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परसा कोल ब्लॉक शुरू कराने राहुल गांधी से मिलने इंदौर पहुंचे ग्रामीण...

कहा- परियोजना को भूमि दे चुके हैं, और अब नौकरी न मिलने से रोजी रोटी के साथ भविष्य अंधकार में

 अंबिकापुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के इंदौर से गुजारी। राहुल गांधी की इस यात्रा में छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य जिले सरगुजा से 50 आदिवासियों का समूह उनसे मुलाकात करने इंदौर पहुंचा। जिले के उदयपुर विकासखंड में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) को आवंटित परसा कोयला परियोजना में आने वाले  कुल छः गांव  के ग्रामीणों ने राहुल गांधी को परियोजना शुरू कराने के लिए प्रार्थना पत्र देकर अपनी मांगों और समस्याओं से अवगत करवाया। सुरगुजा जिले का यह समूह इंदौर में भारत यात्रा में भी जुड़े और टीम राहुल गाँधी से बात कर अपने जिले के हित में राजस्थान की महत्वाकांक्षी योजना जल्दी से जल्द शुरू करवाने पर जोर दिया। वहीं कांग्रेस के नेतागणों ने भरोसा जताया की वह पार्टी के आलाकमान तक यह बात पहुंचाएंगे।

इसी महीने 3 नवंबर को इन्ही मांगों को लेकर परसा कोल परियोजना के आसपास के प्रभावित ग्रामों के 1700 से ज्यादा ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल और जिले के विधायक और स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्री टीएस सिंहदेव को भी प्रार्थना पत्र लिखा था। महत्वपूर्ण बात यह है की छत्तीसगढ़ और राजस्थान दोनों ही राज्यों में कांग्रेस की सरकार है और परसा खदान उनके परस्पर फायदे की परियोजना है।



ग्रामीणों ने पत्र में लिखा है कि " आरआरवीयूएनएल को वर्ष 2012 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में तीन कोयला खदान परसा ईस्ट केते बासेन, परसा और केते एक्सटेंशन का आवंटन किया गया था। जिसमें से पहली खदान का कार्य पिछले 10 वर्षों से चल रहा है। जबकि दूसरी खदान परसा कोल परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य पांच वर्ष पूर्व शुरू हुआ। जिसमें ग्राम साल्हि, जनार्दनपुर, फत्तेपुर, हरिहरपुर, तारा और घाटबर्रा के कुल 722 लोगों ने अपनी जमीन देकर मुआवजा प्राप्त कर लिया है। इसमें से 478 लोगों ने रोजगार के एवज में एकमुश्त मुआवजा ले लिया है जबकि 188 लोगों ने रोजगार का विकल्प चुना था और उनमें से अब तक 10 लोगों को नौकरी मिल चुकी है। शेष 178 लोग नौकरी पाने की प्रतीक्षा में हैं। किन्तु कुछ बाहरी गैर सरकारी संगठन द्वारा इस परियोजना के विरोध में कई तरह की भ्रांतियां फैलाने के कारण प्रभावितों इलाकों में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। जिसके दबाव में आकर तत्कालिक सरकार द्वारा परसा कोल परियोजना को रद्द करने का मन बना लिया है। इस स्थिति में एक बार फिर हमारे सामने भुखमरी की स्थिति पैदा होने लगी है। इसका कारण यह है की हमारी जमीन बिकने के बाद भी अब तक नौकरी नहीं मिल पाई है जिसका मुख्य कारण परसा कोल परियोजना का ऑपरेशन अब तक शुरू न हो पाना। इस वजह से गुजर बसर करने के लिए अब ना तो कृषि कर पा रहे हैं और न ही अब तक नौकरी मिल पाई है। इस वजह से अब हमें अपने परिवार के गुजर बसर के लिए मुआवजे की राशि खर्च करनी पड़ रही है। जो की एक तरह से हमारे परिवार के लिए भविष्य निधि की तरह है।"

क्या है राजस्थान खदान का मामला ?
सरगुजा जिले में स्थित परसा कोल परियोजना राजस्थान राज्य की विज इकाई आरआरवीयूएनएल को तत्कालीन यूपीए सरकार में आवंटित की गयी दूसरी कोयला खदान है। जिसको लेकर पिछले कुछ महीनों से रायपुर स्थित की कुछ गैर सरकारी संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है। हालाँकि बड़ा स्थानीय तबका राजस्थान सरकार की परियोजनाओं का स्वागत कर रहे है और सालो से खदानें खुलवाने की अपनी मांग पर अड़े हुए है। अब जिन ग्रामीणों  ने अपनी जमीन अधिग्रहण में दे दी है और मुआवजा प्राप्त कर लिया है उनमें परसा कोयला परियोजना में रोजगार की आश जगने लगी थी। और जब परियोजना के काम में एक बार फिर अवरोध की सूचना जैसे ही मिली सभी जमीन प्रभावितों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने खदान के समर्थक पुनः नौकरी की मांग के लिए आंदोलन शुरू कर दिया है। वहीं बेरोजगार युवकों ने जल्द नौकरी न मिलने पर अपने आंदोलन को उग्र करने की भी चेतावनी दी।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एकमत
मार्च के अंत में, कांग्रेस शासित राज्यों के दोनों मुख्यमंत्रियों ने रायपुर में अपनी तीन खनन परियोजनाओं को क्रियान्वित करने में आरआरवीयूएनएल के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की। इसके तुरंत बाद, भूपेश सरकार ने परसा ब्लॉक और पीईकेबी ब्लॉक के विस्तार के लिए मंजूरी दे दी थी। हालाँकि, आरआरवीयूएनएल संचालन का कार्य अब तक शुरू नहीं कर पाया है, जबकि स्थानीय लोग जिन्होंने अपनी जमीन और समर्थन दिया है, वे वर्षों से आजीविका के अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं और नौकरी न मिलने तथा रोजगार के अभाव में लाखों रुपये का नुकसान की बात भी कह  रहे हैं। इन सभी प्रभावित ग्रामीणों ने मई में भी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा आरआरवीयूएनएल के प्रबंध निदेशक (एमडी) को एक पत्र में कुछ स्वयं घोषित कार्यकर्ता के द्वारा परसा कोयला परियोजना को बदनाम करने के लिए 'अवैध विरोध' की बात लिखकर खदान खोलने की गुहार लगाई थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तो पेशेवर आन्दोलनकारीओं को सीधा कह दिया था की अगर उन्हें खदान और विद्युत् परियोजनाओं से कोई आपत्ति है तो पहले वह अपने घर का बिजली कनेक्शन कटवा दे। सरकार के निर्णायक रव्वैये को देखकरबाहरी आन्दोलनकारीओं ने चुप्पी साध ली थी और स्थानीय लोगो प्रशासन पर भरोसा बढ़ा है।   

