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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में गूंज रही है विकास की आवाज – 'नियद नेल्ला नार' से शासन पहुँचा विश्वास के द्वार तक

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के वे सुदूरवर्ती गाँव, जो वर्षों तक विकास की मुख्यधारा से कटे रहे, आज नई उम्मीदों और उजालों की ओर अग्रसर हैं। जहाँ कभी बिजली, सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएँ और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, वहीं अब वही गाँव प्रगति के रास्ते पर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इस बदलाव की नींव मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और जन सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के परिणामस्वरूप 15 फरवरी 2024 को 'नियद नेल्लानार – आपका आदर्श ग्राम योजना' के रूप में रखी गई। यह योजना उन क्षेत्रों तक शासन की संवेदनशील और सक्रिय पहुँच सुनिश्चित करने का क्रांतिकारी प्रयास है, जहाँ अब तक केवल उपेक्षा और प्रतीक्षा का सन्नाटा था। 


मुख्यमंत्री श्री साय का स्पष्ट मानना रहा है कि केवल सुरक्षा शिविर स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं, जब तक वहाँ शासन की संवेदनशील उपस्थिति और समग्र विकास की किरण नहीं पहुँचे। इसी सोच के साथ बस्तर के पाँच नक्सल प्रभावित जिलों—सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और कांकेर—में 54 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए। इन शिविरों के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 327 गाँवों को चिन्हित कर यह निर्णय लिया गया कि इन सभी को शत-प्रतिशत योजनाओं से जोड़ते हुए एक नया विकास मॉडल प्रस्तुत किया जाएगा।

इस पहल के साथ ही गाँवों में बदलाव की हवा बहने लगी है। शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने 31 नए प्राथमिक विद्यालयों की स्वीकृति दी, जिनमें से 13 स्कूलों में कक्षाएँ शुरू हो चुकी हैं। 185 आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना को स्वीकृति दी गई, जिनमें से 107 पहले ही प्रारंभ हो चुके हैं, जिससे बच्चों को पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की सुविधा मिलने लगी है। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में 20 उप-स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत किए गए, जिनमें से 16 स्वास्थ्य केंद्र प्रारम्भ हो चुके हैं। ये वही गाँव हैं जहाँ पहले एक सामान्य दवा के लिए भी लोगों को मीलों जंगल पार करना पड़ता था। 

मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में संचार और संपर्क साधनों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। पहले जहाँ मोबाइल सिग्नल का नामोनिशान नहीं था, वहाँ अब 119 मोबाइल टावरों की योजना बनी और 43 टावर कार्यशील हो चुके हैं। 144 हाई मास्ट लाइट्स की मंजूरी दी गई, जिनमें से 92 गाँवों में अब रात के अंधेरे में उजियारा फैलने लगा है। सड़क और पुल निर्माण के लिए 173 योजनाएँ बनाई गईं, जिनमें से 116 को स्वीकृति मिल चुकी है और 26 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। यह विकास केवल अधोसंरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक जुड़ाव और पहचान का सशक्त माध्यम बन चुका है। आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अब तक 70,954 लोगों के आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं, 46,172 वृद्धजनों को आयु प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं और 11,133 नागरिकों का मतदाता पंजीकरण हुआ है, जिससे वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदार बन पाए हैं। 46,172 लोगों को आयुष्मान कार्ड जारी कर मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 12,232 मकानों का लक्ष्य तय किया गया है, जिनमें से 5,984 परिवारों को स्वीकृति मिल चुकी है। किसान सम्मान निधि योजना के तहत 4,677 किसानों को सहायता राशि प्रदान की गई है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 6,460 घरों में व्यक्तिगत शौचालय बनाए गए हैं। रसोई को धुएँ से मुक्त करने के उद्देश्य से 18,983 महिलाओं को उज्ज्वला और गौ-गैस योजना के तहत गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। 30 गाँवों में डीटीएच कनेक्शन भी दिए गए हैं, जिससे ये गाँव अब सूचना और मनोरंजन के मुख्य प्रवाह से जुड़ चुके हैं।

यह परिवर्तन मात्र योजनाओं का संकलन नहीं है, बल्कि शासन और जनता के बीच एक नए भरोसे का रिश्ता है, जिसकी बुनियाद सहभागिता और पारदर्शिता पर टिकी है। वर्षों तक शासन से कटे रहे लोग अब स्वयं विकास की निगरानी में सहभागी बन रहे हैं। अब ग्रामीण स्वयं आंगनबाड़ी की उपस्थिति पंजी, राशन दुकान की गुणवत्ता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी कर रहे हैं। यह वही बस्तर है, जो भय से विश्वास और उपेक्षा से भागीदारी की ओर बढ़ चला है। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की इस दूरदर्शिता ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि सुशासन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीनी क्रियान्वयन से आता है। 'नियद नेल्लानार' केवल एक योजना नहीं, बल्कि यह बस्तर के पुनर्जागरण की यात्रा है—एक ऐसी यात्रा जिसमें बंदूक की जगह अब किताबें हैं, अंधेरे की जगह उजियारा है और असहमति की जगह अब सहभागी लोकतंत्र की भावना है।
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स्वच्छता हम सभी की है जिम्मेदारी – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि देश को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने में हमारी स्वच्छता दीदियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, जिन्होंने निष्ठा, परिश्रम और सेवा-भावना के साथ समाज को नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया में आयोजित सम्मान समारोह में स्वच्छता दीदियों को साड़ी, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जशपुर एक प्राकृतिक रूप से समृद्ध और सुंदर जिला है, लेकिन पहले जब वे गांवों का दौरा करते थे, तो सड़कों के किनारे फैला कचरा गांवों और नगरों की सुंदरता को धूमिल कर देता था। इस स्थिति को बदलने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत कर इसे राष्ट्रीय जनआंदोलन में परिवर्तित किया। उन्होंने स्वयं झाड़ू उठाकर लोगों को प्रेरित किया और गांव-गांव, शहर-शहर स्वच्छता की अलख जगाई। उन्होंने हर नागरिक को स्वच्छ और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार दिलाने का प्रयास किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान में हमारी स्वच्छता दीदियों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उनके अथक परिश्रम और समर्पण का ही परिणाम है कि आज जशपुर जिले ने स्वच्छता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। वे वास्तव में सम्मान की पात्र हैं, क्योंकि उन्होंने हमें स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण प्रदान करने में अमूल्य योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने घर, मोहल्ले, चौराहे, मंदिर और सार्वजनिक स्थलों की सफाई को अपना कर्तव्य मानें और स्वच्छता को अपनी आदत में शामिल करें।

