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आम जनता को शासन की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम इस्तेमाल करें: मुख्य सचिव श्री विकासशील

 मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि शासन की सभी योजनाओं का अधिकतम फायदा लोगों को शीघ्र मिले इसके लिए सूचना प्रौद्योगिक की सभी जरूरी नई तकनीकियों का उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि सूचना और संचार संस्थानों को अपने कार्यक्रम मोबाइल ऐप, वेबसाइट आदि नागरिक केन्द्रित और आसानी से उपयोग करने लायक बनायें। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकियों का उपयोग नागरिक सेवाओं के लिए करने एवं शासन की फ्लैगशिप स्कीमों का फायदा हितग्राहियों तक शीघ्र पहुंचाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के बारे में विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।


           मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में उभरती नवीन सूचना प्रौद्योगिकियों पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया।  

           मुख्य सचिव ने कहा कि एनआईसी के अधिकारियों को नई आईटी से हमेशा अपडेट रहना चाहिए। नई सूचना तकनीक से शासन की योजनाओं से हितग्राहियों को शीघ्रता से लाभान्वित किया जाना चाहिए। सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद ने राज्य स्तरीय सूचना केन्द्र एवं जिला सूचना विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियों से उनके संस्थान में उपलब्ध संसाधनों एवं उपकरणों की उपलब्धता तथा जरूरतों के बारे में जानकारी ली।

           कार्यालय के शुभारंभ सेशन में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र मुख्यालय नई दिल्ली के डीडीजी श्री दयानंद साहा ने कहा कि विभिन्न नवीन सूचना प्रौद्योगिकियों के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं के जरिए हम नागरिकों को सेवायें प्रदान कर सकते है। कार्यशाला को विविध सूचना प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ अधिकारियों ने प्रतिभागियों को जानकरी दी। कार्यशाला में ट्रिपल आईटी के संचालक तथा कुलपति प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने एआई के उपयोग के संबंध में व्यापक जानकारी दी। 

        एनआईसी छत्तीसगढ़ के संयुक्त संचालक श्रीकांत पाण्डे ने साईबर सुरक्षा, संयुक्त संचालक श्री अभिजीत कौशिक, श्री उपेन्द्र सिंह सहित अन्य आईटी विशेषज्ञों ने भी सम्बोधित किया। कार्यशाला में जिलों से आए जिला सूचना विज्ञान अधिकारियों और राज्य स्तरीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के विभिन्न जिलों में कार्यरत जिला सूचना विज्ञान अधिकारी और एनआईसी के राज्य स्तरीय अधिकारी शामिल हुए।
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न्यू एज मीडिया में दक्ष बनें जनसंपर्क अधिकारी :- आयुक्त श्री रजत बंसल

 जनसंपर्क आयुक्त श्री रजत बंसल ने आज नवा रायपुर स्थित संवाद कार्यालय में जनसंपर्क संचालनालय और जिला जनसंपर्क अधिकारियों की बैठक लेते हुए कहा कि वर्तमान दौर में जनसंपर्क अधिकारियों को न्यू एज मीडिया की सभी विधाओं में दक्ष होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ तकनीक और संचार के नए माध्यमों को अपनाना ही प्रभावी जनसंपर्क की कुंजी है।

      उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जनसंपर्क का कार्य अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण है, इसलिए इसे पूरी गंभीरता के साथ किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की कोताही से बचना जरूरी है। जनसंपर्क अधिकारी शासन और जनता के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं, ऐसे में उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि परिणाम के अनुरूप हर अधिकारी के कार्य का मूल्यांकन किया जाएगा। 
    बैठक में उन्होंने निर्देशित किया कि मंत्रिगणों, विभागीय सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिले के कलेक्टरों के साथ नियमित संपर्क और समन्वय बनाएं। इससे सूचनाओं का समयबद्ध और प्रभावी आदान-प्रदान सुनिश्चित होगा, जो शासन की योजनाओं के सही क्रियान्वयन और प्रचार के लिए अत्यंत आवश्यक है।

      जनसंपर्क आयुक्त ने आगामी एक मई से शुरू हो रहे प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के प्रचार-प्रसार की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर माध्यम का प्रभावी उपयोग कर योजनाओं की पहुंच अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। 
    उन्होंने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि राज्य में हो रहे विकास कार्यो और योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के वास्तविक अनुभवों को वीडियो पोस्ट और समाचारों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जाए। इससे अन्य लोगों को भी इनका लाभ लेने के लिए प्रेरणा मिलती है। बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के साथ सतत संपर्क और समन्वय बनाए रखा जाए, ताकि योजनाओं की उपलब्धियों और सरकार के कार्यों का प्रभावी प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जा सके। जनसंपर्क आयुक्त ने कहा कि सभी अधिकारी सक्रिय और जिम्मेदार तरीके से कार्य करें ताकि शासन की योजनाएं आमजन तक प्रभावी रूप से पहुंच सकें वहीं उन्होंने प्रचार-प्रसार कार्य में लापरवाही बरतने पर तीन जिला जन संपर्क अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश भी दिए है। 
     बैठक में अपर संचालक सर्वश्री उमेश मिश्रा, संजीव तिवारी, आलोक देव और श्रीमती हर्षा पौराणिक सहित संचालनालय और जिलों के जिला जनसंपर्क अधिकारी मौजूद थे।
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उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने समीक्षा बैठक में 31 मई तक नाला-नालियों और ड्रेनेज की सफाई के दिए हैं निर्देश

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने वर्षा ऋतु के पहले नगरीय निकायों में नाले व नालियों की सफाई तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने संचालनालय से परिपत्र जारी कर सभी निकायों को जलभराव रोकने, बाढ़ की स्थिति में आपदा प्रबंधन तथा बरसात में संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक कार्यवाही करने को कहा है। 


उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने विगत 20-21 अप्रैल को नगर निगमों, नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा के दौरान आगामी 31 मई तक बड़े नाला-नालियों और ड्रेनेज की सफाई के काम पूर्ण करने के साथ ही बरसात में जल भराव रोकने जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए थे। बैठक में उन्होंने कहा कि जून के पहले सप्ताह में राज्य स्तरीय टीम निकायों में इसका भौतिक निरीक्षण करेंगी। कार्य संतोषजनक नहीं मिलने पर स्वास्थ्य अधिकारी और इंजीनियर पर कार्रवाई की जाएगी। 

नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को जारी परिपत्र में कहा है कि वर्षा ऋतु में बारिश के पानी के निकासी के लिए निर्मित नालियों की समय पूर्व समुचित सफाई न होने तथा पानी निकासी के रास्तों के अवरोधों को दूर नहीं करने के कारण आकस्मिक वर्षा से बाढ़ की स्थिति निर्मित हो जाती है। इन स्थितियों से बचाव के लिए वर्षा ऋतु के पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर लेवें। 

