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छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग राज्य की बिजली कंपनियों द्वारा दायर याचिकाओं पर करेगा जन-सुनवाई

 छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने राज्य की बिजली कंपनियों द्वारा दायर याचिकाओं पर जन-सुनवाई का कार्यक्रम जारी किया है। 

आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड तथा छत्तीसगढ़ राज्य भार पोषण केंद्र द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के ट्रूअप, वर्ष 2026-27 से 2029-30 तक वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR), टैरिफ निर्धारण तथा पूंजीगत निवेश योजना के अनुमोदन से संबंधित याचिकाओं पर क्षेत्रीय स्तर पर ऑनलाइन जन-सुनवाई आयोजित की जाएगी। 

          आयोग ने बताया कि याचिकाओं का सारांश पूर्व में समाचार पत्रों और आयोग की वेबसाइट www.cserc.gov. in पर प्रकाशित किया जा चुका है तथा इच्छुक उपभोक्ता और हितधारक निर्धारित तिथियों पर संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से सुनवाई में भाग ले सकते हैं। निर्धारित कार्यक्रम के तहत 17 फरवरी 2026 को दुर्ग (प्रातः 10:30 से 12:00 बजे तक), बिलासपुर (दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक) और राजनांदगांव (दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक) में जन-सुनवाई होगी। 

         जबकि 18 फरवरी 2026 को अंबिकापुर (प्रातः 10:30 से 12:00 बजे तक), जगदलपुर (दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक) और रायगढ़ (दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक) में जन-सुनवाई आयोजित की जाएगी। आयोग ने उपभोक्ताओं, जन-प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से जन-सुनवाई में सक्रिय भागीदारी की अपील की है, ताकि टैरिफ निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।
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वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और सह-अस्तित्व के सिद्धांतों के अनुरूप हो सभी गतिविधियों का संचालन : मुख्यमंत्री श्री साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की 16वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में बोर्ड की 15वीं बैठक के पालन प्रतिवेदन तथा नवीन एजेंडों पर चर्चा उपरांत प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के निर्णय हेतु प्रेषित करने पर सहमति बनी।

             मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वन्यजीव हमारी प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं और उनके संरक्षण–संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सतत निगरानी, अवैध गतिविधियों पर रोक तथा उनकी सुरक्षा के लिए जनभागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही, वनों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाने और युवाओं की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री ने न्यूनतम हस्तक्षेप के सिद्धांत को अपनाते हुए अत्यावश्यक कार्यों को ही वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में बिना किसी छेड़छाड़ के पूर्ण करने पर बल दिया। उन्होंने सह-अस्तित्व के सिद्धांतों के अनुरूप सभी गतिविधियों के संचालन की बात कही।
            बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (Standing Committee of State Board for Wildlife) के गठन को मंजूरी दी गई। स्थायी समिति का गठन वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री की अध्यक्षता में किया जाएगा, जिसमें 11 अन्य सदस्य शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि वन्य प्राणियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होने वाले कार्यों के प्रस्तावों पर राज्य वन्यजीव बोर्ड का अभिमत अनिवार्य होता है। बोर्ड की बैठकों के बीच अधिक अंतराल के कारण प्रस्तावों की स्वीकृति में विलंब की स्थिति बनती है। स्थायी समिति के गठन से वैधानिक मंजूरियों के त्वरित निपटान तथा वन्यजीव प्रबंधन से संबंधित मुद्दों के शीघ्र निराकरण में सहायता मिलेगी।
           बैठक में उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व अंतर्गत बरबांधा जलाशय में बांध एवं नहरों के जीर्णोद्धार एवं नवीन कार्य, पीएम जनमन योजना के अंतर्गत कबीरधाम जिले के कवर्धा वनमंडल में पंडरीपानी मेन रोड से सौरु तक मार्ग मजबूतीकरण, गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने से संबंधित 6 प्रस्ताव, सेमरसोत अभ्यारण्य में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने, उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में सीआरपीएफ कैंप की स्थापना तथा उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के प्रस्तावों का अनुमोदन कर उन्हें राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्वीकृति हेतु प्रेषित करने पर सहमति दी गई।
              कार्यक्रम में वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री धर्मजीत सिंह, मुख्य सचिव श्री विकास शील, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री अरुण कुमार पाण्डेय सहित बोर्ड के अन्य सदस्य एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।
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रेडियो की विश्वसनीयता और एआई की गति मिलकर जनसेवा को बनायेंगे अधिक सशक्त : मुख्यमंत्री श्री साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वंदे मातरम के नए गायन संस्करण का पेन ड्राइव लॉन्च किया। 

             मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी को विश्व रेडियो दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए आकाशवाणी रायपुर और यूनेस्को को इस खास आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का विषय ‘रेडियो और एआई’ अत्यंत सामयिक और उपयोगी है। सूचना क्रांति के इस युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग सभी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में एआई के माध्यम से रेडियो को और अधिक जनोपयोगी बनाने पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सही समय पर सही जानकारी नागरिकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसमें रेडियो की भूमिका शुरू से ही अत्यंत प्रभावी रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आकाशवाणी देश का सबसे भरोसेमंद समाचार प्रसारक है। निजी चैनलों के बीच तेज़ी से खबरें देने की प्रतिस्पर्धा के बावजूद आकाशवाणी ने अपनी विश्वसनीय, संतुलित और जनहितकारी सूचना परंपरा को बनाए रखा है। 

              मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में यह सूचना, शिक्षा और स्वस्थ मनोरंजन का सशक्त माध्यम है। उन्होंने रेडियो से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि जब दूरस्थ गांवों तक किसी अन्य माध्यम की पहुंच नहीं थी, तब रेडियो ही देश-दुनिया से जुड़ने का एकमात्र माध्यम था। किसानों और ग्रामीण अंचलों के लिए आकाशवाणी आज भी विशेष भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ जैसे लोकप्रिय कार्यक्रम के लिए रेडियो का चयन इसकी व्यापक पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आकाशवाणी के छह स्टेशन संचालित हैं तथा रायपुर से विविध भारती सेवा प्रसारित हो रही है। 

          मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘रेडियो और एआई’ संचार के क्षेत्र में नई क्रांति ला सकता है। एआई की मदद से कंटेंट को अधिक प्रभावी, सटीक और त्वरित बनाया जा सकता है। आपातकालीन सूचनाएं, मौसम पूर्वानुमान, कृषि सलाह और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी अधिक तेजी और सटीकता से प्रसारित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ डिजिटल भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। नवा रायपुर में देश का पहला एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और तकनीकी सुरक्षा के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे। नई औद्योगिक नीति के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है और डिजिटल तकनीक के जरिए अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आकाशवाणी के माध्यम से छत्तीसगढ़ी, गोंडी और हल्बी भाषाओं में प्रसारण से स्थानीय जुड़ाव मजबूत हुआ है और श्रोताओं की रुचि में वृद्धि हुई है। 

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि रेडियो की विश्वसनीयता और एआई की गति मिलकर जनसेवा को और अधिक सशक्त बनाएंगी और विकसित भारत के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प सभी के सहयोग से अवश्य साकार होगा।

          कार्यक्रम में यूनेस्को के रीजनल एडवाइजर ऑफ कम्युनिकेशन एंड इनफॉर्मेशन सुश्री हज़्ज़ाज़ मा'अली ने सभी को विश्व रेडियो दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि रेडियो पूरी दुनिया में सबसे अधिक पहुंच रखता है और सबसे अधिक भरोसे वाला माध्यम है। रेडियो ने कठिन समय में भी अपनी विश्वसनीयता बनाए रखते हुए दुनिया को सही सूचनाएं प्रदान की। सुश्री अली ने कहा कि एआई के माध्यम से रेडियो को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और इस दिशा में ठोस प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आकाशवाणी रायपुर छत्तीसगढ़ी और हिंदी भाषा में पूरे प्रदेश विशेषकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों तक अपनी सेवाएं दे रहा है। सुश्री अली ने कहा कि यूनेस्को रेडियो के विस्तार के लिए आकाशवाणी के साथ मिलकर नवाचार और तकनीकी पहलुओं पर लगातार सहयोग करेगा। 
           
