छत्तीसगढ़ - Newsportal | Chhattisgarh Darpan Media Group

छत्तीसगढ़

AI आधारित शिक्षा से छत्तीसगढ़ को ज्ञान, कौशल और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाना हमारा ध्येय है: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 छत्तीसगढ़ में शिक्षा को भविष्य की तकनीकों से जोड़ते हुए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गूगल फॉर एजुकेशन इंडिया के प्रमुख श्री संजय जैन एवं गूगल इंडिया के पब्लिक पॉलिसी प्रमुख श्री राकेश रंजन ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने अतिथियों का पारंपरिक सम्मान करते हुए उन्हें शॉल एवं बस्तर कला की प्रतिकृति भेंट की। ।

गूगल फॉर एजुकेशन इंडिया के प्रमुख श्री संजय जैन ने रायपुर जिला प्रशासन और गूगल के मध्य हुए लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) की जानकारी साझा करते हुए बताया कि रायपुर जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में “AI सक्षम शिक्षा अभियान” की शुरुआत की गई है। इस अभियान के माध्यम से स्कूल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि “सक्षम शिक्षक अभियान” के तहत राज्य में शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल टूल्स और AI आधारित शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल के प्रथम चरण की शुरुआत रायपुर से की जाएगी, जिसके बाद इसे राज्य के सभी जिलों में विस्तार दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत 2 लाख से अधिक शिक्षकों को AI प्रमाणन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए गूगल फॉर एजुकेशन अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को निःशुल्क उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है, जिससे शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त किया जा सके।
कार्यक्रम के तहत प्रारंभिक चरण में 200 शिक्षकों की सहभागिता से विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें गूगल फॉर एजुकेशन टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, कक्षा शिक्षण में AI के प्रभावी उपयोग और विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीक-सक्षम और नवाचार आधारित बनाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को शिक्षा से जोड़ना केवल एक पहल नहीं, बल्कि प्रदेश के विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इससे न केवल शिक्षण पद्धतियों में गुणवत्ता आएगी, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर नए युग के कौशल विकसित होंगे, जो उन्हें आने वाले समय की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “AI सक्षम शिक्षा अभियान” जैसे कार्यक्रम शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को AI आधारित प्रशिक्षण और डिजिटल संसाधनों से सशक्त कर कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है - छत्तीसगढ़ को एक ऐसे ज्ञान-आधारित और तकनीकी रूप से सशक्त राज्य के रूप में स्थापित करना, जहाँ हर विद्यार्थी को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और अवसरों से भरपूर शिक्षा उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर एक सशक्त, आधुनिक और तकनीक-सक्षम शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव श्री मुकेश बंसल, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
और भी

जल संरक्षण के कार्यों को और गति दें,अधिक से अधिक पेड़ लगाकर संरक्षित करें-राज्यपाल श्री डेका

 राज्यपाल श्री रमेन डेका ने जल संरक्षण के कार्यों की सराहना करते हुए किसानों को डबरी खनन के लिए अधिक से अधिक प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। बताया गया  कि विकासखंड में 218 डबरी स्वीकृत की गई हैं तथा बड़ी संख्या में निर्माण कार्य पूर्ण किए गए हैं,  राज्यपाल ने  और गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल श्री डेका ने आज सरायपाली प्रवास के दौरान रेस्ट हाउस में विकासखंड स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।


                राज्यपाल ने वृक्षारोपण को जनआंदोलन के रूप में संचालित करने पर जोर देते हुए कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जाए। कैंपा एवं मनरेगा मद से वृहत वृक्षारोपण करते हुए शासकीय भवनों, रेस्ट हाउस परिसरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार एवं छायादार पौधे लगाए जाएं। विभाग ने बताया कि क्षेत्र में लगभग 1.50 लाख पौधरोपण किया गया है तथा अमृत सरोवरों के आसपास भी हरित विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने इसमें जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए।

              राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र की समीक्षा करते हुए जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने तथा धान के साथ उद्यानिकी फसलों के समावेश पर बल दिया। उन्होंने  जैविक चावल के वैल्यू एडिशन के माध्यम से किसानों की आय वृद्धि के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा के दौरान उन्होंने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को प्रभावी बनाने, हितग्राहियों से सेवा शुल्क लेने तथा सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई एवं उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

               स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए राज्यपाल ने टीबी रोगियों की जानकारी ली और उनके उपचार की सतत निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने समाज के सक्षम व्यक्तियों को टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए प्रेरित करने, रेडक्रॉस से जुड़ने तथा ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर एवं मोतियाबिंद के उपचार हेतु जागरूकता अभियान एवं शिविर आयोजित करने पर बल दिया। उन्होंने एम्स से समन्वय स्थापित कर बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

               राज्यपाल श्री डेका ने योग को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों में प्रारंभ से ही योग की आदत विकसित की जाए तथा इसके लिए नियमित प्रशिक्षण और कक्षाएं संचालित की जाएं। उन्होंने अधिक से अधिक पुस्तकालय खोलने तथा महिला स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़कर “लखपति दीदी” बनाने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए।

