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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज दंतेवाड़ा में बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की  पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय और परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित थे। इस अवसर पर विधायक  चैतराम अटामी, राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मण्डावी तथा अन्य जनप्रतिनिधियों सहित मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित थे।
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बस्तर से नक्सल उन्मूलन में सुरक्षा जवानों की है अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सीआरपीएफ के जवानों से कहा कि पिछले 11 महीनों के दौरान आप लोगों ने जिस तरह नक्सली आतंक को खत्म करने की दिशा में ऐतिहासिक सफलताएं हासिल की हैं, उसकी पूरे देश में प्रशंसा हो रही है। आप लोग परिवार से दूर रहकर और सुख-सुविधाओं को त्याग कर बस्तर के विकास में जो योगदान दे रहे हैं, उससे आप लोगों ने यहां के जनजातीय समुदायों के हृदय में अपने लिए हमेशा हमेशा के लिए जगह बना ली है। साय बस्तर जिले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल  के सेडवा कैंप में जवानों को सम्बोधित कर रहे थे। 
 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अचानक सीआरपीएफ कैंप पहुंचने पर आश्चर्यमिश्रित खुशी के साथ ही जवानों ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। 
मुख्यमंत्री साय ने सुरक्षा बलों के जवानों से आत्मीयतापूर्वक संवाद करते हुए कहा कि जब मैं बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में चित्रकोट आया था, तो मेरी बड़ी इच्छा थी कि मैं आप सब जवानों से मिलूं। पिछले 11 महीनों में छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर जो सफलता मिली है, उसमें आप सभी का अत्यधिक महत्वपूर्ण योगदान है। मैं आप सभी के साहस को नमन करता हूं। नक्सल अभियान में आप सभी को जो सफलता मिल रही है, उसकी पूरे देश में प्रशंसा हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जब भी मेरी मुलाकात होती है तो वे नक्सल अभियान में छत्तीसगढ़ को मिल रही सफलता का जिक्र जरूर करते हैं। गृह मंत्री अमित शाह का नक्सल ऑपरेशन में सतत मार्गदर्शन और सहयोग मिलते रहा है। 
 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में हमने नक्सलवाद को वर्ष 2026 तक समूल नष्ट करने का संकल्प लिया है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का भी यही संदेश है। 
 
बस्तर में पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों ने अल्प अवधि में ही 200 से ज्यादा नक्सलियों को ढेर कर दिया है। 740 से ज्यादा माओवादी कैडर्स ने आत्मसमर्पण कर दिया है। वे हिंसा त्याग कर लोकतंत्र की मुख्य धारा में शामिल हो गए हैं।शासन ने हिंसा का त्याग करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए ऐसी नीति बनाई है कि आने वाले दिनों में और भी बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे।
सुरक्षा बल के जवानों द्वारा कैंप में रात्रि विश्राम करने के आग्रह पर उन्होंने कैंप में रात्रि विश्राम भी किया।
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शत-प्रतिशत धान खरीदी केन्द्रों में पारदर्शी एवं सुविधाजनक ढंग से हो रही धान खरीदी

 राज्य शासन के निर्देशानुसार खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी कार्य के अंतर्गत बालोद जिले के सभी 143 धान खरीदी केन्द्रों में इलेक्ट्राॅनिक तौल मशीन की सुविधा उपलब्ध होने से जिले के सभी धान खरीदी केन्द्रों में पारदर्शी एवं सुविधाजनक ढंग से धान खरीदी का कार्य संपन्न हो रहा है। जिले के सभी धान खरीदी केन्द्रों में इलेक्ट्राॅनिक तौल मशीन उपलब्ध होने से शीघ्रता एवं आसानी से किसानों के धान खरीदी होने के साथ-साथ धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न हो रहा है। इस नई व्यवस्था से बालोद जिले के किसानों में हर्ष व्याप्त है। जिले के आदिवासी बाहुल्य डौण्डी विकासखण्ड के ग्राम छिंदगांव के कृषक जोहार एवं ग्राम भण्डारी पारा डौण्डी के कृषक भागीरथी ने राज्य शासन की इस नई व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे किसानों के लिए अत्यंत कारगर एवं लाभप्रद बताया। उन्होंने कहा कि धान खरीदी केन्द्र में इलेक्ट्राॅनिक तौल मशीन की सुविधा उपलब्ध होने से इस वर्ष शीघ्रता से बिना किसी परेशानी के उनकी धान की खरीदी हो गई। किसानों ने कहा कि इस नई व्यवस्था से धान खरीदी केन्द्र में किसी भी प्रकार की हेर-फेर की गुंजाईश नही है। जिसके कारण हम सभी कृषक बहुत ही प्रसन्नचित है।

धान खरीदी केन्द्रों में इलेक्ट्राॅनिक तौल मशीन की उपलब्ध सुविधा के संबंध में जानकारी देते हुए किसान जोहार ने बताया कि इस नई व्यवस्था से हम किसानों के धान बिक्री का कार्य बहुत ही आसान हो गया है। उन्होंने बताया कि उनके पास उनके ग्राम छिंदगांव में मात्र 01 एकड़ खेती योग्य कृषि भूमि है। वे इस कृषि भूमि में खेती के अलावा मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण का कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि धान खरीदी के पहले दिन 14 नवंबर को विकासखण्ड मुख्यालय डौण्डी के धान खरीदी केन्द्र में अतिथियों द्वारा उनका स्वागत, अभिनंदन के बाद उनके धान की खरीदी की गई। किसान जोहार ने बताया कि धान खरीदी के कर्मचारियों के द्वारा धान खरीदी केन्द्र के इलेक्ट्राॅनिक तौल मशीन के माध्यम से बहुत ही कम समय में आसानी एवं पूरे पारदर्शी तरीके से उनके धान खरीदी के कार्य को पूरा किया गया। इस दौरान उन्होंने कुल 20 क्विंटल धान की बिक्री की और इस कार्य में उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी नही हुई। किसान जोहार ने राज्य शासन के इस धान खरीदी योजना से मिले राशि को अपने जरूरत के समय के लिए बहुत बड़ा सहारा बताते हुए इसकी भूरी-भूरी सराहना की है। किसान जोहार ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में धान खरीदी योजना से मिले राशि का उपयोग उन्होंने अपने खेती बाड़ी के अलावा अन्य पारिवारिक कार्यों के लिए किया है।

 