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा, आकाशवाणी के महानिदेशक श्री राजीव कुमार जैन, उप महानिदेशक श्री व्ही. राजेश्वर, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।
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उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कवर्धा नगर के विकास के लिए रखी 2.80 करोड़ के निर्माण कार्यों की आधारशिला

उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने आज कवर्धा नगर के विकास को नई गति देते हुए कुल 2 करोड़ 80 लाख रुपए के निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी। उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर अंबेडकर चौक से समनापुर पुल तक बी.टी. रोड एवं नाली निर्माण तथा लक्ष्मी नारायण मंदिर के पास सामुदायिक भवन निर्माण कार्य का भूमि पूजन किया। 

        उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि नगर के विकास के लिए सड़क, नाली और सामुदायिक भवन जैसे मूलभूत कार्य अत्यंत आवश्यक हैं। अंबेडकर चौक से समनापुर पुल तक लगभग 2 करोड़ 60 लाख रुपए की लागत से बी.टी. रोड एवं नाली का निर्माण किया जाएगा, जिससे आवागमन सुगम होगा और नागरिकों को बेहतर सुविधा मिलेगी। वहीं लक्ष्मी नारायण मंदिर के पास 20 लाख रुपए की लागत से सामुदायिक भवन का निर्माण होगा, जिससे सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में सहूलियत मिलेगी। उन्होंने कहा कि नगर के सर्वांगीण विकास के लिए आधारभूत संरचनाओं को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने मोहल्लावासियों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से निर्माण कार्य जल्द पूरा होगा। इस दौरान उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को निःशुल्क गैस सिलेंडर एवं चूल्हा वितरित किया।
       उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने कहा कि अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र लोगों के लिए आवास स्वीकृत होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। उन्होंने बताया कि जो लोग जिस स्थान पर काबिज हैं और वहां समेकित कर, बिजली बिल तथा संपत्ति कर जमा कर रहे हैं या जिनके पास पुराना पट्टा है लेकिन उसका नवीनीकरण नहीं हुआ है, ऐसे सभी पात्र लोगों का प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किया जाएगा। नगर पालिका द्वारा उन्हें कब्जे का प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा, जिसके बाद आवास की स्वीकृति में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष को कहा कि ऐसे सभी लोगों को शीघ्र प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों को 2 लाख 36 हजार रुपए की सहायता दी जाएगी, जिससे वे अपने अनुरूप बेहतर घर बना सकेंगे।
       उप मुख्यमंत्री ने बताया कि अंबेडकर चौक के पास 30 लाख रुपए की लागत से सियान सदन बनाया जाएगा, जहां वरिष्ठ नागरिक बैठकर समय व्यतीत कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर उन्हें घर से लाने-ले जाने की व्यवस्था भी की जाएगी। शहर के सभी प्रमुख चौकों के सौंदर्यीकरण के लिए भी 20-20 लाख रुपए की स्वीकृति मिलने वाली है, जिसमें गाडगे जी, सहस्त्रबाहु जी, सेन जी और महाराज करपात्री जी महाराज से जुड़े चौकों का विकास किया जाएगा। इसके साथ ही कवर्धा कॉलेज परिसर में 4.5 करोड़ रुपए की लागत से नालंदा परिसर के रूप में आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी बनाई जा रही है। भोजपुरी तालाब के समीप हनुमंत वाटिका का निर्माण किया जा चुका है, वहीं घोटिया क्षेत्र में 354 करोड़ रुपए की लागत से मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। रायपुर–बिलासपुर मार्ग के 7.8 किलोमीटर हिस्से को फोरलेन बनाते हुए कवर्धा एंट्रेंस का विकास किया जाएगा, जिसके लिए 54 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।
     नगर पालिका अध्यक्ष श्री चन्द्र प्रकाश चंद्रवंशी ने कहा कि कवर्धा का चौमुखी विकास उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में लगातार हो रहा है और यह पूरे शहर के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि 4 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से गौरव पथ रोड का निर्माण कराया गया है। ठाकुर देव से नया बस स्टैंड तक तक 11 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से सड़क बनकर तैयार हो चुकी है। उन्होंने बताया कि शहीद वीर स्तंभ चौक में शहीदों की प्रतिमा स्थापित की गई है और शहर के हर क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं। चौपाटी, हनुमंत वाटिका और बूढ़ा महादेव मंदिर में कांवड़ियों के विश्राम के लिए  निर्माण किया जा रहा है। 
      इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, श्री नितेश अग्रवाल, जिला पंचायत सदस्य श्री रामकुमार भट्ट, डॉ. बीरेन्द्र साहू, श्री मनिराम साहू, श्री विजय पाटिल, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री पवन जायसवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संतोष पटेल, पार्षद श्री बिहारी धुर्वे, श्री अजय ठाकुर, श्री योगेश चंद्रवंशी, श्री दीपक सिन्हा, श्री केशरीचंद सोनी, श्री संजीव, श्रीमती सुषमा उपाध्याय, श्री केशरीचंद सोनी, श्री भुनेश्वर चंद्राकर, श्री उमंग पाण्डेय, डॉ. आनंद मिश्रा सहित जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
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धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित धरा को सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही हमारी सरकार : मुख्यमंत्री श्री साय

छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रदेश है और धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित इस धरा को हमारी सरकार सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में सिक्किम राज्य से अध्ययन भ्रमण पर पहुंचे पत्रकारों के दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया और उनसे छत्तीसगढ़ को लेकर ढेर सारी बातें साझा की। उन्होंने सभी अतिथियों को राजकीय गमछा भेंट कर छत्तीसगढ़ में स्वागत और अभिवादन किया। मुख्यमंत्री की सहृदयता और आतिथ्य पाकर  सभी पत्रकार अभिभूत हुए और उन्हें सिक्किम आने का निमंत्रण भी दिया। 

             मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ 44 प्रतिशत वन क्षेत्र से आच्छादित है तथा यहां 31 प्रतिशत आदिवासी समुदाय निवासरत है। वनोपज संग्रहण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से जनजातीय समुदाय आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। जशपुर जिले में स्व-सहायता समूह की महिलाएं ‘जशप्योर’ ब्रांड के अंतर्गत उत्पाद तैयार कर आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए सरकार द्वारा 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से भुगतान किया जा रहा है तथा चरण पादुका योजना के तहत निःशुल्क चप्पल प्रदान की जा रही है।
                मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह की चिंता को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2005 में इस योजना की शुरुआत की गई थी। हाल ही छह हजार से अधिक जोड़े इस योजना के अंतर्गत विवाह बंधन में बंधे, जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत नवदंपतियों को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता एवं 15 हजार रुपये का सामग्री सहयोग प्रदान किया जाता है।
                   नक्सलवाद के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सफल नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते प्रदेश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है। राज्य सरकार की आकर्षक पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 50 हजार रुपये की सहायता तथा तीन वर्षों तक प्रति माह 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। अब तक 2,500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें रोजगार से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। श्री साय ने बताया कि जगदलपुर में आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा ‘बस्तर पंडुम’ कैफे का सफल संचालन इसका सशक्त उदाहरण है।
          मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के अंतर्गत 17 शासकीय योजनाओं को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया गया है, जिससे सड़क, बिजली, पानी, राशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की पहुंच सुदृढ़ हुई है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहे हैं। पर्यटन की संभावनाओं पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुम्बसर गुफाएं, अबूझमाड़ के वन और धुड़मारास जैसे स्थल प्रदेश की पहचान हैं। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु होम स्टे को उद्योग का दर्जा दिया गया है, जिसके तहत ग्रामीणों को पांच कमरों तक निर्माण के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं औद्योगिक विकास के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि नवा रायपुर में 100 एकड़ क्षेत्र में मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है, जहां निम्न आय वर्ग के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने प्रदेश की आकर्षक नवीन औद्योगिक नीति का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसके तहत राज्य को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। साथ ही चित्रोत्पला फिल्म सिटी की स्थापना से प्रदेश में फिल्म उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। 

“छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” – सुश्री अर्चना प्रधान

सिक्किम की पत्रकार सुश्री अर्चना प्रधान ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ‘मेक इन इंडिया’ का प्रभावी स्वरूप देखने को मिला। भिलाई स्टील प्लांट में रेल पटरियों सहित विभिन्न इस्पात उत्पादों का निर्माण प्रदेश के औद्योगिक सामर्थ्य को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इकाइयों को हमें करीब से देखने का मौका मिला और हम जान पाए है कि इस प्रदेश का देश के विकास में कितना महत्वपूर्ण योगदान है। 

    सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़

              मुख्यमंत्री से भ्रमण उपरांत मिलने पहुंचे पत्रकारों ने  कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला है। उन्होंने भ्रमण के दौरान प्राप्त अनुभवों को साझा करते हुए स्थानीय खान-पान और सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। सिक्किम से आए पत्रकारों ने अपने पांच दिवसीय भ्रमण के दौरान भिलाई स्टील प्लांट, गेवरा ओपन माइंस, नवा रायपुर तथा जनजातीय संग्रहालय का अवलोकन किया। पत्रकारों ने बताया कि छत्तीसगढ़ भ्रमण की सुंदर स्मृतियों को अपने साथ लेकर जा रहे हैं, जो उन्हें आजीवन याद रहेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसानों के हित में की गई घोषणाओं, स्वच्छ वातावरण तथा पुनर्वास नीति की सराहना की।

मुख्यमंत्री को भेंट किया सिक्किम का स्मृति चिन्ह ‘थांका’

पत्रकारों के दल ने मुख्यमंत्री को सिक्किम की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक ‘थांका’ पेंटिंग भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस उपहार के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसे स्नेह और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक बताया।
        पत्रकारों ने बताया कि सिक्किम का थांका पेंटिंग एक पवित्र स्मृति चिन्ह है, जो सूती या रेशमी कपड़े पर बौद्ध देवताओं, मंडलों और बुद्ध के जीवन दृश्यों को दर्शाता है। यह हस्तनिर्मित कला सिक्किम की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जिसे अक्सर घर की सजावट और सकारात्मक ऊर्जा के लिए लाया जाता है। इन्हें रोल करके आसानी से ले जाया जा सकता है, जो यात्रियों के लिए एक बेहतरीन सोवेनियर है। यह पारंपरिक कलाकृति सिक्किम के निवासियों के लिए धार्मिक विश्वास और आस्था का प्रतीक है। 
           इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह, पीआईबी गंगटोक के सहायक निदेशक श्री मानस प्रतिम शर्मा, पीआईबी रायपुर के सहायक निदेशक श्री सुदीप्तो कर, श्री पुरुषोत्तम झा और श्री सरद बसनेत,
पत्रकार श्री बेनु प्रकाश तिवारी, श्री विकास क्षेत्री, श्री होमनाथ दाबरी, श्री ईश्वर, सुश्री अर्चना प्रधान, सुश्री अनुशीला शर्मा, श्री प्रकाश अधिकारी, श्री ललित दहल, श्री विनोद तमंग, श्री मोहन कुमार कार्की, श्री नार बहादुर क्षेत्री उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और आजीविका विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां : वन मंत्री श्री केदार कश्यप

 वन, सहकारिता एवं परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि राज्य में वन संरक्षण, हरित आवरण विस्तार, वन्यजीव संवर्धन, इको-टूरिज्म विकास तथा वनवासियों की आजीविका सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की गई हैं। उन्होंने विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी दी। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन संरक्षण के साथ-साथ सतत विकास, जैव विविधता संरक्षण और वनवासियों की आजीविका सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।


वन आवरण में वृद्धि

         प्रेस वार्ता में मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान द्वारा दिसंबर 2024 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ के वन एवं वृक्ष आवरण में लगभग 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 44 प्रतिशत भाग वन क्षेत्र है। अत्यंत सघन वनों (Very Dense Forest) में 348 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज होना वनों की गुणवत्ता और पारिस्थितिक संतुलन में सुधार का प्रमाण है।

हरित छत्तीसगढ़ अभियान

     श्री कश्यप ने बताया कि राज्य में “एक पेड़ माँ के नाम 2.0” अभियान के तहत वर्ष 2024 में 4 करोड़ 20 लाख से अधिक तथा वर्ष 2025 में 2 करोड़ 79 लाख से अधिक पौधों का रोपण एवं वितरण किया गया है।

किसान वृक्ष मित्र योजना

         उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित किसान वृक्ष मित्र योजना के अंतर्गत निजी भूमि पर वाणिज्यिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पात्र हितग्राहियों को पांच एकड़ तक 100 प्रतिशत तथा उससे अधिक क्षेत्र में 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जाता है। विगत दो वर्षों में 36 हजार 896 हितग्राहियों की 62 हजार 441 एकड़ भूमि में 3 करोड़ 67 लाख से अधिक पौधे लगाए गए।

देव स्थलों का संरक्षण

       प्रेस वार्ता में मंत्री श्री केदार कश्यप ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के अनुरूप आदिवासी देव स्थलों के संरक्षण के लिए “मोदी की गारंटी” के तहत पिछले दो वर्षों में 435 देवगुड़ियों का निर्माण किया गया, जिस पर लगभग 16.17 करोड़ रुपये व्यय किए गए।

वन विभाग में भर्ती

        उन्होंने बताया कि वन विभाग में पिछले दो वर्षों में तृतीय श्रेणी के 313 पदों पर भर्ती की गई है। इसके अलावा 150 आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की गई है। वनरक्षक के 1484 पदों की शारीरिक परीक्षा पूर्ण हो चुकी है तथा आगे की प्रक्रिया जारी है।

बाघ संरक्षण में सफलता

         श्री कश्यप ने बताया कि राज्य में बाघ संरक्षण के लिए गुरू घासी दास- तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व का गठन किया गया है। वर्ष 2022 में प्रदेश में 17 बाघ थे, जो अब बढ़कर 35 हो गए हैं। बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए अन्य टाइगर रिजर्व से बाघों के स्थानांतरण की अनुमति भी प्राप्त हुई है।

वनभैंसा और पहाड़ी मैना संरक्षण

          प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि राजकीय पशु वनभैंसा के संरक्षण के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है। इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में 14 से 17 वनभैंसे देखे गए हैं। राज्य पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण के लिए स्थानीय युवाओं को ‘मैना मित्र’ के रूप में जोड़ा गया है, जिसके परिणामस्वरूप अब लगभग 600 से 700 पहाड़ी मैना देखे जा रहे हैं।

बर्ड सफारी और रामसर साइट

           उन्होंने बताया कि गिधवा- परसदा में बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर और बर्ड सफारी का शुभारंभ किया गया है, जहां 270 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। बिलासपुर का कोपरा जलाशय राज्य का पहला और देश का 96 वां रामसर स्थल घोषित हुआ है, जिससे इको- टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

इको-टूरिज्म और अधोसंरचना विकास

         मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि प्रदेश में 240 नैसर्गिक पर्यटन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 50 से अधिक स्वावलंबी बन चुके हैं। वनवासियों की सुविधा के लिए 96 रपटा-पुलिया का निर्माण किया गया है।

मानव-हाथी द्वंद नियंत्रण

        प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में ‘गज संकेत’ ऐप के माध्यम से हाथियों की निगरानी कर ग्रामीणों को समय पर सूचना दी जा रही है। राज्य में 90 हाथी मित्र दल गठित किए गए हैं। वर्तमान में प्रदेश में कुल 355 हाथी दर्ज किए गए हैं।

औषधीय पौध रोपण और महिला सशक्तिकरण

          उन्होंने कहा कि औषधि पादप बोर्ड के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ाने हेतु विभिन्न जिलों में औषधीय पौधों का रोपण कराया गया है। हजारों महिलाओं को इससे रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं तथा पारंपरिक वैद्यों को प्रशिक्षण भी दिया गया है।

