छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग राज्य की बिजली कंपनियों द्वारा दायर याचिकाओं पर करेगा जन-सुनवाई
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने राज्य की बिजली कंपनियों द्वारा दायर याचिकाओं पर जन-सुनवाई का कार्यक्रम जारी किया है।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने राज्य की बिजली कंपनियों द्वारा दायर याचिकाओं पर जन-सुनवाई का कार्यक्रम जारी किया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की 16वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में बोर्ड की 15वीं बैठक के पालन प्रतिवेदन तथा नवीन एजेंडों पर चर्चा उपरांत प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के निर्णय हेतु प्रेषित करने पर सहमति बनी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वंदे मातरम के नए गायन संस्करण का पेन ड्राइव लॉन्च किया।
उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने आज कवर्धा नगर के विकास को नई गति देते हुए कुल 2 करोड़ 80 लाख रुपए के निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी। उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर अंबेडकर चौक से समनापुर पुल तक बी.टी. रोड एवं नाली निर्माण तथा लक्ष्मी नारायण मंदिर के पास सामुदायिक भवन निर्माण कार्य का भूमि पूजन किया।
छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रदेश है और धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित इस धरा को हमारी सरकार सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में सिक्किम राज्य से अध्ययन भ्रमण पर पहुंचे पत्रकारों के दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया और उनसे छत्तीसगढ़ को लेकर ढेर सारी बातें साझा की। उन्होंने सभी अतिथियों को राजकीय गमछा भेंट कर छत्तीसगढ़ में स्वागत और अभिवादन किया। मुख्यमंत्री की सहृदयता और आतिथ्य पाकर सभी पत्रकार अभिभूत हुए और उन्हें सिक्किम आने का निमंत्रण भी दिया।
वन, सहकारिता एवं परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि राज्य में वन संरक्षण, हरित आवरण विस्तार, वन्यजीव संवर्धन, इको-टूरिज्म विकास तथा वनवासियों की आजीविका सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की गई हैं। उन्होंने विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी दी। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन संरक्षण के साथ-साथ सतत विकास, जैव विविधता संरक्षण और वनवासियों की आजीविका सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के ग्राम सेमो में 2 करोड़ 38 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 33/11 के.व्ही. विद्युत उपकेन्द्र की बड़ी सौगात दी। इस उपकेन्द्र के स्थापित होने से आसपास के 10 गांव सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे तथा लगभग 2 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और नियमित विद्युत आपूर्ति उपलब्ध हो सकेगी। ग्राम सेमो में इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत विधिवत भूमि पूजन कर निर्माण कार्य की शुरुआत की गई। यह उपकेन्द्र क्षेत्र में लंबे समय से बनी बिजली समस्या के समाधान के साथ-साथ विकास की नई संभावनाओं के द्वार भी खोलेगा। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा की पहल से क्षेत्रवासियों को बेहतर और स्थायी विद्युत सुविधा मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
प्रदेश भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित ‘सहयोग केंद्र’ में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। इस अवसर पर सहयोग केंद्र प्रभारी सच्चिदानंद उपासने भी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने स्वयं सहायता समूहों को ग्रामीण बाजार स्थापित करने के लिए अनुदान सहायता प्रदान करने का निर्णय लकर महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहित की है। इन बाजारों का उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों को उनके हस्तनिर्मित उत्पादों के विपणन के लिए एक मंच प्रदान करना और उन्हें बढ़ावा देना है। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा संचालित ‘ग्राम दुकान’ पहल स्वसहायता समूह की महिलाओं के जीवन स्तर को उन्नत बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है। राजनांदगांव स्थित पाताल भैरवी मंदिर के पास स्थापित ग्राम दुकान महिला समूहों के लिए अपने हुनर, कौशल एवं लघु उद्यम को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।
1. मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ के षष्ठम् विधान सभा के अष्टम् सत्र माह फरवरी-मार्च, 2026 हेतु माननीय राज्यपाल के अभिभाषण का अनुमोदन किया गया।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 2026 के समापन समारोह में स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और ताली बजाकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री के स्वागत में जगदलपुर के हजारों स्कूली बच्चों ने “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत पर मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। बच्चों की भावपूर्ण और अनुशासित प्रस्तुति देखकर श्री अमित शाह भी भावविभोर हो उठे और उन्होंने बच्चों को ताली बजाकर प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा मलखंभ प्रदर्शन भी किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा। केंद्रीय गृहमंत्री श्री शाह ने बच्चों की कला, अनुशासन एवं आत्मविश्वास की प्रशंसा करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित अन्य अतिथियों ने भी बच्चों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
उल्लेखनीय है कि “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत को हिंदी एवं हल्बी बोली में रचा गया है। इसमें बस्तर की बादल अकादमी के कलाकारों ने अपनी आवाज और संगीत का योगदान दिया है। दायरा बैंड द्वारा इस गीत को आधुनिक संगीत के साथ नया स्वरूप प्रदान किया गया है, जिससे यह गीत युवाओं और बच्चों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हो रहा है।