विभाग ने इसके लिए शहरों के मुख्य मार्गों के साथ-साथ गलियों व चौराहों की अच्छी साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने सभी नाले व नालियों की पूर्ण एवं नियमित रूप से अंतिम छोर तक गहराई से साफ-सफाई कराने के साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि नदी या अन्य जलस्रोत किसी भी प्रकार से प्रदूषित न हों। पानी के बहाव में निरंतरता के लिए निर्माणाधीन नाले व नालियों में पानी बहाव के रास्ते में से निर्माण सामग्रियों को हटाने तथा नाले-नालियों में निर्मित कच्चे एवं पक्के अतिक्रमित अवरोधों को हटाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

नगरीय प्रशासन विभाग ने बरसात के पहले बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर आवश्यक अमले, टूल, मशीन आदि के साथ नोडल अधिकारी की नियुक्ति करने को कहा है। विभाग ने बाढ़ नियंत्रण कक्षों के 24 घंटे कार्यरत रहना सुनिश्चित करने के साथ ही इसके दूरभाष नम्बर आदि का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए हैं। निचली बस्तियों, बाढ़ संभावित क्षेत्रों व प्रभावितों का चिन्हांकन कर प्रभावितों के लिए सुरक्षित स्थलों को भी चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं।

विभाग ने बाढ़ की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। अन्य क्षेत्रों में भी बाढ़ के दौरान एवं बाढ़ के प्रभाव के समाप्त होने पर संक्रामक बीमारियों की आशंका बनी रहती है। इन स्थितियों में संबंधित विभागों को तत्परता से इसकी सूचना देने को कहा गया है। विभाग ने वर्षा ऋतु के पहले पेड़ों में लगे सभी साइन-बोर्डों, विज्ञापनों, किसी भी प्रकार के अन्य बोर्ड या साइनेज, बिजली वायर, हाईटेंशन लाइन या अन्य सामग्रियों को हटाने के निर्देश सभी निकायों को दिए हैं।
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स्किन ग्राफ्टिंग से युवक को नई दृष्टि और सामान्य जीवन की ओर लौटने का मिला अवसर

 छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में एक बार फिर जटिल चिकित्सा प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए डॉक्टरों की टीम ने 22 वर्षीय युवक को नई दृष्टि और सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर प्रदान किया है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुई आंख की निचली पलक का सफल ऑपरेशन कर मरीज को बड़ी राहत मिली है।


दिसंबर 2025 की दुर्घटना के बाद बढ़ी थी परेशानी

           प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवक दिसंबर 2025 को एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया था। हादसे में उसकी आंख की निचली पलक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे वह अपनी आंख पूरी तरह बंद नहीं कर पा रहा था। प्रारंभिक उपचार के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद वह सिम्स के नेत्र रोग विभाग पहुंचा।

विशेषज्ञों ने किया सर्जरी का निर्णय

          नेत्र विशेषज्ञों द्वारा गहन जांच के बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के दौरान पलक पर बने पुराने कठोर निशान (स्कार टिश्यू) को सावधानीपूर्वक हटाया गया। इसके बाद पलक की संरचना को पुनः सामान्य करने के लिए उन्नत स्किन ग्राफ्टिंग तकनीक का उपयोग किया गया।

जटिल सर्जरी के बाद तेजी से सुधार

          सर्जरी अत्यंत जटिल थी, क्योंकि ग्राफ्ट का आकार बड़ा था। इसके बावजूद विशेषज्ञों ने सफलतापूर्वक स्किन ग्राफ्ट का प्रत्यारोपण कर पलक और गाल के हिस्से का पुनर्निर्माण किया। ऑपरेशन के बाद मरीज की आंख की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और अब वह सामान्य रूप से देख पा रहा है। पलक भी पूरी तरह से बंद हो रही है, जिससे चेहरे की विकृति दूर हो गई है।

इन विशेषज्ञों की टीम ने निभाई अहम भूमिका

          इस सफल सर्जरी में डॉ. सुचिता सिंह, डॉ. प्रभा सोनवानी, डॉ. कौमल देवांगन, डॉ. विनोद ताम्कनंद, डॉ. डेलीना नेल्सन, डॉ. संजय चौधरी एवं डॉ. अनिकेत सहित नर्सिंग स्टाफ सिस्टर संदीप कौर तथा नेत्र, सर्जरी एवं निश्चेतना विभाग की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मरीज व परिजनों ने जताया आभार

         अस्पताल प्रशासन के अनुसार सर्जरी पूरी तरह सफल रही है। मरीज की पलक सामान्य स्थिति में लौट आई है और आंख की कार्यक्षमता भी बहाल हो गई है। चेहरे की विकृति समाप्त होने से मरीज और उसके परिजनों ने राहत की सांस ली तथा सिम्स के चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

        सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि “सिम्स में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर निरंतर बेहतर हो रहा है। हमारे विशेषज्ञ चिकित्सक जटिल से जटिल मामलों में भी उत्कृष्ट परिणाम दे रहे हैं। यह उपलब्धि संस्थान की आधुनिक सुविधाओं और डॉक्टरों की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।” चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि “इस प्रकार की जटिल सर्जरी का सफल निष्पादन हमारी टीम की समन्वित कार्यप्रणाली और विशेषज्ञता को दर्शाता है। सिम्स में अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार यहीं मिल रहा है।”

सरकारी संस्थान में विश्वस्तरीय उपचार का उदाहरण

          इस सफल सर्जरी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में भी अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के बल पर जटिल से जटिल बीमारियों का विश्वस्तरीय उपचार संभव है।
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10 दिनों में 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग, दुर्गम अंचलों तक पहुंचीं टीमें; हजारों मरीजों को मिला निःशुल्क उपचार

 बस्तर संभाग के घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और दूरस्थ बसाहटों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की दस्तक साफ महसूस की जा रही है। जहां कभी इलाज के लिए लंबी दूरी और अनिश्चितता ही विकल्प थी, वहां अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद लोगों के द्वार तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के दस दिन पूरे होते-होते यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सफल हो रही है, बल्कि सुदूर अंचलों में रहने वाले लोगों के मन में भरोसे की नई किरण भी जगा रही है।


अभियान के तहत अब तक 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। बड़ी संख्या में मरीजों को मौके पर ही निःशुल्क दवा और उपचार उपलब्ध कराया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में तत्काल राहत मिली है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिकता के साथ चिन्हित कर त्वरित रेफरल की व्यवस्था की गई है। अब तक 8055 मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में भेजकर विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित किया गया है।

