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सफलता के लिए निरंतर सीखना, कौशल निखारना और आत्मविकास अनिवार्य - पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद

 अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह का आयोजन आज पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद के मुख्य आतिथ्य में गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल श्री रमेन डेका ने की। अति विशिष्ट अतिथि के तौर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, विशिष्ट अतिथि उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव तथा उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा शामिल हुए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य डॉ. दिवाकर नाथ वाजपेयी उपस्थित रहे। समारोह में 64 शोद्यार्थियों को शोध उपाधि, 92 गोल्ड मेडल एवं 36950 स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधि दी गई।   


विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने स्नातक छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने युवा पीढ़ी की ऊर्जा और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी है और वर्तमान युवा इसका ऐतिहासिक साक्षी और भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से स्नातक होना शिक्षा की पूर्णता नहीं है, बल्कि इक्कीसवीं सदी में सफलता के लिए निरंतर सीखना, कौशल निखारना और आत्मविकास अनिवार्य है।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि देश के विश्वविद्यालयों में बेटियाँ शिक्षा के क्षेत्र में कई बार बेटों से आगे निकल रही हैं और इस विश्वविद्यालय के स्वर्ण पदक विजेताओं में भी बेटियों की संख्या उल्लेखनीय है। उन्होंने विद्यार्थियों, विशेषकर पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि केवल उनकी मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे माता-पिता का त्याग, परिवार का सहयोग और गुरुओं का अमूल्य मार्गदर्शन भी निहित है। यह हर विद्यार्थी के लिए एक सुनहरा यादगार पल है, जिसे वे जीवनभर याद रखेंगे। उन्होंने कहा कि-“कभी यह मत सोचिए कि आप पीछे रह गए हैं। यदि आप प्रयास करना नहीं छोड़ते, तो आप हमेशा पहले स्थान पर हो सकते हैं।” उन्होंने छात्रों से अपने सपनों को साकार करने के लिए परिश्रम करने, भारतीय संस्कृति, मूल्यों और जड़ों से जुड़े रहने और योग व विज्ञान जैसी भारतीय विरासत को अपनाने का आह्वान किया। 

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि जीवन में अनेक चुनौतियाँ आती हैं, जिनमें कभी-कभी हम गिरते भी हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हर बार स्वयं को संभालकर फिर से खड़ा होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में गिरावट से भयभीत न हों और हमेशा उठने का साहस रखें। राज्यपाल ने अनुशासन को जीवन में सफलता की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि जीवन एक सुंदर यात्रा है, और इसे उद्देश्यपूर्ण, सकारात्मक और सार्थक ढंग से जीना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर ध्यान आकर्षित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज तनाव एक बड़ी चुनौती बन चुका है। इसलिए योग, ध्यान और नियमित शारीरिक गतिविधि को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से यह भी आग्रह किया कि वे जीवन में ऐसा कार्य चुनें जिसमें तनाव कम हो, पारदर्शिता हो और जिससे स्वयं, समाज और राष्ट्र का सकारात्मक परिवर्तन संभव हो। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि  सफलता केवल डिग्री से नहीं, बल्कि सीखने की निरंतर इच्छा से तय होती है। दुनिया तेजी से बदल रही है, और जो युवा अपनी संस्कृति की जड़ों से जुड़े रहते हुए तकनीक, नवाचार और मेहनत का मार्ग चुनते हैं, वहीं कल का भारत गढ़ेंगे। जीवन में अवसर हमेशा बाहर नहीं मिलते, कई बार हमें स्वयं अवसर बनाना होता है। अनुशासन, लगन और सकारात्मक दृष्टि ही वह शक्ति है, जो हर साधारण क्षण को असाधारण उपलब्धि में बदल देती है। उन्होंने कहा कि मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि यह पीढ़ी छत्तीसगढ़ को और पूरे देश को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह समारोह केवल औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों, संकल्पों और संघर्षों का उत्सव है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बहुविषयक अध्ययन, कौशल आधारित शिक्षण, चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट और आधुनिक पाठ्यचर्या जैसी व्यवस्थाओं को लागू करने की सराहना की, जिससे छात्र वैश्विक अवसरों का लाभ उठा सकें। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विवि में डिजिटलईजेशन के माध्यम से विश्वविद्यालय द्वारा प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा फॉर्म, ट्रांसक्रिप्ट और डिग्री प्रमाणपत्र जैसी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है। इस नई प्रणाली से छात्रों को सरल, पारदर्शी और त्वरित सेवाएँ मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि पीएम उषा कार्यक्रम के तहत वित्तीय सहायता नए प्रयोगशालाओं, स्मार्ट कक्षाओं, डिजिटल लाइब्रेरी और आधुनिक अकादमिक अवसंरचना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी इससे विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार को सुनिश्चित कर सकेगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों को राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कृषि विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक संरचना, भाषा-साहित्य और तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को ज्ञान, अनुशासन और प्रेरणा का एक उत्सव प्रदान किया और अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय की उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार की प्रतिबद्धता को उजागर किया।

उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी के मार्गदर्शन में बने इस राज्य ने शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्रों के परिश्रम, संघर्ष और लगन का सम्मान है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है तथा 20 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिससे शैक्षणिक अधोसंरचना और अधिक मजबूत होगी। अतिथियों ने विश्वविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका कन्हार का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य डॉ. अरूण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने दिया। 

कार्यक्रम में विधायक सर्वश्री श्री अमर अग्रवाल, धर्मजीत सिंह, धरमलाल कौशिक, सुशांत शुक्ला, अटल श्रीवास्तव, दिलीप लहरिया, क्रेडा के अध्यक्ष श्री भूपेन्द्र सवन्नी, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, कुलसचिव डॉ. तारणीश गौतम सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे।
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मुख्यमंत्री श्री साय से एनएमआईएमएस के प्रतिनिधियों ने की सौजन्य मुलाकात

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में नारसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) के प्रतिनिधि श्री जगदीश वी पारिख ने सौजन्य भेंट की। मुलाकात के दौरान प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे विशेष प्रयासों तथा नई संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।


श्री पारिख ने मुख्यमंत्री को संस्थान द्वारा नया रायपुर के एडुसिटी में अपना कैंपस स्थापित करने के प्रस्ताव से अवगत कराया। उन्होंने एनएमआईएमएस द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों, शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी भी साझा की। साथ ही श्री पारिख ने उन्हें आज आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ पी चौधरी से हुए मुलाकात के बारे में बताया और उनके माध्यम से हर संभव विभागीय सहयोग मिलने की बात कही।
                  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ नया रायपुर में एडुसिटी का विकास कर रही है। उन्होंने कहा कि एडुसिटी के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्ट संस्थाओं में पढ़ने का अवसर मिलेगा और उन्हें बड़े शहरों की ओर जाने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि नारसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के आने से राज्य के युवाओं को मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त होगी। एडुसिटी में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के संचालन से युवाओं के कौशल विकास को नई दिशा मिलेगी और रोजगार के बेहतर अवसर सृजित होंगे।
          उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार नया रायपुर को एजुकेशनल हब के रूप में विकसित करने के लिए एडुसिटी का निर्माण कर रही है। इसमें मल्टी-डिसिप्लीनरी यूनिवर्सिटी, रिसर्च सेंटर, इन्क्यूबेशन हब, डिजिटल लाइब्रेरी, विज्ञान एवं नवाचार केंद्र तथा अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना प्रस्तावित है। इससे प्रदेश के युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, शोध और स्टार्टअप के अवसर मिलेंगे।
नया रायपुर में पहले से ही आईआईआईटी, आईआईएम, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान संचालित हैं। एडुसिटी के विकसित होने से यहां शिक्षा का एक सशक्त और आधुनिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार होगा।
          इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, नया रायपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री चंदन कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग 2024 के टॉप 10 अभ्यर्थियों ने की सौजन्य भेंट