वन विकास निगम की उपलब्धियां

       वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने प्रेस वार्ता में राज्य वन विकास निगम की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य वन विकास निगम द्वारा सतत वानिकी सिद्धांतों के तहत काष्ठ उत्पादन, वृक्षारोपण, अवैध अतिक्रमण हटाने तथा ई-ऑफिस व्यवस्था लागू करने जैसे कार्य किए गए हैं। काष्ठिय वनोपज की बिक्री ई-ऑक्शन के माध्यम से प्रारंभ की गई है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। इसके अतिरिक्त वन संरक्षण के साथ साथ विकास कार्य भी लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, विद्यालय, स्वास्थ्य सुविधा, पेयजल एवं अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए 1165 प्रकरणों में वनभूमि उपयोग की स्वीकृति प्रदान की गई है।

सबसे बड़ा समुद्रीय जीवाश्म पार्क

      वन मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि मनेन्द्रगढ-चिरमिरी- भरतपुर जिला का मरीन फ़ासिल पार्क एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा समुद्रीय जीवाश्म पार्क है l यह जीवाश्म हसदेव नदी के किनारे लगभग एक किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है l यहां 29 करोड़ वर्ष पूर्व के जीवाश्म मिले हैं l देश में ऐसे 4 जगह समुद्रीय जीवाश्म मिले हैं l
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उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने ग्राम सेमो को दी 2.38 करोड़ रुपए के नवीन विद्युत उपकेंद्र की बड़ी सौगात

 उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के ग्राम सेमो में 2 करोड़ 38 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 33/11 के.व्ही. विद्युत उपकेन्द्र की बड़ी सौगात दी। इस उपकेन्द्र के स्थापित होने से आसपास के 10 गांव सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे तथा लगभग 2 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और नियमित विद्युत आपूर्ति उपलब्ध हो सकेगी। ग्राम सेमो में इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत विधिवत भूमि पूजन कर निर्माण कार्य की शुरुआत की गई। यह उपकेन्द्र क्षेत्र में लंबे समय से बनी बिजली समस्या के समाधान के साथ-साथ विकास की नई संभावनाओं के द्वार भी खोलेगा। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा की पहल से क्षेत्रवासियों को बेहतर और स्थायी विद्युत सुविधा मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

      उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विकास को केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रखते हुए, गांवों और वनांचलों तक ले जाने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह उपकेन्द्र न केवल बिजली की समस्या को दूर करेगा, बल्कि क्षेत्र के विकास की रफ्तार को भी तेज करेगा। लंबे समय से इस इलाके के लोगों को लो-वोल्टेज और बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याओं से निजात मिलेगा। इस नई परियोजना के पूरा होने के बाद यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। 
       उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बताया कि इस उपकेन्द्र में 5 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाएगा तथा यहां से 3 अलग-अलग 11 केवी फीडर निकाले जाएंगे, जिससे आसपास के 10 गांव सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। इस व्यवस्था से क्षेत्र में वोल्टेज की समस्या दूर होगी, जिससे किसानों को विशेष रूप से राहत मिलेगी और कृषि कार्य के लिए निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण की जानकारी ली। उप मुख्यमंत्री ने ग्रामवासियों के साथ बैठकर उनकी समस्या शिकायतों को सुना और उसका निराकरण करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और सैकड़ो की संख्या में ग्रामीणजन और विद्युत विभाग के अन्य अधिकरी उपस्थित थे। 

2.38 करोड़ रुपए की लागत से होगा निर्माण, विकास को मिलेगी नई दिशा

विकासखंड कवर्धा के ग्राम सेमो में नवीन 33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्र का निर्माण कार्य प्रारंभ होने से क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी और क्षेत्रवासियों के लिए सुविधाओं का विस्तार करेगी। ग्राम सेमो में लगभग 2 करोड़ 38 लाख रुपए की लागत से 33/11 केवी उपकेन्द्र का निर्माण किया जाएगा। इसमें 5 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति की क्षमता बढ़ेगी।

10 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ

इस उपकेन्द्र से कुल 3 अलग-अलग 11 केवी फीडर निकाले जाएंगे, जिनसे सोनबरसा, चारभांठा, गदहाभांठा, बारदी, बरदुली, सेमो, मानपुर, सिंघनपुरी, भेलवाभांवर और दुल्लापुर सहित 10 गांवों के उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। अभी इन गांवों में बिजली आपूर्ति 33/11 केवी उपकेन्द्र बिजई से संचालित 11 केवी सोनबरसा बस्ती फीडर और 11 केवी सोनबरसा पंप फीडर के माध्यम से की जाती है। क्षेत्र में लगभग 500 कृषि पंप होने के कारण अक्सर लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है। जिससे अब समस्या का समाधान हो सकेगा। 

2 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को मिलेगी बेहतर बिजली

कृषि पंपों और औद्योगिक उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ने से ऊर्जा की खपत भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में नए उपकेन्द्र का निर्माण क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नए सब स्टेशन के निर्माण से लगभग 2 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध विद्युत आपूर्ति मिल सकेगी। इससे किसानों को सिंचाई में सुविधा मिलेगी और उनकी आय में वृद्धि होने की संभावना है।

बारिश के समय भी मिलेगी राहत

33/11 केवी उपकेन्द्र सेमो के निर्माण से बिजई उपकेन्द्र पर दबाव कम होगा। खासकर बारिश के मौसम में कृषि उपभोक्ताओं को लो-वोल्टेज की समस्या से राहत मिलेगी और बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर हो सकेगी।
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प्रदेश भाजपा कार्यालय ‘सहयोग केंद्र’ जनदर्शन में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सुनीं लोगों की समस्याएं

 प्रदेश भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित ‘सहयोग केंद्र’ में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। इस अवसर पर सहयोग केंद्र प्रभारी सच्चिदानंद उपासने भी उपस्थित रहे।

        उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि भाजपा के प्रदेश कार्यालय में प्रति सप्ताह निर्धारित समय के अनुसार मंत्रीगण सहयोग केंद्र में उपस्थित रहते हैं। यहां सभी कार्यकर्ता एवं आमजन अपनी समस्याओं को सीधे अपने प्रतिनिधियों के समक्ष रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक समस्याओं का यथाशीघ्र समाधान हो और लोगों को किसी प्रकार की समास्या का सामना ना करना पड़े।
        उन्होंने बताया कि ‘सहयोग केंद्र’ के जनदर्शन के माध्यम से संगठन और सरकार के बीच समन्वय को मजबूत किया जा रहा है। इससे न केवल कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान हो रहा है, बल्कि आम नागरिकों को भी सीधे संवाद का अवसर मिल रहा है। आज जनदर्शन कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से 500 से अधिक कार्यकर्ता एवं आमजनों ने अपनी समस्याएं और सुझाव रखे, जिन पर उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान लोग अपनी समस्याओं का त्वरित निराकरण पाकर खुश दिखाई दिए।
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नाबार्ड की ‘ग्राम दुकान’ से स्व-सहायता समूह की महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने  स्वयं सहायता समूहों को ग्रामीण बाजार स्थापित करने के लिए अनुदान सहायता प्रदान करने का निर्णय लकर महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहित की है। इन बाजारों का उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों को उनके हस्तनिर्मित उत्पादों के विपणन के लिए एक मंच प्रदान करना और उन्हें बढ़ावा देना है। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा संचालित ‘ग्राम दुकान’ पहल स्वसहायता समूह की महिलाओं के जीवन स्तर को उन्नत बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है। राजनांदगांव स्थित पाताल भैरवी मंदिर के पास स्थापित ग्राम दुकान महिला समूहों के लिए अपने हुनर, कौशल एवं लघु उद्यम को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।


