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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अखबार में प्रकाशित पेयजल समस्या की खबर पर लिया त्वरित संज्ञान

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र की चेराजोबला बस्ती में पेयजल समस्या से संबंधित समाचार पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने आज सुबह समाचार पत्रों का अवलोकन करते समय “नाला और ढोढ़ी के दूषित जल पर आज भी निर्भर हैं वनवासी” शीर्षक से प्रकाशित खबर को गंभीरता से लिया और सरगुजा कलेक्टर श्री अजीत वसंत को फोन कर प्रभावित बस्ती में शीघ्र पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि चेराजोबला बस्ती में पेयजल संकट की स्थिति का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार हैंडपंप खनन, वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में प्राथमिकता के साथ कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के निवास वाले क्षेत्रों में पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका वास्तविक लाभ ज़मीन पर सुनिश्चित करना है।
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कटहल–गुलमोहर की छांव में सजी चौपाल, मुख्यमंत्री ने सरोधी में सुनी जनता की आवाज

सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज  खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के विकासखंड छुईखदान के ग्राम सरोधी पहुंचे, जहां उन्हें अपने बीच पाकर ग्रामीणों में उत्साह, आत्मीयता और अपनत्व का अनोखा दृश्य देखने को मिला। मुख्यमंत्री के आगमन से गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण उन्हें देखने और उनसे मिलने उमड़ पड़े।


गांव की महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं ने महुआ, चार, आम और रखियां बड़ी भेंटकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया, वहीं स्कूली बच्चों ने अपने हाथों से तैयार गुलमोहर और कनेर के फूलों के गुलदस्ते भेंट कर अपनी खुशी और सम्मान व्यक्त किया। यह स्वागत ग्रामीण संस्कृति और सादगी की जीवंत झलक बन गया।

ग्राम सरोधी के पूर्व माध्यमिक शाला परिसर में कटहल और गुलमोहर के पेड़ों की छांव तले मुख्यमंत्री ने खाट पर बैठकर चौपाल लगाई और ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। इस सहज और आत्मीय वातावरण में उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से हम आपके बीच आकर आपका हाल-चाल जानने, सुख-दुख सुनने और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को समझने आए हैं। यह अभियान 1 मई से 10 जून तक चलेगा, जिसमें सरकार स्वयं आपके द्वार तक पहुंचेगी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता का प्रतीक है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक उनका वास्तविक लाभ पहुंचे। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह समस्याओं का संकलन कर समाधान शिविरों के माध्यम से उनका निराकरण किया गया था और इस वर्ष भी उसी प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी रूप में लागू किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि उनकी सरकार को अभी महज 28 माह हुए हैं, लेकिन मोदी की गारंटी के तहत अधिकांश वादों को पूरा किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं, किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है और दो वर्षों का बकाया बोनस भी दिया गया है। 

उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 4000 रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा कर दी गई है, जिससे वनांचल क्षेत्र के लोगों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही श्री रामलला दर्शन योजना और तीर्थ यात्रा दर्शन योजना के माध्यम से लोगों को धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने विशेष रूप से पेयजल समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनसमस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के साथ और समयबद्ध तरीके से किया जाए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम सरोधी एवं आसपास के क्षेत्रों के लिए कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों की घोषणा की। इनमें राशन पीडीएस दुकान की स्थापना, नवीन ग्राम पंचायत भवन, पूर्व माध्यमिक शाला के लिए नए भवन का निर्माण शामिल है। इसके साथ ही गंडई से बकरकट्टा मार्ग का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण, तेन्दूभाठा से जोम ओटेबंध तक सड़क निर्माण, साल्हेवारा-पंडरापानी मार्ग पर मगुरदा नाला पर पुल निर्माण, पीएचसी बकरकट्टा में 108 एम्बुलेंस की तैनाती, बकरकट्टा से नवागांव सड़क का नवीनीकरण तथा क्षेत्र में 33 केवी सब स्टेशन की स्वीकृति दी गई। 

इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित थे।
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निर्माणाधीन पंचायत भवन के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री को श्रमिकों ने दिया भोजन का न्यौता: साथ बैठकर खाया बोरे बासी और आमा चटनी

सुशासन तिहार के अंतर्गत आज कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में एक बेहद आत्मीय और संवेदनशील दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय निर्माणाधीन पंचायत भवन के औचक निरीक्षण के दौरान सीधे श्रमिकों के बीच पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान उनका यह दौरा केवल कार्यों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आमजन के साथ उनके सहज जुड़ाव और संवेदनशील नेतृत्व का जीवंत उदाहरण बन गया। मुख्यमंत्री के अचानक पहुंचने से वहां कार्यरत श्रमिकों में उत्साह का माहौल बन गया और सभी ने उनका आत्मीय स्वागत किया।


निरीक्षण के दौरान वहां काम कर रही महिला श्रमिकों ने मुख्यमंत्री को बड़े स्नेह और आग्रह के साथ दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया। इस सादगी भरे निमंत्रण को मुख्यमंत्री ने तुरंत स्वीकार किया और मुस्कुराते हुए उनसे पूछा कि वे खाने में क्या लेकर आई हैं। महिलाओं ने बताया कि वे अपने घर से पारंपरिक भोजन—बोरे बासी, पान पुरवा रोटी, चना भाजी, चरोटा भाजी, मुनगा बड़ी और आमा (आम) की चटनी लेकर आई हैं। यह सुनकर मुख्यमंत्री ने उसी सहजता से उनके साथ भोजन करने का निर्णय लिया।

मुख्यमंत्री श्री साय श्रमिकों के बीच जमीन पर बैठ गए और उनके टिफिन से ही भोजन ग्रहण किया। बोरे बासी और आमा चटनी का स्वाद लेते हुए उन्होंने कहा कि यह भोजन उनकी अपनी जीवनशैली और संस्कृति से जुड़ा हुआ है।  

