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बदरीनाथ हाईवे पर गिरा मलबा, बाल-बाल बचे यात्री...

बदरीनाथ हाईवे गौचर तलधारी के पास पहाड़ी से मलबा आने से बंद हो गया है। सुबह पहाड़ी से भारी मलबा और बोल्डर हाईवे पर गिरे। इस दौरान वहां से गुजरने वाले लोग बाल-बाल बचे। कर्णप्रयाग नेनीसैंण मोटर मार्ग आईटीआई से लगभग 500 मीटर आगे पहाड़ी से चट्टान टूटी।

सड़क बन्द होने से कपीरीपट्टी के लोगों को डिम्मर सिमली होते हुए कर्णप्रयाग पहुंचना पड़ेगा। उत्तराखंड में भारी बारिश का सिलसिला आज भी जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से देहरादून समेत नौ जिलों के लिए भारी से भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। जबकि, अन्य जिलों में भी भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी
मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार देहरादून समेत उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल, चम्पावत और ऊधमसिंह नगर जिले में भारी से भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में बहुत भारी से भारी बारिश होने की संभावना है। इनके अलावा अन्य जिलों में भी तेज दौर की बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

लोगों को हिदायत देते हुए मौसम वैज्ञानिकों ने कहा है कि इन स्थानों पर भारी से भारी बारिश होने की वजह से जलभराव, भूस्खलन होने के साथ नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। ऐसे में दिन के साथ रात के समय भी अधिक सतर्क रहें और नदी-नालों के आसपास जाने से परहेज करें। इसके अलावा आवश्यक न हो तो पर्वतीय इलाकों में यात्रा करने से बचें।

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तेंदूपत्ता संग्राहकों के सम्मान में ‘चरण पादुका योजना’ का पुनः शुभारंभ – मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज दुर्ग जिले के जामगांव में महिला तेंदूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुका पहनाकर ‘चरण पादुका योजना’ का पुनः शुभारंभ किया गया। प्रदेश के 12 लाख 40 हजार से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहकों को अब यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की एक और गारंटी का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा। 

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी सरकार वनवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहक भाइयों-बहनों के जीवन स्तर को सशक्त और सुरक्षित बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। चरण पादुका योजना उन परिश्रमी हाथों के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है, जो कठिन परिस्थितियों में वनोपज संग्रहण का कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों का राज्य की अर्थव्यवस्था, वनोपज आधारित रोजगार और स्थानीय समृद्धि में अमूल्य योगदान है। उनकी मेहनत से ही छत्तीसगढ़ की वनोपज परंपरा जीवंत बनी हुई है और लाखों परिवारों को आजीविका का सहारा मिलता है। ‘चरण पादुका योजना’ हमारे संकल्प पत्र "मोदी की गारंटी" का महत्वपूर्ण वादा था, जिसे हमारी सरकार ने पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरा किया है। यह योजना केवल चरण पादुका वितरण भर नहीं, बल्कि तेंदूपत्ता संग्राहकों के श्रम और स्वाभिमान का सम्मान है। 

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि इस योजना के माध्यम से हम तेंदूपत्ता संग्राहकों के उस परिश्रम को नमन कर रहे हैं, जो जंगलों की पगडंडियों से होकर प्रदेश की समृद्धि तक पहुँचता है। सरकार उनके हर सुख-दुख में सहभागी है और उनके जीवन में गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है।
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मुख्यमंत्री साय ने नवनिर्मित आधुनिक आयुर्वेदिक प्रसंस्करण इकाई और केन्द्रीय भंडार गृह परिसर का किया लोकार्पण

 मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज दुर्ग जिले के पाटन विधानसभा के अंतर्गत ग्राम जामगांव (एम) में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित द्वारा निर्मित आधुनिक आयुर्वेदिक औषधि प्रसंस्करण इकाई एवं केन्द्रीय भंडार गृह परिसर तथा स्प्रेयर बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अंतर्गत निर्मित हर्बल एक्सट्रेक्शन इकाई का लोकार्पण किया।

 मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को हमारी सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरा कर रही है। हमारी सरकार डेढ़ वर्षों से लगातार विकास की दिशा में अग्रसर है। तीन करोड़ जनता से किए गए वचनों को हम प्राथमिकता से पूरा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि  तीन नई हर्बल इकाइयों से लगभग दो हजार लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत भू-भाग वन क्षेत्र से आच्छादित है, जो हमारे लिए सौभाग्य का विषय है। आयुर्वेदिक औषधियों की कच्ची सामग्रियां जंगलों से एकत्र कर संयंत्रों तक पहुंचाई जाएंगी, जिससे वनवासियों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि यह प्रसंस्करण इकाई मध्य भारत की सबसे बड़ी इकाई है और आयुर्वेदिक औषधि निर्माण के क्षेत्र में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेदिक केंद्र के रूप में स्थापित होगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए सरकार ने संग्रहण दर 4,500 रुपए से बढ़ाकर 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा कर दी है, जिससे लगभग 13 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही पूर्ववर्ती सरकार में बंद की गई ‘चरण पादुका योजना’ को पुनः प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत आज पांच हितग्राही महिलाओं को चरण पादुका वितरित की गईं।

