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जशपुर के आगडीह हवाई अड्डे में चल रही एयर एनसीसी का फ्लाइंग ट्रेनिंग

 जशपुर के आगडीह हवाई अड्डे में वर्तमान  में  एयर एनसीसी का फ्लाइंग ट्रेनिंग  चल  रही है। एनसीसी  कैडेट  को छोटे हवाई जहाज से उड़ान भरने और रनवे पर लैंड करने से लेकर, विमान के कॉकपिट से लेकर हर हिस्से और विमान के नियंत्रण को लेकर सभी बेसिक जानकारी दी जा रही है।
  विंग कमांडर वी  के  साहू  के  अनुसार इस महीने के 7 तारीख से संचालित की जा रही इस प्रशिक्षण में फिलहाल 35 प्रशिक्षु कैडेट्स हिस्सा ले रहे हैं और इस माह के अंत तक 3 सीजी एयर स्क्वाड्रन रायपुर के बैनर के तले प्रदेश के युवा जशपुर के खुले आसमान में हवा में उड़ान सीख रहे हैं। एयर एनसीसी के द्वारा 2 सीटर माइ‌को लाइट एयरक्राफ्ट के जरिए जशपुर के आगडीह हवाई पट्टी पर एनसीसी सीनियर डिवीजन के कैडेट्स जिनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं।

मील का पत्थर साबित होगा यह प्रशिक्षण
विंग कमांडर वीके साहू ने बताया की एयर फोर्स और एविएशन के क्षेत्र में करियर के रूप में इसे चुनने वाले युवाओं के लिए यह प्रशिक्षण बेहद कारगर है। उन्होंने बताया की वो खुद बसना क्षेत्र के लाखौली के निवासी है और सबसे पहले उन्होंने भी एनसीसी कैडेट्स के रूप में उड़ान भरी थी जो आगे चलकर उनके करियर के लिए मील के लिए एयरफोर्स या एविएशन क्षेत्र में जाने वाले युवा के लिए यह प्रशिक्षण फ्लाइंग स्कूल में प्रवेश के लिए सहायक सिद्ध होता है। उन्होंने
बताया कि रायपुर के माना एयरपोर्ट पर उड़ान के सीमित अवसर के कारण इस ट्रेनिंग को जशपुर शिफ्ट किया गया है।  उन्होंने इस पूरे प्रशिक्षण अभियान के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, प्रदेश के शिक्षा सचिव और कलेक्टर जशपुर रोहित व्यास का आभार प्रकट किया, जिनके प्रयासों से जशपुर हवाई पट्टी पर चिकित्सा स्टाफ के साथ एम्बुलेंस और फायर फाईटिंग दस्ते के साथ तमाम तरह गई है, जिससे पूरी टीम और कैडेट्स के रुकने रहने, खाने और प्रशिक्षण का सारा काम सुचारू रूप से चल रहा है।

विंग कमांडर वीके साहू ने बताया की रायपुर के माना स्थित स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर इस प्रशिक्षण का संचालन किया जा रहा था लेकिन माना एयरपोर्ट में एयर ट्रैफिक के दबाव और उसके बीच 100 कैडेट्स को एयरक्राफ्ट उड़ान का प्रशिक्षण देने में कई प्रकार की दिक्कतें आ रही थी। इसके बाद इस प्रशिक्षण को प्रदेश के किसी और छोटे हवाई अड्डे या रनवे पर शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद जशपुर के आगडीह हवाई अड्डे का चयन किया गया, यहां का शांत वातावरण और रनवे इस प्रशिक्षण के लिए बहुत अच्छा साबित हुआ है, यह पूरा प्रशिक्षण और एयर एनसीसी के कैडेट्स के साथ जशपुर के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा। जशपुर के उपर उड़ने का अनुभव अनूठा माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट के उड़ान के प्रशिक्षण में शामिल एयर कुछ ऐसा है ट्रेनी एयरक्राफ्ट है जिसमें 2 सीटर माइक्रो लाइट एयरक्राफ्ट से एयर एनसीसी के कैडेट्स को उड़ान का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह एक घंटे की उड़ान में 13 लीटर ईंधन खर्च करता है और इसमें 50 लीटर एवियशन फ्यूल भरने की क्षमता है। इसे 20000 फुट की ऊंचाई पर उड़ाया जा सकता है, लेकिन फिलहाल लगभग 1000 फुट की ऊंचाई पर प्रशिक्षु कैडेट्स को इसे उड़ाना सिखाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार रायपुर से जशपुर तक उड़कर आने में इस विमान को 2 घंटे 5 मिनट का समय लगा।

एनसीसी कैडेट्स वंश कुमार, एसआर साहू, अंजू सिन्हा, बिपाशा परिहार और सिमरन साहू ने बताया की उन्होंने रायपुर के माना एयरपोर्ट पर भी इससे पहले एयर एनसीसी का प्रशिक्षण लिया है, लेकिन जशपुर की शांत फिजा यहां का एयरनॉट, एनवायरनमेंट में पायलट के बगल में को पायलट के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करना एक अनूठा अनुभव है।
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छत्तीसगढ़ में ऊर्जा क्रांति! 3 लाख करोड़ का निवेश, चार तरह के पावर प्लांट से बनेगी अपार ऊर्जा

छत्तीसगढ़ अब ऊर्जा क्रांति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आज रायपुर में हुए ‘छत्तीसगढ़ एनर्जी इंवेस्टर्स समिट’ में कई बड़ी कंपनियों ने 3 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश का ऐलान किया है. इस निवेश से राज्य में परमाणु, थर्मल, सौर और पंप्ड स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में बिजली उत्पादन के नए प्रोजेक्ट शुरू होंगे। इससे न केवल उद्योगों को फायदा मिलेगा, बल्कि आम लोगों को भी सस्ती और निरंतर बिजली मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ में ऊर्जा के क्षेत्र में यह निवेश राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देकर हरित भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ न केवल ऊर्जा में आत्मनिर्भर बने, बल्कि पूरे देश के लिए एक ऊर्जा हब के रूप में स्थापित हो।


छत्तीसगढ़ पहले से ही 30,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है, जो देश के औसत से ज्यादा है। अब हर व्यक्ति को 2048 किलोवाट-घंटे बिजली मिल रही है, जिससे राज्य की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही हैं।

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एनटीपीसी ने 80,000 करोड़ रुपये की लागत से 4200 मेगावाट क्षमता का न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट लगाने की योजना बनाई है। इससे छत्तीसगढ़ में परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन की शुरुआत होगी।

थर्मल पावर क्षेत्र में भी बड़े निवेश की घोषणा हुई है। अदानी पावर 66,720 करोड़ रुपये खर्च कर कोरबा, रायगढ़ और रायपुर में 1600-1600 मेगावाट के तीन थर्मल पावर प्लांट लगाएगा। जिंदल पावर रायगढ़ में 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए 12,800 करोड़ रुपये का निवेश करेगा, जबकि सरदा एनर्जी रायगढ़ में 660 मेगावाट क्षमता के प्लांट के लिए 5,300 करोड़ रुपये लगाएगी। इसके अलावा, सरकारी कंपनियां एनटीपीसी और सीएसपीजीसीएल 41,120 करोड़ रुपये की लागत से 4500 मेगावाट बिजली उत्पादन करेंगी।

