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बजट संकल्प 2026-27 : निवेश, उद्योग और रोजगार आधारित आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव— वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन

 वाणिज्य उद्योग एवं श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रस्तुत राज्य के वर्ष 2026-27 के बजट संकल्प 2026-27 को छत्तीसगढ़ को विकसित एवं आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक, संतुलित एवं दूरदर्शी बजट बताया है। उन्होंने इस जनोन्मुखी एवं विकासपरक बजट के लिए वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया है।

श्री देवांगन ने कहा कि 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपये के अनुमानित प्रावधान वाला यह बजट राज्य की आर्थिक संरचना को सुदृढ़ करते हुए निवेश, औद्योगिक विस्तार और व्यापक रोजगार सृजन की स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत करता है। प्रदेश की लगभग 60 प्रतिशत कार्यशील जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए उद्योग एवं सेवा क्षेत्र के विस्तार पर विशेष बल दिया गया है, जिससे प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 रोजगार केंद्रित है। विगत वर्ष लगभग 1,000 उद्योगों को उत्पादन प्रमाण पत्र जारी किए गए, जिनके माध्यम से 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ तथा 15 हजार से अधिक रोजगार के अवसर निर्मित हुए। यह राज्य में निवेश अनुकूल वातावरण एवं औद्योगिक विश्वास का सशक्त संकेत है।
उद्योग मंत्री ने बताया कि प्रदेश में 23 नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना हेतु 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिनमें मटीया (कसडोल), बिरकोनी (महासमुंद), छाती (धमतरी), बनगांव-बी (पत्थलगांव) सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं। नवीन औद्योगिक क्षेत्रों के लिए लैंड बैंक तैयार करने हेतु 200 करोड़ रुपये तथा उद्योगों को अनुदान एवं प्रतिपूर्ति के लिए 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पूर्व की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि धमतरी जिले के कचना में 17 एकड़ क्षेत्र में प्रदेश की पहली चार मंजिला प्लग-एंड-प्ले फैक्ट्री विकसित की जा रही है, जो सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। ग्राम तूता, नवा रायपुर अटल नगर में कन्वेंशन सह एक्जिबिशन सेंटर के निर्माण हेतु 25 करोड़ रुपये, भिलाई में व्यावसायिक परिसर हेतु 10 करोड़ रुपये, पटेवा (राजनांदगांव) में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 हेतु 10 करोड़ रुपये तथा नवा रायपुर अटल नगर एवं राजनांदगांव में इंडस्ट्रियल फैसिलिटेशन कॉम्प्लेक्स हेतु 20 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रदेश के औद्योगिक अधोसंरचना विकास को नई गति देगा।
श्री देवांगन ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा रायपुर, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, अहमदाबाद तथा जापान के ओसाका में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जो छत्तीसगढ़ की औद्योगिक संभावनाओं और वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि Ease of Doing Business के अंतर्गत सिंगल विंडो सिस्टम एवं छत्तीसगढ़ जन विश्वास अधिनियम जैसे सुधारात्मक कदमों के माध्यम से शासन उद्योगों के लिए सुगम, पारदर्शी और प्रोत्साहनकारी वातावरण उपलब्ध करा रहा है। वर्ष 2024-25 में उद्योग विभाग का बजट 648 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 1,750 करोड़ रुपये हो गया है। यह वृद्धि राज्य सरकार की उद्योग, निवेश और रोजगार सृजन के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
श्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि “संकल्प 2026-27” केवल बजट नहीं, बल्कि समावेशी विकास, औद्योगिक प्रगति और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण का ठोस संकल्प है, जो प्रदेश की विकास यात्रा को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
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उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की तत्परता से दो दिव्यांगों को मिली स्कूटी

 उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने विधायक कार्यालय कवर्धा में दो दिव्यांग लाभार्थियों को स्कूटी का वितरण किया। इस अवसर पर उन्होंने ग्राम अमरौडी निवासी श्री धरम सिंह पटेल और ग्राम खिरसाली निवासी श्री उलख राम पटेल को स्कूटी की चाबी सौंपकर उन्हें शुभकामनाएँ दीं। उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके दैनिक जीवन को सुगम करना है। स्कूटी मिलने से लाभार्थियों को आवागमन में सुविधा होगी तथा वे अपने कार्यों को स्वतंत्र रूप से कर सकेंगे।

