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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड के नव नियुक्त अध्यक्ष के पदभार ग्रहण समारोह में हुए शामिल

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड के नव नियुक्त अध्यक्ष श्री ध्रुव कुमार मिर्धा के पदभार ग्रहण एवं अभिनंदन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने श्री मिर्धा को उनके नए दायित्व के लिए शुभकामनाएं दीं।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री ध्रुव कुमार मिर्धा के जनसेवा के दीर्घ अनुभव का लाभ निश्चित रूप से पूरे समाज को मिलेगा। उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय योगदान दिया है और आज उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी मिली है। निश्चित ही, इस नई भूमिका के माध्यम से श्री मिर्धा रविदास समाज के लोगों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपेक्षा जताई कि श्री मिर्धा बोर्ड के माध्यम से भारत सरकार एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में योगदान देंगे।

उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि आज परंपरागत कार्यों से जुड़े समाज को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड के माध्यम से इन चुनौतियों को दूर कर समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और तरक्की के पथ पर अग्रसर करने का कार्य किया जाएगा।

इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा,  विधायक श्री सुनील सोनी, गुरु खुशवंत साहेब सहित विभिन्न मंडल आयोगों के अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ में लिखा जा रहा है ग्रामीण आवास क्रांति का नया इतिहास

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य में इन दोनों ग्रामीण विकास एवं सामाजिक सशक्तिकरण का एक नया इतिहास लिखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार एक अभिनव अभियान मोर दुवार- साय सरकार के माध्यम से गरीब ,वंचित और आवासहीन परिवारों के यहां दस्तक देकर उन्हें सम्मान के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के घर का अधिकार देने में जुटी है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने  बीते दिनों जगदलपुर प्रवास के दौरान घाटपदमपुर ग्राम से इस अभियान की शुरुआत की थी। प्रधानमंत्री आवास योजना का तेजी से और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है । इस बात को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री का पद संभालने के दूसरे दिन ही कैबिनेट की पहली बैठक में 18 लाख परिवारों को आवास की स्वीकृति प्रदान कर स्पष्ट कर दिया था। छत्तीसगढ़ सरकार  इस अभियान के माध्यम से  प्रत्येक पात्र परिवार को पक्का आवास देने के अपने संकल्प को पूरा कर रही है। 

छत्तीसगढ़ में चल रही ग्रामीण आवास क्रांति का ही यह परिणाम है कि अब  गांवों में विशेषकर पिछड़े और गरीब तबके की बस्तियों में मिट्टी के जीर्णशीर्ण घरों और बांस- बल्ली के सहारे टिकी घास-फूंस की झोपड़ी की जगह अब साफ-सुथरे पक्के मकान बने हुए अथवा बनते दिखाई देने लगे हैं। राज्य के मैदानी इलाकों से लेकर सुदूर वनांचल का कोई ऐसा गांव अथवा मजरा- टोला नहीं, जहां 8-10  पक्के घर,  प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए हाल- फिलहाल में न बने हों। यह योजना न केवल लाखों गरीब परिवारों को छत दे रही है, बल्कि रोजगार, व्यापार और उद्योगों को भी गति प्रदान कर रही है। इससे सीमेंट, ईट, सरिया और निर्माण सामग्री से जुड़े व्यवसाय में तेजी आयी है। यह जनकल्याण और आर्थिक विकास का एक संतुलित मॉडल है। 

छत्तीसगढ़ राज्य को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2024-25 के लिए कुल 11,50,315 ग्रामीण आवासों का लक्ष्य प्रदान किया गया है, जिसमें से अब तक 9,41,595 आवासों की स्वीकृति दी जा चुकी है।  केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा छत्तीसगढ़ प्रवास  दौरान राज्य को अतिरिक्त 3 लाख आवासों की स्वीकृति देने से यह प्रयास और भी व्यापक हो गया है। यह छत्तीसगढ़ के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी ग्रामीण आवासीय पहल है।

राज्य सरकार समाज के सभी वर्ग के पात्र परिवारों के साथ-साथ बैगा, कमार, पहाड़ी कोरवा, अबूझमाड़िया एवं बिरहोर विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों को प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत पक्का आवास उपलब्ध करा रही है। महासमुंद जिले के धनसुली गांव की कमार बस्ती में 15 से अधिक कमार परिवारों को पीएम जनमन योजना के अंतर्गत पक्के आवास उपलब्ध कराए गए हैं। इससे इन जनजातीय परिवारों के जीवन में स्थायित्व आया है और वे शासन की अन्य योजनाओं से भी लाभान्वित हो रहे हैं।

 छत्तीसगढ़ सरकार का मोर दुवार- साय सरकार अभियान 30 अप्रैल तक तीन चरणों में संचालित है, जिसमें पात्र हितग्राहियों का घर-घर जाकर सर्वेक्षण करना और ग्राम सभाओं के माध्यम से सूची का वाचन और शत-प्रतिशत पात्र परिवारों का कवरेज सुनिश्चित करने के साथ ही सर्वेक्षण पूर्ण करने वाले कर्मियों का सार्वजनिक सम्मान किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय  द्वारा गांव में जाकर सर्वेक्षण कार्य का शुभारंभ करना और हितग्राहियों से उनके बारे में जानकारी लेना इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर पूरी तरह संवेदनशील और संकल्पित है।

इस अभियान को जन अभियान का स्वरूप देने के लिए जनप्रतिनिधियों, जनसेवियों और स्थानीय कलाकारों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। पीएम आवास पंचायत एम्बेसडर के रूप में नामित व्यक्तियों द्वारा भी लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। गृह पोर्टल के माध्यम से पारदर्शिता एवं जानकारी की सहज उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के अतिरिक्त, राज्य में जरूरत मंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मुख्यमंत्री आवास योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत 47,090 आवासों के निर्माण के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 38,632 आवास स्वीकृत किए गए हैं। राज्य सरकार की विशष पहल पर आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं नक्सल पीड़ितों परिवारों के लिए 15,000 विशेष आवास स्वीकृत हुए हैं, जिनका निर्माण कराया जा रहा है। पीएम जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों के लिए 42,326 आवास के निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब तक 27,778 आवासों की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिसमें से 6,482 आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। नियद-नेल्ला-नार योजना के अंतर्गत अब तक 477 आवास पूर्ण कराए गए हैं। 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन बिलासपुर से 3 लाख हितग्राहियों को गृह प्रवेश कराना इस योजना की सफलता है। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा 18 लाख पात्र हितग्राहियों को आवास से वंचित रखा गया।  छत्तीसगढ़ सरकार अब हर हितग्राही को उसका अधिकार दिलाने की दिशा में काम कर रही है। मोर दुवार- साय सरकार महाअभियान शासन की संवेदनशीलता, नीति की पारदर्शिता और जनता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह अभियान केवल योजना की सफलता नहीं, बल्कि एक मजबूत, सशक्त और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दंतेवाड़ा विज्ञान केन्द्र की प्रशंसा की, मुख्यमंत्री ने जताया आभार