इसी तरह राज्य सरकार के समर्थन मूल्य पर धान खरीदी योजना तथा सभी धान खरीदी केन्द्रों में की गई इलेक्ट्राॅनिक तौल मशीन की नई व्यवस्था की सराहना विकासखण्ड मुख्यालय डौण्डी के भण्डारी पारा के कृषक श्री भागीरथी ने भी किया है। उन्होंने कहा कि धान खरीदी केन्द्र में इलेक्ट्राॅनिक तौल मशीन की नई व्यवस्था ने किसानों के धान बिक्री के कार्य को बहुत ही आसान बना दिया है। जिसके कारण धान खरीदी केन्द्र में बहुत ही शीघ्रता, आसान एवं पारदर्शी तरीके से धान खरीदी का कार्य संपन्न हो रहा है। उन्होंने बताया कि उनके पास कुल 01 एकड़ 40 डिस्मिल पैतृक कृषि भूमि है। उन्होंने धान खरीदी केन्द्र डौण्डी में कुल 15 क्ंिवटल 60 किलो धान की बिक्री की है। किसान भागीरथी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय वाले छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा प्रति क्ंिवटल 3100 रुपए की दर से प्रति एकड़ 21 क्ंिवटल धान खरीदी के निर्णय की भूरी-भूरी सराहना की है। उन्होंने कहा कि किसान पुत्र मुख्यमंत्री ने किसानों के वास्तविक जरूरतों को समझते हुए उनके मेहनत का सम्मान करते हुए प्रति एकड़ 3100 रुपए में धान खरीदी करने का निर्णय लिया है, वास्तव में वह काबिले तारीफ है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उनके प्रति विनम्र आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा राज्य शासन के सभी धान खरीदी केन्द्रों में इलेक्ट्राॅनिक तौल मशीन की नई व्यवस्था से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य किसानों के लिए सोने पे सुहाग साबित हो रहा है।

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गुरू घासीदास-तमोर पिंगला बना देश का 56वां टाइगर रिजर्व

 छत्तीसगढ़ को बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए ‘गुरू घासीदास-तमोर पिंगला टायगर रिजर्व‘ के रूप में एक नया टायगर रिजर्व मिल गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण घोषणा के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव को धन्यवाद दिया है। यह टायगर रिजर्व देश का 56वां टायगर रिजर्व होगा। गुरू घासीदास-तमोर पिंगला टायगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 2829.387 वर्ग किलोमीटर होगा। इनमें आरक्षित वन 1254.586 वर्ग किलोमीटर, संरक्षित वन 1438.451 वर्ग किलोमीटर तथा राजस्व क्षेत्र 136.35 वर्ग किलोमीटर शामिल हैं।
 
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व को देश के 56वें टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित किए जाने की जानकारी राष्ट्र को दी है। उन्होंने कहा कि भारत बाघ संरक्षण में नए मील के पत्थर स्थापित कर रहा है, इसी क्रम में हमने छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास-तमोर पिंगला को 56वें टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया है। गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व 2,829 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
 
छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की सलाह पर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों में गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व को अधिसूचित किया। कुल 2829.38 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस बाघ अभयारण्य में 2049.2 वर्ग किलोमीटर का कोर/ क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट शामिल है, जिसमें गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और तमोर पिंगला वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं, और इसका बफर क्षेत्र 780.15 वर्ग किलोमीटर का है। यह इसे आंध्र प्रदेश के नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व और असम के मानस टाइगर रिजर्व के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बनाता है। गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व देश में अधिसूचित होने वाला 56वां टाइगर रिजर्व बन गया है।
 
भारत की राष्ट्रीय वन्यजीव योजना में परिकल्पित संरक्षण के लिए परिदृश्य दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, नव अधिसूचित बाघ अभयारण्य मध्य प्रदेश में संजय दुबरी बाघ अभयारण्य से सटा हुआ है, जो लगभग 4500 वर्ग किलोमीटर का परिदृश्य परिसर बनाता है। इसके अलावा, यह अभयारण्य पश्चिम में मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य और पूर्व में झारखंड के पलामू बाघ अभयारण्य से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने अक्टूबर, 2021 में गुरु घासीदास-तमोर पिंगला बाघ अभयारण्य को अधिसूचित करने के लिए अंतिम मंजूरी दी थी।
 
छोटा नागपुर पठार और आंशिक रूप से बघेलखंड पठार में स्थित यह बाघ अभयारण्य विविध भूभागों, घने जंगलों, नदियों और झरनों से समृद्ध है, जो समृद्ध जीव विविधता के लिए अनुकूल हैं और इसमें बाघों के लिए महत्वपूर्ण आवास मौजूद हैं।
 
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण द्वारा गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व से 365 अकशेरुकी और 388 कशेरुकी सहित कुल 753 प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया है। अकशेरुकी जीवों का प्रतिनिधित्व ज्यादातर कीट वर्ग द्वारा किया जाता है। कशेरुकी जीवों में पक्षियों की 230 प्रजातियाँ और स्तनधारियों की 55 प्रजातियाँ शामिल हैं, जिनमें दोनों समूहों की कई संकटग्रस्त प्रजातियाँ शामिल हैं।
 
इस अधिसूचना के साथ, छत्तीसगढ़ में अब 4 बाघ रिजर्व हो गए हैं, जिससे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से मिल रही तकनीकी और वित्तीय सहायता से इस प्रजाति के संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
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बस्तर में पर्यटन को बढ़ावा देने बनेगा टूरिज्म कॉरिडोर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में चित्रकोट में आयोजित बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की पहली बैठक में बस्तर में पर्यटन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए टूरिज्म कॉरिडोर बनाने पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही बस्तर अंचल के पर्यटन के लिए चिन्हित स्थानों को विकसित करने के लिए रणनीति तैयार की गई। बैठक में बस्तर में एनएमडीसी द्वारा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के निर्माण के संबंध में भी चर्चा की गई। इस मौके पर साय ने सौर समाधान और मनो बस्तर एप्प लॉन्च किया तथा सौर ऊर्जा चलित पॉवर बैंक का शुभारंभ किया। 
 
मुख्यमंत्री साय ने संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के उन्नयन कार्यक्रम के लिए कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित धूड़मारास गांव के चयन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे बस्तर को नई पहचान मिली है। उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र के पर्यटन ग्राम उन्नयन कार्यक्रम के लिए 60 देशों से चयनित 20 गांवों में भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के धूड़मारास ने भी अपनी जगह बनाई है।
 
मुख्यमंत्री साय ने प्राधिकरण की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने बस्तर और सरगुजा के विकास पर अपना ध्यान विशेष रूप से केंद्रित किया है। इन क्षेत्रों के विकास में आदिवासी विकास प्राधिकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि जनजाति क्षेत्रों के विकास के लिए राशि की कोई कमी नहीं होगी। सीएसआर मद में भी काफी राशि उपलब्ध है। प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है। केन्द्र और राज्य दोनों में जनजातीय समुदायों के विकास के लिए संवेदनशील सरकारें हैं। 
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक माओवादी आतंकवाद को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में राज्य में बेहतर काम हो रहा है। माओवादी आतंकवाद छोटे से क्षेत्र में सिमट कर रह गया है। हम लोगों ने बस्तर में पूर्ण शांति बहाली करते हुए अंदरूनी क्षेत्रों तक लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने का संकल्प लिया है। यह तभी होगा जब शासन के प्रति नागरिकों का विश्वास मजबूत होगा। यह विश्वास विकास से ही निर्मित होगा।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल, अस्पताल, आंगनवाड़ी, पेयजल, बिजली, मोबाइल टॉवर जैसी अधोसंरचनाएं अंदरूनी गांवों तक पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के तहत 34 नए सुरक्षा कैंप खोले गए हैं जहां ग्रामीणों को विभिन्न सुविधाएं भी दी जा रही हैं। बस्तर में शांति कायम हो, इसके लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारें सतत प्रयास कर रही हैं। बैठक में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों से अमूल्य सुझाव मिले। सभी टीम भावना से काम करके विकास के प्रति एकजुटता दिखाएं।
 