              बैठक में सरायपाली विधायक श्रीमती चतुरी नंद भी उपस्थित रहीं। इस अवसर पर कलेक्टर श्री विनय लंगेह ने जिले में संचालित विकास कार्यों एवं प्रमुख योजनाओं की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री प्रभात कुमार, जिला पंचायत सीईओ श्री हेमंत नंदनवार, अपर कलेक्टर श्री सचिन भूतड़ा, एसडीएम श्रीमती अनुपमा आनंद सहित विकासखंड स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
और भी

नाचा के जनक दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर मुख्यमंत्री श्री साय ने किया नमन

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला परंपरा के संवाहक और ‘नाचा’ के जनक माने जाने वाले स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने ‘नाचा’ जैसी लोकविधा को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि उसे जन-जन तक पहुँचाकर सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने गांवों के लोक कलाकारों को संगठित कर ‘नाचा’ को नई पहचान और गरिमा प्रदान की। उनके प्रयासों से यह लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का प्रभावी मंच बनी।

उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी ने अपने समर्पण और साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखा और उसके संरक्षण के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया। उनका योगदान प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लोक कला और शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को ‘दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाता है, जो उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
और भी

नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ गढ़ेगा विकास का स्वर्णिम भविष्य : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता के बीच आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर श्री शर्मा ने मुख्यमंत्री को नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में मिली इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई देते हुए पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और समृद्धि के नए युग की ओर अग्रसर होगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद वर्षों तक प्रदेश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना रहा और विशेष रूप से बस्तर अंचल लंबे समय तक लाल आतंक के साये में रहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और नक्सल प्रभावित सभी क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा मजबूत हो रही है। बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, सुरक्षा और विकास का नया वातावरण तैयार हो रहा है, जिससे आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और प्रभावी रणनीति को दिया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भयमुक्त और सुरक्षित छत्तीसगढ़ का सपना आज साकार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी शहादत ने इस सफलता की नींव रखी है। उन्होंने सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके अथक प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलमुक्त वातावरण में अब छत्तीसगढ़ तेज गति से विकास के नए सोपान गढ़ेगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।
और भी

मातृत्व वन प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव का सशक्त प्रतीक है - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर सर्किट हाउस परिसर में विकसित मातृत्व वन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मातृत्व वन न केवल हरित क्षेत्र के रूप में विकसित होगा, बल्कि यह प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव का एक सशक्त प्रतीक भी है और आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता का केंद्र बनेगा।


उल्लेखनीय है कि जशपुर मंडल द्वारा विकसित मातृत्व वन में लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस अवसर पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया, जिससे प्रकृति और परिवार के बीच भावनात्मक संबंध को और अधिक सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास कर रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल न केवल हरित क्षेत्र के विस्तार में सहायक होगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करेंगी।

मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीताअशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि भविष्य में औषधीय उपयोग एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज और पर्यावरण के लिए प्रेरणादायक बताया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री गंगाराम भगत, श्री विजय आदित्य सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
और भी

79 हजार से अधिक श्रमिकों को 27.15 करोड़ की सीधी सहायता: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जशपुर में श्रमिक सम्मेलन में किया डीबीटी अंतरण

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर में आयोजित जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन में 79,340 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिजनों को 27.15 करोड़ रुपए की राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की।


कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बावजूद छत्तीसगढ़ में पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ईंधन आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है, लेकिन केंद्र सरकार की प्रभावी विदेश नीति और विभिन्न देशों के साथ मजबूत संबंधों के कारण आपूर्ति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें और अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिससे लोगों में अनावश्यक भय और भ्रम का वातावरण बन रहा है।उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और पेट्रोल, डीज़ल या गैस का अनावश्यक भंडारण न करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे पहले ईंधन की उपलब्धता बनी रही है, वैसे ही आगे भी निर्बाध रूप से मिलती रहेगी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रमिकों के कल्याण के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित 12 विभिन्न योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों को बच्चे के जन्म पर 20,000 रुपए की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा मकान निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। श्रमिकों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ई-रिक्शा खरीदने में भी सहायता दी जा रही है, जिसे पहले 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। यदि किसी श्रमिक का बच्चा 10वीं या 12वीं बोर्ड परीक्षा में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करता है, तो उसे 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
इसके साथ ही मेधावी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पहले 100 बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 200 सीट कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए “दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना” संचालित की जा रही है, जिसके तहत ऐसे मजदूरों को सालाना 10,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
उन्होंने जानकारी दी कि हाल ही में लाखों भूमिहीन मजदूरों के खातों में लगभग 495 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि जनधन खातों के माध्यम से अब योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले भेजी गई राशि का बड़ा हिस्सा बीच में ही खत्म हो जाता था, लेकिन अब पूरी राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों मजबूत हुए हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रोविडेंट फंड (PF) प्रणाली को यूनिवर्सल बनाया गया है, जिससे श्रमिक देश के किसी भी हिस्से में काम करने पर अपना पीएफ लाभ जारी रख सकते हैं।
इसके अलावा न्यूनतम पेंशन राशि को बढ़ाकर 1000 रुपए किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ईएसआईसी अस्पतालों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों को बेहतर और निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन के अंत में श्रमिकों को प्रदेश के विकास की रीढ़ बताते हुए कहा कि उनके परिश्रम और योगदान से ही राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सभी श्रमिकों का सम्मान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रदेशभर में आयोजित हो रहे श्रमिक सम्मेलन—श्रम मंत्री