मुख्यमंत्री ने लोगों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी माँ के नाम पर कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए और उसका संरक्षण करना चाहिए। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ही माँ के प्रति सम्मान भाव भी बना रहेगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 44.10 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र है, जिससे वनोपज की बहुलता है। यह प्रसंस्करण इकाई मध्य भारत की सबसे बड़ी इकाई है। इसके प्रारंभ से वनोपज का संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन सुगम होगा। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का वनोपज अब वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बनाएगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में 67 प्रकार की वनोपज का संग्रहण किया जाता है, जिससे 13 लाख 40 हजार वनवासियों को सीधा लाभ मिलेगा। श्री कश्यप ने कहा कि ‘मोदी की गारंटी’ के अनुरूप ‘चरण पादुका योजना’ को पुनः प्रारंभ किया गया है।

महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी कैलाशनंद गिरी जी महाराज ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयुर्वेदिक औषधियों की महत्ता पर प्रकाश डाला।

मुख्यमंत्री श्री साय ने लोकार्पण से पूर्व प्रसंस्करण इकाई परिसर में आंवला का पौधा रोपित किया। इसके साथ ही वन मंत्री श्री कश्यप ने सीताफल का पौधा, सांसद श्री विजय बघेल ने बेल तथा महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 डॉ. स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज ने भी सीताफल का पौधा रोपित किया।

उल्लेखनीय है कि आयुर्वेदिक प्रसंस्करण इकाई छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा को विज्ञान और आधुनिक तकनीक से जोड़कर ‘फॉरेस्ट टू फार्मेसी मॉडल’ को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। 27.87 एकड़ क्षेत्र में 36.47 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित यह इकाई प्रतिवर्ष 50 करोड़ रुपए मूल्य के उत्पाद तैयार करेगी। यहां प्रदेश के वनों से प्राप्त औषधीय और लघु वनोपज – जैसे महुआ, साल बीज, कालमेघ, गिलोय, अश्वगंधा आदि का संगठित एवं वैज्ञानिक प्रसंस्करण कर चूर्ण, सिरप, तेल, टैबलेट एवं अवलेह जैसे गुणवत्तापूर्ण उत्पाद निर्मित होंगे। यह इकाई ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत प्रदेश के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने का प्रमुख केंद्र बनेगी।

परियोजना के अंतर्गत 2,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होगी, जिससे उन्हें स्वरोजगार मिलेगा। वहीं युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त होने से स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए द्वार खुलेंगे। इकाई में आधुनिक वेयरहाउस की 20,000 मीट्रिक टन की संग्रहण क्षमता विकसित की गई है, जिससे मौसमी वनोपजों के दीर्घकालीन संरक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण में सहायता मिलेगी। यह परियोजना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ एवं ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार करती है। यह न केवल वन उत्पादों के स्थानीय मूल्य संवर्धन का उदाहरण प्रस्तुत करती है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, आर्थिक विकास और सामाजिक समावेशिता को भी सशक्त बनाती है।

मुख्यमंत्री श्री साय की दिखी संवेदनशीलता: अपने हाथों से पहनाई चरणपादुका

इस अवसर पर मानवीय संवेदनशीलता और सम्मान का अनूठा दृश्य भी देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ग्राम बढ़भुम (जिला बालोद) की हितग्राही श्रीमती शकुंतला कुरैटी को स्नेहपूर्वक अपने हाथों से चरण पादुका पहनाई।मुख्यमंत्री श्री साय की पहल से प्रेरित होकर वन मंत्री सहित अन्य अतिथियों ने भी हितग्राहियों – श्रीमती वैजयंती कुरैटी, श्रीमती निर्मला उईके, श्रीमती ललिता उईके तथा श्रीमती अघनतीन उसेंडी को अपने हाथों से चरण पादुका पहनाई। 

इस अवसर पर सांसद श्री विजय बघेल, विधायकगण श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, श्री सम्पत लाल अग्रवाल, श्री ललित चन्द्राकर, श्री गजेन्द्र यादव एवं श्री रिकेश सेन, पूर्व मंत्री श्रीमती रमशीला साहू, पूर्व विधायक श्री दया राम साहू, महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 डॉ. स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज, स्थानीय आदिवासी स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामसेवक पैकरा, वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव, छत्तीसगढ़ राज्य वनोपज संघ के प्रबंध संचालक श्री अनिल कुमार साहू एवं संघ के कार्यकारी अध्यक्ष श्री एस. मणिकासगन उपस्थित थे।
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राज्यपाल डेका से मुख्यमंत्री साय ने की भेंट

राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज यहां राजभवन में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सौजन्य भेंट की। राज्यपाल श्री डेका को मुख्यमंत्री साय ने शाल भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रदेश हित से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
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विष्णु के सुशासन से बस्तर संभाग में बदल रही है स्वास्थ्य सुविधाओं की तस्वीर

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुशासन और स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से न केवल सामान्य क्षेत्रों में, बल्कि नक्सल प्रभावित जिलों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों की पहुंच में आ रही हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS), राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन अभियान और मलेरिया मुक्त अभियान जैसे कार्यक्रमों ने इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को नया आयाम दिया है।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हमारी सरकार की जन-केंद्रित सोच और समर्पित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों, मितानिनों तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मेहनत से बेहतर परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य पूरे छत्तीसगढ़ में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है और इस दिशा में ठोस प्रयास लगातार जारी हैं। बस्तर में घर-घर जाकर जांच, त्वरित उपचार और जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से मलेरिया के प्रसार को नियंत्रित किया गया है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य संस्थानों ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत उल्लेखनीय उपलब्धि