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ को बड़ी सफलता मिली है। जिंदल पावर और एनटीपीसी ग्रीन मिलकर 10,000 करोड़ रुपये खर्च कर 2500 मेगावाट सौर बिजली का उत्पादन करेंगे। इसमें डोलेसरा में 500 मेगावाट और रायगढ़ में 2000 मेगावाट के सौर प्लांट शामिल होंगे।

किसानों के लिए भी खुशखबरी है। पीएम कुसुम योजना के तहत 4100 करोड़ रुपये की लागत से 675 मेगावाट सौर बिजली का उत्पादन किया जाएगा और 20,000 सोलर पंप लगाए जाएंगे। इससे किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती बिजली मिलेगी और डीजल पंपों की जरूरत कम होगी।

इसके अलावा, 57,046 करोड़ रुपये की लागत से 8700 मेगावाट क्षमता के पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट भी शुरू होंगे। इसमें एसजेएन कोटपाली में 1800 मेगावाट और जिंदल रिन्यूएबल द्वारा 3000 मेगावाट के प्रोजेक्ट शामिल हैं।

इन सभी निवेशों के जरिए छत्तीसगढ़ जल्द ही देश के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल हो जाएगा। इससे उद्योगों, किसानों और आम लोगों को फायदा होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।


प्रमुख निवेश और योजनाएं

1. परमाणु ऊर्जा: साफ और कुशल ऊर्जा उत्पादन के लिए ₹80,000 करोड़ का निवेश।
2. ताप विद्युत: राज्य की ताप विद्युत क्षमता को मजबूत करने के लिए ₹1,07,840 करोड़।
3. सौर ऊर्जा: सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के लिए ₹10,000 करोड़।
4. पीएम कुसुम योजना: किसानों के बीच सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ₹4,100 करोड़।
5. पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं (PSP): ग्रिड स्थिरता के लिए ऊर्जा भंडारण में ₹57,046 करोड़।
6. क्रेडा सौर पहल: सौर ऊर्जा विस्तार के लिए ₹3,200 करोड़।
7. पीएम सूर्य योजना: राष्ट्रीय सौर छत परियोजना के तहत ₹6,000 करोड़।
8. सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा: सरकारी इमारतों में सौर ऊर्जा अपनाने के लिए ₹2,500 करोड़।
9. बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS): ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए ₹2,600 करोड़।
10. पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क: बिजली पारेषण नेटवर्क को उन्नत करने के लिए ₹17,000 करोड़।
11. RDSS (वितरण क्षेत्र योजना): वितरण बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए ₹10,800 करोड़।
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छत्तीसगढ़ कुनबी समाज महासंगठन ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की सौजन्य भेंट, फिल्म "छावा" को कर मुक्त करने पर किया आभार प्रकट

 छत्तीसगढ़ प्रदेश कुनबी समाज महासंगठन के 20 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट कर, छत्रपति शंभाजी महाराज के जीवन पर आधारित फिल्म "छावा" को राज्य में कर मुक्त किए जाने पर आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि यह निर्णय इतिहास को सहज और सरल रूप में जन-जन तक पहुँचाने की महत्वपूर्ण पहल है।

प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री  साय को छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा, मराठी टोपी, शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया तथा कहा कि आपके नेतृत्व में प्रदेश सुशासन और प्रगति के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। प्रतिनिधि मंडल  ने शिवाजी जयंती के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग रखी। प्रतिनिधि मंडल की महिला सदस्यों श्रीमती सारिका गेडेकर व श्रीमती मनिषा बारसे ने मुख्यमंत्री श्री साय को बताया कि कुनबी समाज की महिलाओं ने सामाजिक भवन में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कुटीर उद्योग की स्थापना की है। इसके तहत हल्दी, मिर्च, मसाले आदि का निर्माण और पैकेजिंग कर बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने महिलाओं की इस पहल की सराहना करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम बताया।
 
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माता कौशल्या की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के ग्राम चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर में दर्शन व पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने माता कौशल्या एवं प्रभु श्रीराम के समक्ष नमन करते हुए राज्य की प्रगति, जनता की मंगलकामना और सामाजिक समरसता की प्रार्थना की। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर परिसर में स्थित वैद्यराज सुषेण मंदिर और श्री दशरथ दरबार के भी दर्शन किए।

इस अवसर पर माता कौशल्या जन्मभूमि सेवा संस्थान के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को माता कौशल्या और प्रभु श्रीराम का छायाचित्र भेंट किया।

मुख्यमंत्री साय ने माता कौशल्या मंदिर परिसर में स्थित जलसेन सरोवर में कछुओं को दाना खिलाया और मंदिर परिसर के रखरखाव व सौंदर्यीकरण हेतु दिशानिर्देश दिए।
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केदार कश्यप के विभागों के लिए 5954 करोड़ की अनुदान मांगे पारित

 विधानसभा में बाद वन एवं जलवायु परिवर्तन, सहकारिता व कौशल विकास मंत्री केदार कश्यप के विभागों से संबंधित वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5954 करोड़ 41 लाख 12 हजार रूपए की अनुदान मांगे सर्वसम्मति से पारित की गई। इसमें वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के लिए 2541 करोड़ 28 लाख 60 हजार रूपए, सहकारिता विभाग के लिए 342 करोड़ 70 लाख 22 हजार रूपए, जल संसाधन विभाग के लिए 1693 करोड़ 96 लाख रूपए, लघु सिंचाई निर्माण कार्य के लिए 874 करोड़ 51 लाख 55 हजार रूपए, जल संसाधन विभाग से संबंधित विदेशों से सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए 57 करोड़ रूपए, जल संसाधन विभाग से संबंधित सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए 308 करोड़ 71 लाख रूपए, तथा राज्य कौशल विकास योजना के लिए 29 करोड़ 41 लाख रूपए और राज्य विधानमंडल के लिए 106 करोड़ 82 लाख 75 हजार रूपए शामिल है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग
मंत्री कश्यप ने अनुदान मांगों की चर्चा के दौरान कहा कि वनों, जल स्रोतों, वन्यप्राणियों तथा समस्त जीव-जन्तुओं तथा वन में देवी-देवताओं का विराजमान होता है। विशेषकर आदिवासी समुदाय तथा ग्रामवासी प्रकृति का पूजा-अराधना करते हैं, इससे राज्य में वनों का संरक्षण और संवर्धन हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रयास और सभी वर्गों के सहयोग से छत्तीसगढ़ में वन का भौगोलिक क्षेत्रफल बढ़कर 44.253 प्रतिशत हो गया है, जो देश में वन आवरण की दृष्टि से तीसरे स्थान पर है।