श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश में श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि श्रमिकों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचे और उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 20,000 रुपए, मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता, छात्रवृत्ति सहित कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही 10वीं और 12वीं में टॉप-10 में आने वाले श्रमिकों के बच्चों को 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले सवा दो वर्षों में 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे ट्रांसफर की गई है।

इसके अलावा “अटल शिक्षा योजना” के तहत श्रमिकों के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि श्रमिकों को योजनाओं का पूरा लाभ मिले और उनके जीवन स्तर में सुधार हो।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने भी राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए श्रमिकों से इनका अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।

इस अवसर पर श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती, नगर पालिका जशपुर के अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यशप्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष जशपुर श्री गंगाराम भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, श्रमिक बंधु एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।
और भी

पश्चिम एशिया की परिस्थितियों पर मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय समीक्षा: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कमिश्नर, आईजी और कलेक्टरों को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनज़र आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में पेट्रोलियम उत्पादों, एलपीजी गैस, उर्वरकों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता एवं आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि और संवेदनशील नेतृत्व के कारण कोविड जैसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी देश एकजुट रहा और सफलतापूर्वक उसका सामना किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में कोविड जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन सतर्क रहना आवश्यक है। प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों, गैस सिलेंडरों और उर्वरकों की कोई कमी नहीं है, अतः नागरिक किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम एशिया संकट पर सभी राज्यों के साथ विस्तृत चर्चा की गई है और यह आश्वस्त किया गया है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है। राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है तथा उच्च स्तरीय समिति द्वारा स्थिति की सतत निगरानी की जा रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में भी कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए तथा प्रभारी सचिव और कलेक्टर नियमित समीक्षा करें। अफवाहों और भ्रामक खबरों से बचने के लिए आमजन तक समय पर तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी या जमाखोरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। सभी पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों के भंडारण एवं आपूर्ति की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।उन्होंने अधिकारियों से टीम भावना के साथ कार्य करते हुए हर परिस्थिति में आमजन तक सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 

बैठक में एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसीएल के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि प्रदेश में गैस एवं पेट्रोलियम पदार्थों की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति नियमित रूप से जारी है। गैस सिलेंडरों की ऑनलाइन बुकिंग सामान्य रूप से संचालित है।
उज्ज्वला गैस कनेक्शन के लिए 45 दिन तथा सामान्य गैस कनेक्शन के लिए 25 दिन की समय सीमा निर्धारित है और वर्तमान में उसी अंतराल के अनुसार बुकिंग की जा रही है। पेट्रोलियम पदार्थों के परिवहन में भी किसी प्रकार की बाधा नहीं है और पूरे प्रदेश में स्थिति सामान्य है।

मुख्य सचिव श्री विकास शील ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों की सतत निगरानी के लिए राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। उपभोक्ता घरेलू गैस आपूर्ति से संबंधित समस्याओं, शिकायतों अथवा कालाबाजारी की सूचना  1800-233-3663 पर दे सकते हैं।उन्होंने निर्देश दिए कि उक्त नंबर का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि आमजन को सही जानकारी समय पर उपलब्ध हो सके और शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में निर्देश दिए गए कि गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति से संबंधित समाचारों पर सतत निगरानी रखी जाए। भ्रामक खबरों से भय की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, अतः ऐसी खबरों का तत्काल संज्ञान लेकर वास्तविक जानकारी जनता तक पहुंचाई जाए। सोशल मीडिया की भी विशेष निगरानी रखने और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता, किसानों को समय पर मिलेगा खाद

वीडियो कांफ्रेंस के दौरान अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उर्वरकों की होल्डिंग पर रोक लगाई जाए और दैनिक स्टॉक की नियमित समीक्षा की जाए। सभी किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समान रूप से उर्वरक उपलब्ध कराया जाए।साथ ही खाद वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए सॉफ्टवेयर आधारित मॉनिटरिंग की जानकारी भी साझा की गई।

महत्वपूर्ण संस्थानों में गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश

मुख्यमंत्री श्री साय ने अस्पतालों, छात्रावासों, शैक्षणिक संस्थानों, रेलवे, भारत सरकार की संस्थाओं, सैन्य एवं अर्धसैनिक बलों, समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित संस्थानों और एयरपोर्ट कैंटीनों में गैस आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने के निर्देश दिए।