जांच के दौरान मलेरिया के 1125, टीबी के 3245, कुष्ठ के 2803, मुख कैंसर के 1999, सिकल सेल के 1527 और मोतियाबिंद के 2496 मामलों की पहचान की गई है। समय पर पहचान और उपचार शुरू होने से इन बीमारियों की जटिलताओं को कम करने में मदद मिल रही है, साथ ही गंभीर स्थितियों को टालने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों तक एक समन्वित व्यवस्था बनाई गई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए उन इलाकों तक भी सेवाएं पहुंच रही हैं, जहां पहले इलाज की सुविधा सीमित थी।

इसके साथ ही लोगों के डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल (आभा) तैयार किए जा रहे हैं, ताकि आगे भी इलाज की निरंतरता बनी रहे और जरूरत पड़ने पर तुरंत स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध हो सके। अब बस्तर के सुदूर गांवों में भी लोग इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं खुद उनके द्वार तक पहुंच रही हैं। यही बदलाव इस अभियान को खास बना रहा है।
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी पहल: मुख्यधारा में लौटे युवाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा और नई उम्मीद

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विशेष पहल पर माओवाद छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे पुनर्वासित युवाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं का व्यापक लाभ मिल रहा है। इन युवाओं को राशन कार्ड, आधार कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ तेजी से उपलब्ध कराए जा रहे हैं । इसी तरह प्रशासन द्वारा इन युवाओं को आयुष्मान कार्ड बनाकर लाखों रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है ।इन प्रयासों से युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और उन्हें आत्मनिर्भर व सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है ।


दस्तावेजों से लेकर स्वास्थ्य तक पूरा सहयोग

पुनर्वासित युवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से उन्हें राशन कार्ड, आधार कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज सुगमता से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए आयुष्मान कार्ड भी बनाए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक चिंता के बिना इलाज करा सकें।

आयुष्मान योजनाओं से व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा

जिला चिकित्सालय बीजापुर में आयोजित कार्यक्रम में पुनर्वासित युवाओं को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए। इस कार्ड के माध्यम से विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के तहत उन्हें बड़ा लाभ मिलेगा—
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना एवं शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत
बीपीएल परिवारों को 5 लाख रुपये तक का निशुल्क इलाज
एपीएल परिवारों को 50 हजार रुपये तक का इलाज लाभ
मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत
दुर्लभ एवं गंभीर बीमारियों के लिए 25 लाख रुपये तक की मुफ्त चिकित्सा सहायता
साथ ही लाभार्थियों को योजनाओं के उपयोग और प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी भी दी गई।

युवाओं में दिखा नया आत्मविश्वास

आयुष्मान कार्ड प्राप्त करने के बाद पुनर्वासित युवाओं में उत्साह और आत्मविश्वास साफ नजर आया। उन्होंने शासन और प्रशासन के इस प्रयास की सराहना करते हुए बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा जताई।

समावेशी विकास की ओर मजबूत कदम

यह पहल न केवल पुनर्वासित युवाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए भी प्रेरित कर रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि ऐसे सभी युवाओं को योजनाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।
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ज्ञानभारतम् सर्वे को मिली रफ्तार : 31 मई तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश

  मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि शासकीय संस्थानों, मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों, महाविद्यालयों एवं निजी संस्थानों में संरक्षित पांडुलिपियों के सर्वेक्षण के लिए सक्रिय प्रयास करें । उन्होंने कहा कि परंपरागत समुदायों और पुरातात्विक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पांडुलिपियां और ज्ञान-संपदा मिल सकती है, इसलिए इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने जनभागीदारी बढ़ाने के लिए “पांडुलिपि ट्रेजर हंट” जैसे नवाचारों के आयोजन का सुझाव दिया गया, जिससे आम नागरिक भी इस अभियान से जुड़ सकें।


             मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में ‘ज्ञानभारतम्’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वेक्षण अभियान समिति के सदस्य तथा सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इस दौरान अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सर्वेक्षण कार्य 31 मई तक हर हाल में पूर्ण किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि यह सर्वे केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण का महत्वपूर्ण अभियान है। उन्होंने कहा कि जिलों में उपलब्ध पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण और संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए है। साथ ही प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय समिति का गठन, नोडल अधिकारी की नियुक्ति तथा सर्वेक्षण दलों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया। 

        बैठक में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित करने तथा स्थानीय पत्रकारों, साहित्यकारों, इतिहासकारों और जनप्रतिनिधियों को अभियान से जोड़ने पर बल दिया गया। यह अभियान पूरे देश के लिए ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और उसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सर्वेक्षण कार्य के दौरान पांडुलिपियों के स्वामित्व अधिकारों का सम्मान, बिना अनुमति स्थानांतरण न करने और सभी गतिविधियों में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया गया।

          बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से ज्ञानभारतम् पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत रूपरेखा, उद्देश्य और महत्व की जानकारी दी। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि शोधकर्ताओं के सहयोग से सुदूर अंचलों से भी पांडुलिपियों की महत्वपूर्ण जानकारी एकत्रित की जा सकती है, जिससे इस अभियान को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाया जा सकेगा। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. फरिहा आलम सिद्दीकी, संचालक संस्कृति श्री विवेक आचार्य सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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हरा सोना संग्राहकों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

 छत्तीसगढ़ और अन्य वन क्षेत्रों में तेंदूपत्ता को हरा सोना कहा जाता है, जो आदिवासियों और वनवासियों की आजीविका का मुख्य साधन है। हाल के नीतिगत बदलावों और सरकारी पहलों के कारण इन संग्राहकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस कार्य से प्रदेश के 13 लाख से अधिक संग्राहक परिवार जुड़े हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों को लगभग 920 करोड़ रुपये का भुगतान होने का अनुमान है। 


         वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार राज्य शासन द्वारा लघु वनोपज संग्राहकों, विशेषकर आदिवासी समुदाय की आय बढ़ाने के उद्देश्य से तेन्दूपत्ता संग्रहण दर में महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। वर्ष 2024 से प्रति मानक बोरा की दर 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5 हजार 500 रुपए कर दी गई है, जिसका सीधा लाभ लाखों ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। वर्ष 2026 में राज्य के 31 जिला वनोपज सहकारी यूनियनों के अंतर्गत 902 प्राथमिक समितियों में तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य प्रस्तावित है। इस वर्ष लगभग 15 लाख से अधिक मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का अनुमान है। एक मानक बोरे में 1000 गड्डियां होती हैं और प्रत्येक गड्डी में 50 पत्ते शामिल रहते हैं। 

लगभग 11 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण होने की संभावना

          बस्तर संभाग के 10 जिला यूनियनों की 216 समितियों में करीब 4 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। वहीं अन्य 21 यूनियनों की 868 समितियों में लगभग 11 लाख मानक बोरा संग्रहण होने की संभावना है। इस कार्य से प्रदेश के 13 लाख से अधिक संग्राहक परिवार जुड़े हैं। बस्तर संभाग में वर्ष 2025 के 3.90 लाख परिवारों की तुलना में इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 4.04 लाख हो गई है। इस साल अब तक 14 हाजर 57 नए परिवार इस कार्य से जुड़े हैं।