मंत्री कश्यप ने सदन में कहा कि हमारी सरकार ने तेन्दूपत्ता संग्राहकों के लिए प्रति मानक बोरा 4000 से बढ़ाकर 5500 रूपए कर दिया है। इससे संग्राहकों को 233 करोड़ रूपए से अधिक राशि प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि गुरुघासीदास तमोर पिंगला जो 2829.387 वर्ग किलोमीटर में विस्तारित देश का सबसे बड़ा टाईगर रिजर्व है। इस वित्तीय वर्ष में टाईगर रिजर्व के विकास हेतु बजट में 27 करोड़ 46 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।


    
उन्हांेने बताया कि संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा ग्रामीण पर्यटन हेतु 20 गांवों का चयन किया गया है। जिसमें बस्तर के धुड़मारास गांव को भी शामिल किया गया है। राज्य सरकार ने धुड़मारास गांव को पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार द्वारा किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत वन क्षेत्रों में वृहद स्तर पर वृक्षारोपण किया जा रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप वन आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2 करोड़ 25 लाख पौधों का रोपण किया गया है।



मंत्री कश्यप ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के मंशा एवं मुख्यमंत्री साय के मार्गदर्शन में धरती मां एवं मां की याद में “एक पेड़ मां के नाम” योजनांतर्गत राज्य में 3 करोड़ 50 लाख 73 हजार पौधे का रोपण तथा वितरण किया गया है। इस योजना में छत्तीसगढ़ महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों को भी जोड़ा गया है। वर्ष 2025 में 4 करोड़ पौधों का रोपण एवं वितरण का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि बिगड़़े वनों के सुधार हेतु इस वित्तीय वर्ष में 310 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान रखा गया है। बांस आधारित कुटीर उद्योगों की स्थापना हेतु 80 करोड़ रूपए, भू-गर्भीय जल स्तर में वृद्धि के लिए 34 करोड़ रूपए, नदी तटों में वृक्षारोपण के लिए 7 करोड़ 48 लाख रूपए तथा राजमार्गों व ग्रामीण मार्गों के किनारे वृक्षारोपण हेतु 7 करोड़ 11 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार हाथी-मानव द्वंद से ग्रामीणों को बचाने और हाथी विचरण की जानकारी “हमर हाथी हमर गोठ” के माध्यम से उपलब्ध कराने हेतु 2 करोड़ 39 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।

जल संसाधन विभाग
जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप ने सदन में बताया कि सरकार ने विकसित छत्तीसगढ़ हेतु जल संसाधन विभाग अंतर्गत वॉटर विजन-2047 के लिए एजेंडा तय किया है, जिसमें जल उपयोग की क्षमता को बढ़ाकर निर्मित सिंचाई क्षमता तथा वास्तविक सिंचाई के अंतर में 2 लाख हेक्टेयर कमी करने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि सरगुजा तथा बस्तर संभागों में नवीन सिंचाई योजना के निर्माण से 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही रबी फसलों की सिंचाई का रकबा भी एक लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य है।  उन्होंने बताया कि प्रदेश में नदी जोड़ों अभियान के तहत विभिन्न नदियों को जोड़ने हेतु इंटरलिंकिंग परियोजनाएं बनाई जाएंगी। इनमें इन्द्रावती-महानदी लिंक परियोजना, केवई-हसदेव नदी लिंक परियोजना, अहिरन-खारंग लिंक परियोजना प्रमुख है। उन्होंने बताया कि जल संसाधन विभाग के बजट प्रावधान में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। इस वर्ष के वित्तीय वर्ष में विभाग के लिए 3 हजार करोड़ रूपए से अधिक का बजट प्रावधान रखा गया है। मंत्री कश्यप ने सदन में बताया कि राज्य में सिंचाई क्षमता सृजन हेतु पहली बार वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1109 योजना-कार्यों हेतु 700 करोड़ का प्रावधान नवीन मद के तहत किया गया है। इन योजनाओं के पूर्ण होने से सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में सिंचाई क्षमता वृद्धि के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। साथ ही बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में नवीन मुख्य अभियंता कार्यालय खोला जाकर सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

सहकारिता विभाग
सहकारिता मंत्री कश्यप ने सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस बजट में सहकारिता विभाग के विभिन्न योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए 342 करोड़ 70 लाख 22 हजार रूपए प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार ने प्रदेश के किसानों को पैक्स समितियों के माध्यम से 5 लाख रूपए तक की अल्पकालीन कृषि ऋण निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी तरह मत्स्य एवं उद्यानिकी किसानों को 3 लाख रूपए तक की निःशुल्क ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। गत वर्ष राज्य के 15 लाख 21 हजार से अधिक किसानों को 7709 करोड़ रूपए का अल्पकालीन ऋण सहकारी समितियों से उपलब्ध कराया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कृषक ऋण ब्याज दर युक्तियुक्तकरण हेतु 250 करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है।

मंत्री कश्यप ने कहा कि हमारी सरकार द्वारा “सहकार से समृद्धि” की संकल्पना के तहत गठित किए जाने वाले नवीन पैक्स के संचालन तथा कर्मचारियों पर होने वाले व्यय संबंधी आवश्यकताओं के लिए 7 करोड़ 50 लाख का प्रबंधकीय अनुदान का प्रावधान भी रखा है। इसी तरह सहकारी बैंकों एवं समितियों के साख में वृद्धि तथा व्यवसाय हेतु अंशपंूजी में निवेश के लिए 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि इस नए वित्तीय वर्ष में 500 नवीन पैक्स का गठन किया जाएगा। इन नवीन समितियों को सक्षम बनाने के लिए प्रति समिति एक लाख 50 हजार रूपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि नवीन पैक्स समितियों के कार्य करने के लिए सक्षम बनाने हेतु आधारभूत संरचना निर्माण के लिए 200 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम सह कार्यालय भवन निर्माण (प्रति गोदाम 26 लाख रूपए) इस तरह 96 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। मंत्री कश्यप ने बताया कि भारत सरकार की केन्द्र परिवर्तित योजना “डिजिटाईजेशन ऑफ प्राईमरी एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव्ह सोसाइटिस” के अंतर्गत राज्य के पंजीकृत 2028 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है। समितियों के काम-काज में पारदर्शिता लाने तथा किसानों को उनके खाते की सही जानकारी उपलब्ध करानेे के लिए 63 करोड़ 61 लाख प्रावधान किया गया है। इसी तरह पैक्स कम्प्यूटरीकरण हेतु 24 करोड़ 41 लाख का भी प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि सहकारी समितियों के पंजीयन, उपविधि में संशोधन, विवाद समाधान एवं अन्य विषयों से संबंधित प्रक्रियों को सुगम, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने हेतु इस परियोजना की लागत 2 करोड़ 72 लाख 38 हजार रूपए है। इस वित्तीय वर्ष में इसके लिए एक करोड़ 95 लाख 40 हजार रूपए का प्रावधान किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय सहकारी वर्ष 2025 के तहत प्रदेश में राज्य, जिला, ग्राम तथा समिति स्तर पर पूरे वर्ष जागरूकता संबंधी गतिविधियों एवं कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके तहत सहकारिता का प्रचार-प्रसार, प्रशिक्षण, खेलकूद, मेला, उत्सव, प्रदर्शनी, झांकी एवं संगोष्ठियों का भी आयोजन किया जाएगा, जिसके लिए इस वित्तीय वर्ष 5 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान रखा गया है।