केशकाल घाट सुधार कार्य को जल्द पूर्ण कराने के निर्देश 
 
मुख्यमंत्री साय ने केशकाल घाट सुधार कार्य को जल्द पूर्ण कराने और प्राधिकरण मद से स्वीकृत सभी कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण कराने निर्देशित किया। उन्होंने कलेक्टर बस्तर को  देवगुड़ी, मातागुडी के अप्रारंभ कार्यों को डेढ़ महीने में पूर्ण करने के निर्देश कलेक्टर को दिए। मुख्यमंत्री साय ने दंतेवाड़ा के ग्राम नेरली, धुरली में लाल पानी की समस्या सहित विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए एनएमडीसी को समाधानकारक उपाय करने के निर्देश दिए और कहा कि संबंधित कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर संयुक्त बैठक कर आवश्यक पहल करें।
 
मंत्रीगणों एवं जनप्रतिनिधियों ने दिए सुझाव 
 
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री की पहल पर बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। नियद नेल्लानार जैसी योजना और बस्तर ओलंपिक का आयोजन मुख्यमंत्री जी के विकास की पहल को दर्शाता है। वन मंत्री  केदार कश्यप ने मत्स्यपालन, डेयरी उद्यमिता को बढ़ावा देने और किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने नदी किनारे विद्युत लाईन बिछाने, अटल व्यावसायिक परिसर, एफआरए क्लस्टर में सामूहिक खेती को प्रोत्साहित करने के सुझाव दिए। 
 
उन्होंने कहा कि बस्तर में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, ऐसे में बस्तर में नई खेल अकादमियों की स्थापना के लिए पहल की जाए। 
 
वित्त मंत्री ओ.पी चौधरी ने क्षेत्र में होटल मैनेजमेंट संस्थान, नर्सिंग कॉलेज, ऑर्गेनिक, नैचुरल फॉर्मिंग प्रारंभ करने  पोटा केबिन को स्थायी बनाने का सुझाव दिया। बस्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सुश्री लता उसेंडी ने बस्तर क्षेत्र में  शिक्षा, उद्यमिता के विकास के लिए कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने प्रत्येक गांव में  कृषि सेवा केंद्र प्रारंभ करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बस्तर को पर्यटन के क्षेेत्र में विश्व पटल पर स्थापित करने पर भी बल दिया। विधायक  किरणदेव सिंह ने कहा कि शोधार्थी छात्रों को सुविधाएं देने सेंट्रल इंस्ट्रुमेंटल लैबोरेटरी की स्थापना की जाए। 
 
आकांक्षी जिलों में अभियान चलाकर रिक्त पदों की भर्ती 
 
मुख्य सचिव  अमिताभ जैन ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में पुलिस बलों को बड़ी सफलता मिल रही है। प्रभावित क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं को पहुंचाने 95 गांवों में सर्वे किया जा रहा है। उन्होंने आकांक्षी जिलों में रिक्त पदों पर भर्ती के लिए जिला प्रशासन को अभियान चलाकर प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए। कांकेर कलेक्टर ने बैठक में बताया कि रावघाट परियोजना के तहत प्रभावित सभी किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है। बीएसपी के प्रतिनिधि ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र के 153 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। सचिव शिक्षा ने बताया कि बस्तर अंचल में एक भी स्कूल बंद नहीं किया गया है। उन्होंने भवनविहीन स्कूलों के लिए भवन का प्रावधान करने की जानकारी दी।
 
बैठक में खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सहित बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप और बस्तर संभाग के समस्त विधायकगण, जिला पंचायत अध्यक्ष, अपर मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, प्रमुख सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जनजाति विभाग, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद और श्री राहुल भगत, सदस्य सचिव प्राधिकरण  डॉ बसवराजु एस., विभिन्न विभागों के सचिव, कमिश्नर बस्तर, आईजी,  सहित संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक बैठक में उपस्थित थे।
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बस्तरिया रंग में रंगे दिखे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में शामिल हुए| यहां उन्होंने बस्तर के विकास एवं विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की एवं जनप्रतिनिधियों से सुझाव भी मांगे| इस दौरन प्राधिकरण की बैठक एवं बस्तर आने को लेकर मुख्यमंत्री श्री साय का बस्तर के प्रति जुड़ाव विशेष रूप से देखने को मिला, मुख्यमंत्री ने बस्तर के लिए टेकऑफ़ से पहले हल्बी और पहुंचने पर गोंडी में ट्वीट किया| इसके बाद एक के बाद एक ट्वीट के जरिए मुख्यमंत्री साय का बस्तर की लोक संस्कृति, यहां के लोगों, उनकी परंपराओं और यहां के मनोरम पर्यटन के प्रति प्रेम दिखा| 
 
मुख्यमंत्री ने टेकऑफ़ से पहले हल्बी बोली में ट्वीट कर बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में शामिल होने की जानकारी देते हुए इसे क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने वाला बताया| बैठक में शामिल होते हुए उन्होंने गोंडी में ट्वीट किया, इस ट्वीट के साथ मुख्यमंत्री स्वयं भी गौर सिंग मुकुट पहनकर मांदर पर थाप देते नजर आए| उन्होंने अपनी फोटो पोस्ट कर लिखा कि – बस्तर आकर मांदर की थाप पर गौर नृत्य का आनंद लिया, बस्तर आकर यहां की संस्कृति का हिस्सा बनना कमाल का अनुभव है| गौरतलब है कि यह पहली बार है जब कोई मुख्यमंत्री बस्तर गये हों और वहां की क्षेत्रीय बोली के जरिए अपनी बात सार्वजानिक रूप से लोगों तक पहुंचाई हो| 
 