10 नए फड़ और बेहतर तैयारी

        नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में पहली बार 10 नए फड़ों की स्थापना की गई है, जहां 2100 से अधिक मानक बोरा संग्रहण का अनुमान है। इसके अलावा सुकमा और केशकाल क्षेत्रों में भी नए फड़ जोड़े गए हैं। पिछले वर्ष नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बाधाओं के कारण 351 फड़ों में संग्रहण नहीं हो सका था, लेकिन इस वर्ष सभी फड़ों में कार्य शुरू करने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है।

सुगम संचालन और पारदर्शी भुगतान

        संग्रहण कार्य को सुचारू बनाने के लिए संग्राहक कार्ड, बोरा, सुतली, गोदाम और परिवहन जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। साथ ही तेन्दूपत्ता के भंडारण का बीमा भी कराया जा रहा है। संग्राहकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से राशि सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी।

920 करोड़ रुपये का संभावित भुगतान

       इस वर्ष निर्धारित दर के अनुसार संग्राहकों को लगभग 920 करोड़ रुपये का भुगतान होने का अनुमान है। इससे ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा। तेन्दूपत्ता संग्रहण को लेकर सरकार की यह पहल न केवल वनवासियों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
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छत्तीसगढ़ी भाखा ला संविधान के 8वीं अनुसूची में शामिल करे अउ जनगणना में उचित स्थान देवाय बर

आजादी के एतका बछर बीत जाय के बाद घलो, आज हमर 'महतारी भाखा' छत्तीसगढ़ी ला वो मान-सम्मान अउ पद नई मिल पाइस, जेकर वो असली हकदार हे। ए ह बड़े दुख अउ लज्जा के बात हे कि जनगणना विभाग के वेबसाइट में 'नेपाली' जइसन भाखा मन ला जगह मिल गे हे, फेर करोड़ों मनखे मन के बोले जाय वाला हमर सुग्घर छत्तीसगढ़ी ला आज घलो उपेक्षित रखे गे हे।

ये कोनो वेबसाइट के गलती नोहे, ये हमर छत्तीसगढ़िया अस्मिता अउ पहिचान ऊपर हमला आय!
हमन सरकार अउ नेता मन ले सवाल पूछत हन:
अधिकार के लड़ाई: जब हमर भाखा के अपन समृद्ध साहित्य हे, व्याकरण हे, अउ करोड़ों छत्तीसगढ़िया मन एला गर्व ले बोलथें, त फेर संविधान के 8वीं अनुसूची ले एला बाहर काबर रखे गे हे? ए सौतेला व्यवहार कतका दिन तक चलही?
नेता मन के चुप्पी: सरकार कोनो भी हो—चाहे केंद्र के हो या राज्य के—जब छत्तीसगढ़िया मन के अपमान होथे, त हमर नेता मन चुप काबर हो जाथें? भाजपा हो या कांग्रेस, सबले पहिली वो मन छत्तीसगढ़िया अंय। अगर आज वो मन संसद अउ विधानसभा में आवाज नई उठइहें, त हमर भाखा के अस्तित्व ऊपर खतरा मंडराते रही।
सिर्फ वोट बर उपयोग: का हमर भाखा अउ बोली सिर्फ चुनाव के बेरा वोट मांगे बर आय? का हमर गौरवशाली संस्कृति सिर्फ झांकी देखाए अउ तमाशा बर आय?
हमार मांग:
छत्तीसगढ़ी भाखा ला तत्काल प्रभाव ले संविधान के 8वीं अनुसूची में शामिल करे जाय।
जनगणना अउ सरकारी दस्तावेज मन में छत्तीसगढ़ी ला पृथक अउ सम्मानजनक स्थान दे जाय।
प्राथमिक शिक्षा ले लेके राजकाज के काम में छत्तीसगढ़ी के उपयोग अनिवार्य करे जाय।
संगवारी हो, ये लड़ाई कोनो एक झन के नोहे, ये हमर आने वाला पीढ़ी अउ महतारी भाखा के अस्तित्व के लड़ाई आय। अब चुप्पी तोड़े के बेरा आ गे हे।
"छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया" तब होही, जब छत्तीसगढ़ी ला सम्मान मिलही!
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नगरीय निकायों के कार्यों की मैराथन समीक्षा का दूसरा दिन, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने की नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा

 प्रदेशभर के नगरीय निकायों की समीक्षा का दौर आज दूसरे दिन भी जारी रहा। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने रायपुर के सिविल लाइन स्थित सर्किट हाउस में आज दिनभर चली बैठक में सभी नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने बैठक में नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को बेतरतीब निर्माणों, अवैध प्लाटिंग और अतिक्रमण पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने नगर पंचायतों के कार्यों और व्यवस्थाओं में कसावट लाने को कहा। श्री साव ने कहा कि  काम में लापरवाही और कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जवाबदेही तय कर संबंधितों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

 
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने सभी सीएमओ को नई सोच और नई कार्य पद्धति से शहरों तथा शहरवासियों के कल्याण के लिए काम करने को कहा। उन्होंने राज्य के उभरते शहरों को सुव्यवस्थित, सुनियोजित, स्वच्छ और सुंदर बनाने के साथ ही नागरिकों के लिए पर्याप्त जन सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पांचों संभागों के विभागीय क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों को हर तिमाही में प्रत्येक नगर पालिका और नगर पंचायत का व्यक्तिगत निरीक्षण कर संचालक को प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., संचालक श्री आर. एक्का और राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ श्री शशांक पाण्डेय भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने सभी सीएमओ को आगामी 31 मई तक नगर पंचायतों की नई संपत्तियों पर करारोपण का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्व संग्रहण बढ़ाने संपत्ति कर, जल कर, यूजर चार्ज जैसे करों की वसूली गंभीरता और कड़ाई से करने को कहा। उन्होंने एनर्जी ऑडिट के माध्यम से गैर-जरूरी विद्युत कनेक्शनों की पहचान कर इसके विच्छेदन की कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने निकाय के सभी कार्मिकों को हर माह समय पर वेतन और बिजली बिल का भुगतान सुनिश्चित करने को भी कहा।
 
श्री साव ने जल संरक्षण के लिए विशेष प्रयास करने के लिए निर्देशित करते हुए शत-प्रतिशत भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर्स का निर्माण कराने को कहा। उन्होंने 31 मई तक बड़े नाला-नालियों और ड्रेनेज की सफाई के काम पूर्ण करने के साथ ही बरसात में जल भराव रोकने जरूरी उपाय करने को कहा। श्री साव ने सभी सीएमओ को मुख्यालय में ही निवास करते हुए प्रतिदिन प्रातः भ्रमण कर शहर की साफ-सफाई और विकास कार्यों की मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने भ्रमण के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी अपने साथ रखने को कहा। उन्होंने सीएमओ द्वारा प्रातः भ्रमण में की जा रही कोताही पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए रोजाना अनिवार्यतः कार्यों के निरीक्षण के निर्देश दिए।  