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से विगत दिवस राजधानी रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग 2024 के टॉप 10 अभ्यर्थियों ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी चयनित अभ्यर्थियों और उनके परिजनों को सफलता के लिए शुभकामनाएं और बधाई दी। इस अवसर पर विधायक श्री ललित चंद्राकर और राजभाषा अधिकारी श्री छगन लाल नागवंशी भी उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों से उनकी तैयारी के अनुभव, परीक्षा के दौरान आने वाली चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच के कारण विद्यार्थियों ने यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग 2024 में प्रदेश के युवाओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन हम सबके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आपको हमेशा यह भी याद रखना होगा कि आगे आपकी भूमिका लोकसेवक की होगी। आपको अपने दायित्वों के निर्वहन में धैर्य, विनम्रता और लोक सेवक की सीमाओं का हमेशा ध्यान रखना होगा। आम जनमानस में प्रशासन का विश्वास कायम रखने की दिशा में आप सभी को संवेदनशीलता से प्रयास करना है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि  हमारी सरकार ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित परीक्षा को पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित करने का निर्णय लिया है और वह परीक्षा परिणामों में  साफ नजर आ रहा है। 

टॉपर विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए जिम्मेदारी का नया अध्याय है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ जनता की सेवा करेंगे और प्रदेश के विकास में योगदान देंगे।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग 2024 के टॉप 10 चयनित अभ्यर्थी श्री देवेश प्रसाद साहू, श्री स्वप्निल वर्मा, श्री यशवंत कुमार देवांगन, श्री पोलेश्वर साहू, श्री पारस शर्मा, सुश्री शताक्षी पाण्डेय, श्री अंकुश बैनर्जी, सुश्री सृष्टि गुप्ता, श्री प्रशांत वर्मा और श्री सागर वर्मा सपरिवार उपस्थित थे।
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नवाचार केवल प्रयोगशालाओं और कक्षाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, इसे समाज से जोड़ना होगा - श्री डेका

  नवाचार केवल प्रयोगशालाओं और कक्षाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, इसे समाज से जोड़ना होगा। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज संस्थान नवाचार परिषद (आईआईसी) के क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उक्त बातें कहीं। इनोवेशन सेल, ऑल इंडिया तकनीकी शिक्षा परिषद शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आज शंकराचार्य व्यावसायिक प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर में यह सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमंेे राज्यपाल श्री डेका मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। 


छोटा सा नवाचार मानव की बड़ी जरूरतों को पूरा करता है

          श्री डेका ने कहा कि यह सम्मेलन न केवल इस संस्थान के लिए बल्कि हमारे राज्य के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत की राष्ट्रीय नवाचार यात्रा में छत्तीसगढ़ की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प, कृषि, वनोपज और जनजातीय ज्ञान की भूमि है। सही रूप में किया गया नवाचार हमारी स्थानीय शक्तियों का मूल्य संवर्धन करके उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने योग्य और आर्थिक व तकनीकि रूप से उन्नत बनाता है, इसमें हमारे युवाओं की महती भूमिका है। एक छोटा सा नवाचार मानव की बड़ी जरूरतों को पूरा कर सकता है। 

अपने विचारों को वास्तविक समस्याओं का समाधान करने की दिशा में आगे बढ़ाएं

          श्री डेका ने कहा कि 21वीं सदी के विद्यार्थी सौभाग्यशाली हैं। इस सदी में इंटरनेट सबसे बड़ी खोज है। श्री डेका ने कहा कि सतत् विकास आज की सबसे बड़ी जरूरत है और यह विज्ञान से ही संभव है। उन्हांेने जलवायु परिवर्तन, माइक्रो प्लास्टिक और मधुमेह की बीमारी को वर्तमान की सबसे बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि युवा विद्यार्थी इस क्षेत्र में नवाचार कर इसका समाधान ढूंढ़ सकते हैं, जिसके लिए वे अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप भारत के भविष्य के पेशेवर और भविष्य निर्माता हैं। केवल लाभ पाने के लिए नहीं बल्कि उद्देश्य के लिए नवाचार करंे। अपने विचारों को वास्तविक समस्याओं का समाधान करने की दिशा में आगे बढ़ाएं। असफलता से न डरें क्योंकि हर असफलता आपको बेहतर प्राप्त करना सिखाती है। युवाओं का साहस, जिज्ञासा और प्रतिबद्धता वर्ष 2047 के भारत को परिभाषित करेगी और भारत 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करेगा। 

राज्यपाल ने संस्थान के तकनीकी विभाग के लैब का किया अवलोकन 

          कार्यक्रम में उपस्थित एआईसीटीई नई दिल्ली के उपनिदेशक डॉ. निखिल कांत ने सम्मेलन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। एसएसआईपीएमटी भिलाई के चेयरमैन श्री आई पी मिश्रा ने भी अपना संबोधन दिया। निदेशक श्री निशांत त्रिपाठी ने स्वागत भाषण और प्राचार्य श्री आलोक जैन ने आभार प्रदर्शन किया। राज्यपाल ने संस्थान के तकनीकी विभाग में संचालित आईडिया लैब का अवलोकन कर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर संस्थान के पदाधिकारी, फेकल्टी मेंबर, शिक्षक, विद्यार्थी उपस्थित थे।
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बच्चों के भविष्य को स्वर्णिम बनाने की महती जिम्मेदारी शिक्षा विभाग पर - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के तहत शिक्षा विभाग के लक्ष्यों की प्राप्ति को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने वर्ष 2030 तक के लघु अवधि, 2035 तक के मध्य अवधि तथा दीर्घकालीन लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा की और अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना तैयार कर त्वरित एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकसित भारत 2047 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, और इसी क्रम में ‘अंजोर विजन’ के माध्यम से विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति का सबसे सशक्त आधार शिक्षा है, क्योंकि दक्ष, कुशल और स्मार्ट बच्चे ही भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में शिक्षकों की संख्या राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। बैठक के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से समस्त जानकारी मुख्यमंत्री के साथ साझा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यदि एक शिक्षक अपनी जिम्मेदारी को दृढ़ता से निभा ले, तो बच्चों के भविष्य को स्वर्णिम बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने शिक्षकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, प्रतिभाशाली शिक्षकों को नेतृत्व के अवसर प्रदान करने और बेहतर अकादमिक माहौल विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने आंगनबाड़ी एवं बालवाड़ी के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। बैठक में अंजोर विजन 2047 के अंतर्गत 1000 मॉडल स्कूलों की स्थापना, स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्कूलों की शुरुआत, एआई-आधारित मूल्यांकन प्रणाली, डिजिटल ऐप के माध्यम से व्यक्तिगत पाठ योजनाएं, शिक्षक प्रशिक्षण के उन्नयन तथा STEM शिक्षा के विस्तार जैसे प्रमुख लक्ष्यों की समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने STEM शिक्षा को प्रोत्साहित करने हेतु साइंस सिटी की स्थापना, विज्ञान मेलों के आयोजन और एआई एवं रोबोटिक्स लैब प्रारंभ करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में वर्ष 2035 तक ड्रॉपआउट दर को शून्य करने, राज्य स्तरीय ECCE समिति के गठन, शिक्षकों की भर्ती, मूल्यांकन केंद्रों को सुदृढ़ करने और आगामी तीन वर्षों के लक्ष्यों को निर्धारित कर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने संबंधी विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कार्यप्रणाली — परीक्षार्थियों के डेटा संकलन, प्रश्नपत्र निर्माण, परीक्षा संचालन एवं मूल्यांकन — की समीक्षा की तथा हायर सेकेंडरी स्तर पर अतिरिक्त विषयों के विकल्प, प्रतियोगी परीक्षाओं पर आधारित प्रश्न बैंक, त्रुटिरहित मूल्यांकन व्यवस्था और गोपनीय प्रश्नपत्रों के परिवहन हेतु ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए।