राज्य कौशल विकास
कौशल विकास मंत्री कश्यप ने सदन में कहा कि छत्तीसगढ़ में निवासरत 14 से 45 वर्ष आयु के युवाओं को उनकी स्वयं की रूचि के व्यवसाय में प्रशिक्षित कर स्व-रोजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ युवाओं के कौशल विकास के अधिकार अधिनियम 2013 लागू किया गया है। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजनानांर्गत राज्य के युवाओं के कौशल प्रशिक्षण हेतु 352 संस्थाएं जिसमें 205 शासकीय एवं 147 अशासकीय व्यवसायिक संस्थाएं पंजीकृत हैं। इस वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए 29 करोड़ 41 लाख रूपए का प्रावधान रखा गया है। मंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र के युवाओं को समाज के मुख्यधारा जोड़ने एवं उन्हें उनकी रूचि एवं योग्यता के अनुसार कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उनके आजीविका के वृद्धि के लिए बस्तर संभाग के समस्त 7 जिलों में ब्लॉक स्तर पर कौशल विकास केन्द्र की स्थापना का निर्णय लिया गया है इसके लिए 4 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित 14 जिलों के मुख्यालय में संचालित लाईवलीहुड कॉलेज के प्रशिक्षणार्थियों को भोजन आदि व्यवस्था के लिए 10 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसी तरह राज्य के 7 जिले दुर्ग, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई एवं मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी तथा नगर पंचायत भखारा भटेली में लाईवलीहुड कॉलेज निर्माण व जिला नारायणपुर में बालक छात्रावास के लिए 6 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित गांवों तक बुनियादी सुविधाएं और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए संचालित नियद नेल्लानार योजना प्रारंभ की गई हैं। योजना के तहत बस्तर संभाग के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित कैम्प के चिन्हांकित ग्रामों में कौशल प्रशिक्षण हेतु 3598 युवाओं का सर्वे किया गया है।

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बाघिन ने किया हमला, जू कर्मचारी घायल

 कानन पेंडारी जू में शनिवार की शाम बाघिन आनंदी ने जू कर्मचारी आशीष कौशिक पर हमला कर दिया। हमले में आशीष गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे तत्काल इलाज के लिए सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जू में 11 वर्षों से कार्यरत आशीष कौशिक नियमित रूप से वन्य प्राणियों की देखभाल और उनके केज की निगरानी करते हैं। शनिवार की शाम करीब 7 बजे, वे बाघिन के पिंजरे के पास गए और खिड़की से झांककर उसकी स्थिति देखने लगे। अंधेरा होने के कारण बाघिन नजर नहीं आई, और जैसे ही उन्होंने अपना हाथ खिड़की पर रखा, बाघिन ने झपट्टा मारकर उनके हाथ को जकड़ लिया।

करीब 20 मिनट तक बाघिन ने उनके हाथ को नहीं छोड़ा। इस दौरान, आशीष ने संयम बनाए रखा और मोबाइल से अपने सहकर्मियों को फोन कर मदद मांगी। सहकर्मियों के पहुंचने के बाद बाघिन ने उनका हाथ छोड़ा और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले बाघ भीम की बीमारी के चलते मौत हो गई थी, जिसके कारण जू प्रशासन ने आनंदी को दूसरे केज में शिफ्ट कर दिया था। माना जा रहा है कि नए केज में बदलाव से बाघिन तनावग्रस्त और आक्रोशित थी। जू प्रबंधन ने घटना की पुष्टि की है और कहा कि घायल कर्मचारी का इलाज जारी है।

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छत्तीसगढ़ में उद्यमिता आयोग का होगा गठन : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में उद्यमिता आयोग के गठन की घोषणा की है। यह आयोग राज्य में उद्यमशीलता की संस्कृति को मजबूत करेगा और रोजगार सृजन की संभावनाओं का अध्ययन करेगा। इसके तहत युवाओं के कौशल विकास और रोजगार प्रशिक्षण के लिए कार्य किया जाएगा।


मुख्यमंत्री  साय ने यह घोषणा कल राजधानी रायपुर स्थित अग्रसेन धाम में स्वदेशी जागरण मंच की अखिल भारतीय कार्यकारिणी परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए की। इस अवसर पर उन्होंने मंच की ऐतिहासिक यात्रा को समर्पित पुस्तक "स्वदेशी की विकास यात्रा" का विमोचन भी किया।

स्वदेशी अपनाना विकसित भारत की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि "विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत @2047" के निर्माण के लिए हमें स्वदेशी को आत्मसात करना होगा। उन्होंने कहा कि स्वदेशी जागरण मंच हमेशा से आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने की वकालत करता रहा है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भारत एक विशाल और संपन्न देश है। यहाँ प्रचुर प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं, और साथ ही हमारे पास विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी है। यह हमें न केवल एक विशाल उपभोक्ता बाजार प्रदान करता है, बल्कि नवाचार और औद्योगिकीकरण के लिए भी असीम संभावनाएँ खोलता है।

मुख्यमंत्री साय ने वैश्विक परिदृश्य में आ रहे बदलावों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में आ रहे परिवर्तनों को देखते हुए स्वदेशी जागरण मंच जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

मेक इन इंडिया से आत्मनिर्भर भारत की ओर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में "मेक इन इंडिया" अभियान ने भारत में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों को संरक्षण और समर्थन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि आज भारत लगभग हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन चुका है। हमने अपने उद्योगपतियों को प्रोत्साहित किया, उन्हें आवश्यक सुविधाएँ दीं और इसका परिणाम यह हुआ कि हम अब न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि वैश्विक बाजार में भी मजबूती से उभर रहे हैं।

बस्तर क्षेत्र में स्वदेशी उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री  साय ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण और विकास के लिए स्वदेशी जागरण मंच की सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नई नीतियों और सुरक्षा बलों के प्रभावी प्रयासों के कारण नक्सलवाद अब बहुत सीमित क्षेत्र में सिमट गया है। अब समय आ गया है कि स्वदेशी जागरण मंच के सहयोग से इन क्षेत्रों में उद्योग-धंधे स्थापित किए जाएँ, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले और वे नक्सलवाद की ओर न जाने पाएं।

नई औद्योगिक नीति: रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति को प्रदेश की प्राकृतिक संपदा और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है। इस नीति में रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है ताकि उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को तेज और सरल बनाया जा सके। स्थानीय संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएँ भी चलाई जा रही हैं।

उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा, श्रेष्ठ उद्यमियों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में सफल उद्यमियों को "उद्यमिता प्रोत्साहन पुरस्कार" से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवा और नवाचार आधारित स्टार्टअप्स को सरकार हर संभव सहायता देगी। बैठक में स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री आर. सुंदरम, अखिल भारतीय संगठक श्री कश्मीरी लाल, छत्तीसगढ़ प्रांत संयोजक श्री जगदीश पटेल, देश के प्रतिष्ठित उद्यमी, प्रोफेसर, कुलपति, आर्थिक विशेषज्ञ और स्वदेशी जागरण मंच तथा स्वावलंबी भारत अभियान के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। 