उल्लेखनीय है कि आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शहरी स्वच्छता सुधारों के मूल्यांकन और प्रोत्साहन हेतु स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) के अंतर्गत 4,589 शहरों को शामिल किया गया था। इस राष्ट्रीय सर्वेक्षण में जशपुर जिले के नगरीय निकायों ने अभूतपूर्व प्रदर्शन कर देश भर में अपना परचम लहराया है।इसमें जशपुरनगर ने 20,000 से 50,000 की जनसंख्या वर्ग में पूरे देश में 10वां स्थान प्राप्त किया है, जो कि 2023 की 505वीं रैंकिंग से एक लंबी छलांग है। इसी वर्ग में नगर पंचायत कुनकुरी ने 13वां रैंक, नगर पंचायत पत्थलगांव ने 30वां रैंक, नगर पंचायत बगीचा ने 51वां रैंक, और नगर पंचायत कोतबा ने 64वां रैंक हासिल किया है। यह असाधारण उपलब्धि स्वच्छता दीदियों के परिश्रम और प्रशासनिक टीम के समन्वित प्रयास का प्रतिफल है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में जिले को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए नगरीय निकायों द्वारा योजनाबद्ध रूप से कई कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें बी.टी. रोड निर्माण, रोड मार्किंग, सामुदायिक शौचालयों का उन्नयन, चौक-चौराहों का सौंदर्यीकरण, वॉल पेंटिंग, वेस्ट मैटेरियल से पार्कों का निर्माण, कम्पोस्टिंग शेड और रिसाइक्लिंग सेंटर की स्थापना, फुटपाथों पर पेवर ब्लॉक लगाना, साइनेज आदि प्रमुख हैं। लेकिन इन प्रयासों की आत्मा बनी हैं वे स्वच्छता दीदियाँ, जो हर गली, मोहल्ले में जाकर डोर टू डोर कचरा संग्रहण जैसे श्रमसाध्य कार्यों को अंजाम देती हैं।

इस अवसर पर जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने सभी स्वच्छता दीदियों, नगरीय निकायों के अधिकारियों और नागरिकों को इस उपलब्धि पर बधाई दी। सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय ने कहा कि स्वच्छता दीदियाँ वह कार्य कर रही हैं जो पहले समाज में उपेक्षित था। उन्होंने कहा कि कभी स्वच्छता के प्रति लोगों में चेतना नहीं थी, लेकिन स्वच्छ भारत अभियान के तहत दीदियों ने लोगों को न केवल जागरूक किया, बल्कि व्यवहार परिवर्तन भी सुनिश्चित किया, जिससे जशपुर को यह गौरव प्राप्त हुआ है।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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छत्तीसगढ़ की संस्कृति में सजीव और निर्जीव सभी के प्रति सम्मान और आभार की भावनाः मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

रायपुर सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में आज हरेली पर्व का गरिमामय आयोजन हुआ। त्यौहार मनाने के लिए पूरे परिसर को ग्रामीण परिवेश में सजाया गया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उपस्थित लोगों को  संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की खुशहाली और समृद्धि हमारी सरकार का मुख्य ध्येय है। हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की परंपरा, प्रकृति और खेती-किसानी से जुड़ा ऐसा पर्व है, जो हमें अपने मूल से जोड़ता है। आज पूरा छत्तीसगढ़ हरेली की खुशी में डूबा है। मुख्यमंत्री निवास में भी यह पर्व पूरे उल्लास और पारंपरिक तरीके से मनाया जा रहा है। 


उन्होंने कहा कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक हरेली को मनाने का अपना-अपना अंदाज है। लेकिन सभी जगह इसका रंग एक ही है, आस्था और उत्साह एक ही है। जिस तरह प्रकृति हमारा ख्याल रखती है, उसी तरह हमें भी प्रकृति का ख्याल रखना चाहिए।  हरेली केवल खेती-किसानी का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह अपनी धरती की हरियाली और प्रकृति पूजा का भी त्यौहार है। छत्तीसगढ़ महतारी की कृपा हम सब पर बरसाती रहे और सभी किसान भाई खुशहाल रहें। यही मंगल कामना है

उन्होंने कहा कि श्री साय ने कहा कि  हमारी सरकार ने किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने और 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा तय कर ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। हम सभी ने 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का सपना देखा है और इसके लिए  हमने अपना विजन डॉक्यूमेंट भी बनाया है। हमारी सरकार राज्य से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रयास कर रही है। 

हरेली त्योहार पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और किसान जीवन का उत्सव है। इस पावन अवसर पर मैं प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ। यह त्योहार प्रकृति, कृषि और पशुधन से जुड़े हमारे जीवन मूल्यों की गूंज है। उन्होंने कहा कि ऐसा विश्वास है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती स्वयं धरती पर आकर किसानों के बीच उपस्थित होते हैं और उनके खेतों का निरीक्षण करते हैं। यही कारण है कि इस दिन किसान अपने कृषि यंत्रों, हल-बैल और खेत-खलिहानों की पूजा करते हैं। 

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आज छत्तीसगढ़ कृषि के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति कर रहा है। किसानों को समर्थन मूल्य पर धान खरीद और  विभिन्न योजनाओं में 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। यह हिंदुस्तान में किसी भी राज्य द्वारा किसानों के लिए किया गया सबसे बड़ा कार्य है। यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मुख्यमंत्री है, जो केवल घोषणाएं नहीं करता, बल्कि धरातल पर किसानों के पसीने की कीमत चुका रहा है।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, श्री विजय शर्मा,  स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम, राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा , महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायकगण, निगम मंडल आयोग के अध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: दिखी परंपरा और प्रगति की अनूठी झलक

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता और कृषि परंपराओं का प्रतीक हरेली तिहार इस वर्ष मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास परिसर में अत्यंत हर्षाेल्लास और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राज्य की समृद्ध विरासत, पारंपरिक कृषि यंत्रों, लोक परिधानों, खानपान और आधुनिक कृषि तकनीकों का समन्वय एक अद्भुत नजारे के रूप में सामने आया। कार्यक्रम स्थल को पारंपरिक छत्तीसगढ़ी रंग-रूप में सजाया गया था, जहां ग्रामीण परिधान पहने अतिथि, कलाकार और आमजन लोक संस्कृति में रमे हुए नजर आए। 