परसा खदान परियोजना के विरोध में माननीय उच्च न्यायालय के सामने लगी सभी पांचो याचिका भी खारिज
छत्तीसगढ़ के उच्च न्यायालय ने मई 11, 2022 को परसा खदान परियोजना के कोल बेयरिंग एक्ट के तहत् अधिग्रहण के विरोध में दायर सभी पांच याचिकाओं को देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए लगाए गए सभी अरोपों और दलीलों को खारिज कर दिया था। विदेशी फंड से लदे संगठन क़ानूनी दांवपेंच और सोशल मीडिया पर भारी खर्च कर सुरगजा के विरुद्ध षड़यंत्र करते रहते है।  

पहले भी लिख चुके हैं राहुल गाँधी को पत्र
इन्ही ग्रामीणों ने गत माह जून में राहुल गाँधी को पत्र प्रेषित कर दोनों ही कांग्रेस- शासित राज्य होने की वजह से विकास-विरोधी गतिविधि चलाने वाले बाहरी लोगों को प्रतिबंधित करने तथा नौकरी के लिए अपनी मांग रखी थी। ग्राम साल्हि के वेदराम और उनके अन्य साथियों ने पुनर्वास एवं पुनर्व्यस्थापन योजना के तहत रोजगार के विकल्प का चयन किया था ताकि जल्दी से उन्हें रोजगार प्राप्त हो सके किन्तु पिछले 5 सालों से हम इसका इंतजार कर रहे है। परसा कोल माइंस को जमीन देकर मुआवजा भी उठा लिए हैं। और अब उनकी जमा पूंजी भी गुजर बसर में खर्च होने की बात लिखी थी।

इस तरह छत्तीसगढ़ के ये सभी आदिवासी ग्रामीण खदान के न खुलने से होने वाली रोजगार और नौकरी की परेशानियों इत्यादि मांगों के पूरा न होने की वजह से कल मध्यप्रदेश के इंदौर पहुंचकर भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने पहुंचे। किन्तु पुरजोर कोशिश के बावजूद राहुल के रैली में चलने वाले हुजूम में मिलने में सफल न हो सके। हालाँकि राहुल के टीम के एक सदस्य ने ग्रामीणों के प्रतिनिधी मंडल से पत्र लेकर मामले को राहुल तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

 

 

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पेड़ पर फांसी लगाकर बुजुर्ग ने दी जान

 जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़ दर्पण)।  जिले में एक बुजुर्ग ने पहाड़ पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है। उसका शव वहां एक पेड़ पर लटका हुआ मिला है। बताया गया है कि वह सोमवार को ही घर से घूमने निकला था। मगर बाद में वह लौटा ही नहीं। अगले दिन उसकी मौत की खबर सामने आई है। मामला अकलतरा थाना क्षेत्र का है।

मिली जानकारी अनुसार  कटनई निवासी बोटोंग डहरिया(65) सोमवार दोपहर को खाना खाने के बाद घूमने निकला था। उसने परिजनों को भी इस बात की जानकारी दी थी। इसके बाद शाम तक उसका कुछ पता नहीं चला। उधर, जब शाम तक वह लौटा नहीं। तब उसके परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल पाया। रात तक परिजन आस-पास ही उसकी खोजबीन करते रहे। मगर कोई जानकारी नहीं मिल सकी थी।

सूचना मिलने पर परिजन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। जिसके बाद शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

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अब पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं, मात्र सूचना देनी होगी

अपनी भूमि में वृक्षों की कटाई स्वयं करवा सकेंगे भूमिस्वामी

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर राज्य शासन द्वारा निजी भूमि पर कृषि के रूप में रोपित वृक्षों और प्राकृतिक रूप से उगे वृक्षों की कटाई के नियमों का सरलीकरण किया गया है। जिसके अनुसार अब भूमिस्वामी अपनी भूमि में कृषि के रूप में रोपित वृक्षों की कटाई स्वयं करवा सकेंगे। पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी, उन्हें मात्र अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को सूचना देनी होगी। भूमिस्वामी वन विभाग से भी वृक्ष कटवा सकेंगे।

इसी प्रकार भूमि पर प्राकृतिक रूप से उगे हुए वृक्षों की कटाई के लिए भूमिस्वामी को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को आवेदन देना होगा। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को निर्धारित प्रक्रिया के तहत निश्चित समयावधि में लिखित अनुमति देनी होगी। यदि आवेदक को समयावधि के बाद अनुमति नहीं मिलती तो वे पेड़ कटाई के लिए स्वतंत्र होंगे।