                     इस ग्राम दुकान में महिला स्वसहायता समूह द्वारा स्थानीय स्तर पर निर्मित विभिन्न उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इनमें पूजा सामग्री, अचार, पापड़, मुरकू, नड्डा, बिजौरी, मुरब्बा, मोमबत्ती, अगरबत्ती, साबुन, जिमीकंद, फूल, मशरूम, कपड़े, विविध खाद्य सामग्री, मसाले, दोना-पत्तल, डेकोरेशन आइटम्स तथा अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं शामिल हैं। महिला समूह अपने उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग कर ग्राम दुकान के माध्यम से उनका विक्रय कर रही हैं, जिससे उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। ग्राम दुकान की संचालिका श्रीमती निशा मंडावी ने बताया कि पाताल भैरवी मंदिर के समीप स्थित होने के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं से उत्पादों को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।

                 ग्राम दुकान योजना के अंतर्गत समूह की महिलाओं को नाबार्ड ने  नि:शुल्क दुकान उपलब्ध कराई गई है, जिससे उन्हें अपने उत्पादों की बिक्री के लिए सुलभ और स्थायी मंच मिल गया है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है। 
नाबार्ड की यह पहल महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने का उत्कृष्ट उदाहरण बन रही है।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -

 1. मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ के षष्ठम् विधान सभा के अष्टम् सत्र माह फरवरी-मार्च, 2026 हेतु माननीय राज्यपाल के अभिभाषण का अनुमोदन किया गया। 


2. मंत्रिपरिषद द्वारा बजट अनुमान वर्ष 2026-27 का विधानसभा में उपस्थापन हेतु छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक-2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। 

3. मंत्रिपरिषद ने राज्य में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से अंतर की राशि होली पर्व से पहले एकमुश्त भुगतान किए जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25 लाख 24 हजार 339 किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है।  छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत धान के मूल्य के अंतर की राशि के रूप में लगभग 10 हजार करोड़ रूपए का भुगतान होली त्यौहार से पहले एकमुश्त किया जाएगा। 

यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से की जा रही है, जो देश में सर्वाधिक है। बीते दो वर्षाें में कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों को धान के मूल्य के अंतर के रूप में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इस साल होली से पूर्व किसानों को 10 हजार करोड़ रूपए का भुगतान होने से यह राशि बढ़कर 35 हजार करोड़ रूपए हो जाएगी। 
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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए

 केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


अपने सम्बोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जो बस्तर कुछ साल पहले नक्सलियों के डर से सहमा रहता था और मोर्टार के गोले, बंदुकों की गोलियां और IEDs के धमाके हमारे आदिवासी भाई बहनों में भय का संचार करती थी। आज उसी बस्तर में 55 हजार लोगों ने खान- पान, गीत, नृत्य, नाटक, वेशभूषा, परंपरा और वन औषधी जैसी 12 विधाओं में यहाँ की संस्कृति को पुनर्जीवित करने का काम किया। उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी बात है।

श्री अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने हमारी बस्तर की संस्कृति को नए प्राण देने का काम किया। गत बस्तर पंडुम में 7 विधाओं में स्पर्धा आयोजित की गई थीं और इस बार पाँच  नई विधाओं को जोड़ कर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी ने हमारी आदिवासी और बस्तर की संस्कृति को बढ़ाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि इस बार सात जिलों, 1885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपद मुख्यालयों से 12 विधाओं में 55 हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर जैसी संस्कृति और कला विश्व में किसी भी जनजाति क्षेत्र में उपलब्ध नहीं है और हम इसे सैकड़ों वर्षों तक जिंदा रखना चाहते है। उन्होंने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति, गीत, नृत्य सिर्फ बस्तर का ही आभूषण नहीं है, बल्कि पूरे भारत की संस्कृति का गहना है और बस्तर पंडुम ने इसे आगे बढ़ाया है। श्री शाह ने कहा कि बस्तर की जनजातियों की अपनी एक संस्कृति है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम के समय से उन्होंने अपनी संस्कृति को संजो कर रखा है। यहां के प्रमुख नृत्य आने वाले दिनों में राष्ट्रीय फलक पर भी आगे बढ़ रहे हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का यह विजन है कि बस्तर की संस्कृति देश और दुनिया के सामने पहुँचे। उन्होंने कहा कि बस्तर की पहचान बारूद नहीं बल्कि यहां की समृद्ध संस्कृति और विरासत ही हो सकती है। श्री शाह ने यह भी कहा कि आदिवासी जनजातियों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध मोदी सरकार बस्तर की नृत्य व कला तथा आदिवासी संस्कृति को वैश्विक सम्मान दिला रही है।  प्रधानमंत्री मोदी जी का यह स्पष्ट मानना है कि केवल किताबों में लिखा ही इतिहास नहीं होता, इतिहास वह होता है जो जनमानस की स्मृतियों में जीवित रहे।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातियों के सम्मान के लिए ही भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को पूरे देश में जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाने का काम किया। भगवान बिरसा मुंडा के 150वीं जयंती वर्ष को देशभर में जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाया गया। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने जनजातीय शिल्प, संस्कृति, व्यंजन और वन उपजों के वाणिज्यिक उपयोग को बढ़ावा दिया और 5 लाख वन उत्पाद, पारंपरिक शिल्प की ब्रांडिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था की।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि नारायणपुर के पंडित राम मंडावी, हेमचंद मांझी, कांकेर के अजय कुमार मंडावी, दंतेवाड़ा के भूधरी दाती, को कला, स्वास्थ्य, शिक्षा के क्षेत्र में पद्म पुरस्कार देकर समग्र देश में सम्मानित करने का काम किया है। साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 700 से अधिक जनजातियों को सम्मानित करने का एक बृहद कार्यक्रम बनाया है। प्रधानमंत्री जी ने 200 करोड़ रुपये से ट्राइबल म्यूजियम शुरू करवाया, जिसमें आजादी की लड़ाई भाग लेने वाले सभी जनजातियो के नेताओं की स्मृति को संजोने का काम किया है।

गृह मंत्री ने बस्तर पंडुम के उद्घाटन समारोह में आने के लिए राष्ट्रपति जी का धन्यवाद किया। श्री शाह ने बताया कि उन्होंने सभी 12 विधाओं में पहले तीन स्थानों पर आने वाले प्रतिभागियों को राष्ट्रपति भवन में भोजन पर बुलाने का अनुरोध किया था, जिसे राष्ट्रपति जी ने स्वीकार कर लिया है। श्री शाह ने कहा कि ये प्रतिभागी देश के राष्ट्रपति भवन में अपनी संस्कृति और कला का प्रदर्शन करेंगे, यह बहुत बड़ा सम्मान का विषय है।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई का मूल आधार आदिवासी किसानों, निर्दोष बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि नक्सली जब IEDs लगाते हैं, क्या उनको मालूम नहीं है कि जनजातीय किसानों का उस पर पैर पड़ेगा और वे हमेशा के लिए दिव्यांग हो जाएंगे ? क्या उनको मालूम नहीं है, कोई निर्दोष बच्ची इससे उजड़ जाएगी ? नक्सली कहाँ से इतनी निर्दयता लेकर आते है? केन्द्रीय गृह मंत्री ने बचे हुए नक्सलियों से हथियार डालने की अपील करते हुए कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वालों की सभी प्रकार से चिंता करेगी और सम्मान के साथ उनका पुनर्वासन किया जाएगा। श्री शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बनाया गया पुनर्वासन पैकेज बहुत  आकर्षक है।