प्राधिकरण की बैठक में शामिल होने चित्रकोट पहुंचने पर मुख्यमंत्री का स्वागत बस्तरिया अंदाज में हुआ, साय स्वयं भी बस्तरिया रंग में रंगे दिखे, उनके स्वागत में बस्तरिया लोक नर्तक दलों ने लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी| मुख्यमंत्री ने चित्रकोट जलप्रपात के पास खड़े होकर एक फोटो भी पोस्ट की, जिसके जरिए उन्होंने बस्तर के पर्यटन के प्रति अपनी विशेष रूचि जाहिर की|
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जनजातीय परंपरा के संरक्षक बैगा, गुनिया और सिरहा को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सर्किट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में जनजातीय परंपरा के संरक्षक बैगा, गुनिया और सिरहा को शाल और श्रीफल देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि बैगा, गुनिया और सिरहा जैसे परंपरागत जनजातीय समुदायों को अब प्रत्येक वर्ष 5-5 हजार रुपये की सम्मान निधि दी जाएगी। यह पहल जनजातीय समाज की सांस्कृतिक परंपराओं को प्रोत्साहन देने के साथ उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि सरकार जनजातीय समाज की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण और विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इस तरह के फैसले छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके गौरव को बढ़ाने में सहायक साबित होंगे।मुख्यमंत्री  साय ने जनजातीय समुदाय की परंपराओं को संजोने और उन्हें समाज के विकास में भागीदार बनाने के महत्व पर जोर दिया। इस अवसर पर  वनमंत्री  केदार कश्यप, विधायक जगदलपुर श्री किरण देव, पूर्व विधायक महेश गागड़ा सहित  स्थानीय जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री ने बस्तर विकास प्राधिकरण की बैठक में एनएमडीसी के रवैये पर जताई नाराजगी

मुख्यमंत्री  विष्णु  देव  साय की अध्यक्षता  में  आज चित्रकोट में  बस्तर  विकास  प्राधिकरण  की  बैठक शुरू  हुई। मुख्यमंत्री साय ने एनएमडीसी  के रवैये  पर  नाराजगी  व्यक्त  की। मुख्यमंत्री ने सी एस आर  मद में प्रेषित प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृत करने प्रबंधन को दिए निर्देश। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर समस्याओं के समाधान के दिए निर्देश दिए।
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मुख्यमंत्री साय हल्बी और गोंडी में ट्वीट कर बस्तर के लोगों को दिया संदेश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बस्तर विकास प्राधिकरण की बैठक में  शामिल  होंगे। बैठक बस्तर के चित्रकोट में आयोजित है। 
 
मुख्यमंत्री श्री साय सुबह 10 बजे हेलीकॉप्टर से जगदलपुर के लिए रवाना होंगे और चित्रकोट में सवेरे 11 बजे से बजे  बैठक में शामिल होंगे। 
 
बैठक में रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री साय ने  अपने एक्स हैंडल से बस्तर की  स्थानीय  बोली हल्बी और   गोंडी में  ट्वीट कर  कहा  कि  दादा-दीदी  मन  के विकास,भलाई  और  विकास की नई  दिशा देने  आयोजित बस्तर विकास  प्राधिकरण की बैठक में  शामिल  होने बस्तर आ  रहा हूं।
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बाइक में गांजा तस्करी करते आरोपी गिरफ्तार

 छत्तीसगढ़ में लगातार गांजा तस्करी के मामले सामने आ रहे है। शनिवार को गरियाबंद पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक अंतरराज्यीय तस्कर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह युवक अपनी बाइक पर दो प्लास्टिक की बोरियों में भारी मात्रा में गांजा लेकर नेशनल हाइवे से गरियाबंद की ओर जा रहा था। इस बीच पुलिस ने उसे धर दबोचा। जानकारी के मुताबिक, इस तस्कर का नाम लिंगराज साहू (उम्र 35 साल) है। जो ओडिशा में नबरंगपुर ज़िले के चंदाहांडी का रहने वाला है। नेशनल हाइवे 130सी में सहायक निरक्षक खुमान लाल महिलांगे अपनी टीम के साथ चेकिंग पॉइंट थे।

इस दौरान तस्कर लिंगराज साहू बाइक पर गांजे से भरी बोरी लादकर जा रहा था। जब टीम ने उसे रोका तो वह हड़बड़ा गया, इस दौरान जब बोरियों को उतारकर चेक किया गया तोह उसमें भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस तस्कर को हिरासत में लेकर थाने ले आई, जहां उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।

 

बता दें कि पुलिस ने जब तस्कर से जब्त गांजे को तौलता उसका वजन 34.070 किलोग्राम पाया गया, इस गांजे की कीमत 3.40 लाख रुपये आंकी गई है। पखवाड़े भर के भीतर देवभोग पुलिस ने गांजे की दूसरी बड़ी खेप पकड़ी है। सूत्रों के मुताबिक, ओडिशा के कालाहांडी नवरंगपुर जिले में गांजा के बड़े पैमाने पर कारोबार किया जाता है। यहां से करीबन 150 किमी दूरी पर स्थित कोरापुट जिले के पहाड़ियों में गांजे की खेती होती है।

 

 

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छत्तीसगढ़ में सर्दी तेज , तापमान पहुंचा 10 डिग्री

 छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले सप्ताह में राज्य में सर्दी की रफ्तार बढ़ेगी।

मौसम विभाग के अनुसार, न्यूनतम तापमान में गिरावट का दौर शुरू हो गया है। शुक्रवार को रात के तापमान में 1 से 2 डिग्री गिरावट दर्ज की गई है।अंबिकापुर, जशपुर, बलरामपुर में पारा 10 डिग्री तक पहुंच गया है। यह सामान्य से कम है। विभाग के अनुसार, अगर दो डिग्री तापमान और गिरता है तो शीत लहर चलनी शुरू हो वहीं, राजधानी रायपुर में रात के तापमान में ये गिरावट हफ्तेभर जारी रहेगा।

प्रदेश में उत्तरी हवाओं का आना शुरू हो गया है इसलिए उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के तापमान में गिरावट हो रही है। विभाग ने कहा कि आने वाले 5 दिनों में राज्य के कई जिलों के तापमान में एक से दो डिग्री की गिरावट हो सकती है।

 

 

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विश्व पर्यटन मानचित्र में बस्तर के धुड़मारास गांव ने बनाई अपनी जगह

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के छोटे से गांव धुड़मारास ने देश और दुनिया में अपनी अनोखी पहचान बनाई है। बस्तर जिले के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के उन्नयन कार्यक्रम के लिए चयनित किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के पर्यटन ग्राम उन्नयन कार्यक्रम के लिए 60 देशों से चयनित 20 गांवों में भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के धुड़मारास ने भी अपनी जगह बनाई है। 
 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि के लिए पर्यटन विभाग की टीम के साथ ही बस्तर जिला प्रशासन तथा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों व कर्मचारियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि धुड़मारास की सफलता का मुख्य श्रेय यहां के स्थानीय निवासियों को जाता है, जिन्होंने अपने पारंपरिक ज्ञान और संसाधनों को संरक्षित रखते हुए इसे आकर्षक पर्यटक स्थल में बदल दिया है। धुड़मारास प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। बस्तर के अदभुत आदिवासी जीवनशैली, पारम्परिक व्यंजन, हरियाली और जैव विविधता से समृद्ध यह गांव पर्यटकों के लिए एक आकर्षक ही नहीं बल्कि रोमांचक स्थल है।
 