प्राकृतिक रूप से उगे वृक्षों की कटाई की अनुमति के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को आवेदन प्राप्ति के 45 कार्य दिवस के भीतर निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति देनी होगी। यदि आवेदक को लिखित अनुमति प्राप्त नहीं होती है तो वे स्मरण पत्र दे सकेंगे। यदि अगले 30 कार्यदिवस के भीतर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से लिखित अनुमति प्राप्त नहीं होती है तो इसे अनुमति माना जाएगा और भूमिस्वामी वृक्षों की कटाई के लिए स्वतंत्र होगा। इस संबंध में हुए विलम्ब एवं नियमों का उल्लंघन होता है तो उसके लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व उत्तरदायी होंगे। यदि भूमि स्वामी चाहें तो वन विभाग के माध्यम से भी वृक्षों की कटाई करा सकेंगे। एक कैलेण्डर वर्ष भूमि पर प्राकृतिक रूप से उगे अधिकतम 4 वृक्ष प्रति एकड़ के मान से एवं अधिकतम कुल 10 वृक्षों की कटाई की अनुमति दी जा सकेगी।

प्राकृतिक रूप से उगे हुए वृक्षों की कटाई के लिए भूमिस्वामी द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को दिए गए आवेदन के आधार पर राजस्व अधिकारी और वन अधिकारी द्वारा संयुक्त निरीक्षण किया जाएगा। वृक्षों के संबंध में भूमि स्वामी के हक, राजस्व अभिलेखों में पंजीयन, वृक्षों की शुष्कता/परिपक्वता, भूस्वामी के कृषि व्यवसाय की अपरिहार्यता आदि को शामिल करते हुए निरीक्षण प्रतिवेदन 30 कार्यदिवस में दिया जाएगा।

इसी प्रकार भूमि स्वामी अपनी भूमि में कृषि के रूप में रोपित वृक्षों की कटाई, राजस्व अभिलेखों में पंजीयन के आधार पर, करवा सकेंगे। कटाई से एक माह पूर्व, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी को कटाई का कारण, प्रजाति एवं संख्या स्पष्ट उल्लेखित करते हुए, सूचना निर्धारित प्रारूप में देना आवश्यक होगा। सूचना के सथ पंजीयन संबंधी राजस्व अभिलेख एवं स्वघोषणा पत्र निर्धारित प्रारूप में देना होगा। भूमिस्वामी द्वारा प्रस्तुत सूचना एवं स्वघोषणा पत्र का दस्तावेजी एवं भौतिक सत्यापन, वृक्ष कटाई के पूर्व अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, पटवारी एवं वनपाल के माध्यम से कराना सुनिश्चित करेंगे।

वृक्षों की कटाई के लिए प्रक्रिया
भूमिस्वामी द्वारा लिखित में इच्छा व्यक्त किए जाने पर, उसकी भूमि में कृषि के रूप में रोपित वृक्षों तथा प्राकृतिक रूप से उगे वृक्षों की कटाई वन विभाग द्वारा की जा सकेगी। वन विभाग को आवेदन की प्राप्ति के 30 कार्य दिवस के भीतर, वन मण्डलाधिकारी वृक्षों की कटाई एवं डिपो तक अभिवहन सुनिश्चित करते हुए निर्धारित दर पर लकड़ी का मूल्य परिगणित करते हुए, राज्य के अनुसूचित जनजाति वर्ग के भूमिस्वामी के संदर्भ में छत्तीसगढ़ आदिम जनजातियों का संरक्षण (वृक्षों में हित) अधिनियम 1999 के प्रावधानों के तहत कुल मूल्य का 95 प्रतिशत राशि भूमि स्वामी के बैंक खाते में निक्षेपित कराएगा एवं शेष 05 प्रतिशत राशि वन विभाग के निर्धारित खाते में जमा की जाएगी। जमा राशि से, प्रत्येक काटे जाने वाले वृक्ष के 05 गुना की संख्या में वन विभाग द्वारा वृक्षारोपण एवं उनका अनुरक्षण किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ राज्य में जहां छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 प्रभावशील है, वहां भूमि स्वामी को कृषि के रूप में रोपित एवं प्राकृतिक रूप से उगे हुए वृक्षों की कटाई के लिए वन विभाग द्वारा आवेदन प्राप्ति के बाद 30 कार्य दिवस के भीतर तथा रोपित वृक्षों की कटाई एवं डिपो तक परिवहन सुनिश्चित करते हुए एवं निर्धारित दर पर लकड़ी का मूल्य परिगणित करते हुए कुल मूल्य की 90 प्रतिशत राशि भूमि स्वामी के बैंक खाते में जमा करायी जाएगी तथा 10 प्रतिशत राशि वन विभाग के निर्धारित खाते में जमा की जाएगी। जमा राशि से प्रत्येक काटे जाने वाले वृक्ष के 10 गुना की संख्या में वन विभाग द्वारा वृक्षारोपण एवं उनका अनुरक्षण किया जाएगा। वन विभाग द्वारा दोनों ही मामलों में न्यूनतम 6 फीट के वृक्ष रोपित किए जाएंगे एवं रोपण की जानकारी प्रत्येक वर्ष अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के माध्यम से कलेक्टर को दी जाएगी।

 

 

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शिवसेना ने किया भाजपा प्रवक्ता सुधांशुत्रिवेदी का पुतला दहन

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भाजपा प्रवक्ता द्वारा  छत्रपति शिवाजी महाराज पर टिप्पणी को लेकर छत्तीसगढ़ शिवसेना ने सुधांशु त्रिवेदी पर कार्रवाई को लेकर पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन दिया और बूढ़ा तालाब स्थित धरना स्थल पर शिवसैनिकों ने सुधांशु त्रिवेदी के पुतलेे क़ी  जूते और चप्पलों से पिटाई कर  जलाया। 