राज्यभर में सतत कार्रवाई—3841 सिलेंडर जब्त, 97 एफआईआर दर्ज

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेशभर में 335 स्थलों पर छापेमारी की गई, जिसमें कालाबाजारी की कोई पुष्टि नहीं हुई। हालांकि जमाखोरी की सूचना पर कार्रवाई करते हुए 3841 गैस सिलेंडरों को जब्त किया गया तथा 97 एफआईआर दर्ज की गई हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सीमावर्ती चेक पोस्टों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। गैस सिलेंडरों एवं पेट्रोल-डीजल वाहनों की आवाजाही पर निगरानी रखने के साथ ही निर्देश दिए गए कि पेट्रोल-डीजल को कंटेनरों में आम जनता को उपलब्ध न कराया जाए। केवल अधिकृत मोबाइल टावर एवं जेनसेट संचालित आवश्यक प्रतिष्ठानों को ही कंटेनर में ईंधन उपलब्ध कराया जाए।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संभागायुक्त, आईजी एवं जिला कलेक्टर भी बैठक में शामिल हुए।

बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजू एस, कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, खाद्य विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार सहित आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के पेट्रोल, डीजल एवं गैस डिवीजन के अधिकारी उपस्थित थे।
और भी

डीजल पर एक्साइज ड्यूटी समाप्त, पेट्रोल पर ₹10 की कटौती—केंद्र सरकार के फैसले का मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने किया स्वागत

 केंद्र सरकार द्वारा डीजल को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त करने और पेट्रोल पर ₹10 प्रति लीटर की कटौती करते हुए एक्साइज ड्यूटी को मात्र ₹3 प्रति लीटर करने के निर्णय का मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे देश के 140 करोड़ नागरिकों को सीधी राहत पहुंचाने वाला ऐतिहासिक और जनहितकारी कदम बताया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस निर्णय से देश के प्रत्येक परिवार, किसान, श्रमिक और मध्यमवर्ग को व्यापक राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट के इस दौर में भी केंद्र सरकार द्वारा आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ न बढ़ने देना एक बड़ी संवेदनशील पहल है, जो आमजन के जीवन को सीधे प्रभावित करेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए छत्तीसगढ़ की समस्त जनता की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति हृदय से धन्यवाद और आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्णय ले रही है। यह फैसला प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता, संवेदनशीलता और देशवासियों के प्रति समर्पण का सशक्त उदाहरण है।
और भी

अंत्योदय का संकल्प : करीब 5 लाख भूमिहीन परिवारों को 500 करोड़ रुपये की सौगात देंगे मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के शिल्पकार भूमिहीन कृषि मजदूर अब आर्थिक सुरक्षा के एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की 'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' न केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम है, बल्कि यह समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन देने का एक महायज्ञ भी है।


            इस योजना के तहत इस साल 4 लाख 95 हज़ार 965 भूमिहीन हितग्राहियों के खाते में सीधे 10 हज़ार रुपये की धनराशि प्रत्येक हितग्राही के मान से अंतरित की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। इस सूची में 22 हजार 28 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत के रक्षक हैं। राज्य सरकार ने पिछले वर्ष भी इस योजना के माध्यम से रिकॉर्ड सहायता प्रदान की थी। साल 2025 में कुल 5,62,112 हितग्राहियों को 10,000 रुपये के हिसाब से 562 करोड़ 11 लाख 20 हजार रुपये की राशि वितरित की थी। आंकड़ों का यह निरंतर प्रवाह दर्शाता है कि राज्य सरकार भूमिहीन परिवारों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।

           25 मार्च 2026 को बलौदाबाजार की धरती से जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय राशि अंतरित करेंगे, तो वह छत्तीसगढ़ के 'न्याय और सुशासन' की गूंज होगी। 'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की नीयत साफ और नीति स्पष्ट हो, तो विकास की किरण हर झोपड़ी तक पहुंचती है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका समावेशी स्वरूप है। इस वर्ष की लाभार्थी सूची में 22,028 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं। ये वे लोग हैं जो हमारी प्राचीन औषधीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखे हुए हैं। सरकार ने इन्हें मुख्यधारा से जोड़कर यह संदेश दिया है कि 'अंत्योदय' की कतार में खड़ा आखिरी पंक्ति के व्यक्ति भी शासन की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।

         'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' उन ग्रामीण परिवारों के लिए एक वरदान है, जिनकी आय का मुख्य स्रोत मजदूरी है। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इन परिवारों को सालाना एक निश्चित आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं को बिना किसी कर्ज के पूरा कर सकें। इन्हें पूर्व में दी जाने वाली 7,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अब 10,000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है, जो सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है।
और भी

स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से  राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में चिकित्सक संगठन एवं मेडिकल छात्राओं ने सौजन्य मुलाकात की और प्रदेश को डीएम कार्डियोलॉजिस्ट की 2 सीट मिलने पर उनका आभार व्यक्त किया। 


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारी सरकार लगातार प्राथमिकता के साथ बेहतर कार्य कर रही है, ताकि प्रदेशवासियों को सहज और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि एक समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज हुआ करता था, जिसमें लगभग 100 से 150 सीटें थीं। आज प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर 14 मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं, जिनमें लगभग 1400 सीटें उपलब्ध हैं। इसके साथ ही फिजियोथेरेपी, नर्सिंग सहित अन्य उच्च शैक्षणिक संस्थान भी स्थापित हुए हैं, जिनका लाभ प्रदेश के विद्यार्थियों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में मेडिको सिटी की स्थापना की जा रही है, जहां बड़े-बड़े सुपरस्पेशलिटी अस्पताल स्थापित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश के लोगों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ को डीएम कार्डियोलॉजिस्ट की 2 सीट प्रदान किए जाने पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर श्री तुलसी कौशिक, डॉ. देवेंद्र कश्यप सहित जूडो और मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
और भी

भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा, प्रकृति संरक्षण हमारी परंपरा : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का पावर इंजन है और अब हमारा राज्य ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित दूसरे छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। 


मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ हरित सम्मेलन की उपयोगिता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इसके माध्यम से पॉलिसी मेकिंग से जुड़े लोग, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थान, शोधकर्ता और पर्यावरणविद एक मंच पर आकर महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु संकट लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में यह आवश्यक है कि हम पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर केवल चिंतन ही न करें, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी उतारें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार हमेशा से विरासत के साथ विकास की पक्षधर रही है। पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली हमारी हजारों वर्षों पुरानी परंपरा रही है और उसकी रक्षा के लिए सरकार नीतिगत स्तर पर लगातार ठोस कदम उठा रही है।
  
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है और इस क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचारों को अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 के अनुसार संयुक्त वन एवं वृक्ष आवरण वृद्धि के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की नीतियों के साथ-साथ प्रदेशवासियों की जागरूकता और पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी का परिणाम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य में सोलर रूफटॉप योजना के माध्यम से उपभोक्ताओं को ऊर्जादाता बनाया जा रहा है और बायो-एथेनॉल जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं उभर रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाकर लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए संसाधनों का उपयोग करते समय पर्यावरण और धरती के स्वास्थ्य का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होने के साथ-साथ कागज के उपयोग में भी कमी आई है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल राज्य है और लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है। श्री साय ने बताया कि वनांचल में वृक्षों को सरना (देवता) के रूप में पूजा जाता है और सरना को राजस्व रिकॉर्ड में भी देवस्थल के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव और उसके संरक्षण का भाव जनजातीय समाज से सहज ही सीखा जा सकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में हरित पहल पर विशेष जोर दिया गया है और इस दिशा में कार्य करने वाले उद्योगों को विशेष रियायतें भी दी जा रही हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट के मंच से प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने तथा इसकी शुरुआत स्वयं से करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर सम्मेलन में प्रस्तुत शोधों के संकलन पर आधारित पुस्तक “एब्स्ट्रेक्ट”, सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं पर आधारित “हाइलाइट्स ऑफ द समिट” तथा जनजातीय कहानियों और परम्पराओं पर आधारित पुस्तक “कथा कंथली” का विमोचन किया।

इस अवसर पर मेघालय के लोकायुक्त श्री सी पी मारक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, पीसीसीएफ श्री व्ही श्रीनिवास राव, विबग्योर फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री शंखदीप चौधरी, विषय विशेषज्ञ, प्रोफेसर, प्रबुद्धजन, स्कॉलर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
और भी

सरकार की नीति, नीयत, कार्यक्रम और योजनाएं दिखती हैं बजट में : श्री अरूण साव

  छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 14,655 करोड़ 73 लाख 55 हजार रूपए की अनुदान मांगे पारित की गईं। इसमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के लिए 2137 करोड़ 75 लाख 66 हजार रूपए, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग-नगरीय निकाय के लिए 27 करोड़ 9 लाख 95 हजार रूपए, लोक निर्माण कार्य-सड़कें और पुल के लिए 4922 करोड़ 64 लाख 79 हजार रूपए, लोक निर्माण कार्य-भवन के लिए 2242 करोड़ 74 लाख 70 हजार रूपए, नगरीय प्रशासन एवं नगरीय विकास-नगरीय कल्याण के लिए 1698 करोड़ 98 लाख 70 हजार रूपए, लोक निर्माण कार्यों से संबंधित विदेशों से सहायता प्राप्त परियोजनाओं के लिए 15 करोड़ 4 लाख 20 हजार रूपए, नगरीय निकायों को वित्तीय सहायता हेतु 3444 करोड़ 62 लाख 45 हजार रूपए तथा खेल एवं युवा कल्याण के लिए 166 करोड़ 83 लाख 10 हजार रुपए शामिल हैं। 


उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव ने अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार की नीति, नीयत, कार्यक्रम और योजनाएं बजट में दिखती हैं। हमने पहले साल ज्ञान, दूसरे साल गति और इस साल संकल्प की थीम पर बजट प्रस्तुत किया है। सरकार के ये तीनों बजट जन कल्याण और जन आकांक्षाओं को पूरा करने वाला बजट है। मोदी की एक-एक गारंटी को पहले दिन से पूरा करने का काम सरकार कर रही है। 

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने सदन में कहा कि जल जीवन मिशन के कार्यों को पूरा करने के लिए राज्य के बजट से पूरा सहयोग मिल रहा है। कार्यों का कड़ाई से मूल्यांकन करते हुए पारदर्शिता के साथ निर्माण एजेंसियों को भुगतान किया जा रहा है। जिन योजनाओें के काम 80 प्रतिशत से अधिक पूर्ण हो गए हैं, उन्हे प्राथमिकता से पूर्ण करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में 5077 टंकियां बनाई गई है। गांव के सभी घरों मंे नल से पानी पहुंचने वाले 5028 से अधिक गांवों को हर घर जल प्रमाणित कराया गया है। 