बैठक में एनईपी 2020 के तहत नामांकन दर में हुई उल्लेखनीय वृद्धि, बालवाड़ी को स्कूली शिक्षा से जोड़ने, मातृभाषा-आधारित शिक्षण, ‘जादुई पिटारा’ एवं संवाद कार्यक्रम, इको क्लब की गतिविधियाँ, पीएम ई-विद्या के अंतर्गत डिजिटल प्रसारण तथा व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार जैसी उपलब्धियाँ भी प्रस्तुत की गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंजोर विजन 2047 के लक्ष्य छत्तीसगढ़ की आने वाली पीढ़ी को सशक्त, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, मुख्य सचिव श्री विकास शील, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष श्रीमती रेणु पिल्लै, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री रजत कुमार सहित स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ में सेमीकंडक्टर उद्योग की स्थापना से प्रदेश के विकास में जुड़ा नया आयाम

छत्तीसगढ़ में  सेमीकंडक्टर उद्योग की स्थापना से प्रदेश के विकास में नया आयाम जुड़ रहा है। छत्तीसगढ़ के युवा अब दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक में अपनी जगह बना रहे हैं। सेमीकंडक्टर क्रांति के साथ छत्तीसगढ़ देश के उच्च-प्रौद्योगिकी मानचित्र पर उभर रहा है। 


पॉलीमैटेक इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा राज्य में सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने का निर्णय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विज़न और केंद्र सरकार की अग्रणी तकनीकी नीतियों का परिणाम है। पॉलीमैटेक इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, जो भारत की पहली सेमीकंडक्टर चिप निर्माता कंपनी है, छत्तीसगढ़ में ₹1143 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक विनिर्माण इकाई स्थापित कर रही है। डेढ़ लाख वर्ग फीट क्षेत्र में बनने वाला यह प्लांट वर्ष 2030 तक 10 अरब चिप्स का उत्पादन करेगा, जो टेलीकॉम, 6G/7G, लैपटॉप, पावर-इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उभरती तकनीकों में उपयोग होंगे। इस प्लांट से छत्तीसगढ़ के अनेक युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। पॉलीमैटेक इलेक्ट्रॉनिक्स ने छत्तीसगढ़ के चयनित युवाओं की पहली सूची जारी की है, जिनमें अधिकांश छत्तीसगढ़ के इंजीनियरिंग और कॉमर्स ग्रेजुएट्स शामिल हैं। चयनित युवाओं में में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से कुल 12 युवा शामिल हैं। इनमें दुर्ग से आभार मेहूंकर (B.Tech–EEE), भिलाई से अभिषेक काशी (B.Tech–E&T), बालोद से नवीन कुमार देवांगन (B.Tech–ME), रायपुर से कुणाल यादव (BE–Mechanical), बस्तर से तुषार देवांगन (B.Tech–E&T), रायपुर से अपूर्व देवांगन (B.Tech–E&T), भिलाई की धारा सरपे (B.Tech–EEE), रायपुर के अरिन सोनी (B.Tech–E&T), रायगढ़ की तरू यादव (B.Tech–E&T), भिलाई के तुषार कुमार ठाकुर (BE–Mechanical), रायपुर के भूपेंद्र यादव (B.Com) तथा बालोद के अबिश सी. थॉमस (M.Com) को प्रशिक्षण एवं नियुक्ति के लिए चयनित किया गया है।

कंपनी के अधिकारियों  ने बताया है कि चयनित युवाओं को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण देने के लिए चेन्नई में ट्रेनिंग दी जाएगी। युवाओं के एयर ट्रैवल, आवास, भोजन सहित सभी खर्च कंपनी वहन करेगी। इसके बाद चयनित युवाओं को एस्टोनिया, सिंगापुर और फ्रांस स्थित पॉलीमैटेक के वैश्विक प्लांट्स में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सभी चयनित उम्मीदवार फ्रेश इंजीनियर्स हैं। मार्च 2026 तक चयनित युवाओं की संख्या बढ़कर 200 से 250 तक हो जाएगी। 

"सेमीकंडक्टर उद्योग की स्थापना से प्रदेश के विकास में एक नया तकनीकी अध्याय जुड़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विज़न के अनुरूप छत्तीसगढ़ अब उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तेज़ी से उभर रहा है। पॉलीमैटेक द्वारा राज्य के युवाओं को चयनित कर उन्हें चेन्नई सहित एस्टोनिया, सिंगापुर और फ्रांस के वैश्विक प्लांट्स में उच्चस्तरीय प्रशिक्षण प्रदान करना इस बात का प्रमाण है कि हमारे युवाओं की क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है। यह अवसर न केवल रोजगार का माध्यम बनेगा, बल्कि युवाओं को अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर तकनीक की गहन समझ देकर उन्हें भविष्य का तकनीकी नेतृत्व प्रदान करेगा। हमारी सरकार हर निवेशक को पूर्ण सहयोग और हर युवा को विश्वस्तरीय कौशल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।” - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
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पैरों से चित्र उकेरने वाली पूनम बिटिया के जीवन में मुख्यमंत्री ने भरी नई उम्मीद — अब विशेष विद्यालय में मिलेगा शिक्षण और छात्रवृत्ति

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज जनदर्शन में दूर-दूर से मुख्यमंत्री निवास पहुँच रहे लोगों से मुलाकात कर रहे हैं और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान भी कर रहे हैं। 