वहीं शिवसेना महिला प्रदेश अध्यक्ष  ज्योति द्विवेदी शिवसेना छत्तीसगढ़ द्वारा सुधांशु त्रिवेदी के छत्रपति शिवाजी पर की गईं अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में शिवसेना प्रदेश अध्यक्ष डॉ आनंद मल्होत्रा के निर्देशानुसार उसका पुतला दहन किया। ज्ञात हो कि एक टीवी शो में सुधांशु त्रिवेदी ने यह बात कही थी कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने औरंगजेब से 5 बार माफी मांगी, छत्रपति शिवाजी महाराज पूरे विश्व के हिंदुओं के आदर्श हैं जिन्होंने हिंदुत्व की रक्षा के लिए और हिंदू शासकों की ताकत बनकर अपना पूरा जीवन निछावर कर दिया। ऐसे महान शासक और हिंदुओं के आस्था के प्रतीक छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में की गईं टिप्पणी के विरोध में सुधांशु त्रिवेदी का पुतला दहन बूढ़ा तालाब में किया गया। 

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से महिला सेना के प्रदेश अध्यक्ष ज्योति द्विवेदी, सुनील कुकरेजा, कामगार सेना के जिला अध्यक्ष परमानंद वर्मा, मोहन डहरिया, विरेन्द्र देशलहरे, गंगा दास मनहरे, राजेंद्र कोसले सुषमा तिवारी प्रीति रितु बागवान उत्तरा बागवान ,तरुण साहू , मोनु रहण्डाले, घांश्यम साहू, करन देवांगना ,कृष्णा डहरे, गोलु यादव, टिनकु यादव , बंटी अजय , दानिश सेन , मयंक साहू, ,अजित यादव , भूपेन्द जंगेल महिला शिवसेना उपस्थित थे।

 
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बलौदाबाजार नगर को मिली बड़ी सौगात, मंत्री डहरिया ने 5 करोड़ के कार्यों का किया भूमिपूजन-शिलान्यास

 बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़ दर्पण)। नगरीय प्रशासन तथा विकास एवं श्रम मंत्री डॉ शिवकुमार डहरिया ने बलौदाबाजार के नगरवासियों को बड़ी सौगात दी है। यहां उन्होंने 5 करोड़ के कुल 68 विभिन्न कार्यों का भूमिपूजन एवं शिलान्यास किए। साथ ही उन्होंने नगर वासियों की मांग पर नगर के लिए 2 करोड़ 74 लाख रुपये के विभिन्न कार्यो स्वीकृत दी है। जिसमें 1 करोड़ 24 लाख रुपये जल आवर्धन कार्य, 1 करोड़ 24 लाख रुपये डोर टू डोर सफाई समाग्री,जेसीबी हेतु एवं 10-10 लाख रूपए सिख समाज,सेन समाज एवं देवांगन समाज के लिए सामुदायिक भवन के लिए प्रदान किया है।

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ शिवकुमार डहरिया ने कहा मुख्यमंत्री भुपेश बघेल के नेतृत्व में लगातार सभी नगरीय निकायों में स्वच्छता एवं डोर टू डोर क्लेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी का ही परिणाम है कि हमारा राज्य पूरे देश मे लगातार तीन सालों से स्वच्छता के क्षेत्र में अव्वल है। साथ ही उन्होंने नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना एवं श्री धन्वंतरि जेनेरिक मेडिकल स्टोर से हितग्राहियों को हो रहे फायदे को गिनाएं।


 

इस दौरान बलौदाबाजार विधायक प्रमोद शर्मा,कृषक कल्याण परिषद अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा,छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम शैलेश नितिन त्रिवेदी,छत्तीसगढ़ जीव जंतु कल्याण बोर्ड अध्यक्ष विद्याभूषण शुक्ल,पूर्व विधायक जनक राम वर्मा,नगर पालिका अध्यक्ष चितावर जायसवाल, जिलाध्यक्ष हितेंद्र ठाकुर,पार्षद रूपेश ठाकुर सहित समस्त पार्षद,एल्डरमैन साथ ही बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि,गणमान्य नागरिक, मीडिया कर्मी उपस्थित थे।

भूमिपूजन में वार्ड क्र-2 एवं 4 में कलेक्ट्रेड रोड से नया बस स्टैण्ड के पीछे उद्यान तक बी.टी. रोड निर्माण कार्य हेतु 106.48 लाख रुपये,नगर भवन में जीर्णोद्धार कार्य हेतु 92.19 लाख रूपये,वार्ड क्र.10 मटन मार्केट में स्लॉटर हाऊस सी. सी. रोड एवं बाऊण्ड्रीवॉल निर्माण कार्य के लिए 29.80 लाख रुपये,वार्ड क्र. 17, 18 एवं 19 आंगनबाड़ी केन्द्र से 04. मणीकंचन केन्द्र होते हुए वाशिंग सेंटर तक 525 मीटर आर.सी.सी. नाली निर्माण कार्य के लिए 24 लाख रुपये एवं अधोसंरचना मद अंतर्गत विभिन्न 64 निर्माण कार्य हेतु 247.53 लाख रुपये शामिल है।

इस तरह कुल 68 कार्य के लिए 499.91 लाख रुपये का भूमिपूजन किया गया है। इस दौरान नगर पालिका अधिकारी यमन देवांगन सहित नगरीय निकाय विभाग के समस्त कर्मचारी-अधिकारी गण उपस्थित थे।

 

 

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तेज रफ्तार कार ने बाइक को ठोका फिर पेड़ टकराई,1 की मौत, 6 घायल

 सूरजपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। प्रदेश में लगातार सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। जिले में मंगलवार को एक तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार 2 लोगों को तेज टक्कर मार दी। हादसे के बाद कार भी एक पेड़ से जा टकराई। इसमें कार सवार एक युवक की मौत हो गई, वहीं 6 लोग घायल हैं। इनमें से 2 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसा प्रतापपुर रोड पर कल्याणपुर जंगल के पास हुआ।