श्री साव ने शहरों में नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए बच्चों के लिए खेल के मैदानों और उद्यानों के लिए जगहों का चिन्हांकन करने को कहा। उन्होंने कुनकुरी और अंबागढ़-चौकी में निर्माणाधीन नालंदा परिसरों का निर्माण इस साल दिसम्बर तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। श्री साव ने पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था पर दूरदर्शिता से काम करते हुए अगले दस वर्षों के लिए पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता में रखते हुए इसके लिए 15वें वित्त आयोग की राशि से पुख्ता व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। 

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने वर्षा ऋतु के पहले सभी नाला, नालियों, ड्रेनेज और तालाबों की सफाई करने को कहा। उन्होंने पाइपलाइन्स के लीकेज ठीक करते हुए सभी घरों तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। श्री साव ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत आवासों के निर्माण एक साल के भीतर पूर्ण करने को कहा। उन्होंने कहा कि शहर के जरूरतमंदों के लिए पीएम आवास स्वीकृत करना और बनवाना सीएमओ की जिम्मेदारी है। इस पर सक्रियता और गंभीरता से काम करते हुए आवास स्वीकृति के एक सप्ताह के भीतर भवन निर्माण अनुज्ञा जारी करने को कहा। उन्होंने आवास की स्वीकृति के बाद लाभार्थियों को बुलाकर मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान सहित योजना से संबंधित सभी नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी देने को कहा।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैठक में प्रदेशभर में आगामी 1 मई से शुरू हो रहे सुशासन तिहार के अंतर्गत शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शहरवासियों को लाभान्वित करने की तैयारी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य, मुख्य अभियंता श्री राजेश शर्मा और नगर पंचायतों के अभियंता भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थे।

इन कार्यों और योजनाओं की हुई समीक्षा

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने दिनभर चले मैराथन बैठक में नगर पंचायतों में राजस्व वसूली, विद्युत देयकों के भुगतान, वेतन भुगतान, अधोसंरचना विकास व 15वें वित्त आयोग के कार्यों, नालंदा परिसरों, नगरोत्थान योजना, जलप्रदाय योजनाओं, आपदा प्रबंधन, गोधाम योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम स्वनिधि योजना, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, आई-गॉट (I-got) कर्मयोगी तथा रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कार्यों की समीक्षा की।
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शहरों में पेयजल आपूर्ति, अवैध प्लॉटिंग और अवैध निर्माण पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव सख्त

  उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने आज प्रदेश के सभी नगर निगमों और नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर के सिविल लाइन स्थित सर्किट हाउस में दिनभर चली बैठक में शहरों में पेयजल आपूर्ति की समस्याओं, अवैध प्लॉटिंग और अवैध निर्माण पर नाराजगी जाहिर करते हुए इनके निराकरण के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने धमतरी में पेयजल योजना के काम में लेटलतीफी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कार्यपालन अभियंता को निलंबित करने तथा ठेकेदार पर पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए। 


नगर निगमों और नगर पालिकाओं की आज दो अलग-अलग हुई समीक्षा बैठकों में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., संचालक श्री आर. एक्का और राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ श्री शशांक पाण्डेय सहित सभी नगर निगमों के आयुक्त, नगर पालिकाओं के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, वरिष्ठ अभियंता एवं नगरीय प्रशासन विभाग के पांचों संभागीय क्षेत्रीय कार्यालयों के संयुक्त संचालक भी बैठक में मौजूद थे। 

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने समीक्षा बैठक में नगर निगमों और नगर पालिकाओं के अधिकारियों को शहरों की जरूरत के मुताबिक कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने निकायों की व्यवस्था और छवि सुधारने सक्रियता व गंभीरता से काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि नगर निगम ऐसा काम करें जिससे राज्य की नगर पालिकाएं प्रेरणा ले सकें और नगर पालिका इस तरह से काम करें जिनसे नगर पंचायतें प्रेरित हो सकें। उन्होंने निकायों के अभियंताओं से कहा कि काम की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें नहीं आना चाहिए। सभी निर्माण कार्य समय-सीमा में पूर्ण हों, इस पर विशेष ध्यान दें।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने पेयजल आपूर्ति की लगातार आ रही शिकायतों पर नाखुशी और नाराजगी जाहिर करते हुए अगले वर्ष तक सभी नगर निगमों में इसके स्थाई समाधान के  निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहरों में केवल बजट खर्च करने के उद्देश्य से काम न करें, बल्कि समस्याओं का स्थाई समाधान करें। पेयजल समस्या की शिकायतों पर जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगामी 31 मई तक सभी नगर निगमों में बड़े नाला-नालियों और ड्रेनेज की सफाई के काम पूर्ण करने के साथ ही बरसात में जल भराव रोकने जरूरी उपाय करने को कहा। जून के पहले सप्ताह में राज्य स्तरीय टीम नगर निगमों में इसका भौतिक निरीक्षण करेंगी। कार्य संतोषजनक न मिलने पर स्वास्थ्य अधिकारी और इंजीनियर पर कार्रवाई की जाएगी। 

श्री साव ने बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत अपूर्ण आवासों को सितम्बर-2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने अप्रारंभ आवासों के निर्माण एक माह के भीतर हर हाल में शुरू करने के साथ ही मार्च-2026 में स्वीकृत सभी आवासों को वर्षा ऋतु के पहले प्रारंभ करने को कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत निर्धारित 18 माह की अवधि में निर्माण पूर्ण करने वाले हितग्राहियों के प्रस्ताव अविलंब विभाग को भेजने के निर्देश दिए, ताकि ऐसे हितग्राहियों को मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना की 32 हजार 850 रुपए की अतिरिक्त राशि प्रदान की जा सके।

श्री साव ने पीएम स्वनिधि योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा स्ट्रीट वेंडर्स को दिलाने बैंकों से बात कर ऋण स्वीकृत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने शहरों में भूजल को रिचार्ज करने के लिए डीएमएफ, सीएसआर और जन सहयोग से अधिक से अधिक संख्या में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य कराने को कहा। श्री साव ने शहरों को सुंदर, स्वच्छ और सुविधापूर्ण बनाने के मिशन में वर्तमान समय की जरूरतों और तकनीकों के साथ नई कार्य पद्धति अपनाने के निर्देश निकायों के अधिकारियों को दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के उप सचिव श्री भागवत जायसवाल, अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य और मुख्य अभियंता श्री राजेश शर्मा भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थे।