श्री साव ने बताया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत राज्य में स्वीकृत 29 हजार 173 सिंगल विलेज योजनाओं में से 7000 योजनाएं पूर्ण हो गई है। आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 9 लाख परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराने तथा शेष योजनाओं को पूर्ण करने के लिए 3000 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। मिशन के अंतर्गत जल प्रदाय योजनाओं के संचालन एवं संधारण के लिए 50 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में 7490 सोलर पंपों के माध्यम से पेयजल की व्यवस्था की गई है। इनके संचालन एवं संधारण के लिए 3 करोड़ रूपए प्रावधानित हैं। ग्रामीण बसाहटों में हैण्डपंपों के संधारण के लिए आगामी बजट में 25 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। इस राशि से प्रदेश में स्थापित करीब 3 लाख हैण्डपंपों का संचालन-संधारण किया जाएगा। 

श्री साव ने सदन में बताया कि समूह जल प्रदाय योजनाओं के संचालन-संधारण के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में राज्य मद से 20 करोड़ रूपए,  नगरीय योजनाओं के ऋण के लिए 30 करोड़ रूपए तथा राज्य के ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों जहां भूगर्भीय जल की उपलब्धता कम है तथा सतही स्रोत उपलब्ध है, उन क्षेत्रों में नाबार्ड पोषित योजना अंतर्गत 44 समूह जल प्रदाय योजना के लिए 260 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि धमतरी जिले में सिर्री समूह जल प्रदाय योजना के लिए 2 करोड़ रूपए, सुतियापाट जलाशय से ठाठापुर तक 54 गांवों तथा भीरा छीरपानी जलाशय से 66 गांवों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के लिए 10 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। 

लोक निर्माण विभाग
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने विभागीय अनुदान मांगों पर चर्चा के उत्तर में कहा कि लोक निर्माण विभाग के आगामी बजट में सड़कों, पुलों एवं भवनों के निर्माण तथा मरम्मत के लिए 9451 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि आगामी बजट में राजधानी रायपुर में महत्वपूर्ण जंक्शनों पर फ्लाईओव्हरों के निर्माण को प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इन फ्लाईओव्हरों के निर्माण से शहर का यातायात सुगम होगा एवं जाम से मुक्ति मिलेगी। संभागीय मुख्यालयों में भी कई फ्लाईओव्हरों के निर्माण प्रस्तावित किए गए हैं। उन्होंने सदन में बताया कि सड़कों के निर्माण के साथ ही दुर्घटनाओं में कमी लाने का प्रयास सरकार लगातार कर रही है। सड़क सुरक्षा कार्यों तथा दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सरकार ने 51 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। 

श्री साव ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के रजत जयंती वर्ष में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राज्य स्थापना दिवस पर विगत 1 नवंबर को लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित नवीन विधानसभा भवन का लोकार्पण किया है। चालू वित्तीय वर्ष में विभाग द्वारा 148 अन्य भवनों को पूर्ण कर लोकार्पण कराया गया है। साथ ही 225 भवनों का भूमिपूजन भी किया गया है। उन्हांेने बताया कि राज्य में योजनाबद्ध तरीके से सड़कों के संधारण के लिए ओ.पी.आर.एम.सी. योजनांतर्गत 103 किमी लंबे सिमगा-खरोरा-आरंग-नयापारा-कुरुद मार्ग के रख-रखाव के लिए 59 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई है। इसके लिए एजेंसी भी तय कर दी गई है। आगामी 5 वर्षों तक एजेंसी द्वारा लगातार इस सड़क की मरम्मत एवं नवीनीकरण किया जाएगा। इसी तर्ज पर वर्ष 2026-27 के बजट में प्रदेशभर की 1534 किमी महत्वपूर्ण सड़कों के नवीनीकरण एवं नियमित संधारण के लिए 180 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।  

श्री साव ने सदन में बताया कि इस साल लोक निर्माण विभाग में दिवंगत कर्मचारियों के 19 परिजनों को अनुकम्पा नियुक्ति के साथ ही 07 मानचित्रकारों और 80 उप अभियंताओं की नई नियुक्ति की गई है। भृत्य से लेकर मुख्य अभियंता के पदों पर 371 शासकीय सेवकों को पदोन्नति दी गई है। उन्होंने बताया कि विभागीय कार्यों के बेहतर संचालन तथा प्रशासनिक कसावट के लिए 07 नवीन संभागीय कार्यालय एवं 12 नवीन उप संभागीय कार्यालय सृजित किए गए हैं। 

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री साव ने विभाग की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा के उत्तर में कहा कि आगामी वर्ष के बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 तथा गृह प्रवेश सम्मान योजना के लिए 909 करोड़ 50 लाख रूपए एवं स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के लिए 467 करोड़ 50 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के बजट में मिशन अमृत 2.0 के लिए 512 करोड़ रूपए, पीएम ई-बस सेवा योजना के लिए 30 करोड़ रूपए, मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के लिए 450 करोड़ रूपए तथा नालंदा परिसरों के निर्माण के लिए 100 करोड़ रूपए प्रावधानित हैं। 
श्री साव ने बताया कि आगामी बजट में विभिन्न नगरीय निकायों में अधोसंरचना मद के अंतर्गत 840 करोड़ रूपए, मोर संगवारी सेवा के लिए 5 करोड़ रूपए तथा ई-गर्वनेंस योजना के लिए 10 करोड़ रूपए के प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने बताया कि आगामी वित्तीय वर्ष में विभाग द्वारा शुरू की जाने वाली भूमिगत विद्युतीकरण योेजना के लिए 100 करोड़ रूपए और आदर्श शहर समृद्धि योजना के लिए 200 करोड़ रूपए प्रावधानित हैं। 