धुड़मारास गांव दुनिया भर के उन 20 गांवों में से एक है जिसे सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव उन्नयन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए चुना गया है। धुड़मारास को इसकी अनूठी सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संुदरता और सतत पर्यटन विकास की क्षमता के कारण चुना गया है। उन्नयन कार्यक्रम में शामिल होने से गांव को उन संसाधनों तक पहंुंच प्राप्त होगी जो इसके पर्यटन बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, सांस्कृतिक संपत्तियों को बढ़ावा देने और ग्रामवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार में मदद करेंगे। विश्व स्तर पर पर्यटन गांव के रूप में इस गांव की पहचान स्थापित होने का तात्पर्य यह भी है कि लंबे समय के बाद बस्तर में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है। उल्लेखनीय है कि धुड़मारास तथा बस्तर के ही चित्रकोट गांव को इस वर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव का पुरस्कार मिला था। 
 
      प्रकृति की गोद में बसा धुड़मारास गांव घने जंगलों से घिरा हुआ है। गांव के बीच से बहती कांगेर नदी इसे मनमोहक बना देती है। बस्तर के लोग मेहमाननवाजी के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग अपने घरों को पर्यटकों के लिए उपलब्ध करवा रहे हैं, ठहरने की सुविधा उपलब्ध करवाने से उन्हें रोजगार मिल रहा है। गांव के युवा पर्यटकों को आसपास के क्षेत्रों की सैर कराते हैं। स्थानीय खानपान के अंतर्गत पर्यटकों को बस्तर के पारम्परिक व्यंजन परोसे जाते हैं।
 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर में पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए ट्रैकिंग ट्रेल और कैंपिंग साइट विकसित करने सहित होम-स्टे की सुलभता हेतु पहल कर रही है। साथ ही स्थानीय शिल्पकारों और कलाकारों को प्रोत्साहन दे रही है, जिससे ईलाके के रहवासी ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार की उपलब्धता होने के साथ आय संवृद्धि हो सके। राज्य सरकार पर्यटकों को आकर्षित करने हेतु क्षेत्र में सड़कों और परिवहन सुविधाओं का विकास पर भी ध्यान दे रही है। बस्तर के पर्यटन स्थलों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में देश के पर्यटकों सहित अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए व्यापक प्रचार- प्रसार किया जा रहा है। वहीं स्थानीय हस्तशिल्प और कला को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
 
    छत्तीसगढ़ सरकार के वन एवं पर्यटन विभाग ने धुड़मारास को ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब जिले के नागलसर और नेतानार में भी स्थानीय युवाओं की ईको पर्यटन विकास समिति द्वारा गांव में बहने वाली शबरी एवं कांगेर नदी में कयाकिंग एवं बम्बू राफ्टिंग की सुविधा पर्यटकों को मुहैया कराई जा रही है। साथ ही स्थानीय व्यंजन से पर्यटकों को बस्तर के पारम्परिक खान-पान का स्वाद मिल रहा है।
 
गांव के युवाओं की ईको पर्यटन विकास समिति कांगेर नदी में कयाकिंग और बम्बू राफ्टिंग की सुविधाएं पर्यटकों को उपलब्ध करवाती है, जिससे इस समिति को अच्छी आमदनी हो रही है। यह पर्यटन समिति अब अपनी आय से गांव में पर्यटकों के लिए प्रतीक्षालय और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित कर रहे हैं। 
 
          बेस्ट टूरिज्म विलेज धुड़मारास की कहानी यह साबित करती है कि जब सामुदायिक भागीदारी और शासन का सहयोग मिलता है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक और सांस्कृतिक विकास संभव है। यह गांव अब बस्तर के अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन गया है। यही वजह है कि कांगेर घाटी नेशनल पार्क के नागलसर और नेतानार में भी ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिल रहा है।
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संघर्षों में पली बिटिया ने थामा बैडमिंटन का रैकेट तो मुख्यमंत्री ने दी शाबाशी, कहा- खूब आगे बढ़िये, हम आपके साथ हैं

धमतरी की रहने वाली मजदूर पिता की बैडमिंटन प्लेयर बेटी रितिका ध्रुव ने कभी नहीं सोचा था कि उसका अपने खेल के प्रति जुनून एक दिन उसे मुख्यमंत्री से रूबरू करवा देगा। आज जब रितिका को मोबाइल पर वीडियो कॉल में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का स्नेहमयी चेहरा नजर आया तो उसे विश्वास नहीं हुआ कि उसकी बात प्रदेश की मुखिया से हो रही है। 
 
मुख्यमंत्री साय ने रितिका से बात करते हुए उसके बैडमिंटन के हुनर को सराहा और उसका हौसला बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप इसी तरह अपने बैडमिंटन के हुनर को निखारिये। खूब आगे बढ़िये और अपने माता-पिता के साथ पूरे छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाइये। हम आपके साथ हैं, आपको बैडमिंटन के लिए जो भी सहायता व सुविधाएं चाहिए उसे हम आपको देंगे। मुख्यमंत्री की ये बात सुनकर रितिका का चेहरा खिल उठा।
 
मुख्यमंत्री साय ने रितिका से वीडियो-कॉल में बड़ी आत्मीयता से बात की और उसके बैकग्राउंड के विषय में जाना। रितिका ने बताया कि उसके पिता जीवनयापन के लिए मजदूरी का कार्य करते हैं और माता आंगनबाड़ी सहायिका हैं। उसे बचपन से ही बैडमिंटन के खेल में रुचि थी। समय के साथ उसका ये शौक जुनून में बदल गया और वह पूरे तरह से इस खेल के प्रति समर्पित हो गयी। मगर परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि बड़े स्तर के टूर्नामेंट के लिए वह अपने टैलेंट को तराश सके। मुख्यमंत्री ने संघर्षों के बावजूद बैडमिंटन में शानदार प्रदर्शन के लिए रितिका की खूब सराहना की। 
 
मुख्यमंत्री साय को रितिका ने वीडियो कॉल पर बताया कि उसने बंगलुरू में खेलो-इंडिया यूनवर्सिटी लेवल गेम्स और हाल ही में ओडीसा में नेशनल टूर्नामेंट में हिस्सा लिया है। वह आगे नेशनल-इंटरनेशनल स्तर पर खेलना चाहती है और ओलम्पिक में मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करना चाहती है। मुख्यमंत्री साय ने रितिका से कहा कि आपका ओलम्पिक का सपना भी पूरा होगा। मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ वे राज्य ओलंपिक संघ के अध्यक्ष भी हैं। आपकी तरह छत्तीसगढ़ की बेटियां जो अपने खेल में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं, उन्हें सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा।
 