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अब न केवल एक औद्योगिक केंद्र बनने की ओर अग्रसर है, बल्कि स्वदेशी को अपनाकर "आत्मनिर्भर भारत" के संकल्प को और मजबूत कर रहा है।
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छत्तीसगढ़: सखी वन स्टॉप सेंटर की एसओपी निर्धारित करने वाला पहला राज्य

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  आज राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित "वृहद महतारी वंदन सम्मेलन" में शामिल हुए और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रदेश की सभी महिलाओं को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक विचार नहीं, बल्कि हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ में महिलाएँ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से आत्मनिर्भर बनें, इसके लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं के त्याग और समर्पण के बिना कोई भी समाज और राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि भारत में मातृशक्ति की पूजा की परंपरा सदियों पुरानी है और छत्तीसगढ़ सरकार इस परंपरा को और सशक्त कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोई भी समाज तब तक संपूर्ण नहीं हो सकता जब तक समाज की महिलाएँ सशक्त न हों। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और सम्मानित बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं और आने वाले समय में भी महिला सशक्तिकरण की दिशा में कई नए कदम उठाए जाएँगे। महिला सशक्तिकरण की यह यात्रा सतत जारी रहेगी, क्योंकि नारी शक्ति ही राष्ट्र की शक्ति है।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार महिला कल्याण के लिए महतारी वंदन योजना के तहत पिछले 13 महीनों से प्रति माह 1,000 रुपये की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित कर रही है। अब तक 70 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में 8,488 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए भी एक नई पहल की गई है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब से उनका मानदेय सीधे उनके बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाएगा, जिससे भुगतान में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित होगी।

चार नए पोर्टल और डिजिटल पहल की लॉन्चिंग

मुख्यमंत्री  साय ने  इस अवसर पर उत्पीड़ित एवं संकटग्रस्त महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल सुविधा की शुरुआत किया जिसके तहत वे ऑनलाइन एवं मोबाइल एप के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकेंगी। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री श्री साय ने बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के पोर्टल, इंफ्रा पोर्टल तथा स्थापना पोर्टल का भी शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार टेक्नोलॉजी के माध्यम से महिलाओं को अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

महिला स्व-सहायता समूहों के लिए नए अवसर

महिला मड़ई में लगे स्टॉल्स के संबंध में मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि अब तक 15 से 20 लाख रुपये से अधिक की खरीद-बिक्री हो चुकी है, जो महिला उद्यमिता को दर्शाता है। उन्होंने घोषणा की कि नवा रायपुर में 200 करोड़ रुपये की लागत से "यूनिटी मॉल" बनाया जाएगा, जहाँ महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को बेचने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध होंगे।

सखी वन स्टॉप सेंटर की एसओपी – छत्तीसगढ़ बना पहला राज्य

मुख्यमंत्री श्री साय ने सखी वन स्टॉप सेंटर की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का विमोचन किया और बताया कि छत्तीसगढ़ ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

उन्होंने कहा कि सखी वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं को तत्काल सहायता, परामर्श और कानूनी सहायता प्रदान करता है। अब इस सेंटर के व्यवस्थित संचालन के लिए एक मानक प्रक्रिया बनाई गई है, जिससे इसकी प्रभावशीलता और बढ़ेगी।

महिला सशक्तिकरण के लिए बजट में विशेष प्रावधान

कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार महिला सशक्तिकरण को केवल एक नारा नहीं, बल्कि अपनी नीति और संकल्प का अभिन्न हिस्सा मानती है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के राज्य बजट में महिलाओं और समाज कल्याण से जुड़ी कई योजनाओं को सशक्त किया गया है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने से लेकर, उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा तक हर क्षेत्र में सरकार पूरी ताकत के साथ काम कर रही है।

महिलाओं के लिए आरक्षण और नए अवसर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से लाखों महिलाओं को लाभ मिल रहा है।पंचायती राज संस्थाओं में पहले से ही महिलाओं को 50% आरक्षण प्राप्त है। अब विधानसभा और लोकसभा में भी 33% आरक्षण का लाभ जल्द ही महिलाओं को मिलेगा। उन्होंने कहा कि आज महिलाएँ राजनीति से लेकर फाइटर प्लेन उड़ाने और रेल संचालन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

"अजेय नारी - आराध्य नारी" थीम पर हुआ महिला मड़ई का आयोजन

चार दिवसीय महिला मड़ई का आयोजन "अजेय नारी - आराध्य नारी" थीम पर किया गया। इसमें राज्य के 33 जिलों से आए 87 महिला स्व-सहायता समूहों ने अपने हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी और विक्रय किया।
इसके साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को भी विभिन्न माध्यमों से आमजन के सामने प्रस्तुत किया गया।

 
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मुख्यमंत्री ने प्रति वर्ष 8 मार्च को स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजन करने की घोषणा की

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के कुनकुरी अंतर्गत सलियाटोली स्थित बालासाहेब देशपांडे महाविद्यालय मैदान में स्वर्गीय कुमार दिलीप सिंह जूदेव की स्मृति में उनकी जयंती पर आयोजित वृहद स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का मां सरस्वती, भारत माता, छत्तीसगढ़ी महतारी और स्वर्गीय कुमार दिलीप सिंह जूदेव के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रति वर्ष 8 मार्च को वृहद स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित करने की घोषणा की। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर प्रयासरत है। हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश के नागरिक स्वस्थ रहें और राज्य समृद्धि की ओर अग्रसर हो। इसी दिशा में प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए  इस वर्ष के बजट में कुनकुरी में एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना का प्रावधान किया गया है। साथ ही  जशपुर में शासकीय नर्सिंग कॉलेज और शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज खोलने का निर्णय लिया गया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इन सुविधाओं के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को बेहतर उपचार मिलेगा और उन्हें इलाज के लिए अन्य शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने उपस्थित नागरिकों से स्वास्थ्य शिविर का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि किसी मरीज में गंभीर बीमारी का पता चलता है, तो सरकार द्वारा रायपुर में उनके समुचित इलाज की व्यवस्था की गई है। 

 मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न विशेषज्ञ विभागों के काउंटरों का अवलोकन कर डॉक्टरों से चर्चा करते हुए उनके समर्पण व सेवा के लिए आभार व्यक्त किया।