इन कार्यों और योजनाओं की हुई समीक्षा

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज दो सत्रों में मैराथन बैठकों में नगरीय निकायों में राजस्व वसूली, विद्युत देयकों के भुगतान, वेतन भुगतान, अधोसंरचना विकास व 15वें वित्त आयोग के कार्यों, नालंदा परिसरों, नगरोत्थान योजना, जलप्रदाय योजनाओं, आपदा प्रबंधन, गोधाम योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम स्वनिधि योजना, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, आई-गॉट (I-got) कर्मयोगी तथा रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कार्यों की समीक्षा की। वे 21 अप्रैल को दिनभर नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा करेंगे।
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सामाजिक न्याय और समानता के महान शिल्पी डॉ. भीमराव आंबेडकर को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने किया नमन

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर उन्हें नमन किया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर सामाजिक न्याय, समानता और मानव अधिकारों के सशक्त प्रहरी थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन को समाज के वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया और एक ऐसे भारत की नींव रखी, जहां हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।  

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार बाबा साहेब के आदर्शों और सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए समाज के हर वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं समाज के अंतिम छोर तक विकास और अवसरों की समान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारा प्रयास है कि प्रदेश का हर नागरिक शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सशक्त बने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़े। 

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे बाबा साहेब आंबेडकर के विचारों और मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा एक न्यायपूर्ण, समरस और सशक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण और सुलभ चिकित्सा पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः…” की भारतीय जीवनदृष्टि को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। 


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सुकमा जिला चिकित्सालय में ‘अटल आरोग्य लैब’ का राज्यस्तरीय शुभारंभ किया। यह पहल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई क्रांति का आधार बनेगी, जो विशेष रूप से दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के नागरिकों को आधुनिक एवं सुलभ जांच सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य शासन का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश के हर नागरिक तक उत्कृष्ट, किफायती और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं। उन्होंने कहा कि अटल आरोग्य लैब के माध्यम से अब प्रदेश के 1046 स्वास्थ्य संस्थानों - जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक -मुफ्त जांच की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे लाखों नागरिकों को सीधे लाभ मिलेगा। इस अत्याधुनिक डिजिटल प्रणाली के माध्यम से मरीजों को 133 प्रकार की जांचें निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। जांच रिपोर्ट एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से सीधे मरीजों तक पहुंचेगी, जिससे उन्हें बार-बार अस्पताल आने की आवश्यकता नहीं होगी और उपचार प्रक्रिया में तेजी आएगी। यह व्यवस्था न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुलभ भी बनाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि  प्रदेश की डायग्नोस्टिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। इससे रक्त जांच सहित विभिन्न रोगों की पहचान शीघ्र और सटीक रूप से संभव होगी, जिससे समय पर उपचार शुरू कर मरीजों के स्वास्थ्य लाभ की दर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष रूप से बस्तर जैसे दूरस्थ अंचलों में ऐसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार राज्य सरकार की प्राथमिकता है, ताकि यहां के नागरिकों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। अटल आरोग्य लैब इस दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।

उल्लेखनीय है कि जिला चिकित्सालय सुकमा में पहले से ही ब्लड बैंक, सोनोग्राफी, एक्स-रे, ईसीजी, आपातकालीन सेवाएं, सीजेरियन प्रसव, एनआरसी एवं डायलिसिस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब अटल आरोग्य लैब के जुड़ने से यहां की स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुदृढ़ एवं व्यापक हो जाएंगी।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल, बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप, महिला आयोग सदस्य सुश्री दीपिका सोरी, कमिश्नर श्री डोमन सिंह, आईजी श्री सुंदरराज पी.  सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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नक्सलमुक्त बस्तर में विकास की नई गूंज: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुकमा को दी 308 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

नक्सलवाद के प्रभाव से उबरकर नए विश्वास और विकास की राह पर अग्रसर बस्तर क्षेत्र में आज एक महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ गया, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुकमा जिले को 308 करोड़ रुपए से अधिक के 228 विकास कार्यों की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने 159 कार्यों का शिलान्यास और 69 कार्यों का लोकार्पण करते हुए क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति प्रदान की।


मिनी स्टेडियम सुकमा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 40 वर्षों से नक्सलवाद के कारण पिछड़े रहे क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में बस्तर में शांति स्थापित हुई है और अब यहां विकास की गंगा बह रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिन गांवों में कभी हिंसा और भय का माहौल था, वहां आज स्कूलों की घंटियां गूंज रही हैं और लोग लोकतंत्र पर भरोसा जताते हुए मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि 3 हजार से अधिक माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं और उन्हें पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से नई जिंदगी की शुरुआत के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

स्वस्थ बस्तर की दिशा में बड़ा कदम

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं भी स्वास्थ्य परीक्षण कराया और “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को घर-घर तक सुनिश्चित करने के प्रयासों की सराहना की। इस अभियान के तहत 7 जिलों में 1100 टीमें घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच करेंगी।

कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री श्री साय ने मिनी स्टेडियम में लगाए गए विभिन्न विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया और आम नागरिकों एवं हितग्राहियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने मौके पर ही विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता सामग्री और प्रमाण पत्र वितरित कर शासन की संवेदनशीलता का परिचय दिया। स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल में मुख्यमंत्री ने 7 टीबी मुक्त पंचायतों को प्रमाण पत्र प्रदान किए और जानकारी ली कि जिले में अब तक 28 पंचायतें टीबी मुक्त हो चुकी हैं। उन्होंने 3 टीबी मरीजों से संवाद कर उन्हें फूड बास्केट वितरित किया।
मोतियाबिंद ऑपरेशन कराए मरीजों को मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से चश्मा पहनाकर उनके स्वास्थ्य लाभ की कामना की। साथ ही दवा और आई ड्रॉप भी वितरित किए गए। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए मूर्तोंडा, पेंटा और कांकेरलंका उपस्वास्थ्य केंद्रों को एनक्वास सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। समाज कल्याण विभाग के स्टॉल में मुख्यमंत्री श्री साय ने आईईडी ब्लास्ट में पैर गंवा चुके 5 हितग्राहियों को कृत्रिम पैर प्रदान किए। इसके अलावा 4 व्हीलचेयर और 3 ट्राइसिकल भी वितरित किए गए तथा 6 दिव्यांगजनों को पहचान पत्र देकर उन्हें योजनाओं से जोड़ने की पहल की गई।
एनआरएलएम स्टॉल में स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें “लखपति दीदी से करोड़पति दीदी” बनने के लिए प्रेरित किया और सरकार की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।

आवास, अधिकार और आजीविका—हर क्षेत्र में सशक्तिकरण

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के स्टॉल में हितग्राहियों से बातचीत कर निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से 15 वनाधिकार पत्र वितरित किए गए, जिससे आदिवासी परिवारों को उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई। वन विभाग के स्टॉल में तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े हितग्राहियों को सहायता प्रदान की गई। सहकारी समिति तोंगपाल को 4.27 लाख रुपए का सांकेतिक चेक दिया गया तथा एक हितग्राही को संग्रहण कार्ड वितरित किया गया।
इसके साथ ही पुनर्वासित स्व-सहायता समूह की महिलाओं को 2 ई-रिक्शा प्रदान कर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया गया और एक हितग्राही को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया गया।