भोजन के दौरान श्रमिक बहनों से बात करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय  ने शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत को भी समझने का प्रयास किया। उन्होंने श्रमिक महिलाओं से महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी ली। महिलाओं ने भी खुले मन से अपने अनुभव साझा किए, जिससे मुख्यमंत्री को योजनाओं की वास्तविक स्थिति का सीधा फीडबैक मिला।

जब मुख्यमंत्री ने गांव की प्रमुख समस्याओं के बारे में पूछा, तो महिलाओं ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पेयजल की समस्या लगातार बनी रहती है। बोरवेल और हैंडपंप लंबे समय तक कारगर नहीं रह पाते, जिससे गर्मी के दिनों में पानी की दिक्कत और अधिक बढ़ जाती है। इस समस्या को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया और तत्काल समाधान की दिशा में पहल करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कलेक्टर से पेयजल व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली। कलेक्टर ने बताया कि क्षेत्र के 26 गांवों के लिए एक विशेष पेयजल योजना तैयार की गई है, जिसके अंतर्गत दूरस्थ जल स्रोतों से पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की योजना है। यह योजना तकनीकी रूप से तैयार है और इसे जल्द ही क्रियान्वित किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश देते हुए कहा कि इस योजना को यथाशीघ्र स्वीकृति प्रदान कर धरातल पर कार्य शुरू किया जाए, ताकि ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाएं समय पर और प्रभावी रूप से आमजन तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि हमारी सुशासन सरकार जनसमस्याओं के समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
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वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों में सुरक्षा मानकों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुरक्षा ऑडिट एवं सतत मॉनिटरिंग के दिए निर्देश

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मध्य प्रदेश में हाल ही में हुई क्रूज हादसे की दुखद घटना के परिप्रेक्ष्य में छत्तीसगढ़ में संचालित सभी वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करते हुए सुरक्षा मानकों का सुदृढ़ता से पालन  करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि जन सुरक्षा के विषय में किसी भी प्रकार की शिथिलता अथवा लापरवाही पूर्णतः अस्वीकार्य होगी।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने धमतरी और कोरबा सहित अन्य सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया कि जिन स्थलों पर वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वहां सुरक्षा मानकों का तत्काल परीक्षण (सुरक्षा ऑडिट) सुनिश्चित किया जाए तथा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का अक्षरशः पालन कराया जाए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित वाटर स्पोर्ट्स स्थलों पर उपयोग में लाए जा रहे उपकरणों का नियमित तकनीकी परीक्षण सुनिश्चित किया जाए, प्रशिक्षित एवं दक्ष मानव संसाधन की तैनाती की जाए, तथा किसी भी आकस्मिक स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु समुचित आपातकालीन प्रबंधन तंत्र सक्रिय रखा जाए। इसके साथ ही रेस्क्यू उपकरणों, लाइफ जैकेट एवं अन्य आवश्यक सुरक्षा संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता एवं कार्यशील स्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

उन्होंने कलेक्टरों को यह भी निर्देशित किया कि वे इन व्यवस्थाओं की सतत निगरानी करें तथा किसी भी स्तर पर सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों/संचालकों की जवाबदेही निर्धारित करते हुए आवश्यकतानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य शासन नागरिकों एवं पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करता है। इस दृष्टि से यह आवश्यक है कि वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां पूर्णतः सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं मानक अनुरूप संचालित हों, जिससे संभावित जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निर्देश दिए कि इन सभी व्यवस्थाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाए और समय-समय पर इसकी रिपोर्ट राज्य शासन को प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि सतर्कता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए ही हम जन-जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
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उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने की सुशासन तिहार की तैयारियों की समीक्षा

 उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने प्रभार के जिलों में सुशासन तिहार के आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में बालोद, बस्तर एवं मोहला-मानपुर जिलों के प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हुए। 

          समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने मनरेगा भुगतान, पेंशन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, राशन कार्ड वितरण, राजस्व प्रकरण, शिक्षा, जाति प्रमाण पत्र, स्वास्थ्य सुविधाएं एवं पेयजल व्यवस्था सहित विभिन्न विभागों की तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली। 
        उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने निर्देशित किया कि सुशासन तिहार में विशेष रूप से राजस्व प्रकरणों का प्राथमिकता से निराकरण किया जाए और कोई भी मामला समय-सीमा से बाहर न रहे। उन्होंने नक्शा-खसरा निःशुल्क उपलब्ध कराने, बंटवारा, सीमांकन और नामांतरण जैसे मामलों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिविरों की जानकारी जनप्रतिनिधियों, पंचायत एवं समाज प्रमुखों तक समय पर पहुंचाई जाए। साथ ही मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को ध्यान में रखते हुए सभी लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
           बैठक में ‘सेवा सेतु’ पोर्टल के प्रचार-प्रसार के लिए शिविरों में स्टॉल लगाने और डेमो देने की व्यवस्था करने को कहा गया, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। प्रभारी मंत्री श्री शर्मा ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना में किसी भी प्रकार का लेन-देन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में योजना की सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए। इसके अलावा खाद वितरण, विद्युत आपूर्ति और पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त रखने, खराब बोर सुधारने, पाइपलाइन बिछाने और जरूरत पड़ने पर पानी टैंकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
        उन्होंने ग्रीष्म ऋतु को ध्यान में रखकर शिविर स्थलों पर पेयजल, कूलर और छाया की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा गया। उन्होंने पुलिस विभाग को स्कूल-कॉलेजों में जाकर जागरूकता कार्यक्रम चलाने तथा साइबर अपराध, नशा और यातायात नियमों पर लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए।
सुशासन तिहार के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करने और ग्राम पंचायतों में कोटवार के माध्यम से मुनादी कराने के निर्देश दिए गए, ताकि अधिक से अधिक लोग इस आयोजन का लाभ उठा सकें। प्रभारी मंत्री ने सभी अधिकारियों को मैदानी स्तर पर सक्रिय रहकर सुशासन तिहार को सफल बनाने के लिए कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में सभी संबंधित जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, डीएफओ एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
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हर बूंद से अधिक उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम: बगिया समृद्धि एम-कैड योजना से 13 गांवों के 4933 हेक्टेयर में होगी सिंचाई - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के गृह ग्राम बगिया में समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना के अंतर्गत बगिया दाबित उद्वहन सिंचाई प्रणाली के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बगिया समृद्धि एम-कैड योजना केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि “हर बूंद से अधिक उत्पादन” की सोच का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इसके सफल क्रियान्वयन से जशपुर जिला देश के लिए आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली का मॉडल बनेगा और किसानों को समृद्धि की नई दिशा मिलेगी। 
उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत पारंपरिक नहर प्रणाली के स्थान पर आधुनिक प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा। भूमिगत पाइपलाइन व्यवस्था से जल का अपव्यय रुकेगा, जल उपयोग दक्षता बढ़ेगी और भूमि अधिग्रहण की समस्या भी नहीं आएगी। अब तक वर्षा पर निर्भर रहने वाले किसानों को इस योजना से वर्षभर सिंचाई हेतु पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बगिया समृद्धि एम-कैड योजना न केवल सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, बल्कि कृषि को तकनीक आधारित, टिकाऊ और लाभकारी दिशा में आगे बढ़ाएगी। यह परियोजना जशपुर को राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल एग्री-इरीगेशन डिस्ट्रिक्ट के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि यह पहल हमारे अन्नदाताओं को समृद्धि, आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। 