 एम्स रायपुर के विशेषज्ञ चिकित्सक कर रहे है उपचार

उल्लेखनीय है कि यह शिविर जिला प्रशासन जशपुर द्वारा एम्स रायपुर के सहयोग से आयोजित किया गया है। शिविर में एम्स  के मेडिसिन, सर्जरी, कैंसर, नाक-कान-गला, नेत्र, अस्थि, गुर्दा, चर्म, स्त्री रोग और मनोरोग के  विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शिविर में जांच के दौरान पाए गए गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को रायपुर रेफर कर इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। शिविर में  निःशुल्क दवाइयाँ भी उपलब्ध कराई जा रही है । शिविर में मरीजों के सुविधा के लिए 10 पंजीयन काउण्टर, 7 जनरल ओपीडी काउण्टर, 2 लेबोरेटरी काउण्टर, सभी विशेषज्ञ विभागों के पृथक-पृथक काउण्टर सहित जनरल वार्ड की सुविधा उपलब्ध है। 

मुख्यमंत्री  साय ने आयुष्मान कार्ड और टीबी मरीजों को फूड बास्केट का किया वितरण

शिविर में मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना अंतर्गत सुंदर यादव, सुनिता बाई, भगवती सिंह,  फ्रांसिस तिग्गा, प्लासिदियस केरकेट्टा, खिलासो बाई को आयुष्मान कार्ड एवं वय वंदना कार्ड वितरण किया। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान अंतर्गत 10 टीबी मरीजों को फूड बास्केट का भी वितरण किया। 

मुख्यमंत्री  साय ने टीबी मुक्त भारत अभियान अंतर्गत टीबी मरीजों के सेवा के लिए  निक्षय मित्रों को किया सम्मान 

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान अंतर्गत टीबी मरीजों के सेवा के क्षेत्र में सराहनीय कार्यों के लिये निक्षय मित्रों को सम्मानित किया, जिनमें सीएमएचओ जशपुर डॉ. जी. एस. जात्रा को  टीबी मरीजों को पोषण सहयोग प्रदाय कर प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान में महत्वपूर्ण योगदान के लिये,  डीडीएम श्री निरंजन प्रसाद गुप्ता को जशपुर जिले के विशेष पिछडी जनजाति (पीवीटीजी) पहाडी कोरवा एवं बिरहोर समुदाय के सभी टीबी मरीजों की जिम्मेदारी लेकर उन्हें पोषण सहयोग प्रदाय कर प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान में महत्वपूर्ण योगदान के लिये और  भरत रत्नम खुटे को  टीबी मरीजों को पोषण सहयोग प्रदाय कर प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान में महत्वपूर्ण योगदान के लिये सम्मान किया गया।

 
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विष्णु देव साय ने कॉफी टेबल बुक "सोल ऑफ द सॉयल लाइफ्स रिदम्स इन छत्तीसगढ़" का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत की स्मृतियों पर आधारित कॉफी टेबल बुक "सोल ऑफ द सॉयल लाइफ्स रिदम्स इन छत्तीसगढ़" का विमोचन किया। यह पुस्तिका आईएएस, आईपीएस, आईएफएस ऑफिसर्स वाइफ एसोसिएशन की संयुक्त परिकल्पना है।

इस अवसर पर आईएएस ऑफिसर्स वाइफ एसोसिएशन की अध्यक्ष श्रीमती रितु जैन, आईपीएस ऑफिसर्स वाइफ एसोसिएशन की अध्यक्ष श्रीमती ज्योति गौतम, आईएफएस ऑफिसर्स वाइफ एसोसिएशन की अध्यक्ष श्रीमती ज्योति साहू सहित तीनों एसोसिएशन के सदस्य उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री साय ने स्वर्गीय श्री दिलीप सिंह जूदेव की जयंती पर उन्हें किया नमन

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में स्वर्गीय श्री दिलीप सिंह जूदेव की जयंती पर उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत भी उपस्थित रहीं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव जी न केवल प्रखर राष्ट्रवादी थे, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान के दृढ़ रक्षक भी थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, संस्कृति और समाज सेवा के लिए समर्पित किया। उनके नेतृत्व में प्रारंभ हुआ ‘घर वापसी’ अभियान एक ऐतिहासिक सामाजिक आंदोलन बना, जिसने हजारों लोगों को उनकी मूल सनातन परंपरा से पुनः जोड़ने का कार्य किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्री जूदेव जी जल, जंगल, जमीन और जनजातीय अस्मिता के सशक्त प्रहरी थे। छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में आदिवासी समाज को उनका गौरव और पहचान लौटाने के लिए उन्होंने अनवरत संघर्ष किया। उनके प्रयासों से समाज में राष्ट्रवादी चेतना का प्रसार हुआ और छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से और अधिक जुड़ने का अवसर मिला।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा के प्रतीक थे। उन्होंने अपने जीवन में राष्ट्रवादी मूल्यों को आत्मसात कर समाजहित में कार्य किया। उनकी दृढ़ता, निडरता और ओजस्वी नेतृत्व आज भी हम सभी को प्रेरित करता है। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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नक्सल प्रभावित गांव की महिलाओं ने नक्सलियो के डर से छोड़ा गांव, पांच सालों से होली के मौके पर गुलाब बनाकर कमा रही हजारों रूपए

बीजापुर जिले के नक्सल प्रभावित पंचायत भैरमगढ़ के शिविर में रहने वाली कई महिलाओं की जिंदगी को जहां नक्सलियों ने बेरंग कर दिया था।  अपनी जान बचाने के लिए इन महिलाओं ने अपना गांव छोड़ दिया और अब हर्बल गुलाल बनाकर लोगों की जिंदगी में रंग घोल रही हैं। यह काम ये महिलाएं पिछले पांच सालों से बिना किसी परेशानी के कर रही हैं और आने वाले सालों में इसे करने की बात कह रही हैं। 

बीजापुर जिले के भैरमगढ़़ में बिहान कार्यक्रम के अंतर्गत माँ दुर्गा महिला स्व सहायता समूह की महिलएं पिछले पांच सालों से हर्बल गुलाल बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। इस बार बीजापुर के लोग इनके बनाए हर्बल रंगों और गुलाल से होली खेलेंगे। इन महिलाओं के बनाए हर्बल गुलाल की डिमांड भी काफी अधिक है। कई लोग इनको गुलाल का ऑर्डर भी दे रहे हैं। इधर जनपद पंचायत सीईओ पुनीत राम साहू ने बताया कि महिलाओं को हर्बल गुलाल बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिसका फायदा उठाते ये महिलाएं पिछले पांच सालों से गुलाल बनाकर बाजार में बेचकर इसका फायदा उठा रही हैं। हर साल करीब 50 किलो से ज्यादा गुलाल बेचकर अपने परिवार का भरण भोषण कर रही हैं। इस समय इस समूह में 10 महिलाएं हैं। 
अलग-अलग फूलों से तैयार हो रहा हर्बल गुलाल
 इस स्वसहायता समूह की महिलाएं होली के लिए अलग-अलग फूलों और सब्जियों से रंग तैयार कर रही हैं। ये महिलाओं पालक भाजी, लाल भाजी, टेसू के फूल, गेंदा फूलों से हर्बल गुलाल तैयार कर रहीं है।  इन महिलाओं को पहले से ही प्रशासन की ओर से ट्रेनिंग दी गई है। पिछले  पांच सालों में अब तक ये महिलाएं तकरीबन 150 किलो गुलाल बेच चुकी हैं.। खास बात यह है कि ये हर्बल गुलाल लोगों के चेहरे पर नुकसान नहीं पहुंचाता। यही कारण है कि लोग पहले से ही इसका ऑर्डर दे कर हर्बल गुलाल मंगवा रहे हैं। विकास खंड परियोजना प्रबंधक रोहित सोरी ने बताया कि समूह की महिलाएं इतामपार गांव जो इंद्रावती नदी के उस पार वहां की रहने वाली है। नक्सल हिंसा के चलते इन महिलाओं ने गांव को छोड़ दिया है और इस समय भैरमगढ़ के शिविर कैँप में रह रही हैं। इन महिलाओं को जिला प्रशासन के द्वारा रहने की सुविधा दी गई है। सोरी ने बताया कि इसके अलावा ये महिलाएं अलग- अलग व्यसाय कर जीवन यापन कर रही हैं। 
 