1 जनवरी 2024 से 16 जून 2025 तक बस्तर संभाग में कुल 130 स्वास्थ्य संस्थाओं को क्वालिटी सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ है। इनमें 1 जिला अस्पताल, 16 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 113 उप स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। इसके अलावा, 65 अन्य संस्थाओं का सर्टिफिकेशन कार्य प्रक्रियाधीन है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित जिलों—कांकेर (8), बीजापुर (2), सुकमा (3) और दंतेवाड़ा (1)—में 14 संस्थानों को गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है, जो क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार का प्रमाण है।

नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत बस्तर संभाग में 62,466 राशन कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि एक वर्ष में ही 36,231 आयुष्मान कार्ड पंजीकृत किए जा चुके हैं। इसके अंतर्गत अब तक 52.6 प्रतिशत आयुष्मान कार्ड का कवरेज इन पांच जिलों में हो चुका है, जिसमें 6,816 लोगों को लाभ मिला है और इन पर 8 करोड़ 22 लाख रुपये की राशि क्लेम की गई है।

चिकित्सक स्टाफ की नियुक्ति से मजबूत हुई व्यवस्था

पिछले डेढ़ वर्षों में बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने के लिए 33 मेडिकल स्पेशलिस्ट, 117 मेडिकल ऑफिसर और 1 डेंटल सर्जन की नियुक्ति की गई है। इसके साथ ही राज्य स्तर से 75 तथा जिला स्तर से 307 स्टाफ एवं प्रबंधकीय पदों पर भर्ती की गई है, जबकि 291 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। यह कदम क्षेत्र में चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच

नक्सल प्रभावित जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकता रहा है। कांकेर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ अब आम लोगों तक पहुंच रहा है। यह विष्णु देव साय के सुशासन का परिणाम है, जिसने बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है।

बस्तर संभाग में स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे ये सुधार न केवल स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर को ऊंचा उठा रहे हैं, बल्कि यह भी साबित कर रहे हैं कि सुशासन और समर्पित प्रयासों से सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव संभव है।
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मुख्यमंत्री साय से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने की सौजन्य मुलाकात

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में केंद्रीय राज्य मंत्री महिला एवं बाल विकास श्रीमती सावित्री ठाकुर ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीमती ठाकुर के साथ प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास के संकल्प के तहत विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को सशक्त बनाने पर ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित बीजापुर, सुकमा, कांकेर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिलों में नियद नेल्लानार योजना के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 159 आंगनबाड़ी केंद्रों का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। यह पहल उन दुर्गम क्षेत्रों में शासन की योजनाओं को सीधे अंतिम पंक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी अवगत कराया कि महतारी वंदन योजना अंतर्गत मार्च 2024 से जून 2025 की अवधि में 70 लाख से अधिक महिलाओं को ₹10,431.30 करोड़ की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है। इससे महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत आधार मिला है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने केंद्रीय राज्य मंत्री ठाकुर को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। मुलाकात के दौरान प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा उपस्थित थीं।
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुनी 'मन की बात' की 123वीं कड़ी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को सुना और इसे प्रेरणादायी बताया। 

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 'मन की बात' कार्यक्रम के माध्यम से देश के कोने-कोने में हो रहे नवाचारों, जन-भागीदारी और सकारात्मक प्रयासों की चर्चा करते हैं, जिससे राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित लोगों को पहचान और सम्मान मिलता है।
            मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ में जनभागीदारी के साथ स्वास्थ्य और प्रकृति की रक्षा के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने उपयोगी जानकारियां साझा की। प्रधानमंत्री ने स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में चल रहे नवाचारों के बारे में बताया है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जीवन में छोटे-छोटे प्रयास बड़े बदलाव का आधार बनते हैं। प्रधानमंत्री मोदी का यह दृष्टिकोण हम सभी को प्रेरित करता है और यदि हम नियमित रूप से छोटे लेकिन सार्थक कदम उठाएं, तो समाज और देश में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन संभव है। 

        मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री देश की छोटी-छोटी से लेकर बड़ी उपलब्धियों पर भी अपनी बात साझा करते हैं और उसकी सराहना करते हैं। श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने योग दिवस की भव्यता, पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी, महिला सशक्तिकरण, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की उपलब्धि, 1975 के आपातकाल और भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की वियतनाम यात्रा और भारत के ट्रेकोमा मुक्त होने जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत हम सभी का संकल्प है और राष्ट्र को आगे ले जाने के लिए छत्तीसगढ़ हर मोर्चे पर दृढ़ संकल्प के साथ खड़ा है।

  इस अवसर पर निरंजन पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशनंद गिरी जी महाराज,  केंद्रीय राज्य मंत्री महिला एवं बाल विकास सावित्री ठाकुर, कैबिनेट मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक राजेश मूणत, विधायक  अनुज शर्मा, विधायक राजेश अग्रवाल, विधायक संपत अग्रवाल, विधायक प्रबोध मिंज, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, सीजीएमएससी के चेयरमैन श्री  दीपक म्हस्के, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैंकरा, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष  शालिनी राजपूत सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से निरंजन पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी कैलाशनंद गिरी जी महाराज ने की सौजन्य भेंट