उल्लेखनीय है कि यह परियोजना कांसाबेल विकासखंड के बगिया क्लस्टर में मैनी नदी पर बगिया बैराज सह दाबित उद्वहन सिंचाई योजना के माध्यम से लागू की जा रही है। इसके तहत बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढुडांड सहित 13 गांवों के लगभग 4933 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के 23 राज्यों में स्वीकृत 34 एम-कैड परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ का बगिया क्लस्टर एकमात्र चयनित परियोजना है। इसके लिए भारत सरकार द्वारा 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जबकि परियोजना की कुल लागत लगभग 119 करोड़ रुपये है।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि यह योजना क्षेत्र के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी और किसानों को स्थायी आय का आधार प्रदान करेगी। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने इसे किसानों के लिए “आने वाले समय का वरदान” बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

समृद्धि योजना के स्टेट नोडल ऑफिसर श्री आलोक अग्रवाल ने बताया कि एम-कैड कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2025 में किया गया था। उन्होंने बताया कि यह परियोजना अगले 6 माह में पूर्ण की जाएगी और इसके संचालन एवं संधारण की जिम्मेदारी प्रारंभिक 5 वर्षों तक ठेकेदार द्वारा तथा उसके बाद जल उपभोक्ता समिति द्वारा संभाली जाएगी। इस समिति में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है।

परियोजना में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति, SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) और IoT (Internet of Things) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे जल का नियंत्रित और वैज्ञानिक उपयोग संभव होगा। डेटा आधारित प्रबंधन के माध्यम से यह तय किया जाएगा कि किस क्षेत्र में कब और कितनी मात्रा में पानी देना है। इस योजना का उद्देश्य जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना, प्रत्येक बूंद का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना, कृषि उत्पादन में वृद्धि करना तथा किसानों की आय में स्थायी सुधार लाना है। साथ ही उन्नत कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसानों को जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से निपटने में सक्षम बनाया जाएगा।
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आम जनता से शालीनता से पेश आएं अधिकारी - मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक व्यवस्था को जनकेंद्रित और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से  शासकीय अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आमजन के साथ शालीनता, धैर्य और सम्मान के साथ व्यवहार करें। उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यालय और फील्ड स्तर पर शासकीय अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं, इसलिए उनका आचरण शासन की छवि को प्रभावित करता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को सुनना प्रशासनिक अधिकारियों  का पहला कर्तव्य है। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि वे जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समाधान पर केंद्रित रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद तभी सार्थक है, जब उसमें संवेदना और समस्याओं का समाधान करने की नीयत हो।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागों में जनसमस्याओं के निराकरण को प्रभावी, सरल और भरोसेमंद बनाया जाए। जब कोई आम नागरिक किसी शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सकारात्मक अनुभव ही जनता के मन में विश्वास पैदा करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के अनुभव से मापी जाती है। इसलिए अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहें, लोगों से सीधे संवाद करें और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कार्य करें। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता और तत्परता ही प्रशासन की असली ताकत है।

उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाने की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ-साथ व्यवहार में शालीनता और विनम्रता भी जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। यदि अधिकारी जनता के साथ सरल, सहज,  सहयोगात्मक और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का तरीका हर समय अपनाते हैं, तो प्रशासन स्वयमेव अधिक प्रभावी हो जाता है और शिकायतों की संख्या स्वतः कम होने लगती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब प्रशासन हर नागरिक के लिए सुलभ, संवेदनशील और सम्मानजनक बने। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे इस भावना को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाकर आगे बढ़ें और हर व्यक्ति को यह अहसास दिलाएं कि सरकार उसके साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और अधिकारियों के कार्य के साथ-साथ उनके व्यवहार पक्ष का भी अवलोकन करेंगे।उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के दौरान अधिकारियों की संवेदनशीलता, शालीनता और जवाबदेही को प्राथमिकता के साथ परखा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन 1 मई से 10 जून तक प्रदेशभर में किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर समाधान शिविर लगाए जाएंगे।इस दौरान पंचायत एवं वार्ड स्तर पर शिविरों में आवेदन स्वीकार कर जनसमस्याओं का निराकरण किया जाएगा। सुशासन तिहार में  जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रहेगी तथा स्वयं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा औचक निरीक्षण और जनसमस्याओं के निराकरण और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति किया आभार प्रकट

