कलेक्टर दर गाइडलाइन तैयार की गई है।

जिले के सभी उपपंजीयक कार्यालय रायगढ़, खरसिया, घरघोड़ा एवं धरमजयगढ़ में पूर्व में 141 वार्डों में कुल 515 कंडिकाएं थीं, जिन्हें समायोजित कर अब 178 कंडिकाएं निर्धारित की गई हैं। नगरीय क्षेत्रों में गाइडलाइन दरें पूर्व की असमानताओं को समाप्त करते हुए पुनर्गठित की गई हैं। रायगढ़ नगर पालिक निगम क्षेत्र में पहले 48 वार्डों में 295 कंडिकाएं थीं, जिन्हें विलोपित कर अब 48 वार्डों में केवल 71 कंडिकाएं रखी गई हैं। इसका उद्देश्य दरों में एकरूपता लाना और एक ही क्षेत्र के लिए अलग-अलग दरों की विसंगति को समाप्त करना है।

उदाहरणस्वरूप नगर निगम रायगढ़ के वार्ड क्रमांक 1 में कोतरा रोड जैसे एक ही मार्ग पर पहले अलग-अलग कंडिकाओं के कारण भिन्न दरें प्रचलित थीं। कहीं मुख्य मार्ग की दर 10,790 रुपये थी तो कहीं 10,000 रुपये, जबकि अंदरूनी क्षेत्रों की दरें भी अलग-अलग थीं। नई गाइडलाइन में इन सभी कंडिकाओं को समेकित कर एक ही मार्ग पर आमने-सामने समान दरें निर्धारित की गई हैं तथा वार्ड सीमाओं के भीतर अंदरूनी क्षेत्रों की दरों को भी एकसमान किया गया है। इसी प्रकार वार्ड क्रमांक 12 में एक ही सड़क पर विभिन्न कंडिकाओं के कारण 40,000 रुपये से लेकर 13,300 रुपये तक की अलग-अलग मुख्य मार्ग दरें थीं, जिन्हें अब युक्तियुक्तकरण कर एक समान कर दिया गया है।

एक ही मुख्य मार्ग से लगे अलग-अलग वार्डों में भी पूर्व में दरों में भारी अंतर पाया गया था। उदाहरण के तौर पर रेलवे अंडरब्रिज से जुटमिल मार्ग या मुस्लिम कब्रिस्तान से खराखाट रपटा पुल जैसे मार्गों पर अलग-अलग वार्डों में अलग-अलग दरें थीं, जबकि बाजार मूल्य लगभग समान था। नई गाइडलाइन में ऐसे सभी मामलों में पूरे मार्ग पर समान दरें लागू की गई हैं। इसी प्रकार वार्ड क्रमांक 17 के मुख्य मार्ग की युक्तियुक्त दर को वार्ड क्रमांक 01, 14, 15, 16, 39 एवं 40 तक समान रूप से लागू किया गया है।

नगर निगम क्षेत्र की कॉलोनियों में भी व्यापक सुधार किया गया है। वर्तमान में नगर निगम सीमा के भीतर 267 कॉलोनियां और सीमा के बाहर 11 कॉलोनियां हैं। पूर्व में इन कॉलोनियों की दरों में काफी भिन्नता थी, जिसे समाप्त कर समान प्रकृति और समान सुविधाओं वाली कॉलोनियों के लिए एकसमान दरें निर्धारित की गई हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में गाइडलाइन का निर्धारण नक्शों और जियो-लोकेशन आधारित सर्वे के माध्यम से किया गया है। सर्वे में यह पाया गया कि मुख्य मार्ग और अन्य मार्ग पर स्थित समान प्रकार की भूमि का बाजार मूल्य लगभग समान है। इसी आधार पर मुख्य मार्ग तथा अन्य मार्ग के आमने-सामने स्थित भूमि की दरों में समानता रखी गई है। ग्रामों से होकर गुजरने वाली सड़कों के दोनों ओर स्थित गांवों की दरों को भी एकसमान किया गया है। आसपास स्थित और समान महत्व वाले ग्रामों को वर्गीकृत कर प्रत्येक वर्ग के लिए एक समान दर निर्धारित की गई है।