आज जनदर्शन की शुरुआत में ही मुख्यमंत्री ने रायपुर के तेलीबांधा की रहने वाली 11 वर्षीय बिटिया पूनम से भेंट की।बिटिया पूनम की माता ने मुख्यमंत्री श्री साय को बताया कि वह सेरेब्रल पाल्सी से जूझ रही है और बातचीत करने में भी असमर्थ है। उन्होंने बताया कि इस चुनौती के बावजूद पूनम अपने पैरों से बहुत सुंदर चित्र बनाती है। मुख्यमंत्री श्री साय ने अत्यंत आत्मीयता से बिटिया पूनम से बात की और उसे स्नेहपूर्वक दुलार किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने पूनम की माता को आश्वस्त करते हुए कहा कि “हम आपके साथ हैं, आपको बिटिया के लिए किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।”

मुख्यमंत्री ने पूनम बिटिया की पढ़ाई की उचित व्यवस्था के लिए उसे विशेष विद्यालय में भर्ती कराने और छात्रवृत्ति प्रदान करने के निर्देश दिए।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव की पहल पर जशपुर और बस्तर जिले में 4 नवीन महाविद्यालयों के लिए 132 पद स्वीकृत

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में प्रावधानित 4 नवीन शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन महाविद्यालयों की स्थापना फरसाबहार (जिला-जशपुर), करडेगा (जिला-जशपुर), नगरनार (जिला-बस्तर) तथा किलेपाल (जिला-बस्तर) में की जाएगी।


मुख्यमंत्री की इस पहल से जशपुर एवं बस्तर जैसे जनजाति बहुल एवं भौगोलिक रूप से दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अब उनके इलाके में ही उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। दूरस्थ अंचलों की बेटियों और बेटों को अब कॉलेज की पढ़ाई के लिए अब अपने घरों से दूर अन्यत्र नही जाना पड़ेगा। उच्च शिक्षा की पहुंच हर इलाके में हो, इसके लिए राज्य सरकार शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ बना रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि शिक्षा ही प्रदेश के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है और सरकार युवाओं को अवसर, संसाधन तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

गौरतलब है कि इन चारों महाविद्यालयों के लिए कुल 132 पदों (प्रति महाविद्यालय 33 पद) के सृजन की स्वीकृति के साथ ही कक्षाएं प्रारंभ करने की अनुमति भी राज्य शासन ने दे दी है। स्वीकृत पदों में प्राचार्य, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल, क्रीड़ाधिकारी, सहायक ग्रेड-1 एवं प्रयोगशाला कर्मी आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री साय की इस पहल से आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय युवाओं की शिक्षा, रोजगार एवं कौशल वृद्धि के अवसर बढ़ेंगे। प्रदेश में समान और संतुलित शैक्षणिक विकास को गति मिलेगी।
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मुख्यमंत्री श्री साय ने उच्च शिक्षा विभाग में प्रयोगशाला तकनीशियन के पद पर चयनित 233 अभ्यर्थियों को प्रदान किए नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के सभागार में उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत प्रयोगशाला तकनीशियन के पद पर चयनित 233 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पारदर्शी और विश्वसनीय भर्ती प्रक्रियाओं से प्रदेश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित हुआ है। उन्होंने बताया कि विगत 20 महीनों में विभिन्न विभागों में 10 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की जा चुकी हैं।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को पुलिस विभाग, विद्युत विभाग, सहकारिता विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, आदिम जाति विकास विभाग सहित कई अन्य विभागों में नियुक्तियाँ दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उच्च शिक्षा विभाग में 700 सहायक प्राध्यापकों और स्कूल शिक्षा विभाग में 5000 शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आज का यह अवसर ऐतिहासिक और अत्यंत हर्ष का विषय है — पहली बार इतनी बड़ी संख्या में नियुक्ति पत्र एक साथ प्रदान किए जा रहे हैं। यह निश्चित रूप से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने सभी नवनियुक्त प्रयोगशाला तकनीशियनों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए अपने कर्तव्यों का शत-प्रतिशत निष्ठा और ईमानदारी के साथ निर्वहन करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने नई औद्योगिक नीति को अपनाया है, जिसके माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस नई उद्योग नीति के तहत अब तक लगभग ₹7 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, और इनमें से कई प्रस्तावों के अंतर्गत औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का कार्य प्रारंभ भी हो गया है। इन उद्योगों से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से राज्य की जनता को व्यापक लाभ प्राप्त होगा।

उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पिछले 20 महीनों में छत्तीसगढ़ के प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं। पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ प्रत्येक विभाग की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण की जा रही है। उच्च शिक्षा मंत्री श्री वर्मा ने नवचयनित प्रयोगशाला तकनीशियनों को बधाई देते हुए कहा कि आप सभी निश्चित रूप से अपने महाविद्यालयों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में योगदान देंगे। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भी सराहना की और कहा कि मात्र तीन माह की अवधि में बिना किसी विवाद के तीन चरणों में संपूर्ण काउंसलिंग प्रक्रिया को पारदर्शी एवं निष्पक्ष रूप से पूर्ण करना अत्यंत सराहनीय उपलब्धि है।

इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री श्री खुशवंत साहेब, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ला, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित विभागीय अधिकारी एवं नवनियुक्त प्रयोगशाला तकनीशियन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने नवनिर्मित शासकीय शशिबाला अंग्रेजी-हिंदी उत्कृष्ट विद्यालय भवन का किया लोकार्पण

उपमुख्यमंत्री एवं लोकनिर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने आज राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी स्थित दानवीर भामाशाह वार्ड में 337.01 लाख रुपए की लागत से नवनिर्मित शासकीय शशिबाला अंग्रेजी-हिंदी माध्यम उच्चतर माध्यमिक उत्कृष्ट विद्यालय का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने छात्र-छात्राओं से आत्मीय संवाद कर उन्हें शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। उपमुख्यमंत्री श्री साव ने बताया कि छात्राओं को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य की विष्णु देव सरकार अब सरकारी स्कूलों से 10वीं-12वीं पास करने वाली छात्राओं को आगे महाविद्यालयीन पढ़ाई करने के लिए 30 हजार रूपए की सहायता देगी। उन्होंने बताया कि सरकार के इस फैसले से प्रदेश में छात्राओं को अब आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई बीच में नही छोड़नी पड़ेगी। छात्राएं अपनी पढ़ाई पूरी कर अपने सपने साकार कर सकेगीं।


उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने लोकापर्ण समारोह को संबोधित करते हुए नवीन विद्यालय के लिए छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों को बधाई दी। छात्र-छात्राओं से आत्मीय संवाद के दौरान छात्रा अनुष्का शर्मा ने उपमुख्यमंत्री से पूछा आप बचपन में कैसे स्कूल में पढ़े ? जिस पर श्री साव ने बताया कि कक्षा तीसरी तक मैंने अपने गांव में पढ़ाई की। वह शासकीय भवन नहीं था, हमारे ही परिवार का एक कच्चा मकान था। हम अपने घर से चटाई ले जाते और बैठा करते। हर शनिवार को गोबर की पोताई भी हम करते थे। जबकि आज देखिए आपके लिए सरकार कितने भव्य और बड़े विद्यालय बना रही है। मेरा आप सभी से आग्रह है कि सरकार आपको आधुनिक सुविधायुक्त विद्यालय बनाकर दे रही है ताकि आप अपना पूरा ध्यान लगाकर खूब पढ़े और आगे बढ़े। इसलिए आपकी भी यह जिम्मेदारी है कि आप पूरा मन लगाकर अच्छी तरह पढ़ें और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करें।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा के बेहतरी के लिए लगातार कार्य कर रही है। अच्छे स्कूल बन रहे हैं, पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल मिल रहा है, छात्र-छात्राओं की जरूरतों का ध्यान रखकर विद्यालय का विकास किया जा रहा है।  श्री साव ने बताया कि रायपुर शहर राजधानी के अनुरूप अवरुद्ध विकास को हमने तेज गति से विकास की दिशा में आगे ले जा रहे हैं। रायपुर गारब्रेज फ्री सिटी में देश में चौथे नम्बर पर आया है, यह आप सभी के योगदान से सम्भव हुआ है। 

सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि रायपुर हाइटेक शहर बन रहा है। यहां बाईपास, अच्छी और चौड़ी सड़कें हैं। उन्होंने आगे कहा कि नवनिर्मित यह स्कूल बड़ा ही भव्य और सुंदर बना है। सभी छात्र-छात्राओं के लिए हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं।  अब आप सभी छात्र-छात्राओं को अपना पूरा ध्यान पढ़ाई में लगाना है। विधायक श्री राजेश मूणत ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय गरीब परिवारों की चिंता करने वाली सरकार है। 

आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं से युक्त नवनिर्मित विद्यालय

नवनिर्मित विद्यालय भवन में भूतल पर पाँच कक्षाओं के साथ दो स्टोर रूम, बालक एवं बालिका के लिए पृथक बाथरूम तथा पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्रथम तल पर नौ कक्षाओं के साथ प्राचार्य कक्ष, स्टॉफ रूम, दो स्टोर रूम और पृथक बाथरूम का निर्माण किया गया है। इसी प्रकार द्वितीय तल पर भी नौ कक्षाएँ, प्राचार्य कक्ष, स्टॉफ रूम, दो स्टोर रूम और पृथक बाथरूम बनाए गए हैं। साथ ही विद्यालय परिसर में 165 आर.एम.टी. शेड के साथ मुख्यद्वार, गार्डरूम, बाउंड्रीवाल, स्टेज, पेवर कार्य, पार्किंग टाइल्स, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, सम्पवेल निर्माण, सेप्टिक टैंक, ब्लैकबोर्ड, स्मार्ट क्लास तथा सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की गई है। 

इस मौके पर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, नगर निगम सभापति श्री सूर्यकांत राठौर वार्ड पार्षद श्रीमती रामहिन कुर्रे एवं श्री रमेश सिंह ठाकुर, नगर निगम आयुक्त  सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि गण उपस्थित थे।
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युक्ति युक्तकरण से स्कूल में आए टीचर, अब अंग्रेजी से नहीं लगेगा डर

कोरबा जिले के वनांचल ग्राम कोरकोमा के मिडिल स्कूल में आसपास के अनेक गांव के विद्यार्थी इसी उम्मीद से पढ़ाई करने स्कूल आते हैं कि स्कूल में पढ़ लिखकर वे भी हिन्दी सीखेंगे, अंगेजी सीखेंगे, गणित का सवाल हल करना जानेंगे और यहां से आगे पढ़कर हाई स्कूल, हायर सकेण्डरी फिर कॉलेज की पढ़ाई करेंगे। बच्चों के साथ ही उनके माता-पिता की उम्मीदों से जुड़े इस स्कूल में  आने वाले विद्यार्थियों को किताबें, भोजन तो मुफ्त में मिल जाती है, लेकिन पिछले कई साल से वे भी महसूस करते थे कि उनके स्कूल में अंग्रेजी विषय का शिक्षक नहीं है। दर्ज विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर पर्याप्त शिक्षक नहीं होने का खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ता था। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दिशा निर्देशन में युक्ति युक्तकरण से अतिशेष शिक्षको की पदस्थापना की गई तो मिडिल स्कूल कोरकोमा में पढ़ाई करने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों को भी अपना आगे का भविष्य सुनहरा लगने लगा।  

कोरबा विकासखंड अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कोरकोमा में युक्ति युक्तकरण से विद्यालय में शिक्षिका श्रीमती रामेश्वरी रत्नाकर पदस्थ हुई है। विद्यालय में कुल 319 विद्यार्थी अध्ययनरत है। शिक्षिका श्रीमती रामेश्वरी रत्नाकर ने बताया कि अन्य विद्यालय से आने के बाद वह यहां के विद्यार्थियों के साथ पूरी तरह से घुल मिल गई है। उन्होंने बताया कि वह विद्यालय में अंग्रेजी पढ़ाती है। स्कूल में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों में भी खुशी है कि उनके स्कूल में मैडम आ गई है और अंग्रेजी जैसी कठिन लगने वाली विषय को पढ़ा रही है। इस विद्यालय में पढ़ने वाले आने वाली कक्षा आठवीं की स्नेहा, राकेश, साहिल  कक्षा छठवीं के विद्यार्थीं समीर, सुनील, गुँजन ने बताया कि अंग्रेजी पढ़ाने वाली मैडम स्कूल में आ गई है, वह हमें अच्छे से पढ़ाती है और हमें जो समझ नहीं आता उसे भी ठीक से बताती है। अब हम लोग का कोई भी कालखंड खाली नहीं जाता। विद्यालय में पढ़ाई लगातार चलती रहती है। प्रधानपाठक श्री गोपाल प्रसाद साव ने बताया कि दर्ज संख्या के अनुसार यहाँ दो शिक्षको की कमी थी। शासन के युक्ति युक्तकरण की प्रक्रिया के उपरांत दो शिक्षकों की पदस्थापना विद्यालय में हुई है।

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हिन्दी पत्रकारिता की द्विशती पर आयोजित संगोष्ठी में शामिल हुए स्कूल शिक्षा मंत्री श्री यादव

हिन्दी पत्रकारिता की 200 वर्ष पूरे होने पर आज महात्मा गांधी कला मंदिर सिविक सेंटर भिलाई में ’’भारत बोध, भारतीयता और हिन्दी पत्रकारिता’’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। प्रदेश के स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी मंत्री श्री गजेन्द्र यादव के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस संगोष्ठी में प्रतिष्ठित पत्रकार, लेखक एवं स्तंभकार नई बिन्दी श्री अनंत विजय और आचार्य एवं अध्यक्ष माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल डॉ. संजय द्विवेदी, मुख्य वक्ता तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकॉदमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा, अतिथि वक्ता के रूप में संगोष्ठी में शिरकत किये।

संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए मुख्य अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि आधुनिक पत्रकारिता में विश्वनीयता पर जोर देने की आवश्यकता है। उन्होंने झीरम घाटी की घटना तथा डीमरापाल (जगदलपुर) में आयोजित स्काउट्स एवं गाईड जम्बुरी का जिक्र करते हुए कहा कि पत्रकारिता में नेगेटिव खबर का स्थान कम होना चाहिए। पॉजीटिव खबर पर विशेष फोकस होना चाहिए। उन्होंने रायपुर-दुर्ग फोरलेन सड़क निर्माण व तत्कालीन कलेक्टर द्वारा मीडिया से की गई अपील का जिक्र करते हुए कहा कि एक नेगेटिव समाचार समाज को विचलित करती है। वहीं पॉजीटिव समाचार से समाज प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथे स्तंभ होने के नाते समाज को दिशा देने अनुकूलता का समावेश करें। मंत्री श्री यादव ने कहा कि देश में अमृतकाल चल रहा है, वह सही मायने में भारत, भारतीय और हिन्दु संस्कृति का अमृतकाल है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री श्री यादव और अन्य अतिथियों ने हिन्दी पत्रकारिता पर केन्द्रित बहुमत के 148वें विशेष अंक तथा छत्तीसगढ़ की हिन्दी पत्रकारिता नींव के पत्थर विषय पर आधारित वसुन्धरा के 123वें अंक का लोकार्पण किये। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता श्री अनंत विजय और डॉ. संजय द्विवेदी तथा अतिथि वक्ता श्री शशांक शर्मा ने भारत बोध, भारतीयता और हिन्दी पत्रकारिता पर विस्तारपूर्वक अपने-अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम के संयोजक श्री विनोद मिश्र ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार डॉ. विश्वेश ठाकरे और लेखिका श्वेता उपाध्याय ने की। इस अवसर पर हेमचंद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजय तिवारी, विधायक दुर्ग ग्रामीण श्री ललित चन्द्राकर, पूर्व मंत्री श्रीमती रमशीला साहू एवं अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में जशपुर जिला प्रशासन एवं विज्ञान भारती के मध्य समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में आज जशपुर जिला प्रशासन एवं विज्ञान भारती के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य जिले के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना तथा उन्हें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जोड़ना है।


इस पहल के अंतर्गत विद्यालयों में विज्ञान शिक्षा को प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न अभिनव कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसके माध्यम से बच्चों में विज्ञान के प्रति उत्सुकता और जिज्ञासा को नए आयाम मिलेंगे तथा शिक्षा का स्वरूप अधिक व्यावहारिक और प्रयोगशील बनेगा।

उल्लेखनीय है कि विज्ञान भारती पूर्व से ही जिले में कई गतिविधियों में सहयोग कर रही है। इनमें “स्पेस ऑन व्हील” कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान का अनुभव कराना, विज्ञान क्लबों की स्थापना द्वारा विद्यार्थियों की जिज्ञासा और नवाचार को बढ़ावा देना तथा विद्यार्थी विज्ञान मंथन जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को विज्ञान, गणित और प्रौद्योगिकी की ओर प्रेरित करना शामिल है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह समझौता जिले के विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खोलेगा। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लैस नई पीढ़ी ही आत्मनिर्भर भारत और विज्ञाननिष्ठ समाज की नींव रखेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा और विज्ञान को समाज में परिवर्तन का सबसे बड़ा साधन मानती है और इस दिशा में सभी प्रयासों को प्रोत्साहन देती रहेगी। जशपुर जिला प्रशासन एवं विज्ञान भारती का यह संयुक्त प्रयास न केवल विद्यालयीन शिक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि विद्यार्थियों को विज्ञान एवं नवाचार की दुनिया में नई उड़ान भी देगा। इस साझेदारी से जशपुर जिले में शिक्षा का स्तर और ऊँचा होगा तथा आने वाली पीढ़ी विज्ञान और प्रौद्योगिकी की रोशनी से अपने भविष्य को और अधिक सशक्त बना सकेगी।
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अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए खुला बेहतर शिक्षा का रास्ता – मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में श्रम विभाग द्वारा श्रमिक बच्चों के लिए संचालित "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" का शुभारंभ किया। उन्होंने चयनित बच्चों का सम्मान करते हुए उन्हें शुभकामनाएँ दीं।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा का मार्ग प्रशस्त हुआ है। श्री साय ने घोषणा की कि अगले शैक्षणिक सत्र से इस योजना का लाभ 200 बच्चों को मिलेगा। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रमिक अनेक समाज के हित के लिए कार्य करता है, परंतु अपने परिवार के लिए बहुत कम समय, संसाधन, ऊर्जा और ध्यान दे पाता है। उनके भी सपने होते हैं कि उनके घर के बच्चे पढ़-लिखकर बेहतर जीवन जिएँ, ताकि भविष्य में मजदूर का बेटा-बेटी केवल मजदूरी न करे, बल्कि समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकील और राजनेता बने।इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी के अंतर्गत श्रमिक बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हमारी सरकार ने छत्तीसगढ़ में "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" प्रारंभ की है। इसके तहत प्रदेश के श्रमिकों के बच्चों को कक्षा छठवीं से बारहवीं तक श्रेष्ठ आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्राप्त होगी। इनका पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से कार्यक्रम के दौरान निर्माण श्रमिकों एवं उनके बच्चों ने मिलकर योजना का शुभारंभ पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना से अब हम अपने बच्चों के भविष्य को लेकर निश्चिंत हो गए हैं। इस योजना के माध्यम से बच्चों को अच्छी शिक्षा और भविष्य सँवारने का सुनहरा अवसर मिल गया है। हमारे लिए यह एक सपना था, जो अब पूरा हो गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रमिकों से चर्चा करते हुए कहा कि निर्माण श्रमिकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना लागू की गई है। योजना के तहत चालू वर्ष में 100 निर्माण श्रमिकों के बच्चों को 14 निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इन विद्यालयों में सीबीएसई और आईसीएसई पाठ्यक्रम के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई कराई जाएगी।

श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज श्रम विभाग के सहयोग से श्रमिक परिवारों के 100 बच्चों का दाखिला प्रदेश के 14 निजी आवासीय विद्यालयों में कराया गया है। सरकार की सोच है कि श्रमिक का बच्चा केवल श्रमिक न रहकर अधिकारी बने और देश की सेवा करे। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग योजना भी संचालित की जा रही है, जिसके निश्चित ही दूरगामी परिणाम सामने आएँगे।

श्रम मंत्री श्री देवांगन ने आगे कहा कि श्रम विभाग के अंतर्गत तीन मंडल संचालित हैं, जिनमें लगभग 70 से अधिक योजनाएँ चलाई जा रही हैं। राज्य सरकार द्वारा पिछले 20 माह में लगभग 600 करोड़ रुपये का लाभ श्रमिकों को डीबीटी के माध्यम से पहुँचाया गया है। उन्होंने योजना के तहत चयनित बच्चों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि श्रद्धेय अटल जी के संकल्पों को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सुशासन की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य में लगभग 30 लाख से अधिक पंजीकृत श्रमिक हैं, जिनके बच्चे अच्छे विद्यालयों में नहीं पढ़ पाते थे। उनके लिए "अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना" किसी वरदान से कम नहीं है। इस योजना से श्रमिकों के बच्चों को बेहतर विद्यालयों में पढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने चयनित बच्चों एवं अभिभावकों को शुभकामनाएँ दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस मौके पर श्रम विभाग के सचिव श्री हिम शिखर गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर संयुक्त सचिव श्रीमती फरिहा आलम, श्रम कल्याण मंडल के सचिव श्री गिरीश रामटेके सहित बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।
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रायपुर एनआईटी-एफआईई को राष्ट्रीय इन्क्यूबेटर पुरस्कार