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 121वीं कड़ी का श्रवण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘मन की बात’ को जनजागरण और राष्ट्र निर्माण का एक सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम देशवासियों को सकारात्मक दिशा प्रदान करने और जनभागीदारी को बढ़ावा देने का अद्वितीय मंच है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विचार और संदेश आज पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। ‘मन की बात’ के माध्यम से देश के कोने-कोने में हो रहे नवाचारों, सामाजिक पहलों और सकारात्मक परिवर्तनों की जानकारी आमजन तक पहुँचती है, जिससे पूरे समाज में जागरूकता और ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम न केवल प्रेरणा देता है, बल्कि समाज में सक्रिय भागीदारी और रचनात्मक परिवर्तन को भी प्रोत्साहित करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस बार ‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थापित विज्ञान केन्द्र की विशेष रूप से सराहना की है। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताते हुए प्रधानमंत्री के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में कहा कि आज भारत के युवा तेजी से साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे इलाके, जो कभी पिछड़ेपन और हिंसा के लिए पहचाने जाते थे, अब नवाचार के केन्द्र बन रहे हैं। इसी क्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थापित विज्ञान केन्द्र की सराहना करते हुए कहा कि जहाँ कभी हिंसा और अशांति का साया था, वहाँ आज बच्चे विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नए-नए प्रयोग कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दंतेवाड़ा का विज्ञान केन्द्र आज पूरे देश का ध्यान आकर्षित कर रहा है, जहाँ बच्चों को थ्री-डी प्रिंटर, रोबोटिक कार जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है। बच्चों का तकनीक के प्रति यह जुड़ाव भारत के उज्ज्वल भविष्य की दिशा को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विज्ञान और नवाचार के प्रति देश के युवाओं में बढ़ता आकर्षण भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दंतेवाड़ा का विज्ञान केन्द्र अब वैज्ञानिक चेतना और नवाचार का केन्द्र बन रहा है, जो विशेषकर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को विज्ञान, तकनीक और नवाचार की दुनिया से जोड़ने का प्रेरक माध्यम बन गया है। प्रधानमंत्री द्वारा की गई यह सराहना न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक उत्साहवर्धक संकेत है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री मोदी प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों से संवाद करते हैं और देश भर में हो रहे सकारात्मक प्रयासों को साझा कर एक प्रेरक वातावरण तैयार करते हैं।

इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

"प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा 'मन की बात' कार्यकम में दंतेवाड़ा विज्ञान केन्द्र की प्रशंसा छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्र, जो कभी हिंसा के लिए जाने जाते थे, आज विज्ञान और नवाचार के प्रतीक बन रहे हैं। प्रधानमंत्री जी की सराहना से प्रदेश के बच्चों और युवाओं को विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलेगी। यह छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"
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छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम में सुधार से औद्योगिक विकास को नई दिशा

 छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने और श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। यह संशोधन, जो 27 फरवरी 2025 को अधिसूचित किया गया, औद्योगिक इकाइयों के लिए पट्टे पर दी गई भूमि के उपयोग और औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक आवास निर्माण को लेकर नए अवसर प्रदान करता है। इस कदम को राज्य की औद्योगिक नीति को और अधिक निवेशक-अनुकूल बनाने और स्थानीय श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।


पट्टे पर दी गई भूमि का 15 प्रतिशत नियमितीकरण

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर किए गए नए संशोधन के तहत, औद्योगिक इकाइयों को पट्टे पर दी गई कुल भूमि का 15 प्रतिशत हिस्सा गैर-औद्योगिक गतिविधियों, जैसे प्रशासनिक भवन, कैंटीन, या अन्य सुविधाओं के लिए नियमित करने की अनुमति दी गई है। पहले यह सीमा सख्त थी, जिसके कारण कई इकाइयों को परिचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब इस छूट से उद्यमी अपनी इकाइयों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए लचीले ढंग से भूमि का उपयोग कर सकेंगे।

औद्योगिक श्रमिक आवास निर्माण की अनुमति

संशोधन का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए आवास निर्माण की अनुमति है। यह कदम न केवल श्रमिकों को बेहतर रहन-सहन की सुविधा प्रदान करेगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की उपलब्धता को भी बढ़ाएगा। इससे श्रमिकों को कार्यस्थल के नजदीक रहने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी यात्रा लागत और समय की बचत होगी।

संशोधन के लाभ

15 प्रतिशत भूमि के नियमितीकरण की अनुमति से उद्यमी अपनी इकाइयों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बना सकेंगे। इससे उत्पादकता और कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। औद्योगिक क्षेत्रों में आवास सुविधा शुरू होने से श्रमिकों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास मिलेगा। यह उनकी कार्यक्षमता और जीवन स्तर को बढ़ाने में मदद करेगा। अनुकूल नीतियों के कारण छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यह विशेष रूप से छोटे और मझोले उद्यमों के लिए लाभकारी होगा। श्रमिक आवास और औद्योगिक विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। औद्योगिक क्षेत्रों में आवास सुविधा से शहरी क्षेत्रों पर जनसंख्या का दबाव कम होगा, क्योंकि श्रमिकों को औद्योगिक क्षेत्रों में ही रहने का विकल्प मिलेगा।

गौरतलब है कि पहले औद्योगिक इकाइयों को पट्टे पर दी गई भूमि का उपयोग केवल विशिष्ट औद्योगिक गतिविधियों के लिए करना होता था। गैर-औद्योगिक उपयोग, जैसे कार्यालय भवन या कर्मचारी सुविधाओं के लिए, अनुमति लेना जटिल और समय लेने वाला था। नए नियम के तहत, 15 प्रतिशत भूमि को बिना किसी जटिल प्रक्रिया के नियमित करने की अनुमति दी गई है। यह उद्यमियों को परिचालन लागत कम करने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद करेगा। उदाहरण के लिए, एक इकाई अब इस 15 प्रतिशत भूमि पर कर्मचारी कल्याण केंद्र, प्रशिक्षण सुविधा, या गोदाम बना सकती है।

छत्तीसगढ़ में औद्योगिक क्षेत्र अक्सर ग्रामीण या अर्ध-शहरी इलाकों में स्थित हैं, जहां श्रमिकों के लिए आवास की कमी रहती है। इससे श्रमिकों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिसका असर उनकी उत्पादकता पर पड़ता है। संशोधन के तहत, औद्योगिक इकाइयां अब अपने परिसर में या आसपास श्रमिकों के लिए आवास बना सकती हैं। यह सुविधा न केवल श्रमिकों के लिए लाभकारी होगी, बल्कि उद्यमियों को भी स्थिर और समर्पित कार्यबल उपलब्ध कराएगी।

औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन छत्तीसगढ़ को निवेश के लिए और अधिक आकर्षक बनाएगा। रायपुर के उद्योगपति, राजेश अग्रवाल ने कहा, 15 प्रतिशत भूमि के नियमितीकरण से हमें अपने परिसर में कर्मचारी सुविधाएं बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, श्रमिक आवास की अनुमति से हमारे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस संशोधन को विकसित छत्तीसगढ़ के विजन का हिस्सा बताया है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य उद्योगों को बढ़ावा देना और साथ ही श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करना है। यह संशोधन दोनों उद्देश्यों को प्राप्त करने में मददगार साबित होगा। छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में संशोधन राज्य के औद्योगिक विकास और श्रमिक कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 15 प्रतिशत भूमि के नियमितीकरण और श्रमिक आवास निर्माण की अनुमति से न केवल उद्यमियों को लाभ होगा, बल्कि श्रमिकों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।
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"नवीकरणीय ऊर्जा से बदलेगा प्रदेश का भविष्य" — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 अक्षय ऊर्जा का अधिक से अधिक उपयोग स्वच्छ, सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाएगा। बिजली आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नए लक्ष्य तय किए गए हैं और इसे पूरा करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के क्रेडा कार्यालय परिसर में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में 50 करोड़ रुपए से अधिक के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमिपूजन कर कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सौर ऊर्जा संचालित बैटरी स्वैपिंग स्टेशन और सामान्य से सौर ऊर्जा में परिवर्तित ई रिक्शा का लोकार्पण भी किया। 


           मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सभी को रामनवमी के पावन पर्व की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज के इस शुभ घड़ी में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े कामों की शुरुआत हुई है। परंपरागत ईंधन के स्रोतों से पर्यावरण को हो रही क्षति को देखते हुए सौर और  नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बड़ा परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा से जुड़ी अनेक योजनाएं संचालित है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश के आमजनों और  किसानों को बड़ा लाभ मिल रहा है। साथ ही नक्सल प्रभावित इलाकों में भी नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से बिजली पहुंचाने का काम पूरा हो रहा है और सुदूर अंचल के गांव इससे रोशन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा से संचालित ई रिक्शा का आज लोकार्पण किया गया है और इस पहल से ई रिक्शा का संचालन किफायती हो जाएगा और ई रिक्शा चालकों के आय में वृद्धि होगी। 
           श्री साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में हॉफ बिजली नहीं बल्कि मुफ्त बिजली मिले और इस दिशा में सरकार प्रयासरत है। उन्होंने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बताया और कहा कि प्रदेश में अधिक से अधिक गरीब परिवारों को इससे लाभान्वित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा भी सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान बजट में किया गया है। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा के क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त होने की जानकारी दी और कहा कि इससे ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा और हम भविष्य की जरूरतों को आसानी से पूरा कर पाएंगे। 

     विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया स्वच्छ पर्यावरण के लिए अक्षय ऊर्जा को अपना रही है। उन्होंने कहा कि अब फॉसिल फ्यूल का उपयोग धीरे धीरे कम होगा और आने वाले समय में नवीकरणीय ऊर्जा से यह रिप्लेस हो जाएगा। डॉ. सिंह ने अक्षय ऊर्जा से जुड़े 50 करोड़ रुपए से अधिक के कार्यों के लोकार्पण और भूमिपूजन के लिए अपनी शुभकामनाएं दी और इसे स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ी पहल बताया। 

अक्षय ऊर्जा से जुड़े 50 करोड़ रुपए से अधिक के कार्यों का हुआ भूमिपूजन और लोकार्पण

        मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर में अक्षय ऊर्जा से जुड़े 50 करोड़ रुपए से अधिक के कार्यों का लोकार्पण और शिलान्य किया।
लोकार्पण किए गए कार्यों में रायपुर में 29 लाख की लागत से सौर ऊर्जा संचालित बैटरी स्वैपिंग स्टेशन, सामान्य ई रिक्शा को सोलर ई रिक्शा में परिवर्तित करने तथा नियद नेल्लानार योजना अंतर्गत स्थापित 54 नग सोलर हाई मास्ट, 152 नग सोलर ड्यूल पंप एवं दो नग सोलर पावर प्लांट स्थापना कार्य शामिल है। 
     इसी तरह भूमिपूजन किए गए कार्यों में  बिलासपुर, राजनांदगांव एवं जगदलपुर के ऊर्जा शिक्षा उद्यानों में सौर ऊर्जा से संचालित बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापना कार्य, प्रदेश के समस्त ऊर्जा शिक्षा उद्यानों को नेट जीरो करने, ऊर्जा शिक्षा उद्यान राजनांदगांव का जीणोद्धार का कार्य शामिल है। 
साथ ही जिला बालोद में मुख्यमंत्री की घोषणा अनुरूप दो नग सोलर हाई मास्ट एवं एक नग सामुदायिक बायोगैस संयंत्र की स्थापना कार्य, जिला बलौदा बाजार में मुख्यमंत्री के घोषणा अनुरूप 23 ग्रामों के पर्यटन स्थलों में 50 नग सोलर हाई मास्ट संयंत्र का स्थापना कार्य, जिला कोरबा अंतर्गत उप स्वास्थ्य केंद्रों का सौर ऊर्जीकरण का कार्य, हिर्री डोलोमाइट खदान जिला बिलासपुर में 500 किलो वाट क्षमता के ऑन ग्रिड सोलर पावर प्लांट का स्थापना कार्य, जिला कोरबा अंतर्गत आश्रम/ छात्रावासों का सौर ऊर्जीकरण कार्य, ग्राम कुंजारा जिला जशपुर में 280 किलो वाट क्षमता के ऑन ग्रिड एवं 2.4 किलो वाट क्षमता के ऑफ ग्रिड सोलर पावर प्लांट की स्थापना कार्य का भूमिपूजन किया गया।



क्रेडा के नवाचारी पहल से बैटरी ऑपरेटेड ई रिक्शा चालकों की बढ़ेगी आय

सौर ऊर्जा से मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाने पर हो रहा है काम

          क्रेडा सीईओ श्री राजेश सिंह राणा ने बताया कि सौर संचालित बैटरी स्वैपिंग स्टेशन क्रेडा द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बैटरी ऑपरेटेड इलेक्ट्रिक रिक्शा के लिए विकसित किया गया है। बैटरी स्वैपिंग के मदद से ई-रिक्शा चालक कम समय में सस्ते दर पर डिस्चार्ज बैटरी को चार्ज बैटरी से बदल सकते हैं। इससे ई-रिक्शा चालक प्रतिदिन अधिक दूरी तय कर पाएंगे तथा इससे उनकी आमदनी भी बढ़ेगी। इसी तरह सोलर पैनल आधारित ई-रिक्शा साधारण ई-रिक्शा के मुकाबले एक ऊर्जा दक्ष ई-रिक्शा के रूप में क्रेडा द्वारा विकसित किया गया है। इससे रिक्शा चालक को बार-बार बैटरी चार्ज करने की समस्या से राहत मिलती है। साधारणतः रिक्शा चालक प्रतिदिन बैटरी चार्जिंग समस्या से अधिक दूरी तय नहीं कर पाते हैं। ई-रिक्शा में सौर पैनल स्थापित कर इस समस्या को क्रेडा द्वारा काफी हद तक दूर किया गया है। श्री राणा ने बताया कि ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में सौर ऊर्जा से मूलभूत सुविधाओं को मुहैया कराने में क्रेडा द्वारा अनेकों प्रयास किये जा रहे हैं, जिसमें आश्रम-छात्रावासों, स्वास्थ्य केन्द्रों, ऊर्जा शिक्षा उद्यान में सौर संयत्रों की स्थापना, पथ प्रकाश व्यवस्था हेतु सौर संयंत्रों से सामुदायिक स्ट्रीट लाईट का संचालन, सोलर हाई मास्ट लाईट की स्थापना एवं सामुदायिक बायोगैस संयंत्रों की स्थापना जैसे कार्य सम्मिलित है।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री संपत अग्रवाल, विधायक श्री सुनील सोनी, क्रेडा के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी, नव नियुक्त निगम मंडलों के अध्यक्षगण, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में आमजन मौजूद थे।
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केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्वामी विवेकानंद विमानतल पर किया आत्मीय स्वागत

 केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का आज रायपुर के स्वामी विवेकानंद विमानतल पहुंचने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आत्मीय स्वागत किया। 


केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, विधायक श्री अनुज शर्मा ने पुष्पगुच्छ भेंटकर  स्वागत किया।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दुर्गाष्टमी और महानवमी की प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएँ

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को दुर्गाष्टमी और महानवमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने नवरात्रि के इस पावन पर्व पर माँ दुर्गा से समस्त प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल की कामना की है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा है कि नवरात्रि, शक्ति उपासना का पर्व है, जो पूरे देश में आस्था, श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है। देवी के नौ रूपों की उपासना में अष्टमी और महानवमी का विशेष महत्व है। इन अवसरों पर घरों और मंदिरों में कन्या पूजन तथा भंडारा आयोजित किए जाते हैं, जहाँ बेटियों को देवी का रूप मानकर उनका स्वागत किया जाता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सभी बेटियां देवी स्वरूपा है, अतः हमें नवरात्रि के नौ दिन ही नहीं, बल्कि हर दिन बेटियों और महिलाओं के प्रति सम्मान, सुरक्षा और समानता का भाव बनाए रखना चाहिए। यही देवी उपासना की सच्ची भावना है, और इसी में हमारी संस्कृति की आत्मा भी निहित है।
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छत्तीसगढ़ को मिली 8741 करोड़ रुपए की बड़ी सौगात: खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा रेल परियोजना से खुलेगा विकास का नया द्वार

 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने भारतीय रेलवे की चार महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत लगभग 18,658 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ सहित महाराष्ट्र और ओडिशा के कुल 15 ज़िलों को जोड़ते हुए रेलवे नेटवर्क में 1247 किलोमीटर की महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।


छत्तीसगढ़ के लिए विशेष रूप से स्वीकृत ‘खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा 5वीं एवं 6वीं लाइन’ परियोजना से राज्य के औद्योगिक नक्शे में ऐतिहासिक परिवर्तन की संभावनाएं बनेंगी। यह परियोजना बलौदा बाजार जैसे क्षेत्रों को सीधी रेलवे कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे सीमेंट संयंत्रों, इस्पात इकाइयों और अन्य औद्योगिक निवेश के लिए आधारभूत संरचना तैयार होगी। यह मार्ग कृषि उत्पादों, उर्वरक, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और चूना पत्थर जैसी सामग्रियों के परिवहन में क्रांतिकारी सुधार लाएगा। इससे माल ढुलाई की लागत घटेगी, संचालन की गति बढ़ेगी और उद्योगों को निर्बाध सप्लाई चेन मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को मिली यह ऐतिहासिक रेल परियोजना आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम है। खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा लाइन से बलौदा बाजार और आस-पास के क्षेत्रों को  रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जिससे यहाँ के युवाओं के लिए रोज़गार और स्वरोज़गार के नए द्वार खुलेंगे। यह परियोजना छत्तीसगढ़ में नया अध्याय लिखेगी, जिससे न केवल कोयला, सीमेंट और लौह अयस्क जैसे क्षेत्रों में उत्पादन और परिवहन को गति मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक सशक्तिकरण भी सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की आवश्यकता और क्षमता को पहचान कर रेल परियोजनाओं के माध्यम से राज्य को ‘विकास के फास्ट ट्रैक’ पर लाने का काम किया है।

उल्लखेनीय है कि खरसिया से परमलकसा तक 5वीं और 6वीं नई रेल लाइन बिछाने के लिए ₹8,741 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति मिल गई है, जिससे छत्तीसगढ़ को लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों के क्षेत्र में बड़ी बढ़त मिलेगी।

मुख्य विशेषताएँ

कुल लंबाई: 278 किमी लंबा रेलमार्ग, 615 किमी ट्रैक की लंबाई

स्टेशनों की संख्या: 21

पुल और फ्लाईओवर: 48 बड़े पुल, 349 छोटे पुल, 14 आरओबी, 184 आरयूबी, 5 रेल फ्लाईओवर

ट्रैफिक क्षमता: 21 से 38 मिलियन टन कार्गो, 8 मेल/एक्सप्रेस/सेमी हाई-स्पीड ट्रेनें

ईंधन और पर्यावरण संरक्षण: 22 करोड़ लीटर डीजल की बचत प्रतिवर्ष

113 करोड़ किग्रा CO2 की कटौती – यह लगभग 4.5 करोड़ पेड़ों के लगाने के बराबर है।

लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी: सड़क परिवहन की तुलना में प्रतिवर्ष ₹2,520 करोड़ की बचत

इन ज़िलों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ:रायगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, बलौदा बाज़ार, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव।

राज्य की प्रगति का नया युग

इस परियोजना से छत्तीसगढ़ में औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों में तीव्र गति आएगी। यह पहल पर्यावरणीय स्थिरता और ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर को नया आयाम देगी।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को खनिज राजस्व में ऐतिहासिक सफलता: वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्तमुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को खनिज राजस्व में ऐतिहासिक सफलता: वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और खनिज साधन विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद के निर्देशन में छत्तीसगढ़  ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में खनिज राजस्व प्राप्ति में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।


प्रदेश में संचालित खनन संक्रियाओं से 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त हुआ है, जो विगत वर्ष 2023-24 के 12,795 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 11% की वृद्धि (1400 करोड़ रुपये अधिक) दर्शाता है। 

प्रदेश में खनिज राजस्व प्राप्ति में दंतेवाड़ा अव्वल

वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश के खनिज राजस्व संग्रहण में जिला दंतेवाड़ा ने सर्वाधिक 6580 करोड़ रुपये का योगदान देकर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा, कोरबा से 2148 करोड़, रायगढ़ से 2027 करोड़, बालोद से 1313 करोड़, सरगुजा से 585 करोड़, बलौदाबाजार से 354 करोड़, कांकेर से 328 करोड़, तथा सूरजपुर से 155 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय राजस्व भागीदारी दर्ज की गई है।