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा है कि मातृशक्ति उनके लिए केवल सम्मान का विषय नहीं, बल्कि सृजन, संस्कार और सामर्थ्य की आधारशिला है। इसी भावना के साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर एक दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें संसद एवं देश की सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के संकल्प पर व्यापक चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की जो मजबूत नींव रखी गई है, उसी क्रम में उनकी राजनीतिक भागीदारी को भी सशक्त करना हमारा अगला महत्वपूर्ण कदम है। यह संकल्प देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों से पूर्ण रूप से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण विषय पर विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव याद रखी जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस विशेष सत्र में समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से आई महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के समर्थन में अपने विचार रखे और महिलाओं के अधिकारों तथा उनके सशक्तिकरण के लिए सशक्त स्वर प्रदान किया। सदन में वरिष्ठ विधायकों और महिला नेतृत्व ने भी पूरे मनोयोग से चर्चा में भाग लेते हुए अपने विचार साझा किए और इस महत्वपूर्ण संकल्प का समर्थन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट रूप से कहा कि नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों के मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना न्यायसंगत नहीं है। यह विषय किसी दल या राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र के समग्र विकास और उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस दिशा में हर सकारात्मक पहल का समर्थन आवश्यक है।
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राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट कर जताया आभार

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित  कार्यालय में राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।


इस अवसर पर महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र तथा इस संबंध में पारित शासकीय संकल्प के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।

महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री  श्री साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं के उत्थान हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि राज्य में महिला सशक्तिकरण को और अधिक गति मिलेगी तथा महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में सुदृढ़ होगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन जैसी ऐतिहासिक पहल समाज में समानता और न्याय के नए आयाम स्थापित करेंगे। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश की महिलाएं विकास यात्रा की सशक्त सहभागी हैं और उनके सशक्तिकरण के बिना समग्र विकास की परिकल्पना अधूरी है।मुख्यमंत्री ने महिला प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
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छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सामाजिक सशक्त हो रहीं महिला श्रमिक

 हर वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर होता है। छत्तीसगढ़ में यह दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था में महिला श्रमिकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और उनका योगदान पहले से अधिक प्रभावी होता जा रहा है।


राज्य के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं लंबे समय से कृषि कार्य, वनोपज संग्रहण, तेंदूपत्ता तोड़ने और हस्तशिल्प जैसे कार्यों में सक्रिय रही हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में उनकी उपस्थिति निर्माण कार्य, घरेलू सेवाओं और लघु व्यवसायों में तेजी से बढ़ी है। यह बदलाव केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की सामाजिक पहचान और आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती दे रहा है। इसके बावजूद यह भी सच है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिला श्रमिकों को लंबे समय तक उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। वेतन असमानता, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व लाभों की कमी और पारंपरिक सोच जैसी बाधाएं उनके सामने बनी रहीं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महिला श्रमिकों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। नई श्रमिक नीतियों के जरिए असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को लागू करने की दिशा में ठोस पहल की गई है। महिला शक्ति केंद्रों को केवल सहायता केंद्र नहीं, बल्कि परामर्श, कानूनी सहयोग और रोजगार मार्गदर्शन के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटर के जरिए हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और पुनर्वास की सुविधा मिल रही है।

राज्य में संचालित विभिन्न योजनाएं महिला श्रमिकों के जीवन में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति के बाद 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे आर्थिक दबाव कम होता है। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना महिलाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है। 

महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पंजीकृत निर्माण महिला श्रमिकों को, जिनका कम से कम तीन वर्षों का पंजीयन है, एक लाख रुपये तक की सहायता देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।

इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आय के साधन मिलने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिल रहा है। राज्य सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम महिला श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहे हैं। घरेलू कामगारों, ठेका श्रमिकों और हमाल परिवारों के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जबकि सक्षम योजना के जरिए विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है।

आज छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिक केवल श्रमशक्ति नहीं रहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार बन चुकी हैं। उनकी भूमिका अब सहायक तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने तक पहुंच रही है। योजनाओं की बढ़ती पहुंच और जागरूकता के कारण उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे समाज में उनका सम्मान भी लगातार बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों के लिए किए जा रहे प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि संवेदनशील नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए सकारात्मक बदलाव संभव है। सुरक्षा, सम्मान और रोजगार के अवसरों के साथ महिला श्रमिक आज राज्य के विकास की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभर रहा है।
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हर हाथ को काम, हर श्रमिक को सम्मान: विष्णु देव सरकार की प्रतिबद्धता

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए लगातार आर्थिक मदद दी जा रही है। श्रम विभाग के तीनों मंडल-छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के माध्यम से योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है। इसी का परिणाम है कि बीते 02 साल 04 माह में श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगभग 800 करोड़ रूपए डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में अंतरित किए जा चुके हैं। इस वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में श्रमिकों के 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट निजी स्कूलों में दाखिला दिया जाएगा। 


मजदूर दिवस दुनिया भर में मनाया जाता है। 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस या श्रमिक दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों के लिए संकल्प लेना है। यह दिन श्रमिकों के योगदान को याद करने और उनके संघर्षों को सम्मानित करने के लिए भी मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1886 में शिकागो के हेमार्केट स्क्वायर में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की याद में मनाया जाता है, जहां अनेक श्रमिकों ने 8 घंटे के कार्य दिवस की मांग की थी। सन् 1889 में द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में घोषित किया था। इस दिन को मनाने का उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों को सुनिश्चित करना, सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों के लिए आवाज बुलंद करना है। भारत में मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत 1923 में चेन्नई (मद्रास) से हुई थी। भारतीय संविधान निर्माण सभा के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर ने श्रमिकों के काम का समय 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे किया। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं को प्रसूति अवकाश की सुविधा उपलब्ध कराई।

मुख्यमंत्री श्री साय का मानना है कि श्रम विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो बड़े पैमाने पर श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण भी तकनीक के माध्यम से किया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है।