      इस अवसर पर श्री धरम सिंह पटेल ने बताया कि वे विद्युत विभाग में अस्थाई रूप से ऑपरेटर का कार्य करते हैं। पहले उन्हें कार्य में जाने में बहुत असुविधा हुआ करती थी आवश्यक गतिविधियों के लिए आवागमन में किसी पर निर्भर रहना पड़ता था, अब स्कूटी मिल जाने से वे अपने अनुसार कार्य पर जा आ सकेंगे। उलख राम पटेल ने बताया कि वे कपड़े सिलने का कार्य करते हैं ऐसे में स्कूटी मिल जाने से उन्हें अपने कार्य में बहुत आसानी होगी। दोनों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा एवं शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उनके आवेदन पर त्वरित कार्रवाई कर आज उन्हें स्कूटी उपलब्ध कराई गई जिससे वे खुश हैं। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने दोनों को वाहन चलाने का भी अभ्यास करवाया और दोनों का स्वागत कर उत्साहवर्धन किया।
      उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण, सामाजिक समावेशन और आत्मनिर्भरता के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का लक्ष्य समाज के प्रत्येक वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि सभी नागरिक सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें। उल्लेखनीय है कि अब तक उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा की पहल से 100 से अधिक दिव्यांग लोगों को सहायक उपकरण लगे स्कूटी प्रदान की गई है।
        इस अवसर पर राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण के सदस्य श्री भगतराम पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष श्री चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संतोष पटेल, श्री नरेन्द्र मानिकपुरी, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्री मनहरण कौशिक, श्री भुखन साहू, श्री रामबिलास चंद्रवंशी, श्री विजय पाटिल श्री रवि राजपुत, श्रीमती सतविंदर पाहुजा, श्रीमती विजय लक्ष्मी तिवारी, श्री लाला राम साहू सहित जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
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जन्मदिन पर सेवा का संदेश: मुख्यमंत्री श्री साय ने जन्मदिन पर रक्तदान शिविर का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने 62वें जन्मदिन के अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास परिसर में आयोजित रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की तथा रक्तदाताओं को सम्मानित कर उन्हें प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री के 62वें जन्मदिन के अवसर पर अल्फा ग्लोब फाउंडेशन, रायपुर तथा शिवनाथ ब्लड सेंटर द्वारा 62 लोगों के रक्तदान की विशेष व्यवस्था की गई थी।


मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि रक्तदान महादान है और यह मानवता की सच्ची सेवा है। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं, प्रसव एवं गंभीर बीमारियों के दौरान जब मरीजों को रक्त की आवश्यकता पड़ती है, ऐसे में रक्तदान मरीजों के जीवन में नई आशा का संचार करता है। उन्होंने कहा कि शिविर में रक्तदाताओं को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए हैं, जिससे आवश्यकता पड़ने पर वे या उनके परिजन निःशुल्क रक्त प्राप्त कर सकेंगे। 

उल्लेखनीय है कि संस्था द्वारा एक वर्ष में लगभग 11 हजार यूनिट रक्त संग्रह का संकल्प लिया गया है तथा जरूरतमंदों को निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न ब्लड बैंकों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। इस अवसर पर सुरक्षित यातायात जागरूकता अभियान का भी आयोजन किया गया। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं से वर्ष में कम से कम एक बार रक्तदान करने तथा सड़क यातायात नियमों का हर समय पालन करते हुए जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने सभी रक्तदाताओं, आयोजकों, चिकित्सक दल एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए शिविर की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, सीजीएमएससी के चेयरमैन श्री दीपक म्हस्के, छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा सहित, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस सहित वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधिगण तथा अल्फा ग्लोब फाउंडेशन, रायपुर की संचालक डॉ. पूनम अग्रवाल, संस्थान के अन्य प्रतिनिधि और रक्तदाता उपस्थित थे।
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सकारात्मक सोच ही सफलता की कुंजी, युवा बदलेंगे भारत का भविष्य” – राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा

धमतरी स्थित बाबू छोटे लाल श्रीवास्तव स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आज वार्षिक स्नेह सम्मेलन उत्साह और उमंग के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

     कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का जो संकल्प लिया गया है, उसमें शिक्षा और स्वास्थ्य की निर्णायक भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा विकास की आधारशिला है और आज का युवा नई तकनीकों का कुशल उपयोग कर स्वयं को ऊँचाइयों तक पहुंचा रहा है। एक सकारात्मक विचार जीवन की दिशा बदल सकता है। विचार ही सामान्य व्यक्ति को असाधारण बनाते हैं।उन्होंने युवाओं से नकारात्मकता से दूर रहकर सकारात्मक सोच अपनाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार घोषणाओं से अधिक कार्यों में विश्वास रखती है।
       इस अवसर पर मंत्री श्री वर्मा ने विद्यार्थियों के आग्रह पर छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध लोकगायक लक्ष्मण मस्तुरिया का लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह भी प्रदान किए।
       महापौर रामू रोहरा ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर विकास के नए आयाम गढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि धमतरी विधानसभा क्षेत्र में बीते दो वर्षों में लगभग 250 करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 500 सीटर नालंदा परिसर, विधि विभाग भवन, हाईटेक बस स्टैंड, प्रमुख मार्गों का उन्नयन, ऑडिटोरियम, इंडोर स्टेडियम, विद्युत स्टेशन तथा सिहावा चौक से कोलियरी और रत्नाबांधा चौक से मुजगहन तक सड़क चौड़ीकरण जैसे कार्य शामिल हैं।
        प्राचार्य श्री विनोद पाठक ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं खेल उपलब्धियों की जानकारी दी। इस अवसर पर पूर्व विधायक रंजना साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष अंगिरा ध्रुव, नगर निगम सभापति कौशल्या देवांगन सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रतिबद्ध - मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल की संयुक्त अध्यक्षता में आज नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेश में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री श्री पाटिल इस बैठक में वर्चुअली शामिल हुए और बैठक को संबोधित किया। इस दौरान बिलासपुर, दुर्ग और सूरजपुर जिले के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में अभियान के अंतर्गत संचालित कार्यों और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल संकट 21वीं सदी की केवल गंभीर पर्यावरणीय ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और विकासात्मक चुनौती भी बन चुका है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को स्थायी और प्रभावी बनाने के लिए जनभागीदारी अनिवार्य है।उन्होंने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें पानी के उपयोग को प्रसाद के समान मानते हुए जल के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अभियान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ ने देशभर में द्वितीय स्थान प्राप्त किया तथा विभिन्न जिलों को भी अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार मिले। पहले चरण में सामुदायिक भागीदारी के मॉडल पर कार्य करते हुए बड़े पैमाने पर बोरवेल रिचार्ज, रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज शाफ्ट, सोक पिट और ओपनवेल रिचार्ज जैसी संरचनाओं का निर्माण किया गया। श्री साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भू-जल ब्लॉक चिन्हित हैं। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में इनमें से 5 ब्लॉकों में भू-जल निकासी में कमी और भू-जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है, जो जल संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणामों का संकेत है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अभियान के दूसरे चरण “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” के अंतर्गत तकनीक आधारित और अधिक परिणाममूलक रणनीति अपनाई जा रही है। राज्य सरकार ने 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री ने इसे जल सुरक्षा की दिशा में प्रदेश का ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर एक विशेष पहल के तहत 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले चार लाख से अधिक किसानों को अपने खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस कार्य में जिला प्रशासन के साथ-साथ औद्योगिक समूहों का सहयोग भी लिया जा रहा है। इन डबरियों से भू-जल स्तर में वृद्धि के साथ किसानों को सिंचाई एवं मछली पालन जैसी अतिरिक्त सुविधाएँ मिलेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे चरण में सभी जल संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायतों के वॉटर बजट तथा जल सुरक्षा योजनाओं के निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही गांवों के युवाओं को “जल मित्र” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि अभियान को गति मिल सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल और सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों पर विशेष फोकस रखते हुए सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में 40 प्रतिशत तथा क्रिटिकल ब्लॉकों में 65 प्रतिशत जल संरक्षण कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने, जल संरचनाओं की रक्षा करने और जल के प्रति जिम्मेदार सोच अपनाने का आह्वान भी किया।