हर्बल गुलाल की मांग ज्यादा

 स्व सहायता समूह की अध्यक्ष फगनी कवासी और सचिव अनीता कर्मा ने बताया कि पहले हर्बल गुलाल बनाने की ट्रेनिंग जिला प्रशासन द्वारा दी गई थी। यहां बनाया गए रंग पूरी तरह से प्राकृतिक हैं। हम फूल की पंखुड़ियां, पालक भाजी, लाल भाजी,हल्दी, बेसन पलाश के फूलों से अलग-अलग रंग तैयार कर रहे हैं। हमारे बनाए हर्बल गुलाल की डिमांड भी काफी ज्यादा है। इसके चलते हम पिछले पांच  सालों से यह काम कर रहे हैं। महिलाओं ने बताया कि जिला पंचायत के साथ ही मार्केट में भी जगह-जगह स्टॉल लगाकर इनका गुलाल बेचा जा रहा है। इससे अच्छी आमदनी भी हो रही है।
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नक्सलियों की मांद में घुसकर जवानों ने धवस्त किया स्मारक

  जिले के पुजारी कांकेर में जवानों ने बड़ी कार्रवाई की। नक्सलियों की मांद में घुसकर उन्होंने उनका मनोबल तोड़ दिया है। जेसीबी से जवानों ने कई फीट ऊंचे स्मारक को ध्वस्त कर दिया है।


मिली जानकारी के अनुसार, जवानों ने नक्सलियों की मांद में घुसकर उनके बड़े स्मारक को ध्वस्त कर दिया। जवान बुलडोजर लेकर स्मारक स्थल तक पहुंचे थे। बता दें कि, इसी इलाके में कुछ दिनों पहले जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी जिसमें 12 हार्डकोर नक्सली मारे गए थे। बता दें कि, यह इलाका छत्तीसगढ़-तेलंगाना की सीमा पर है। जवानों ने यहां हाल ही में फॉरवर्ड आपरेटिंग बेस कैंप स्थापित किया है।

 



पिछले कुछ सालों में 300 से ज्यादा स्मारकों को किया जमीदोंज
आकंड़ों की बात करें तो बीते कुछ वर्षों में 300 से अधिक छोटे बड़े स्मारकों को जवान विस्फोट कर और बुलडोजर की मदद से जमीदोंज कर चुके हैं। नक्सल कैलेंडर के मुताबिक नक्सली वर्ष में 6 बार विभिन्न आयोजन करते हैं जिसमें मारे गए साथियों की याद में स्मारक बनाकर उन्हें याद किया जाता है। इस दौरान आस-पास के गावों के सैकड़ों ग्रामीणों को भी आमंत्रित किया जाता है और नक्सलियों की सीएनएन टीम द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुती दी जाती है। इसके पीछे नक्सलियों की मंशा यह होती है कि, इलाके के लोगों में संगठन की मजबूती को दिखाएं और नए युवाओं को प्रभावित कर संगठन में शामिल कर सकें।

 

 

 
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फर्जी सिम बेचने वाले दो भाई गिरफ्तार, 85 सिम बरामद...

 कवर्धा पुलिस ने साइबर ठगी के लिए फर्जी सिम कार्ड सप्लाई करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से 85 नग सिम कार्ड बरामद किया है।

मिली जानकारी के अनुसार, दोनों आरोपी का नाम भूपेन्द्र जोशी और दुष्यंत जोशी है। दोनों सगे भाई हैै, जो सिम कार्ड बेचने का काम करते हैं। ग्राहकों की आईडी से फर्जी सिम कार्ड जारी करके साइबर ठगों को बेचता था।  

फर्जी सिम कार्ड के माध्यम से 14 लाख अधिक की ठगी
डीएसपी कृष्ण कुमार चंद्राकार ने बताया कि, फर्जी सिम कार्ड के माध्यम से साइबर ठगों ने महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, झारखंड , राजस्थान जैसे राज्यों में ऑनलाइन ठगी की। अब तक इन फर्जी सिम कार्ड के माध्यम से 14 लाख से अधिक की ठगी साइबर ठगों ने की है।

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जब मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए विधायक, सदन में बना गहमागहमी का माहौल...

 विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार की कार्रवाई हंगामेदार रही। सदन की कार्यवाही में प्रश्नकाल के दौरान जहां एक ओर विपक्ष नहीं सत्ता पक्ष के सदस्यों ने सरकार के मंत्रियों को घेरने की कोशिश की। पूर्व मंत्री और कुरुद विधायक अजय चंद्राकर ने स्वास्थ्य विभाग में उपकरण खरीदी में हुए घोटाले का मुद्दा उठाया, जिसका जवाब स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायवाल ने सदन के पटल पर रखा।


अजय चंद्राकर ने पूछा कि डायरेक्टर हेल्थ ने उपकरण खरीदी के लिए डिमांड की थी, जिसकी खरीदी सीजीएमएसी की ओर से खरीद की गई। आप ये बताने की कृपा करेंगे कि कितनी सामाग्री की डिमांड की गई और कितनी राशि खरीद के लिए उपलब्ध कराई गई? कितने दिन के भीतर उपकरणों और सामानों की सप्लाई की गई?