उदाहरण के रूप में रायगढ़–खरसिया मुख्य मार्ग पर स्थित ग्राम जोरापाली, धनागर और रामपुर छोटे; रायगढ़–घरघोड़ा मार्ग पर लाखा, गेरवानी और शिवपुरी; तथा रायगढ़ से जिंदल स्टील प्लांट होते हुए खरसिया मार्ग पर खैरपुर और बिराईपानी में समान परिस्थितियों के आधार पर दरों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। वहीं रायगढ़ से ओडिशा नेशनल हाईवे के बीच स्थित ग्राम झलमला, भाठनपाली, दूमरमुडा और मिडमिका में मुख्य मार्ग और अंदरूनी क्षेत्रों के बीच वर्षों से चली आ रही विसंगतियों को भी समायोजित किया गया है।

इसके साथ ही शासन द्वारा जनसुविधा की दृष्टि से कई महत्वपूर्ण राहतें भी दी गई हैं। हकत्याग, दानपत्र एवं बंटवारा नामा जैसे दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क मात्र 500 रुपये निर्धारित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्गमीटर दर को समाप्त कर भूमि का मूल्यांकन हेक्टेयर दर पर किए जाने का प्रावधान किया गया है। परिवर्तित भूमि में सिंचित भूमि की दो गुना गणना समाप्त की गई है तथा वृक्षों पर लगने वाले प्रभार भी समाप्त कर दिए गए हैं।

नई गाइडलाइन दरों के निर्धारण में शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों, जनसामान्य के हित, पारदर्शिता और वैज्ञानिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जिले के सभी वार्डों और कॉलोनियों में वर्षों से चली आ रही असमानताओं को दूर करते हुए दरों को तर्कसंगत, संतुलित और न्यायसंगत बनाया गया है। नई व्यवस्था से जहां आम नागरिकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी, वहीं भूमि क्रय-विक्रय और पंजीयन की प्रक्रिया अधिक सरल, स्पष्ट और पारदर्शी होगी।
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मुख्यमंत्री श्री साय से साहू समाज के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से विगत दिवस छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन में साहू समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने साहू समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारी को बधाई और शुभकामनाएं दी। 


इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, विधायक श्री ईश्वर साहू, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू सहित साहू समाज के नवनिर्वाचित प्रांतीय अध्यक्ष डॉ नीरेंद्र साहू,उपाध्यक्ष श्री सत्यप्रकाश साहू, श्री गिरजा साहू, श्री नारद साहू, श्री नन्द लाल साहू श्री चंद्रभूषण साहू सहित साहू समाज के नवनिर्वाचित राज्य स्तरीय तथा जिला स्तरीय पदाधिकारीगण उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री साय से मास्टर एथलीट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रतिभागियों ने की सौजन्य भेंट

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से विगत दिवस छत्तीसगढ़ विधानसभा के कार्यालय कक्ष में  मास्टर एथलीट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रतिभागियों के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। मास्टर एथलीट फेडरेशन ऑफ इंडिया के द्वारा 5 से 9 नवम्बर तक चेन्नई में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का नाम रोशन किया।


इस प्रतियोगिता में प्रदेश के भिलाई, बिलासपुर, महासमुंद और बस्तर से आए खिलाड़ियों ने भाग लिया और विभिन्न स्पर्धाओं में जीत हासिल की। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और लगन से छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। उन्होंने भविष्य में भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल उपस्थित थे।
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‘मनखे-मनखे एक समान’ की भावना को साकार करता मेगा हेल्थ कैम्प : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने परम् पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर में मानव सेवा, सामाजिक समरसता और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर में 18 से 22 दिसंबर तक आयोजित 5 दिवसीय निःशुल्क मेगा हेल्थ कैम्प 2025 का भव्य शुभारंभ किया।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए अमन, चैन और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि यह 5 दिवसीय निःशुल्क मेगा हेल्थ कैम्प हजारों लोगों के लिए स्वास्थ्य संजीवनी सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने गठन के रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है और इन 25 वर्षों में स्वास्थ्य सहित सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ सुनिश्चित कर रही है। वहीं राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत गंभीर बीमारियों के उपचार हेतु ₹25 लाख तक की सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि “हेल्थ इज वेल्थ” केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन को बचाने और संवारने का संकल्प है। मुख्यमंत्री ने विधायक श्री राजेश मूणत एवं उनकी पूरी टीम को इस विशाल आयोजन के लिए बधाई दी और कैम्प परिसर में विभिन्न जांच स्टालों का अवलोकन भी किया।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इस अवसर पर कहा कि यह आयोजन मात्र एक स्वास्थ्य शिविर नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय करुणा की सशक्त अभिव्यक्ति है। बाबा गुरु घासीदास जी के “सत्य, अहिंसा और समानता” के संदेश से प्रेरित यह महाअभियान समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने का अनुकरणीय प्रयास है। उन्होंने बताया कि 100 से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सकों की सहभागिता से यह कैम्प केवल प्राथमिक जांच तक सीमित नहीं, बल्कि अंतिम निदान एवं उपचार तक का समग्र समाधान प्रदान कर रहा है। डॉ. सिंह ने आयोजन की सुव्यवस्थित व्यवस्था और व्यापक प्रभाव की सराहना की।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती पर आयोजित यह स्वास्थ्य महाकुम्भ समाज के हर वर्ग के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग इस कैम्प में स्वास्थ्य लाभ लेने पहुँचे हैं। जिन रोगियों का उपचार कैम्प में संभव नहीं होगा, उन्हें आयुष्मान कार्ड के माध्यम से संबद्ध संस्थानों में निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार की प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम के आयोजक एवं विधायक श्री राजेश मूणत ने बताया कि बाबा गुरु घासीदास जी के अमर संदेश “मनखे-मनखे एक समान” से प्रेरित होकर इस मेगा हेल्थ कैम्प का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि एक ही छत के नीचे स्वास्थ्य की सभी प्रमुख विधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं, जहाँ एक्स-रे, ईको, सोनोग्राफी सहित विविध जांचें एवं आवश्यक दवाइयाँ पूर्णतः निःशुल्क दी जा रही हैं। महिलाओं के लिए ब्रेस्ट कैंसर जांच हेतु अत्याधुनिक मशीनों की विशेष व्यवस्था की गई है। एम्स रायपुर, बालाजी, रावतपुरा, गंगा डायग्नोसिस सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थान और देशभर से आए विशेषज्ञ चिकित्सक इस सेवा कार्य में सहभागिता निभा रहे हैं।