मुख्यमंत्री को रितिका ने बताया कि वो अभी बीए अंतिम वर्ष में पढ़ाई भी कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने रितिका को खेल के साथ अपनी पढ़ाई भी पूरे मन से करने प्रोत्साहित किया। उन्होंने बिटिया को खूब आशीर्वाद देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री से बात कर के रितिका के चेहरे पर खुशी की मुस्कान छा गयी। 
 
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री साय लगातार प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं। उनका प्रयास है कि राज्य में खेल का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बनने के साथ-साथ यहां के टैलेंट को आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले। इसी क्रम में मुख्यमंत्री  साय ने विगत दिनों छत्तीसगढ़ की पर्वतारोही निशा को किलिमंजारो पर्वत फतह करने कॉल कर पूरी मदद का आश्वासन दिया था। आज जब मुख्यमंत्री ने रितिका के संघर्ष और उसकी बैडमिंटन की प्रतिभा को जाना तो वीडियो कॉल पर बिटिया का हौसला बढ़ाया।
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जशपुर के मुंडारी नर्तक दल के कलाकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात

राजधानी रायपुर में आयोजित दो दिवसीय जनजातीय गौरव दिवस में अपनी कला का प्रदर्शन करने आए जशपुर जिले के मुंडारी नृत्य दल के कलाकारों ने आज रात यहां मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से उनके निवास कार्यालय में मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि राजधानी के मुख्य समारोह में अपनी कला का प्रदर्शन करके उनके दल के सदस्य काफी उत्साहित हैं। उन्होंने इस आयोजन के माध्यम से मिले अवसर के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया। 
 
मुख्यमंत्री ने इन कलाकारों से इनके गांव का हालचाल भी पूछा, जिसके जवाब में दल के सदस्यों ने बताया कि वे लोग बादलखोल अभ्यारण्य के बगीचा विकासखंड की ग्राम पंचायत बछरांव के निवासी हैं। यहां मुड़ा, नगेशिया, पहाड़ी कोरवा और उरांव जनजाति के परिवार निवासरत हैं। यह क्षेत्र हाथी प्रभावित है। तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में इन लोगों ने सात स्ट्रीट लाइट की मांग मुख्यमंत्री से की। मुख्यमंत्री ने उन्हें स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए आश्वस्त किया।
 
लोक कलाकारों के इस दल में प्रतिभा मुंडा, मीना मुंडा, शांता, विष्णु बरला, रामदयाल, सुनीता, अनुराधा, अमिता बरला, विष्णु मांझी और विश्वनाथ प्रधान आदि शामिल थे।
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प्रदेश के शहरी आवासहीनों का मिलेगा स्वयं का पक्का आवास: डिप्टी सीएम श्री साव

 प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 अंतर्गत हितग्राही सर्वेक्षण कार्य आज से शुरू हो गया है। इसके तहत प्रदेश के शहरी आवासहीनों का स्वयं का पक्का आवास मिलेगा। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने जिला मुख्यालय मुगेली स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल दाऊपारा मुंगेली में प्रदेशव्यापी सर्वेक्षण कार्य का शुभारंभ किया। इससे पहले उन्होंने जिला मुख्यालय मुंगेली के वार्ड क्रमांक 16 में धन्नू निर्मलकर और सुजीत पतरस के घर पहुंचकर हितग्राही सर्वेक्षण किया और पीएम आवास के लिए उनका फार्म भरवाया। कार्यक्रम की शुरूआत मॉ सरस्वती की छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। 
       इस अवसर डिप्टी सीएम श्री साव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस है, गुरु नानक जयंती है, देव दीपावली है और कार्तिक पूर्णिमा भी है और आज पहले चरण में आवास से वंचित लोगों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 का शुभारंभ किया गया। इसके लिए मैं आप सबको बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र व्यक्ति आवास योजना से वंचित नहीं होगा। शहरी गरीबों के पक्के मकान का सपना अब पूरा होगा। उन्होंने कहा कि एक गरीब मां का बेटा जब देश का प्रधानमंत्री बनता है, तो उन्हें गरीबों की कैसी चिंता होती है, इसका प्रधानमंत्री आवास योजना से बड़ा कोई उदाहरण नहीं हो सकता है। हर एक व्यक्ति का सपना होता है कि उसका खुद का पक्का मकान हो। परिवार के साथ पक्का मकान में सम्मानपूर्वक जीवन बिता सके। गरीब के इस सपना को साकार करने का बीड़ा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उठाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सांय-सांय विकास के कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को शहरी क्षेत्र के हितग्राहियों का सर्वेक्षण कार्य गंभीरतापूर्वक करने के निर्देश दिए। साथ ही हितग्राहियों से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर इस योजना का लाभ उठाने और पक्के आवास के अपने सपने को साकार करने की अपील की। 
        कलेक्टर राहुल देव ने कहा कि न सिर्फ प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी, बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का भी जिले में बेहतर कार्य हो रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप जो व्यक्ति आवास योजना से वंचित है, उनका नाम भी जोड़ने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन की पूरी टीम हर गरीब के सपने को साकार करेगी। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 का प्रदेशव्यापी शुभारंभ जिले से होना सौभाग्य की बात है। उन्होंने योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए आश्वस्त किया। कार्यक्रम को नगर पालिका अध्यक्ष श्री संतूलाल सोनकर और उपाध्यक्ष श्री मोहन मल्लाह ने भी संबोधित किया। 
        सूडा के सीईओ श्री शशांक पाण्डेय ने बताया कि रैपिड असेसमेंट सर्वे अन्तर्गत प्रथम चरण में निकाय में पीएम आवास योजना शहरी अन्तर्गत विगत 02 वर्षों में प्राप्त ऐसे लाभार्थियों के आवेदन, जिन्हें आवास योजना का लाभ नहीं मिला है, उन लाभार्थियों से संपर्क कर उनका विवरण यूनिफाईड वेब पोर्टल पर दर्ज किया जावेगा। प्रथम चरण की समाप्ति उपरान्त द्वितीय चरण में शहर के प्रमुख स्थानों पर शिविर आयोजित कर इच्छुक लाभार्थियों से आवेदन प्राप्त कर उनका विवरण पोर्टल पर दर्ज किया जावेगा। प्रथम एवं द्वितीय चरण उपरान्त निकाय क्षेत्र अन्तर्गत सघन डोर-टू-डोर सर्वे किया जावेगा। नवीन आवासों के लिए ऑनलाइन वेबसाइट Https://pmaymis.gov.in/PMAYMIS2_2024/OpenN/EligiblityCheck.aspx और क्यूआर कोड लिंक के जरिए आवेदन कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए संबंधित नगरी निकाय के प्रधानमंत्री आवास योजना कार्यालय से भी संपर्क किया जा सकता है। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री भोजराम पटेल, वनमंडलाधिकारी श्री संजय यादव, जिला पंचायत सीईओ श्री प्रभाकर पाण्डेय, गणमान्य नागरिक श्री गिरीश शुक्ला, श्री शैलेश पाठक, प्रेम आर्य सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण और बड़ी में संख्या में आम लोग मौजूद रहे।
 