 एनआईटी रायपुर फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (एफआईई) को चौथे भारत उद्यमिता शिखर सम्मेलन में राष्ट्रीय इन्क्यूबेटर पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह आयोजन 13 सितंबर को नई दिल्ली के संसद मार्ग स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में होगा। भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एनआईटी रायपुर-एफआईई के उत्कृष्ट योगदान के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। संस्था को यह सम्मान राज्य में 35 से आधिक नये स्आर्टअप्स को मार्गदर्शन और उन्हें उत्कृष्ट तकनीकी सहयोग के लिए मिलेगा। भारत उद्यमिता शिखर सम्मेलन का आयोजन भारतीय उद्यमी संघ (ईएआई) और एंटरप्राइजिंग जोन-ईजेड द्वारा किया जा रहा है, जो भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेशन केंद्र है।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में लगातार स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिल रहा है। यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ में तेजी से बदल रहे औद्योगिक वातावरण को प्रोत्साहित करेगा। एनआईटी रायपुर फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय इन्क्यूबेटर पुरस्कार मिलना छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। स्टार्टअप्स के पोषण और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एनआईटी रायपुर-एफआईई की टेक्नोलॉजी आधारित गतिविधियां हमारे राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगी, और छत्तीसगढ़ को नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करेंगी। मुख्यमंत्री ने पूरी टीम को बधाई देते देते हुए उम्मीद जताई कि यह संस्था युवाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने और तकनीकी प्रगति को आगे बढ़ाने में निरंतर सफलता हासिल करेगी।

एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव ने कहा कि राष्ट्रीय इन्क्यूबेटर पुरस्कार नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने में संस्था की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि एफआईई लगातार एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने में जुटा है, जो तकनीकी स्टार्टअप्स को सहयोग देकर उन्हें सफल उद्यमों में बदलता है। यह उपलब्धि उन्हें नई पीढ़ी के उद्यमियों को और मजबूती देने की प्रेरणा देती है।

गौरतलब है कि एनआईटी रायपुर-एफआईई एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में मार्च 2021 में स्थापित हुआ। जो एनआईटी रायपुर का प्रौद्योगिकी व्यापार इन्क्यूबेटर है और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की राष्ट्रीय नवाचार विकास और दोहन पहल (निधि) योजना के तहत कार्य करता है। संस्था ने अब तक छत्तीसगढ़ में 35 से अधिक स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया है। इनमें से कुछ स्टार्टअप्स गवर्नेंस और मेडिकल उपकरण निर्माण के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। जबकि कुछ एनालिटिक्स, डीप-टेक, क्लीन टेक और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) समेत अलग-अलग क्षेत्र से जुड़े हैं।

एनआईटी रायपुर एफआईई का संचालन निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव और कैरियर डेवलपमेंट सेंटर प्रमुख डॉ. समीर बाजपेयी के नेतृत्व में हो रहा है। परिचालन टीम में डॉ. अनुज कुमार शुक्ला (फैकल्टी प्रभारी), श्री पवन कटारिया (अधिकारी प्रभारी) और सीईओ श्रीमती मेधा सिंह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। एफआईई ने तकनीकी स्टार्टअप्स को व्यापक सहयोग देकर खुद को देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित किया है। जिनमें स्टार्टअप शुरू करना, कंपनी बनाना, तकनीकी मार्गदर्शन समेत स्टार्टअप्स से जुड़े सभी तरह के समर्थन शामिल हैं। छत्तीसगढ़ का कोई भी युवा यदि अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहता है तो वह इसके लिए एनआईटी रायपुर एफआईई से संपर्क कर सकता है।
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शिक्षा में मेंटरशिप सामाजिक न्याय और समान अवसर का मजबूत आधार: वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी

नीति आयोग ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में Fostering Mentorship in Education: A Pathway to Equity विषय पर राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की भावना को मूर्त रूप देते हुए शिक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी बनाने में मेंटरशिप की भूमिका पर गहन विचार-विमर्श कर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क बनाना है। विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और हितधारकों ने शिक्षा में समानता लाने, ड्रॉपआउट दर घटाने और युवाओं को अवसरों से जोड़ने के लिए अपने अनुभव साझा किए। 


मेंटॉरशिप युवाओं को सशक्त करने की कुंजी है”: श्री ओ. पी. चौधरी
विशेष अतिथि के रूप में वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि शिक्षा में समानता और सशक्तिकरण की दिशा में मेंटरशिप की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और कौशल विकास पर केंद्रित है। यह साझा राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने का अवसर है, जो विकसित भारत के सपने को साकार करने में मदद करेगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनसांख्यिकीय ताकत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश की औसत आयु 28 वर्ष है, जबकि छत्तीसगढ़ की औसत आयु मात्र 24 वर्ष है। यह हमारी सबसे बड़ी शक्ति है, हमें युवाओं को अर्थव्यवस्था से जोड़ना होगा, ताकि वे विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान दे सकें।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने अपने जीवन अनुभव साझा करते हुए  कहा कि मैंने गांव के सरकारी स्कूल में 10वीं और 12वीं तक पढ़ाई की, जहां बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं। 17 वर्षों की औपचारिक शिक्षा के बाद भी अनेक युवाओं को यह स्पष्ट नहीं होता कि जीवन में आगे क्या करना है। कैरियर गाइडेंस और मेंटरशिप इस कमी को दूर कर सकती है। उन्होंने स्थानीय भाषा और संस्कृति आधारित शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्र के बच्चों के जीवन का जुड़ाव जंगलों और झरनों से है। उन्हें इसी के अनुरूप अक्षर ज्ञान देना चाहिए। एनईपी 2020 का स्थानीय बोलियों पर फोकस सही दिशा है।

वित्त मंत्री ने सरकारी स्कूलों की चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि समुदाय की भागीदारी घट रही है, हमें नवोदय विद्यालय जैसे मॉडल अपनाने होंगे। नीति आयोग को देशभर की इनोवेटिव प्रैक्टिस को साझा प्लेटफॉर्म पर लाना चाहिए, ताकि शिक्षा में समानता सुनिश्चित की जा सके।

हर बच्चे को मेंटरशिप मिलना उसका अधिकार है: डॉ. वी. के. पॉल
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल ने कहा कि शिक्षा मानव पूंजी निर्माण का आधार है और हर बच्चे को समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर ड्रॉपआउट दरों को साझा करते हुए बताया कि  प्राथमिक स्कूलों में 93 प्रतिशत नामांकन है, लेकिन अपर प्राइमरी में तीन प्रतिशत बच्चे छूट जाते हैं। सेकेंडरी स्तर पर केवल 56 प्रतिशत और 12वीं कक्षा तक मात्र 23 प्रतिशत छात्र ही पहुंचते हैं। 2019 से 2023 तक केंद्रीय विश्वविद्यालयों से 15,000 ओबीसी, एससी, एसटी छात्रों ने पढ़ाई छोड़ी, जबकि आईआईटी और आईआईएम से 4,000 से अधिक छात्र बाहर हुए। यह व्यक्तिगत ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय क्षति भी है। 
डॉ. पॉल ने कहा कि मेंटरशिप से छात्रों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और जीवन कौशल मिलते हैं। हमें शिक्षकों का माइंडसेट बदलना होगा, छात्रों को सशक्त बनाना होगा और तकनीक के माध्यम से सीधी पहुँच सुनिश्चित करनी होगी। विषाक्त वातावरण और नशे जैसी समस्याएं ड्रॉपआउट को बढ़ाती हैं। हर बच्चे को ज्ञान और आत्मविश्वास से लैस होकर चुनौतियों का सामना करने का अवसर मिलना चाहिए, यह उसका मानवाधिकार है। उन्होंने कहा कि हमारा देश मानव-केंद्रित दर्शन से समृद्ध है। हमें ऐसा सिस्टम बनाना होगा, जिसमें हर बच्चे को मेंटरशिप मिले, हमें एनईपी 2020 यही रास्ता दिखाती है। 