प्रदेश के श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का कहना है कि प्रदेश में विष्णु देव सरकार के सुशासन में अब मजदूर का बच्चा मजदूर नहीं रहेगा। श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के हितों में अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार किट योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक कॉपी हेतु सहायता राशि योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु उत्कृष्ट खेल प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना संचालित की जा रही है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सोच है कि हर हाथ को काम इस दिशा में प्रदेश के वाणिज्य उद्योग एवं श्रम विभाग द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। श्रम विभाग के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 256 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। 

श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का कहना है कि विष्णु देव के सरकार की सोच है कि हर हाथ को काम मिले उसका उन्हें उचित दाम मिले और हर पेट को अन्न मिले यह हमारी सरकार की आदर्श नीति है। इस नीति को क्रियान्वित करने हेतु राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में 38 भोजन केन्द्र संचालित है। इस योजना के अंतर्गत श्रमिकों को 5 रूपये में गरम भोजन, दाल चावल, सब्जी, आचार प्रदाय किया जा रहा है, जिसका विस्तार चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में समस्त जिलों में किया जा रहा है। श्रमिक आवास की राशि प्रति आवास 01 लाख रूपए से बढ़ाकर 1.50 लाख कर दी है। इसी तरह ई-रिक्शा की राशि भी एक लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रूपए की जाएगी। 

उल्लेखनीय है कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत 5 सितंबर 2008 से अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत किए जा चुके हैं। मंडल द्वारा 26 योजनाएं संचालित की जा रही हैं तथा 60 श्रमिक वर्ग अधिसूचित हैं। एक प्रतिशत उपकर (सेस) से वर्ष 2025-26 में 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि मंडल गठन से अब तक कुल 2,808 करोड़ रुपये का उपकर संग्रहित हुआ है। मार्च 2026 तक 2,558 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं में व्यय किए जा चुके हैं।

औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा हेतु चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। श्रम विभाग के अंतर्गत कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं का मुख्य दायित्व श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को भी चिकित्सा हित लाभ उपलब्ध कराया जाता है। कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के लिए 76 करोड़ 38 लाख रूपए का प्रावधान राज्य सरकार द्वारा किया गया है।
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छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ नागरिकों के लिए मजबूत सामाजिक सुरक्षा तंत्र

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र कल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वृद्धजनों के लिए एक मजबूत और संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा तंत्र विकसित किया है, वहीं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में विभागीय योजनाएँ प्रभावी रूप से धरातल पर क्रियान्वित हो रही हैं। इन प्रयासों से वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।


सरल प्रक्रिया, सहज लाभ

राज्य में वरिष्ठ नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए किसी अलग “सीनियर सिटीजन कार्ड” की आवश्यकता नहीं है। आधार कार्ड एवं अन्य वैध दस्तावेजों के माध्यम से आयु और पात्रता का सत्यापन कर सीधे लाभ प्रदान किया जा रहा है, इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सरल और सुलभ बनी है।

वृद्धाश्रम :- सम्मानजनक जीवन का आधार

प्रदेश के राजधानी रायपुर सहित विभिन्न जिलों में संचालित 27 वृद्धाश्रम निराश्रित एवं असहाय वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित आश्रय बनकर उभरे हैं। वर्तमान में यहां 675 वृद्धजन लाभान्वित हो रहे हैं। यहाँ निःशुल्क आवास, पौष्टिक भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक सुविधाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर मिल रहा है।

पैलिएटिव केयर (प्रशामक गृह) :- विशेष देखभाल की व्यवस्था

गंभीर रूप से बीमार एवं बिस्तर पर आश्रित वृद्धजनों के लिए राज्य में 13 प्रशामक गृह संचालित हैं। वर्तमान में रायपुर, कबीरधाम, दुर्ग, बालोद, रायगढ़ एवं बेमेतरा में 140 वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं। इन केंद्रों में निरंतर देखभाल, उपचार सहयोग और आवश्यक सेवाएँ प्रदान की जाती हैं, जिससे संवेदनशील स्थिति में भी उन्हें मानवीय और सम्मानजनक जीवन मिल सके।

वृद्धावस्था पेंशन :- आर्थिक संबल का आधार

सामाजिक सुरक्षा के तहत पात्र वृद्धजनों को नियमित पेंशन दी जा रही है। बीपीएल एवं एसईसीसी वंचन समूह के वृद्धजनों को 500 रुपए प्रतिमाह तथा 80 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को 680 रुपए प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जा रही है। यह सहायता उनके दैनिक जीवन में आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान को मजबूती देती है।

सहायक उपकरण और तीर्थ यात्रा :- नई ऊर्जा का संचार

वरिष्ठ नागरिक को सहायक उपकरण प्रदाय योजना के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के निराश्रित वृद्धजनों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना के तहत चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर अधिकतम 6900 रुपए तक के उपकरण जैसे व्हीलचेयर, वॉकर, बैसाखी, छड़ी, श्रवण यंत्र, चश्मा, ट्राइसाइकिल सहित अन्य आवश्यक सामग्री प्रदान की जाती है, जिससे उनका जीवन अधिक सहज बन सके।

19 प्रमुख तीर्थ स्थलों की तीर्थ यात्रा योजना के माध्यम से उन्हें आध्यात्मिक और मानसिक संतुलन का अवसर मिल रहा है, जो उनके जीवन में नई ऊर्जा का संचार करता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 14 यात्राओं के माध्यम से 10 हजार 694 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है।