खनिज संसाधनों में राष्ट्रीय भागीदारी

छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों की दृष्टि से देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र में मात्र 4% की हिस्सेदारी होते हुए भी छत्तीसगढ़ का  देश के कुल खनिज उत्पादन मूल्य में 16% से अधिक की भागीदारी है। यहां मुख्य रूप से लौह अयस्क, कोयला, चूनापत्थर और बाक्साइट के विशाल भंडार हैं, जो खनिज राजस्व के प्रमुख स्रोत हैं। इसके अलावा, राज्य में सामरिक महत्व के खनिजों सहित कुल 28 प्रकार के खनिज भंडार की पुष्टि हुई है।

ई-नीलामी प्रणाली से अतिरिक्त राजस्व

वर्ष 2015 से खनिज विभाग द्वारा खनिजों का ई-नीलामी के माध्यम से आबंटन की कार्यवाही की जा रही है, जिससे रॉयल्टी के अलावा प्रीमियम के रूप में अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो रही है। खनिज राजस्व में हो रही बढ़ोत्तरी में ई नीलामी के माध्यम से स्वीकृत खदानों का योगदान अब स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है।

खनिज विकास मद से अधोसंरचना को बल

राज्य शासन द्वारा खनिज राजस्व की कुल प्राप्ति की 5% राशि "खनिज विकास मद" में अंतरित की जाती है। इससे प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में खनिज संसाधनों के विकास और अधोसंरचना निर्माण का कार्य किया जा रहा है। आगामी वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में केवल रेल कॉरिडोर निर्माण हेतु प्रावधानित किए गए हैं।

समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान

प्रदेश की खनन संक्रिया केवल औद्योगिक संस्थानों को कच्चा माल प्रदान करने तक सीमित नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सामाजिक और आर्थिक विकास का मजबूत स्तंभ बन चुकी है।

"छत्तीसगढ़ की धरती केवल खनिज संपदा से नहीं, विकास की असीम संभावनाओं और जनकल्याण के संकल्प से भी समृद्ध है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त कर प्रदेश ने एक नई ऊँचाई को स्पर्श किया है। यह उपलब्धि हमारी दूरदर्शी नीतियों, पारदर्शी प्रशासन, और ईमानदार कार्यसंस्कृति का प्रतिफल है।

ई-नीलामी प्रणाली, तकनीकी नवाचार और सुशासन के माध्यम से हम खनिज क्षेत्र को केवल राजस्व संग्रहण का माध्यम नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों के लिए विकास के इंजन के रूप में परिवर्तित कर रहे हैं।"
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि (03 अप्रैल) पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज केवल इतिहास के पन्नों में दर्ज एक नाम नहीं, बल्कि भारतमाता की आत्मा में रचा-बसा वह स्वाभिमान हैं, जिन्होंने स्वराज्य का स्वप्न देखा और उसे यथार्थ में परिणत किया। वे साहस, संकल्प और राष्ट्रभक्ति की सजीव प्रतिमूर्ति थे।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिवाजी महाराज भारतीय संस्कृति, नीति और नेतृत्व के अमिट प्रतीक हैं। उन्होंने न केवल धार्मिक सहिष्णुता, जनकल्याण और न्यायप्रिय शासन की अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत की, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि एक सच्चा शासक केवल तलवार से नहीं, नीति, मूल्य और जनसेवा से पहचाना जाता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज जब देश नए भारत के निर्माण की दिशा में बढ़ रहा है, तब शिवाजी महाराज की सोच, उनका साहस और स्वराज्य का दर्शन हमारे लिए प्रेरणापुंज बन सकता है। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज के जीवन से हमे यह प्रेरणा मिलती है कि जब संकल्प अडिग हो और ध्येय राष्ट्रहित, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं को प्रेरित किया कि शिवाजी महाराज के राष्ट्रप्रेम के आदर्श का अनुसरण करते हुए राष्ट्र की उन्नति में अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और समय को समर्पित कर सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहभागी बनें।
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दंतेवाड़ा के गीदम में मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण के लिए 299.85 करोड़ की मिली प्रशासकीय स्वीकृति

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के स्पष्ट निर्देश हैं कि शासन की प्रत्येक योजना का लाभ राज्य की जनता तक पहुँचे और सभी संसाधनों का उपयोग जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किया जाए। मुख्यमंत्री की इस जनकेंद्रित सोच के अनुरूप अब डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) की राशि का जनहित में लोगों को  गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सुविधाओं  की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में उपयोग प्रारंभ हो गया है।


इसी क्रम में दंतेवाड़ा जिले की डीएमएफ शासी परिषद की बैठक में गीदम में नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय भवन निर्माण कार्य हेतु ₹299 करोड़ 85 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह स्वीकृति क्षेत्रीय स्वास्थ्य ढांचे को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के क्रियान्वयन के लिए लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत सीजीएमएससी (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन) को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है। सीजीएमएससी नियमानुसार राज्य शासन एवं पीडब्ल्यूडी मैनुअल के प्रावधानों के तहत निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश और निर्धारित समय सीमा का पालन सुनिश्चित करेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में यह पहल न सिर्फ गीदम और दंतेवाड़ा क्षेत्र के लोगों को अपने निवास के समीप उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराएगी, बल्कि यह संपूर्ण बस्तर अंचल के स्वास्थ्य सेवा तंत्र को भी एक नई दिशा देगी।

यह निर्णय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की जनकेंद्रित सरकार की उस अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें विकास, विश्वास और पारदर्शिता को समान रूप से महत्व देते हुए राज्य के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प झलकता है।
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छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा निर्णय : व्यापारियों और आम जनता को राहत

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के छोटे व्यापारियों और मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए दो अहम निर्णय लागू किए हैं, जो 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी हो चुके हैं।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन और वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी के दिशानिर्देश पर इन निर्णयों को वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल किया गया था।

ई-वे बिल की सीमा में वृद्धि : अब ₹1 लाख तक का माल परिवहन होगा बिना ई-वे बिल के

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के भीतर माल परिवहन के लिए अनिवार्य ई-वे बिल की सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी है। यह निर्णय विशेष रूप से छोटे व्यापारियों को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है। इस निर्णय से व्यापारियों को ₹1 लाख तक के मूल्य के सामानों के परिवहन में अब ई-वे बिल की आवश्यकता नहीं होगी। इस निर्णय से राज्य में ई-वे बिल जनरेट करने वाले लगभग 26% व्यापारियों को ई-वे बिल जनरेट करने से मुक्ति मिलेगी। इस निर्णय से ई-वे बिल जनरेशन में 54 प्रतिशत की कमी आएगी, जिससे अनुपालन व्यय में उल्लेखनीय कमी आएगी।
हालांकि, कुछ विशेष वस्तुएं जैसे पान मसाला, तंबाकू उत्पाद, विशिष्ट लकड़ी उत्पाद जैसे – प्लायवुड, लेमिनेटेड शीट, पार्टिकल बोर्ड, फाइबर बोर्ड, आयरन, स्टील एवं उसके सामान, कोयला के लिए यह छूट लागू नहीं होगी।

व्यापारियों द्वारा लंबे समय से ई-वे बिल में छूट दिए जाने की मांग पर यह निर्णय लिया गया है, जो व्यापार को सुगम और लागत प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल है।