श्री अमित शाह ने कहा कि वे सभी नक्सलियों से अपील करना चाहते हैं कि वे बच्चियों को एक बार पुनर्वासन के लिए भेज दे क्योंकि बच्चियों का पूरा जीवन अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर जिन लोगों ने सरेंडर किया है उन्हे कोई आंच नहीं आएगी। गृह मंत्री ने कहा कि जो लोग गांव में गोली चलाएंगे, खेतों और सड़क पर IEDs लगाएंगे, स्कूल और अस्पताल जलाएंगे, मोबाइल टावर बंद कर देंगे उन्हे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा हथियार का जवाब हथियार से दिया जाएगा। श्री शाह ने यह भी कहा कि माओवाद ने किसी का भला नहीं किया।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज हमारा बस्तर पूरे देश के सामने एक बेहतरीन ब्रांड के रूप में उभर कर चमक रहा है। कई ऐसे स्कूल हैं जो 40 साल से बंद थे, छत्तीसगढ़ शासन ने उन्हे फिर से खोल दिया है। श्री शाह ने कहा कि वे आदिवासी भाइयों-बहनों से पूछना चाहते हैं कि स्कूल बंद कर नक्सलियों ने किसका भला किया? हमारी नई पीढ़ी अक्षर ज्ञान से वंचित रह गई। श्री शाह ने कहा कि अगले 5 वर्षों में सभी आदिवासी क्षेत्रों में बस्तर सबसे विकसित बनेगा, नई पर्यटन गतिविधियाँ बस्तर को रोजगार से समृद्ध करेंगी। सभी बंद पड़े प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अस्पताल और स्कूल शुरू किए जाएंगे, साथ ही हायर सेकेंडरी स्कूल और कॉलेजों भी बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब हर गांव में पोस्ट ऑफिस खुल रहे हैं, मोबाइल टावर लग रहे हैं और गांव को जोड़ने वाली सड़कें भी बहुत अच्छी तरीके से बन रही हैं। गृह मंत्री ने कहा कि कई गांव ऐसे हैं जहां चार दशक के बाद हमारा राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया गया।

श्री अमित शाह ने कहां कि हर गांव में कनेक्टिविटी होगी, हर 5 किलोमीटर में पोस्ट ऑफिस या बैंक की ब्रांच खोलेंगे। हर आदिवासी का धान ₹3100 की दर से खरीदा जाएगा और आदिवासियों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो धान मुफ्त दिया जाएगा। इसके अलावा गैस का सिलेंडर, हर घर में नल दिया जाएगा और नल से जल आएगा। चुने हुए प्रतिनिधि ही पंचायत, तहसील पंचायत और जिला पंचायत का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होते ही एडवेंचर टूरिज्म, होम स्टे, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी कई नई टूरिज्म की विधाएं विकसित होने लगेंगी और देखते-देखते हम बस्तर को बहुत आगे बढ़ाएंगे। श्री शाह ने कहा कि बस्तर में 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र और ऑटो गिग क्षेत्र बस रहा है जिससे आदिवासी युवा भाइयों बहनों को रोजगार मिलेगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 3500 करोड़ रुपये से रावघाट जगदलपुर रेल परियोजना का काम शुरू हो गया है। नदी जोड़ो परियोजना को भी हम आगे बढ़ा रहे हैं और 90,000 से अधिक युवाओं को विभिन्न व्यवसायों का परीक्षण देने का काम भी आगे बढ़ रहा है। 36 करोड़ रुपये की लागत से इंद्रावती नदी पर एक नई सिंचाई योजना भी लाई जाएगी जिससे120 मेगावाट बिजली भी मिलेगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज बस्तर में कर्फ्यू जैसा कोई वातावरण नहीं हैं और गाँवों में रात को सांस्कृतिक नृत्यों की झलक दिखाई देती है, हमारे बस्तर के लिए यह बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ है। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक का सफल आयोजन हो चुका है और आज हम बस्तर पंडुम को बढ़ाने की सोच रहे हैं। गृह मंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ मजबूत निर्णायक लड़ाई में भाग लेने वाले सभी जवानों को बस्तर के आदिवासियों की ओर से धन्यवाद दिया और इस लड़ाई में बलिदान देने वाले बहादुर सुरक्षाकर्मियों के परिजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि तय समय सीमा में ही बस्तर नक्सल मुक्त हो जाएगा, इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए।
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स्कूली बच्चों की प्रस्तुति से प्रभावित हुए केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह , ताली बजाकर बढ़ाया उत्साह

 संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 2026 के समापन समारोह में स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और ताली बजाकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री के स्वागत में जगदलपुर के हजारों स्कूली बच्चों ने “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत पर मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। बच्चों की भावपूर्ण और अनुशासित प्रस्तुति देखकर श्री अमित शाह भी भावविभोर हो उठे और उन्होंने बच्चों को ताली बजाकर प्रोत्साहित किया।


कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा मलखंभ प्रदर्शन भी किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा। केंद्रीय गृहमंत्री श्री शाह ने बच्चों की कला, अनुशासन एवं आत्मविश्वास की प्रशंसा करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित अन्य अतिथियों ने भी बच्चों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।


उल्लेखनीय है कि “ऐसा जादू है मेरे बस्तर में” गीत को हिंदी एवं हल्बी बोली में रचा गया है। इसमें बस्तर की बादल अकादमी के कलाकारों ने अपनी आवाज और संगीत का योगदान दिया है। दायरा बैंड द्वारा इस गीत को आधुनिक संगीत के साथ नया स्वरूप प्रदान किया गया है, जिससे यह गीत युवाओं और बच्चों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हो रहा है।




 

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बस्तर पंडुम समापन समारोह में 9 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि

बस्तर की जनजातीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु समर्पित तीन दिवसीय बस्तर पण्डुम का समापन समारोह 9 फरवरी को एक ऐतिहासिक और भव्य आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह विशेष तौर पर शामिल होंगे। समारोह की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय करेंगे। 


‘प्रकृति और परंपरा का उत्सव‘ के ध्येय वाक्य के साथ मनाया जा रहा यह आयोजन बस्तर की माटी की खुशबू और यहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को विश्व पटल पर प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम है। इस गरिमामयी समापन समारोह का आयोजन 9 फरवरी को पूर्वान्ह 11 बजे से लालबाग मैदान जगदलपुर में  निर्धारित है।

इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू और छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री द्वय श्री अरुण साव एवं श्री विजय शर्मा भी कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इस अवसर पर संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, कौशल विकास मंत्री श्री गुरू खुशवंत साहेब, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े शामिल होंगे।

बस्तर पण्डुम में सांसद द्वय श्री महेश कश्यप और श्री भोजराज नाग, विधायक श्री किरण सिंहदेव, सुश्री लता उसेंडी, श्री विनायक गोयल, श्री नीलकंठ टेकाम, श्री विक्रम उसेंडी, श्री आशाराम नेताम, श्री चैतराम अटामी, श्रीमती सावित्री मनोज मंडावी, श्री लखेश्वर बघेल, श्री विक्रम मंडावी, महापौर श्री संजय पांडे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
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मुख्यधारा की ओर लौटता विश्वास: दक्षिण बस्तर में 51 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण, शांति और विकास की दिशा में बड़ा कदम - मुख्यमंत्री श्री साय

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। जिला बीजापुर में 30 और सुकमा में 21 माओवादी कैडरों ने राज्य सरकार की पुनर्वास आधारित पहल “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” के अंतर्गत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल 1.61 करोड़ का इनाम घोषित था।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि हथियारों का परित्याग कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था व्यक्त करना यह स्पष्ट संकेत देता है कि सुरक्षा, सुशासन और समावेशी प्रगति ही किसी भी क्षेत्र के दीर्घकालिक भविष्य की सुदृढ़ नींव होते हैं। यह घटनाक्रम बस्तर में शांति स्थापना के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों का सकारात्मक और ठोस परिणाम है। बीते दो वर्षों में बस्तर के दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इस विकासात्मक पहल ने भटके युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक जीवन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की सुशासन आधारित नीति का केंद्र बिंदु सुरक्षा के साथ-साथ विश्वास, पुनर्वास और भविष्य की संभावनाओं का निर्माण है। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विज़न, माननीय अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा राज्य सरकार के सतत प्रयासों से बस्तर आज भय और हिंसा से निकलकर विश्वास, विकास और नए अवसरों की ओर तेज़ी से अग्रसर हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में बस्तर एक विकसित, शांत और समृद्ध क्षेत्र के रूप में देश के सामने नई पहचान स्थापित करेगा।
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भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का 'बस्तर पंडुम 2026’ महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर सम्बोधन(HINDI)

बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े ‘बस्तर पंडुम’ महोत्सव में आप सबके बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। मां दंतेश्वरी के इस पुण्य क्षेत्र में आने का अवसर मिलना मैं अपना सौभाग्य मानती हूं। मैं जब भी छत्तीसगढ़ आती हूं, मुझे लगता है कि मैं अपने घर आई हूं। यहां के लोगों से जो अपनत्व और स्नेह मुझे मिलता है, वह मेरे लिए अनमोल है। यह ऐसे कई नायकों की धरती है, जिन्होंने भारत भूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। मैं ऐसे सभी सपूतों की स्मृति में सादर नमन करती हूं।


देवियो और सज्जनो,

बस्तर की सुंदरता को देखकर लगता है कि मां दंतेश्वरी ने स्वयं इसे अपने हाथों से सजाया है। मौसम बदलने के साथ प्रकृति मानो करवट लेती है और यहां के लोग उत्सव मनाते हैं। जब इस ऊर्वर धरती में किसान बीज छिड़कते हैं, तब यह पंडुम होता है। जब आम का मौसम आता है, तब यह पंडुम होता है। बस्तर के लोग जीवन को उत्सव के रूप में जीते हैं। जीवन जीने का यह तरीका सभी देशवासी बस्तर के निवासियों से सीख सकते हैं।

पिछले वर्ष आयोजित बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर की जनजातीय संस्कृति की झलक देश भर के लोगों ने देखी थी। मुझे बताया गया है इस वर्ष के पंडुम में पचास हजार से अधिक लोगों द्वारा जनजातीय संस्कृति तथा जीवन-शैली से जुड़े अनेक प्रदर्शन किए जाएंगे। बस्तर की जनजातीय संस्कृति से देशवासियों को अवगत कराने के इस महत्वपूर्ण प्रयास के लिए मैं छत्तीसगढ़ सरकार की सराहना करती हूं।

बस्तर क्षेत्र में एक आकर्षक पर्यटन स्थल बनने की प्रचुर क्षमता है। यहाँ के उत्साही लोग और उनकी प्राचीन संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपात और गुफाएँ पर्यटकों को आकर्षित करने में सक्षम हैं। बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से पर्यटक यहां आना जरूर पसंद करेंगे। आजकल दुनिया भर में Home stay एक नये प्रकार के पर्यटन के रूप में लोकप्रिय हो रहा है। मुझे बताया गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार इस दिशा में अनुकूल कदम उठा रही है।

देवियो और सज्जनो,

बस्तर की सुंदरता और यहां की संस्कृति हमेशा से लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है लेकिन दुर्भाग्य से चार दशकों तक यह क्षेत्र माओवाद से ग्रस्त रहा। इस कारण यहाँ के निवासियों ने अनेक कष्ट झेले। सबसे ज्यादा नुकसान यहां के युवाओं, आदिवासियों और दलित भाई-बहनों को हुआ। भारत सरकार की माओवादी आतंक पर निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त असुरक्षा, भय और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवाद से जुड़े लोग हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं जिससे नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है।

मुझे बताया गया है कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में पहले माओवाद से प्रभावित रहे लोगों ने आत्मसमर्पण किया है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि जो लोग हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे हैं, वो सामान्य जीवन जी सकें। उनके लिए अनेक विकास और कल्याणकारी योजनाएँ चलाई जा रही हैं। राज्य सरकार की ‘नियद नेल्लानार योजना’ ग्रामीणों के सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

सरकार के प्रयास और इस क्षेत्र के लोगों के सहयोग के बल पर आज बस्तर में विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। गांव-गांव में बिजली, सड़क, पानी की सुविधा उपलब्ध हो रही है। वर्षों से बंद विद्यालय फिर से खुल रहे हैं और बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। यह बहुत ही सुखद तस्वीर है जो सभी देशवासियों में खुशी का संचार कर रहा है।

देवियो और सज्जनो,

मैं हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे सभी लोगों की सराहना करती हूं। मेरा उनसे अनुरोध है कि देश के संविधान और लोकतन्त्र में वे पूरी आस्था रखें। बस आपको इस व्यवस्था में विश्वास रखते हुए मेहनत व लगन से आगे बढ़ना है। यह लोकतन्त्र की ताकत ही है कि ओड़िशा के एक छोटे से गांव की यह बेटी, भारत की राष्ट्रपति के रूप में आपको संबोधित कर रही है।

गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों का कल्याण करना सरकार की विशेष प्राथमिकता है। पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सबसे पिछड़ी जनजातियों के गांवों को विकास से जोड़ा जा रहा है।

शिक्षा, व्यक्तिगत और सामुदायिक विकास की आधारशिला है। मैं जब भी जनजातीय भाई-बहनों से मिलती हूं, उनको शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करने का प्रयत्न करती हूं। जनजातीय क्षेत्र के बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण कर सकें इसके लिए उन क्षेत्रों में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय खोले गए हैं। मेरा सभी माता-पिता और अभिभावकों से अनुरोध है कि वे अपने बच्चों को पढ़ाएं। इसी से छत्तीसगढ़ और भारत का भविष्य उज्ज्वल होगा।

इस क्षेत्र के लोगों ने भाई-चारे और समाज-सेवा के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार विजेताओं में इस क्षेत्र के डॉक्टर बुधरी ताती तथा डॉक्टर रामचन्द्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले शामिल हैं। ये पुरस्कार महिला सशक्तीकरण, आदिवासी उत्थान, समाज सेवा और अत्यंत सुदूर आदिवासी इलाकों में मुफ्त चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए दिये जाएंगे। निस्वार्थ सेवा करने वाले ऐसे लोगों के बल पर ही हमारा समाज एक समावेशी और संवेदनशील समाज बन पाएगा।

देवियो और सज्जनो,

छत्तीसगढ़ की प्राचीन परंपराओं की गहरी जड़ें आज भी जीवंत बनी हुई हैं। मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा जनजातीय संस्कृति और भाईचारे का अनूठा उदाहरण है। हमें अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेते हुए स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करना है। विकास का वही मॉडल सफल है, जो विरासत को संजोते हुए आगे बढ़े। मैं राज्य के सभी निवासियों, विशेषकर युवाओं से अनुरोध करती हूं कि वे अपनी विरासत का संरक्षण करते हुए आधुनिक विकास को अपनाएं।

बस्तर के इस क्षेत्र में अकूत प्राकृतिक सम्पदा है। यहाँ के लोग लगनशील तथा मेहनती हैं। मैं इस क्षेत्र के सभी लोगों, विशेषकर युवाओं, से अपील करती हूं कि वो राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा चलाये जा रहे कल्याणकारी और विकास योजनाओं का लाभ उठाएँ। आपकी प्रगति और खुशहाली राज्य की प्रगति और विकसित भारत के लिए महत्वपूर्ण है। मुझे विश्वास है कि आप सब ‘जय जय छत्तीसगढ़ महतारी’ की भावना के साथ आगे बढ़ते रहेंगे। इससे भारत माता का गौरव बढ़ेगा। मेरी प्रार्थना है कि मां दंतेश्वरी की असीम कृपा सभी देशवासियों पर बनी रहे।
 
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तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्वामी विवेकानंद विमानतल पर किया आत्मीय स्वागत

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रायपुर पहुंचे।  स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने आत्मीय स्वागत किया।


इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद श्री संतोष पांडेय, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, विधायक श्री मोतीलाल साहू, श्री राजेश मूणत, मुख्य सचिव श्री विकास शील, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव (गृह) श्री मनोज पिंगुआ तथा रायपुर  पुलिस कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला उपस्थित थे।
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रायपुर में उन्नत हृदय उपचार की बड़ी उपलब्धि: 68 वर्षीय मरीज पर सफल वाल्व-इन-वाल्व TAVI प्रक्रिया

 रायपुर में उन्नत हृदय उपचार की बड़ी उपलब्धि: 68 वर्षीय मरीज पर सफल वाल्व-इन-वाल्व TAVI प्रक्रिया

 

उन्नत हृदय-चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, लालपुर, रायपुर के कार्डियोलॉजी विभाग ने 68 वर्षीय मरीज पर जटिल वाल्व-इन-वाल्व ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन (TAVI) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