समग्र कल्याण की दिशा में निरंतर प्रयास

छत्तीसगढ़ शासन का लक्ष्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है। पेंशन, स्वास्थ्य देखभाल, आवास, सहायक सुविधाओं और सामाजिक जुड़ाव के माध्यम से राज्य अपने वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक सशक्त, संवेदनशील और समग्र सामाजिक सुरक्षा तंत्र स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में यह प्रयास आने वाले समय में और अधिक प्रभावी रूप से वृद्धजनों के जीवन को गरिमामय बनाने की दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे।
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श्रमिकों के सशक्तिकरण की दिशा में तेज़ कदम, “ई-श्रम साथी” एप से मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में श्रम विभाग के कार्यों और योजनाओं की उच्च स्तरीय समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि मैदानी अमला पूरी प्रतिबद्धता के साथ श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करे। उन्होंने  कहा कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और जमीनी स्तर पर उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो। इस अवसर पर श्रम मंत्री श्री लखन देवांगन उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में श्रमिकों के हित में व्यापक पहल हुई है और चार नई श्रम संहिताएं लागू की गई हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ में मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि श्रमिकों को सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिल सके।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रम विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो बड़े पैमाने पर श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण भी तकनीक के माध्यम से किया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रमिकों को घर बैठे रोजगार की जानकारी सहज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से "ई-श्रम साथी" मोबाईल एप्लीकेशन छत्तीसगढ़ डिजिटल लेबर चौक का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की मेहनत देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है, इसलिए उनके योगदान का सम्मान और उनके हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

समीक्षा बैठक में श्रम विभाग की संरचना, श्रमायुक्त संगठन, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्था तथा तीनों प्रमुख मंडलों के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। प्रदेश के सभी जिलों में श्रम कार्यालयों के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन और समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि श्रमिकों को योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ दोनों सुनिश्चित हो सके।

उल्लेखनीय है कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत 5 सितंबर 2008 से अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत किए जा चुके हैं। मंडल द्वारा 26 योजनाएं संचालित की जा रही हैं तथा 60 श्रमिक वर्ग अधिसूचित हैं। एक प्रतिशत उपकर (सेस) से वर्ष 2025-26 में 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि मंडल गठन से अब तक कुल 2,808 करोड़ रुपये का उपकर संग्रहित हुआ है। मार्च 2026 तक 2,558 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं में व्यय किए जा चुके हैं।
छत्तीसगढ़ में श्रमिक कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित हैं, जिनमें मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना, नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता, सियान सहायता, नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता, आवास सहायता योजना, निःशुल्क कोचिंग सहायता तथा दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना प्रमुख हैं। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत कक्षा 6वीं में हर वर्ष 100 बच्चों का चयन मेरिट के आधार पर किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 31 जिलों के 95 विद्यार्थी 8 जिलों के 14 विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, जिसे इस शैक्षणिक सत्र से सीटें बढ़ाकर 200 कर दिया गया है।छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल और श्रम कल्याण मंडल द्वारा भी विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। 

श्रम कल्याण मंडल के तहत 14 योजनाएं संचालित हैं और वर्ष 2025-26 में 5.21 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना, श्रम सम्मेलन कार्यक्रम और मोबाइल कैंप के माध्यम से श्रमिकों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।

डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-केवाईसी के माध्यम से हितग्राहियों की सही पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वर्तमान में 55 प्रतिशत सत्यापन पूरा हो चुका है और शेष कार्य प्रगति पर है। उन्होंने “मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र” जैसे नवाचारों को और प्रभावी बनाने पर भी बल दिया। 

इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, श्रम विभाग सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी गण उपस्थित थे।
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हाथ करघे से कमाई तक- ग्राम नारी की महिलाओं की सफलता का राज

 ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ने अपने सामूहिक प्रयास, मेहनत और दूरदृष्टि के बल पर ऐसी सफलता की कहानी रची है, जो न केवल आर्थिक उन्नति का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण महिलाएँ यदि अवसर और सहयोग प्राप्त करें, तो वे किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर सकती हैं। धमतरी जिले के छोटे से ग्राम नारी में आज आत्मनिर्भरता, परंपरा और नवाचार का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है। कभी सीमित संसाधनों और अवसरों वाला यह गाँव अब ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है। 


परंपरा से जुड़ी नई शुरुआत 

       नारी गाँव में पहले बुनाई प्रमुख आजीविका नहीं थी, लेकिन पड़ोसी राज्य ओडिशा में संबलपुरी साड़ियों की बढ़ती मांग को देखते हुए समिति ने इस क्षेत्र में कदम रखा। संबलपुरी साड़ियाँ अपनी विशेष इकत डिज़ाइन और आकर्षक रंगों के लिए जानी जाती हैं, जिन्हें बनाने के लिए उच्च कौशल और धैर्य की आवश्यकता होती है। 

सरकार का मजबूत सहयोग 

       छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समिति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासकीय वस्त्र उत्पादन कार्यक्रम अंतर्गत नियमित रूप से धागा प्रदाय किया जा रहा है, जिससे बुनकरों को नियमित रोजगार तथा समितियों को सुचारु संचालन हेतु सेवा प्रभार के रूप मे आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही नवीन बुनाई प्रशिक्षण तथा बुनकरों को नवीन करघे वितरण से उत्पादन क्षमता बढ़ी है। इस सहयोग से समिति आर्थिक रूप से सशक्त हुई है तथा बाजार मांग के अनुरूप वस्त्र तैयार करने मे सक्षम हुई है।

 बढ़ता बाजार और आय 

        आज ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ग्राम नारी द्वारा तैयार की गई साड़ियों की बिक्री मुख्य रूप से ओडिशा के बाजारों में होती है। वर्तमान मे समिति द्वारा माह मे 300-400 साड़ियों का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे समिति का मासिक कारोबार लगभग 3 से 4 लाख रुपये तक पहुँच चुका है, जो ग्रामीण स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि है।

 महिलाओं का सशक्तिकरण 

          इस पहल ने न केवल आय के स्रोत को बढ़ाया है बल्कि, महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता दी है तथा सामूहिक निर्णय लेने की क्षमता विकसित की है। जो महिलाएँ पहले इस कार्य से अनभिज्ञ थीं, वे आज कुशल बुनकर बन चुकी हैं और आत्मविश्वास के साथ उत्पादन में योगदान दे रही हैं। पूर्व मे शासकीय वस्त्र उत्पादन से जो महिलाएं प्रतिदिन 300-350 रुपये कमाती थी, वे आज 550-600 रुपये काम रही है। भविष्य मे अतिरिक्त कौशल उन्नयन प्रशिक्षण तथा दक्षता से वे 1000-1200 रुपये प्रतिदिन कमाने मे सक्षम हो सकेंगी।  