 



पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के सवालों का जवाब स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायवाल दे रहे थे कि अचानक अजय चंद्राकर फिर उठ खड़े हुए और अपना सवाल फिर दोहराया। लेकिन श्याम बिहारी जायवाल ने जो जवाब दिया उससे अजय चंद्राकर संतुष्ट नजर नहीं आए और सदन में दोनों सदस्यों के बीच गहमागहमी का माहौल बन गया।

 

 

 
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नामांकन से ठीक पहले कांग्रेस प्रत्याशी गायब, बीजेपी उम्मीदवार बनीं अध्यक्ष

  जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए नामांकन दाखिल करने के पहले ही कांग्रेस उम्मीदवार गायब हो गईं। जिससे संगठन से लेकर राज्य स्तर के नेताओं के बीच खलबली मच गई। हालात यह रहे कि भाजपा के उम्मीदवार सरस्वती बंजारे के निर्विरोध जीत की घोषणा कर दी गई। बारह सीट वाले जिला पंचायत में एससी वर्ग से भाजपा के सरस्वती बंजारे और कांग्रेस से ऊषा सोनवानी उम्मीदवार थी।


बारह सीट में से कांग्रेस को पांच सीट और भाजपा को छह सीट मिले थे। वहीं एक भाजपा से बागी प्रिया साहू थी। उपाध्यक्ष के लिए कांग्रेस ने देवेन्द्र चंद्रवंशी को उतारा था, लेकिन उन्हें सिर्फ चार वोट मिले। अध्यक्ष उम्मीदवार के गायब होने से उनका एक वोट कम हो गया और भाजपा के उम्मीदवार पवन शर्मा सात वोट से जीत गए।

भाजपा ने बनाया दबाव
ऊषा इधर ऊषा सोनवानी का कहना है कि भाजपा के लोगों ने उन पर चुनाव में खड़े नहीं होने पारिवारिक दबाव बना, जिससे वे नहीं पहुंच सकी। उन्होंने बताया वे भाजपा के अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाडा से आशीर्वाद लेने गई थी, जिसके बाद से वे जिला पंचायत नहीं पहुंची। ऊषा सोनवानी उम्मीदवार थी।

थाने में की शिकायत
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष निर्मल कोसरे ने बताया कि उनके सभी सदस्य रात को उनके साथ ही थे। सुबह सीधे जिला पंचायत जाने की बात हुई थी। इस बीच सुबह ऊषा सोनवानी गायब हो गई। उन्होंने बताया कि उनके परिजनों ने थाने में शिकायत भी दर्ज कराई हैं।

 

 

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गुरूदर्शन मेले में उमड़ रही श्रद्धा की बयार, देशभर से आ रहे श्रद्धालु

बाबा गुरु घासीदास की जन्मस्थली और कर्मस्थली गिरौदपुरी में आयोजित गुरूदर्शन मेला अपनी भव्यता और आस्था के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। 04 से 06 मार्च तक चलने वाले इस मेले में छत्तीसगढ़ सहित पूरे भारत से हजारों श्रद्धालु आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर इस वर्ष श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। 

मुख्यमंत्री साय ने इस बार मेले को भव्य स्वरूप में आयोजित करने  के लिए  50 लाख रुपए की राशि की घोषणा की है, जो पूर्व में 25 लाख रुपए थी। इसके साथ ही, मुख्य प्रवेश द्वार से मुख्य मंदिर तक स्थायी शेड के निर्माण की भी घोषणा की गई है।

मुख्यमंत्री साय ने स्वयं गुरू गद्दी का दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की प्रार्थना की और मेले की भव्यता बढ़ाने और श्रद्धालुओं को अधिक सुविधा प्रदान करने के लिए मेला बजट को दोगुना करने के साथ ही जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएं। मुख्यमंत्री श्री साय की घोषणा के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को मुख्य प्रवेश द्वार से मुख्य मंदिर तक स्थायी शेड निर्माण के लिए स्थल निरीक्षण एवं माप-जोख करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के दिशानिर्देश पर  इस वर्ष मेले में  श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए बेहतर इंतजाम किए गए हैं। गुरूदर्शन मेला न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का केंद्र है। इस वर्ष मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल से इसे और भव्य और सुव्यवस्थित बनाया गया है। प्रशासन द्वारा की गई इन सुविधाओं की बढ़ोतरी से श्रद्धालुओं को अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और आध्यात्मिक अनुभव मिलेगा। गुरूदर्शन मेले का यह ऐतिहासिक विस्तार श्रद्धालुओं की सेवा और आस्था को नई ऊँचाई पर ले जाने वाला साबित होगा।

गुरुदर्शन मेले में श्रद्धालुओं को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है, जिसके अंतर्गत चिकित्सा सहायता केंद्रों की संख्या 2 से बढ़ाकर 8 कर दी गई है और एंबुलेंस की संख्या 4 से बढ़ाकर 8 की गई है। 
निःशुल्क भोजन सेवा को भी विस्तार देते हुए अब 24 स्थानों पर 212 समूहों द्वारा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जो पहले 20 स्थानों पर 175 समूहों द्वारा संचालित थी। पेयजल व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया गया है, जिसमें स्थायी नल कनेक्शन की संख्या 110 से बढ़ाकर 195 कर दी गई है और पानी टैंकरों की संख्या 8 से बढ़ाकर 18 कर दी गई है। मेले में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है, जिसमें पुलिस कंट्रोल रूम की संख्या 3 से बढ़ाकर 9 कर दी गई है, सुरक्षा बलों की संख्या 450 से बढ़ाकर 1150 की गई है और पहली बार 36 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी नियमित मॉनिटरिंग हो रही है ।सुरक्षाकर्मियों को 130 वायरलेस सेट भी प्रदान किए गए हैं। अग्नि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब 1 के बजाय 3 अग्निशमन वाहन तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। मेले में विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था को और प्रभावी बनाया गया है, जिसमें ट्रांसफार्मरों की संख्या 10 से बढ़ाकर 13 कर दी गई है और विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में बैकअप जनरेटर की संख्या 6 से बढ़ाकर 10 कर दी गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए शौचालयों की संख्या 4 से बढ़ाकर 16 कर दी गई है, स्नानागार की संख्या 6 से बढ़ाकर 10 की गई है, और अतिरिक्त रूप से 80 सीटर स्थायी शौचालय की भी व्यवस्था की गई है। स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सफाई कर्मचारियों की संख्या 80 से बढ़ाकर 291 कर दी गई है ताकि मेले में स्वच्छता बनी रहे।

इस वर्ष पहली बार गिरौदपुरी मेला डॉट कॉम नामक वेबसाइट लॉन्च की गई है, जिससे श्रद्धालुओं को मेला स्थल की जानकारी, आवश्यक मार्गदर्शन और अन्य आवश्यक सेवाओं की ऑनलाइन जानकारी मिल सके। इससे श्रद्धालु यात्रा संबंधी सूचनाएं, पार्किंग व्यवस्था, धार्मिक स्थलों की जानकारी और अन्य सुविधाओं की पूरी जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं।
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गिरौदपुरी मेला में हुए शामिल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गिरौदपुरी धाम में आयोजित गुरुदर्शन मेला के पहले दिन  गुरु गद्दी का दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली और समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर  पर मेला समिति की मांग पर गिरौदपुरी मेले की राशि 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख करने एवं श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु मेला परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार से मंदिर तक स्थायी शेड निर्माण की घोषणा की। 

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने मंदिर में दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को स्वयं प्रसाद वितरित किया।इस अवसर पर धर्मगुरु गुरुबालदास साहेब,पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरी शंकर अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री दयाल दास बघेल, पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा, कलेक्टर दीपक सोनी, एसएसपी विजय अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में संत एवं श्रद्धालुगण उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि तीन दिवसीय गिरौदपुरी मेला 4 मार्च से 6 मार्च   तक आयोजित होगा। गिरौदपुरी धाम में हर वर्ष आयोजित होने वाला यह मेला गुरु घासीदास जी के सत्य, अहिंसा और समानता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बन रहा है।
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