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे कार्यों और नवाचारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गत वर्ष जल संरक्षण के प्रयासों में छत्तीसगढ़ देशभर में दूसरे स्थान पर रहा, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2024 को सूरत से ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ की शुरुआत की थी और ‘कर्मभूमि से मातृभूमि के लिए जल संचयन में सहयोग’ का आह्वान किया था। इस अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना है।

केंद्रीय मंत्री श्री पाटिल ने प्रदेश के समस्त कलेक्टरों से मनरेगा के तहत जल संचय कार्यों के लिए प्राप्त राशि का पूर्ण और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने राजनांदगांव प्रवास के दौरान एक महिला सरपंच द्वारा स्वयं के प्रयासों से जल संचयन के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों की प्रशंसा की। इसके साथ ही उन्होंने जल संचय में व्यापक जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो तथा जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव श्री कांताराव और छत्तीसगढ़ के समस्त कलेक्टर वर्चुअली उपस्थित थे।
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उप मुख्यमंत्री ने ग्राम बम्हनी में 29.20 लाख से निर्मित महतारी सदन का किया लोकार्पण

 ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और संगठित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने ग्राम बम्हनी में 29.20 लाख रुपये की लागत से निर्मित महतारी सदन का लोकार्पण किया। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भवन का शुभारंभ किया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, जिला पंचायत सदस्य डॉ वीरेन्द्र साहू, जिला लोधी समाज अध्यक्ष श्री संतोष कौशिक, श्री सुरेश सिंगौर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं, जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

    उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है और इसके लिए गांव स्तर तक ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। महतारी सदन बनने से क्लस्टर स्तर पर महिलाओं की बैठक, प्रशिक्षण, सामाजिक कार्यक्रम और विभिन्न गतिविधियों के लिए एक स्थायी एवं सुरक्षित स्थान उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि यह भवन ग्रामीण महिलाओं के लिए केवल बैठक स्थल नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सामूहिक विकास का केंद्र बनेगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक महतारी सदन में दुकानों का भी निर्माण किया गया है, जिससे भवन के संचालन और रखरखाव का खर्च स्वयं पूरा किया जा सकेगा। इससे महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर भी मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
     उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि कबीरधाम जिला को महतारी सदन योजना के अंतर्गत 19 महतारी सदनों की महत्वपूर्ण सौगात मिली है, जिनका निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इससे पहले जिले में 5 महतारी सदनों का लोकार्पण मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया जा चुका है। इन भवनों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर संसाधन, प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर और सामाजिक मंच उपलब्ध होंगे। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायत में अटल डिजिटल सुविधा केन्द्र का संचालन भी किया जाएगा। इसके माध्यम से महिलाओं को महतारी वंदन योजना की राशि, वृद्धा पेंशन तथा अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ गांव में ही आसानी से मिल सकेगा। 
       उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कवर्धा में विकास की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। रायपुर -बिलासपुर मार्ग को फोरलेन बनाने और कवर्धा प्रवेश मार्ग को बेहतर बनाने के लिए 54 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे आने वाले समय में आवागमन और भी सुगम होगा।
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खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ के विकास में निभाएं अहम भूमिका : मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित नव नियुक्त खनि निरीक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा की दृष्टि से देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक है और खनिज प्रशासन के प्रभावी संचालन में मैदानी अमले की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने नव चयनित खनि निरीक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि युवाओं पर ही देश और प्रदेश का भविष्य निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि खनिज विभाग में नई नियुक्तियों से विभागीय कार्यबल मजबूत होगा तथा खनिज अन्वेषण और खनन गतिविधियों को और गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवनियुक्त खनि निरीक्षक अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन करते हुए खनिज प्रशासन से जुड़े कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट, लाइमस्टोन, टिन, डायमंड, गोल्ड और लिथियम सहित विभिन्न खनिज संपदाओं से परिपूर्ण है। खनिज राज्य के राजस्व का प्रमुख स्रोत भी हैं और सरकार खनिज राजस्व में वृद्धि के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने नवनियुक्त अधिकारियों को खनिज राजस्व वृद्धि में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खनि निरीक्षक के रूप में आप सभी के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी है। पारदर्शिता, ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करते हुए राज्य के संसाधनों के संरक्षण और सुव्यवस्थित उपयोग में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा 15 अक्टूबर 2025 को 33 खनि निरीक्षकों की चयन सूची जारी की गई थी। खनिज साधन विभाग द्वारा 19 फरवरी 2026 को कुल 32 खनि निरीक्षकों की नियुक्ति आदेश जारी किए गए, जिनमें से 30 नव चयनित खनि निरीक्षकों को आज मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह, सचिव खनिज साधन विभाग श्री पी. दयानंद, संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म श्री रजत बंसल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने पत्रकारों से साझा की विभागीय उपलब्धियां

 ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने आज नया रायपुर स्थित छत्तीसगढ संवाद के ऑडिटोरियम में पत्रकारों के साथ ऊर्जा विभाग की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं पर विस्तार से अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है तथा आने वाले वर्षों के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।


             डॉ. यादव ने जानकारी दी कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी, एनटीपीसी तथा निजी उत्पादकों को मिलाकर प्रदेश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 30 हजार 671.7 मेगावाट है। इसमें 28 हजार 824 मेगावाट ताप विद्युत, 220 मेगावाट जल विद्युत तथा सोलर, बायोमास आदि स्रोतों से 2,047 मेगावाट क्षमता शामिल है। ताप विद्युत क्षेत्र में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी की 2,840 मेगावाट, एनटीपीसी व निजी स्वामित्व के बिजलीघरों की 20 हजार 299 मेगावाट तथा कैप्टिव पॉवर प्लांट्स की 5 हजार 266 मेगावाट क्षमता है।

              डॉ. यादव ने कहा कि भारत सरकार का फोकस ताप विद्युत पर निर्भरता कम कर कार्बन उत्सर्जन घटाने पर है। नेट जीरो कार्बन लक्ष्य के तहत वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे देश की 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकता नवीकरणीय स्रोतों से पूरी की जा सके। इस दिशा में जल विद्युत एवं पंप स्टोरेज परियोजनाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो ग्रिड संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगी।
राज्य शासन द्वारा पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए नीति 2023 लागू की गई है। इसके तहत छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी द्वारा 8,300 मेगावाट क्षमता के छह स्थलों का चिन्हांकन किया गया है, जिनमें से पांच के फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और डीपीआर निर्माणाधीन है। निजी क्षेत्र में भी लगभग 5,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं पर कार्य जारी है।

            ऊर्जा सचिव डॉ. यादव ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के तहत एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड एवं राज्य उत्पादन कंपनी के संयुक्त उपक्रम द्वारा लगभग 2 हजार मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें अटल बिहारी ताप विद्युत गृह के जलाशय में 6 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर, कोरबा पूर्व के बंद राखड़ बांध पर 32 मेगावाट सौर संयंत्र तथा 500 मेगावाट-ऑवर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की स्थापना प्रस्तावित है। ऊर्जा सचिव ने बताया कि प्रदेश को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा में 32 हजार 100 मेगावाट क्षमता की नई परियोजनाओं हेतु विभिन्न संस्थाओं के साथ एमओयू किए गए हैं। इन परियोजनाओं में 12 हजार 100 मेगावाट ताप विद्युत, 4 हजार 200 मेगावाट न्यूक्लियर, 2 हजार 500 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर तथा 13 हजार 300 मेगावाट पंप स्टोरेज क्षमता शामिल है। इन सभी परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिसमें कई प्रमुख संस्थाएं भागीदार हैं।

               डॉ. यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी द्वारा कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों एवं मड़वा में 800 मेगावाट की इकाई स्थापित करने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। पारेषण क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच उपकेन्द्रों की संख्या 132 से बढ़कर 137 हो गई है। ट्रांसफार्मरों की कुल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा 132 केवी लाइनों में पुराने कंडक्टरों को उच्च क्षमता वाले एचटीएलएस कंडक्टर से बदला जा रहा है। साथ ही 5 हजार 200 किमी ऑप्टिकल फाइबर ग्राउंड वायर का इंस्टॉलेशन पूर्ण कर 131 उपकेन्द्रों को डिजिटल संचार नेटवर्क से जोड़ा गया है।

            वितरण क्षेत्र में प्रगति पर प्रकाश डालते हुए ऊर्जा सचिव ने बताया कि प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या 65 लाख से अधिक हो गई है। विगत दो वर्षों में हजारों किमी नई लाइनें, उपकेन्द्र एवं ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए हैं। जनहितकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, पीएम कुसुम, डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना एवं बीपीएल उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से लाखों परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विद्युतीकरण हेतु नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत सैकड़ों गांवों तक बिजली पहुंचाई गई है।