 भविष्य की दिशा 

         ग्राम नारी की यह सहकारी समिति आज आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से बढ़ रही है। यदि इसे आगे ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और नए बाजारों तक पहुँच का समर्थन मिले, तो यह और भी बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकती है। यह कहानी दर्शाती है कि जब सरकारी सहयोग और समुदाय की मेहनत साथ आती है, तो छोटे गाँव भी सफलता की बड़ी मिसाल बन सकते हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं-मुख्य सचिव श्री विकासशील

मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं। राज्य में जलवायु परिवर्तन कार्यक्रमों के लिए सीएसआर मद की उपलब्ध राशि का उपयोग करना प्रस्तावित करें। छत्तीसगढ़ राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना के लिए गठित स्टियरिंग समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। 


          बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र, राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना, राज्य में जलवायु परिवर्तन विषयक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और राज्य जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण के गठन और राज्य में कार्बन क्रेडिट आधारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। विभागीय सचिवों से जलवायु परिवर्तन पर कार्ययोजना के क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने जलवायु परिवर्तन की पृष्ठ भूमि, जलवायु परिवर्तन के कारक और छत्तीसगढ़ राज्य में भी जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव के संबंध में जानकारी दी। बैठक में पीसीसीएफ श्री श्रीनिवास राव, एपीसीसीएफ श्री सुनील मिश्रा शामिल हुए।

वृक्ष-आवरण में देश में प्रथम स्थान पर रहा छत्तीसगढ 

        छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जलवायु परिवर्तन से संबंधित विविध कार्य किये जा रहें हैं। इनमें मुख्यतः वृक्षारोपण कार्य किये जा रहें हैं। एक पेड़ माँ के नाम योजना के तहत् करीब 7 करोड़ पौधारोपण किया जा चुका है। किसान वृ़क्ष मित्र योजना के तहत् 3 करोड़ 68 लाख वृक्षारोपण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि आई.एस.एफ.आर. 2025 के अनुसार राज्य के वन एवं वृक्ष-आवरण में सर्वाधिक वृद्धि 683 किलोमीटर किया गया है, जो देश में प्रथम स्थान पर रहा है। राज्य में जलवायु परिवर्तन के तहत ई-वाहनों के चालन के लिए जन-सामान्य को प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को सोलर पम्प वितरित किये जा रहे हैं। 

          अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2025-2026 में लगभग 55 हजार 50 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती की गई। राज्य में 300 से अधिक बांधों की हाईड्रोलॉजिकल प्लानिंग के साथ 24 वृहद एवं मध्यम जलाशयों का सेडिमेंटेशन सर्वे पूर्ण किया जा चुका है। राज्य में जलवायु परिवर्तन ज्ञान केन्द्र निर्मित किए जाने के लिए अधिकारियों ने अपने विचार रखें।  

          बैठक में जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना के क्रियान्वयन के संबंध में कृषि एवं किसान कल्याण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, परिवहन, वाणिज्य एवं उद्योग, खनिज, ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल विकास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों अपने-अपने विभाग की जानकारी प्रस्तुत की।

          बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विद्यायी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, खनिज संसाधन एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी.दयानंद, नगरीय प्रशासन विकास विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री बसवराजु एस., वाणिज एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस.प्रकाश, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सुश्री इफ्फत आरा सहित राज्य योजना आयोग, नाबार्ड, सेंटर फॉर एन्वायरमेंट एजुकेशन, इंडियन इंस्टयूट ऑफ साइंस और कृषि मौसम विज्ञान विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारी सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
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सशक्त नारी, विकसित प्रदेशः ‘बिहान’ से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनीं सकीना

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिसे ष्बिहानष्  के नाम से जाना जाता है, ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का एक प्रमुख कार्यक्रम है। यह भारत सरकार के दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का छत्तीसगढ़ में क्रियान्वयन कर रहा है। ग्रामीण गरीब परिवारों, विशेषकर महिलाओं के लिए स्थायी और विविध स्व-रोजगार के अवसर पैदा करना ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके।


                छत्तीसगढ़ में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली ‘बिहान’ (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) योजना महिलाओं के जीवन में सामाजिक और आर्थिक बदलाव का बड़ा माध्यम बन रही है। सहारा आजीविका क्लस्टर के उदयपुर विकासखंड के डाड़गांव की रहने वाली सकीना की कहानी आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। जो सकीना कभी बैंक जाने के नाम से घबराती थीं, वे आज स्वयं सहायता समूह के माध्यम से न केवल अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

अभिसरण का कमालः डीएमएफ मद से मिली मिक्सर मशीन

           शासन की विभिन्न योजनाओं के आपसी समन्वय से जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव आ रहे हैं। इसी कड़ी में जिला प्रशासन की पहल पर डीएमएफ मद से सीमेंट मिक्सर मशीनें समूहों प्रदान की गई हैं। इन्ही में से एक मशीन ‘रामगढ़’ ग्राम संगठन के ‘साईं बाबा समूह’ को मिली, जिसकी सदस्य सकीना हैं। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहयोग और प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

निर्माण कार्यों में बढ़ी भागीदारी, बढ़ी आमदनी

           सकीना ने बताया कि उन्होंने अपनी आजीविका विस्तार के लिए समूह से 60,000 का ऋण लिया था। समूह को मिली मिक्सर मशीन और शटरिंग प्लेट्स अब उनकी आय का मुख्य जरिया बन गई हैं। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे प्रधानमंत्री आवास निर्माण कार्यों के लिए उनकी मिक्सर मशीन और शटरिंग प्लेट्स की भारी मांग है। उन्होंने बताया कि ट्रांसपोर्टिंग और अन्य खर्चे निकालकर समूह से अब तक 6,000 से 7,000 की प्रतिदिन की कमाई हो रही है।