डिप्टी सीएम ने पीएम आवास पूर्ण हितग्राहियों को सौंपी चाबी, स्कूली विद्यार्थियों को किया सम्मानित
 
     डिप्टी सीएम  साव ने प्रधानमंत्री आवास योजना के पहले चरण अंतर्गत आवास निर्माण कार्य पूर्ण होने पर कुंती यादव, दुर्गा निर्मलकर, कांति यादव, निर्मला यादव और निशा सारथी को चाबी सौंपी और उन्हें बधाई दी। इसके साथ ही उन्होंने जनजातीय गौरव दिवस अंतर्गत 14 नवंबर को आयोजित निबंध प्रतियोगिता में प्रथम व द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यालय के प्रतिभागियों को सम्मानित किया, इनमें कु. स्वीटी पाटले, काजल पात्रे, दीपाली राजपूत और आर्यन कुलमित्र शामिल है।
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मुख्यमंत्री ने किया जननायकों के अमूल्य योगदान पर आधारित शौर्याजंलि कैलेण्डर और एटलस का विमोचन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती और जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित कार्यक्रम में भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय जननायकों के अमूल्य योगदान पर आधारित शौर्याजंलि कैलेण्डर  का विमोचन किया।  मुख्यमंत्री ने वन अधिकारों की मान्यता से सम्बंधित एटलस पुस्तक का भी विमोचन किया।
 
  भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय जननायकों ने अमूल्य योगदान देकर और मां भारती के चरणों में अपना सब कुछ न्यौछावर कर देश को आजाद कराया। आदिमजाति कल्याण विभाग द्वारा स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे सेनानियों को नमन करने के साथ ही उनकी स्मृति अक्षुण्ण रखने के लिए यह कैलेण्डर प्रकाशित कराया है। विभाग द्वारा जनजातीय जननायकों को भगवान बिरसा मुंडा के 150 वीं जयंती और जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर उनके जन्म दिवस और बलिदान दिवस को स्मरण करते हुए नमन करने का प्रयास किया है।
 
जनजातीय जननायकों के अमूल्य योगदान पर आधारित  कैलेण्डर विमोचन के अवसर पर आदिवासी विकास मंत्री  राम विचार नेताम,  राज्यसभा सदस्य अरुण सिंह, विधायक सर्व पुरंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, मोती लाल साहू, विकास मरकाम, प्रमुख सचिव आदिवासी विकास सोनमणि बोरा, मुख्यमंत्री के सचिव पी दयानन्द, संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य, आयुक्त नरेंद्र दुग्गा, कमिश्नर रायपुर महादेव कावरे सहित आदिवासी समुदाय के लोग और बड़ी संख्या में कलाकार उपस्थित थे।
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अंतर्राज्यीय आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव का हुआ समापन

 मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में दो दिवसीय जनजातीय गौरव दिवस एवं अंतर्राज्यीय आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए। 
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में विभिन्न राज्यों के लोक नर्तक दलों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों में उत्साह भर दिया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, उत्तराखंड समेत छत्तीसगढ़ के जनजातीय एवं लोक कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
 
त्रिपुरा से आए ब्रू रियांग जनजाति समुदाय के नर्तक दल ने परंपरागत लोकनृत्य होजागिरी की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।  इस नृत्य में ब्रू रियांग जनजाति समुदाय की युवतियों ने सिर के ऊपर बोतल को संभालते हुए अद्भुत सामंजस्य के साथ प्रस्तुति दी। नृत्य के दौरान नर्तकों के कलात्मक प्रदर्शन को भी दर्शकों की खूब सराहना मिली।
 
इसके पूर्व हिमाचल प्रदेश के लोक कलाकारों ने मनमोहक कायांग नृत्य की प्रस्तुति दी, जो हिमाचल प्रदेश के सबसे लोकप्रिय नृत्यों में से एक है। इस नृत्य में नर्तक दल एक दूसरे की भुजाओं को बुनकर माला जैसा पैटर्न बनाया, धीर-धीरे कदमताल करते हुए प्रतीकात्मक रूप से माला की मोती जैसे बिखरते हुए फिर जुड़ते हुए पारंपरिक कपड़े पहने और गहनों से सुसज्जित नृत्य प्रस्तुत किया।
 
इसके बाद मेघालय के गारो नृत्य की प्रस्तुति हुई। गारो समुदाय के लोग इस नृत्य में फसल कटाई के बाद देवता मिसी सालजोंग की आराधना कर उन्हें धन, धान्य के लिए अपनी आस्था और निष्ठा व्यक्त करते हैं। इस नृत्य में लोक वाद्य के प्रयोग से उत्पन्न ध्वनि ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
 
इसी क्रम में मिजोरम के मिजो और चरमा जनजाति समुदाय ने युद्ध कौशल, शौर्य, पराक्रम और युद्ध विजय के प्रतीक नृत्य मिजो प्रस्तुत किया। इस नृत्य के जरिए समुदाय ने वीर गाथा का जीवंत प्रदर्शन किया जिसमें यह बताया गया कि युद्ध के दौरान किस तरह समुदाय के वीर योद्धा ने गांव की रक्षा, जिसके बाद ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक उनका सम्मान किया। इसी तरह उत्तराखंड के जनजाति समुदाय ने हारुल नृत्य का प्रस्तुत किया जोकि  हाटी जनजाति का पारंपरिक नृत्य और लोकगीत की एक खास शैली है। हारुल नृत्य  जौनसार-बावर और चकराता क्षेत्र में किया जाता है। हारुल नृत्य में वीर पांडवों के साहस और वीरता, देवी-देवताओं की कहानियां, देवभूमि के इतिहास और जनजाति की संस्कृति से जुड़ी घटनाओं को बड़े ही रोचक ढंग से पेश किया गया। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से आए लोक कलाकारों ने भी छत्तीसगढ़ के प्रचलित लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी। 
 
उल्लेखनीय है कि महोत्सव के पहले दिन सिक्किम लिंबू जनजाति समुदाय द्वारा चाकोस तांगनाम नृत्य, गुजरात के लोक नर्तक दल ने सिद्धि गोमा नृत्य, अरुणाचल प्रदेश के कलाकारों ने गेह पदम ए ना न्यी, मध्यप्रदेश डिंडोरी के गोंड जनजाति ने सैला रीना, जम्मू कश्मीर से गुज्जर समुदाय ने गोजरी लोक नृत्य, छत्तीसगढ़ के माड़िया जनजाति ने गौर माड़िया नृत्य, उत्तराखंड के जनजातीय समुदाय द्वारा दिया बाती नृत्य, तेलंगाना के द्वारा मथुरी नृत्य, उत्तर प्रदेश के द्वारा कर्मा नृत्य, कर्नाटक के द्वारा सुगाली नृत्य, आंध्र प्रदेश के द्वारा ढीमसा नृत्य, दमन दीव द्वारा तारपा नृत्य तथा राजस्थान के जनजातीय कलाकारों द्वारा चकरी नृत्य की प्रस्तुति दी गई थी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के जनजातीय कलाकारों द्वारा अलग-अलग तीज त्यौहारों के लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी गई ।
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर बैगा, गुनिया, सिरहा को दी सम्मान निधि की सौगात