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जानकारी के मुताबिक, गुदरी का रहने वाला प्रकाश सिंह अपने ड्राइवर के साथ प्रतापपुर की ओर आ रहा था। वहीं चिराग सिन्हा, विक्की, पंकज समेत अन्य युवक दो बाइक पर सवार होकर अंबिकापुर से प्रतापपुर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान लटूरी चौकी क्षेत्र में कल्याणपुर जंगल के पास तेज रफ्तार कार ने दोनों बाइक सवारों को टक्कर मार दी। टक्कर मारने के बाद कार पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार सामने से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

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कार में सवार प्रकाश सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उसका ड्राइवर और दो बाइकों पर सवार 5 युवक घायल हैं। इनमें से गंभीर रूप से घायल 2 लोगों का इलाज मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर के ICU में चल रहा है। बाकी घायल भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही भर्ती हैं। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है।

 

 

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14 वर्ष से कम बालक व बालिकाओं को किसी तरह नियोजित करना अपराध

 कोरिया (छत्तीसगढ़ दर्पण)। श्रम पदाधिकारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन श्रम विभाग की ओर से बाल श्रम (प्रतिषेध व विनियमन) अधिनियम 1986 के प्रावधान अनुसार 14 वर्ष से कम बालक व बालिकाओं को किसी तरह नियोजित करना अपराध की श्रेणी में माना गया है तथा बाल श्रम (प्रतिषेध व विनियमन) संशोधन अधिनियम 2017 के तहत् 14 से 18 वर्ष के बालक व बालिकाओं को खतरनाक व जोखिम पूर्ण नियोजन में नियोजित नहीं किया जा सकता है। 

 

उक्त नियमों को लागू व पालन कराने के उद्देश्य से जिले में श्रम विभाग महिला व बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण ईकाई तथा पुलिस विभाग की जिला टास्क फोर्स की टीम की ओर से 29 नवम्बर 2022 को बैकुण्ठपुर व पटना क्षेत्र के 50 से अधिक संस्थानों में निरीक्षण किया गया व नियोजकों को समझाईश दी गई।

 
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पुलिस प्रमोशन : 17 निरीक्षक बने डीएसपी, 8 कंपनी कमांडर बने सहायक सेनानी...

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। राज्य सरकार ने 25 पुलिस निरीक्षकों व कंपनी कमांडर का प्रमोशन किया है। 17 निरीक्षक जहां डीएसपी बनाये गये हैं, तो वहीं 8 कंपनी कमांडर को सहायक सेनानी के पद पर पदोन्नत किया गया है। राज्य सरकार ने निरीक्षक से डीएसपी के पद पर प्रमोशन के लिए 16 नवंबर को डीपीसी की थी। डीपीसी के बाद कुल 25 पुलिसकर्मियों को प्रमोशन दिया गया है। हालांकि प्रमोशन के बाद अभी तमाम पुलिस अधिकारी पूर्व की भांति अपने पदों पर बने रहेंगे, उनकी पोस्टिंग की लिस्ट जल्द ही जारी की जायेगी।

 

 
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3 से 8 दिसंबर तक रद्द रहेगी बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस...

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पूर्व मध्य रेलवे सोनपुर मंडल के बरौनी स्टेशन में तीसरी लाइन कनेक्टिविटी के लिए नॉन इंटरलॉकिंग का कार्य किया जाएगा। यह कार्य बरौनी रेलवे स्टेशन में 4 से 8 दिसम्बर तक किया जायेगा। इस कार्य के फलस्वरुप 3 से 8 दिसम्बर तक बरौनी से छूटने वाली 15231 बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस रद्द रहेगी। वहीं 4 से 9 दिसम्बर तक गोंदिया से छूटने वाली 15232 गोंदिया –बरौनी एक्सप्रेस रद्द रहेगी।

 

 

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प्रदेश में मातृत्व मृत्यु दर में बड़ी गिरावट, 159 से घटकर 137 हुई...

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। छत्तीसगढ़ में मातृत्व मृत्यु दर (MMR) में बड़ी गिरावट आई है। राज्य शासन द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिए जाने के कारण वर्ष 2016 से 2018 के बीच 159 एमएमआर वाले छत्तीसगढ़ का एमएमआर अब घटकर 137 पर पहुंच गया है। प्रदेश में मातृत्व मृत्यु दर का अब तक का यह सबसे न्यूनतम आंकड़ा है।

भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा 28 नवम्बर को वर्ष 2018 से 2020 के बीच देश में मातृत्व मृत्यु पर विशेष बुलेटिन (SRS - Sample Registration System) जारी किया गया है। इसके मुताबिक तीन वर्षों में प्रदेश के एमएमआर में 22 अंकों की कमी आई है। एसआरएस के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में प्रति एक लाख जीवित बच्चों के जन्म पर मातृ मृत्यु की दर 159 से घटकर अब 137 हो गई है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में गर्भवती और शिशुवती महिलाओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने सुपोषण अभियान संचालित किया जा रहा है। मातृत्व स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल और गर्भवती व शिशुवती महिलाओं को हर तरह का इलाज मुहैया कराने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार सुदृढ़ीकरण किया गया है। ज्यादा जोखिम वाले गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की नियमित जांच और निगरानी की जा रही है।

राज्य में संस्थागत प्रसवों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। शासकीय अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव की भी सुविधाएं बढ़ी हैं। समुदाय और मैदानी स्तर पर मितानिनें और एएनएम मातृ व शिशु स्वास्थ्य पर लगातार नजर रख रही हैं। राज्य शासन के इन सब कदमों की वजह से प्रदेश में मातृत्व मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है।

 

 

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इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में हुई नए बाघ की पुष्टि

 जगदलपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। हाल ही के दिनों में इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में एक नये बाघ देखने की पुष्टि की गई हैं। इन्द्रावती टाइगर रिजर्व के उप निदेशक  गणवीर धम्मशील ने बताया कि इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में नया  बाघ देखने को मिला है जिसकी पुष्टि डब्ल्यू आई आई टाइगर सेल देहरादून द्वारा की गई है।