 मुख्यमंत्री  साय ने निरंजन पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी कैलाशनंद गिरि जी महाराज के साथ विभिन्न आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, केंद्रीय राज्य मंत्री महिला एवं बाल विकास श्रीमती सावित्री ठाकुर, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामसेवक पैंकरा, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित अन्य प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर शारदाधाम पर्यटन स्थलों की सूची में हुआ शामिल

छत्तीसगढ़ और झारखण्ड की अंतर्राज्यीय सीमा पर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक व प्राकृतिक पर्यटन स्थल शारदाधाम को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर छत्तीसगढ़ टुरीज्म बोर्ड ने राज्य के चिन्हकित पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल कर लिया है। पर्यटन बोर्ड ने इसके लिए परिपत्र जारी कर दिया है। बोर्ड के इस निर्णय से इस पर्यटन स्थल को एक नई पहचान मिल सकेगी।  बोर्ड इसके प्रचार-प्रसार के साथ ही पर्यटको के लिए मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए बजट उपलब्ध करा सकेगा। 
श्रद्धा और ज्ञान का संगम है शारदाधाम
 शारदाधाम में विद्यादायनी माँ सरस्वती की श्रद्वा  और ज्ञान अर्जन का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां छत्तीसगढ़ और झारखंड राज्य के जरूरतमंद बच्चों के रहने और पढ़ने के लिए कोचिंग की विशेष व्यवस्था की गई है। शारदाधाम समिति के अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने बताया कि इस विशेष कोचिंग संस्था में बच्चों के रहने,खाने के साथ उनकी कोचिंग की निशुल्क व्यवस्था की गई है। बच्चों के रहने और कोचिंग का जो भी खर्चा होता है,उसका व्यय समिति श्रद्वालुओं के सहयोग से पूरा करती है।
 
प्रकृतिक सौंदर्य से भरपूर है शारदाधाम प्रसिद्व धार्मिक पर्यटन स्थल शारदाधाम,जिला मुख्यालय जशपुर से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर,दुलदुला ब्लाक में स्थित है। माता सरस्वती का यह प्रसिद्व मंदिर चारो ओर घने जंगल से घिरा हुआ है। नजदीक ही गिरमा नदी की कलकल करती मधुर ध्वनि यहां दर्शन के लिए आने वाले श्रद्वालुओं का मन मोह लेते हैं। संचालन समिति के अध्यक्ष ने बताया कि विद्यादायनी मां सरस्वती का यह भव्य मंदिर पूरी तरह से श्रमदान से तैयार किया गया है। दोनों राज्यों के श्रद्वालुओं ने पसीना बहा कर मां के इस मंदिर का निर्माण किया है। मंदिर के भवन का डिजाइन झारखंड के प्रसिद्व लचलागढ़ हनुमान मंदिर के तर्ज पर तैयार किया गया है।
पर्यटन हब के रूप में विकसित हो रहा है जशपुर
उल्लेखनीय है कि वनाँचल क्षेत्र जशपुर में पर्यटन उद्योग विकसित करने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तेजी से काम कर रहे हैँ। कुनकुरी ब्लाक में स्थित मयाली नेचर कैंप के विकास के लिए दस करोड़ रूपये भारत दर्शन योजना के अंतर्गत स्वीकृत किए गए हैँ। यहीं स्थित मधेश्वर महादेव को हाल ही में गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड ने विश्व का सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में मान्यता दी है। इसके साथ ही सीएम विष्णुदेव साय ने जिले को पर्यटन नक्शे से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए फरसाबहार ब्लाक में स्थित कोतेबीराधाम में लक्ष्मण झूला के तर्ज पर पुल निर्माण की घोषणा की है। इसके साथ ही जिले में देशदेखा,रानीदाह जैसे पर्यटन स्थलों को विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय का लक्ष्य जिले में ग्रीन उद्योग विकसित कर जिलेवासियों को रोजगार उपलब्ध कराना है।
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मुख्यमंत्री ग्राम दोकड़ा में भगवान जगन्नाथ मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल हुए

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय बुधवार को कांसाबेल विकास खंड के ग्राम दोकड़ा के प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर के जीर्णाेद्धार पश्चात प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दोकड़ा में 24 लाख 74 हजार की लागत से बनने वाले महतारी सदन का भूमि पूजन किया। मुख्यमंत्री ने दोकड़ा के श्री जगन्नाथ मंदिर समिति के सदस्यों को धन्यवाद देते हुए उनके कार्यों की सराहना की। 


उल्लेखनीय है कि दोकड़ा में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 1942 से निकाली जा रही है। रथ यात्रा की शुरुआत दोकड़ा गांव के पंडित स्व सुदर्शन सतपथी और उनकी धर्मपत्नी श्री सुशीला सतपथी के द्वारा शुरू किया गया था। मंदिर का निर्माण 1968 में किया गया था। मंदिर के जर्जर होने के कारण मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने मंदिर का जीर्णाेद्धार करने का संकल्प लिया था। उन्होंने इस कार्य में सहयोग के लिए ग्रामवासियों का धन्यवाद भी दिया है।
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अयोध्या में हनुमान गढ़ी में आराध्य के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