            क्रेडा की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए ऊर्जा सचिव ने बताया कि विगत दो वर्षों में 26 हजार 794 सोलर सिंचाई पंप, 7 हजार 833 सोलर पेयजल पंप तथा 1 हजार 709 सोलर हाईमास्ट स्थापित किए गए हैं। आगामी वर्षों में ऑफग्रिड सोलर प्लांट्स एवं रूफटॉप सौर संयंत्रों के विस्तार की कार्ययोजना पर भी कार्य जारी है। डॉ. यादव ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में संतुलित मिश्रण, तकनीकी आधुनिकीकरण एवं नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के माध्यम से छत्तीसगढ़ को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर एवं अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान पत्रकारों के सवालों के भी विस्तृत उत्तर दिए और विभाग की आगामी 03 वर्षों की कार्य योजना साझा की। 

            इस दौरान सीएसपीडीसीएल के एमडी श्री भीम सिंह कंवर, सीएसपीजीसीएल के एमडी एस के कटियार, सीएसपीटीसीएल के एमडी श्री राजेश कुमार शुक्ला सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारीगण मौजूद रहे।
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मुख्यमंत्री श्री साय से छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात, 80 वॉ महा- अधिवेशन का दिया न्यौता

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज महानदी भवन में छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।


इस दौरान समाज के पदाधिकारियों ने 21 व 22 फरवरी 2026 को बलौदाबाजार -भाटापारा जिले के ग्राम चाँपा (सैंहा)में आयोजित हो रहे 80 वॉ छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज महा-अधिवेशन के लिए निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा,केन्द्रीय महामंत्री यशवंत सिंह वर्मा, कोषाध्यक्ष जागेश्वर बघेल, राज प्रधान बलौदाबाजार श्रीमती सुनीता वर्मा,चन्दखुरी चिन्ता राम वर्मा, रायपुर जगेश्वर प्रसाद वर्मा अर्जुन राज हरी राम वर्मा ,हरिश्चंद्र वर्मा, रघुनंदन वर्मा सहित समाज के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी गण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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डिजिटल ऋण पुस्तिका राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, सशक्त और नागरिक-केन्द्रित बनाने की दिशा में ठोस कदम-राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा

छत्तीसगढ़ में आज डिजिटल शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने आज निवास कार्यालय में डिजिटल किसान किताब का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उमेश कुमार पटेल और श्रीकांत वर्मा द्वारा लिखित छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख नियमावली भाग 1से 4 पुस्तक का भी विमोचन किया गया। यह पहल राज्य के किसानों और भूमिधारकों को आधुनिक, सरल और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। इस अवसर पर संचालक भू अभिलेख श्री विनीत नन्दनवार सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

     डिजिटल किसान किताब अब पारंपरिक मैन्युअल किसान किताब का स्थान लेगी। इसके माध्यम से किसानों को अपनी भूमि संबंधी जानकारी कभी भी और कहीं से भी ऑनलाइन प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा भुइया पोर्टल पर B-1 एवं P-II रिपोर्ट के साथ उपलब्ध रहेगी, जिसे किसान आसानी से देख और डाउनलोड कर सकेंगे।
     डिजिटल प्रणाली में आवश्यक विवरण स्वतः अपडेट होते रहेंगे, जिससे जानकारी संशोधन के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त होगी। साथ ही, संबंधित पटवारी द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाणित प्रति उपलब्ध होने से दस्तावेजों की वैधता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।
     इस अवसर पर मंत्री श्री वर्मा ने  कहा कि डिजिटल ऋण पुस्तिका केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, सशक्त और नागरिक-केन्द्रित बनाने की दिशा में ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिए भूमि पर निर्भर हैं। अब ऋण पुस्तिका से संबंधित जानकारी ऑनलाइन और वास्तविक समय में उपलब्ध होने से किसानों को बैंक ऋण, फसल ऋण एवं शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में सहूलियत होगी।
    मंत्री ने बताया कि डिजिटल प्रणाली से त्रुटियों में कमी आएगी, अभिलेखों की शुद्धता सुनिश्चित होगी और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक सरल एवं प्रभावी बनेगी। यह पहल “डिजिटल छत्तीसगढ़” की अवधारणा को मजबूती प्रदान करेगी तथा शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को और सुदृढ़ बनाएगी। उन्होंने राजस्व विभाग, NIC तथा परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों और तकनीकी टीम को बधाई देते हुए नागरिकों से अपील की कि वे इस डिजिटल सुविधा का अधिकतम उपयोग करें।
    डिजिटल किसान किताब और डिजिटल ऋण पुस्तिका का शुभारंभ छत्तीसगढ़ में राजस्व सुधारों की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा और राज्य को डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा।
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मुख्यमंत्री श्री साय ने कुम्हार के चाक पर गढ़ा दीया, पारंपरिक शिल्पकारों से किया आत्मीय संवाद: सरगुजा विकास प्राधिकरण की बैठक के दौरान प्रदर्शनी में दिखा माटी से जुड़ाव

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का एक आत्मीय और सहज रूप उस समय देखने को मिला, जब उन्होंने कुम्हार के चाक पर स्वयं मिट्टी का दीया और कलश गढ़कर पारंपरिक शिल्प के प्रति सम्मान और जुड़ाव का सशक्त संदेश दिया। 