इन्द्रावती टाइगर रिजर्व बाघों के रहवास के लिए उपयुक्त स्थल है, जहां बाघ के अलावा अन्य वन्यजीव भी  हैं। जिसमें मुख्य रूप से वन भैंसा जो छत्तीसगढ़ राज्य का राजकीय पशु यहां पाया जाता है, साथ ही गौर, तेन्दुआ, भालू, नीलगाय, हिरण, सांभर, जंगली सुअर इत्यादि वन्यप्राणियों का भी यह रहवास स्थल है। छत्तीसगढ़ के इन्द्रावती टाइगर रिजर्व 2799.086 वर्ग कि.मी. के भौगोलिक क्षेत्र में फैला हुआ है जो महाराष्ट्र एवं तेलंगाना के वनक्षेत्र से लगा हुआ है जो बाघों के विचरण के लिए उपयुक्त कॉरिडोर का काम करता है।

 

इन्द्रावती टाइगर रिजर्व प्रबंधन वन्यजीवों की मॉनिटरिंग एवं सुरक्षा का कार्य लगातार कर रहा है एवं मैदानी अमलों द्वारा फुट पेट्रोलिंग के माध्यम से लगातार वन्यजीवों की सुरक्षा एवं निगरानी की जा रही है। इन्द्रावती टाइगर रिजर्व के उप निदेशक ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के लिए ग्रामीणों के साथ मिलकर वन्यजीव संरक्षण का कार्य लगातार किया जा रहा है। जिससे वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण एवं युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।

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अऩुकंपा नियुक्ति शिक्षाकर्मी कल्याण संघ की महाकफन अनोखी रैली 30 को

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रायपुर के बूढ़ा तालाब स्थित धरना स्थल में 40 दिनों से धरने में बैठे अऩुकंपा नियुक्ति शिक्षाकर्मी कल्याण संघ क़ा  संज्ञान लेने सरकार या सरकार के प्रतिनिधि अभी तक धरने स्थल में नहीं पहुंचे हैं। अनुकंपा नियुक्ति के लिए आंदोलन में बैठे विधवाएं और परिजनों का 40 वें दिन और अनशन 36 वें दिन के साथ ही सोमवार को संघ के सभी लोग भूख हड़ताल पर हैं। 

संघ की प्रांताध्यक्ष  माधुरी मृगे ने विजन न्यूज़ सर्विस को बताया कि धरने में बैठे दिवंगत शिक्षाकर्मी की विधवा और परिजनों के दुःख  दर्द को सुनने  सरकार के प्रतिनिधि नहीं पहुंचे हैं। 

 

प्रदेश उपाध्यक्ष माधुरी चंद्रा ने बताया कि हम अपनी संघ को अकेला मानकर 3 दिसम्बर  को आत्मदाह की चेतावनी सरकार को दी थी लेकिन अब हमारा संघ अकेला नहीं  है। हमारे संघ के साथ प्रदेश शिक्षक, शिक्षक  संगठन, विपक्ष पार्टी, महिला मोचा संगठन और प्रदेश की जनता अब  हमारे संघ के साथ हैं। अऩुकंपा नियुक्ति शिक्षाकर्मी कल्याण संघ ने अपने संघ और समर्थन देने वाले सभी संगठन से चर्चा कर अपने विचार में पर्वितन कर 3 दिसम्बर को आत्मदाह के बदले अब  संघ 30 नवम्बर को महाकफन अनोखी रैली निकाल कर अपने और अपने परिवार के बच्चों की अरमानों की रैली निकालने की बात  विजन न्यूज़ सर्विस को बताई। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार अऩुकंपा नियुक्ति शिक्षाकर्मी कल्याण संघ की मांग पूरी नहीं करती  तब तक मांगों को लेकर हमारी संघ धरने में रहेगा । 

 

 

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नशे की हालत में वाहन चलाते 200 से अधिक लोगों पर कार्रवाई

 कोरबा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। नशे में वाहन चलाने वाले 200 लोगो के खिलाफ पुलिस ने    मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की है।

इस कारवाई में शराब पीकर वाहन चलाते पाए गए 114  वाहन को  जप्त भी किया गया है। पुलिस ने कहा कि लोग सड़क पर वाहन खड़ी कर यातायात बाधित करने और दुर्घटना कारित करने वाले गाड़ियों की वजह से परेशान हैं इसलिए ऐसे 15 वाहनों के विरुद्ध धारा 283 भादवि के अंतर्गत कार्रवाई की गई  है।

 

 

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लर्निंग गैप और लर्निंग लॉस से बच्चे प्रभावित, कोण्डागांव जिले में 7200 छात्र चिन्हांकित

 कोण्डागांव (छत्तीसगढ़ दर्पण)। जिला कलेक्टर कोण्डागांव दीपक सोनी के निर्देशन में चल रहे आकांक्षी जिला प्रोग्राम में नीति आयोग की सहयोगी संस्था पीरामल फाउंडेशन एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को विकासखंड कोण्डागांव के बीआरसी भवन में एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कोरोना महामारी के दौरान लर्निंग गैप और लर्निंग लॉस से प्रभावित बच्चों में से अभी शुरुआत में कोण्डागांव जिले के 7200 बच्चों को चिन्हांकित किया गया है। इन बच्चों के लिए विद्यालय से घर जाने के बाद अतिरिक्त टूल के रूप में  माइंडस्पार्क ऐप का लाइसेंस वर्जन निःशुल्क उपलब्ध करवाया जा रहा है।