 रामनगरी अयोध्या में शनिवार को हनुमान जयंती की धूम है। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु हनुमान गढ़ी मंदिर में दर्शन-पूजन को पहुंचे। श्रद्धालु अपने आराध्य की एक झलक पाने को आतुर दिखे। पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गुंजायमान रहा।   

वैसे तो अयोध्या में उत्तर भारतीय परंपरा के अनुसार हनुमान जयंती छोटी दीपावली को मनाई जाती है। दक्षिण में चैत्र की पूर्णिमा को हनुमान जयंती का आयोजन होता है। शनिवार को हनुमान जयंती के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। हनुमंत लला के दर्शन करके पूजन किया।

 

 

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कुदरगढ़ महोत्सव आस्था, भक्ति और परंपरा का अनूठा संगम: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 कुदरगढ़ मंदिर धाम ’प्रसाद योजना‘ में शामिल: विकास के लिए केन्द्र सरकार से मिलेगी मदद 


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय शामिल हुए कुदरगढ़ महोत्सव के समापन समारोह में

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि कुदरगढ़ महोत्सव आस्था, भक्ति और परंपरा का अनूठा संगम है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार के प्रस्ताव पर इस अंचल के आस्था के प्रमुख केन्द्र कुदरगढ़ मंदिर धाम को केन्द्र सरकार की ’प्रसाद योजना‘ में शामिल किया है। इससे यहां के विकास के लिए केन्द्र सरकार से मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ धाम में चैत्र नवरात्र के अवसर पर आयोजित कुदरगढ़ महोत्सव का समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

कुदरगढ़ धाम में शुरू होगा चिकित्सालय

मुख्यमंत्री श्री साय ने कुदरगढ़ धाम में बनने वाले रोपवे का भूमिपूजन किया। यह रोपवे दो वर्ष में बनकर तैयार होगा। इस अवसर पर उन्होंने कुदरगढ़ धाम के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने प्रशासनिक भवन एवं सर्व सुविधायुक्त सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 50-50 लाख तथा गढ़वातियां माता मंदिर में सीढ़ी निर्माण और पेयजल व्यवस्था हेतु 50 लाख सहित कुल 1 करोड़ 50 लाख रुपये के निर्माण कार्यों की घोषणा की। इस दौरान रोपवे निर्माण के लिए अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने धाम में चिकित्सालय निर्माण की भी घोषणा की, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सके।
 
105 करोड़ रूपए से अधिक लागत के कार्यो का भूमिपूजन-शिलान्यास

मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए माता कुदरगढ़ी से प्रदेश की सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की और श्रद्धालुओं को चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं दी। उन्होंने इस अवसर पर 105 करोड़ रूपए से अधिक लागत के 43 विकास कार्यों का भूमि पूजन एवं लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने भटगांव विधानसभा क्षेत्र के लिए सुशासन रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो राज्य सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करेगा।

भोरमदेव मंदिर हेतु स्वदेश दर्शन योजना में 148 करोड़ रूपए मंजूर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सरकार के प्रस्ताव पर छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर के विकास के लिए भारत सरकार ने स्वदेश दर्शन योजना के तहत 148 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी है। प्रदेश की पांच शक्तिपीठों सूरजपुर के कुदरगढ़, चंद्रपुर की चंद्रहासिनी, रतनपुर की मॉ महामाया, डोंगरगढ़ की मॉ बम्लेश्वरी और दंतेवाड़ा की मॉ दंतेश्वरी शक्तिपीठ के विकास के लिए चार धाम की तर्ज पर योजना बनाई गई है। राज्य सरकार द्वारा तीर्थ दर्शन योजना पुनः प्रारंभ की गई है। इस योजना में 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के साथ-साथ विधवा, परित्यक्ता और दिव्यांगजनों को तीर्थ यात्रा का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि पात्र नागरिकों से इस योजना का भरपूर लाभ उठाने की अपील की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के तहत 22 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में कुंभ के दौरान छत्तीसगढ़ का मंडप बनाया गया था, जहां छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को ठहरने और भोजन के निःशुल्क व्यवस्था की गई थी। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास योजनाओं के साथ-साथ समावेशी विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। अंदरूनी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। लोगों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। बस्तर क्षेत्र में नियद नेल्लानार योजना के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ ग्रामीणों को केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। यहां बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया। 

इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े और सांसद श्री चिंतामणि महाराज ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश की समृद्धि, शांति और उन्नति की कामना की। साथ ही रोपवे निर्माण के लिए बधाई देते हुए इसे ऐतिहासिक पहल बताया।  

समापन समारोह में दिखी लोकसंस्कृति की झलक

समापन समारोह में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान भक्ति संगीत ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में माता कुदरगढ़ को समर्पित भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर विभिन्न विभागों की योजनाओं पर लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया और हितग्राहियों को हितग्राहीमूलक सामग्री का वितरण किया। 