अवसर था सरगुजा विकास प्राधिकरण की बैठक का, जिसमें शामिल होने वे कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर पहुंचे थे। जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित बैठक के साथ परिसर में स्व-सहायता समूहों एवं स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। इसी प्रदर्शनी में सोनहत विकासखंड निवासी शिल्पकार श्री देवी दयाल प्रजापति इलेक्ट्रिक चाक पर मिट्टी से दीया और कलश बनाने का सजीव प्रदर्शन कर रहे थे। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय उनके स्टॉल पर पहुंचे और कुछ देर तक उनकी शिल्पकला का बारीकी से अवलोकन किया। कला के प्रति उत्सुकता बढ़ने पर मुख्यमंत्री ने स्वयं चाक पर हाथ आजमाने की इच्छा व्यक्त की। शिल्पकार की सहमति से उन्होंने घूमते हुए चाक पर रखी गीली मिट्टी को हाथों से साधा और देखते ही देखते उसे सुंदर दीये का आकार दे दिया। मुख्यमंत्री की सहज कुशलता देखकर स्वयं शिल्पकार भी आश्चर्यचकित रह गए, वहीं उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस क्षण का स्वागत किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस दौरान शिल्पकार देवी दयाल प्रजापति से उनके व्यवसाय, आय और परिवार की जानकारी ली तथा उन्हें शासन की विभिन्न स्वरोजगार एवं कारीगर हितैषी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक शिल्प, कारीगरों और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि स्थानीय कला और हुनर को नई पहचान और बाजार मिल सके।

इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती गोमती साय, सांसद श्री चिंतामणि महाराज, विधायक श्री भैयालाल राजवाड़े, कलेक्टर श्री चंदन त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक श्री रविकुमार कुर्रे सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।
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उज्ज्वला गैस, पिंक ई-रिक्शा और गार्बेज रिक्शा वितरण से आत्मनिर्भरता को मिला नया संबल- मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज कोरिया प्रवास के दौरान कोरिया महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को हितग्राहीमूलक सामग्री का वितरण कर लाभान्वित किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में 105 पात्र हितग्राहियों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन प्रदान किए। उन्होंने कहा कि इस योजना से अब इन परिवारों को धुएं से मुक्ति मिलने के साथ सुरक्षित, स्वच्छ और स्वास्थ्य के अनुकूल ईंधन की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।

इस अवसर पर स्व-रोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से 6 आजीविका दीदियों को पिंक ई-रिक्शा (ग्रामीण आजीविका एक्सप्रेस) प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने जिले की स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 14 स्वच्छता दीदियों को गार्बेज रिक्शा भी वितरित किए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल व्यवस्था नहीं बल्कि जनभागीदारी का अभियान है, और इस दिशा में महिलाओं की भागीदारी सराहनीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, ताकि समाज का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके। उन्होंने कहा कि सरकार जनकल्याण और आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है।
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सुशासन को नई दिशा: सरगुजा में संभाग स्तरीय कर्मयोगी प्रशिक्षण सम्पन्न

 राज्य सरकार द्वारा सुशासन, क्षमता निर्माण एवं परिणामोन्मुख प्रशासन को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए आईजीओटी (iGOT) कर्मयोगी का संभाग स्तरीय प्रशिक्षण आज अंबिकापुर में संपन्न हुआ।


इस अवसर पर राज्य स्तर से सुश्री अंजू सिंह, अवर सचिव, छत्तीसगढ़ शासन एवं नोडल अधिकारी (आईजीओटी कर्मयोगी) द्वारा अधिकारियों को प्रशिक्षण एवं विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया। उन्होंने आईजीओटी प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग, भूमिका आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल तथा प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत द्वारा मिशन कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी साझा की गई, जिसके अनुरूप प्रशिक्षण को परिणामोन्मुख स्वरूप प्रदान किया जा रहा है।

राज्य में प्रशासनिक क्षमता निर्माण, डिजिटल गवर्नेंस एवं नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आईजीओटी कर्मयोगी कार्यक्रम को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। प्रशिक्षण में अधिकारियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित शिक्षण प्रणाली, प्रशासनिक सुधार तथा सेवा गुणवत्ता में वृद्धि के विभिन्न आयामों से अवगत कराया गया। संभाग आयुक्त श्री नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने कहा कि आईजीओटी कर्मयोगी केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं बल्कि प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में परिवर्तन का माध्यम है, जिससे योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन एवं नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित होंगी।

उल्लेखनीय है कि आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सतत क्षमता निर्माण कर राज्य में सुशासन की अवधारणा को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है। यह पहल प्रशासन को दक्ष, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है। प्रशिक्षण में कलेक्टर अजीत बसंत सहित जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे तथा संबंधित कार्यालयों के नामित नोडल अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की।
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पोड़ी में विकास को मिली नई रफ्तार: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ₹126 करोड़ से अधिक के कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के पोड़ी में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात देते हुए ₹88 करोड़ से अधिक की लागत के 59 विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा ₹38 करोड़ से अधिक की लागत के 82 विकास कार्यों का लोकार्पण किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इन विकास परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्र में अधोसंरचना सुदृढ़ होगी और जनसुविधाओं का विस्तार होगा, जिससे स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि सड़क, भवन, सामुदायिक सुविधाओं और अन्य आवश्यक अधोसंरचना से जुड़े ये कार्य क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति प्रदान करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि उन्हें तेज गति, पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ धरातल पर उतारना है। हमारी सरकार  परिणामोन्मुखी कार्य संस्कृति के साथ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में संतुलित और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ अंचलों तक विकास की पहुँच सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी सोच के साथ अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और जनसुविधाओं के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जा रहे हैं, ताकि आम नागरिकों को सीधे लाभ मिल सके।
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मुख्य सचिव ने मंत्रालय महानदी भवन में नवा अंजोर विजन@ 2047 मॉनिटरिंग पोर्टल की समीक्षा की

मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़ नवा अंजोर विजन@ 2047 मॉनिटरिंग पोर्टल की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के सचिव उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने नवा अंजोर विजन@ 2047 के अंतर्गत निर्धारित इंडिकेटर्स की राज्य स्तरीय समीक्षा करते हुए सभी विभागीय सचिवों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने विभाग से संबंधित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति, निर्धारित लक्ष्यों की नियतकालिक उपलब्धि तथा अद्यतन जानकारी मॉनिटरिंग पोर्टल में समय-समय पर दर्ज करना सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि पोर्टल के माध्यम से योजनाओं की प्रगति की प्रभावी निगरानी एवं मूल्यांकन संभव है, जिससे राज्य के विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में गति आएगी।

मुख्य सचिव ने सभी विभागीय सचिवों को अपने विभागीय डैशबोर्ड पर ऑनलाइन प्रगति की नियमित समीक्षा करने तथा निर्धारित इंडिकेटर्स के अनुरूप कार्यों में तेजी लाने के निर्देश भी दिए।

बैठक में विजन 2047 के लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति हेतु समन्वित एवं परिणामोन्मुख कार्यवाही पर विशेष जोर दिया गया।
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NHMMI Hospital Raipur की चेतावनी: दर्द रहित गांठों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, समय पर जांच है जरूरी

रायपुर। कई महिलाएं गंभीर बीमारियों को केवल दर्द से जोड़कर देखती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर गंभीर बीमारी दर्द के साथ ही शुरू हो, यह जरूरी नहीं। NHMMI Hospital Raipur के विशेषज्ञों के अनुसार, स्तन या शरीर के अन्य हिस्सों में होने वाली दर्द रहित गांठें भी शुरुआती चरण के कैंसर का संकेत हो सकती हैं। इसलिए किसी भी नई या लगातार बनी रहने वाली गांठ को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
दर्द न होना खतरे का संकेत न होना नहीं
अक्सर महिलाएं दर्द न होने पर गांठ को नजरअंदाज कर देती हैं। जबकि कैंसर की गांठें धीरे-धीरे बढ़ती हैं और शुरुआती चरण में नसों को प्रभावित नहीं करतीं, इसलिए वे लंबे समय तक दर्द रहित रह सकती हैं। यही कारण है कि समय पर जांच न होने से बीमारी का पता देर से चलता है।
हर गांठ कैंसर नहीं, लेकिन जांच जरूरी
विशेषज्ञ बताते हैं कि अधिकांश गांठें हार्मोनल बदलाव, सिस्ट या संक्रमण के कारण भी हो सकती हैं। लेकिन बिना चिकित्सकीय जांच के यह तय करना संभव नहीं कि गांठ सामान्य है या गंभीर। नई, सख्त, आकार में बढ़ती या लंबे समय तक बनी रहने वाली किसी भी गांठ की डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
स्तन ही नहीं, शरीर के अन्य हिस्सों पर भी ध्यान दें
स्तन में गांठ की चर्चा आम है, लेकिन गर्दन, बगल, कमर या पेट में भी दर्द रहित सूजन या गांठ दिखाई दे सकती है। यदि गांठ सख्त, अनियमित या स्थिर महसूस हो और समय के साथ ठीक न हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
40 वर्ष के बाद नियमित स्क्रीनिंग जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार 40 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को वार्षिक मैमोग्राफी करानी चाहिए। स्क्रीनिंग टेस्ट जैसे मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन लक्षण प्रकट होने से पहले ही बीमारी का पता लगाने में मदद करते हैं। जिन महिलाओं के परिवार में कैंसर का इतिहास है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार पहले से जांच शुरू करनी चाहिए।
आत्म-परीक्षण भी है महत्वपूर्ण
नियमित आत्म-परीक्षण से महिलाएं अपने शरीर में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को जल्दी पहचान सकती हैं। हालांकि यह पेशेवर जांच का विकल्प नहीं है, लेकिन जागरूकता बढ़ाने का एक अहम कदम है।
डर नहीं, जागरूकता जरूरी
निदान का भय और सामाजिक कलंक अक्सर इलाज में देरी का कारण बनते हैं। लेकिन शुरुआती अवस्था में कैंसर का इलाज अधिक प्रभावी और कम जटिल होता है। समय पर परामर्श लेना साहस और आत्म-देखभाल का प्रतीक है।
याद रखें
दर्द गंभीरता का विश्वसनीय पैमाना नहीं है। दर्द रहित गांठ भी खतरनाक हो सकती है। यदि शरीर में कोई असामान्य बदलाव महसूस हो, तो इंतजार न करें—समय पर जांच ही जीवन बचा सकती है।
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उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा एवं वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने पशुपालकों एवं बिहान दीदियों के साथ किया आधुनिक डेयरियों का भ्रमण