नियद नेल्लानार 2.0 और 8 बड़ी घोषणाएं

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि नियद नेल्लानार योजना के तहत अब तक 500 से अधिक गांवों में 17 विभागों की 45 योजनाओं के माध्यम से विकास कार्य किए गए हैं। इस योजना के अगले चरण ‘नियद नेल्लानार 2.0’ में अब 10 जिलों को शामिल किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए 8 महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं, जिनमें सड़क निर्माण, पुलिया निर्माण, बस स्टैंड, सामुदायिक भवन और मंदिर जीर्णोद्धार जैसे कार्य शामिल हैं।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल, सांसद श्री महेश कश्यप, मुख्य सचिव श्री विकास शील, स्वास्थ्य सचिव श्री अमित कटारिया, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
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करोड़ों की लागत से बदल रहा पुसौर का स्वरूप-वित्त मंत्री श्री चौधरी

प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी.चौधरी ने पुसौर में निर्माणाधीन लाइब्रेरी भवन, पुष्पवाटिका उद्यान, चंदन तालाब सहित अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर कार्यों की प्रगति एवं गुणवत्ता का सूक्ष्म परीक्षण करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा

निर्माण स्थल पर जाकर प्रत्यक्ष रूप से कार्यों की स्थिति देखना,  बुनियादी ढांचे का विकास कराना हम सभी की जिम्मेदारी है l उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

            वित्त मंत्री श्री चौधरी ने नगर पंचायत पुसौर के सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान क्षेत्र में संचालित विकास कार्यों की प्रगति का गहन मूल्यांकन किया। उन्होंने अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य शासन की मंशा के अनुरूप विकास कार्यों को धरातल पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि आमजन को योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिल सके। 

          बैठक में उन्होंने अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर देते हुए कहा कि सभी के संयुक्त प्रयासों से ही क्षेत्र का समग्र एवं संतुलित विकास संभव है। साथ ही उन्होंने पार्षदों एवं जनप्रतिनिधियों से सकारात्मक सहयोग प्रदान करने तथा विकास कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की।

           उल्लेखनीय है कि नगर पंचायत पुसौर में पुष्पवाटिका उद्यान निर्माण हेतु लगभग 2 करोड़ 92 लाख 40 हजार रुपये, बोरोडीपा चौक से कॉलेज तक बी.टी. रोड एवं नाली निर्माण के लिए 4 करोड़ 8 लाख रुपये, चंदन तालाब के सौंदर्यकरण के लिए 2 करोड़ 10 लाख 40 हजार रुपये तथा लाइब्रेरी भवन निर्माण के लिए लगभग 99.12 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त तेलीतार तालाब के गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य भी प्रगति पर है, जिससे क्षेत्र की सौंदर्य वृद्धि के साथ जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। 

        इस अवसर पर नगर पंचायत पुसौर के अध्यक्ष श्री मानी मोहित सतपथी, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, अपर कलेक्टर श्री अपूर्व प्रियेश टोप्पो, एसडीएम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं नगर पंचायत पुसौर के जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति थे ।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पुनर्वास केंद्र का किया अवलोकन, पुनर्वासितों से किया आत्मीय संवाद

नक्सल आतंक से लंबे समय तक प्रभावित रहे सुकमा में अब शांति, विश्वास और विकास की नई तस्वीर उभर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सुकमा जिला मुख्यालय स्थित पुनर्वास केंद्र का दौरा कर वहां संचालित पुनर्वास एवं कौशल विकास गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने पुनर्वासित लोगों से आत्मीय संवाद कर उनके अनुभव जाने और उन्हें मुख्यधारा से जुड़कर नया जीवन प्रारंभ करने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार भटके हुए लोगों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन, रोजगार और आगे बढ़ने के समान अवसर देने के लिए दृढ़संकल्पित है। उन्होंने कहा कि पुनर्वासितों की आंखों में दिखता आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो हर भटका हुआ कदम नई दिशा और नया जीवन प्राप्त कर सकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की प्रभावी नक्सल पुनर्वास नीति के चलते सुकमा सहित बस्तर क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अब तक 2392 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया है, जिनमें से 361 पुनर्वासितों ने नया जीवन प्रारंभ कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि इन नागरिकों को सम्मानजनक जीवन, स्थायी रोजगार और समाज में बराबरी का अवसर प्रदान करना है। पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, कपड़ा सिलाई, कृषि उद्यमिता और वाहन चालक जैसे विभिन्न ट्रेडों में कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में अब तक 307 हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है, वहीं मुख्यधारा में लौटे 313 युवाओं को प्रतिमाह 10 हजार रुपये का स्टाइपेंड भी प्रदान किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा 107 पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल फोन वितरित किए गए हैं, जिससे वे डिजिटल और संचार माध्यमों से जुड़कर आधुनिक जीवनशैली की ओर अग्रसर हो सकें। विशेष रूप से 115 महिलाएं प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय  ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के आश्रितों को भी राहत प्रदान करते हुए अनुकंपा नियुक्ति के तहत पुलिस विभाग में 20 तथा जिला प्रशासन द्वारा 95 लोगों को शासकीय सेवा में रोजगार के अवसर दिए गए हैं। 

कार्यक्रम के दौरान ग्राम ढोंडरा कोंटा निवासी मौसम संजना, नागारास जगरगुंडा निवासी भरत कुमार हेमला सहित अन्य हितग्राहियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त शिक्षा विभाग के अंतर्गत 10 नव नियुक्त शिक्षकों को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए गए।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल, राजमिस्त्री किट, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबियां तथा पूर्णता प्रमाण पत्र वितरित किए।  इस अवसर पर 25 हितग्राहियों को आवास की चाबी सौंपकर उन्हें सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने नक्सल पुनर्वास की सफलता की प्रेरणादायक कहानियों को दर्शाती ‘बदलते सुकमा की बदलती तस्वीर: पुनर्वास से विकास तक’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। साथ ही, पुनर्वास केंद्र के कला केंद्र में कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल भौतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक बदलाव का भी प्रतीक है।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद बस्तर श्री महेश कश्यप  सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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महिला आरक्षण से आधी आबादी को मिलेगा उनका पूरा हक, निर्णय प्रक्रिया में बढ़ेगी भागीदारी - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में नई दिल्ली के विज्ञान भवन से प्रसारित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन को सुना। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह देश की मातृशक्ति के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जो भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक समावेशी एवं सशक्त बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘पंचायत से पार्लियामेंट तक’ नारी की भागीदारी सुनिश्चित करने का यह प्रयास नए भारत की स्पष्ट झलक प्रस्तुत करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस दृष्टिकोण को रेखांकित किया कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की सीधी भागीदारी ही विकसित भारत की सशक्त नींव है।

उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर होने वाली चर्चा इस ऐतिहासिक पहल को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा में नारी को सदैव उच्च स्थान दिया गया है। वैदिक काल से लेकर वर्तमान समय तक महिलाओं की भूमिका समाज के निर्माण और विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। हमारी डबल इंजन सरकार की विभिन्न योजनाओं ने इस परंपरा को आधुनिक संदर्भ में सशक्त रूप दिया है, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ आगे बढ़ रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिला है, जिसका सकारात्मक प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। साथ ही ‘महतारी वंदन योजना’ जैसी पहल माताओं-बहनों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सुदृढ़ बना रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुखद संयोग है कि जब देश में महिला आरक्षण पर ऐतिहासिक चर्चा हो रही है, उसी समय छत्तीसगढ़ ‘महतारी गौरव वर्ष’ मना रहा है। उन्होंने कहा कि ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का सम्मान और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी प्रदेश की पहचान बन चुकी है।
उन्होंने प्रदेश की मातृशक्ति और महिला संगठनों से आह्वान किया कि वे हर मंच पर अपनी आवाज़ बुलंद करें और इस परिवर्तन यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं की बढ़ती सहभागिता से लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा तथा समाज में सकारात्मक बदलाव की नई दिशा स्थापित होगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अंत में कहा कि जब नारी सशक्त होती है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है। यह समय देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा में निर्णायक भूमिका देने का है।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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उद्योग और श्रम विभाग के आपसी समन्वय से संवर रहा है - छत्तीसगढ़

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जिस स्पष्ट नीति के साथ श्रमिकों और उद्योगों के समन्वित विकास को प्राथमिकता दी है, वह आज ठोस परिणामों के रूप में सामने आ रही है। श्रम विभाग की योजनाओं में यह भावना स्पष्ट झलकती है कि श्रमिक केवल आर्थिक इकाई नहीं, बल्कि समाज की आधारशिला हैं। उनके जीवन में स्थायित्व, सम्मान और सुरक्षा लाना ही सच्चे विकास का संकेत है। 12 अप्रैल का यह विशेष अवसर उद्योग तथा श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन के समर्पण, कार्यक्षमता और जनसेवा की भावना को याद करने का दिन है। आपके कुशल नेतृत्व से ही छत्तीसगढ़ प्रगति, समृद्धि और समान अवसरों का आदर्श राज्य बनकर उभरा है।


         2026 रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ के विकास की वर्तमान यात्रा केवल योजनाओं और घोषणाओं की कहानी भर नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे नेतृत्व की कथा है जिसने श्रमिक, युवा, उद्यमी और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया है। इस परिवर्तनकारी दौर में उद्योग व श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उनका कार्य केवल प्रशासनिक दक्षता तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का जीवंत उदाहरण है। छत्तीसगढ़ सरकार ने 25 वर्ष की अल्प आयु में उद्योग के क्षेत्र में जो एक नया इतिहास रचने का संकल्प लिया है वह किसी से छिपा नहीं है। उद्योग के क्षेत्र में आज छत्तीसगढ़ की अपनी एक अलग पहचान है। नई उद्योग नीति (2024-2030) में छत्तीसगढ़ के समावेशी विकास पर जोर दिया गया है।

        श्रमिकों के सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों में सबसे प्रेरणादायक पहल श्रमिकों के बच्चों को उत्कृष्ट विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना है। यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि परिवर्तन का वह मार्ग है जिससे कि आने वाली नई पीढ़ी ज्ञान और अवसरों के माध्यम से अपना सुनहरा और सुरक्षित भविष्य स्वयं गढ़ सके। आज के संदर्भ में श्रमिक परिवारों के बच्चों का राज्य के प्रतिष्ठित स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करना, एक नए छत्तीसगढ़ की तस्वीर प्रस्तुत करता है। इसके साथ ही मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों को लाखों रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान करना सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें प्रतिभा का सम्मान सर्वाेपरि है। यह न केवल उन बच्चों के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि पूरे श्रमिक समाज के लिए आत्मविश्वास का स्त्रोत भी है।

         उद्योग और श्रम विभाग से आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पिछले दो वर्षों में सैकड़ों करोड़ रुपये सीधे श्रमिकों के खातों में हस्तांतरित किए गए हैं, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ भी सुनिश्चित हुआ है। प्रतिदिन हजारों श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलना इस बात का प्रमाण है कि शासन की नीतियां धरातल पर प्रभावी रूप से लागू हो रही हैं। श्रमिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने के लिए आवास सहायता, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न  योजना, दुर्घटना में त्वरित आर्थिक सहयोग जैसी पहलें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। विशेष रूप से ’श्रम अन्न योजना’ के अंतर्गत मात्र 5 रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन। ’श्रम अन्न योजना’ के अंतर्गत मात्र 5 रुपये में गरम और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना, एक मानवीय और संवेदनशील शासन का परिचायक है। 

        औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी मंत्री लखनलाल देवांगन के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने नई ऊंचाईयों को छुआ है। औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के माध्यम से राज्य में निवेशको को प्रोत्साहित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। करोड़ों रुपये के निवेश प्रस्ताव, सैकड़ों नए उद्योगों की स्थापना और हजारों युवाओं को रोजगार मिलना इस नीति की सफलता को प्रमाणित करता है।

        नवा रायपुर में देश का पहला एआई डाटा सेंटर स्थापित करने की दिशा में बढ़ता कदम, सेमीकंडक्टर और आईटी जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश, तथा स्टार्टअप नीति का क्रियान्वयन ये सभी पहलें छत्तीसगढ़ को पारंपरिक अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ाकर आधुनिक तकनीकी युग में स्थापित कर रही हैं। यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक संरचना को भी नई दिशा देने वाला है। प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में ई-निविदा प्रणाली और सिंगल विंडो सिस्टम जैसे कदमों ने पारदर्शिता को बढ़ाया है जिससे निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है और राज्य में व्यापार करने की प्रक्रिया सरल बनी है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ आज निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है।

         सामाजिक समावेशन को छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल और दूरस्थ क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की योजनाएं यह सुनिश्चित करती हैं कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। सामाजिक समावेश नही किसी भी राज्य की वास्तविक प्रगति का आधार होता है।

         उद्योग तथा श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने अपने गंभीर व दूर-दृष्टि सोच एवं विभागीय दायित्वों के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि यदि नेतृत्व में संवेदनशीलता और स्पष्ट दृष्टि हो, तो विकास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाता है। वहीं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सरकार के मार्गदर्शन में यह परिवर्तन और अधिक सशक्त और व्यापक रूप ले रहा है।
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