कार्यक्रम में विधायक श्री भूलन सिंह मरावी, श्रीमती शकुंतला पोर्ते, श्रीमती रजनी शंकर त्रिपाठी, वन विकास निगम एवं कुदरगढ़ धाम ट्रस्ट अध्यक्ष श्री रामसेवक पैकरा  सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित थे।
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जशपुर के मधेश्वर पहाड़ की ख्याति देश-विदेश तक पहुंची : पं.प्रदीप मिश्रा

 कुनकुरी मयाली में सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़ के पास 21 से 27 मार्च तक आयोजित महाशिवपुराण का भव्य समापन किया गया। प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने शिव भक्तों को 7 दिन तक कथा का श्रवण कराया और सभी को भव्य आयोजन के लिए अपनी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी उन्होंने कहा की महाशिवपुराण कथा का श्रवण करने के लिए  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी आए थे। साथ ही पूरे भारत वर्ष के  लगभग 272 देशों के लोगों ने विभिन्न सोशल मीडिया, चौनल के माध्यम से कथा को सुना जशपुर में सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़ की ख्याति भारत देश के साथ देश विदेश तक पहुंच चुकी है।

और इसका पूरा श्रेय जशपुर वासियों को जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री कौशल्या साय, राजपरिवार, कलेक्टर रोहित व्यास एस एस पी शशि मोहन सिंह जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार सहित जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारी कर्मचारीयों पत्रकारों, भोजन , पेयजल की व्यस्था नगर पालिका अधिकारी, कर्मचारियों को और आयोजन समिति के साथ प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी लोगों, जशपुर के शिव भक्तों का हृदय से धन्यवाद दिया की आपके सहयोग से शिवमहापुराण कथा सफल हो सका। 

 

प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा के सातवें दिन सुबह 8 बजे 11 बजे तक कथा का श्रवण कराया उन्होंने कहा कि भोला ... कहां... मिलेगा...  भोले ...एक.. एक.. कण.. कण .. मिलेंगे भक्तों के हृदय में भोले मिल जाएंगे बाबा ने मनुष्यों को अपने कर्म से महान बनने का संदेश दिया इसके लिए भूखे को खाना खिलाने प्यासे को पानी पिलाया पीपल के नीचे चींटियों को आटा खिलाओ, इस भंडारे के समान ही पुण्य मिलता है। आप भंडारे नहीं कर सकते कोई बात नहीं जितनी शक्ति उतनी भक्ती पंडित मिश्रा ने कहा कि अपने छत पर पक्षियों के लिए चारा पानी की व्यवस्था करें मटका में पानी भरकर रखें गौमाता को घास रोटी पानी पिलाएं यह सब कार्य भंडारे से कम नहीं है। जहां जहां अच्छा कार्य वहां भोले जरूर मिलेंगे। शिव भक्तों को भोले बाबा को एक लोटा जल अवश्य चढ़ाने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि जो तुम्हें जल चढ़ाने को मना करते तुम उन्हें छोड़ दो जशपुर के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़ का यह शिव धाम विधी विधान से कलश यात्रा के साथ सात दिन शिव महापुराण कथा से हर हर महादेव से गुंजने लगा है।

 

मुख्यमंत्री की पत्नी कौशल्या साय ने महाशिवपुराण की कथा के समापन के अवसर पर पंडित प्रदीप मिश्रा और उनके साथ आए सभी लोगों का धन्यवाद दिया। जिला प्रशासन पुलिस प्रशासन के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वास्थ्य विभाग, पेयजल विभाग, स्वच्छ भारत मिशन, नगरीय निकाय के साथ सभी का सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है।

 

 

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शिव महापुराण में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने किए पूर्ण इंतेज़ाम

 जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखण्ड के मयाली में 21 से 27 मार्च तक आयोजित होने वाली शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। जहां श्रद्धालुओं एवं जनमानस की सुरक्षा हेतु सभी इंतेज़ाम किये गए हैं। जिसके तहत जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा लोगों की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम नम्बर जारी किए गए हैं, साथ ही 3 कंट्रोल रूम स्थापित किये गए हैं। 

जिसमें कंट्रोल रूम कुनकुरी 24 घंटे सेवा में उपलब्ध रहेगा। जिसका दूरभाष नम्बर 07764296765 है। वहीं कंट्रोल रूम पुलिस लाइन जशपुरनगर प्रातः 6 बजे से शाम 6 बजे तक सेवा में रहेंगे। जिसका दूरभाष नम्बर 9479193699 है। एक कंट्रोल रूम मयाली में शिव महापुराण कथा पंडाल स्थल के निकट बनाया गया है। जहां प्रातः 6 बजे से सांय 6 बजे तक सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। तीनों कंट्रोल रूम कार्यक्रम समाप्ति तक कार्यरत रहेंगे, इसके लिए अधिकारियों कर्मचारियों की ड्यूटी भी कंट्रोल रूम में लगाई गई है।

श्रद्धालुओं के लिए अस्थाई अस्पताल की है व्यवस्था : 