 

मरीज को लगभग 12 वर्ष पूर्व लगाया गया बायोप्रोस्थेटिक एओर्टिक वाल्व समय के साथ क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके कारण उन्हें सांस फूलने और शारीरिक क्षमता में लगातार कमी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। मरीज की आयु और स्थिति को देखते हुए दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी को उच्च जोखिम वाला मानते हुए डॉक्टरों ने न्यूनतम इनवेसिव, कैथेटर-आधारित उपचार पद्धति अपनाने का निर्णय लिया।

 

यह जटिल प्रक्रिया कार्डियोलॉजी विभाग की अनुभवी टीम द्वारा की गई, जिसका नेतृत्व डॉ. सुमंता शेखर पाढ़ी (क्लिनिकल लीड एवं सीनियर कंसल्टेंट) ने किया। टीम में डॉ. सुनील गौनियाल (सीनियर कंसल्टेंट) और डॉ. स्नेहिल गोस्वामी (कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजी) भी शामिल रहे। संपूर्ण प्रक्रिया डॉ. एस. के. जेना (प्रोफेसर, कार्डियोलॉजी, KIMS) के पर्यवेक्षण में संपन्न हुई।

 

प्रक्रिया की योजना अत्याधुनिक CT-आधारित इमेजिंग तकनीक के माध्यम से बनाई गई। ट्रांसकैथेटर वाल्व को फेमोरल आर्टरी के रास्ते क्षतिग्रस्त सर्जिकल वाल्व के भीतर सटीक रूप से स्थापित किया गया, जिससे मरीज को दोबारा छाती की सर्जरी से बचाया जा सका।

 

चिकित्सकों के अनुसार, 26 जनवरी 2026 को की गई इस प्रक्रिया की सफलता में सटीक प्री-प्रोसीजरल इमेजिंग और सही वाल्व साइजिंग की अहम भूमिका रही। प्रक्रिया के बाद वाल्व का कार्य उत्कृष्ट पाया गया, दबाव अंतर न्यूनतम रहा और किसी भी प्रकार का पैरावाल्वुलर लीक नहीं देखा गया। मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही और स्ट्रोक, अत्यधिक रक्तस्राव, पेसमेकर की आवश्यकता या वैस्कुलर इंजरी जैसी कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई।

 

इस प्रक्रिया में एनेस्थीसिया टीम — डॉ. राकेश राजकुमार चंद और डॉ. स्नेहा (सीनियर कंसल्टेंट, एनेस्थीसियोलॉजी) — का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

 

इस अवसर पर विशेषज्ञों ने बताया कि वाल्व-इन-वाल्व TAVI बुजुर्ग मरीजों के लिए एक परिवर्तनकारी विकल्प है, जिनके सर्जिकल वाल्व विफल हो चुके हैं। विस्तृत योजना और सटीक निष्पादन से बेहतर परिणाम, तेज़ रिकवरी और जीवन-गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव हो पा रहा है।

 

उन्नत इमेजिंग टूल्स की सहायता से प्रक्रिया के दौरान वाल्व की स्थिति और रक्त प्रवाह का रियल-टाइम मूल्यांकन किया गया, जिससे तत्काल सफलता की पुष्टि हो सकी। प्रक्रिया के बाद मरीज के लक्षणों में तेजी से सुधार देखा गया।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सफल प्रक्रियाएं भारत में कैथेटर-आधारित वाल्व थैरेपी की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाती हैं, खासकर उन जटिल और उच्च-जोखिम मामलों में जहां पहले उपचार के विकल्प सीमित थे।

 

अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर अजीत बेलमकोण्डा ने इस जटिल प्रक्रिया की सफलता पर कार्डियोलॉजी विभाग को बधाई देते हुए टीम की सराहना की।

 

बढ़ती विशेषज्ञता, मजबूत हार्ट-टीम सहयोग और नवीन वाल्व तकनीकों के साथ ट्रांसकैथेटर वाल्व थैरेपी अब संरचनात्मक हृदय रोगों के उपचार में नई उम्मीद बनकर उभर रही है।


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आदिवासी संस्कृति का महाकुंभ बस्तर पण्डुम 2026

 बस्तर पण्डुम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का एक प्रमुख सांस्कृतिक, सामुदायिक और प्राकृतिक उत्सव है, जो जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और जीवन शैली को संरक्षित व प्रदर्शित करता है।  जिसमें पारंपरिक नृत्य, संगीत (मांदर-बांसुरी), वेशभूषा, लोक शिल्प (काष्ठ/बांस/धातु) और पारंपरिक खान-पान का प्रदर्शन किया जाएगा। यह उत्सव बस्तर की आत्म-अस्मिता का प्रतीक है, जो स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ-साथ युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ता है। विभिन्न अंचलों से आए प्रतिभागी बस्तर की 12 पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन करेंगें।


इस वर्ष 54 हजार से अधिक प्रतिभागियों का पंजीयन

             इस वर्ष के आयोजन ने लोकप्रियता के पुराने सभी पैमाने ध्वस्त कर दिए हैं और यह केवल एक प्रतियोगिता न रहकर अब लोक संस्कृति के एक विशाल उत्सव का रूप ले चुका है। आँकड़ों पर नजर डालें तो यह आयोजन इस बार एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। वर्ष 2025 में जहाँ विकासखंड स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, वहीं इस वर्ष यह आँकड़ा तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 54,745 तक पहुँच गया है।  बस्तर के लोग अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक कलाओं को सहेजने के लिए कितने जागरूक और उत्साहित हैं। विशेष रूप से दन्तेवाड़ा जिले ने 24,267 पंजीयन के साथ पूरे संभाग में सर्वाधिक भागीदारी का रिकॉर्ड बनाया है, जिसके बाद कांकेर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिलों ने भी हजारों की संख्या में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है।

समृद्ध जनजातीय संस्कृति विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने तैयार 

            बस्तर की माटी की खुशबू और यहाँ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार है। संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 07 से 09 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाी है, जिसके लिए अंचल के निवासियों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। इस भारी उत्साह के बीच, अब सभी की निगाहें 07 से 09 फरवरी के बीच होने वाली संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं। जिला स्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा से जीत कर आए 84 दल और उनके 705 चयनित कलाकार इस दौरान अपनी कला की जादू बिखरेंगे। इन तीन दिनों में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा जनजातीय नृत्य की थाप, पारंपरिक गीतों की गूंज और नाटकों का मंचन । 

 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे

          प्रतियोगिता में कुल 12 अलग-अलग विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें सर्वाधिक 192 कलाकार जनजातीय नृत्य में और 134 कलाकार जनजातीय नाटक में अपना हुनर दिखाएंगे। यह मंच केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह बस्तर के ज्ञान, कला और स्वाद का एक अनुपम संगम होगा। जहाँ एक ओर 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे, वहीं दूसरी ओर 56 प्रतिभागी लजीज जनजातीय व्यंजनों की खुशबू बिखेरेंगेे। इसके अतिरिक्त बस्तर की दुर्लभ वन औषधियों, चित्रकला, शिल्प कला, आभूषण और आंचलिक साहित्य का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से रूबरू कराएगा।

संभाग स्तर पर 340 महिलाएं अपनी कौशल का करेंगी प्रदर्शन 

         इस आयोजन की एक और सबसे खूबसूरत तस्वीर मातृशक्ति की बढ़ती भागीदारी है। संभाग स्तर पर पहुँचने वाली 705 प्रतिभागियों में महिला और पुरुष कलाकारों की संख्या में गजब का संतुलन देखने को मिल रहा है, जिसमें 340 महिलाएं और 365 पुरुष शामिल हैं। यह भागीदारी बताती है कि बस्तर की संस्कृति को आगे ले जाने और उसे संरक्षित करने में यहाँ की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कुल मिलाकर बस्तर पण्डुम 2026 अपनी भव्यता और जन-भागीदारी के साथ एक अविस्मरणीय आयोजन की ओर अग्रसर है।
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