बस्तर की जनजातीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु समर्पित तीन दिवसीय बस्तर पण्डुम का समापन समारोह 9 फरवरी को एक ऐतिहासिक और भव्य आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह विशेष तौर पर शामिल होंगे। समारोह की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय करेंगे।
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। जिला बीजापुर में 30 और सुकमा में 21 माओवादी कैडरों ने राज्य सरकार की पुनर्वास आधारित पहल “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” के अंतर्गत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल 1.61 करोड़ का इनाम घोषित था।
बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े ‘बस्तर पंडुम’ महोत्सव में आप सबके बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। मां दंतेश्वरी के इस पुण्य क्षेत्र में आने का अवसर मिलना मैं अपना सौभाग्य मानती हूं। मैं जब भी छत्तीसगढ़ आती हूं, मुझे लगता है कि मैं अपने घर आई हूं। यहां के लोगों से जो अपनत्व और स्नेह मुझे मिलता है, वह मेरे लिए अनमोल है। यह ऐसे कई नायकों की धरती है, जिन्होंने भारत भूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। मैं ऐसे सभी सपूतों की स्मृति में सादर नमन करती हूं।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रायपुर पहुंचे। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने आत्मीय स्वागत किया।
रायपुर में उन्नत हृदय उपचार की बड़ी उपलब्धि: 68 वर्षीय मरीज पर सफल वाल्व-इन-वाल्व TAVI प्रक्रिया
उन्नत हृदय-चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, लालपुर, रायपुर के कार्डियोलॉजी विभाग ने 68 वर्षीय मरीज पर जटिल वाल्व-इन-वाल्व ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन (TAVI) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
मरीज को लगभग 12 वर्ष पूर्व लगाया गया बायोप्रोस्थेटिक एओर्टिक वाल्व समय के साथ क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके कारण उन्हें सांस फूलने और शारीरिक क्षमता में लगातार कमी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। मरीज की आयु और स्थिति को देखते हुए दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी को उच्च जोखिम वाला मानते हुए डॉक्टरों ने न्यूनतम इनवेसिव, कैथेटर-आधारित उपचार पद्धति अपनाने का निर्णय लिया।
यह जटिल प्रक्रिया कार्डियोलॉजी विभाग की अनुभवी टीम द्वारा की गई, जिसका नेतृत्व डॉ. सुमंता शेखर पाढ़ी (क्लिनिकल लीड एवं सीनियर कंसल्टेंट) ने किया। टीम में डॉ. सुनील गौनियाल (सीनियर कंसल्टेंट) और डॉ. स्नेहिल गोस्वामी (कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजी) भी शामिल रहे। संपूर्ण प्रक्रिया डॉ. एस. के. जेना (प्रोफेसर, कार्डियोलॉजी, KIMS) के पर्यवेक्षण में संपन्न हुई।
प्रक्रिया की योजना अत्याधुनिक CT-आधारित इमेजिंग तकनीक के माध्यम से बनाई गई। ट्रांसकैथेटर वाल्व को फेमोरल आर्टरी के रास्ते क्षतिग्रस्त सर्जिकल वाल्व के भीतर सटीक रूप से स्थापित किया गया, जिससे मरीज को दोबारा छाती की सर्जरी से बचाया जा सका।
चिकित्सकों के अनुसार, 26 जनवरी 2026 को की गई इस प्रक्रिया की सफलता में सटीक प्री-प्रोसीजरल इमेजिंग और सही वाल्व साइजिंग की अहम भूमिका रही। प्रक्रिया के बाद वाल्व का कार्य उत्कृष्ट पाया गया, दबाव अंतर न्यूनतम रहा और किसी भी प्रकार का पैरावाल्वुलर लीक नहीं देखा गया। मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही और स्ट्रोक, अत्यधिक रक्तस्राव, पेसमेकर की आवश्यकता या वैस्कुलर इंजरी जैसी कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई।
इस प्रक्रिया में एनेस्थीसिया टीम — डॉ. राकेश राजकुमार चंद और डॉ. स्नेहा (सीनियर कंसल्टेंट, एनेस्थीसियोलॉजी) — का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस अवसर पर विशेषज्ञों ने बताया कि वाल्व-इन-वाल्व TAVI बुजुर्ग मरीजों के लिए एक परिवर्तनकारी विकल्प है, जिनके सर्जिकल वाल्व विफल हो चुके हैं। विस्तृत योजना और सटीक निष्पादन से बेहतर परिणाम, तेज़ रिकवरी और जीवन-गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव हो पा रहा है।
उन्नत इमेजिंग टूल्स की सहायता से प्रक्रिया के दौरान वाल्व की स्थिति और रक्त प्रवाह का रियल-टाइम मूल्यांकन किया गया, जिससे तत्काल सफलता की पुष्टि हो सकी। प्रक्रिया के बाद मरीज के लक्षणों में तेजी से सुधार देखा गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सफल प्रक्रियाएं भारत में कैथेटर-आधारित वाल्व थैरेपी की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाती हैं, खासकर उन जटिल और उच्च-जोखिम मामलों में जहां पहले उपचार के विकल्प सीमित थे।
अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर अजीत बेलमकोण्डा ने इस जटिल प्रक्रिया की सफलता पर कार्डियोलॉजी विभाग को बधाई देते हुए टीम की सराहना की।
बढ़ती विशेषज्ञता, मजबूत हार्ट-टीम सहयोग और नवीन वाल्व तकनीकों के साथ ट्रांसकैथेटर वाल्व थैरेपी अब संरचनात्मक हृदय रोगों के उपचार में नई उम्मीद बनकर उभर रही है।
बस्तर पण्डुम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का एक प्रमुख सांस्कृतिक, सामुदायिक और प्राकृतिक उत्सव है, जो जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और जीवन शैली को संरक्षित व प्रदर्शित करता है। जिसमें पारंपरिक नृत्य, संगीत (मांदर-बांसुरी), वेशभूषा, लोक शिल्प (काष्ठ/बांस/धातु) और पारंपरिक खान-पान का प्रदर्शन किया जाएगा। यह उत्सव बस्तर की आत्म-अस्मिता का प्रतीक है, जो स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ-साथ युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ता है। विभिन्न अंचलों से आए प्रतिभागी बस्तर की 12 पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन करेंगें।
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