इस ऐप में शिक्षण सामग्री और प्रश्नों के स्तर को बच्चों के कक्षा स्तर के अनुरूप रखा गया है एवं बच्चों के लेवल चेक करते हुए उनके स्तर को सुधारकर ऊपर उठाने का प्रयास किया गया है। शिक्षा विभाग कोण्डागांव में इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन हेतु जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार पटेल, जिला मिशन समन्वयक महेंद्र पांडे मार्गदर्शन में सहायक कार्यक्रम समन्वयक रूपसिंह सलाम के नेतृत्व में पीरामल फाउंडेशन से एडीसी प्रदीप राव की सहायता से संचालित किया जा रहा है। एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला में विकासखंड स्रोत समन्वयक रामलाल नेताम, चयनित शालाओं के शिक्षक और संकुल समन्वयक उपस्थित थे।

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विधानसभा उप निर्वाचन-2022 : मतदान दलों को दिया गया प्रशिक्षण

 कांकेर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक-80 भानुप्रतापपुर (अजजा) उप निर्वाचन के लिए नियुक्त 256 मतदान दलों व 61 रिजर्व मतदान दलों में से 156 मतदान दलों को आज शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नरहरदेव में प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें मतदान दिवस को मतदान शुरू होने के पहले मॉकपोल कराने तत्पश्चात सीआरसी कराने, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को सीलिंग करने, पीठासीन अधिकारी व मतदान अधिकारियों का कर्तव्य, चैलेंज वोट, टेंडर वोट, परिणीयत व अपरिणीयत लिफाफा इत्यादि के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई तथा उससे संबंधित शंका, समस्या का समाधान भी किया गया। 

निर्वाचन प्रेक्षक (सामान्य) डॉ. एम.व्ही. वैंकटेश ने भी निर्वाचन प्रशिक्षण का अवलोकन किया तथा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे मतदान दलों से प्रश्न भी पूछे। रिटर्निंग ऑफिसर सुमीत अग्रवाल ने भी मतदान दलों के प्रशिक्षण का निरीक्षण किया। प्रशिक्षण प्रभारी व जिला शिक्षा अधिकारी भुवन जैन की उपस्थिति में मास्टर ट्रेनर्स की ओर से मतदान दलों का प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स सुरेश चंद श्रीवास्तव, नवरत साव व गोविन्द सार्वा भी उपस्थित थे।

 
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रोको अऊ टोको के स्वयंसेवक ने ग्रामीण स्तर पर कोविड टीकाकरण कराने किया जागरूक

 सूरजपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। सूरजपुर जिले के अंतर्गत विकासखंड भैयाथान के ग्राम जूर एवम बन्जामे रोको अउ टोको के स्वयंसेवक ने प्रत्येक पारा मोहल्ला में पहुंचकर कोविड टीकाकरण के पहला, दूसरा व तीसरा, प्रिकाशन खुराक से छूटे हुए हितग्राहियों से संपर्क एवम संदेश के माध्यम टीकाकरण कराने के लिए जागरूक किया। साथ ही स्वयंसेवक ने ग्रामीणों से अपील किया कि अपने रिश्तेदार, संबंधी, पड़ोसी तथा स्वयं के घर के सदस्य जिन्होंने कोविड का टीका नहीं लगवाए है उन्हें जागरूक कर टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित करें।

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बलात्कारी ब्रम्हानंद को बचाने भाजपा नेताओं की बौखलाहट अनैतिक और असंवैधानिक : कांग्रेस

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)।  प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि यह दुर्भाग्यजनक है कि देश में सरकार चलाने वाले दल के नेता कानून का मजाक उड़ाते हुये एक अपराधी के पक्ष में लामबंध होकर सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी के पक्ष में खड़े है। भाजपा का रवैया गैरकानूनी, अतिवादी और कानून और संविधान का माखौल उड़ाने वाला है। झारखंड पुलिस को अपराधी ब्रह्मानंद की गिरफ्तारी के लिये आने की खबरों पर भाजपा ने जो बौखलाहट दिखाई है वह अनैतिक और असंवैधानिक है। एक अपराधी को बचाने के लिये जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी लामबंद हुयी है, भारतीय जनता पार्टी के वास्तविक चरित्र को दिखाता है। ब्रह्मानंद नेताम के ऊपर में 15 साल की मासूम बच्ची के साथ दुराचार के आरोप है। एक मासूम बच्ची को जबरिया देह व्यापार में ढकलने के आरोप है। उनके ऊपर 376 के तमाम धाराओं के तहत इसके अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत उनके ऊपर मुकदमा दर्ज हैं। ऐसे अपराधी को पुलिस के हवाले स्वयं करने के बजाय भारतीय जनता पार्टी के नेता उसको पुलिस से बचाने के लिये पुलिस को चुनौती दे रहे है। ऐसा दल जो देश की सरकार चला रही है एक ऐसा दल जो भारत की संघीय व्यवस्था को संभालने की जिसकी जवाबदारी है उस दल के नेता एक अपराधी के बचाव में देश के कानून का मखौल उड़ा रहे है। महिलाओं के इज्जत को तार-तार करने वाले और बच्चियों के इज्जत को तार-तार करने वाले बलात्कारी के पक्ष में भारतीय जनता पार्टी खड़ी है नारे बाजी कर रहे है ये तो बेशर्मी की पराकाष्ठा है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है अपराधी के बचाव में बयानबाजी, उसे छिपाने तथा अपराधी को संरक्षण देने के आरोप में रमन सिंह, बृजमोहन अग्रवाल, नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज होना चाहिये।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि ब्रह्मानंद के खिलाफ जब एफ.आई.आर. दर्ज किया गया था तब 15.5.2019 को झारखंड में भाजपा की सरकार थी और भाजपा के नेता रघुवर दास मुख्यमंत्री थे। आरोपी भाजपा का पूर्व विधायक है प्रभावशाली नेता है इसलिये भाजपा ने अपने नेता को बचाने के लिये उस समय गिरफ्तारी नहीं किया जबकि पीड़िता के बयान के आधार पर उसके खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज हुआ था। इस बात की भी जांच होनी चाहिये कि अपने पूर्व विधायक को बचाने के लिये किन भाजपा नेताओं ने तत्कालीन रघुवर दास की सरकार पर दबाव बनाया था? बलात्कार का आरोपी सामूहिक बलात्कार का आरोपी जिसके ऊपर में पॉस्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हो वह बिना उच्च राजनैतिक संरक्षण के इतने दिन तक खुलेआम नहीं घूम सकता।