हरेली उत्सव के दौरान मुख्यमंत्री निवास में परम्परागत और आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदर्शनी स्थल का भ्रमण कर विभिन्न पारंपरिक यंत्रों और वस्तुओं का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में काठा, खुमरी, झांपी, कांसी की डोरी और तुतारी जैसे ऐतिहासिक कृषि उपकरणों को प्रदर्शित किया गया। कृषि विभाग द्वारा आयोजित आधुनिक कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी, जिसमें  नांगर, कुदाली, फावड़ा, रोटावेटर, बीज ड्रिल, पावर टिलर और स्प्रेयर जैसे यंत्रों का प्रदर्शन किया गया। ‘काठा’ वह परंपरागत मापक है जिससे पुराने समय में धान तौला जाता था; ‘खुमरी’ बांस और कौड़ियों से बनी छांव प्रदान करने वाली टोपी है; ‘झांपी’ शादी-ब्याह में उपयोग होने वाली वस्तुएं रखने की बांस से बनी पेटी; ‘कांसी की डोरी’ खाट बुनने में काम आती है और ‘तुतारी’ पशुओं को संभालने में उपयोग होती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा कि हरेली तिहार केवल पर्व नहीं, बल्कि यह हमारे कृषि जीवन, पशुधन और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी किसानों, युवाओं और आमजनों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रही। मुख्यमंत्री ने इन उपकरणों की जानकारी लेकर कृषि तकनीकी प्रगति की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ की खेती परंपरा और तकनीक के समन्वय से और भी अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनेगी। किसानों को नई तकनीकों की जानकारी देकर हम राज्य की कृषि उत्पादकता को ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आम नागरिक, किसान, छात्र और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और कृषि नवाचार के अद्वितीय संगम को सजीव रूप में प्रस्तुत किया, जो राज्य की समृद्ध परंपरा और विकासशील सोच का प्रतीक है।
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मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: पारंपरिक लोक यंत्रों के साथ सुंदर नाचा का हो रहा आयोजन

मुख्यमंत्री निवास में हरेली तिहार के अवसर पर पारंपरिक लोक यंत्रों की गूंज और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छटा के साथ सुंदर नाचा का आयोजन किया जा रहा है। पूरा परिसर उत्सवमय वातावरण से सराबोर है। ग्रामीण परिवेश की जीवंत छवि इस सुंदर माहौल में साकार हो गई है। कहीं सुंदर वस्त्रों में सजे राउत नाचा कर रहे कलाकारों की रंगत बिखरी है, तो कहीं आदिवासी कलाकार पारंपरिक लोक नृत्य की मोहक प्रस्तुतियाँ दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ का अद्भुत ग्रामीण लैंडस्केप अपनी संपूर्ण सांस्कृतिक सुंदरता के साथ यहां सजीव रूप में अवतरित हो गया है। विभिन्न प्रकार की लोक धुनों में छत्तीसगढ़ी संगीत का माधुर्य अपने चरम पर है।


राउत नाचा, छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति का एक प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनृत्य है, जो विशेष रूप से दीपावली के अवसर पर गोधन पूजा के दौरान किया जाता है। यह नृत्य विशेषकर यादव समुदाय (ग्वाला/गोपालक वर्ग) द्वारा प्रस्तुत किया जाता है और भगवान श्रीकृष्ण तथा गोधन की आराधना का प्रतीक माना जाता है।

राउत नाचा की परंपरा छत्तीसगढ़ में सदियों पुरानी है। इसे गोवर्धन पूजा से जोड़ा जाता है, जब ग्वाल-बाल भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की स्मृति में यह नृत्य करते हैं। नर्तक रंग-बिरंगे परिधानों में सजते हैं, सिर पर पगड़ी धारण करते हैं और हाथों में लाठी थामे रहते हैं। उनके वस्त्रों को कौड़ियों, घुंघरुओं और अन्य सजावटी वस्तुओं से अलंकृत किया जाता है।

राउत नाचा की प्रस्तुति के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों — जैसे ढोल, मांदर और नगाड़ा — का प्रयोग होता है। इनकी थाप पर नर्तक सामूहिक रूप से तालबद्ध होकर नृत्य करते हैं।
यह नृत्य केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, श्रम की महत्ता, पशुपालन के योगदान और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी देता है। नाचा के साथ गाए जाने वाले गीतों को ‘राउत गीत’ कहा जाता है, जिनमें धर्म, वीरता, प्रेम और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन होता है।
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मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी परंपराओं की झलक, पारंपरिक कृषि यंत्रों के साथ बिखरी सांस्कृतिक छटा

छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की खुशबू लिए हरेली तिहार का पारंपरिक उत्सव आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निवास में विधिवत रूप से आरंभ हुआ। छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ प्रत्येक अवसर और कार्य के लिए विशेष प्रकार के पारंपरिक उपकरणों एवं वस्तुओं का उपयोग होता आया है। हरेली पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में ऐसे ही पारंपरिक कृषि यंत्रों एवं परिधानों की झलक देखने को मिली, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं।


काठा

सबसे बाईं ओर दो गोलनुमा लकड़ी की संरचनाएँ रखी गई थीं, जिन्हें ‘काठा’ कहा जाता है। पुराने समय में जब गाँवों में धान तौलने के लिए काँटा-बाँट प्रचलन में नहीं था, तब काठा से ही धान मापा जाता था। सामान्यतः एक काठा में लगभग चार किलो धान आता है। काठा से ही धान नाप कर मजदूरी के रूप में भुगतान किया जाता था।

खुमरी

सिर को धूप और वर्षा से बचाने हेतु बांस की पतली खपच्चियों से बनी, गुलाबी रंग में रंगी और कौड़ियों से सजी एक घेरेदार संरचना ‘खुमरी’ कहलाती है। यह प्रायः गाय चराने वाले चरवाहों द्वारा सिर पर धारण की जाती है। पूर्वकाल में चरवाहे अपने साथ ‘कमरा’ (रेनकोट) और खुमरी लेकर पशु चराने निकलते थे। ‘कमरा’ जूट के रेशे से बना एक मोटा ब्लैंकेट जैसा वस्त्र होता था, जो वर्षा से बचाव के लिए प्रयुक्त होता था।