आत्मविश्वास से भरा सफरः बैंक जाने की हिचकिचाहट हुई खत्म

           सकीना अपनी सफलता का श्रेय बिहान योजना को देते हुए कहती हैं, पहले मुझे बैंक जाने में भी डर लगता था, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद मैं जागरूक और सक्रिय हो गई हूँ। अब मुझे किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं है, मैं खुद सक्षम हूँ। अब मैं दूसरी दीदियों को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हूँ।

बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव

          सकीना की आर्थिक मजबूती का सीधा असर उनके परिवार पर पड़ा है। उनकी बेटी अब कॉलेज में है और बेटा हाई स्कूल की पढ़ाई कर रहा है। सकीना का कहना है कि आर्थिक स्वतंत्रता मिलने से अब बच्चों की पढ़ाई-लिखाई बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल रही है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी वार्षिक आय 1 लाख रुपये से अधिक करने का प्रयास किया जा रहा है।

योजना के लिए शासन का जताया आभार

        सकीना ने अपनी इस सफलता और आत्मनिर्भरता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की इन योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को केवल काम ही नहीं दिया, बल्कि समाज में एक सम्मानित पहचान भी दी है।
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मनरेगा श्रमिकों की ई- के वाय सी में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत श्रमिकों के ई-के वाय सी कार्य में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 97.11 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का ई-के वाय सी पूर्ण कर लिया गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक है। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ ने केरलम, त्रिपुरा, मिजोरम जैसे छोटे राज्यों तथा कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों को भी पछाड़कर यह उपलब्धि हासिल की है।

 
             महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ;मनरेगा के तहत श्रमिकों की ई.केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूरा करने में छत्तीसगढ़ ने देश भर में अग्रणी स्थान हासिल किया है। प्रदेश में लगभग 56.87 लाख से ज्यादा मजदूरों की डिजिटल वेरिफिकेशन (e-KYC) पूरी की गई है जो भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। यह डिजिटल प्रक्रिया फर्जी जॉब कार्डों को हटाने और सीधे वास्तविक लाभार्थियों के बैंक खातों में मजदूरी पहुंचाने में मदद कर रही है।

             यह उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल मार्गदर्शन एवं उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा के सतत नेतृत्व, मॉनिटरिंग और प्रभावी रणनीति का परिणाम है। राज्य में योजनाबद्ध ढंग से अभियान चलाकर ई-के वाय सी की प्रक्रिया को तेज किया गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों को समयबद्ध रूप से इससे जोड़ा जा सका।
         रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुल 58 लाख से अधिक सक्रिय श्रमिकों में से 56 लाख से अधिक का ई-के वाय सी सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

       मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार गरीब और श्रमिक वर्ग के हितों के संरक्षण एवं उन्हें योजनाओं का पारदर्शी लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। ई-के वाय सी के माध्यम से श्रमिकों को समय पर भुगतान एवं योजनाओं का सीधा लाभ सुनिश्चित हो रहा है।

       उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम स्तर पर कार्यरत टीमों के समन्वित प्रयास का परिणाम है। उन्होंने बताया कि ई-के वाय सी से न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगी है, बल्कि वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने में भी पारदर्शिता आई है। श्री शर्मा ने सभी संबंधित अधिकारियों को बधाई देते हुए निर्देशित किया कि शेष लंबित प्रकरणों को भी शीघ्र पूर्ण कर प्रदेश को 100 प्रतिशत e-KYC (ई - के वाय सी) लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जाए।

           प्रदेश में चलाए गए विशेष अभियान, ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग से यह सफलता हासिल हुई है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है।
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PTRSU में RSS–ABVP के कार्यक्रम का NSUI द्वारा जोरदार विरोध, एक दिवसीय भूख हड़ताल आयोजित

पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PTRSU) में शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करने वाले RSS–ABVP के कार्यक्रम के विरोध में NSUI द्वारा जोरदार प्रदर्शन किया गया। विश्वविद्यालय को किसी एक विचारधारा के प्रभाव से मुक्त रखने तथा छात्रों के हक, सम्मान और भविष्य की रक्षा के लिए NSUI परसू कैंपस अध्यक्ष पुनेश्वर लहरे के नेतृत्व में एक दिवसीय भूख हड़ताल (सत्याग्रह) किया गया।


सत्याग्रह के पश्चात NSUI कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर “RSS–ABVP गो बैक” के नारों के साथ विश्वविद्यालय प्रशासन का घेराव किया और अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान कुलसचिव से मुलाकात के दौरान तीखी नोकझोंक भी हुई।

पुनेश्वर लहरे ने कहा कि विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक संस्थान है, जहां छात्रों के मूलभूत मुद्दों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, न कि किसी एक विचारधारा को थोपने का प्रयास किया जाए।  विश्वविद्यालय शिक्षा का केंद्र है, किसी एक विचार की राजनीति का अड्डा नहीं।
NSUI ने आरोप लगाया कि NEP और UGC के नियमों का उल्लंघन करते हुए विश्वविद्यालय परिसर को राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसका  कड़ा विरोध किया तथा छात्रों की समस्याओं और मांगों को गंभीरता से सुनने की मांग रखी।
परसू अध्यक्ष पुनेश्वर लहरे  के समर्थन में भूख हड़ताल में NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय, प्रदेश प्रभारी महामंत्री हेमंत पाल, प्रदेश उपाध्यक्ष अमित शर्मा, जिला अध्यक्ष शांतनु झा, गावेश साहू, अनुज शुक्ला, अंकित बंजारे, महताब हुसैन, निखिल बंजारी, आलोक खरे, इंडिया ग्रीत लहरे, सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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