कार्यक्रम को विधायक श्री किरण सिंह देव ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्री सुनील सोनी, श्री पुरंदर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू, श्री अनुज शर्मा, श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष श्री रूप नारायण सिन्हा, एम्स रायपुर के निदेशक डॉ. अशोक जिंदल, वरिष्ठ चिकित्सकगण, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
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वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण हर भारतीय के लिए गर्व का विषय – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  वंदेमातरम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वंदे मातरम्  देशप्रेम का वह जज्बा था जिसकी गूंज से ब्रिटिश हुकूमत तक कांप उठती थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह उद्घोष करोड़ों भारतीयों के हृदय में साहस, त्याग और बलिदान की अग्नि प्रज्वलित करता रहा। उन्होंने कहा कि यह वही स्वर था जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की शक्ति प्रदान की।


उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को स्मरण करते हुए कहा कि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस सहित असंख्य क्रांतिकारी वंदे मातरम् का जयघोष करते हुए मां भारती के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए। उनका बलिदान आज भी हर भारतीय को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण करना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। यह गीत हमें उस संघर्ष, उस पीड़ा और उस अदम्य साहस की याद दिलाता है, जिसने भारत को स्वतंत्रता दिलाई। यह हमारी राष्ट्रीय चेतना का आधार स्तंभ है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती, जो मानचित्र पर अंकित होती हैं। किसी राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसकी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं और उन मूल्यों से होती है, जो सदियों से उसके आचार-विचार और जीवन पद्धति का हिस्सा रहे हैं। भारत की यह सांस्कृतिक निरंतरता विश्व में अद्वितीय है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा आयोजित करने का उद्देश्य यह भी है कि हम इतिहास की उन गलतियों को कभी न भूलें, जिन्होंने देश को गहरे घाव दिए, जिनकी पीड़ा आज भी हमारे समाज में कहीं-न-कहीं महसूस की जाती है। इतिहास से सीख लेकर ही हम एक सशक्त और समरस भारत का निर्माण कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उन सभी वीर सपूतों को नमन किया, जिन्होंने वंदे मातरम् के भाव को अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर भारत माता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् हमें हमारी विरासत, हमारी सांस्कृतिक चेतना और हजारों वर्षों की सभ्यता से जोड़ता है। यह उन आदर्शों की सामूहिक अभिव्यक्ति है, जिन्हें हमने युगों-युगों में आत्मसात किया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धरती को माता के रूप में पूजने की भावना रही है, जिसे हम मातृभूमि कहते हैं। वंदे मातरम् इसी भाव का सशक्त और पवित्र स्वरूप है, जो हमें प्रकृति, भूमि और राष्ट्र के प्रति सम्मान और कर्तव्यबोध सिखाता है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस विशेष चर्चा के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष तथा सभी  सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विमर्श नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक चेतना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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