खेल एवं युवा कल्याण विभाग

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग के आगामी वर्ष के बजट प्रावधानों के बारे में बताया कि मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रूपए, छत्तीसगढ़ क्रीडा प्रोत्साहन योजना के लिए 57 करोड़ रूपए, युवा रत्न सम्मान योजना के लिए 1.50 करोड़ रूपए तथा खेल अकादमियों के लिए 15 करोड़ एक लाख रूपए के प्रावधान किए गए हैं। राज्य युवा महोत्सव, बस्तर ओलंपिक तथा सरगुजा ओलंपिक के लिए 5-5 करोड़ रूपए प्रावधानित हैं। उन्होंने कहा कि विगत दो वर्षों से आयोजित बस्तर ओलंपिक बदलते बस्तर की नई तस्वीर पेश कर रहा है। बड़ी संख्या में युवा एवं महिलाएं उत्साहपूर्वक इनमंे अपनी सहभागिता दे रहे हैं। 

लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा में विधायकगण सर्वश्री द्वारकाधीश यादव, अजय चंद्राकर, व्यास पाठक, सुनील सोनी, कुंवर सिंह निषाद, धर्मजीत सिंह, भोलाराम साहू, मोतीलाल साहू, तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम, अनुज शर्मा, राम कुमार यादव, प्रमोद मिंज, नीलकंठ टेेकाम, रोहित साहू, प्रणव कुमार मरपच्ची, लखेश्वर बघेल, श्रीमती शेषराज हरवंश, सुश्री लता उसेंडी, श्रीमती शकुंतला पोर्ते, श्रीमती उत्तरी जांगड़े, श्रीमती अंबिका मरकाम  और श्रीमती सावित्री मंडावी ने भाग लिया।
और भी

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से की सौजन्य मुलाकात

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज शाम राजधानी रायपुर स्थित स्पीकर हाउस पहुंचकर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से सौजन्य मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने डॉ. रमन सिंह के स्वास्थ्य की जानकारी लेते हुए उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। 

इस अवसर पर जगदलपुर विधायक श्री किरण देव उपस्थित थे।
और भी

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने की सौजन्य मुलाकात

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने सौजन्य मुलाकात की।


मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीमती लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद के उच्च सदन राज्यसभा में छत्तीसगढ़ की  जनभावनाओं, विकास से जुड़े मुद्दों तथा आमजन की अपेक्षाओं को सशक्त रूप से रखने में श्रीमती लक्ष्मी वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।  

इस अवसर पर विधायक श्री किरण सिंह देव, विधायक श्री अनुज शर्मा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।
और भी

प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देता है होली का पर्व:कृषक उन्नति योजना से किसानों के घर आई दुगुनी खुशियां – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के अश्वनी नगर स्थित सोनकर बाड़ी में आयोजित रंगपंचमी महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को रंगपंचमी की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देने वाला पर्व है, जो समाज को आपसी एकता और समरसता के सूत्र में पिरोता है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस वर्ष प्रदेश के किसानों के लिए होली का त्योहार विशेष खुशियां लेकर आया है। राज्य सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान उपार्जन के अंतर की राशि के रूप में किसानों के खातों में 10 हजार 324 करोड़ रुपये की बड़ी राशि होली से पहले ही अंतरित की गई है। इससे प्रदेश के अन्नदाताओं के घरों में खुशियों का माहौल है और होली का उत्साह भी दोगुना हो गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली आपसी मतभेदों को भुलाकर प्रेम और मित्रता का संदेश देने वाला पर्व है। यह पर्व समाज में सौहार्द, सद्भाव और एकजुटता की भावना को और मजबूत करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि  विधायक श्री राजेश मूणत द्वारा प्रतिवर्ष रंगपंचमी के अवसर पर होली मिलन समारोह का आयोजन किया जाता है। ऐसे आयोजन समाज में आपसी मेल-मिलाप और सद्भाव को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को रंगपंचमी पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं तथा सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
इस अवसर पर  विधायक श्री मोतीलाल साहू, महापौर श्रीमती मीनल चौबे सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
और भी

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 35वीं रैंक प्राप्त करने वाली सुश्री वैभवी अग्रवाल को मुख्यमंत्री ने दी बधाई

संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 35वीं रैंक प्राप्त करने वाली सुश्री वैभवी अग्रवाल ने आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में भेंट की।  मुख्यमंत्री श्री साय ने सुश्री वैभवी को मिठाई खिलाकर उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। 