कांसी की डोरी

यह डोरी ‘कांसी’ नामक पौधे के तने से बनाई जाती है। पहले इसे चारपाई या खटिया बुनने के लिए ‘निवार’ के रूप में प्रयोग किया जाता था। डोरी बनाने की प्रक्रिया को ‘डोरी आंटना’ कहा जाता है। वर्षा ऋतु के प्रारंभ में खेतों की मेड़ों पर कांसी पौधे उग आते हैं, जिनके तनों को काटकर डोरी बनाई जाती है। यह डोरी वर्षों तक चलने वाली मजबूत बुनाई के लिए उपयोगी होती है।

झांपी

ढक्कन युक्त, लकड़ी की गोलनुमा बड़ी संरचना ‘झांपी’ कहलाती है। यह प्राचीन समय में छत्तीसगढ़ में बैग या पेटी के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होती थी। विशेष रूप से विवाह समारोहों में बारात के दौरान दूल्हे के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, पकवान आदि रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता था। यह बांस की लकड़ी से निर्मित एक मजबूत संरचना होती है, जो कई वर्षों तक सुरक्षित बनी रहती है।

कलारी

बांस के डंडे के छोर पर लोहे का नुकीला हुक लगाकर ‘कलारी’ तैयार की जाती है। इसका उपयोग धान मिंजाई के समय धान को उलटने-पलटने के लिए किया जाता है।
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ड़ॉ. सारस्वत पंडित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त

राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री रमेन डेका ने प्रोफेसर डॉ. विरेन्द्र कुमार सारस्वत को पंडित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय बिलासपुर का कुलपति नियुक्त किया गया है।
राज्यपाल द्वारा डॉ. सारस्वत की नियुक्ति पंडित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय अधिनियम, 2004 (संशोधन अधिनियम, 2006, 2010 एवं 2019) की धारा 9(1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है। उनका कार्यकाल, परिलब्धियां तथा सेवा शर्ते विश्वविद्यालय अधिनियम एवं परिनियम में निहित प्रावधान अनुसार होंगी। 
वर्तमान में डॉ. सारस्वत, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

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रायपुर को नम्बर-1 बनाने स्वच्छता के कार्यों में बढ़ानी होगी जनसहभागिता - श्री अरुण साव

रायपुर को देश का सबसे साफ-सुथरा शहर बनाने के लिए स्वच्छता के कार्यों में जनसहभागिता बढ़ानी होगी। शहर के एक-एक व्यक्ति, एक-एक परिवार को इस मिशन से जोड़ना होगा, तभी हम रायपुर को देश का स्वच्छतम शहर बना सकेंगे। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने आज रायपुर के शहीद स्मारक भवन में आयोजित स्वच्छता दीदियों और सफाई मित्रों के सम्मान समारोह में ये बातें कहीं। 

भारत सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में रायपुर को मिलियन प्लस (दस लाख से अधिक) आबादी वाले शहरों में देश का चौथा सबसे स्वच्छ शहर, गारबेज-फ्री सिटी में सेवन स्टार रैंकिंग और वाटर प्लस सर्टिफिकेशन की उपलब्धियों में स्वच्छता दीदियों और सफाई मित्रों के सक्रिय योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया। रायपुर नगर निगम द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में सभी जोनों के स्वच्छता अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ ही 25 स्वच्छता निरीक्षकों, 144 स्वच्छता दीदियों और 52 सफाई मित्रों को सम्मानित किया गया। 

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में रायपुर सहित प्रदेश के सात शहरों को स्वच्छता के लिए उत्कृष्ट कार्यों हेतु राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। स्वच्छ सर्वेक्षण में शामिल राज्य के 169 शहरों में से 115 शहरों ने अपनी रैंकिंग सुधारी है। छत्तीसगढ़ की इस उपलब्धि में स्वच्छता दीदियों और सफाई मित्रों का अमूल्य योगदान है, जिसके लिए वे अभिनंदन के पात्र हैं। 

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा इनके सम्मान के लिए राज्य स्तरीय कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। श्री साव ने कहा कि शहरों को स्वच्छ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाने राज्य शासन नगरीय निकायों को हरसंभव सहयोग प्रदान कर रही है। शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को जनसहभागिता बढ़ाने गंभीरता से काम करना होगा।

रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने समारोह में कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण में रायपुर को जो उपलब्धियां हासिल हुई हैं, उसकी नींव की पत्थर हमारी स्वच्छता दीदियां और सफाई मित्र ही हैं। स्वच्छता सेवा और समर्पण का काम है जिसे ये पूर्ण मनोयोग से कर रही हैं। आने वाले समय में रायपुर को देश का सबसे साफ-सुथरा शहर बनाने के लिए हम सभी गंभीरता और सक्रियता से काम करेंगे। 

सभापति श्री सूर्यकांत राठौर ने सफाई कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोग शहर को साफ और सुंदर बनाने के लिए धूप, बरसात और ठंड में भी अपने कार्यों को अंजाम देते हैं। आप लोगों की मेहनत से हमें नई दिल्ली में सम्मानित होने का मौका मिला है। कोरोना महामारी के कठिन समय में भी आप लोगों ने सराहनीय काम किया है।

रायपुर नगर निगम में स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्ष श्रीमती गायत्री चन्द्राकर और आयुक्त श्री विश्वदीप ने भी समारोह को संबोधित किया। निगम के अपर आयुक्त श्री यू.एस. अग्रवाल, श्री विनोद पाण्डेय और स्वास्थ्य अधिकारी सुश्री प्रीति सिंह सहित सभी जोनों के अध्यक्ष, एमआईसी सदस्य, पार्षदगण, अधिकारी-कर्मचारी और सफाई कर्मी बड़ी संख्या में सम्मान समारोह में मौजूद थे।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्वर्गीय श्री निखिल कश्यप को दी श्रद्धांजलि, शोक संतप्त परिजनों से की मुलाकात

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित विधायक कॉलोनी में आयोजित शोक सभा में शामिल होकर वन मंत्री श्री केदार कश्यप के भतीजे एवं बस्तर के पूर्व सांसद श्री दिनेश कश्यप के सुपुत्र स्वर्गीय श्री निखिल कश्यप को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने स्व. निखिल कश्यप की पार्थिव देह पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें अंतिम विदाई दी तथा शोकाकुल परिजनों से भेंट कर गहरी संवेदना प्रकट की।