पेट्रोल पर वैट में ₹1 प्रति लीटर की कमी : मध्यमवर्गीय परिवारों को सीधी राहत

राज्य सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से पेट्रोल पर वैट की राशि में ₹1 प्रति लीटर की कटौती की है। इस निर्णय से पेट्रोल की कीमतों में सीधे कमी आएगी, जिसका लाभ विशेष रूप से मध्यमवर्गीय और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा। 

छत्तीसगढ़ में दुपहिया वाहनों का उपयोग करने वालों की संख्या अधिक है, जो मुख्यतः पेट्रोल पर निर्भर हैं। वैट में की गई यह कटौती इन परिवारों की रोज़मर्रा की लागत को कम करने में सहायक सिद्ध होगी।

यह निर्णय भी मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन और वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी द्वारा वर्ष 2025-26 के बजट में की गई घोषणा के अनुरूप वर्तमान आर्थिक परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए क्रियान्वित किया गया है।

सरकार की प्रतिबद्धता : सुगमता, सुविधा और संवेदनशीलता

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेशवासियों की समस्याओं को समझते हुए लगातार ऐसे निर्णय ले रही है जो सार्थक, जनहितकारी और दूरदर्शिता से परिपूर्ण हों। व्यापारी वर्ग को सहूलियत और आम जनता को राहत देने के ये निर्णय प्रदेश के आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण कारक सिद्ध होंगे।
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अंतर्राष्ट्रीय भजन गायक हंसराज रघुवंशी की भक्ति संगीत से भक्तिमय हुआ वातावरण

 भोरमदेव महोत्सव का शुभारंभ इस बार एक अद्वितीय और भक्तिमय प्रस्तुति के साथ हुआ, जब अंतर्राष्ट्रीय भजन गायक हंसराज रघुवंशी ने अपनी मधुर आवाज़ और भक्ति गीतों से मंदिर परिसर को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके बाबा भोरमदेव और भोलेनाथ बाबा भजनों ने न केवल भक्तों के दिलों में श्रद्धा और आस्था को और मजबूत किया, बल्कि महोत्सव का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी और बढ़ा दिया। 

मेरा भोला है भंडारी.........., ऐसा डमरू बजाया भोले नाथ रे........, शिव समा रहे मुझमें और मैं शुन्य हो रहा हू....., पार्वती बोले शंकर से........., युग राम राज का आ गया........ सहित अनेक भजनों ने भोरमदेव महोत्सव के वातावरण को एक दिव्य आभा से भर दिया, जिससे श्रद्धालुओं को एक गहरी आध्यात्मिक अनुभूति हुई। रघुवंशी के भक्ति गीतों ने श्रद्धालुओं को शांति और आस्था से भर दिया, और भव्य आयोजन का अहसास कराया। महोत्सव का वातावरण अब भक्तिमय, उल्लासपूर्ण और एक नई ऊर्जा से भरपूर था, जिसमें हर कोने में भक्ति की तरंगें गूंज रही थीं। श्रद्धालु और भक्तगण एक साथ मिलकर इस महोत्सव का आनंद ले रहे थे, जो भक्ति, शांति और समर्पण का सजीव उदाहरण बन चुका था।

 

भोरमदेव महोत्सव में छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक अनुराग शर्मा ने भी अपने संगीत से माहौल को और भी शानदार बनाया। उनका गायन और संगीत छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के प्रति लोगों की श्रद्धा और प्रेम को और गहरा कर गया। भोरमदेव महोत्सव में बैगा नृत्य, फाग गीत, छत्तीसगढ़ी लोककला के साथ स्कूली बच्चों ने दी मनमोहक प्रस्तुति भी दी। महोत्सव में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला और संस्कृति का अद्भुत संगम भी देखने को मिला। महोत्सव में स्थानीय स्कूलों के विद्यार्थियों द्वारा भी मनमोहक प्रस्तुतियां दी गई, जो युवाओं की कला और संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रतीक बनी। इसके अलावा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की विविधता से परिचित कराया। इस मौके पर प्रसिद्ध कलाकारों ने अपनी कला से मंच को सजा दिया। बसंताबाई और साथी ने बैगा नृत्य, गितिका बांसुरीली ने बांसुरी वादन, ईशिका गिरी और रितीलाल ने कत्थक नृत्य, गोपा शान्याल ने संगीत गायन, प्रभंजन चतुर्वेदी ने भजन गायन, संगीता चौबे ने भरत नाट्यम, और प्रमोद सेन और उनके साथी ने छत्तीसगढ़ लोक कला मंच गहना गाठी की शानदार प्रस्तुति दी। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक नृत्य और संगीत का अद्भुत अनुभव हुआ।

 

महोत्सव के इस पहले दिन का आयोजन केवल एक मनोरंजन का अवसर नहीं था, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करने और आने वाली पीढ़ियों को इससे परिचित कराने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी साबित हुआ। भोरमदेव महोत्सव का यह अद्भुत आयोजन न केवल भक्तिरस में डूबे हुए था, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का भी महत्वपूर्ण कदम था। यह आयोजन हर वर्ष एक नई ऊर्जा और उमंग लेकर आता है, और आने वाले दिनों में भी इस महोत्सव की महिमा और लोकप्रियता में निरंतर वृद्धि हो रही है। भोरमदेव महोत्सव ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के उत्सव के रूप में उभरा। उद्घाटन के पहले दिन प्रदेशभर से आए श्रद्धालुओं और दर्शकों की भारी भीड़ ने आयोजन में भाग लिया, जिससे आयोजन स्थल पर एक उत्सवमय और भक्तिमय वातावरण बन गया। मंदिर परिसर में भक्ति की यह अलौकिक लहर इस महोत्सव की प्रमुख विशेषता बन गई।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बिलासपुर दौरे की तैयारियों का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम स्थल पर पहुँचकर लिया जायजा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 30 मार्च को बिलासपुर जिले के बोदरी तहसील स्थित ग्राम मोहभठ्ठा में प्रस्तावित विशाल जनसभा की तैयारियों का आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्वयं कार्यक्रम स्थल पर पहुँचकर जायजा लिया। उन्होंने कार्यक्रम से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं—मुख्य मंच, हेलीपैड, ग्रीन रूम, सांस्कृतिक मंच, हितग्राहियों एवं विशिष्ट अतिथियों की बैठक व्यवस्था आदि का गहन निरीक्षण किया।

मुख्यमंत्री साय ने मौके पर अधिकारियों की बैठक लेकर निर्देश दिए कि 55 एकड़ क्षेत्र में आयोजित इस ऐतिहासिक सभा के लिए सभी तैयारियाँ समयबद्ध, सुव्यवस्थित और जनहित केंद्रित हों। बैठक में बताया गया कि कार्यक्रम में प्रदेशभर से लगभग 2 लाख लोगों के शामिल होने की संभावना है, जिसके मद्देनज़र सभी विभागों को अलर्ट मोड पर कार्य करने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का अब तक का सबसे बड़ा छत्तीसगढ़ दौरा होगा। उनका आगमन नवरात्रि के शुभ अवसर पर हो रहा है, जो प्रदेश के विकास के लिए अत्यंत मंगलकारी संकेत है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमने स्वयं दिल्ली जाकर उन्हें आमंत्रित किया था, और आज पूरा प्रदेश उनके स्वागत के लिए आतुर है।