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुश्री वैभवी अग्रवाल ने अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वैभवी की यह सफलता प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियाँ यह संदेश देती हैं कि कड़ी मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। लक्ष्य के प्रति समर्पण,अनुशासन और निरंतर प्रयास से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सुश्री वैभवी अग्रवाल भविष्य में प्रशासनिक सेवा में अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए देश और समाज की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगामी दायित्वों के लिए शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर सुश्री वैभवी अग्रवाल के पिता श्री शीतल अग्रवाल और भाई श्री विनायक अग्रवाल उपस्थित थे।
और भी

सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ताहीन कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कहीं भी निर्माण कार्य में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने यह निर्देश आज मंत्रालय महानदी भवन में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यों और गतिविधियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव  उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण के बाद निरीक्षण करने के बजाय निर्माण के दौरान ही नियमित रूप से फील्ड में जाकर गुणवत्ता की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि सड़कों का निर्माण केवल तकनीकी कार्य नहीं बल्कि आमजन की सुविधा से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक कार्य है और इससे सरकार की छवि भी बनती है। यदि सड़क बनने के कुछ वर्षों के भीतर ही खराब हो जाए तो इससे सरकार की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह सड़क कुछ वर्ष पहले ही बनी थी, लेकिन उसकी स्थिति तेजी से खराब हो गई है। यदि सड़क चार वर्ष भी नहीं चले तो इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस सड़क के निर्माण में हुई कमियों की गंभीरता से जांच की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता की सख्त निगरानी की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण कार्य हो रहे हैं, लेकिन आमजन को इन कार्यों की जानकारी नहीं मिल पाती जिससे सकारात्मक नैरेटिव नहीं बनता। उन्होंने निर्देश दिए कि बड़ी सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के हाथों से कराए जाएं तथा उन्हें व्यापक रूप से आमजन के सामने प्रस्तुत किया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क निर्माण के टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन (अवॉर्ड) तक की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार बहुत कम दर यानी बिलो रेट पर टेंडर प्राप्त कर लेते हैं, जिसके कारण कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। यदि ठेकेदार बिलो रेट पर टेंडर लेता है तो यह उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह कार्य को निर्धारित गुणवत्ता और समय-सीमा में पूरा करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों में लागू बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी उपयुक्त प्रावधान लागू किए जाएं। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए एक अलग इकाई बनाने पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां बरसात के दौरान संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को कई बार बीमार मरीजों को खाट में उठाकर ले जाना पड़ता है, जो अत्यंत चिंता का विषय है। खाद्य विभाग से प्राप्त सूची के आधार पर चिन्हित इन गांवों को सड़कों और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है और यहां सड़क का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इस मार्ग के कुछ हिस्से में वन स्वीकृति की आवश्यकता होगी, लेकिन शेष हिस्सों में निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए।

बैठक में मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 की प्रगति की भी समीक्षा की गई। लगभग 353 किलोमीटर लंबाई वाली इस सड़क परियोजना की स्थिति पर चर्चा की गई।पत्थलगांव-कुनकुरी खंड में भू-अर्जन का मुआवजा दिए जाने की जानकारी भी बैठक में साझा की गई। इसके अलावा अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग, गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग, चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग, रायपुर–दुर्ग मार्ग तथा चिल्फी क्षेत्र की सड़कों सहित कई अन्य परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। 

बैठक में बस्तर में पुल-पुलिया निर्माण सहित 17 सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही राज्य द्रुतगामी सड़क संपर्क मार्ग की आगामी कार्ययोजना की विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई।

मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में शासकीय भवनों के डिजाइन बहुत पुराने और एक जैसे दिखाई देते हैं। अब समय आ गया है कि शासकीय भवनों का निर्माण आधुनिक डिजाइन और तकनीक के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि भवनों का डिजाइन उनकी उपयोगिता के अनुरूप होना चाहिए और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए हॉरिजॉन्टल की जगह वर्टिकल संरचना को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को भी आधुनिक और गरिमामय स्वरूप में तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आमजन के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और लोग सड़क की गुणवत्ता को बहुत महत्व देते हैं। अन्य कई विकास कार्य भले दिखाई न दें, लेकिन सड़कें सीधे लोगों को दिखाई देती हैं और सरकार की छवि भी उसी के आधार पर बनती है। इसलिए लोक निर्माण विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है और इसमें होने वाले कार्यों को समयबद्धता और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाना अनिवार्य है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जिससे सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिल सके और उन्हें तुरंत ठीक किया जा सके।

बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
और भी

जशपुर जिले में बस दुर्घटना पर मुख्यमंत्री ने जताया गहरा दुःख, घायलों के समुचित उपचार के दिए निर्देश

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड अंतर्गत ग्राम गोडा अंबा के पास हुई बस दुर्घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इस दुर्घटना में लोगों के असामयिक निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि यह समाचार अत्यंत दुखद और हृदय विदारक है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों को इस कठिन घड़ी को सहन करने की शक्ति दें। उन्होंने दुर्घटना में घायल सभी लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि दुर्घटना में घायल सभी व्यक्तियों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी न रहने दी जाए तथा उन्हें हर संभव चिकित्सा सुविधा और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों की सतत निगरानी करते हुए प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
और भी