मुख्यमंत्री श्री साय ने इस दुःखद अवसर पर ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने लोकमान्य तिलक और चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर किया नमन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्वतंत्रता संग्राम के महानायक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती (23 जुलाई) के अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है। उन्होंने कहा कि देश की आज़ादी के लिए इन दोनों महान स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान अविस्मरणीय है, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन मातृभूमि के लिए समर्पित कर दिया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लोकमान्य तिलक ने "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा" जैसे क्रांतिकारी उद्घोष के माध्यम से जनमानस में आज़ादी के लिए चेतना की ज्वाला प्रज्वलित की। उन्होंने सामाजिक समरसता के उद्देश्य से महाराष्ट्र में गणेश उत्सव की सार्वजनिक परंपरा की शुरुआत कर राष्ट्रीय एकता को एक नया सांस्कृतिक आधार प्रदान किया।

श्री साय ने चंद्रशेखर आजाद के अदम्य साहस और बलिदान को याद करते हुए कहा कि वे स्वतंत्रता संग्राम की ज्वलंत प्रेरणा हैं। आजाद ने अपना जीवन देश को समर्पित कर युवाओं में आत्मबल, साहस और राष्ट्रभक्ति की भावना को जाग्रत किया। उनका नाम ही देशभक्ति, अदम्य साहस और संकल्प का प्रतीक बन गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तिलक जी और आजाद जी का संघर्ष और बलिदान केवल इतिहास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्तंभ हैं। उनके विचार, आदर्श और राष्ट्रप्रेम आज भी हम सभी को देश की सेवा के लिए प्रेरित करते हैं।
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स्टेट कैपिटल रीजन: छत्तीसगढ़ का बनेगा नया ग्रोथ इंजन

राजधानी रायपुर और उसके आस-पास का एरिया, स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) के रूप में विकसित होने जा रहा है। यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ का नया ग्रोथ ईंजन बनेगा। विधानसभा में इस संबंध में विधेयक को मंजूरी मिलने के साथ ही स्टेट कैपिटल रीजन‘ ने रफ्तार पकड़ ली है। राजधानी रायपुर सहित दुर्ग-भिलाई और नवा रायपुर अटल नगर के क्षेत्र कैपिटल रीजन में शामिल किया गया है। यह पूरा क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की तर्ज पर विकसित होगा। 


भौगोलिक दृष्टि से छत्तीसगढ़ देश के केन्द्र में स्थित होने के साथ-साथ व्यापार, वाणिज्य और उद्योग के प्रमुख केन्द्र के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की यह पहल पर स्टेट कैपिटल रीजन में योजनाबद्ध और शहरी विकास की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए, स्टेट कैपिटल रीजन को विकसित करने की योजना बनाई गई है। इससे राजधानी और आसपास के शहरों का प्लान्ड डेव्हलपमेंट होगा। साथ ही शहरी सुविधाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और वाणिज्य के लिए बेहतर और अनुकूल वातावरण तैयार होगा। इस क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट की बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं बढ़ेंगी। 

स्टेट कैपिटल रीजन में शामिल शहरों में वर्ष 2031 तक 50 लाख से अधिक की आबादी रहने का अनुमान है। बढ़ते शहरीकरण और आबादी के दबाव को कम करने तथा बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए यहां राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन करने का प्रावधान रखा गया है। यह प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, हैदराबाद महानगर विकास प्राधिकरण, मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण आदि के अनुरूप होगा।

राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। इसके साथ ही आवास एवं पर्यावरण, नगरीय प्रशासन एवं विकास, लोक निर्माण विभाग के मंत्री, राज्य के मुख्य सचिव सहित विभिन्न विभागों के सचिव, राज्य शासन द्वारा नामित सदस्यों में राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण का प्रतिनिधित्व करने वाले चार विधायक, स्थानीय प्राधिकरण का प्रतिनिधित्व करने वाले चार निर्वाचित सदस्य होंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण इसके सदस्य संयोजक होंगे। 

यह प्राधिकरण भूमि का प्रभावी उपयोग और पर्यावरण अनुकूल योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करेगा। वर्ष 2024-25 के बजट में स्टेट केपिटल रीजन कार्यालय की स्थापना के लिए सर्वेक्षण एवं डीपीआर बनाने के लिए भी 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है। रायपुर से दुर्ग तक मेट्रो रेल सुविधा के सर्वे कार्य के लिए भी 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है। 

राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण का उद्देश्य राजधानी और आसपास के शहरों के व्यापक विकास के लिए योजना बनाने के साथ नियामक और समन्वय सस्थान के रूप में कार्य करना है। इसके प्रमुख कार्यों में स्थानीय स्तर पर योजनाएं बनाना, निवेश, आर्थिक योजनाओं और इनका कार्यान्वयन, विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी हितधारकों के बीच समन्वय, आर्थिक और अधोसंरचनात्मक विकास को बढ़ावा देना भी है। 

प्राधिकरण की एक कार्यकारी समिति होगी, जिसके अध्यक्ष मुख्य कार्यपालन अधिकारी होंगे। इसके अलावा नगर तथा ग्राम निवेश के संचालक, नगरीय प्रशासन विभाग के विकास संचालक, शहरी योजनाकार, अभियंता, वित्त, संपदा, पर्यावरण नामांकित सदस्य होंगे। इसके अलावा राजधानी क्षेत्र में शामिल सभी जिलों के कलेक्टर इसके सदस्य होंगे। 

स्टेट कैपिटल रीजन के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा राजधानी क्षेत्र विकास निधि बनाई जाएगी। इसके साथ ही एक पुनरावृत्ति निधि भी होगी। इसे राजधानी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए विशेष उपकर लगाने की शक्ति भी होगी। यह वार्षिक बजट भी तैयार करेगा तथा राज्य सरकार को प्रत्येक वर्ष वार्षिक योजना एवं प्रतिवेदन भी प्रस्तुत करेगा।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा—सड़कों पर विचरण करने वाले निराश्रित पशुओं की प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित करें

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़कों पर निराश्रित पशुओं की आवाजाही पर प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की एक प्रमुख वजह निराश्रित मवेशी हैं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए सभी संबंधित विभागों को त्वरित, ठोस और समन्वित कार्य योजना के साथ आगे बढ़ना होगा।


मुख्यमंत्री श्री साय ने पशुधन विकास, नगरीय प्रशासन एवं विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और लोक निर्माण विभाग को आपसी तालमेल के साथ जिम्मेदारी साझा करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह समस्या शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में गंभीर है और इसके समाधान में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी।

बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य में संचालित गौशालाओं, गौठानों, कांजी हाउस एवं काउ-कैचर (Cow-Catcher) जैसी व्यवस्थाओं की स्थिति की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने इन संस्थानों की वर्तमान उपयोगिता, क्षमता और सुधार की संभावनाओं पर भी गहन चर्चा की और सुझाव माँगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे स्थित गांवों में पशुओं के प्रबंधन हेतु प्रभावी एवं व्यावहारिक मॉडल विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हाईवे पर पशुओं की उपस्थिति केवल यातायात में बाधा नहीं, बल्कि जानलेवा दुर्घटनाओं का कारण बनती है, अतः इस दिशा में प्राथमिकता के साथ कार्रवाई आवश्यक है।

बैठक में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों और उनमें निराश्रित पशुओं की भूमिका की समीक्षा की गई। साथ ही, गोधन विकास से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने निराश्रित एवं लावारिस गौवंश की देखभाल, चारे की उपलब्धता और उनके पुनर्वास के लिए सुनियोजित रणनीति अपनाने की बात कही।

नगरीय क्षेत्रों में सड़कों पर घूमने वाले पशुओं की रोकथाम के लिए काउ-कैचर की कार्यप्रणाली और उसके विस्तार पर भी विचार-विमर्श किया गया। कृषि एवं पशुधन विकास विभाग की सचिव श्रीमती शहला निगार ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से प्रदेशभर की गौठानों, गौशालाओं एवं पशुधन विकास योजनाओं की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया।

बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेषर सिंह पटेल, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद एवं श्री राहुल भगत, नगरीय प्रशासन विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस. तथा लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का निर्देश: किसानों को उनकी मांग के अनुरूप सुगमता से मिले खाद-बीज

प्रदेश में खेती-किसानी का काम तेजी के साथ जारी है। राज्य में अब तक 36.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल सहित विभिन्न फसलों की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 75 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को भी कहा हैं। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। प्रदेश के किसानों को अब तक 10.20 लाख मीट्रिक टन खाद और 7.22 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। 21 जुलाई 2025 की स्थिति में प्रदेश में अब तक 446.1 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1238.7 मिमी है।  

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2025 के लिए प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें समस्त स्त्रोतों से 7.88 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 7.22 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया गया है, जो मांग का 146 प्रतिशत है। जबकि खरीफ वर्ष 2024 में राज्य में बीज निगम से 4.64 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया गया था।

इसी प्रकार प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 14.62 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 13.78 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 10.20 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 70 प्रतिशत है।     

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा गया है।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दी नवलीन को बधाई – कहा, छत्तीसगढ़ की उभरती प्रतिभा को मिलेगा हरसंभव सहयोग

खेल प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के हर खिलाड़ी को उसकी मेहनत, लगन और क्षमता के अनुरूप अवसर, संसाधन और मंच उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने महासमुंद जिले की नवोदित तीरंदाज नवलीन कौर को आगामी राष्ट्रीय खेलों में तीरंदाजी में स्थान बनाने पर बधाई और शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नवलीन जैसी खिलाड़ी छत्तीसगढ़ के भविष्य की नींव हैं और सरकार उन्हें खेल के हर स्तर पर निखारने के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करेगी।


जन्म से ही स्वास्थ्यगत चुनौतियों से जूझने वाली नवलीन ने इसे अपनी कमज़ोरी नहीं, बल्कि ताकत में बदल दिया और खेल को अपना जीवन-मार्ग चुना। उन्होंने फरवरी 2025 में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि इच्छाशक्ति और मेहनत के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

महासमुंद जिले के बागबाहरा की निवासी नवलीन कौर, श्री अरविंद एवं श्रीमती रंजीत कौर छाबड़ा की सुपुत्री हैं। उनका जन्म गर्भावस्था के सातवें महीने में हुआ था, जिससे प्रारंभिक वर्षों में स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियाँ रहीं। आस-पड़ोस, रिश्तेदार और परिचित हमेशा उनकी तबीयत के बारे में पूछते रहते थे, जिससे वह कभी-कभी उदास हो जाती थीं। लेकिन नवलीन ने इस जिज्ञासा को चुनौती के रूप में स्वीकार किया और खुद को एक नई दिशा में ढाल दिया।

वर्ष 2018 में नवलीन ने बागबाहरा से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित बिहाझर बालाश्रम में तीरंदाजी का प्रशिक्षण प्रारंभ किया। वे महासमुंद जिले की पहली महिला तीरंदाज बनीं। स्कूली शिक्षा के दौरान उन्होंने दो बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए और एक बार राष्ट्रीय स्तर की स्कूली तीरंदाजी प्रतियोगिता में चौथा स्थान अर्जित किया। वर्ष 2023 में उन्होंने गुजरात में आयोजित एफजीएफआई राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया और राज्य स्तरीय सीनियर तीरंदाजी प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

नवलीन का लक्ष्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक जीतना है। उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में कंपाउंड बो से खेला जाता है, जिसके लिए उनके परिजनों ने उन्हें एक नया आधुनिक कंपाउंड धनुष प्रदान किया है। उन्होंने सिटी ओपन तीरंदाजी प्रतियोगिता में कंपाउंड राउंड बालिका वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त कर इसकी शानदार शुरुआत की है। वर्तमान में नवलीन कोच श्री एवन साहू एवं खेल अधिकारी श्री मनोज धृतलहरे से तीरंदाजी के गुर सीख रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि क्रिकेट की लोकप्रियता के इस दौर में कोई खिलाड़ी यदि तीरंदाजी जैसे विशिष्ट खेल में कड़ी मेहनत करके प्रदेश और देश के लिए मेडल लाने की दिशा में काम कर रहा है, तो यह न केवल सराहनीय है बल्कि प्रेरणास्पद भी। नवलीन जैसी प्रतिभाएं छत्तीसगढ़ के युवाओं को यह संदेश देती हैं कि प्रतिबद्धता, अभ्यास और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
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छत्तीसगढ़ रजत जयंती वर्ष के आयोजन की तैयारियां प्रारंभ

छत्तीसगढ़ के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती वर्ष के आयोजन के संबंध में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ रजत जयंती वर्ष के आयोजन के संबंध में व्यापक विचार-विमर्श किया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए आयोजित इस बैठक में राज्य शासन के सभी विभागों के प्रभारी सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त और कलेक्टर शामिल हुए। रजत जयंती वर्ष में 15 अगस्त 2025 से 6 फरवरी 2026 तक 25 सप्ताहों के दौरान राज्य के सभी विभागों, माननीय मंत्रिगणों के अनेकों कार्यक्रम शामिल होंगे। 