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा एवं वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री केदार कश्यप ने गुजरात के मेहसाणा जिले के बनासकांठा स्थित प्रसिद्ध दूधसागर डेयरी, बनास डेयरी एवं अमूल डेयरी का पशुपालकों एवं बिहान दीदियों के साथ शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान दोनों मंत्रियों ने डेयरी की आधुनिक कार्यप्रणाली, तकनीकी नवाचारों और सहकारी मॉडल का विस्तृत अवलोकन किया।

       इस दौरान प्रतिनिधिमंडल को डेयरी के अधिकारियों द्वारा संपूर्ण उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी दी गई। उपमुख्यमंत्री एवं वन मंत्री ने डेयरी प्लांट, बायो-सीएनजी प्लांट, खाद्य तेल इकाई, आटा प्लांट तथा शेरपुरा डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटी का निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं को करीब से समझा।
      इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि यह भ्रमण केवल अवलोकन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सीखकर छत्तीसगढ़ में लागू करने का अवसर है। उन्होंने प्रतिभागियों से सफल डेयरी मॉडल, दुग्ध संकलन प्रणाली, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रसंस्करण तकनीक और विपणन व्यवस्था का गहन अध्ययन करने को कहा।
       उन्होंने बताया कि इस शैक्षणिक भ्रमण से प्रतिभागियों को संतुलित चारा विकास, उन्नत पशुपालन तकनीक, दुग्ध प्रसंस्करण, डेयरी उत्पाद निर्माण तथा विपणन की व्यवहारिक जानकारी प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सतत प्रयासरत है। बिहान समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, वहीं पशुपालन विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और आय संवर्धन के लिए विभिन्न योजनाएँ संचालित की जा रही हैं।
       वन, पर्यावरण एवं सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि डेयरी सहकारी मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का सशक्त माध्यम है। यदि इस मॉडल को छत्तीसगढ़ में प्रभावी ढंग से अपनाया जाए तो पशुपालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। 
         उल्लेखनीय है कि इस शैक्षणिक भ्रमण में 50 सदस्यीय दल ने उन्नत पशुपालन एवं डेयरी प्रबंधन सीखने के लिए भाग लिया है। जिसमें 25 पशुपालक एवं 25 बिहान (एनआरएलएम) समूह की दीदियाँ शामिल है। उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा एवं वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री केदार कश्यप भी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करने के साथ पूरे शैक्षणिक भ्रमण में उनके साथ शामिल हो रहे हैं।
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प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 से शहरी गरीबों को मिलेगा स्थायी आशियाना– उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

 अंबेडकर चौक से लेकर समनापुर मार्ग तक निर्माण होने वाले बीटी रोड व नाली निर्माण भूमिपूजन कार्यक्रम में पहुंचे उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने प्रधानमंत्री आवास निर्माण के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी 2.0 शहरी क्षेत्रों में निवासरत गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है। इस योजना के माध्यम से वर्षों से कच्चे मकानों में रह रहे पात्र नागरिकों को पक्का, सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराया जाएगा। 


    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र लोगों के लिए आवास स्वीकृत होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। उन्होंने बताया कि जो लोग जिस स्थान पर काबिज हैं और वहां समेकित कर, बिजली बिल तथा संपत्ति कर जमा कर रहे हैं या जिनके पास पुराना पट्टा है लेकिन उसका नवीनीकरण नहीं हुआ है, ऐसे सभी पात्र लोगों का प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किया जाएगा। नगर पालिका द्वारा उन्हें कब्जे का प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा, जिसके बाद आवास की स्वीकृति में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी।

  उप मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना का लाभ उन हितग्राहियों को मिलेगा, जो 31 अगस्त 2024 से पूर्व आबादी (प्रचलित/सुरक्षित) भूमि पर निवासरत हैं तथा जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 3 लाख रुपये तक है। पात्र हितग्राहियों के चयन के लिए नगर पालिका द्वारा पात्र हितग्राही प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा, जिसके लिए हितग्राही को भूमि पर निवास से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। जिन परिवारों के पास देश में कहीं भी पक्का आवास उपलब्ध नहीं है, वही इस योजना के अंतर्गत पात्र होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि पूर्व में केंद्र या राज्य सरकार की किसी भी आवास योजना का लाभ लेने वाले हितग्राही इस योजना के लिए अपात्र माने जाएंगे। एक परिवार को केवल एक ही आवास योजना का लाभ दिया जाएगा।

योजना के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि योजना के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाएगी। वास्तविक जरूरतमंदों को योजना से जोड़ा जा सके। पात्र हितग्राहियों को शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार आवास निर्माण के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष को कहा कि ऐसे सभी लोगों को शीघ्र प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों को 2 लाख 36 हजार रुपए की सहायता दी जाएगी, जिससे वे अपने अनुरूप बेहतर घर बना सकेंगे।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि तालाब पार, सड़क सीमा, हाईटेंशन लाइन या अन्य शासकीय योजनाओं से प्रभावित भूमि पर स्थित कच्चे आवासधारियों को लाभार्थी आधारित निर्माण घटक के बजाय किफायती आवास (AHP) घटक में सम्मिलित किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबके लिए आवास” के संकल्प को साकार करने की दिशा में प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी 2.0 एक सशक्त कदम है। राज्य सरकार इस योजना को मिशन मोड में लागू कर शहरी गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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