मुख्यमंत्री साय ने जानकारी दी कि इस ऐतिहासिक आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगभग ₹33,000 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात देंगे। इनमें पीएम जनमन योजना के तहत विशेष रूप से बिरहोर, बैगा और पहाड़ी कोरवा जैसी जनजातियों के लिए संचालित योजनाएँ शामिल हैं, जो छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों के विकास को नई दिशा देंगी।

मुख्यमंत्री  साय ने जिला प्रशासन  को निर्देशित किया कि हितग्राहियों को घर से सभा स्थल तक लाना और वापस सुरक्षित पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए जल, छाया, चिकित्सा आदि की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव के नेतृत्व में स्थानीय प्रशासन पूरी तन्मयता से तैयारियों में जुटा है और यह कार्यक्रम प्रदेश के जनजीवन में एक ऐतिहासिक स्मृति के रूप में दर्ज होगा।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि आमसभा के सफल आयोजन के लिए सभास्थल में सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जा रही हैं।

 
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रायगढ़ मेडिकल कॉलेज बना राज्य का पहला फ्री वाई-फाई सुविधा युक्त शासकीय मेडिकल कॉलेज

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में नागरिकों की सुविधाओं को डिजिटल और स्मार्ट सेवाओं से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में रायगढ़ स्थित स्व. श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में ओपीडी पंजीयन काउंटर के पब्लिक एरिया (वेटिंग हॉल सहित) को फ्री वाई-फाई ज़ोन में तब्दील किया गया है। यह सुविधा राज्य के किसी भी शासकीय मेडिकल कॉलेज में पहली बार प्रारंभ की गई है। इस अभिनव पहल को स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल एवं वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी के सतत मार्गदर्शन में, अधिष्ठाता डॉ. विनीत जैन एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ. एम. के. मिंज के निर्देशन में क्रियान्वित किया गया है।

डिजिटल हेल्थ को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम

फ्री वाई-फाई सुविधा का उद्देश्य ओपीडी में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को आभा एप के माध्यम से डिजिटल पंजीयन में आने वाली समस्याओं को दूर करना है। एम.आर.डी. विभाग के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र में अब मरीज अपने मोबाइल फोन से सीधे आभा एप के माध्यम से पंजीयन टोकन प्राप्त कर सकेंगे, जिससे पर्ची कटवाने की प्रक्रिया अधिक सरल, तेज और पारदर्शी हो गई है।

डॉ. एम. के. मिंज ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन को यह जानकारी मिली थी कि कई मरीजों को मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण आभा एप से पंजीयन में कठिनाई हो रही थी। विशेषकर, मेडिकल कॉलेज पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण यह समस्या लगातार बनी हुई है। इन तकनीकी बाधाओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया कि ओपीडी पंजीयन क्षेत्र में फ्री वाई-फाई सुविधा प्रदान की जाए। इस सुविधा से मरीज और उनके परिजन अब बिना किसी नेटवर्क बाधा के आसानी से आभा एप से पंजीयन कर सकते हैं, जिससे न केवल सुविधा में वृद्धि होगी, बल्कि समय की भी बचत होगी।

उल्लेखनीय है कि नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) द्वारा 4 जून 2024 को जारी निर्देशानुसार, सभी मेडिकल कॉलेजों को यह सुनिश्चित करना है कि ओपीडी/आईपीडी/आपातकालीन सेवाओं के लिए आने वाले मरीजों का पंजीकरण आभा आईडी के माध्यम से ही किया जाए। इस दिशा-निर्देश के अनुपालन हेतु आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा, छत्तीसगढ़ द्वारा भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि मेडिकल कॉलेज की मान्यता सुनिश्चित करने के लिए सभी मरीजों का पंजीयन आभा एप के माध्यम से ही किया जाए।

इन्हीं दिशानिर्देशों और मरीजों की सुविधाओं को दृष्टिगत रखते हुए रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में फ्री वाई-फाई सुविधा आज से औपचारिक रूप से ओपीडी क्षेत्र में प्रारंभ की गई है। यह पहल रायगढ़ मेडिकल कॉलेज को छत्तीसगढ़ में तकनीकी समावेशन वाले चिकित्सा संस्थानों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करती है और यह निश्चित रूप से डिजिटल हेल्थ मिशन की दिशा में एक सराहनीय और अनुकरणीय कदम है।
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छत्तीसगढ़ में आस्था को मिला नया संबल : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का किया शुभारंभ

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायपुर रेलवे स्टेशन से पहली विशेष तीर्थ यात्रा ट्रेन को तिरुपति, मदुरै और रामेश्वरम के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहली तीर्थ यात्रा ट्रेन में रायपुर और बलौदाबाजार-भाटापारा जिलों के 780 श्रद्धालु बुजुर्ग सम्मिलित हुए, जिनके लिए यह यात्रा केवल धार्मिक अनुभव नहीं, बल्कि सम्मान और स्नेह का प्रतीक बन गई। प्रदेश के बुजुर्गों की वर्षों पुरानी अभिलाषा आज पूरी हो गई जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का विधिवत शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री साय ने तीर्थयात्रा पर जा रहे बुजुर्गों से आत्मीय  चर्चा करते हुए कहा कि आप सभी के चेहरे पर जो खुशी है, वही मेरा संतोष है। उन्होंने कहा कि रामेश्वरम में आप लोग पवित्र रामसेतु देख सकेंगे, ज्योतिर्लिंग का दर्शन कर सकेंगे। आप लोग मदुरै तीर्थ का भी दर्शन करेंगे जहां मीनाक्षी मंदिर है। तिरुपति में बालाजी का दर्शन करेंगे। दक्षिण भारत के तीर्थ स्थलों को देखने का यह सुंदर अवसर है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री रामलला (अयोध्या दर्शन) योजना अंतर्गत अब तक 22 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या में श्री रामलला के दर्शन कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रयागराज में 144 वर्षों उपरांत महाकुंभ का आयोजन हुआ। छत्तीसगढ़ के तीर्थयात्रियों ने भी बड़ी संख्या में कुंभ में हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ के तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए और उनकी सुविधा का ध्यान रखने के लिए हमने प्रयागराज मेला क्षेत्र में छत्तीसगढ़ पवैलियन तैयार किया था। यहां लगभग साढ़े चार एकड़ में तीर्थयात्रियों के रूकने के इंतजाम थे। यह हमारा सौभाग्य है कि हम गंगा जी में स्नान करने पहुंचे प्रदेश के लाखों श्रद्धालुओं की सेवा कर सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि  अब श्रद्धालुओं की यात्रा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना अंतर्गत निरन्तर होती रहेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए हमने 15 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया है। इस योजना में उज्जैन, पुरी, द्वारिका, वैष्णो देवी, मथुरा, वृंदावन जैसे अनेक तीर्थ स्थलों को जोड़ा गया है, जिनकी निःशुल्क यात्रा कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि हमारे बुज़ुर्गों की तीर्थ यात्रा की इच्छा अक्सर आर्थिक कठिनाइयों के चलते अधूरी रह जाती थी। उन्होंने कहा कि हमें संतोष है कि हम उनकी इस इच्छा को साकार कर पा रहे हैं।  उन्होंने बताया कि योजना में विधवा और परित्यक्त महिलाओं को भी शामिल किया गया है, जिससे उन्हें भी धार्मिक स्थलों के दर्शन का गौरव प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार युवाओं, किसानों, महिलाओं और आदिवासी समुदाय सहित समाज के प्रत्येक वर्ग के उत्थान के लिए पूरी तरह समर्पित है और इसी दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