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने साइंस कॉलेज मैदान में राज्य स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज का इतिहास बहुत समृद्ध और गौरवशाली है। पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समुदाय के मान, सम्मान और गौरव को बढ़ाने का काम किया है। अटल जी ने जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए पृथक से मंत्रालय बनाया और इस समुदाय के विकास को एक नई दिशा दी। प्रधानमंत्री मोदी ने जनजातीय समुदाय के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं शुरू की है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत 24,000 करोड़ रूपए और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए 80,000 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया है, जिसके चलते जनजातीय इलाकों में तेजी से बुनियादी सुविधाओं का विकास और जनजातियों की बेहतरी के काम हो रहे हैं। 
 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती वर्ष समारोह के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य के जनजातीय समुदाय से ताल्लुक रखने वाले बैगा, गुनिया,  सिरहा लोगों के लिए मुख्यमंत्री सम्मान निधि दिए जाने की घोषणा की। इसके तहत उन्हें प्रति वर्ष 5 हजार रूपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने जनजातीय गांवों में धार्मिक एवं मांगलिक कार्य के लिए अखरा निर्माण विकास योजना शुरू करने और जनजातीय समुदाय के शहीदों की प्रतिमाएं चिन्हित स्थलों पर स्थापित किए जाने की घोषणा की।  
 
मुख्यमंत्री साय ने समारोह में जनजातीय समुदाय के विभूतियों, राज्य में हुए जनजातीय विद्रोह के शहीदों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया। उन्होंने जनजातीय चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर वन अधिकार अधिनियम से संबंधित ‘‘एटलस‘‘, कैलेण्डर ‘‘शौर्यांजलि‘‘ तथा ‘‘हल्बा जनजातीय की वाचिक परंपराएं‘‘ विषय पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया। इनका प्रकाशन छत्तीसगढ़ आदिम जाति विकास विभाग द्वारा किया गया है। 
 
इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राज्यसभा सांसद अरूण सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में सभी वर्गाें के उत्थान और कल्याण के लिए किए जा रहे कार्याें की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की लोकप्रियता और विनम्रता की सराहना पूरे देश में होती है। उन्होंने कहा कि रायपुर में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस एवं अंतर्राज्यीय नृत्य महोत्सव समारोह में आकर ‘‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत‘‘ का दर्शन हुआ है। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के इस विशेष आयोजन के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को बधाई दी। उन्होंने इस मौके पर जनजातीय समुदाय के महापुरूषों को नमन करते हुए कहा कि वही देश और समाज जागृत रहता है, जो अपनी संस्कृति और अपने महापुरूषों को याद रखता है। 
 
आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समुदाय के उत्थान के लिए चिंता की है। उन्होंने इस समुदाय के विकास के लिए कई योजनाएं संचालित की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान से छत्तीसगढ़ के साढे छह हजार गांवों और ग्रामीणों का समग्र विकास होगा। उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से जनजातीय समुदाय के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है। 
 
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित दो दिवसीय जनजातीय गौरव दिवस के कार्यक्रम में उपस्थित मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, आदिम जाति कल्याण मंत्री रामविचार नेताम, राज्यसभा सांसद अरूण सिंह, विधायकगण, अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में उपस्थित जनसमुदाय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सम्बोधन को न सिर्फ सुना, बल्कि वर्चुअल रूप से उसका हिस्सा भी बना।  
 
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती के अवसर पर देश के दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी सुविधाओं के विकास एवं विस्तार वाली 6600 करोड़ की लागत वाली कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने देश के जनजातीय इलाकों और जनजाति समुदाय के कल्याण के लिए पांच गुना बजट खर्च कर रहे हैं। दस साल पहले इसका बजट मात्र 25,000 करोड़ रूपए हुआ करता था, जो अब बढ़कर 1,25,000 करोड़ रूपए हो गया है। 
 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज बिहार के जमुई में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती वर्ष के शुभारंभ समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। जमुई में आयोजित इस कार्यक्रम का लाईव प्रसारण पूरे देश में हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हमने इतिहास के एक बहुत बड़े अन्याय को दूर करने का एक ईमानदार प्रयास किया है। इतिहास में आदिवासी समाज के लोगों को वह स्थान नहीं मिला, जिसके वह अधिकारी थे। आदिवासी समाज वो है, जिसने राजकुमार  को मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम बना दिया। इस समाज ने देश की संस्कृति और परंपरा का मान बढ़ाया है। आज़ादी की लड़ाई में अंग्रेजों से लोहा लिया है। अपनी अस्मिता, संस्कृति, और स्वाधीनता के लिए जनजातीय समुदाय के हजारों नायकों ने अपने प्राण न्यौछावर किए। देश की आजादी की लड़ाई में हजारों आदिवासी भाइयो-बहनों को मौत के घाट उतार दिया गया था, उनके योगदानों को हम नहीं भुला सकते। हमने जनजातीय समुदाय के गौरव को बढ़ाने का काम किया है। पीएम जनमन के तहत जितने कार्य शुरू हुए हैं, उसका श्रेय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी को जाता है। जब वह झारखण्ड में थी, तब मुझसे अति पिछड़ी जनजातियों की चर्चा करती थी। हमने 24 हजार करोड़ रूपए से पीएम जनमन योजना की शुरुआत की, जिससे अति पिछड़ी जनजातियों के बस्तियों और गांवों का विकास हो रहा है। जनजातीय बाहुल्य जिलों को आकांक्षी जिला घोषित कर वहां का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया, आज वहां बदलाव दिख रहा है।
 
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में देशवासियों को भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष समारोह की बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज कार्तिक पूर्णिमा, देव दीपावली और गुरुनानक जी का प्रकाश पर्व भी है। आज भगवान बिरसा मुंडा की जयन्ती भी है, राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस भी है। आदिवासी समाज सूर्य, वायु और पेड़-पौधों, पहाड़-पर्वत को पूजने वाला समाज है। उन्होंने कहा कि जिलों में बिरसा मुंडा जनजातीय उपवन बनाए जायेंगे। हम मिलकर देश के आदिवासी समाज के विचारों को देश की प्रगति का आधार बनायेंगे। उनकी परंपरा और उनके आदर्शों को अपनाएंगे।
 
इस अवसर पर विधायक सर्वश्री मोती लाल साहू, अनुज शर्मा, पुरंदर मिश्रा,  पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, पूर्व विधायक उमेश कच्छप सहित अन्य जनप्रतिनिधि, जनजातीय समाज के पदाधिकारी, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, आयुक्त श्री नरेन्द्र दुग्गा सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिकण उपस्थित थे।
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