कार्यक्रम स्थल में श्रद्धालुओं के लिए सभी ज़रूरी इंतज़ाम किये गए हैं। जिसके तहत कार्यक्रम स्थल के निकट अस्थाई अस्पताल का निर्माण किया गया है। जहां पर स्वास्थ्य कर्मिंयों की ड्यूटी लगाई गई है। किसी भी आपात स्थिति के लिए अस्पताल में सभी व्यवस्थाएं की गईं हैं। इसके अतिरिक्त 05 खोया पाया केंद्र, 10 सार्वजनिक पार्किंग स्थल, 03 व्हीआईपी पार्किंग स्थल बनाये गए हैं। रायगढ़, रांची, जशपुर की ओर से बसों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हेलीपेड के निकट बसों का स्टॉप एवं 05 सार्वजनिक पार्किंग स्थल बनाया गया है। वहीं अम्बिकापुर, बगीचा की ओर से बसों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आयोजन स्थल के निकट बस स्टॉप एवं 05 सार्वजनिक पार्किंग स्थल बनाया गया है। कार्यक्रम स्थल के पास 140 यूनिट अस्थाई शौंचालयों का निर्माण किया गया है। किसी भी आपात स्थिति से बचाव के लिए सुरक्षा एवं बचाव प्रणाली के साथ पुलिस बलों की ड्यूटी भी लगाई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट भी स्थापित किया गया है।

कार पार्किंग स्थल एवं बस स्टॉप से लोगों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर छोटे ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उनका किराया भी प्रति व्यक्ति 10 रुपये नियत किया गया है। सभी ऑटो चालकों को अधिक किराया ना वसूल करने हेतु निर्देश दिए गए हैं। परिवहन की उचित व्यवस्था हेतु परिवहन विभाग द्वारा केंद्र भी स्थापित किया गया है। सभी स्थानों पर व्यवस्था निर्माण हेतु पुलिस के जवानों की भी ड्यूटी लगाई गई है।

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प्रयागराज के बाद खाटूश्यामजी में उमड़ा जनसैलाब

 झुंझुनूं विश्व पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ चुके प्रयागराज महाकुंभ के बाद अब राजस्थान के खाटूश्यामजी में श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ रहा है। श्रद्धा और आस्था का प्रतीक विश्वप्रसिद्ध सूरजगढ़ निशान आज खाटूश्यामजी के लिए रवाना हो गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक निशान यात्रा में शामिल हुए। खाटूश्यामजी स्थित बाबा श्याम के शिखर पर हर साल फाल्गुन माह की द्वादशी के दिन सूरजगढ़ निशान चढ़ाया जाता है, जो सैकड़ों सालों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।

श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्ति भाव के माहौल के बीच झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ निशान को विधिवत पूजा-अर्चना कर रवाना किया गया। राजस्थान की समृद्ध परंपरा को संजोए ऊंट गाड़ियों, भजन-कीर्तन और जयकारों के साथ श्रद्धालु खाटूश्यामजी के लिए निकले। खास बात यह रही कि सैकड़ों महिलाएं सिर पर जलते अंगारों की सिगड़ी रखकर पदयात्रा में शामिल हुईं, जो उनकी गहरी आस्था और दृढ़ निष्ठा को दर्शाता है।

 

बता दें राजस्थान के सीकर जिले स्थित खाटूश्यामजी के वार्षिक लक्खी मेले का आगाज हो चुका है। देश के कोने-कोने से लाखों को तादाद में श्रद्धालु खाटूश्यामजी पहुंच रहे है। बात करें शेखावाटी अंचल की तो शेखावाटी के तीनों जिले सीकर, झुंझुनूं व चूरू बाबा श्याम के रंग में रंगे नजर आ रहे है। हर ओर बाबा श्याम के जयकारे गूंज रहे हैं। 

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छत्तीसगढ़ की जेलों में कैदियों का गंगाजल से सामूहिक स्नान, आध्यात्मिक शुद्धि की पहल

 छत्तीसगढ़ के रायपुर सेंट्रल जेल में कैदियों ने महाकुंभ से लाए गए गंगाजल से सामूहिक स्नान किया। इस विशेष अवसर पर राज्य की 5 सेंट्रल जेल, 20 जिला जेल और 8 सब-जेल के कैदियों को गंगाजल से स्नान करने का अवसर मिला, जिससे उन्हें आध्यात्मिक शुद्धि का अनुभव हुआ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल पर कबीरधाम जिले की जिला जेल में भी यह आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर 237 कैदियों ने गंगाजल से स्नान किया, जिससे आत्मशुद्धि और नैतिक उत्थान को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।


गृहमंत्री विजय शर्मा ने महाकुंभ से लाया गंगाजल
छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा हाल ही में महाकुंभ से गंगाजल लेकर आए थे, जिसे कैदियों के लिए उपलब्ध कराया गया। कैदियों ने इस स्नान को मानसिक और आत्मिक शांति प्राप्त करने का माध्यम बताया। जेल प्रशासन ने इस आयोजन के लिए विशेष व्यवस्था की और इसे धार्मिक और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने का सकारात्मक कदम बताया।

कैदियों में सुधार लाने की पहल : विजय शर्मा
कबीरधाम में जेल प्रशासन द्वारा विशेष इंतजाम किए गए, जिससे कैदियों में उत्साह देखा गया। इस आयोजन का उद्देश्य केवल शारीरिक शुद्धता ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान भी था। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम चलाएगी, ताकि सुधार और पुनर्वास के माध्यम से कैदियों को समाज में पुनः सकारात्मक स्थान मिले। इस पहल से कैदियों को सुधार का अवसर मिलने के साथ-साथ समाज में पुनः समायोजन की दिशा में भी सहायता मिलेगी।