रजत जयंती वर्ष का आयोजन दो चरणों में होगा। पहला चरण 15 अगस्त 2025 से 31 अक्टूबर 2025 तक होगा। दूसरा चरण 01 नंवबर 2025 से 6 फरवरी 2026 तक होगा। रजत जयंती वर्ष के आयोजन के अवसर पर राज्य शासन के सभी विभागों द्वारा अपने साप्ताहिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिसमें उनकी विभागीय योजनाओं एवं राज्य में 25 वर्ष में विभाग द्वारा किए गए कार्यों का समावेश होगा। अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू ने सभी विभाग के प्रमुख अधिकारियों से शीघ्र ही अपने विभाग की कार्ययोजना संस्कृति सचिव को 5 अगस्त तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। जिला कलेक्टरों को भी जिला स्तर पर आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए है।

छत्तीसगढ़ का रजत जयंती का उत्सव गरीब, युवा, अन्नदाता व नारी पर आधारित होगा। जिसमें इनकी सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। कार्यक्रम में जनभागीदारी, सरकारी और निजी क्षेत्र से जुड़े लोगों सहित आम जनमानस की सक्रियता और सहभागिता से जनगौरव और देशभक्ति को बढ़ावा देने के  उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में विरासत और विश्वास का संगम होगा। जिसमें छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत की गतिविधियों का समावेश होगा। आयोजन में तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता निगरानी की जाएगी।

बैठक में संस्कृति विभाग के सचिव श्री रोहित यादव ने रजत जयंती वर्ष के आयोजन के संबंध में प्रस्तुतिकरण के जरिए विस्तार से जानकारी दी। आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. रवि मित्तल ने रजत जयंती कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में विभिन्न विभागों की महत्वपूर्ण गतिविधियों को शामिल करने के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों के दौरान विभागों द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों का समावेश होना चाहिए। 

रजत जयंती वर्ष के कार्यक्रम ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला स्तर तथा राज्य स्तर पर आयोजित होंगे। बैठक में विभागीय सचिवों से कहा गया है कि वे शीघ्र ही राज्य एवं जिला स्तर पर अपने विभागीय अधिकारियों की नियुक्ति कर दें। रजत जयंती के कार्यक्रम में प्रदर्शनी, जनसम्पर्क भ्रमण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यक संगोष्ठी सहित विद्यालय और महाविद्यालय में प्रेरणादायक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। आयोजन की सफलता के लिए राज्य शासन के सभी विभागों की जिम्मेदारी तय की गई है।
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छत्तीसगढ़ में तैयार हो रहा सड़कों का मजबूत नेटवर्क

छत्तीसगढ़ में सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए राज्य में दो इकोनॉमिक कॉरिडोर सहित राज्य के दूरस्थ एवं पिछड़े क्षेत्रों में सड़कों का मजबूत नेटवर्क बनाने का काम शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने का भी निर्णय लिया गया है। 


छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए वर्तमान में कुल 18,215 करोड़ रुपये लागत की 37 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास हेतु 11 विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही हैं, इन सड़कों की लंबाई 1131 किलोमीटर होगी, जिनकी कुल लागत 24,693 करोड़ रुपये है। राष्ट्रीय राजमार्गों के उन्नयन के लिए भारत सरकार द्वारा कुल 5353 करोड़ रुपये की लागत वाली 18 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसके सम्पूर्ण होने से राज्य के विकास को एक नयी गति मिलेगी। राज्य में वर्ष 2014 से 2025 तक 840 किलोमीटर लंबाई के सिंगल-मध्यवर्ती लेन राष्ट्रीय राजमार्ग को 2 या अधिक लेन में उन्नत किया गया है। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए 2014 से 2025 तक 21,380 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 

राष्ट्रीय राजमार्गों के अलावा, भारत सरकार ने 2014 से 2025 तक केंद्रीय सड़क और सी.आर.आई.एफ. और इकनोमिक इंपोर्टेंस एवं इंटर स्टेट कनेक्टिविटी के तहत राज्य की सड़कों के विकास के लिए कुल 3826 करोड़ रुपये की लागत के 70 कार्यों को मंजूरी दी है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में राजमार्गों के नेटवर्क को और मजबूत किया जा रहा है। रायपुर एवं दुर्ग शहर के नागरिकों को सघन एवं भारी यातयात से राहत पहुंचाने हेतु 2 पैकेजों में 92 किलोमीटर लंबाई वाला 6 लेन का रायपुर-दुर्ग बाईपास का भी निर्माण कराया जा रहा है, जिसकी लागत 2289 करोड़ रूपए है। 

दो आर्थिक गलियारे

विशाखापट्टनम के पोर्ट के माध्यम से छत्तीसगढ़ के उत्पादों को वैश्विक बाजार मिलेगा, साथ ही रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है, इस 6 लेन सड़क की लंबाई के 124 किलोमीटर होगी। इस मार्ग के लिए 4146 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है तथा निर्माण कार्य प्रगति पर है। रायपुर एवं बिलासपुर को झारखण्ड की औद्योगिक नगरी रांची और धनबाद से जोड़ने के लिए 4 लेन सड़क का बिलासपुर-उरगा-पत्थलगाँव का निर्माण कराया जा रहा है, जिसकी लंबाई 157 किलोमीटर और लागत 4007 करोड़ रुपये है। 

एल डब्ल्यू ई और जनमन योजना

भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या को समाप्त करने के लिए 2014 से 2025 तक लेफ्ट विंग एक्सट्रिमिस्म (एल. डब्लू. ई) योजना के अंतर्गत महत्वपूर्ण सड़कों के विकास के लिए 2625 करोड़ रुपये की राशि व्यय की है। इसी प्रकार विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह के विकास हेतु पीएम-जनमन योजना में राज्य को 715 सड़कें, 2449 किमी. एवं 1699 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। इन सड़कों से 775 विशेष पिछड़ी जनजातीय बसाहटें लाभान्वित होगी। भारत सरकार द्वारा देश में राज्यों को 4831 किमी. लम्बाई की स्वीकृति में से राज्य को 2449 किमी. लम्बाई की स्वीकृति दी गई है, जो कि कुल स्वीकृति का 51 प्रतिशत है।