कार्यशाला में योजना विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, नीति आयोग के संयुक्त सचिव श्री के. एस. रेजिमोन, नीति आयोग के फेलो डॉ. आई. वी. सुब्बा राव, आईएएस (सेवानिवृत्त), राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा तथा नीति आयोग के उप सचिव श्री अरविंद कुमार, सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और टी.आर.के.सी. के बीच हुआ एमओयू

छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में निवास करने वाली जनजातियों पर विशेष शोध और अनुसंधान की राह खुल गई है। राज्य की जनजातियों की गौरवशाली परंपरा, उनकी संस्कृति और उनके आर्थिक-समाजिक ताने-बाने को लेकर अब विद्यार्थी उच्च स्तरीय शोध कर पाएंगे। राज्य के गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और ट्रायबल रिसर्च एण्ड नॉलेज सेंटर नई दिल्ली के बीच इसके लिए महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है। टीआरकेसी विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय जनजातियों के बारे में शोध कार्याें के लिए महत्वपूर्ण संस्था है। विश्वविद्यालय के ओर से इस एमओयू पर कुलसचिव प्रो. अभय एस रणदिवे और टीआरकेसी की ओर से छतीसगढ़ प्रभारी श्री राजीव शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के तहत् संस्था द्वारा अगले तीन वर्षों तक छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों पर शोध कार्य किए जाएंगे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कूलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. नीलांबरी दवे, वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय युवा कार्यप्रमुख श्री वैभव सुरंगे सहित अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे।


एमओयू के बारे में टीआरकेसी के राज्य प्रभारी श्री राजीव शर्मा ने बताया कि टीआरकेसी देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जनजातीय विषयों पर शोध कार्यों को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण संस्था है। गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातीयों पर रिसर्च तेज होगी। उन्होंने बताया कि राज्य की पुरातन और गौरवशाली जनजातीय के कई अनछुए पहलुओं और उनकी सभ्यता और संस्कृति के बारे में इन शोधों से आम नागरिकों को भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। इन शोध कार्यों से सरगुजा और बस्तर के क्षेत्रों की विभिन्न जनजातियों के आदिकालीन सामाजिक संगठन, उनके अर्थशास्त्र, सुशासन, ग्रामीण उद्यमिता, सतत् विकास और नवाचार के बारे में भी लोगों को जानकारियां मिलेंगी। श्री शर्मा ने बताया कि इससे खुद जनजातीय युवा अपने गौरवशाली अतीत और उसकी व्यवस्थाओं के बारे में जान पाएंगे। 

विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने बताया कि संपादित एमओयू के बाद जनजातीयों पर संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू होंगी। क्षेत्राधारित केस स्टडी और युवाओं, प्रशासकों, जनजातीय हितधारकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, नेतृत्व विकास कार्यशालाएं और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी आयोजित होंगे। युवाओं के लिए सामाजिक प्रभाव आधारित र्स्टाटअप और नवाचारों पर मार्गदर्शन तथा परामर्श सत्र रखे जाएंगे। विशेषज्ञों और प्राघ्यापकों की भागीदारी से जनजातीय वर्ग में जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। जनजातीय पर आधारित संगोष्ठीयों, व्याख्यानों, सम्मेलनों, गोलमेज चर्चाओं तथा सार्वजनिक संवादों का भी आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि रिसर्च वर्क से मिले परिणामों को पुस्तकालयों, अनुसंधान प्रकाशनों तथा डेटाबेस के द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राज्य के जनजातीय समुदाय के बारे में अधिक से अधिक जानकारी लोगों तक पहुंच सकेगी। स्वयं जनजातीय समुदायों को भी अपने गौरवशाली अतीत के बारे में पता चलेगा और भविष्य में यह रिसर्च वर्क जनजातीयों के विषयों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने का जरिया बनेंगे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शिक्षा विभाग की पारदर्शी पहल: पदोन्नत प्राचार्यों की ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रारम्भ

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन की सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आज से राजधानी रायपुर स्थित शासकीय शिक्षा महाविद्यालय परिसर, शंकर नगर में पदोन्नत प्राचार्यों के लिए ऑनलाइन ओपन काउंसिलिंग की शुरुआत हो गई है। इस प्रक्रिया में कुल 845 नव पदोन्नत प्राचार्य शामिल होंगे।


संचालक लोक शिक्षण श्री ऋतुराज रघुवंशी और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति और मार्गदर्शन में काउंसिलिंग 20 अगस्त से 23 अगस्त 2025 तक प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से आयोजित होगी। प्रत्येक दिन दो पालियों में क्रमशः 150-150 प्राचार्यों को शामिल किया जाएगा। पदोन्नति आदेश एवं रिक्त पदों की सूची पूर्व में ही स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर जारी कर दी गई है, जिससे चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं सुगम हो।

सरकार द्वारा तय नियमावली एवं वरिष्ठता के आधार पर प्राथमिकता निर्धारित की जाएगी। दिव्यांग अभ्यर्थियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, इसके बाद महिला और फिर पुरुष अभ्यर्थियों को वरिष्ठता क्रम से संस्था चयन का अवसर मिलेगा। एक वर्ष से कम अवधि में सेवानिवृत्त होने वाले प्राचार्यों को भी प्राथमिकता प्रदान की जाएगी।

काउंसिलिंग हेतु वेटिंग हॉल और काउंसिलिंग कक्ष निर्धारित कर दिए गए हैं, जहाँ केवल अभ्यर्थियों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। सभी पदोन्नत प्राचार्यों को अपने सेवा प्रमाण पत्र और मान्य फोटोयुक्त पहचान पत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने होंगे।

काउंसिलिंग में अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों को अंतिम दिन 23 अगस्त को अवसर दिया जाएगा। काउंसिलिंग पूर्ण होने के पश्चात् शासन द्वारा पदस्थापना आदेश जारी किए जाएंगे तथा सभी को आदेश प्राप्ति के 7 दिवस के भीतर पदग्रहण करना अनिवार्य होगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सुशासन की सरकार ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और सरलता लाने का संकल्प लिया है। इस पहल से अब प्राचार्यों की पदस्थापना की प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और सुविधाजनक हो गई है। पहले से ही रिक्त पदों का स्थान सार्वजनिक कर दिया गया है, जिससे सभी को अपने अधिकार और विकल्प स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो सके।
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