सुधार और पुनर्वास की दिशा में राज्य सरकार की अनूठी पहल

 
 


डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि कैदियों के लिए गंगाजल से स्नान कराने का यह कार्यक्रम महाकुंभ के माहौल में एक महत्वपूर्ण कदम था। इससे राज्य सरकार की सुधारात्मक और पुनर्वास नीति की प्रतिबद्धता जाहिर होती है। यह पहल न केवल अपराधियों को सुधारने का प्रयास करती है, बल्कि उन्हें आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्रदान करने का भी प्रयास करती है।

 



राज्य की जेलों में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने की कोशिश
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गंगाजल से कैदियों को स्नान कराने की इस पहल को अब और विस्तार दिया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल पर राज्य की 5 सेंट्रल जेल, 20 जिला जेल और 8 सब-जेल में कैदियों को गंगाजल से स्नान कराया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य केवल शारीरिक स्वच्छता नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान भी है। राज्य सरकार की यह पहल कैदियों के आत्मशुद्धि के साथ-साथ समाज में उनके पुनः सम्मानजनक जीवन की दिशा में प्रेरित करने का प्रयास कर रही है।

 



यह पहल राज्य सरकार की सुधार और पुनर्वास की नीति को दर्शाती है, जो केवल सजा देने तक सीमित नहीं, बल्कि कैदियों के जीवन में सुधार और समाज में उनके पुनः समायोजन को प्राथमिकता देती है। इस कदम से राज्य की जेलों में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है और कैदी अपने जीवन को नए दृष्टिकोण से देख सकेंगे।

 

 

 
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राजिम कुंभ कल्प के मंच पर उत्तर रामायण पर लाइट एंड साउंड शो कार्यक्रम

 राजिम कुंभ कल्प मेला के मुख्य मंच पर 20 फरवरी गुरुवार को उत्तर रामायण पर आधारित लाइट एंड साउंड शो (मनोरमा इंप्रेशन, नितिन दत्तात्रेय बनसोड) का कार्यक्रम मुख्य आकर्षण रहेगा। इसके अलावा मंच पर महादेव हिरवानी की टीम द्वारा लोककला मंच की शानदार प्रस्तुति होगी। लेवेंद्र चंद्राकर और नारायण पचपेड़िया द्वारा लोक कलामंच से छत्तीसगढ़ की गौरव गाथा बताएंगे।

12 बजे से शांम 5 बजे तक सांस्कृतिक मंच पर रामेसर गंधर्व की नाचा पार्टी, शंभुराम टोंनडरे की टीम सतनाम भजन, विश्वास गीत गजल, अरुण निर्मलकर की मंडली द्वारा जस झांकी, धाम सिंग की टीम लोक कला मंच की प्रस्तुति देंगे। कौशल्या बाई साहू सुवा नृत्य, वेदकुमारी द्वारा पंडवानी, प्राची निगम कत्थक नृत्य, महेश पाल भजन संध्या, दिलीप नवरत्न की टीम लोककला मंच की झमाझम प्रस्तुति से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।

 

 

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राजिम कुंभ कल्प में लगा सेल्फी जोनः पुराने जमाने की यादे हो रही ताजा

 राजिम कुंभ कल्प में कुलेश्वर महादेव मंदिर के पास संत समागम के सामने छत्तीसगढ़ की संस्कृति को सहेजती तथा पुनर्जीवित कर उसके संरक्षण के लिए संकल्पित सेल्फी जोन आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जिसमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग वर्ग के लोग भरपूर मनोरंजन करते नजर आ रहे है। साथ ही मेले में बिताए अपने हर पर को यादगार बनाने के लिए वहां के हर एक सामग्री के साथ सेल्फी लेकर उसे अपने कैमरे में कैद कर रहें है। सेल्फी जोन ग्रामीण जीवन शैली पर आधारित बनाया है जहां बैलगाड़ी की तरफ सबसे ज्यादा भीड़ है। लोग किसान का वेश पहनकर सेल्फी ले रहे हैं।

इस सेल्फी जोन में सभी पुराने गहने और वेशभूषा संग्रहित है। स्टाल में पर्रा, टोकरी, पारंपरिक गहने बिछिया, करधन, सुता ऐठी, सुर्रा, किला साडी, खुमरी, राउत वेशभूषा आदि छत्तीसगढ़ी आभूषण लोगो के बीच कौतुहल का विषय बना हुआ है।

 
 

सेल्फ़ी जोन की संचालिका गिनिज बुक आफ वर्ड रिकार्ड (बायो आर्ट) एवं तीन बार सीएम अवार्ड से सम्मानित रानी निषाद ने बताया कि आधुनिक पीढ़ी को अपनी संस्कृति की पहचान कराने के लिए यह सेल्फी जोन बनाया गया है। जोन में युवक, युवतियों और महिलाओं के लिए अलग अलग वस्त्र और आभूषण रखे गए है। युवकों के लिए भी धोती, जैकेट, कलगी , सुता , खुमरी , राउत डंडा संग्रहित किया गया है। वहीं युवतियों और महिलाओं के लिए भी विभिन्न प्रकार के पारंपरिक गहने और वस्त्रों का संकलन रखा गया है।

 
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