राष्ट्रीय राजमार्गों के आस-पास औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कोरबा-बिलासपुर इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर के निर्माण का निर्णय लिया गया है। उरगा-कटघोरा बाईपास बसना से सारंगढ़ (माणिकपुर) फीडर रूट, सारंगढ़ से रायगढ़ फीडर रूट और रायपुर-लखनादोन आर्थिक गलियारा परियोजनाओं की कुल लंबाई 236.1 किलोमीटर है, जिसके लिए भारत सरकार ने कुल 9208 करोड़ स्वीकृत किया है। केन्द्रीय सड़क निधि से सड़कों के निर्माण के लिए 908 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई है।
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बिजली बिल शून्य, आय में वृद्धि : पीएम सूर्य घर योजना बनी आमजनों के लिए वरदान

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए वरदान साबित हो रही है। बलौदाबाजार शहर के सदर रोड निवासी  राजेश केशरवानी ने इस योजना का लाभ उठाकर अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया है।अब उन्हें बिजली का बिल नहीं भरना पड़ता। श्री केशरवानी ने  बताया कि इस योजना की जानकारी उन्हें सोशल मीडिया और समाचार पत्रों से प्राप्त हुई, जिसके बाद उन्होंने बिजली विभाग से संपर्क कर आवश्यक मार्गदर्शन लिया।


आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और सरल है, जिसे उन्होंने बिना किसी कठिनाई के पूरा किया। श्री केशरवानी को सोलर सिस्टम स्थापना पर 78,000 की सब्सिडी प्राप्त हुई। पिछले छह महीनों से यह प्रणाली बिना किसी रुकावट के कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें हर महीने 2000 से 2500 तक का बिजली बिल भरना पड़ता था, लेकिन अब उनका बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है। उन्होंने कहा कि यह योजना सिर्फ आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने जिले के नागरिकों से अपील की है कि वे भी इस योजना का लाभ उठाकर न केवल बिजली की बचत करें, बल्कि हर महीने की आय में भी सकारात्मक योगदान प्राप्त करें। श्री केशरवानी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना आमजन के जीवन में सच्चे अर्थों में बदलाव ला रही है और देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रही है।
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पहाड़ी कोरवाओं के लिए चिरायु योजना बन रही वरदान

चिरायु योजना बच्चों के लिए वरदान बन गई है। खासकर ऐसे परिवार जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, जो दूसरे शहरों में जाकर किसी निजी अस्पताल में इलाज नहीं करा सकते। आदिवासी बाहुल्य जशपुर जहां विशेष पिछड़ी जनजाति  के लोग भी निवास करते हैं। यह योजना गरीब और जरूरतमंदों के लिए सहारा बन रही है। दिल की बीमारी से जूझ रही पहाड़ी कोरवा अंजलि बाई, अंशिका, रितेश या इनके जैसे कई ऐसे बच्चे हैं जो दिल या किसी अन्य बीमारी से जूझ रहे थे। चिरायु योजना ने उन्हें नवजीवन देने का काम किया है। 

     
जशपुर जिले के मनोरा विकासखण्ड के जंगलों के बीच बसे एक छोटे से ग्राम सोनक्यारी में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवार में जन्मी अंजली बाई। जिनका दिल की बीमारी का इलाज चिरायु योजना से किया गया है। छोटे छोटे काम कर घर का गुजारा चलाने वाले पिता नान्हू राम को जब पता चला की अंजली के दिल में छेद है तो उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था वह क्या करे। प्रारंभिक जांच मनोरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में होने के बाद चिरायु टीम के द्वारा उनका जांच किया गया। जिसमें पता चला कि अंजली के दिल में छेद है। अंजलि का रायपुर के एक बड़े निजी संस्थान में ले जाकर का उपचार किया गया। जहां सफल ऑपरेशन के बाद अंजली ठीक हो गयी। 

     इसी तहत जिले में कई गरीब परिवारों के बच्चे हैं जिनका सफल इलाज इस योजना के माध्यम से हुआ है। जिला मुख्यालय के पुरानीटोली निवासी सुदर्शन चौहान के पुत्र रितेश का निजी अस्पताल में जांच के बाद पता चला कि उसके दिल में छेद है। निजी अस्पताल में इलाज कराना मजदूरी करके अपने परिवार का जीवन-यापन करने वाले उनके पिता के लिए काफी मुश्किल था। फिर वे अपने बच्चे को जिला अस्पताल ले गए। जहां अस्पताल में डॉक्टरों के द्वारा चिरायु योजना की जानकारी दी गई और बेहतर इलाज के लिए रायपुर भेजा गया, जहां ऑपरेशन और बेहतर इलाज के बाद आज बच्चा स्वस्थ है। इसी तरह विकासखण्ड कुनकुरी के ग्राम बेहराटोली के निवासी कृतिबाई और धनेश्वर यादव की पुत्री  अंशिका की दिल की गंभीर बीमारी का प्रारंभिक इलाज रायपुर के मेडिकल कॉलेज, सत्यसाईं चिकित्सा संस्थान एवं भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में कराने के बाद चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल में अंशिका का दिल का ऑपरेशन किया गया। जिसमें कुल 14.50 लाख रुपयों का खर्च आया, जिसका वहन चिरायु योजना के अंतर्गत शासन द्वारा किया गया। 

      इसी प्रकार चिरायु अंतर्गत अपोलो चिल्ड्रन हॉस्पिटल चेन्नई में जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित 2 वर्षीय अन्वी बाई, 9 वर्षीय अनंत नाायक, 9 वर्षीय कुमार नायक का सफल ईलाज किया गया। इस योजना से जिला मुख्यालय स्थित चीरबगीचा निवासी नोवेल भगत, बीटीआई पारा के गर्वित सिंह का भी रायपुर के निजी अस्पताल में जन्मजात होंठ व तालू के विकृति का निःशुल्क सफल इलाज किया गया है। उल्लेखनीय है कि चिरायु योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों में जाकर बच्चों की संपूर्ण स्वास्थ्य की जांच की जाती है। जांच के उपरांत 44 प्रकार की बीमारी तथा विकृति की जानकारी होने के बाद चिरायु योजना से बच्चों का इलाज कराया जाता है। आवश्यकता होने पर बच्चों को देश भर के अच्छे हॉस्पिटल में ले जाकर उपचार भी कराया जाता है।
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