यह केवल यात्रा नहीं, संस्कृति और श्रद्धा का संगम है – मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े

समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना केवल तीर्थ यात्रा नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक आस्था का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत उन श्रद्धालुओं को यह अवसर प्राप्त होगा, जो अब तक आर्थिक सीमाओं के कारण तीर्थ यात्रा से वंचित रहे हैं। सरकार ने श्रद्धालुओं के लिए पूर्ण सुविधायुक्त पैकेज तैयार किया है जिसमें ट्रेन यात्रा, यात्रियों के ठहरने, भोजन, मंदिर दर्शन, सुरक्षा और चिकित्सा जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ शामिल हैं। स्पेशल ट्रेन में टूर एस्कॉर्ट, पुलिस बल और चिकित्सकों की टीम भी उनके साथ यात्रा कर रही है ताकि श्रद्धालुओं को हर क्षण सुरक्षा और सुविधा का अहसास हो। योजना के तहत देशभर के 19 प्रमुख तीर्थ क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिनमें उज्जैन, ओंकारेश्वर, पुरी, हरिद्वार, काशी, शिरडी, वैष्णोदेवी, अमृतसर, द्वारका, बोधगया, कामाख्या मंदिर, सबरीमाला जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल सम्मिलित हैं। 
समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में 4 दिसंबर 2012 को की गई थी। 15 जनवरी 2013 से 10 जून 2019 के मध्य इस योजना के अंतर्गत कुल 272 तीर्थ यात्राओं के माध्यम से 2,46,983 श्रद्धालुओं को लाभान्वित किया गया था। पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान यह योजना 5 साल तक संचालन में नहीं थी। डॉ. रमन सिंह की सरकार के दौरान संचालित इस योजना को, जिसे उसके बाद आने वाली सरकार ने बंद कर दिया था, अब पुनः प्रारंभ कर वर्तमान सरकार ने छत्तीसगढ़ में बुजुर्गों की श्रद्धा, आस्था और वर्षों से संजोए गए तीर्थ यात्रा के सपने को पूर्ण करने के लिए एक बार फिर पहल की है।
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिले आईईएसए अध्यक्ष, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश को लेकर हुई चर्चा

बेंगलुरू में आयोजित इन्वेस्टर्स कनेक्ट मीट में इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) के अध्यक्ष अशोक चंडक सहित अन्य प्रतिनिधियों ने राउंड टेबल बैठक में हिस्सा लिया। जहां मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश की संभावनाओं पर गहन चर्चा हुई। 

इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य सरकार की उद्योग नीति, निवेश अनुकूल वातावरण और बुनियादी ढांचे के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है, जिससे इस क्षेत्र में बड़े निवेश के अवसर खुल रहे हैं।

आईईएसए अध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को लेकर रुचि जताई और इस क्षेत्र में संभावित निवेश को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया।
बैठक में इंडस्ट्रियल क्लस्टर, स्किल डेवलपमेंट और लॉजिस्टिक्स जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई।  

यह बैठक छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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हम सबका परम सौभाग्य है कि मायाली में पूज्य पंडित प्रदीप मिश्रा जी के श्रीमुख से शिव महापुराण कथा का हो रहा वाचन — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर जिले के मायाली के मधेश्वर महादेव धाम में आयोजित 7 दिवसीय शिव महापुराण कथा में सहभागी बने और भक्ति-भाव से विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा और बिरहोर जनजाति परिवारों के साथ बैठकर कथा का श्रवण किया। उल्लेखनीय है कि इस अवसर पर शिव महापुराण कथा का श्रवण करने  एक लाख से अधिक श्रद्धालु उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री  साय ने कथावाचक पंडित श्री प्रदीप मिश्रा जी का पुष्पमाला पहनाकर एवं मधेश्वर महादेव का छायाचित्र भेंटकर अभिनंदन किया, साथ ही प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना करते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। 

मुख्यमंत्री  साय के साथ उनकी धर्मपत्नी  कौशल्या साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, पवन साय, कृष्ण कुमार राय, भरत सिंह सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी — कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी अंकित गर्ग, कलेक्टर  रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। 

27 मार्च को पुनः प्रारंभ होगी मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना

मुख्यमंत्री साय ने श्रद्धालुजनों को संबोधित करते हुए कहा कि यह हम सबके लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है कि भगवान शिव की दिव्य कथा कहने स्वयं पंडित प्रदीप मिश्रा मधेश्वर महादेव की धरती पर पधारे हैं। यहां पाँच दिनों से चल रही शिव भक्ति की धारा से समूचा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया है। इस पावन कथा से लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति हो रही है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना का पुनः शुभारंभ 27 मार्च को किया जाएगा। इसके तहत इच्छुक श्रद्धालुओं को विभिन्न तीर्थ स्थलों के दर्शन हेतु भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि अयोध्या धाम रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत अब तक 22,000 से अधिक श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं।

शिव महापुराण कथा की दिव्य धारा से विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा और बिरहोर  जनजाति के ग्रामीण भी लाभान्वित हुए। ग्राम पंडरसिली (मनोरा), बेहेराखार और भितघारा (बगीचा) से आए अनेक श्रद्धालु कथा स्थल पहुंचे। पहाड़ी कोरवा जनजाति के संतोष राम, बजरु राम, शंकर राम, दुर्गा राम और बिरहोर जनजाति के  गेंदु राम, गुरुबारु राम, लाखा राम ने कहा कि शिव कथा ने हमारे अंतर्मन को छू लिया है। प्रदीप मिश्रा जी के प्रवचन केवल भक्ति नहीं सिखाते, वे जीवन को नई दिशा भी देते हैं।

मधेश्वर महादेव: आध्यात्मिक आस्था का केंद्र

मुख्यमंत्री साय ने मधेश्वर महादेव धाम को विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में गौरव का प्रतीक बताया और कहा कि यह स्थल पूरे प्रदेश की धार्मिक आस्था का केंद्र है। उन्होंने आह्वान किया कि इस पावन अवसर का अधिक से अधिक लोग लाभ लें और कथा के शेष दो दिनों में भी उपस्थित होकर शिव भक्ति से स्वयं को अनुप्राणित करें।
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