 
 
 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि भानुप्रतापपुर के भाजपा प्रत्याशी ब्रह्मानंद नेताम के ऊपर जमशेदपुर के थाना टेल्को में प्राथमिकी बुक पन्ना क्रमांक 19138, प्राथमिकी क्रमांक 84/2019 धारा दिनांक 15.05.2019 धारा 366ए, 376, 376(3), 376 डी डी, 120 बी भादवि, 4,6 पॉक्सो एक्ट एवं 4,5,6,7,9 अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम दर्ज है। इस दुराचार में ब्रह्मानंद नेताम के साथ भाजपा नेता दीपांकर सिन्हा, नरेश सोनी भी था। ब्रम्हानंद नेताम सहित इन भाजपा नेताओं ने एक 15 साल की नाबालिग मासूम बच्ची के साथ गैंगरेप किया था। पीड़िता के द्वारा अदालत में धारा 164 के बयान में दिये बयान में ब्रम्हानंद नेताम का नाम लिया साथ ही मामला नाबालिग और पॉस्को एक्ट का था तो इसकी विवेचना नगर पुलिस अधीक्षक पूर्वी सिंह भूमि, जमशेदपुर के द्वारा दी गयी पुलिस अधीक्षक की जांच में भी ब्रम्हानंद नेताम के ऊपर लगे आरोपों की पुष्टि हुई है। नगर पुलिस अधीक्षक के जांच प्रतिवेदन में 10वें क्रम ब्रम्हानंद नेताम थाना चारामा (छत्तीसगढ़) पूर्व विधायक भानुप्रतापपुर का नाम है। ऐसे अपराधी को भाजपा बचा रही है।

 

 

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रमनराज के आरक्षण विरोधी षडयंत्रों में मूकदर्शक बने भाजपाई, चुनावी लाभ के लिए कर रहे अनर्गल बयानबाजी

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। आरक्षण और पीएससी भर्ती प्रक्रिया पर भारतीय जनता पार्टी के बयान पर कड़ा प्रतिवाद करते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि रमन सरकार ने अनुसूचित जाति वर्ग के आरक्षण में 4 प्रतिशत की कटौती की। प्रभावित वर्ग से बिना चर्चा बिना सहमति के एससी वर्ग का आरक्षण 16 परसेंट से घटाकर 4 परसेंट किया गया। भाजपा के इस अधिनायकवादी रवैया से व्यथित होकर प्रभावित वर्ग के प्रतिनिधियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। रमन सरकार ने आरक्षित वर्ग के हितों के खिलाफ़ षडयंत्र पूर्वक न्यायालय में आंकड़े छुपाए। विगत दिनों पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठतम आदिवासी विधायक ननकीराम कंवर ने भी रमन सरकार के आरक्षण विरोधी कृत्य को उजागर किया था। 

 

बिलासपुर उच्च न्यायालय के फैसले में स्पष्ट रूप से वर्णित है कि सीएस और ननकीराम कमेटी के दस्तावेजों को न्यायालय में प्रस्तुत ही नहीं किया गया। कमेटी के महत्वपूर्ण दस्तावेजों का जिक्र ना शपथ पत्र में था और ना ही 2018 के पूर्व दाखिल मूल जवाब और संशोधित जवाब में। भूपेश बघेल सरकार आने के बाद जब न्यायालय में उक्त दस्तावेजों को प्रस्तुत करने की अनुमति मांगी गई तो न्यायालय ने इसी आधार पर खारिज कर दिया कि पूर्ववर्ती रमन सरकार को पर्याप्त समय दिया गया था और उक्त दस्तावेजों का जिक्र शपथ पत्र में भी नहीं है। अब छत्तीसगढ़ के भाजपा नेता केवल चुनावी लाभ के लिए गलत बयानी कर भ्रम फैला रहे हैं।

 

 

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि रमन सरकार के दौरान 15 साल में केवल 9 बार ही पीएससी की भर्ती की गई, अर्थात 6 साल पीएससी की भर्ती ही नहीं हुई। वर्तमान भूपेश बघेल सरकार में पिछले 4 साल में चार बार नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के बाद अब पांचवी भर्ती प्रक्रिया शुरू किया गया है। आउटसोर्सिंग के माध्यम से स्थानीय युवाओं के सरकारी नौकरी के अधिकार को बेचने वाले भाजपाई नियमित और स्थाई भर्ती का विरोध कर अपने युवा विरोधी चरित्र को प्रदर्शित कर रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली विभाग, राजस्व, वन, पुलिस, सिंचाई विभाग सहित अनेकों विभागों में नियमित भर्ती हो रही है। नई औद्योगिक नीति के माध्यम से निजी संस्थानों में भी बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर मिले हैं। नौकरियों के साथ ही किसान, कृषि मजदूर, वनोपाज संग्राहकों को भी उनका अधिकार मिलने लगा है। छत्तीसगढ़ में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक समृद्धि आई है। रमन राज के कुशासन, वादाखिलाफी, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार की कालिख उजागर होने और भूपेश बघेल सरकार के जनहितेषी योजनाओं की लोकप्रियता से मुद्दाविहीन हो चुके भाजपाई अब अनर्गल बयानबाजी करने लगे हैं।

 

 

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